मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय: वंशागति का आणविक आधार (Molecular Basis of Inheritance) - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स
यह नोट्स मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board) कक्षा 12 जीव विज्ञान के छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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1. आनुवंशिक पदार्थ (Genetic Material)
- DNA (डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल): अधिकांश जीवों में प्रमुख आनुवंशिक पदार्थ।
- RNA (राइबो न्यूक्लिक अम्ल): कुछ विषाणुओं (Viruses जैसे TMV, HIV) में आनुवंशिक पदार्थ का कार्य करता है।
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2. DNA की संरचना (Structure of DNA)
- वाटसन और क्रिक (Watson and Crick) मॉडल के अनुसार, DNA एक द्वि-कुंडलित (Double Helix) संरचना है।
- यह दो पॉलीक्लियोटाइड श्रृंखलाओं (Polynucleotide chains) से बना होता है जो एक दूसरे के विपरीत दिशा में (Antiparallel - 5'->3' और 3'->5') कुंडलित होती हैं।
- नाइट्रोजन क्षारक (Nitrogenous Bases):
- प्यूरीन (Purines): एडेनिन (Adenine - A) और ग्वानिन (Guanine - G)
- पाइरिमिडिन (Pyrimidines): साइटोसिन (Cytosine - C) और थाइमिन (Thymine - T) [RNA में थाइमिन के स्थान पर यूरेसिल (Uracil - U) होता है]।
- चारगाफ का नियम (Chargaff's Rule): किसी भी द्विरज्जुकी DNA में, एडेनिन की मात्रा हमेशा थाइमिन के बराबर और ग्वानिन की मात्रा साइटोसिन के बराबर होती है।
[A] = [T] और [G] = [C]
(A + G) / (T + C) = 1
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3. सेंट्रल डोग्मा (Central Dogma)
आनुवंशिक सूचनाओं का प्रवाह एक ही दिशा में होता है:
DNA --(प्रतलिपीकरण / Replication)--> DNA --(अनुलेखन / Transcription)--> mRNA --(अनुवादन / Translation)--> प्रोटीन (Protein)
(नोट: कुछ विषाणुओं में RNA से वापस DNA बनता है, जिसे रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन कहते हैं।)
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4. DNA प्रतिकृतियन (DNA Replication)
- यह एक अर्ध-संरक्षी (Semi-conservative) प्रक्रिया है (यानी प्रत्येक नए DNA में एक रज्जु पुराना और एक नया होता है)।
- मुख्य एंजाइम:
- DNA पॉलीमरेज (DNA Polymerase): नए रज्जु का निर्माण करता है (केवल 5' से 3' दिशा में)।
- हेलिकेज (Helicase): DNA कुंडलन को खोलता है।
- लाइगेज (Ligase): DNA खंडों को जोड़ता है (ओकाजाकी खंडों को)।
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5. अनुलेखन (Transcription)
- DNA के एक रज्जु से आनुवंशिक सूचना का RNA में प्रतिलिपि बन्ना अनुलेखन कहलाता है।
- इसमें मुख्य एंजाइम RNA पॉलीमरेज (RNA Polymerase) होता है।
- अनुलेखन इकाई के तीन भाग होते हैं:
1. प्रमोटर (Promoter): जहाँ एंजाइम जुड़ता है।
2. संरचनात्मक जीन (Structural gene): जिसका अनुलेखन होना है। समापक (Terminator): जहाँ प्रक्रिया समाप्त होती है।
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6. आनुवंशिक कूट (Genetic Code)
- यह mRNA पर नाइट्रोजन क्षारकों के तीनिक (Triplet) के रूप में होता है जिसे कोडॉन (Codon) कहते हैं।
- विशेषताएं:
- कुल 64 कोडॉन होते हैं (61 अमीनो अम्ल को और 3 स्टॉप कोडॉन को कोड करते हैं)।
- प्रारंभक कोडॉन (Initiator Codon):
AUG (यह मेथियोनीन को कोड करता है)।
- समापक कोडॉन (Stop Codons):
UAA, UAG, UGA (ये किसी भी अमीनो अम्ल को कोड नहीं करते)।
- कोडॉन सार्वभौमिक (Universal) और अपहरित (Degenerate) होते हैं।
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7. जीन अभिव्यक्ति का नियमन (Regulation of Gene Expression)
- लैक ऑपेरॉन (Lac Operon) मॉडल: जैकब और मोनोड (Jacob and Monod) द्वारा प्रतिपादित।
- यह ई. कोलाई (E. coli) में लैक्टोज चयापचय (Metabolism) को नियंत्रित करता है।
- घटक:
- नियामक जीन (i gene): रिप्रेशर प्रोटीन बनाता है।
- ऑपरेटर जीन (o gene): रिप्रेशर इससे जुड़ता है।
- संरचनात्मक जीन (z, y, a gene): एंजाइम बनाते हैं (जैसे बीटा-गैलेक्टोसिडेस)।
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8. मानव जीनोम परियोजना (Human Genome Project - HGP)
- यह एक मेगा प्रोजेक्ट था जो 1990 में शुरू हुआ और 2003 में पूरा हुआ।
- मुख्य विशेषताएं:
- मानव जीनोम में लगभग 3 x 10^9 क्षार युग्म (Base pairs) होते हैं।
- कुल अनुमानित जीन 30,000 हैं।
- गुणसूत्र 1 में सबसे अधिक जीन (2968) और Y गुणसूत्र में सबसे कम जीन होते हैं।
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9. DNA फिंगरप्रिंटिंग (DNA Fingerprinting)
- इसकी खोज एलके जैफ्री (Alec Jeffreys) ने की थी।
- यह VNTR (Variable Number of Tandem Repeats) नामक पुनरावृत्ति DNA अनुक्रमों पर आधारित है।
- चरण:
1. DNA का निष्कर्षण
2. रिस्ट्रिक्शन एंजाइम द्वारा पाचन
3. इलेक्ट्रोफोरेसिस द्वारा पृथक्करण
4. साउदर्न ब्लॉटिंग
5. ऑटोरेडियोग्राफी द्वारा पहचान।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 वंशागति का आणविक आधार
डी.एन.ए. (DNA) - आनुवंशिक पदार्थ
न्यूक्लियोटाइड की संरचना
नाइट्रोजनस क्षारक (प्यूरीन और पाइरीमिडीन)
पेन्टोज़ शर्करा (डीऑक्सीराइबोज़)
फॉस्फेट समूह
वॉटसन और क्रिक का द्विकुंडलीय मॉडल
प्रतिसमांतर रज्जु (5' से 3' और 3' से 5')
क्षार युग्मन (A-T, G-C)
पैकेजिंग (यूकेरियोट्स और प्रोकेरियोट्स)
हिस्टोन अष्टक
न्यूक्लियोसोम
क्रोमैटिन और यूक्रोमैटिन
आनुवंशिक पदार्थ की खोज
ग्रिफ़िथ का रूपांतरण प्रयोग (Streptococcus pneumoniae)
एवरी, मैक्लिओड और मैकार्टी प्रयोग (रासायनिक प्रकृति की पहचान)
हर्षे और चेस का प्रयोग (रेडियोधर्मी आइसोटोप 32P और 35S)
डी.एन.ए. प्रतिकृति (DNA Replication)
अर्ध-संरक्षी मॉडल (मेसेल्सन और स्टाल का प्रयोग)
मुख्य एंजाइम
डी.एन.ए. पॉलीमरेज़
हेलीकेज़
लाइगेज़
प्रक्रिया
प्रतिकृति फोर्क
निरंतर और खंडित रज्जु (ओकाजाकी खंड)
अनुलेखन (Transcription)
अनुलेखन इकाई
प्रमोटर (Promoter)
संरचनात्मक जीन
टर्मिनेटर (Terminator)
प्रक्रिया
प्रारंभन, दीर्घीकरण, समापन
आर.एन.ए. के प्रकार (mRNA, tRNA, rRNA)
अनुलेखन के पश्चात संशोधन (RNA Splicing, Capping, Tailing)
आनुवंशिक कूट (Genetic Code)
विशेषताएँ
त्रिक कूट (Triplet)
सार्वभौमिक (Universal)
अपाच्य/असंदिग्ध (Degenerate)
कॉमा विहीन (Commaless)
प्रारम्भक कूट (AUG)
समापन कूट (UAA, UAG, UGA)
अनुवाद (Translation - प्रोटीन संश्लेषण)
राइबोसोम की भूमिका
tRNA का एमीनोएसिलेशन
पेप्टाइड बंध का निर्माण
जीन अभिव्यक्ति का नियमन (Regulation of Gene Expression)
ऑपेरॉन मॉडल (Lac Operon)
नियामक जीन (i जीन)
प्रमोटर और ऑपरेटर जीन
संरचनात्मक जीन (z, y, a)
लैक्टोज की भूमिका (प्रेरक)
मानव जीनोम परियोजना (Human Genome Project - HGP)
मुख्य विशेषताएँ और लक्ष्य
कार्यप्रणाली (ESTs, अनुक्रम संटीकरण)
अनुप्रयोग और भविष्य की चुनौतियाँ
डी.एन.ए. फिंगरप्रिंटिंग (DNA Fingerprinting)
सिद्धांत (VNTR - परिवर्तनीय संख्या टैंडम रिपीट)
चरण
डी.एन.ए. का पृथक्करण
पाचन और इलेक्ट्रोफोरेसिस
सदर्न ब्लॉटिंग
ऑटोरेडियोग्राफ़ी
उपयोग (फोरेंसिक, पितृत्व परीक्षण)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण संख्यात्मक हल:
**दिया गया डेटा:**
* आधार युग्मों (bp) की कुल संख्या = 10,000
* न्यूक्लियोटाइड्स की कुल संख्या = $10,000 \times 2 = 20,000$
* एडेनिन (A) का प्रतिशत = 20%
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#### भाग (i): व्यक्तिगत नाइट्रोजनयुक्त क्षारों की गणना
1. चार्गाफ के नियमों के अनुसार, एडेनिन (A) की मात्रा थाइमिन (T) के बराबर होती है, और ग्वानिन (G) की मात्रा साइटोसिन (C) के बराबर होती है।
$$\%A = \%T = 20\%$$
2. चारों क्षारों का कुल योग 100% होता है:
$$\%A + \%T + \%G + \%C = 100\%$$
$$20\% + 20\% + \%G + \%C = 100\%$$
$$40\% + \%G + \%C = 100\%$$
$$\%G + \%C = 100\% - 40\% = 60\%$$
3. चूंकि $\%G = \%C$ है, इसलिए हमें प्राप्त होता है:
$$\%G = \frac{60\%}{2} = 30\%$$
$$\%C = 30\%$$
4. अब, कुल 20,000 न्यूक्लियोटाइड्स में से प्रत्येक क्षार की वास्तविक संख्या की गणना करना:
* **एडेनिन (A) की संख्या:**
$$20,000 \text{ का } 20\% = \frac{20}{100} \times 20,000 = 4,000$$
* **थाइमिन (T) की संख्या:**
$$20,000 \text{ का } 20\% = \frac{20}{100} \times 20,000 = 4,000$$
* **ग्वानिन (G) की संख्या:**
$$20,000 \text{ का } 30\% = \frac{30}{100} \times 20,000 = 6,000$$
* **साइटोसिन (C) की संख्या:**
$$20,000 \text{ का } 30\% = \frac{30}{100} \times 20,000 = 6,000$$
*सत्यापन:* कुल क्षार = $4,000 + 4,000 + 6,000 + 6,000 = 20,000$ (सही है)।
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#### भाग (ii): DNA खंड की कुल लंबाई की गणना
1. आधार युग्मों की कुल संख्या = 10,000
2. दो लगातार आधार युग्मों के बीच की दूरी = $0.34 \text{ nm} = 0.34 \times 10^{-9} \text{ m}$
3. DNA की कुल लंबाई = $\text{आधार युग्मों की कुल संख्या} \times \text{दो आसन्न आधार युग्मों के बीच की दूरी}$
$$\text{कुल लंबाई} = 10,000 \times 0.34 \text{ nm}$$
$$\text{कुल लंबाई} = 3,400 \text{ nm}$$ (या $3.4 \times 10^{-6} \text{ मीटर}$)
उत्तर (Answer): ### DNA प्रतिकृतियन का परिचय\nDNA प्रतिकृतियन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक कोशिका अपने DNA की एक समान प्रतिकृति बनाती है। यह एक अर्ध-संरक्षी (Semiconservative) प्रक्रिया है, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक संतति अणु में एक पैतृक स्ट्रैंड और एक नया संश्लेषित स्ट्रैंड होता है।
### शामिल प्रमुख एंजाइम
1. **DNA हेलिकेस:** यह एंजाइम पूरक क्षार युग्मों के बीच हाइड्रोजन बांड को तोड़कर डबल हेलिक्स को खोलता है, जिससे प्रतिकृतियन फोर्क बनता है।
2. **टोपोआइसोमरेज:** यह अनवाइंडिंग के कारण प्रतिकृतियन फोर्क के आगे उत्पन्न होने वाले मरोड़ तनाव या सुपरकोइलिंग को कम करता है।
3. **DNA प्राइमेस:** यह DNA टेम्पलेट स्ट्रैंड के पूरक एक छोटे RNA प्राइमर को संश्लेषित करता है, जो DNA पोलीमरेज को संश्लेषण शुरू करने के लिए आवश्यक मुक्त 3'-OH समूह प्रदान करता है।
4. **DNA पोलीमरेज III:** 5' से 3' दिशा में बढ़ती हुई DNA श्रृंखला में न्यूक्लियोटाइड जोड़ने के लिए जिम्मेदार मुख्य एंजाइम।
5. **DNA पोलीमरेज I:** यह RNA प्राइमर्स को हटाता है और उन्हें DNA न्यूक्लियोटाइड से बदल देता है।
6. **DNA लाइगेस:** यह फॉस्फोडिएस्टर बांड बनाकर शर्करा-फास्फेट बैकबोन में अंतराल को सील करता है, विशेष रूप से लैगिंग स्ट्रैंड पर ओकाज़ाकी टुकड़ों को जोड़ता है।
### स्ट्रैंड निर्माण की क्रियाविधि
* **दिशात्मकता:** DNA पोलीमरेज केवल 5' से 3' दिशा में DNA को संश्लेषित कर सकता है। चूंकि DNA के दोनों स्ट्रैंड एंटीपैरेलल हैं, इसलिए प्रत्येक टेम्पलेट स्ट्रैंड पर प्रतिकृतियन अलग तरह से आगे बढ़ता है।
* **अग्रणी स्ट्रैंड (Leading Strand):** 3' से 5' ध्रुवीयता वाले टेम्पलेट स्ट्रैंड पर, प्रतिकृतियन चलती हुई प्रतिकृतियन फोर्क की दिशा में निरंतर होता है। इस नए संश्लेषित स्ट्रैंड को अग्रणी स्ट्रैंड कहा जाता है और इसके लिए मूल पर केवल एक RNA प्राइमर की आवश्यकता होती है।
* **लैगिंग स्ट्रैंड (Lagging Strand):** 5' से 3' ध्रुवीयता वाले टेम्पलेट स्ट्रैंड पर, प्रतिकृतियन असंतत (Discontinuous) होता है क्योंकि इसे प्रतिकृतियन फोर्क से दूर जाना पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप DNA के छोटे खंड बनते हैं जिन्हें ओकाज़ाकी टुकड़े कहा जाता है। इस स्ट्रैंड को लैगिंग स्ट्रैंड कहा जाता है, और इसके लिए कई RNA प्राइमर्स की आवश्यकता होती है। अंततः, RNA प्राइमर्स को हटा दिया जाता है, और ओकाज़ाकी टुकड़ों को DNA लाइगेस द्वारा एक साथ जोड़ दिया जाता है।
उत्तर (Answer): ### आनुवंशिक कूट का परिचय\nआनुवंशिक कूट नियमों का वह समूह है जिसके द्वारा आनुवंशिक सामग्री (DNA या mRNA अनुक्रम) में एन्कोडेड जानकारी को जीवित कोशिकाओं द्वारा प्रोटीन में अनुवादित किया जाता है। यह न्यूक्लियोटाइड ट्रिपलेट्स (कोडॉन) और अमीनो एसिड के बीच संबंध को निर्दिष्ट करता है।
### आनुवंशिक कूट की प्रमुख विशेषताएं
* **त्रिक प्रकृति (Triplet Nature):** तीन आसन्न न्यूक्लियोटाइड मिलकर एक कोडॉन बनाते हैं। कुल $4^3 = 64$ संभावित कोडॉन होते हैं, जिनमें से 61 कोडॉन अमीनो एसिड के लिए कूटबद्ध होते हैं और 3 कोडॉन स्टॉप/समाप्ति कोडॉन के रूप में कार्य करते हैं।
* **अपह्रित या अतिरेक (Degeneracy/Redundancy):** अधिकांश अमीनो एसिड एक से अधिक कोडॉन द्वारा निर्दिष्ट किए जाते हैं (ट्रिप्टोफैन और मेथियोनीन को छोड़कर)। उदाहरण के लिए, वैलीन को GUU, GUC, GUA और GUG द्वारा कोडित किया जाता है। यह हानिकारक उत्परिवर्तन से सुरक्षा प्रदान करता है।
* **सार्वभौमिकता (Universality):** आनुवंशिक कूट बैक्टीरिया से लेकर मनुष्यों तक सभी जीवित जीवों में लगभग सार्वभौमिक है। उदाहरण के लिए, कोडॉन UUU E. coli और मनुष्य दोनों में फेनिलएलानिन को कोड करता है। यह सामान्य पूर्वजता (common ancestry) का प्रबल समर्थन करता है।
* **अस्पष्ट (Unambiguous / Specific):** एक कोडॉन केवल एक विशिष्ट अमीनो एसिड को निर्दिष्ट करता है, एक से अधिक को नहीं। यह प्रोटीन संश्लेषण में सटीकता सुनिश्चित करता है।
* **बिना विराम के / गैर-अतिव्यापि (Comma-less / Non-overlapping):** कूट को बिना किसी विराम चिह्न या आसन्न कोडों के बीच अतिव्यापन के लगातार तीन न्यूक्लियोटाइड समूहों की श्रृंखला में पढ़ा जाता है।
* **प्रारंभ और स्टॉप कोडॉन:** AUG आरंभकर्ता कोडॉन के रूप में कार्य करता है (मेथियोनीन के लिए कोड करता है और एक शुरुआत संकेत के रूप में कार्य करता है)। UAA, UAG, और UGA स्टॉप कोडॉन हैं जो किसी भी अमीनो एसिड के लिए कोड नहीं करते हैं और पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के संश्लेषण को समाप्त करते हैं।
### निष्कर्ष\nआनुवंशिक कूट की सटीकता, अतिरेक और सार्वभौमिकता इसे कार्यात्मक संरचनात्मक और एंजाइमेटिक प्रोटीन में आनुवंशिक संदेशों का अनुवाद करने के लिए एक असाधारण रूप से कुशल प्रणाली बनाते हैं।
उत्तर (Answer): ### चरण 1: कुल न्यूक्लियोटाइड की गणना\nदिया गया है:
- कुल आधार युग्म (bp) = $10,000$
- चूंकि प्रत्येक आधार युग्म में 2 न्यूक्लियोटाइड होते हैं, इसलिए न्यूक्लियोटाइड की कुल संख्या $= 10,000 \times 2 = 20,000$।
### चरण 2: चारगाफ के नियमों को लागू करना\nद्वि-रज्जुक DNA के लिए चारगाफ के नियमों के अनुसार:
- एडेनिन (A) का प्रतिशत = थाइमिन (T) का प्रतिशत $= 20\%$
- इसलिए, ग्वानिन (G) का प्रतिशत + साइटोसिन (C) का प्रतिशत $= 100\% - (20\% + 20\%) = 100\% - 40\% = 60\%$
- चूंकि G = C, ग्वानिन का प्रतिशत = $30\%$ और साइटोसिन का प्रतिशत = $30\%$।
### चरण 3: प्रत्येक नाइट्रोजन क्षार की वास्तविक संख्या की गणना
- एडेनिन (A) की संख्या $= 20,000 \text{ का } 20\% = \frac{20}{100} \times 20,000 = 4,000$
- थाइमिन (T) की संख्या $= 20,000 \text{ का } 20\% = 4,000$
- ग्वानिन (G) की संख्या $= 20,000 \text{ का } 30\% = \frac{30}{100} \times 20,000 = 6,000$
- साइटोसिन (C) की संख्या $= 20,000 \text{ का } 30\% = 6,000$
### चरण 4: DNA डबल हेलिक्स की कुल लंबाई की गणना
- DNA डबल हेलिक्स में दो लगातार आधार युग्मों के बीच की दूरी $= 0.34 \text{ nm}$ (या $3.4 \text{\AA}$)।
- कुल लंबाई $= \text{कुल आधार युग्म} \times \text{आसन्न आधार युग्मों के बीच की दूरी}$
- कुल लंबाई $= 10,000 \times 0.34 \text{ nm} = 3,400 \text{ nm}$।
### अंतिम उत्तर सारांश:
- एडेनिन = $4,000$
- थाइमिन = $4,000$
- ग्वानिन = $6,000$
- साइटोसिन = $6,000$
- DNA की कुल लंबाई = $3,400 \text{ nm}$
उत्तर (Answer): ### लैक ऑपेरॉन का परिचय\nलैक ऑपेरॉन (lac operon) फ्रांसिस जैकब और जैक्स मोनोड द्वारा 1961 में *एस्चेरिचिया कोलाई* (*E. coli*) जैसे बैक्टीरिया में प्रतिपादित जीन नियमन का एक उत्कृष्ट मॉडल है। ऑपेरॉन एक ही प्रमोटर वाले जीनों का एक समूह है जिनका एक साथ अनुलेखन (transcription) होता है, जिससे चयापचय मार्गों, विशेष रूप से लैक्टोज चयापचय का समन्वित नियमन संभव होता है।
### लैक ऑपेरॉन की संरचना और घटक\nलैक ऑपेरॉन निम्नलिखित संरचनात्मक और नियामक घटकों से मिलकर बनता है:
* **नियामक जीन (*i* जीन):** यह रिप्रेसर (दमनकारी) प्रोटीन के लिए कूटलेखन करता है, जो ऑपरेटर क्षेत्र से जुड़कर अनुलेखन को रोकता है।
* **प्रमोटर जीन (*p* जीन):** यह संरचनात्मक जीनों के अनुलेखन को शुरू करने के लिए RNA पोलीमरेज के जुड़ने का स्थान है।
* **ऑपरेटर जीन (*o* जीन):** यह लैक रिप्रेसर प्रोटीन के जुड़ने के स्थल के रूप में कार्य करता है; प्रमोटर के पास स्थित होता है।
* **संरचनात्मक जीन:**
* ***lacZ* जीन:** यह बीटा-गैलेक्टोसिडेस ($\beta$-galactosidase) एंजाइम का कूटलेखन करता है, जो लैक्टोज को ग्लूकोज और गैलेक्टोज में जल-अपघटित करता है।
* ***lacY* जीन:** यह पर्मिएस एंजाइम का कूटलेखन करता है, जो लैक्टोज के लिए कोशिका झिल्ली की पारगम्यता को बढ़ाता है।
* ***lacA* जीन:** यह ट्रांसएसिटिलेस एंजाइम का कूटलेखन करता है।
### नियमन की क्रियाविधि
* **प्रेरक की अनुपस्थिति में नियमन (लैक ऑफ):** जब माध्यम में लैक्टोज अनुपस्थित होता है, तो *i* जीन सक्रिय रूप से रिप्रेसर प्रोटीन बनाता है। यह रिप्रेसर प्रोटीन ऑपरेटर जीन (*o*) से मजबूती से बंध जाता है और RNA पोलीमरेज को आगे बढ़ने से रोकता है। इस प्रकार अनुलेखन बंद रहता है और एंजाइम नहीं बनते हैं।
* **प्रेरक की उपस्थिति में नियमन (लैक ऑन):** जब माध्यम में लैक्टोज (प्रेरक के रूप में कार्य करता है) मिलाया जाता है, तो यह कोशिका में प्रवेश करता है और रिप्रेसर प्रोटीन से जुड़ जाता है। इससे रिप्रेसर में संरचनात्मक परिवर्तन होता है जिससे वह निष्क्रिय हो जाता है और ऑपरेटर क्षेत्र से नहीं जुड़ पाता है। परिणामस्वरूप ऑपरेटर स्वतंत्र हो जाता है, RNA पोलीमरेज प्रमोटर से जुड़ता है, और संरचनात्मक जीनों (*lacZ*, *lacY*, *lacA*) का अनुलेखन होता है जिससे लैक्टोज उपयोग के लिए आवश्यक एंजाइम बनते हैं।
उत्तर (Answer): ### चरण 1: कुल न्यूक्लियोटाइड्स की संख्या की गणना
* दिए गए कुल क्षार युग्म (bp) = $10,000$
* प्रत्येक क्षार युग्म में 2 न्यूक्लियोटाइड होते हैं।
* न्यूक्लियोटाइड्स की कुल संख्या = $10,000 \times 2 = 20,000$
### चरण 2: चारगाफ के नियमों का अनुप्रयोग
* द्वि-रज्जुकी DNA के लिए चारगाफ के नियमों के अनुसार:
* एडेनिन का प्रतिशत (%A) = थाइमिन का प्रतिशत (%T)
* ग्वानिन का प्रतिशत (%G) = साइटोसिन का प्रतिशत (%C)
* दिया गया एडेनिन का प्रतिशत (%A) = $20\%$
* अतः थाइमिन का प्रतिशत (%T) = $20\%$
### चरण 3: ग्वानिन और साइटोसिन के प्रतिशत की गणना
* सभी चार क्षारों का कुल प्रतिशत = $100\%$
* $\%A + \%T + \%G + \%C = 100\%$
* $20\% + 20\% + \%G + \%C = 100\%$
* $40\% + \%G + \%C = 100\%$
* $\%G + \%C = 100\% - 40\% = 60\%$
* चूंकि $\%G = \%C$, प्रत्येक होगा:
* $\%G = 60\% / 2 = 30\%$
* $\%C = 30\%$
### चरण 4: प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड की वास्तविक संख्या की गणना
* **एडेनिन (A) न्यूक्लियोटाइड्स की संख्या:**
* $= 20\% \text{ का } 20,000$
* $= \frac{20}{100} \times 20,000 = 4,000$
* **थाइमिन (T) न्यूक्लियोटाइड्स की संख्या:**
* $= 20\% \text{ का } 20,000$
* $= \frac{20}{100} \times 20,000 = 4,000$
* **ग्वानिन (G) न्यूक्लियोटाइड्स की संख्या:**
* $= 30\% \text{ का } 20,000$
* $= \frac{30}{100} \times 20,000 = 6,000$
* **साइटोसिन (C) न्यूक्लियोटाइड्स की संख्या:**
* $= 30\% \text{ का } 20,000$
* $= \frac{30}{100} \times 20,000 = 6,000$
### अंतिम उत्तर:
* एडेनिन = $4,000$
* थाइमिन = $4,000$
* ग्वानिन = $6,000$
* साइटोसिन = $6,000$
उत्तर (Answer): ### DNA प्रतिकृति का परिचय\nDNA प्रतिकृति (Replication) एक अर्ध-संरक्षी (semi-conservative) प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोशिका विभाजन के दौरान DNA अपने जैसी दूसरी प्रतिलिपि बनाता है। यह कोशिका चक्र की S-अवस्था (S-phase) के दौरान होती है। DNA द्वि-कुंडली के दोनों रज्जुक अलग होते हैं और प्रत्येक नए पूरक रज्जुक के संश्लेषण के लिए टेम्पलेट के रूप में कार्य करता है।
### शामिल प्रमुख एंजाइम
* **DNA हेलिकेस:** प्रतिकृति द्वंद्ध (replication fork) पर पूरक क्षार युग्मों के बीच हाइड्रोजन बंधों को तोड़कर DNA द्वि-कुंडली को खोलता है।
* **टोपोइज़ोमेरेस (DNA गाइरेस):** अनवाइंडिंग के कारण प्रतिकृति द्वंद्ध के आगे उत्पन्न होने वाले तनाव और सुपरकॉइलिंग को कम करता है।
* **RNA प्राइमेज:** DNA टेम्पलेट के पूरक एक छोटे RNA प्राइमर का संश्लेषण करता है, जो DNA पोलीमरेज को संश्लेषण शुरू करने के लिए 3'-OH समूह प्रदान करता है।
* **DNA पोलीमरेज III:** यह मुख्य एंजाइम है जो बढ़ती हुई DNA श्रृंखला में 5' से 3' दिशा में न्यूक्लियोटाइड जोड़ता है।
* **DNA पोलीमरेज I:** RNA प्राइमर्स को हटाता है और उन्हें DNA न्यूक्लियोटाइड से प्रतिस्थापित करता है।
* **DNA लाइगेस:** लैगिंग स्ट्रैंड पर नवनिर्मित DNA खंडों (ओकाजाकी खंडों) को फॉस्फोडाइस्टर बंध बनाकर जोड़ता है।
### संश्लेषण की क्रियाविधि: लीडिंग और लैगिंग स्ट्रैंड
* **टेम्पलेट की ध्रुवता और दिशा:** DNA पोलीमरेज केवल 5' से 3' दिशा में DNA का संश्लेषण कर सकता है। चूँकि DNA के दोनों रज्जुक प्रतिसमांतर (antiparallel) होते हैं, इसलिए दोनों रजुकों पर प्रतिकृति अलग-अलग होती है।
* **निरंतर संश्लेषण (लीडिंग स्ट्रैंड):** 3' से 5' ध्रुवता वाले टेम्पलेट रज्जुक पर प्रतिकृति, प्रतिकृति द्वंद्ध की दिशा में लगातार होती है। इसे लीडिंग स्ट्रैंड कहते हैं।
* **असंतुलित संश्लेषण (लैगिंग स्ट्रैंड):** 5' से 3' ध्रुवता वाले टेम्पलेट रज्जुक पर प्रतिकृति, द्वंद्ध की विपरीत दिशा में होती है। इसके परिणामस्वरूप छोटे DNA खंड बनते हैं जिन्हें ओकाजाकी खंड कहते हैं। इसे लैगिंग स्ट्रैंड कहते हैं।
* **खंडों को जोड़ना:** अंत में DNA लाइगेस ओकाजाकी खंडों के बीच के अंतरालों को जोड़कर एक निरंतर DNA रज्जुक बनाता है। इस प्रकार अर्ध-संरक्षी प्रतिकृति उच्च निष्ठा के साथ आनुवंशिक निरंतरता सुनिश्चित करती है।
उत्तर (Answer): ### लैक ऑपेरॉन का परिचय\nलैक ऑपेरॉन बैक्टीरिया जैसे *एस्चेरिचिया कोलाई* में पाया जाने वाला एक आनुवंशिक तंत्र है जो लैक्टोज उपापचय (metabolism) को नियंत्रित करता है। इसकी खोज फ्रेंकोइज़ जैकब और जैक्स मोनॉड ने की थी।
### लैक ऑपेरॉन के घटक
* **नियामक जीन ($i$ जीन):** यह रिप्रेसर (दमनकारी) प्रोटीन का कूटलेखन करता है।
* **प्रमोटर जीन ($p$ जीन):** वह स्थल जहाँ RNA पॉलीमरेज़ जुड़ता है।
* **ऑपरेटर जीन ($o$ जीन):** यह एक स्विच की तरह कार्य करता है।
* **संरचनात्मक जीन:**
* **$z$ जीन:** $\beta$-galactosidase का कूटलेखन करता है जो लैक्टोज को ग्लूकोज और गैलेक्टोज में तोड़ता है।
* **$y$ जीन:** परमीएज़ का कूटलेखन करता है।
* **$a$ जीन:** ट्रांसएसीटेस का कूटलेखन करता है।
### नियमन की क्रियाविधि
* **प्रेरक की अनुपस्थिति में (ऑफ़ स्थिति):**
* नियामक जीन ($i$) सक्रिय रिप्रेसर प्रोटीन बनाता है।
* यह रिप्रेसर प्रोटीन **ऑपरेटर जीन ($o$)** से जाकर जुड़ जाता है।
* इससे RNA पॉलीमरेज़ आगे नहीं बढ़ पाता और संरचनात्मक जीनों का अनुलेखन (transcription) रुक जाता है।
* **प्रेरक की उपस्थिति में (ऑन स्थिति):**
* जब लैक्टोज (या एलोलैक्टोज) कोशिका में प्रवेश करता है, तो यह **प्रेरक (inducer)** के रूप में कार्य करता है।
* प्रेरक, रिप्रेसर प्रोटीन से जुड़कर उसे निष्क्रिय कर देता है।
* निष्क्रिय रिप्रेसर ऑपरेटर से नहीं जुड़ पाता।
* RNA पॉलीमरेज़ प्रमोटर से जुड़कर संरचनात्मक जीनों का अनुलेखन करता है जिससे एंजाइम बनते हैं।
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण गणना
#### चरण 1: कुल न्यूक्लियोटाइड की संख्या
* कुल क्षार युग्म (bp) = 10,000
* चूँकि प्रत्येक क्षार युग्म में 2 न्यूक्लियोटाइड होते हैं, अतः कुल न्यूक्लियोटाइड = $10,000 \times 2 = 20,000$।
#### चरण 2: एडेनिन (A) और थाइमिन (T) की संख्या की गणना
* चार्गाफ के नियम के अनुसार, एडेनिन की मात्रा थाइमिन के बराबर होती है ($A = T$)।
* दिया गया है कि एडेनिन = 20%
* अतः, थाइमिन (T) = 20%
* एडेनिन क्षारकों की संख्या = $20\% \text{ का } 20,000 = \frac{20}{100} \times 20,000 = 4,000$।
* थाइमिन क्षारकों की संख्या = 4,000।
#### चरण 3: साइटोसिन (C) और ग्वानिन (G) की संख्या की गणना
* (C + G) का कुल प्रतिशत = $100\% - (20\% + 20\%) = 60\%$।
* चूँकि $C = G$, इसलिए साइटोसिन = 30% और ग्वानिन = 30%।
* साइटोसिन क्षारकों की संख्या = $30\% \text{ का } 20,000 = \frac{30}{100} \times 20,000 = 6,000$।
* ग्वानिन क्षारकों की संख्या = 6,000।
#### चरण 4: DNA अणु की कुल लंबाई की गणना
* कुल क्षार युग्म = 10,000
* दो लगातार क्षार युग्मों के बीच की दूरी = $0.34 \text{ nm}$
* कुल लंबाई = $10,000 \times 0.34 \text{ nm} = 3,400 \text{ nm}$ (या $3.4 \mu\text{m}$)।
उत्तर (Answer): ### DNA प्रतिकृतियन का परिचय\nDNA प्रतिकृतियन एक अर्ध-संरक्षी (semiconservative) प्रक्रिया है जिसमें एक द्वि-रज्जुक (double-stranded) DNA अणु अपनी दो समान प्रतियाँ बनाता है। प्रत्येक संतति अणु में एक पैतृक रज्जुक और एक नवनिर्मित रज्जुक होता है।
### प्रमुख एंजाइम
* **DNA हैलिकेज़:** प्रतिकृतियन द्विविभाजन (replication fork) पर हाइड्रोजन बांड को तोड़कर द्वि-कुंडली को खोलता है।
* **टोपोइसोमरेज:** कुंडलित DNA के खुलने के कारण उत्पन्न तनाव को दूर करता है।
* **RNA प्राइमेज़:** DNA टेम्पलेट के पूरक एक छोटे RNA प्राइमर का संश्लेषण करता है।
* **DNA पॉलीमरेज़ III:** 5' से 3' दिशा में न्यूक्लियोटाइड जोड़कर नए रज्जुक का दीर्घीकरण करता है।
* **DNA पॉलीमरेज़ I:** RNA प्राइमर को हटाकर उनकी जगह DNA न्यूक्लियोटाइड जोड़ता है।
* **DNA लाइगेज़:** ओकाज़ाकी खंडों को आपस में जोड़कर फॉस्फोडाइस्टर बंध बनाता है।
### रज्जुक संश्लेषण की क्रियाविधि
* **5' से 3' दिशा नियम:** DNA पॉलीमरेज़ केवल 5' से 3' दिशा में संश्लेषण कर सकता है। चूँकि दोनों पैतृक रज्जुक प्रतिसमानांतर (antiparallel) होते हैं, इसलिए दोनों पर प्रतिकृतियन अलग-अलग होता है।
* **अग्रणी रज्जुक (Leading Strand):** 3' से 5' टेम्पलेट पर संश्लेषण निरंतर (continuous) होता है। इसे अग्रणी रज्जुक कहते हैं।
* **पश्चगामी रज्जुक (Lagging Strand):** 5' से 3' टेम्पलेट पर संश्लेषण खंडों में होता है जिन्हें **ओकाज़ाकी खंड (Okazaki fragments)** कहते हैं। इस रज्जुक को पश्चगामी रज्जुक कहते हैं।
* **खंडों को जोड़ना:** DNA पॉलीमरेज़ I RNA प्राइमर हटाता है और DNA लाइगेज़ इन खंडों को जोड़कर सतत रज्जुक बनाता है।
उत्तर (Answer): एस्चेरिचिया कोलाई (Escherichia coli) में लैक ऑपेरॉन लैक्टोज चयापचय को नियंत्रित करने वाली एक प्रेरक जीन प्रणाली का क्लासिक उदाहरण है। इसमें एक प्रमोटर, एक ऑपरेटर और तीन संरचनात्मक जीन (lacZ, lacY, और lacA) शामिल हैं जो एक नियामक जीन (i जीन) द्वारा नियंत्रित होते हैं जो लगातार लैक रिप्रेशन प्रोटीन को संश्लेषित करता है। लैक्टोज की अनुपस्थिति में, रिप्रेशर प्रोटीन ऑपेरॉन के ऑपरेटर क्षेत्र से कसकर बंध जाता है। यह भौतिक बंधन आरएनए पोलीमरेज़ को संरचनात्मक जीनों को अनुलेखित करने से रोकता है, जिससे लैक्टोज अनुपलब्ध होने पर ऑपेरॉन बंद रहता है और अनावश्यक ऊर्जा व्यय को रोका जाता है। इसके विपरीत, जब लैक्टोज (एक प्रेरक के रूप में कार्य करता है, या अधिक सटीक रूप से एलोलैक्टोज) को विकास माध्यम में पेश किया जाता है, तो यह जीवाणु कोशिका में प्रवेश करता है और सीधे रिप्रेशर प्रोटीन से बंध जाता है। यह बंधन रिप्रेशर में एक संवादात्मक परिवर्तन को प्रेरित करता है, जिससे यह निष्क्रिय हो जाता है और ऑपरेटर से बंधने में असमर्थ हो जाता है। परिणामस्वरूप, ऑपरेटर स्वतंत्र हो जाता है, जिससे आरएनए पोलीमरेज़ को आसानी से प्रमोटर से बंधने और संरचनात्मक जीनों lacZ, lacY, और lacA के अनुलेखन को शुरू करने की अनुमति मिलती है। ये जीन तब बीटा-गैलेक्टोसिडेस, पर्मेज़ और ट्रांसएसिटिलाइज जैसे एंजाइमों का उत्पादन करते हैं, जो लैक्टोज को कुशलता से चयापचय करते हैं, जो एक सुंदर चयापचय प्रतिक्रिया और नियंत्रण तंत्र को दर्शाता है।
उत्तर (Answer): आनुवंशिक कोड नियमों का वह समूह है जिसके द्वारा आनुवंशिक सामग्री (डीएनए या एमआरएनए अनुक्रम) में एन्कोड की गई जानकारी जीवित कोशिकाओं द्वारा प्रोटीन में अनुवादित की जाती है। कई प्रमुख विशेषताएँ आनुवंशिक कोड की विशेषता बताती हैं: सबसे पहले, कोड एक ट्रिपलेट कोडन है, जिसका अर्थ है कि तीन लगातार न्यूक्लियोटाइड एक अमीनो एसिड को निर्दिष्ट करते हैं, जो 64 संभावित संयोजन ($4^3$) प्रदान करते हैं, जो 20 मानक अमीनो एसिड के लिए कोड करने के लिए पर्याप्त से अधिक है। दूसरा, कोड डीजेनेरेट (अन्वेषित/अपह्रसित) है, जिसका अर्थ है कि अधिकांश अमीनो एसिड एक से अधिक कोडन द्वारा निर्दिष्ट किए जाते हैं, जो बिंदु उत्परिवर्तन के खिलाफ एक सुरक्षात्मक बफर प्रदान करता है। तीसरा, कोड स्पष्ट और विशिष्ट है, जिसका अर्थ है कि एक एकल कोडन हमेशा एक विशिष्ट अमीनो एसिड के लिए कोड करता है और कभी भी एक से अधिक के लिए नहीं। चौथा, कोड सार्वभौमिक है, क्योंकि एक ही कोडन बैक्टीरिया से लेकर मनुष्यों तक एक ही अमीनो एसिड को निर्दिष्ट करता है, जो सभी जीवित जीवों के बीच विकासात्मक संबंधों को प्रदर्शित करता है। पाँचवाँ, कोड अल्पविराम रहित (comma-less) है, जिसका अर्थ है कि इसे कोडन के बीच किसी भी विराम चिह्न के बिना एक छोर से दूसरे छोर तक लगातार पढ़ा जाता है। अंत में, AUG दोहरे कार्य वाले स्टार्ट कोडन के रूप में कार्य करता है, जो मेथियोनीन के लिए कोडिंग करते समय अनुवाद शुरू करता है, जबकि UAA, UAG, और UGA स्टॉप कोडन के रूप में कार्य करते हैं जो पॉलीपेप्टाइड संश्लेषण को समाप्त करते हैं।
उत्तर (Answer): mRNA खंड द्वारा एनकोड किए गए कुल कोडन और अमीनो एसिड की अधिकतम संख्या की गणना करने के लिए, हम आनुवंशिक कोड की ट्रिपलेट प्रकृति का उपयोग करते हैं।
**चरण 1: कुल कोडन की संख्या की गणना करें।**\nएक आनुवंशिक कोडन में न्यूक्लियोटाइड का एक त्रय (ट्रिपलेट) होता है (3 न्यूक्लियोटाइड = 1 कोडन)।\nmRNA में न्यूक्लियोटाइड की कुल संख्या = 300।\nकोडन की कुल संख्या = $\frac{\text{कुल न्यूक्लियोटाइड}}{\text{प्रति कोडन न्यूक्लियोटाइड}}$\nकोडन की कुल संख्या = $\frac{300}{3} = 100$ कोडन।
**चरण 2: एनकोड किए गए अमीनो एसिड की अधिकतम संख्या निर्धारित करें।**\nmRNA पर मौजूद कुल कोडन में से, एक कोडन आमतौर पर एक स्टार्ट कोडन के रूप में कार्य करता है (जो मेथियोनीन के लिए कोड करता है और बनाए रखा जाता है) और एक या अधिक कोडन स्टॉप कोडन के रूप में कार्य कर सकते हैं। हालाँकि, प्रश्न मानक अनुवाद सिद्धांतों के अलावा बिना किसी जटिलता के एनकोड किए गए अमीनो एसिड की अधिकतम संख्या पूछता है।\nआम तौर पर, अनुवाद समाप्ति कोडन (UAA, UAG, UGA) किसी भी अमीनो एसिड के लिए कोड नहीं करते हैं। यदि अंतिम कोडन एक स्टॉप कोडन है, तो 100 कोडन में से, 99 कोडन अमीनो एसिड के लिए कोड करते हैं और 1 स्टॉप कोडन होता है।\nइसलिए, एनकोड किए गए अमीनो एसिड की अधिकतम संख्या = $100 - 1$ (स्टॉप कोडन) = 99 अमीनो एसिड।
**निष्कर्ष:**\nकोडन की कुल संख्या = 100, और एनकोड किए गए अमीनो एसिड की अधिकतम संख्या = 99।
उत्तर (Answer): डीएनए प्रतिकृति एक द्वि-दिशात्मक और अर्ध-संरक्षी प्रक्रिया है जो प्रतिकृति फोर्क पर होती है। चूँकि डीएनए डबल हेलिक्स के दो रज्जु प्रतिसमांतर (एक 5' से 3' उन्मुख और दूसरा 3' से 5') होते हैं और डीएनए पोलीमरेज़ नए संश्लेषित रज्जु के बढ़ाव को कड़ाई से 5' से 3' दिशा में उत्प्रेरित कर सकता है, प्रतिकृति मशीनरी को एक विशिष्ट स्थलाकृतिक चुनौती का सामना करना पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप प्रतिकृति फोर्क पर रज्जु संश्लेषण के दो अलग-अलग तरीके होते हैं।
\nअग्रणी रज्जु (leading strand) को प्रतिकृति फोर्क की गति की दिशा में लगातार संश्लेषित किया जाता है। इसका टेम्पलेट रज्जु 3' से 5' दिशा में चलता है, जिससे डीएनए पोलीमरेज़ III को खुलने वाले फोर्क की ओर आसानी से और बिना किसी रुकावट के न्यूक्लियोटाइड जोड़ने की अनुमति मिलती है। इस निरंतर संश्लेषण को शुरू करने के लिए मूल में केवल एक एकल आरएनए प्राइमर की आवश्यकता होती है।
\nइसके विपरीत, विलंबित रज्जु (lagging strand) को प्रतिकृति फोर्क की गति की विपरीत दिशा में असंतुलित रूप से संश्लेषित किया जाता है। इसका टेम्पलेट रज्जु 5' से 3' चलता है, जिससे डीएनए पोलीमरेज़ को आगे बढ़ने वाले फोर्क से पीछे की ओर हटते हुए डीएनए के छोटे खंडों, जिन्हें ओकाज़ाकी खंड कहा जाता है, को संश्लेषित करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। प्रत्येक ओकाज़ाकी खंड को प्राइमेस द्वारा संश्लेषित एक नए आरएनए प्राइमर की आवश्यकता होती है। बाद में, डीएनए पोलीमरेज़ I इन आरएनए प्राइमरों को हटा देता है, परिणामी अंतरालों को उचित डीऑक्सीन्युक्लियोटाइड से भरता है, और एंजाइम डीएनए लाइगेज आसन्न खंडों के बीच फॉस्फोडाइस्टर बॉन्ड बनाकर शेष निक्स को सील कर देता है।
उत्तर (Answer): दिए गए mRNA खंड से अनुवादित पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के अमीनो एसिड अनुक्रम को निर्धारित करने के लिए, हमें 5' से 3' दिशा में ट्रिपलेट में न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम को पढ़ने की आवश्यकता है, जिसे कोडिंग कहा जाता है।
**चरण 1: mRNA अनुक्रम से कोडन की पहचान करें।**\nदिया गया mRNA अनुक्रम है: 5'-AUG GGU UUA UAA-3'।\nट्रिपलेट (कोडन) में विभाजित करना:
1. पहला कोडन: **AUG**
2. दूसरा कोडन: **GGU**
3. तीसरा कोडन: **UUA**
4. चौथा कोडन: **UAA**
**चरण 2: प्रत्येक कोडन को उसके संबंधित अमीनो एसिड में अनुवादित करें।**
1. **AUG**: **मेथियोनीन (Met)** के लिए कोड करता है। यह स्टार्ट कोडन के रूप में भी कार्य करता है।
2. **GGU**: **ग्लाइसिन (Gly)** के लिए कोड करता है।
3. **UUA**: **ल्यूसिन (Leu)** के लिए कोड करता है।
4. **UAA**: यह एक **स्टॉप कोडन** (समाप्ति कोडन) है। यह किसी भी अमीनो एसिड के लिए कोड नहीं करता है और अनुवाद की समाप्ति का संकेत देता है।
**निष्कर्ष:**\nअनुवादित पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला में शामिल हैं:\nमेथियोनीन - ग्लाइसिन - ल्यूसिन
(नोट: अनुवाद UAA पर रुक जाता है, इसलिए UAA के बाद के कोई भी कोडन, यदि मौजूद हैं, अनुवादित नहीं होंगे, हालांकि यहाँ UAA अंतिम प्रदान किया गया कोडन है)।