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मानव स्वास्थ्य तथा रोग

Subject: जीव विज्ञान | Class: Class 12 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)

MP बोर्ड कक्षा 12 - जीव विज्ञान

त्वरित रिवीजन नोट्स: अध्याय - मानव स्वास्थ्य तथा रोग


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1. स्वास्थ्य एवं रोग की मूलभूत अवधारणाएं


#### रोग के प्रकार:

1. संक्रामक रोग (Infectious Diseases): जो रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से संचारित होते हैं (जैसे—एड्स, सामान्य जुकाम)।

2. असंक्रामक रोग (Non-infectious Diseases): जो रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते (जैसे—कैंसर)।


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2. प्रमुख मानव रोग (Pathogens and Human Diseases)

| रोग का नाम | रोगाणु का प्रकार | रोगाणु/कारक का नाम | प्रभावित अंग/लक्षण | विशेष बिंदु/परीक्षण |

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| टाइफाइड | जीवाणु (Bacteria) | Salmonella typhi | तेज बुखार, पेट दर्द, आंतों में छेद | विडाल परीक्षण (Widal Test) द्वारा पुष्टि |

| निमोनिया | जीवाणु (Bacteria) | Streptococcus pneumoniae | फेफड़ों के वायु-कोष्ठ (Alveoli) में तरल भरना, सांस लेने में तकलीफ | होंठ और नाखून नीले पड़ना |

| सामान्य जुकाम | विषाणु (Virus) | राइनो वायरस (Rhinovirus) | नाक और श्वसन पथ का संक्रमण (फेफड़े प्रभावित नहीं होते) | 3-7 दिनों में स्वतः ठीक |

| मलेरिया | प्रोटोजोआ (Protozoa)| Plasmodium (P. vivax, P. falciparum) | कंपकंपी के साथ तेज बुखार | वाहक: मादा एनोफिलीज मच्छर; घातक प्रकार: P. falciparum |

| अमीबियासिस | प्रोटोजोआ (Protozoa)| Entamoeba histolytica | बड़ी आंत में ऐंठन, मल के साथ श्लेष्मा और रक्त | वाहक: घरेलू मक्खियां |

| एस्केरिसता | कृमि (Helminth) | Ascaris lumbricoides | आंतों का अवरोध, आंतरिक रक्तस्राव | दूषित जल व भोजन से |

| हाथीपांव (फ़ाइलेरिया) | कृमि (Helminth) | Wuchereria bancrofti | पैरों और जननांगों की लसिका वाहिकाओं में सूजन | वाहक: मादा क्यूलेक्स मच्छर |

| दाद (Ringworm) | कवक (Fungus) | Microsporum, Trichophyton | त्वचा, नाखूनों पर सूखे, पपड़ीदार चकत्ते | नमी और गर्मी से बढ़ता है |


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3. प्लास्मोडियम का जीवन चक्र (मलेरिया)

1. प्राथमिक पोषी (मानव):

2. द्वितीयक पोषी (मच्छर):


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4. प्रतिरक्षा (Immunity)

शरीर की रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को प्रतिरक्षा कहते हैं।


#### (A) सहज प्रतिरक्षा (Innate Immunity):

जन्मजात, गैर-विशिष्ट प्रतिरक्षा रोध।


#### (B) उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity):

रोगज़नक़-विशिष्ट, जीवनकाल में अर्जित और स्मृति (Memory) पर आधारित।


#### एंटीबॉडी (प्रतिरक्षी) की संरचना:


#### सक्रिय एवं निष्क्रिय प्रतिरक्षा:


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5. एड्स (AIDS - Acquired Immuno Deficiency Syndrome)


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6. कैंसर (Cancer)


#### अर्बुद (Tumors) के प्रकार:

1. सुदम अर्बुद (Benign Tumor): अपने मूल स्थान तक सीमित रहते हैं और अन्य भागों में नहीं फैलते (कम हानिकारक)।

2. दुर्दम अर्बुद (Malignant Tumor): तेजी से बढ़ते हैं, आसपास के ऊतकों को नष्ट करते हैं।

3. मेटास्टेसिस (Metastasis): कैंसर कोशिकाओं का रक्त द्वारा शरीर के दूरस्थ अंगों में फैलकर नया कैंसर बनाना (दुर्दम कैंसर का सबसे घातक लक्षण)।



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7. ड्रग और अल्कोहल का दुरुपयोग (Drug and Alcohol Abuse)

1. ओपिऑयड्स (Opioids):


2. कैनाबिनॉयड (Cannabinoids):


3. कोका एल्केलायड / कोकीन (Cocaine):


4. निर्भरता और प्रत्याहार लक्षण (Dependence and Withdrawal Symptoms):


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💡 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण युक्तियाँ (MP Board Exam Tips):

1. चित्र अभ्यास: मलेरिया परजीवी का जीवन चक्र, एंटीबॉडी की संरचना, तथा HIV की प्रतिकृति का चित्र अवश्य तैयार करें।

2. अंतर स्पष्ट करें:

3. फुल फॉर्म याद रखें: HIV, AIDS, ELISA, PMNL, CMI।

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 मानव स्वास्थ्य तथा रोग
Overview
स्वास्थ्य की अवधारणा परिभाषा: शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ होना रोग के मुख्य प्रकार संक्रामक रोग: एक व्यक्ति से दूसरे में फैलने वाले (उदा. जुकाम, एड्स) असंक्रामक रोग: एक व्यक्ति तक सीमित रहने वाले (उदा. कैंसर) मानव में सामान्य रोग जीवाणु (Bacterial) जनित रोग टाइफाइड: सालमोनेला टाइफी (लक्षण: तेज बुखार, आंतों में अल्सर) निमोनिया: स्ट्रैप्टोकोकस न्यूमोनी (लक्षण: फेफड़ों में तरल भरना, सांस लेने में तकलीफ) विषाणु (Viral) जनित रोग सामान्य जुकाम: राइनो वायरस (नाक और श्वसन पथ प्रभावित) डेंगू और चिकनगुनिया: एडीज मच्छर द्वारा संचरण प्रोटोजोआ जनित रोग मलेरिया: प्लाज्मोडियम (वाहक: मादा एनोफिलीज मच्छर) अमीबिएसिस (अमीबी अतिसार): एंटअमीबा हिस्टोलिटिका कवक (Fungal) जनित रोग दाद (रिंगवर्म): माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफाइटॉन (त्वचा पर सूखे, पपड़ीदार चकत्ते) कृमि (Helminthic) जनित रोग ऐस्केरिसता: ऐस्केरिस (आंतों में संक्रमण) फाइलेरिया (हाथीपांव): वुचेरेरिया (लसिका वाहिकाओं में सूजन) प्रतिरक्षा (Immunity) सहज (जन्मजात) प्रतिरक्षा शारीरिक रोध: त्वचा, श्लेष्मा झिल्ली कायिकीय रोध: पेट में अम्ल (HCl), लार, आँसू कोशिकीय रोध: WBC, न्यूट्रोफिल, मैक्रोफेज साइटोकाइन रोध: इंटरफेरॉन (विषाणु रोधी प्रोटीन) उपार्जित (अर्जित) प्रतिरक्षा विशेषता: स्मृति (Memory) और विशिष्टता B-लसिकाणु (B-cells): एंटीबॉडी (प्रतिरक्षी) का निर्माण T-लसिकाणु (T-cells): B-कोशिकाओं की सहायता एवं कोशिकीय प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा के प्रकार सक्रिय प्रतिरक्षा: शरीर स्वयं एंटीबॉडी बनाता है (धीमी लेकिन दीर्घकालिक) निष्क्रिय प्रतिरक्षा: बाहर से तैयार एंटीबॉडी देना (उदा. टेटनस इंजेक्शन, माता का कोलोस्ट्रम) प्रतिरक्षा तंत्र के अंग प्राथमिक लसिकाभ अंग: अस्थि मज्जा और थाइमस (लसिकाणुओं का परिपक्वव) द्वितीयक लसिकाभ अंग: प्लीहा, लसिका ग्रंथियां, टॉन्सिल (रोगाणुओं से मुठभेड़ स्थल) प्रतिरक्षा संबंधी विकार एलर्जी: पर्यावरण में मौजूद एलर्जन के प्रति अतिसंवेदनशील अनुक्रिया कारण: हिस्टामिन और सेरोटोनिन का स्राव स्वप्रतिरक्षा रोग: शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र स्वयं की कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है उदाहरण: रूमेटाइड आर्थराइटिस (गठिया) एड्स (AIDS) पूरा नाम: एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम रोगाणु: एचआईवी (HIV - रीट्रोवायरस) संचरण के तरीके संक्रमित व्यक्ति से यौन संपर्क दूषित रक्त का आधान संक्रमित सुई का प्रयोग संक्रमित माता से बच्चे में प्रभाव: सहायक T-कोशिकाओं (Helper T-cells) की संख्या में भारी कमी निदान: एलिसा (ELISA) परीक्षण रोकथाम: NACO और जागरूकता कार्यक्रम कैंसर (Cancer) गुण: अनियंत्रित कोशिका विभाजन और संपर्क संदमन (Contact Inhibition) का ह्रास ट्यूमर (अर्बुद) के प्रकार सुदम ट्यूमर (Benign): मूल स्थान तक सीमित, कम हानिकारक दुर्दम ट्यूमर (Malignant): अन्य ऊतकों में फैलने वाला (मेटास्टेसिस गुण) कैंसर के कारण (कार्सिनोजेन) भौतिक: एक्स-रे, गामा किरणें, यूवी किरणें रासायनिक: तंबाकू का धुआं जैविक: ऑन्कोजीनिक वायरस निदान एवं पहचान: बायोप्सी, एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई उपचार: शल्य चिकित्सा (Surgery), विकिरण चिकित्सा (Radiotherapy), कीमोथेरेपी ड्रग्स और अल्कोहल का दुरुपयोग प्रमुख नशीले पदार्थ ओपिऑयड्स (उदा. मॉर्फिन, हेरोइन): तंत्रिका तंत्र को धीमा करना, दर्द निवारक कैनाबिनॉइड्स (उदा. भांग, गांजा, चरस): हृदय वाहिका तंत्र को प्रभावित करना कोका एल्कलॉइड (कोकीन): केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करना किशोरावस्था और लत कारण: जिज्ञासा, जोखिम उठाने की आदत, सहपाठियों का दबाव, तनाव लत (Addiction) और निर्भरता (Dependence) दुष्प्रभाव: यकृत शोथ (सिरोसिस), आक्रामक व्यवहार, अवसाद रोकथाम और नियंत्रण अनुचित दबाव से बचना शिक्षा और सही परामर्श माता-पिता और साथियों की मदद लेना पेशेवर व चिकित्सा सहायता प्राप्त करना
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. प्रतिरक्षा (Immunity) किसे कहते हैं? मानव शरीर में पाई जाने वाली दो मुख्य प्रकार की प्रतिरक्षा - सहज (जन्मजात) प्रतिरक्षा (इसके चार अवरोधों सहित) और उपार्जित प्रतिरक्षा का विस्तार से वर्णन कीजिए। तरल प्रतिरक्षा और कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा में अंतर भी स्पष्ट कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **प्रतिरक्षा (Immunity)**\nशरीर की परजीवियों, रोगाणुओं और रोग फैलाने वाले कारकों से रक्षा करने की कुल क्षमता को **प्रतिरक्षा (Immunity)** कहते हैं। यह मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है: --- ### **1. सहज या जन्मजात प्रतिरक्षा (Innate Immunity)**\nयह एक गैर-विशिष्ट (Non-specific) प्रतिरक्षा है जो जन्म के समय से ही शरीर में मौजूद होती है। यह रोगाणुओं को शरीर में प्रवेश करने से रोकती है। इसके चार प्रमुख अवरोध (Barriers) हैं: * **शारीरिक अवरोध (Physical Barriers):** यह शरीर में सूक्ष्मजीवों के प्रवेश को रोकते हैं। * *उदाहरण:* त्वचा, तथा श्वसन, पाचन और मूत्रजननांग मार्ग की श्लेष्मा (Mucus) झिल्ली। * **कार्यकीय अवरोध (Physiological Barriers):** शरीर के स्राव जो रोगाणुओं की वृद्धि को रोकते हैं। * *उदाहरण:* आमाशय में अम्ल ($HCl$), मुँह में लार और आँखों के आँसू (जिनमें लाइसोजाइम एंजाइम होता है)। * **कोशिकीय अवरोध (Cellular Barriers):** शरीर में मौजूद श्वेत रक्त कोशिकाएं जो रोगाणुओं का भक्षण (Phagocytosis) करके उन्हें नष्ट करती हैं। * *उदाहरण:* न्यूट्रोफिल (PMNL-Neutrophils), मोनोसाइट्स, प्राकृतिक मारक कोशिकाएं (Natural Killer Cells) और मैक्रोफेज। * **साइटोकाइन अवरोध (Cytokine Barriers):** विषाणु (Virus) से संक्रमित कोशिकाएं **इंटरफेरोन (Interferons)** नामक प्रोटीन का स्राव करती हैं, जो गैर-संक्रमित कोशिकाओं को विषाणु के संक्रमण से बचाती हैं। --- ### **2. उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity)**\nयह रोगजनक-विशिष्ट (Pathogen-specific) होती है और इसमें **स्मृति (Memory)** का गुण होता है। जब शरीर पहली बार किसी रोगाणु के संपर्क में आता है, तो धीमी गति से प्राथमिक अनुक्रिया होती है। उसी रोगाणु का दोबारा सामना होने पर तीव्र द्वितीयक अनुक्रिया होती है। \nयह प्रतिरक्षा दो प्रकार की कोशिकाओं द्वारा प्रदान की जाती है: * **B-लिम्फोसाइट्स:** रक्त में **एंटीबॉडी (Antibodies)** का निर्माण करती हैं। * **T-लिम्फोसाइट्स:** स्वयं एंटीबॉडी नहीं बनातीं, लेकिन B-कोशिकाओं की सहायता करती हैं। --- ### **तरल और कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा में अंतर** 1. **तरल प्रतिरक्षा अनुक्रिया (Humoral Immune Response):** * यह B-लिम्फोसाइट्स द्वारा उत्पादित एंटीबॉडीज के माध्यम से शरीर के द्रवों (रक्त और लसिका) में होती है। * यह बाह्य-कोशिकीय (Extracellular) रोगाणुओं के खिलाफ रक्षा करती है। 2. **कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा अनुक्रिया (Cell-Mediated Immunity - CMI):** * यह T-लिम्फोसाइट्स कोशिकाओं द्वारा संचालित होती है जो संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। * यह शरीर में 'स्वयं' और 'पराये' ऊतकों की पहचान करती है तथा अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplantation) के अस्वीकरण (Graft Rejection) के लिए जिम्मेदार होती है।
Q2. एड्स (AIDS) की व्याख्या इसके कारक जीव, संचरण के तरीकों, मानव शरीर में एचआईवी (HIV) के विस्तृत गुणन/प्रतिकृति प्रक्रिया और रोकथाम के उपायों पर ध्यान केंद्रित करते हुए कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **परिचय एवं कारक जीव** **एड्स (AIDS)** का पूरा नाम **एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम (Acquired Immuno Deficiency Syndrome)** है। यह **ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV)** द्वारा होता है, जो **रेट्रोवायरस (Retrovirus)** समूह का एक विषाणु है। इस विषाणु का आनुवंशिक पदार्थ आरएनए (RNA) होता है जो प्रोटीन आवरण से घिरा होता है। --- ### **संचरण के तरीके** * संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने से। * दूषित रक्त और रक्त उत्पादों के आधान (Transfusion) से। * नशीली दवाओं का सेवन करने वाले व्यक्तियों द्वारा संक्रमित सुइयों (Syringes) के साझा उपयोग से। * संक्रमित माता से उसके बच्चे में जरायु (Placenta) द्वारा या स्तनपान के माध्यम से। *(ध्यान दें: एचआईवी सामान्य शारीरिक संपर्क, हाथ मिलाने या साथ रहने से नहीं फैलता है)।* --- ### **मानव शरीर में एचआईवी (HIV) के गुणन की कार्यप्रणाली** 1. **मेजबान कोशिका में प्रवेश:** शरीर में प्रवेश करने के बाद, वायरस **मैक्रोफेज (Macrophaes)** और **हेल्पर टी-लिम्फोसाइट्स ($T_H$ कोशिकाओं)** में प्रवेश करता है। 2. **रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन:** वायरस का RNA जीनोम **रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ (Reverse Transcriptase)** एंजाइम की सहायता से वायरल डीएनए (DNA) का निर्माण करता है। 3. **जीनोम में एकीकरण:** यह वायरल डीएनए मेजबान कोशिका के केंद्रक में प्रवेश करता है और मेजबान के डीएनए से जुड़ जाता है। 4. **वायरस का उत्पादन:** संक्रमित मेजबान कोशिका अब नए वायरल आरएनए और वायरल कणों का निर्माण करने लगती है। इस प्रकार मैक्रोफेज **'एचआईवी फैक्ट्री'** की तरह कार्य करते हैं। 5. **टी-हेल्पर कोशिकाओं का विनाश:** नए बने वायरस मैक्रोफेज से बाहर निकलकर अन्य हेल्पर टी-कोशिकाओं पर हमला करते हैं। यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है, जिससे रोगी के शरीर में हेल्पर टी-कोशिकाओं की संख्या में लगातार भारी गिरावट आती है। 6. **प्रतिरक्षा क्षमता का क्षय:** टी-कोशिकाओं की संख्या अत्यधिक कम हो जाने के कारण व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली इतनी कमजोर हो जाती है कि वह *माइकोबैक्टीरियम*, कवक, विषाणु और *टॉक्सोप्लाज्मा* जैसे परजीवियों के मामूली संक्रमण का सामना भी नहीं कर पाता। --- ### **निदान एवं रोकथाम** * **निदान:** इसका निदान मुख्य रूप से **एलिसा (ELISA)** परीक्षण द्वारा किया जाता है। * **रोकथाम के उपाय:** * **NACO** (राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन) और WHO द्वारा जनजागरूकता अभियान चलाना। * केवल डिस्पोजेबल (एक बार इस्तेमाल होने वाली) सुइयों और सिरिंजों का उपयोग सुनिश्चित करना। * रक्त आधान से पहले ब्लड बैंकों में रक्त की अनिवार्य एचआईवी जांच करना। * कंडोम के उपयोग को बढ़ावा देना और सुरक्षित यौन संबंधों के प्रति जागरूक करना।
Q3. मानव मेजबान और मादा एनोफिलीज मच्छर में मलेरिया परजीवी (*Plasmodium*) के संपूर्ण जीवन चक्र का वर्णन कीजिए। मलेरिया के लक्षण और रोकथाम के उपाय भी लिखिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **प्लाज्मोडियम (*Plasmodium*) का जीवन चक्र** \nप्लाज्मोडियम एक द्वि-पोषी (Digenetic) अंतःपरजीवी है, जिसे अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए दो पोषदों की आवश्यकता होती है: मानव (अलिंगी चक्र) और मादा एनोफिलीज मच्छर (लैंगिक चक्र)। --- ### **1. मानव चरण (अलैंगिक जनन):** 1. **संक्रमण:** जब संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर मनुष्य को काटती है, तो वह अपनी लार के साथ परजीवी की संक्रामक अवस्था **जीवाणुज (Sporozoites)** को मानव रक्त में प्रविष्ट कराती है। 2. **यकृत प्रावस्था:** स्पोरोज़ोइट्स रक्त के माध्यम से यकृत कोशिकाओं तक पहुंचते हैं और यकृत कोशिकाओं में अलैंगिक रूप से गुणन करते हैं। अंततः यकृत कोशिकाएं फट जाती हैं और मेरोजोइट्स रक्त में मुक्त होते हैं। 3. **लाल रक्त कणिका (RBC) प्रावस्था:** मेरोजोइट्स RBCs में प्रवेश करते हैं और अलैंगिक गुणन करते हैं। ये RBCs को तोड़ते हैं, जिससे **हीमोज़ोइन (Haemozoin)** नामक विषैला पदार्थ और नए मेरोजोइट्स रक्त में मुक्त होते हैं। 4. **युग्मकजनक निर्माण:** RBCs के भीतर कुछ परजीवी लैंगिक रूपों में विकसित होते हैं जिन्हें **युग्मकजनक (Gametocytes)** कहते हैं। --- ### **2. मच्छर चरण (लैंगिक जनन):** 1. **ग्रहण:** जब मादा एनोफिलीज मच्छर संक्रमित व्यक्ति का रक्त चूसती है, तो ये गेमेटोसाइट्स मच्छर के आंत में पहुंच जाते हैं। 2. **निषेचन एवं विकास:** मच्छर के आंत्र में नर और मादा युग्मकों के बीच निषेचन होता है, जिससे युग्मनज (Zygote) बनता है। 3. **स्पोरोज़ोइट निर्माण:** युग्मनज आंत की दीवार पर ओओसिस्ट (Oocyst) में बदल जाता है और विभाजन द्वारा हजारों **जीवाणुज (Sporozoites)** बनाता है। 4. **स्थानंतरण:** ओओसिस्ट के फटने पर स्पोरोज़ोइट्स मुक्त होकर मच्छर की **लार ग्रंथियों (Salivary glands)** में जमा हो जाते हैं। --- ### **मलेरिया के लक्षण:** * प्रति 3-4 दिन में बार-बार तेज बुखार आना जो ककंपी (Thand) और ठंड लगने के साथ शुरू होता है (यह **हीमोज़ोइन** विष के कारण होता है)। * अत्यधिक पसीना आना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और RBCs के टूटने से एनीमिया (रक्तहीनता)। --- ### **रोकथाम के उपाय:** * मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए कीटनाशकों (जैसे DDT) का छिड़काव करना तथा तालाबों में मच्छर के लार्वा खाने वाली **गैम्बुसिया मछली (Gambusia fish)** को छोड़ना। * घरों के आसपास जलजमाव न होने देना। * मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाले रसायनों और खिड़कियों पर जाली का उपयोग करना।
Q4. प्रतिरक्षा को परिभाषित कीजिए। सहज (जन्मजात) तथा उपार्जित प्रतिरक्षा के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। उपार्जित प्रतिरक्षा अनुक्रिया के दो प्रकारों (तरल एवं कोशिका-माध्यमित प्रतिरक्षा) का विस्तार से वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **प्रतिरक्षा की परिभाषा** **प्रतिरक्षा (Immunity)** किसी जीव की वह समग्र क्षमता है जिसके द्वारा उसका प्रतिरक्षा तंत्र रोग उत्पन्न करने वाले रोगाणुओं (जैसे जीवाणु, विषाणु, कवक और परजीवी) के संक्रमण से शरीर की रक्षा करता है। --- ### **सहज और उपार्जित प्रतिरक्षा में अंतर** | लक्षण | सहज (जन्मजात) प्रतिरक्षा | उपार्जित प्रतिरक्षा | | :--- | :--- | :--- | | **प्रकृति** | यह एक गैर-विशिष्ट (Non-specific) रक्षा प्रणाली है। | यह रोगजनक-विशिष्ट (Pathogen-specific) प्रणाली है। | | **उपस्थिति** | यह जन्म के समय से ही उपस्थित होती है। | यह जीवनकाल के दौरान रोगाणुओं के संपर्क में आने पर विकसित होती है। | | **स्मृति** | इसमें स्मृति (Memory) का गुण नहीं होता है। | इसमें इम्यूनोलॉजिकल स्मृति का गुण पाया जाता है। | | **घटक** | शारीरिक, कायिकीय, कोशिकीय और साइटोकाइन रोध। | बी-लिम्फोसाइट्स (एंटीबॉडी) और टी-लिम्फोसाइट्स। | --- ### **उपार्जित प्रतिरक्षा अनुक्रिया के प्रकार** \nउपार्जित प्रतिरक्षा हमारे रक्त में मौजूद दो विशेष प्रकार के लिम्फोसाइट्स द्वारा संपादित होती है: #### **1. तरल प्रतिरक्षा अनुक्रिया (Humoral Immune Response):** * **मध्यस्थ कोशिकाएं:** मुख्य भूमिका **बी-लिम्फोसाइट्स (B-cells)** द्वारा निभाई जाती है। * **कार्यप्रणाली:** जब रोगाणु शरीर के तरल पदार्थों में प्रवेश करते हैं, तो बी-कोशिकाएं उनके उत्तर में रक्त प्लाज्मा तथा लसिका में **प्रतिरक्षी (Antibodies)** नामक प्रोटीन का उत्पादन करती हैं। * **संरचना:** प्रत्येक एंटीबॉडी अणु में चार पेप्टाइड श्रृंखलाएं होती हैं—दो छोटी हल्की (L) और दो लंबी भारी (H) श्रृंखलाएं ($H_2L_2$)। * **कार्य:** ये एंटीबॉडी विशेष रूप से रोगाणुओं के एंटीजन से जुड़कर उन्हें निष्क्रिय करती हैं। #### **2. कोशिका-माध्यमित प्रतिरक्षा अनुक्रिया (Cell-Mediated Immunity - CMI):** * **मध्यस्थ कोशिकाएं:** यह मुख्य रूप से **टी-लिम्फोसाइट्स (T-cells)** द्वारा मध्यस्थता की जाती है। * **कार्यप्रणाली:** टी-कोशिकाएं स्वयं एंटीबॉडी का स्राव नहीं करती हैं, बल्कि बी-कोशिकाओं को एंटीबॉडी बनाने में मदद करती हैं और संक्रमित कोशिकाओं, कैंसर कोशिकाओं तथा बाहरी ऊतकों पर सीधा हमला करती हैं। * **महत्वपूर्ण भूमिका:** यह अनुक्रिया शरीर को 'स्व' (Self) और 'पर' (Non-self) को पहचानने की क्षमता प्रदान करती है। अंग प्रत्यारोपण के दौरान **अंग अस्वीकृति (Graft rejection)** के लिए मुख्य रूप से CMI ही जिम्मेदार होती है।
Q5. एड्स (AIDS) के संबंध में निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (a) इसके कारक जीव का नाम लिखिए और इसके आनुवंशिक पदार्थ का वर्णन कीजिए। (b) मानव पोषद के अंदर एचआईवी (HIV) संक्रमण और प्रतिकृति (replication) की चरणबद्ध क्रियाविधि समझाइए। (c) एड्स का पता लगाने के लिए प्रयुक्त नैदानिक परीक्षण (diagnostic test) का नाम लिखिए। (d) एड्स के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए निवारक उपायों का उल्लेख कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### (a) कारक जीव और आनुवंशिक पदार्थ - **कारक जीव:** एड्स **एचआईवी (Human Immunodeficiency Virus - HIV)** नामक विषाणु के कारण होता है। - **आनुवंशिक पदार्थ:** एचआईवी एक आवरणयुक्त वायरस है जिसका जीनोम **दो एक-सूत्रिया आरएनए (single-stranded RNA - ssRNA)** अणुओं से बना होता है, जिसमें **रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस (Reverse Transcriptase)** एंजाइम मौजूद होता है। यह **रेट्रोवायरस** (Retrovirus) समूह से संबंधित है। ### (b) मानव शरीर में एचआईवी के संक्रमण और प्रतिकृति की क्रियाविधि 1. **पोषद कोशिकाओं में प्रवेश:** मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद एचआईवी मैक्रोफेज (Macrophages) और **सहायक T-लिम्फोसाइट्स ($T_H$ कोशिकाओं)** में प्रवेश करता है। 2. **रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन:** रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस एंजाइम की मदद से वायरल आरएनए (viral RNA) से वायरल डीएनए (viral DNA) का निर्माण होता है। 3. **डीएनए का एकीकरण:** वायरल डीएनए पोषद कोशिका के डीएनए में एकीकृत (integrate) हो जाता है। 4. **वायरस का गुणन:** संक्रमित कोशिका नए वायरस कणों का उत्पादन शुरू कर देती है। मैक्रोफेज लगातार वायरस का निर्माण करते रहते हैं और एक **'एचआईवी फैक्ट्री'** की तरह कार्य करते हैं। 5. **सहायक T-कोशिकाओं का विनाश:** नए बने एचआईवी कण रक्त में मुक्त होते हैं और अन्य सहायक T-लिम्फोसाइट्स ($T_H$ कोशिकाओं) पर हमला करते हैं। 6. **प्रतिरक्षा क्षय:** यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है, जिससे संक्रमित व्यक्ति के शरीर में सहायक T-लिम्फोसाइट्स की संख्या में लगातार भारी कमी आती है। 7. **प्रतिरक्षाहीनता:** $T_H$ कोशिकाओं की संख्या अत्यधिक घटने से व्यक्ति *माइकोबैक्टीरियम*, विषाणुओं, कवक और *टॉक्सोप्लाज्मा* जैसे परजीवियों के अवसरवादी संक्रमणों का शिकार हो जाता है। ### (c) नैदानिक परीक्षण (Diagnostic Test) - एड्स की जांच के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला परीक्षण **ELISA** (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay) है। - इसकी पुष्टि के लिए **वेस्टर्न ब्लॉट (Western Blot)** परीक्षण किया जाता है। ### (d) रोकथाम और नियंत्रण के उपाय - **सुरक्षित रक्त आधान:** रक्त आधान से पहले रक्त की एचआईवी जांच सुनिश्चित करना। - **डिस्पोजेबल सुइयां:** अस्पतालों और क्लिनिकों में केवल डिस्पोजेबल सीरिंज और सुइयों का उपयोग करना। - **सुरक्षित यौन संबंध:** यौन संपर्क के दौरान कंडोम के उपयोग को बढ़ावा देना। - **जागरूकता कार्यक्रम:** **NACO** (राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन) और WHO जैसी संस्थाओं द्वारा लोगों में जागरूकता फैलाना। - **नशीली दवाओं के सेवन पर रोक:** नसों में ली जाने वाली नशीली दवाओं (intravenous drugs) के उपयोग को रोकना।
Q6. प्रतिरक्षा (Immunity) को परिभाषित कीजिए। सहज (जन्मजात) और उपार्जित प्रतिरक्षा में अंतर स्पष्ट कीजिए। उपार्जित प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं के दो प्रकारों (तरल एवं कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा) का वर्णन कीजिए तथा प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) अणु की संरचनात्मक घटकों को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### प्रतिरक्षा की परिभाषा\nमेजबान जीव की रोग उत्पन्न करने वाले परजीवियों/रोगजनकों से लड़ने की समग्र क्षमता को **प्रतिरक्षा (Immunity)** कहते हैं, जो प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा प्रदान की जाती है। ### सहज और उपार्जित प्रतिरक्षा में अंतर | लक्षण | सहज (जन्मजात) प्रतिरक्षा | उपार्जित प्रतिरक्षा | | :--- | :--- | :--- | | **उत्पत्ति** | यह जन्म के समय से ही मौजूद होती है। | यह जीवनकाल के दौरान रोगजनकों के संपर्क में आने पर विकसित होती है। | | **विशिष्टता** | यह गैर-विशिष्ट (non-specific) रक्षा प्रणाली है। | यह रोगजनक-विशिष्ट (specific) होती है। | | **स्मृति (Memory)** | इसमें कोई प्रतिरक्षात्मक स्मृति नहीं होती। | इसमें प्रतिरक्षात्मक स्मृति होती है, जो पुनः संक्रमण पर तीव्र अनुक्रिया देती है। | | **घटक** | शारीरिक, कायिकीय, कोशिकीय और साइटोकाइन रोध शामिल हैं। | B-लिम्फोसाइट्स और T-लिम्फोसाइट्स शामिल हैं। | ### उपार्जित प्रतिरक्षा अनुक्रिया के प्रकार\nउपार्जित प्रतिरक्षा दो मुख्य तंत्रों के माध्यम से कार्य करती है: 1. **तरल/ह्यूमोराल प्रतिरक्षा अनुक्रिया (Humoral Immune Response):** - यह **B-लिम्फोसाइट्स** द्वारा मध्यस्थता की जाती है। - B-कोशिकाएँ एंटीजन के जवाब में शरीर के तरलों (रक्त और लसिका) में **एंटीबॉडी** नामक विशिष्ट प्रोटीन का उत्पादन करती हैं। - यह कोशिकीय बाह्य रोगजनकों (जैसे बैक्टीरिया) से रक्षा करती है। 2. **कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा (Cell-Mediated Immunity - CMI):** - यह **T-लिम्फोसाइट्स** द्वारा मध्यस्थता की जाती है। - T-कोशिकाएं स्वयं एंटीबॉडी का स्राव नहीं करती हैं, बल्कि B-कोशिकाओं की सहायता करती हैं और संक्रमित कोशिकाओं तथा कैंसर कोशिकाओं को सीधे नष्ट करती हैं। - यह अंग प्रत्यारोपण (Graft Rejection) की अस्वीकृति के लिए जिम्मेदार होती है। ### एंटीबॉडी अणु की संरचना\nएंटीबॉडी ($Ig$) एक 'Y' आकार का ग्लाइकोप्रोटीन अणु है, जो चार पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाओं से बना होता है: - **दो हल्की श्रृंखलाएं (Light Chains - L):** छोटे आकार की कम आणविक भार वाली श्रृंखलाएं। - **दो भारी श्रृंखलाएं (Heavy Chains - H):** बड़े आकार की अधिक आणविक भार वाली श्रृंखलाएं। - इसलिए एंटीबॉडी अणु को **$H_2L_2$** के रूप में दर्शाया जाता है। - **डाइसल्फाइड बंध:** ये चारों श्रृंखलाएं आपस में डाइसल्फाइड बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं। - **परिवर्तनशील और स्थिर क्षेत्र:** 'Y' के ऊपरी सिरों पर **एंटीजन-बाइंडिंग साइट** (Paratope) होती है, जो विशिष्ट एंटीजन से जुड़ती है।
Q7. मानव शरीर और मादा एनोफिलीज मच्छर में प्लास्मोडियम के जीवन चक्र का विस्तृत चरणबद्ध वर्णन कीजिए। साथ ही मलेरिया के मुख्य लक्षण, कारक जीव और रोकथाम के उपायों का उल्लेख कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### रोगजनक जीव\nमलेरिया *प्लास्मोडियम* (*Plasmodium*) नामक प्रोटोजोआ परजीवी के कारण होता है। इसकी विभिन्न प्रजातियाँ जैसे *P. vivax*, *P. falciparum* और *P. malariae* हैं। इनमें *P. falciparum* सबसे घातक मलेरिया के लिए जिम्मेदार है। ### प्लास्मोडियम का जीवन चक्र\nप्लास्मोडियम को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए दो पोषदों (hosts) की आवश्यकता होती है: मानव (द्वितीयक पोषद) और मादा एनोफिलीज मच्छर (प्राथमिक पोषद/वाहक)। #### 1. मानव शरीर में (अलैंगिक चक्र): - **संक्रमण का प्रवेश:** जब संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर मानव को काटती है, तो वह अपनी लार के साथ **जीवाणुज (Sporozoites)** के रूप में परजीवी को रक्त में छोड़ देती है। - **यकृत चरण (Liver Stage):** स्पोरोज़ोइट्स रक्त प्रवाह के माध्यम से यकृत कोशिकाओं तक पहुँचते हैं और वहाँ अलैंगिक रूप से गुणन करते हैं, जिससे यकृत कोशिकाएँ फट जाती हैं। - **लाल रक्त कणिका चरण (Erythrocytic Stage):** यकृत से निकले परजीवी लाल रक्त कणिकाओं (RBCs) पर हमला करते हैं और अलैंगिक गुणन करते हैं, जिससे RBCs नष्ट हो जाती हैं। - **हेमोज़ोइन का स्राव:** RBCs के फटने से **हेमोज़ोइन (Hemozoin)** नामक विषैला पदार्थ निकलता है, जो हर 3 से 4 दिनों में आने वाले तीव्र बुखार और कंपकंपी के लिए जिम्मेदार होता है। - **युग्मकजनक निर्माण (Gametocyte Formation):** अंततः RBCs में नर और मादा **युग्मकजनक (Gametocytes)** का निर्माण होता है। #### 2. मच्छर के शरीर में (लैंगिक चक्र): - **अन्तर्ग्रहण:** जब मादा एनोफिलीज मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटती है, तो वह रक्त के साथ नर और मादा युग्मकजनकों को चूस लेती है। - **निषेचन:** मच्छर की आंत (gut) में नर और मादा युग्मकों का निषेचन और विकास होता है। - **जीवाणुज निर्माण:** युग्मनज (zygote) विकसित होकर ऊकीनेट (ookinete) और फिर ऊसिस्ट (oocyst) बनता है, जिसके अंदर हजारों **स्पोरोज़ोइट्स** बनते हैं। - **ला लार ग्रंथि में प्रवासन:** ये स्पोरोज़ोइट्स मच्छर की लार ग्रंथियों में चले जाते हैं और नए मानव को संक्रमित करने के लिए तैयार रहते हैं। ### मलेरिया के लक्षण - कंपकंपी और ठंड के साथ बार-बार तेज बुखार आना। - बुखार उतरते समय अत्यधिक पसीना आना। - जी मिचलाना, उल्टी, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द। - RBCs के विनाश के कारण एनीमिया (रक्त की कमी)। ### रोकथाम और नियंत्रण के उपाय - **वाहक नियंत्रण:** कीट नाशक (DDT) का छिड़काव करना और मच्छरों के लावे को खाने वाली *गैम्बुसिया* (Gambusia) मछली को तालाबों में छोड़ना। - **व्यक्तिगत सुरक्षा:** मच्छरदानी, ऑल-आउट/मच्छर रोधक क्रीम का उपयोग करना और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना। - **स्वच्छता:** जलजमाव को रोकना ताकि मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके।
Q8. कैंसर को परिभाषित कीजिए। सौम्य (Benign) और दुर्दम (Malignant) ट्यूमर के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। कैंसर के प्रमुख कारणों (कार्सिनोजेन्स), इसके पता लगाने एवं निदान की विधियों तथा उपचार के सामान्य तरीको का वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### कैंसर की परिभाषा\nकैंसर शरीर में कोशिकाओं का एक असामान्य, अनियंत्रित और निरंतर विभाजन है, जिसके परिणामस्वरूप ऊतकों की एक गाँठ बनती है जिसे **ट्यूमर (Tumor)** कहते हैं। सामान्य कोशिकाएं **स्पर्श संदमन (Contact Inhibition)** का गुण दर्शाती हैं (पड़ोसी कोशिकाओं के संपर्क में आने से कोशिका वृद्धि रुकना), जो कैंसर कोशिकाओं में नष्ट हो जाता है। ### सौम्य (Benign) बनाम दुर्दम (Malignant) ट्यूमर * **सौम्य (Benign) ट्यूमर:** - यह अपने मूल स्थान तक ही सीमित रहते हैं। - शरीर के अन्य भागों में नहीं फैलते हैं। - इनसे बहुत कम क्षति होती है और इनकी वृद्धि धीमी होती है। * **दुर्दम (Malignant) ट्यूमर:** - यह नवद्रव्यी (Neoplastic) कोशिकाओं का एक अनियंत्रित रूप से बढ़ने वाला समूह होता है। - आसपास के सामान्य ऊतकों पर आक्रमण कर उन्हें नष्ट कर देते हैं। - यह **मेटास्टेसिस (Metastasis)** का गुण दर्शाते हैं: कैंसर कोशिकाएं प्राथमिक स्थान से टूटकर रक्त द्वारा दूरस्थ अंगों तक पहुँचती हैं और नए ट्यूमर बनाती हैं। यह दुर्दम ट्यूमर का सबसे खतरनाक गुण है। ### कैंसर के कारण (कार्सिनोजेन)\nसामान्य कोशिकाओं का कैंसर कोशिकाओं में रूपांतरण भौतिक, रासायनिक या जैविक कारकों द्वारा होता है जिन्हें **कार्सिनोजेन (कैंसरजन)** कहते हैं: 1. **भौतिक कारक:** आयनकारी विकिरण (X-किरणें, गामा किरणें) और गैर-आयनकारी विकिरण (पराबैंगनी किरणें) DNA को क्षतिग्रस्त कर कैंसर उत्पन्न करती हैं। 2. **रासायनिक कारक:** तंबाकू के धुएं में उपस्थित रसायन (फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण), रंजक और भारी धातुएं। 3. **जैविक कारक:** कैंसरजनक विषाणु (Oncogenic viruses) जिनमें वायरल ओंकोजीन होते हैं, या सामान्य कोशिकाओं में उपस्थित कोशिकीय ओंकोजीन ($c\text{-onc}$) का सक्रिय होना। ### पता लगाना एवं निदान (Detection & Diagnosis) 1. **बायोप्सी और ऊतकविकृति अध्ययन:** ऊतक के पतले टुकड़ों का सूक्ष्मदर्शी द्वारा परीक्षण करना। 2. **रक्त और अस्थि मज्जा परीक्षण:** बढ़ी हुई कोशिका संख्या का पता लगाने के लिए (जैसे ल्यूकेमिया में)। 3. **इमेजिंग तकनीकें:** रेडियोग्राफी (X-रे), कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT स्कैन जो 3D चित्र बनाता है), और मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI)। 4. **मोनोक्लोनल एंटीबॉडी:** कैंसर-विशिष्ट प्रतिजनों की पहचान के लिए उपयोग की जाती हैं। ### उपचार के तरीके 1. **शल्य चिकित्सा (Surgery):** शल्य क्रिया द्वारा ट्यूमर को शरीर से काटकर बाहर निकालना। 2. **विकिरण चिकित्सा (Radiotherapy):** आसपास के सामान्य ऊतकों की सुरक्षा करते हुए ट्यूमर कोशिकाओं पर घातक विकिरण डाला जाता है। 3. **रसायन चिकित्सा (Chemotherapy):** कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कीमोथेराप्यूटिक औषधियों का उपयोग (इसके दुष्प्रभाव बाल झड़ना और एनीमिया हैं)। 4. **प्रतिरक्षा चिकित्सा (Immunotherapy):** रोगियों को **$\alpha$-इंटरफेरॉन** जैसे जैविक प्रतिक्रिया रूपांतरक दिए जाते हैं जो उनके प्रतिरक्षा तंत्र को सक्रिय कर ट्यूमर को नष्ट करते हैं।
Q9. मलेरिया परजीवी *प्लाज्मोडियम* के संपूर्ण जीवन चक्र का स्पष्ट बिंदुओं में वर्णन कीजिए। मानव शरीर और मादा *एनोफिलीज* मच्छर दोनों में होने वाले चरणों को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### परिचय *प्लाज्मोडियम* एक द्वि-पोषदीय (digenetic) अंतःपरजीवी है जो मनुष्यों में मलेरिया रोग उत्पन्न करता है। अपने जीवन चक्र को पूरा करने के लिए इसे दो मेजबानों की आवश्यकता होती है: प्राथमिक मेजबान (मनुष्य) और द्वितीयक/वाहक मेजबान (मादा *एनोफिलीज* मच्छर)। ### A. मानव शरीर में होने वाले चरण (अलैंगिक चक्र / शिजोगोनी) 1. **संक्रमण:** - जब एक संक्रमित मादा *एनोफिलीज* मच्छर किसी मनुष्य को काटती है, तो वह अपनी लार के साथ परजीवी की संक्रामक अवस्था, जिसे **स्पोरोजोइट (जीवाणुज)** कहते हैं, रक्तप्रवाह में डाल देती है। 2. **यकृत प्रावस्था (Liver Stage):** - स्पोरोजोइट्स रक्त संचार के माध्यम से 30 मिनट के भीतर यकृत कोशिकाओं (हेपेटोसाइट्स) तक पहुँचते हैं। - यकृत कोशिकाओं के भीतर परजीवी अलैंगिक रूप से (शिजोगोनी) गुणन करता है और अंततः यकृत कोशिकाओं को तोड़कर मिरोजोइट्स को रक्त में मुक्त करता है। 3. **लाल रक्त कोशिका प्रावस्था (RBC Stage):** - मिरोजोइट्स लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) पर आक्रमण करते हैं और वलय (ring) तथा ट्रोफोजोइट अवस्था से गुजरते हैं। - परजीवी हीमोग्लोबिन को पचाता है, जिससे एक विषैला पदार्थ **हीमोजोइन (Haemozoin)** बनता है। - RBCs के फटने पर हीमोजोइन और नए मिरोजोइट्स मुक्त होते हैं, जिसके कारण हर 3-4 दिनों में आवर्ती उच्च कंपकंपी और तीव्र बुखार आता है। 4. **युग्मकजनन (Gametogony):** - RBCs के अंदर कुछ मिरोजोइट्स नर और मादा **युग्मकोद्भिद (Gametocytes)** में विभेदित हो जाते हैं, जो परिधीय रक्त में तैरते रहते हैं। ### B. मादा *एनोफिलीज* मच्छर में होने वाले चरण (लैंगिक चक्र / स्पोरोगोनी) 1. **ग्रहण:** - जब मादा *एनोफिलीज* मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटती है, तो वह रक्त के साथ युग्मकोद्भिदों को भी चूस लेती है। 2. **निषेचन और विकास:** - मच्छर की आंत/अमाशय में युग्मकों का निषेचन और परिपक्वता होती है। - युग्मनज (Zygote) एक गतिशील रूप **ऊकिनेट (Ookinete)** में बदल जाता है, जो अमाशय की भित्ति को भेदकर **ऊसिस्ट (Oocyst)** बनाता है। 3. **स्पोरोगोनी:** - ऊसिस्ट में अलैंगिक विभाजन (स्पोरोगोनी) होता है जिससे हजारों **स्पोरोजोइट्स** बनते हैं। - ऊसिस्ट फटता है और स्पोरोजोइट्स मुक्त होकर मच्छर की **लार ग्रंथियों** में एकत्र हो जाते हैं, जिससे मच्छर अगले मनुष्य को संक्रमित करने के लिए तैयार हो जाता है।
Q10. प्रतिरक्षा (Immunity) क्या है? सहज (Innate) प्रतिरक्षा और उपार्जित (Acquired) प्रतिरक्षा के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। उपयुक्त उदाहरणों के साथ सक्रिय (Active) और निष्क्रिय (Passive) प्रतिरक्षा का वर्णन कीजिए तथा एंटीबॉडी अणु की संरचना का वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### प्रतिरक्षा की परिभाषा\nप्रतिरक्षा (Immunity) मेजबान शरीर की वह समग्र क्षमता है जिसके द्वारा वह अपने प्रतिरक्षा तंत्र के माध्यम से रोगजनक जीवों (Pathogens) से लड़ने और रक्षा करने में सक्षम होता है। ### 1. सहज (Innate) प्रतिरक्षा बनाम उपार्जित (Acquired) प्रतिरक्षा * **सहज प्रतिरक्षा:** - यह जन्मजात और गैर-विशिष्ट (non-specific) प्रकार की रक्षा प्रणाली है। - यह शरीर में बाहरी कारकों के प्रवेश को रोकने के लिए विभिन्न अवरोधों (Barriers) का उपयोग करती है। - **अवरोधों के प्रकार:** शारीरिक अवरोध (त्वचा, श्लेष्मा झिल्ली), कार्यिकीय अवरोध (अमाशय का अम्ल, लार, आँसू), कोशिकीय अवरोध (न्यूट्रोफिल्स, मोनोसाइट्स, मैक्रोफेज), और साइटोकाइन अवरोध (इंटरफेरॉन)। - इसमें कोई प्रतिरक्षात्मक स्मृति (Memory) नहीं होती है। * **उपार्जित प्रतिरक्षा:** - यह रोगजनक-विशिष्ट (pathogen-specific) होती है और जीवनकाल के दौरान रोगाणुओं के संपर्क में आने पर विकसित होती है। - इसकी मुख्य विशेषता **स्मृति (Memory)** है; एक ही रोगाणु के दोबारा संपर्क में आने पर तीव्र द्वितीयक (anamnestic) प्रतिक्रिया होती है। - इसमें T-लिम्फोसाइट्स (कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा) और B-लिम्फोसाइट्स (तरल प्रतिरक्षा) शामिल होते हैं। ### 2. सक्रिय (Active) और निष्क्रिय (Passive) प्रतिरक्षा * **सक्रिय प्रतिरक्षा:** जब मेजबान शरीर प्रतिजन (Antigen) के संपर्क में आता है और स्वयं एंटीबॉडी का निर्माण करता है। यह धीमी प्रक्रिया है तथा पूर्ण प्रभाव दिखाने में समय लेती है। उदाहरण: प्राकृतिक संक्रमण के बाद या टीकाकरण (जैसे पोलियो वैक्सीन) से प्राप्त प्रतिरक्षा। * **निष्क्रिय प्रतिरक्षा:** जब शरीर की रक्षा के लिए तैयार एंटीबॉडी सीधे दिए जाते हैं। यह त्वरित सुरक्षा प्रदान करती है। उदाहरण: टिटनेस-रोधी सीरम (ATS) का इंजेक्शन, या माँ के पहले दूध (कोलोस्ट्रम) से शिशु को मिलने वाले IgA एंटीबॉडी। ### 3. एंटीबॉडी अणु की संरचना * एक एंटीबॉडी अणु चार पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं से बना होता है: **दो छोटी/हल्की (L) श्रृंखलाएं** और **दो बड़ी/भारी (H) श्रृंखलाएं**, जो डाइसल्फाइड बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं। * इसलिए इसे **$H_2L_2$** के रूप में दर्शाया जाता है। * प्रत्येक एंटीबॉडी अणु 'Y' आकार का होता है, जिसमें एक परिवर्तनशील क्षेत्र (प्रतिजन-बंधक स्थल या पैराटोप) और एक स्थिर क्षेत्र होता है। * एंटीबॉडी के प्रमुख वर्ग IgG, IgA, IgM, IgE और IgD हैं।
Q11. ओपिऑइड्स (Opioids) और कैनाबिनोइड्स (Cannabinoids) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए, उनके पादप स्रोतों, लक्षित रिसेप्टर्स और मानव शरीर पर प्राथमिक प्रभावों का उल्लेख कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): 1. **ओपिऑइड्स (Opioids):** - **स्रोत:** ये पोस्ता (अफीम) के पौधे (*Papaver somniferum*) के लेटेक्स से प्राप्त होते हैं। - **लक्षित रिसेप्टर्स:** ये हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) और जठरांत्र संबंधी मार्ग (GI tract) में मौजूद विशिष्ट ओपिऑइड रिसेप्टर्स से जुड़ते हैं। - **प्रभाव एवं उदाहरण:** उदाहरण में मॉर्फिन और हेरोइन शामिल हैं। मॉर्फिन एक प्रभावी शामक (Sedative) और दर्द निवारक है। हेरोइन एक अवसादक (Depressant) है जो शरीर के कार्यों को धीमा कर देती है। 2. **कैनाबिनोइड्स (Cannabinoids):** - **स्रोत:** ये भांग के पौधे (*Cannabis sativa*) के पुष्पक्रम (Inflorescence) से प्राप्त होते हैं। - **लक्षित रिसेप्टर्स:** ये मुख्य रूप से मस्तिष्क में मौजूद कैनाबिनोइड रिसेप्टर्स के साथ क्रिया करते हैं। - **प्रभाव एवं उदाहरण:** इसके उदाहरण मैरिजुआना, हशीश, चरस और गांजा हैं। ये मुख्य रूप से शरीर के हृदय-संवहनी तंत्र (Cardiovascular system) को प्रभावित करते हैं।
Q12. मानव मेजबान कोशिकाओं के भीतर ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) के प्रतिकृति तंत्र की व्याख्या कीजिए जिसके कारण प्रतिरक्षा में कमी (Immunodeficiency) आती है। 3 Marks
उत्तर (Answer): मानव कोशिकाओं के भीतर HIV का प्रतिकृति तंत्र (Replication mechanism) निम्नलिखित चरणों में होता है: 1. **प्रवेश:** मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद, वायरस मैक्रोफेज और सहायक टी-लिम्फोसाइट्स ($T_H$ कोशिकाओं) से जुड़ता है। 2. **रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन:** वायरस का RNA जीनोम **रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस** एंजाइम की मदद से वायरल DNA का निर्माण करता है। 3. **एकिकरण (Integration):** यह वायरल DNA मेजबान कोशिका के केंद्रक में प्रवेश करता है और मेजबान DNA के साथ जुड़ जाता है, जिससे कोशिका नए वायरस कण बनाने लगती है। 4. **मैक्रोफेज HIV फैक्ट्री के रूप में:** मैक्रोफेज लगातार वायरस कणों का उत्पादन करते रहते हैं और HIV फैक्ट्री की तरह काम करते हैं। 5. **सहायक T-कोशिकाओं में कमी:** साथ ही, HIV सहायक T-कोशिकाओं में प्रवेश कर बहुगुणित होता है और नई T-कोशिकाओं को नष्ट करता है। इससे T-कोशिकाओं की संख्या में भारी गिरावट आती है। 6. **परिणाम:** सहायक T-कोशिकाओं की कमी से रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक कमजोर हो जाती है और वह सामान्य रोगाणुओं जैसे माइकोबैक्टीरियम, कवक और टोक्सोप्लाज्मा के अवसरवादी संक्रमणों का शिकार हो जाता है।
Q13. सौम्य (Benign) और दुर्दम (Malignant) अर्बुद (Tumors) के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। मेटास्टेसिस (Metastasis) को दुर्दम अर्बुद का सबसे खतरनाक गुण क्यों माना जाता है? 3 Marks
उत्तर (Answer): सौम्य और दुर्दम अर्बुद के बीच अंतर: - **सौम्य अर्बुद (Benign Tumors):** ये अपने मूल स्थान तक ही सीमित रहते हैं और शरीर के अन्य भागों में नहीं फैलते हैं। इनसे बहुत कम क्षति होती है। - **दुर्दम अर्बुद (Malignant Tumors):** ये अनियंत्रित रूप से विभाजित होने वाली कोशिकाओं का समूह होते हैं, जो तेजी से बढ़ते हैं, आसपास के ऊतकों पर आक्रमण करते हैं और सामान्य कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। **मेटास्टेसिस (Metastasis):**\nमेटास्टेसिस वह प्रक्रिया है जिसमें कैंसर कोशिकाएं प्राथमिक अर्बुद से अलग होकर रक्त या लसिका के माध्यम से शरीर के दूरस्थ अंगों तक पहुँचती हैं। वहां पहुंचकर ये कोशिकाएं द्वितीयक अर्बुद बनाना शुरू कर देती हैं। इसे दुर्दम अर्बुद की सबसे खतरनाक संपत्ति माना जाता है क्योंकि यह स्थानीय उपचार (जैसे सर्जरी) को निष्प्रभावी बना देता है और पूरे शरीर में कैंसर फैला देता है।
Q14. परजीवी के प्रवेश से लेकर बुखार के लक्षणों के प्रकट होने तक, मानव मेजबान (Human Host) में प्लाज्मोडियम के जीवन चक्र का वर्णन कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): मानव मेजबान में *प्लाज्मोडियम* का जीवन चक्र इस प्रकार होता है: 1. **प्रवेश:** *प्लाज्मोडियम* संक्रमित मादा *एनोफिलीज* मच्छर के काटने पर **स्पोरोज़ोइट्स** (संक्रामक चरण) के रूप में मानव शरीर में प्रवेश करता है। 2. **यकृत चरण:** परजीवी रक्त प्रवाह द्वारा यकृत कोशिकाओं (हेपेटोसाइट्स) तक पहुंचते हैं और यकृत कोशिकाओं के भीतर अलैंगिक रूप से बहुगुणित होते हैं, अंततः यकृत कोशिकाओं को फोड़कर परजीवियों को रक्त में छोड़ देते हैं। 3. **लाल रक्त कणिका चरण:** परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) पर हमला करते हैं और अलैंगिक रूप से बहुगुणित होते हैं, जिससे RBCs फट जाती हैं। 4. **हीमोज़ोइन का स्राव:** RBCs के फटने से **हीमोज़ोइन** नामक एक विषैला पदार्थ निकलता है, जो हर 3 से 4 दिनों में आने वाली कंपकंपी और तेज़ बुखार के लिए जिम्मेदार होता है। 5. **गेमेटोसाइट का निर्माण:** RBCs के अंदर परजीवी लैंगिक चरणों (नर और मादा गेमेटोसाइट्स) में विकसित होते हैं, जिन्हें बाद में मच्छर द्वारा रक्त चूसते समय ग्रहण कर लिया जाता है।
Q15. उपयुक्त उदाहरणों के साथ सक्रिय प्रतिरक्षा (Active Immunity) और निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity) के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): सक्रिय प्रतिरक्षा (Active Immunity) और निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity) के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं: 1. **परिभाषा एवं क्रियाविधि:** सक्रिय प्रतिरक्षा तब उत्पन्न होती है जब शरीर रोगाणुओं (जीवित या मृत) या एंटीजन के संपर्क में आता है, जिससे शरीर स्वयं एंटीबॉडी का निर्माण करता है। निष्क्रिय प्रतिरक्षा तब होती है जब बने-बनाये एंटीबॉडी को सीधे शरीर में डाला जाता है। 2. **प्रतिक्रिया का समय:** सक्रिय प्रतिरक्षा धीरे-धीरे विकसित होती है और अपना पूर्ण प्रभाव दिखाने में समय लेती है। निष्क्रिय प्रतिरक्षा तत्काल सुरक्षा प्रदान करती है। 3. **स्मृति कोशिकाएं:** सक्रिय प्रतिरक्षा में दीर्घकालिक स्मृति कोशिकाओं का निर्माण होता है, जबकि निष्क्रिय प्रतिरक्षा में स्मृति कोशिकाओं का निर्माण नहीं होता है। 4. **उदाहरण:** - *सक्रिय प्रतिरक्षा:* चेचक जैसे प्राकृतिक संक्रमण से उबरने के बाद मिली प्रतिरक्षा या टीकाकरण (जैसे पोलिया वैक्सीन)। - *निष्क्रिय प्रतिरक्षा:* माँ के दूध (कोलोस्ट्रम) के माध्यम से शिशु में IgA एंटीबॉडी का स्थानांतरण, या टेटनस का इंजेक्शन।