मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय: जीव और समष्टियाँ (Organisms and Populations) - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स
यह नोट्स माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्य प्रदेश (MP Board) के कक्षा 12वीं के जीव विज्ञान के पाठ्यक्रम पर आधारित हैं।
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मुख्य परिभाषाएँ (Key Definitions)
1. पारिस्थितिकी (Ecology): जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत जीवों तथा उनके अजैव (भौतिक) और जैव पर्यावरण के बीच पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है।
2. समष्टि (Population): एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में एक समय में रहने वाली एक ही जाति (Species) के कुल जीवों का समूह।
3. समुदाय (Community): एक ही क्षेत्र में निवास करने वाली विभिन्न जातियों की समष्टियों का समूह जो आपस में परस्पर क्रिया करती हैं।
4. बायोम (Biome): पृथ्वी पर एक बहुत बड़ा पारिस्थितिक तंत्र जिसमें विशेष प्रकार की जलवायु, वनस्पति और जीव-जंतु पाए जाते हैं (जैसे- टुंड्रा, मरुस्थल, वन)।
5. निकेत (Niche): किसी जीव का पारिस्थितिक तंत्र में उसका कार्यात्मक स्थान या स्थिति, जिसमें उसके संसाधन उपयोग और पर्यावरण के साथ संबंध शामिल होते हैं।
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तापमान और जीव (Temperature and Organisms)
जीव तापमान सहनशीलता के आधार पर दो प्रकार के होते हैं:
1. पृथुतातापी (Eurythermal): वे जीव जो तापमान की एक विस्तृत (wide) परास को सहन कर सकते हैं (जैसे- अधिकांश स्तनधारी और पक्षी)।
2. तनुतातापी (Stenothermal): वे जीव जो तापमान की एक संकीर्ण (narrow) परास को ही सहन कर सकते हैं (जैसे- प्रवाल या कोरल, पोलर बियर)।
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जीवों के अनुकूलन (Adaptations in Organisms)
1. निलंबन (Suspension): प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए जीवों द्वारा अपनी चयापचय (metabolic) गतिविधियों को धीमा कर लेना।
- उदाहरण: उच्च श्रेणी के जंतुओं में शीतनिद्रा (Hibernation) और ग्रीष्मनिद्रा (Aestivation), तथा सूक्ष्मजीवों में बीजाणु (Spores) बनना।
2. प्रवास (Migration): जीवों द्वारा प्रतिकूल और तनावपूर्ण स्थानीय पर्यावरण से कुछ समय के लिए दूर किसी अधिक अनुकूल क्षेत्र में चले जाना और अनुकूल स्थिति आने पर वापस लौटना (जैसे- पक्षियों का प्रवास)।
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समष्टि की विशेषताएँ और विशेषता सूचक (Population Attributes)
- जन्म दर (Natality): प्रति इकाई समय में समष्टि में जन्म लेने वाले नए जीवों की संख्या।
- मृत्यु दर (Mortality): प्रति इकाई समय में समष्टि में मरने वाले जीवों की संख्या।
- लिंग अनुपात (Sex Ratio): किसी समष्टि में स्त्रियों और पुरुषों (नर और मादा) का अनुपात।
- आयु पिरामिड (Age Pyramid): जब विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की संख्या को प्रतिशत के रूप में दर्शाया जाता है, तो उसे आयु पिरामिड कहते हैं (यह पूर्व-प्रजनन, प्रजनन और उत्तर-प्रजनन अवस्था के होते हैं)।
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समष्टि वृद्धि समीकरण (Population Growth Equations)
समष्टि का घनत्व (N) समय के साथ बदलता रहता है। मुख्य रूप से दो प्रकार के वृद्धि मॉडल होते हैं:
#### 1. चरघातांकी वृद्धि (Exponential Growth)
जब संसाधन (भोजन और स्थान) असीमित होते हैं।
- समीकरण:
dN / dt = rN
- समाकलित रूप:
Nt = N0 * e^(rt)
- जहाँ,
N = समष्टि घनत्व समय t पर
N0 = प्रारंभिक समष्टि घनत्व (t = 0 पर)
r = प्राकृतिक वृद्धि दर (Intrinsic rate of natural increase)
e = प्राकृतिक लघुगणक का आधार (Base of natural logarithms, = 2.718)
#### 2. संभार तंत्र वृद्धि (Logistic Growth)
जब संसाधन सीमित होते हैं, तो समष्टि वृद्धि अंततः 'वाहन क्षमता' (Carrying capacity, K) तक पहुँच जाती है। इसे 'वेर्हल्स्ट-परल लॉजिस्टिक वृद्धि' भी कहते हैं।
- समीकरण:
dN / dt = rN * (K - N) / K
- जहाँ,
N = समष्टि घनत्व समय t पर
r = प्राकृतिक वृद्धि दर
K = वाहन क्षमता (Carrying capacity)
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समष्टि पारस्परिक क्रियाएँ (Population Interactions)
दो अलग-अलग जातियों के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाएँ धनात्मक (+), ऋणात्मक (-) या तटस्थ (0) हो सकती हैं:
| क्रम | पारस्परिक क्रिया का प्रकार | जाति 'A' पर प्रभाव | जाति 'B' पर प्रभाव | उदाहरण |
| :--- | :--- | :---: | :---: | :--- |
| 1. | सहजीवािता (Mutualism) | + | + | लाइकेन (कवक और शैवाल), माइकोराइजा |
| 2. | स्पर्धा (Competition) | - | - | घास के मैदानों में शाकाहारी जीव |
| 3. | परभक्षण (Predation) | + | - | शेर और हिरण, बाघ और बकरी |
| 4. | परजीविता (Parasitism) | + | - | अमरबेल (Cuscuta), मनुष्य के आंत में कृमि |
| 5. | सहभोजिता (Commensalism) | + | 0 | आम की शाखा पर ऑर्किड, व्हेल पर बार्नेकल |
| 6. | असहभोजिता / अदम्य प्रभाव (Amensalism) | - | 0 | पेनिसिलिन द्वारा बैक्टीरिया की वृद्धि रोकना |
(नोट: (+) लाभ, (-) हानि, (0) न लाभ न हानि)
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 जीव और समष्टियाँ
जीव और पर्यावरण
जैव कारक
अजैव कारक
तापमान
जल
प्रकाश
मृदा
पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रियाएँ
समस्थापन (होमियोस्टैसिस)
संरूपण (कन्फर्म)
नियमन (रेगुलेट)
प्रवास (माइग्रेट)
निलंबन (सस्पेंड)
अनुकूलन (अडॉप्टेशन)
मरुद्भिद अनुकूलन
जलीय अनुकूलन
शरीरक्रियात्मक अनुकूलन
समष्टि विशेषताएँ (पॉपुलेशन एट्रीब्यूट्स)
जन्म दर (नेटेलिटी)
मृत्यु दर (मॉर्टेलिटी)
लिंग अनुपात
आयु पिरामिड
वर्धमान
स्थिर
ह्रासमान
समष्टि घनत्व
समष्टि वृद्धि (पॉपुलेशन ग्रोथ)
वृद्धि को प्रभावित करने वाले कारक
जन्म
मृत्यु
आप्रवासन
उत्प्रवासन
वृद्धि मॉडल
चरघातांकी वृद्धि (एक्सपोनेंशियल ग्रोथ)
लॉजिस्टिक वृद्धि (लॉजिस्टिक ग्रोथ)
वहन क्षमता (कैरीइंग कैपेसिटी)
समष्टि पारस्परिक क्रियाएँ (पॉपुलेशन इंटरेक्शन)
सहोपकारिता (म्यूचुअलिज्म)
उदाहरण: लाइकेन, माइकोराइजा
स्पर्धा (कंपीटिशन)
गॉस का प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत
परभक्षण (प्रिडेशन)
उदाहरण: बाघ और हिरण
परजीविता (पैरासिटिज्म)
अंतः परजीवी
बाह्य परजीवी
brood परजीविता
सहभोजिता (कमसलिज्म)
उदाहरण: ऑर्किड और आम
अमंसलिज्म (एमेंसलिज्म)
उदाहरण: पेनिसिलिन और बैक्टीरिया
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### समष्टि अंतःक्रियाओं का परिचय\nप्रकृति में, जंतु, पौधे और सूक्ष्मजीव अलग-थलग नहीं रहते हैं बल्कि एक जैविक समुदाय बनाने के लिए विभिन्न तरीकों से अंतःक्रिया करते हैं। दो अलग-अलग जातियों की समष्टियों के बीच अंतःक्रियाओं से अंतरजातीय (Interspecific) अंतःक्रियाएं उत्पन्न होती हैं। ये अंतःक्रियाएं दोनों या किसी एक जाति के लिए लाभदायक, हानिकारक या तटस्थ हो सकती हैं।
### समष्टि अंतःक्रियाओं के प्रमुख प्रकार
#### 1. सहोपकारिता (Mutualism - +/+)
- इस अंतःक्रिया में दोनों संबंधित जातियों को लाभ होता है।
- **उदाहरण:** लाइकेन कवक और शैवाल या सायनोबैक्टीरिया के बीच घनिष्ठ सहोपकारी संबंध का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसी प्रकार, माइकोराइजा कवक और उच्च पौधों की जड़ों के बीच का संबंध है। पौधे-परागकण अंतःक्रियाएं (जैसे अंजीर का पेड़ और ततैया) इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं जहाँ दोनों साझेदारों को पारस्परिक लाभ होता है और वे एक-दूसरे के बिना अपना जीवन चक्र पूरा नहीं कर सकते हैं।
#### 2. प्रतिस्पर्धा (Competition - -/-)
- अंतरजातीय प्रतिस्पर्धा कार्बनिक विकास में एक शक्तिशाली बल है। यह तब होती है जब दो जातियाँ एक ही सीमित संसाधन के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं।
- **उदाहरण:** दक्षिण अमेरिकी झीलों में आने वाले राजहंस (Flamingos) और स्थानीय मछलियाँ अपने सामान्य भोजन, ज़ूप्लैंकटन के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। गॉस का प्रतिस्पर्धी बहिष्करण सिद्धांत (Gause's Competitive Exclusion Principle) यह बताता है कि समान संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाली दो निकट संबंधित जातियाँ अनिश्चित काल तक एक साथ नहीं रह सकती हैं और प्रतिस्पर्धी रूप से हीन जाति अंततः समाप्त हो जाएगी।
#### 3. परभक्षण (Predation - + / -)
- इस अंतःक्रिया में, एक जीव (परभक्षी) दूसरे जीव (शिकार) को मारता है और खाता है। प्रकृति जाति विविधता बनाए रखने के लिए परभक्षी का उपयोग करती है।
- **उदाहरण:** बाघों द्वारा हिरण का शिकार करना, या गौरैयों द्वारा बीज खाना। परभक्षी विभिन्न पोषण स्तरों पर ऊर्जा के हस्तांतरण के लिए नाड़ी का काम करते हैं और शिकार की आबादी को नियंत्रण में रखने में मदद करते हैं।
#### 4. परजीविता (Parasitism - + / -)
- इस विधा में, एक जाति (परजीवी) भोजन और आश्रय के लिए दूसरी जाति (पोषक या होस्ट) पर निर्भर करती है, इस प्रक्रिया में पोषक को नुकसान पहुँचाती है। कई परजीवी पोषक विशिष्ट (Host-specific) होने के लिए विकसित हुए हैं।
- **उदाहरण:** मानव यकृत पर्णाभ (Liver fluke), कुत्तों पर टिक (Ticks), और हेज पौधों पर उगने वाला कस्कुटा (अमरबेल) पौधा। परजीवी अक्सर अनावश्यक ज्ञानेंद्रियों के ह्रास, आसंजन अंगों या चूसकों की उपस्थिति और उच्च प्रजनन क्षमता जैसे अनुकूलन से गुजरते हैं।
#### 5. सहभोजिता (Commensalism - + / 0)
- इस अंतःक्रिया में, एक जाति को लाभ होता है, जबकि दूसरी जाति को न तो कोई नुकसान होता है और न ही कोई लाभ होता है।
- **उदाहरण:** आम की शाखा पर एक अधिपादप (Epiphyte) के रूप में उगने वाला ऑर्किड, और व्हेल की पीठ पर उगने वाले बार्नेकल। इसका एक अन्य उत्कृष्ट उदाहरण मवेशी बगुले और चरने वाले मवेशियों के बीच की अंतःक्रिया है।
#### 6. अमैंसलिज्म (Amensalism - - / 0)
- इस अंतःक्रिया में, एक जाति को नुकसान होता है, जबकि दूसरी अप्रभावित रहती है।
- **उदाहरण:** ऐलेेलोपैथी की घटना, जहाँ कुछ कवक या पौधे ऐसे रसायन (जैसे *पेनिसिलियम* से पेनिसिलिन) स्रावित करते हैं जो बिना स्वयं कोई लाभ प्राप्त किए आसपास की सूक्ष्मजीव प्रजातियों के विकास को रोक देते हैं।
उत्तर (Answer): ### समष्टि वृद्धि का परिचय\nकिसी भी जाति के लिए समष्टि का आकार एक स्थिर पैरामीटर नहीं है। यह भोजन की उपलब्धता, परभक्षी के दबाव और मौसम सहित विभिन्न कारकों के आधार पर बदलता रहता है। दो मुख्य समष्टि वृद्धि मॉडल निम्नलिखित हैं:
### 1. चरघातांकी वृद्धि मॉडल (Exponential Growth Model)
- **स्थिति:** तब होती है जब किसी आवास में संसाधन (भोजन और स्थान) असीमित होते हैं।
- **समीकरण:** $\frac{dN}{dt} = rN$
- जहाँ $N =$ समष्टि घनत्व, $t =$ समय, $r =$ प्राकृतिक वृद्धि की आंतरिक दर।
- **समाकलित रूप:** $N_t = N_0 e^{rt}$
- **आलेख:** जब समष्टि घनत्व ($N$) को समय ($t$) के विरुद्ध आलेखित किया जाता है, तो चरघातांकी वृद्धि वक्र **J-आकार का वक्र** बनाता है।
- **महत्व:** वास्तविक रूप से संसाधन सीमित होते हैं, इसलिए चरघातांकी वृद्धि केवल असाधारण परिस्थितियों में ही हो सकती है।
### 2. लॉजिस्टिक वृद्धि मॉडल (Logistic Growth Model)
- **स्थिति:** प्रकृति में, किसी दिए गए आवास में अधिकतम संभावित संख्या का समर्थन करने के लिए पर्याप्त संसाधन होते हैं, जिसे वहन क्षमता (Carrying capacity - $K$) कहा जाता है।
- **समीकरण:** $\frac{dN}{dt} = rN \left( \frac{K - N}{K} \right)$
- जहाँ $K =$ वहन क्षमता।
- **आलेख:** सीमित संसाधनों वाले आवास में बढ़ने वाली समष्टि एक प्रारंभिक लैग चरण, उसके बाद त्वरण और मंदन के चरण, और अंत में एक स्पर्शोन्मुख (asymptote) दिखाती है, जिसके परिणामस्वरूप एक **सिग्मायॉइड वक्र (S-आकार का वक्र)** बनता है।
- **महत्व:** वर्हूलस्ट-पर्ल लॉजिस्टिक ग्रोथ अधिक यथार्थवादी है क्योंकि प्रकृति में किसी भी प्रजाति की समष्टि के पास चरघातांकी वृद्धि की अनुमति देने के लिए असीमित संसाधन नहीं होते हैं।
उत्तर (Answer): ### अजैविक कारकों का परिचय\nकिसी जीव का पर्यावरण जैविक घटकों (जीवित प्राणियों) और अजैविक घटकों (निर्जीव भौतिक और रासायनिक कारकों) से मिलकर बनता है। अजैविक कारक मुख्य रूप से पृथ्वी पर जीवों के अनुकूलन, भौगोलिक वितरण और शारीरिक कार्यों को निर्धारित करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण चार अजैविक कारक निम्नलिखित हैं:
### 1. तापमान
- तापमान सबसे अधिक पारिस्थितिक रूप से प्रासंगिक पर्यावरणीय कारक है।
- यह भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर और मैदानों से पहाड़ों की चोटी की ओर घटता जाता है।
- **तापीय सहिष्णु (Eurythermal):** वे जीव जो तापमान की एक विस्तृत श्रृंखला को सहन कर सकते हैं (जैसे, स्तनधारी, पक्षी)।
- **अल्पतापी (Stenothermal):** वे जीव जो तापमान की एक संकीर्ण सीमा तक सीमित होते हैं (जैसे, ध्रुवीय भालू)।
### 2. जल
- पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति जल में हुई थी और इसके बिना जीवन असंभव है।
- पौधों की उत्पादकता और वितरण बहुत हद तक जल पर निर्भर करता है।
- **लवणता अनुकूलन:** जीवों को जल में नमक सांद्रता के प्रति उनकी सहनशीलता के आधार पर **यूरीहेलाइन** और **स्टेनोहेलाइन** के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
### 3. प्रकाश
- पौधे प्रकाश संश्लेषण के लिए सूर्य के प्रकाश पर निर्भर हैं।
- कई जानवर अपने चारे, प्रजनन और प्रवास गतिविधियों के समय के लिए प्रकाश तीव्रता और फोटोपरिड (दिन की लंबाई) में दैनिक और मौसमी बदलावों का उपयोग करते हैं।
### 4. मृदा
- विभिन्न स्थानों पर मिट्टी की प्रकृति और गुण जलवायु, अपक्षय प्रक्रिया और मृदा विकास पर निर्भर करते हैं।
- मिट्टी की संरचना, कणों का आकार और एकत्रीकरण मिट्टी की पारगम्यता और जल-धारण क्षमता को निर्धारित करते हैं। ये विशेषताएं किसी भी क्षेत्र में वनस्पति को बड़े पैमाने पर निर्धारित करती हैं।
उत्तर (Answer): ### समष्टि अंतर्क्रियाओं का परिचय\nप्रकृति में, जंतु, पौधे और सूक्ष्मजीव अकेले नहीं रहते हैं बल्कि एक जैविक समुदाय बनाने के लिए विभिन्न तरीकों से बातचीत करते हैं। अंतर-विशिष्ट अंतर्क्रियाएं दो अलग-अलग जातियों की समष्टियों के मेल से उत्पन्न होती हैं। ये अंतर्क्रियाएं दोनों जातियों के लिए या उनमें से किसी एक के लिए लाभदायक, हानिकारक या तटस्थ हो सकती हैं।
### 1. सहोपकारिता (+/+)\nयह अंतर्क्रिया दोनों अंतर्क्रिया करने वाली जातियों को लाभ पहुँचाती है।
- **उदाहरण:** लाइकेन कवक और प्रकाशसंश्लेषी शैवाल या सायनोबैक्टीरिया के बीच घनिष्ठ सहोपकारी संबंध को दर्शाते हैं।
- **उदाहरण:** माइकोराइजा कवक और उच्च पौधों की जड़ों के बीच का संबंध है। कवक पौधे को मिट्टी से आवश्यक पोषक तत्व अवशोषित करने में मदद करता है, जबकि पौधा कवक को ऊर्जा प्रदान करने वाले कार्बोहाइड्रेट प्रदान करता है।
### 2. प्रतिस्पर्धा (-/-)\nयह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दूसरी जाति की उपस्थिति में एक जाति की फिटनेस काफी कम हो जाती है।
- **गॉस का प्रतिस्पर्धी बहिष्करण सिद्धांत:** इसके अनुसार, एक ही संसाधन के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाली दो निकट संबंधित जातियाँ अनिश्चित काल तक एक साथ नहीं रह सकती हैं और प्रतिस्पर्धी रूप से हीन जाति अंततः समाप्त हो जाएगी।
- **उदाहरण:** दक्षिण अमेरिकी झीलों में, आने वाले राजहंस (flamingos) और निवासी मछलियाँ अपने सामान्य भोजन, ज़ूप্লॅंकटन के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं।
### 3. परभक्षण (+/-)\nइस अंतर्क्रिया में एक जीव दूसरे जीव को खा जाता है। परभक्षी ऊर्जा को विभिन्न पोषण स्तरों तक पहुँचाने और शिकार की समष्टियों को नियंत्रण में रखने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
- **उदाहरण:** बाघों द्वारा हिरण का शिकार करना, या गौरइयों द्वारा बीज खाना।
### 4. परजीविता (+/-)\nइस पद्धति में, एक जीव (परजीवी) भोजन और आश्रय के लिए दूसरे (पोषी या होस्ट) पर निर्भर रहता है, जिससे पोषी को नुकसान पहुँचता है।
- **उदाहरण:** मानव यकृत पर्णकृमि (liver fluke), कुत्तों पर टिक, और कस्कुटा (अमरबेल)।
### 5. सहभोजिता (+/0)\nइस अंतर्क्रिया में एक जाति को लाभ होता है, जबकि दूसरी जाति को न तो कोई हानि होती है और न ही लाभ।
- **उदाहरण:** आम की शाखा पर अधिपादप (epiphyte) के रूप में उगने वाला ऑर्किड, और व्हेल की पीठ पर उगने वाले बार्नेकल।
### 6. अमंसलिवाद (-/0)\nइस अंतर्क्रिया में एक जाति को हानि होती है, जबकि दूसरी अप्रभावित रहती है।
- **उदाहरण:** पेनिसिलियम से निकलने वाला पेनिसिलिन कवक स्राव आसपास के बैक्टीरिया के विकास को रोकता है या मार देता है, जबकि स्वयं अप्रभावित रहता है।
उत्तर (Answer): ### अजैविक कारकों का परिचय\nकिसी जीव का पर्यावरण जैविक घटकों और अजैविक घटकों (भौतिक और रासायनिक कारकों) से मिलकर बनता है। तापमान और वर्षण में वार्षिक बदलाव के साथ इन अजैविक कारकों के क्षेत्रीय और स्थानीय बदलाव रेगिस्तान, वर्षा वन, टुंड्रा जैसे प्रमुख बायोम का निर्माण करते हैं।
### 1. तापमान\nतापमान सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक रूप से प्रासंगिक पर्यावरणीय कारक है।
- **मुख्य बिंदु:**
- भूमि पर औसत तापमान मौसमी रूप से बदलता है, जो भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर कम होता जाता है।
- तापमान जीवों के एंजाइम की गतिशीलता और चयापचय (metabolism) को प्रभावित करता है।
- जीव **यूथर्मल** (विस्तृत तापमान सहन करने वाले) या **स्टेनोथर्मल** (सीमित तापमान सहन करने वाले) हो सकते हैं।
### 2. जल\nजीवन के लिए जल आवश्यक है; पृथ्वी पर जीवन पानी में उत्पन्न हुआ था।
- **मुख्य बिंदु:**
- पौधों की उत्पादकता जल की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
- जलीय जीवों के लिए पानी की लवणता (salinity) महत्वपूर्ण होती है।
- जीव **यूराहालाइन** और **स्टेनोहालाइन** हो सकते हैं।
### 3. प्रकाश\nसूर्य का प्रकाश प्रकाश संश्लेषण के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
- **मुख्य बिंदु:**
- कई पौधे पुष्पन के लिए दीप्तिकाल (photoperiod) पर निर्भर करते हैं।
- महासागरों की गहराइयों में (>500 मीटर) प्रकाश नहीं पहुँच पाता है।
### 4. मृदा\nविभिन्न स्थानों पर मृदा की प्रकृति और गुण जलवायु, अपक्षय प्रक्रिया और मृदा विकास पर निर्भर करते हैं।
- **मुख्य बिंदु:**
- मृदा की संरचना और कणों का आकार जल धारण क्षमता निर्धारित करता है।
- मृदा का pH और खनिज संयोजन वनस्पति की वृद्धि को तय करते हैं।
उत्तर (Answer): ### भाग 1: 10 दिनों के बाद जनसंख्या के आकार की गणना\nघातीय वृद्धि सूत्र का उपयोग करते हुए:
$$N_t = N_0 \cdot e^{rt}$|\nदी गई जानकारी:
- प्रारंभिक जनसंख्या ($N_0$) = 100
- वृद्धि दर ($r$) = $0.15$ प्रति दिन
- समय ($t$) = 10 दिन
- $e^{1.5} = 4.4816$
\nमान रखने पर:
$$N_{10} = 100 \times 4.4816 = 448.16$$\nअतः लगभग **448 जीव**।
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### भाग 2: 800 व्यक्तियों तक पहुँचने के लिए समय की गणना\nसूत्र:
$$t = \frac{\ln(N_t / N_0)}{r}$|\nमान रखने पर:
$$t = \frac{\ln(8)}{0.15} = \frac{2.079}{0.15} = 13.86 \text{ दिन}$|
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### भाग 3: घातीय और लॉजिस्टिक वृद्धि वक्रों में अंतर
- **घातीय वृद्धि वक्र:** जब संसाधन असीमित होते हैं, तो यह 'J' आकार का वक्र बनाता है।
- **लॉजिस्टिक वृद्धि वक्र:** जब संसाधन सीमित होते हैं और जनसंख्या 'वहन क्षमता' ($K$) तक पहुँच जाती है, तो यह 'S' आकार (Sigmoid) का वक्र बनाता है।
उत्तर (Answer): ### जनसंख्या अन्योन्यक्रियाओं का परिचय\nप्रकृति में जीव, पौधे और रोगाणु अकेले नहीं रहते हैं; बल्कि वे एक जैविक समुदाय बनाने के लिए विभिन्न तरीकों से अन्योन्यक्रिया करते हैं। दो अलग-अलग जातियों की जनसंख्या के बीच होने वाली अन्योन्यक्रिया को अंतरजातीय अन्योन्यक्रिया कहते हैं। ये अन्योन्यक्रियाएं किसी एक जाति या दोनों के लिए लाभदायक, हानिकारक या तटस्थ हो सकती हैं।
### 1. सहोपकारिता (+/+)\nइस अन्योन्यक्रिया में दोनों जातियों को लाभ होता है।
- **उदाहरण:** लाइकेन कवक और शैवाल के बीच का संबंध है। माइकोराइजा कवक और उच्च पादपों की जड़ों का संबंध है।
### 2. प्रतियोगिता (-/-)\nयह तब होती है जब दो जातियां सीमित संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं।
- **उदाहरण:** फ्लेमिंगो पक्षी और स्थानीय मछलियाँ ज़ूप्लवक के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं।
### 3. परभक्षण (+/-)\nइसमें एक जीव (परभक्षी) दूसरे जीव (शिकार) को मार देता है और भोजन के रूप में उपयोग करता है।
- **उदाहरण:** बाघ द्वारा हिरण का शिकार करना।
### 4. परजीविता (+/-)\nइसमें एक जीव (परजीवी) लाभान्वित होता है और दूसरा जीव (पोषी) प्रभावित होता है।
- **उदाहरण:** मानव यकृत पर्णकृमि (liver fluke), कुत्तों पर टिक।
### 5. सहभोजिता (+/0)\nइसमें एक जाति को लाभ होता है और दूसरी को न लाभ होता है और न ही हानि।
- **उदाहरण:** आम की शाखा पर उगने वाला ऑर्किड पौधा।
### 6. ऐमेन्सेलिज़्म (-/0)\nइसमें एक जाति को हानि होती है जबकि दूसरी अप्रभावित रहती है।
- **उदाहरण:** पेनिसिलियम कवक द्वारा बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकना।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nकिसी जीव का पर्यावरण जैविक घटकों (जीवित प्राणियों) और अजैविक घटकों (गैर-जीवित भौतिक और रासायनिक कारकों) से मिलकर बनता है। पृथ्वी पर विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में भौतिक पर्यावरण काफी भिन्न होता है। प्राथमिक अजैविक कारक जो जीवों के अनुकूलन, वितरण और शारीरिक प्रक्रियाओं को गहराई से आकार देते हैं, वे तापमान, जल, प्रकाश और मृदा हैं।
### 1. तापमान
* **महत्व:** तापमान सबसे अधिक पारिस्थितिक रूप से प्रासंगिक पर्यावरणीय कारक है। यह एंजाइमों की गतिशीलता, आधारीय चयापचय दर और जीवित जीवों के अन्य शारीरिक कार्यों को प्रभावित करता है।
* **तापीय अनुकूलन:**
* जो जीव तापमान की एक विस्तृत श्रृंखला को सहन कर सकते हैं और पनप सकते हैं, उन्हें **पृथुतापी (eurythermal)** कहा जाता है (उदा. स्तनधारी और पक्षी)।
* तापमान की एक संकीर्ण सीमा तक सीमित जीवों को **तनुतापी (stenothermal)** कहा जाता है (उदा. ध्रुवीय भालू, पेंगुइन)।
### 2. जल
* **महत्व:** पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति पानी में हुई थी और इसके बिना जीवन असंभव है। पौधों की उत्पादकता और वितरण भारी मात्रा में पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
* **परासरण अनुकूलन:**
* जलीय जीवों को शरीर के तरल पदार्थों की परासरण सांद्रता से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
* मरुदभिद् (Xerophytic) पौधे शुष्क क्षेत्रों में पानी बचाने के लिए मोटी उपत्वचा (cuticle), धंसे हुए रंध्र (sunken stomata) जैसी विशेष संशोधन दिखाते हैं।
### 3. प्रकाश
* **महत्व:** सूर्य का प्रकाश प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।
* **जैविक प्रभाव:**
* पौधों को दीप्तिालिता (photoperiodism) के लिए प्रकाश की आवश्यकता होती है, जो फूल आने और मौसमी गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
* कई जानवर अपने भोजन की तलाश, प्रजनन और प्रवास गतिविधियों के समय के लिए प्रकाश की तीव्रता और अवधि (दीप्ति काल) का उपयोग करते हैं।
### 4. मृदा
* **महत्व:** विभिन्न स्थानों पर मिट्टी की प्रकृति और गुण जलवायु, अपक्षय प्रक्रिया और मिट्टी के विकास के तरीके पर निर्भर करते हैं।
* **प्रमुख पैरामीटर:** मिट्टी की संरचना, कण का आकार, एकत्रीकरण, अंतःस्यंदन दर (percolation rate), पीएच (pH), खनिज संरचना और स्थलाकृति वनस्पति के प्रकार को निर्धारित करते हैं।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
* वर्ष की शुरुआत में प्रारंभिक समष्टि घनत्व ($N$) = $20$ कमल के पौधे
* वर्ष के दौरान जोड़े गए नए जीवों की संख्या (जन्म, $B$) = $8$ कमल के पौधे
* समयावधि ($\Delta t$) = $1$ वर्ष
### सूत्र:\nजन्म दर ($b$) की गणना एक निश्चित समयावधि में प्रारंभिक समष्टि आकार से विभाजित किए गए जन्मों की संख्या के रूप में की जाती है:
$$b = \frac{B}{N \times \Delta t}$|
### चरण-दर-चरण गणना:
1. सूत्र में दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करें:
$$b = \frac{8}{20 \times 1}$$
2. भिन्न को सरल बनाएं:
$$b = \frac{8}{20}$|
3. भाग दें:
$$b = 0.4 \text{ संतान प्रति कमल प्रति वर्ष}$|
### अंतिम उत्तर:\nतालाब में कमल की समष्टि की जन्म दर **0.4 संतान प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष** है।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nकिसी भी पारिस्थितिक तंत्र में, जैविक जीव अकेले नहीं रहते हैं। इसके बजाय, विभिन्न जातियों की समष्टियाँ जैविक समुदाय बनाने के लिए कई तरीकों से एक-दूसरे के साथ अंतःक्रिया करती हैं। ये अंतःक्रियाएं भाग लेने वाली जातियों के लिए लाभदायक, हानिकारक या तटस्थ हो सकती हैं।
### 1. सहोपकारिता (+/+)
* **परिभाषा:** एक ऐसी अंतःक्रिया जिसमें दोनों संबंधित जातियों को पारस्परिक रूप से लाभ होता है।
* **उदाहरण:** लाइकेन कवक (fungus) और शैवाल (algae) या सायनोबैक्टीरिया के बीच घनिष्ठ सहोपकारिता संबंध का प्रतिनिधित्व करते हैं। कवक शैवाल को आश्रय, जल और खनिज प्रदान करता है, जबकि शैवाल प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से कवक के लिए भोजन तैयार करता है।
### 2. प्रतिस्पर्धा (-/-)
* **परिभाषा:** एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें सामान्य सीमित संसाधनों के संघर्ष के कारण दूसरी जाति की उपस्थिति में एक जाति की फिटनेस कम हो जाती है।
* **उदाहरण:** गॉस का प्रतिस्पर्धी बहिष्करण सिद्धांत (Competitive Exclusion Principle) बताता है कि एक ही संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाली दो निकट संबंधी जातियाँ अनिश्चित काल तक सह-अस्तित्व में नहीं रह सकती हैं।
### 3. परभक्षण (+/-)
* **परिभाषा:** एक अंतर-जातीय अंतःक्रिया जहाँ एक जीव, जिसे परभक्षक (predator) कहा जाता है, शिकार (prey) को मारता है और खाता है।
* **उदाहरण:** बाघों द्वारा हिरण का शिकार करना।
### 4. परजीविता (+/-)
* **परिभाषा:** अंतःक्रिया का एक ऐसा तरीका जहाँ एक जाति (परजीवी) भोजन और आश्रय के लिए दूसरे जीव (पोषी) पर निर्भर करती है, जिससे पोषी को नुकसान पहुँचता है।
* **उदाहरण:** मानव यकृत पर्णकृमि (liver fluke), कुत्तों पर टिक।
### 5. सहभोजिता (+/0)
* **परिभाषा:** एक ऐसी अंतःक्रिया जिसमें एक जाति को लाभ होता है और दूसरी को न तो कोई नुकसान होता है और न ही लाभ।
* **उदाहरण:** आम की शाखा पर अधिपादप (epiphyte) के रूप में उगने वाला ऑर्किड।
### 6. अमेलिवादिता या अमिटता (-/0)
* **परिभाषा:** एक ऐसी अंतःक्रिया जहाँ एक जाति को नुकसान होता है जबकि दूसरी अप्रभावित रहती है।
* **उदाहरण:** कुछ कवकों या बैक्टीरिया द्वारा रासायनिक पदार्थों का स्राव जो सीधे लाभ प्राप्त किए बिना आसपास के बैक्टीरिया के विकास को रोकता है।
उत्तर (Answer): दिए गए आंकड़े:
- प्रारंभिक समष्टि का आकार ($N_0$) = 200 जीवाणु कोशिकाएँ
- घातीय वृद्धि दर ($r$) = 0.05 प्रति घंटा
- समय ($t$) = 2 घंटे
- दिया गया स्थिरांक $e$ मान = $e^{0.1} = 1.105$
\nघातीय वृद्धि के लिए सूत्र:
$N_t = N_0 \cdot e^{rt}$
\nचरण 1: सूत्र में मानों को प्रतिस्थापित करें।
$N_2 = 200 \times e^{(0.05 \times 2)}$
\nचरण 2: घातांक पदों को गुणा करें।
$0.05 \times 2 = 0.1$\nअतः, $N_2 = 200 \times e^{0.1}$
\nचरण 3: $e^{0.1} = 1.105$ का दिया गया मान प्रतिस्थापित करें।
$N_2 = 200 \times 1.105$
\nचरण 4: गुणा करें।
$200 \times 1.105 = 221$
\nअंतिम उत्तर:
2 घंटे के बाद बैक्टीरिया का समष्टि आकार 221 कोशिकाएँ है।
उत्तर (Answer): दिए गए आंकड़े:
- प्रारंभिक समष्टि का आकार ($N$) = 50 फल मक्खियाँ
- प्रति व्यक्ति मृत्यु दर ($d$) = 0.12 मक्खियाँ प्रति व्यक्ति प्रति सप्ताह
- समय अवधि ($t$) = 1 सप्ताह
\nसूत्र:
$\text{कुल मौतें} = N \times d \times t$
\nचरण 1: समीकरण में दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करें।
$\text{कुल मौतें} = 50 \times 0.12 \times 1$
\nचरण 2: संख्याओं को गुणा करें।
$50 \times 0.12 = 6$
\nअंतिम उत्तर:\nएक सप्ताह में फल मक्खी समष्टि में मौतों की कुल संख्या 6 मक्खियाँ है।
उत्तर (Answer): दिए गए आंकड़े:
- पिछले वर्ष की शुरुआत में प्रारंभिक समष्टि का आकार ($N_0$) = 20 कमल के पौधे
- वर्ष के दौरान प्रजनन के माध्यम से जोड़े गए नए संतानों की संख्या = 8 कमल के पौधे
\nजन्म दर ($b$) की गणना करने का सूत्र:
$b = \frac{\text{जोड़े गए नए संतानों की संख्या}}{\text{प्रारंभिक समष्टि का आकार}}$
\nचरण 1: सूत्र में दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करें।
$b = \frac{8}{20}$
\nचरण 2: भाग दें।
$b = 0.4$
\nअंतिम उत्तर:\nकमल की समष्टि की जन्म दर 0.4 संतान प्रति कमल प्रति वर्ष है।
उत्तर (Answer): मरुस्थलीय पौधों को गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें मुख्य रूप से अत्यधिक परिवेश का तापमान, तीव्र सौर विकिरण और पानी की पुरानी कमी शामिल हैं। इन कठोर परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए, मरुस्थलीय पौधे उल्लेखनीय शारीरिक, आंतरिक और रूपात्मक अनुकूलन प्रदर्शित करते हैं।
\nसबसे पहले, कैक्टस जैसे कई मरुस्थलीय पौधों की पत्तियां वाष्पोत्सर्जन जल हानि को कम करने और शाकाहारी जीवों से खुद को बचाने के लिए नुकीले कांटों में संशोधित हो जाती हैं। प्रकाश संश्लेषण का कार्य चपटे, गूदेदार, रसीले हरे तनों द्वारा संभाला जाता है। दूसरा, उनके तने की सतह पर एक मोटी, मोमी उपचक्र (cuticle) और धंसे हुए रंध्र (sunken stomata) होते हैं जो वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से पानी के नुकसान को भारी रूप से कम करने के लिए दिन के समय बंद रहते हैं। तीसरा, मरुस्थलीय पौधे अक्सर क्रैसेसुलियन एसिड मेटाबॉलिज्म (CAM) के रूप में जानी जाने वाली एक विशिष्ट प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया का उपयोग करते हैं, जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड को लेने के लिए ठंडे रात्रि घंटों के दौरान रंध्र खुलते हैं, और दिन के उजाले तक इसे कार्बनिक अम्ल के रूप में संग्रहित करते हैं जब प्रकाश संश्लेषण होता है। अंत में, कई मरुस्थलीय पौधों की विस्तृत, गहरी जड़ प्रणालियाँ होती हैं जो लंबे समय तक सूखे के दौर में भूमिगत नमी को कुशलता से अवशोषित करने के लिए मिट्टी की परतों में बहुत नीचे तक जाती हैं।
उत्तर (Answer): परजीविता (Parasitism) दो प्रजातियों के बीच अंतःक्रिया का एक व्यापक रूप से देखा जाने वाला तरीका है जहाँ एक प्रजाति (परजीवी) भोजन और आश्रय के लिए दूसरी प्रजाति (पोषी या होस्ट) पर निर्भर करती है, जिससे पोषी को नुकसान पहुँचता है। पोषी शरीर के सापेक्ष परजीवी की स्थिति के आधार पर परजीविता को मुख्य रूप से बाह्यपरजीविता और अंतःपरजीविता में वर्गीकृत किया जाता है।
\nबाह्यपरजीवी वे जीव हैं जो पोषी जीव की बाहरी सतह पर भोजन प्राप्त करते हैं। वे आमतौर पर त्वचा, फर या पंखों से जुड़े होते हैं और पोषण के लिए पोषी पर निर्भर होते हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण मनुष्यों या कुत्तों पर पाए जाने वाले किलकारी (ticks) और जूँ (lice), तथा समुद्री मछलियों में कोपपॉड हैं। बाह्यपरजीविओं में मजबूती से चिपके रहने के लिए हुक, पंजे या मुखांग जैसी विशेष अनुकूलन क्षमताएं होती हैं।
\nइसके विपरीत, अंतःपरजीवी पोषी जीव के शरीर के अंदर रहते हैं, आंतरिक अंगों, ऊतकों या आहार नली जैसे आंत, यकृत या फेफड़ों में निवास करते हैं। उदाहरणों में मानव आंत के फीताकृमि, यकृत पर्णकृमि (liver fluke), और लाल रक्त कोशिकाओं तथा यकृत कोशिकाओं के अंदर रहने वाले मलेरिया परजीवी (प्लास्मोडियम) शामिल हैं। अंतःपरजीवी उच्च शारीरिक विशेषज्ञता, सरलीकृत संरचनाओं और जटिल जीवन चक्रों को प्रदर्शित करते हैं जिसमें प्राथमिक पोषियों के बीच सफल संचरण सुनिश्चित करने के लिए अक्सर मध्यवर्ती पोषी शामिल होते हैं।