मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 12 जीव विज्ञान: जैव विविधता एवं संरक्षण (Biodiversity and Conservation) - त्वरित संशोधन नोट्स
---
अध्यायों की मुख्य परिभाषाएँ
1. जैव विविधता (Biodiversity):
पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीवों, पादपों और जंतुओं की प्रजातियों, उनके आनुवंशिक अंतर और उनके पारिस्थितिक तंत्र की कुल विविधता को जैव विविधता कहते हैं। यह शब्द सबसे पहले 'वाल्टर रोज़न' (Walter Rosen) द्वारा 1985 में लोकप्रिय किया गया था।
2. जैव विविधता के स्तर (Levels of Biodiversity):
- आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति के भीतर आनुवंशिक स्तर पर मिलने वाली विविधता (जैसे: भारत में राउपवन्ता वोमिटोरिया द्वारा उत्पादित 'रेज़रपाइन' की सक्रियता और सांद्रता में भिन्नता)।
- जातीय विविधता (Species Diversity): किसी क्षेत्र में प्रजातियों की संख्या और उनकी प्रचुरता में विविधता (जैसे: पश्चिमी घाट की उभयचर जातियों की विविधता पूर्वी घाट से अधिक है)।
- पारिस्थितिकीय विविधता (Ecological Diversity): पारिस्थितिक स्तर पर पाई जाने वाली विविधता (जैसे: भारत में रेगिस्तान, वर्षा वन, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ, आर्द्रभूमि आदि का होना)।
---
महत्वपूर्ण आँकड़े (Important Data for MP Board)
- कुल प्रजातियाँ: आई.यू.सी.एन. (IUCN - 2004) के अनुसार, अब तक ज्ञात पौधों और जंतुओं की कुल प्रजातियाँ 1.5 मिलियन से अधिक हैं।
- भारत की स्थिति: भारत दुनिया के 17 मेगा-डाइवर्सिटी (Mega-diversity) देशों में से एक है। विश्व के क्षेत्रफल का केवल 2.4% भाग भारत के पास है, लेकिन वैश्विक जातियों की विविधता का 8.1% हिस्सा भारत में पाया जाता है (यहाँ लगभग 45,000 पौधों की प्रजातियाँ और दोगुनी से अधिक जंतुओं की प्रजातियाँ हैं)।
- अल्बर्ट वॉन हम्बोल्ट (Alexander von Humboldt) का स्पीच-एरिया संबंध (Species-Area Relationship):
- समीकरण:
log S = log C + Z log A
- यहाँ:
S = प्रजाति समृद्धि (Species richness)
A = क्षेत्रफल (Area)
Z = रेखा का ढलान (Slope of the line / Regression coefficient)
C = Y-अन्तरसेप्त (Y-intercept)
- नोट: संपूर्ण विश्व के बड़े क्षेत्रों (जैसे महाद्वीपों) के लिए 'Z' का मान (ढलान) 0.6 से 1.2 के बीच होता है।
---
जैव विविधता की क्षति (Loss of Biodiversity)
जैव विविधता का ह्रास होने के मुख्य चार कारण हैं, जिन्हें 'चोर कातिकारी चौकड़ी' (The Evil Quartet) कहा जाता है:
1. आवास क्षति और विखंडन (Habitat Loss and Fragmentation):
यह जातियों के विलुप्त होने का सबसे महत्वपूर्ण कारण है (जैसे: उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों का काटा जाना)। जब विशाल आवास छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं, तो बड़े आकार वाले जानवरों को बहुत नुकसान होता है।
2. अति-दोहन (Over-exploitation):
जब मानव लालच के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन करता है (जैसे: पिछले 500 वर्षों में स्टेलर सी-काऊ और यात्री कबूतर का विलुप्त होना)।
3. विदेशी जातियों का आक्रमण (Alien Species Invasions):
जब बाहरी प्रजातियाँ किसी नए क्षेत्र में अनजाने में या जानबूझकर लाई जाती हैं और वे स्थानीय प्रजातियों के लिए खतरा बन जाती हैं (जैसे: जलकुंभी/आइकोर्निया, नाइल पर्च, और भारत में पार्थेनियम, लैंटाना, अफ्रीकी कैटफ़िश)।
4. सह-विलुप्तीकरण (Co-extinctions):
जब एक प्रजाति विलुप्त होती है, तो उस पर आश्रित दूसरी प्रजाति भी स्वतः विलुप्त हो जाती है (जैसे: परजीवी-पोषक संबंध)।
---
जैव विविधता का संरक्षण (Conservation of Biodiversity)
हम जैव विविधता का संरक्षण दो मुख्य तरीकों से करते हैं:
#### 1. स्व-स्थाने संरक्षण (In-situ Conservation / On-site)
इसमें पौधों और जंतुओं का संरक्षण उनके प्राकृतिक आवास में ही किया जाता है।
- राष्ट्रीय उद्यान (National Parks): यहाँ मानवीय गतिविधियों जैसे चराई, वानिकी आदि की अनुमति नहीं होती है (उदाहरण: कॉर्बेट नेशनल पार्क)।
- अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries): यहाँ कुछ मानवीय गतिविधियों (जैसे लकड़ी का संग्रहण, पालतू जानवरों को चराना) की अनुमति होती है।
- जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves): यह विशेष क्षेत्र हैं जो पारंपरिक जीवन को बनाए रखने और अनुसंधान के लिए होते हैं (इसके तीन क्षेत्र होते हैं: कोर जोन, बफर जोन, और संक्रमण क्षेत्र)।
- पवित्र उपवन (Sacred Groves / Ecosystems): भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के कारण बचाए गए वनों के क्षेत्र (जैसे: मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ, राजस्थान की अरावली पहाड़ियाँ)।
#### 2. बाह्य-स्थाने संरक्षण (Ex-situ Conservation / Off-site)
इसमें संकटग्रस्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास से निकालकर विशेष देखरेख वाली जगहों पर संरक्षित किया जाता है।
- उदाहरण:
- प्राणि उद्यान (Zoological Parks)
- वनस्पति उद्यान (Botanical Gardens)
- वन्यजीव सफारी पार्क
- क्रायोप्रिजर्वेशन (Cryopreservation): युग्मकों, ऊतकों और बीजों को तरल नाइट्रोजन (
-196°C) में लंबे समय तक सुरक्षित रखना।
- ऊतक संवर्द्धन (Tissue Culture) और बीज बैंक (Seed Banks)।
---
महत्वपूर्ण संधियाँ एवं सम्मेलन (Important Summits)
- पृथ्वी सम्मेलन (The Earth Summit): 1992 में रियो डी जेनेरियो (ब्राजील) में आयोजित हुआ, जिसमें जैव विविधता के संरक्षण और इसके घटकों के सतत उपयोग पर जोर दिया गया।
- विश्व शिखर सम्मेलन (World Summit on Sustainable Development): 2002 में जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में हुआ, जिसमें 190 देशों ने 2010 तक जैव विविधता की हानि की दर में उल्लेखनीय कमी लाने की प्रतिज्ञा ली।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 जैव विविधता एवं संरक्षण
जैव विविधता का परिचय
अर्थ एवं परिभाषा
स्तर
आनुवंशिक विविधता
स्पीशीज़ विविधता
पारिस्थितिकीय विविधता
जैव विविधता के पैटर्न
अक्षांशीय प्रवणता
भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर कमी
उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक विविधता के कारण
स्पीशीज़-क्षेत्र संबंध
अलेक्जेंडर वॉन हंबोल्ट का योगदान
समीकरण: $\log S = \log C + Z \log A$
जैव विविधता का महत्व
पारिस्थितिकीय स्थिरता
आर्थिक महत्व
भोजन, औषधि, रेशे
उत्पादक एवं सेवाएं (जैसे परागण)
नैतिक एवं aesthetic मूल्य
जैव विविधता को खतरे
विलोपन के प्रकार
प्राकृतिक विलोपन
मानव जनित विलोपन
मुख्य कारण (क्वारटेट एविल्ज़ - 'Evil Quartet')
आवास क्षति एवं विखंडन
अति-दोहन
विदेशी जातियों का आक्रमण
सह-विलुप्तता
जैव विविधता संरक्षण
संरक्षण की आवश्यकता क्यों?
संकीर्ण उपयोगितावादी
व्यापक उपयोगितावादी
नैतिक तर्क
संरक्षण की विधियाँ
स्व-स्थाने संरक्षण (In-situ Conservation)
राष्ट्रीय उद्यान
वन्यजीव अभयारण्य
जीवमंडल रिजर्व
पवित्र उपवन (Sacred Groves)
बाह्य-स्थाने संरक्षण (Ex-situ Conservation)
वानस्पतिक उद्यान
प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर)
वन्यजीव सफारी पार्क
बीज बैंक और Cryopreservation
वैश्विक प्रयास एवं नीतियां
पृथ्वी सम्मेलन (रियो डी जेनेरो, 1992)
विश्व शिखर सम्मेलन (जोहान्सबर्ग, 2002)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### जैव विविधता संरक्षण का परिचय\nजैव विविधता संरक्षण वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इसके स्थायी उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु जैव विविधता की सुरक्षा, प्रबंधन और पुनर्स्थापना है। संरक्षण रणनीतियों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: **स्व-स्थाने संरक्षण** और **बाह्य-स्थाने संरक्षण**।
### 1. स्व-स्थाने संरक्षण (In situ Conservation)\nस्व-स्थाने संरक्षण में संकटग्रस्त पौधों और जानवरों को उनके प्राकृतिक आवासों में संरक्षित करना शामिल है।
* **राष्ट्रीय उद्यान (National Parks):** ये वन्यजीवों के कल्याण के लिए सख्ती से आरक्षित क्षेत्र हैं जहाँ चराई या वानिकी प्रतिबंधित है। उदाहरण: जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान।
* **वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries):** ऐसे क्षेत्र जहाँ केवल जंगली जानवरों की रक्षा की जाती है, और लकड़ी इकट्ठा जैसी गतिविधियाँ सीमित सीमा तक अनुमति प्राप्त हैं। उदाहरण: पेरियार वन्यजीव अभयारण्य।
* **जैवमंडल रिजर्व (Biosphere Reserves):** संरक्षित भूमि के बड़े क्षेत्र जिनका उद्देश्य जैव विविधता को संरक्षित करना है। उदाहरण: नीलगिरी जैवमंडल रिजर्व।
* **पवित्र उपवन/वन (Sacred Groves):** स्थानीय समुदायों द्वारा धार्मिक मान्यताओं के कारण संरक्षित वनों के टुकड़े।
### 2. बाह्य-स्थाने संरक्षण (Ex situ Conservation)\nबाह्य-स्थाने संरक्षण में मानवीय देखरेख में उनके प्राकृतिक आवासों के बाहर संकटग्रस्त पौधों और जानवरों का रखरखाव और प्रजनन शामिल है।
* **वनस्पति उद्यान (Botanical Gardens):** वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण के लिए उगाए गए जीवित पौधों का संग्रह। उदाहरण: भारतीय वानस्पतिक उद्यान, हावड़ा।
* **प्राणि उद्यान (Zoological Parks):** ऐसी सुविधाएँ जहाँ जंगली जानवरों को बाड़ों के भीतर रखा जाता है।
* **बीज बैंक और जीन बैंक (Seed Banks and Gene Banks):** ऐसी सुविधाएँ जो आनुवंशिक क्षरण को रोकने के लिए बहुत कम तापमान (क्रायोप्रेज़र्वेशन) पर बीज या ऊतक संवर्धन का भंडारण करती हैं।
### निष्कर्ष\nदोनों दृष्टिकोण एक-दूसरे के पूरक हैं। जबकि स्व-स्थाने संरक्षण आदर्श है, बाह्य-स्थाने संरक्षण प्राकृतिक आवास के नुकसान के दौरान एक महत्वपूर्ण बैकअप प्रदान करता है।
उत्तर (Answer): ### जैव विविधता का परिचय\nजैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की अपार विविधता और परिवर्तनशीलता को संदर्भित करती है। इसमें सूक्ष्म बैक्टीरिया और कवक से लेकर जटिल पौधों और जानवरों तक सभी जीवित जीव शामिल हैं। जैव विविधता को मुख्य रूप से तीन पदानुक्रमित स्तरों में वर्गीकृत किया गया है:
### 1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity)
* **परिभाषा:** आनुवंशिक विविधता किसी विशेष प्रजाति के भीतर जीन की विविधता को संदर्भित करती है।
* **महत्व:** उच्च आनुवंशिक विविधता वाली प्रजातियों में पर्यावरणीय परिवर्तनों और बीमारियों से बचने की बेहतर संभावना होती है। उदाहरण के लिए, भारत में चावल की 50,000 से अधिक आनुवंशिक रूप से भिन्न किस्में हैं।
### 2. प्रजाति विविधता (Species Diversity)
* **परिभाषा:** प्रजाति विविधता किसी विशेष क्षेत्र या समुदाय के भीतर प्रजातियों की विविधता को संदर्भित करती है।
* **महत्व:** उच्च प्रजाति विविधता पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और उत्पादकता को सुनिश्चित करती है।
### 3. पारिस्थितिकीय विविधता (Ecological Diversity)
* **परिभाषा:** पारिस्थितिकीय विविधता किसी भौगोलिक स्थान के भीतर विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता से संबंधित है, जैसे रेगिस्तान, वर्षावन, मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियाँ।
* **महत्व:** यह एक जैविक समुदाय की जटिलता का प्रतिनिधित्व करती है।
### जैव विविधता का महत्व
* **पारिस्थितिक स्थिरता:** उच्च जैव विविधता वाले पारिस्थितिकी तंत्र अधिक लचीले होते हैं।
* **सामानों की आपूर्ति:** जैव विविधता भोजन, लकड़ी, फाइबर और दवाएं प्रदान करती है।
* **पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ:** यह परागण, पोषक तत्व चक्रण और जलवायु विनियमन सुनिश्चित करती है।
### जैव विविधता के नुकसान के कारण ('दुष्ट चतुष्टय')
1. **आवास हानि और विखंडन:** वनों की कटाई के कारण प्राकृतिक आवासों का विनाश प्रमुख कारण है।
2. **अति-दोहन:** मनुष्यों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों की अत्यधिक कटाई।
3. **विदेशी प्रजातियों का आक्रमण:** गैर-मूल प्रजातियों की शुरूआत से मूल प्रजातियों को खतरा होता है।
4. **सह-विलुप्तता:** जब कोई प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो उस पर निर्भर अन्य प्रजातियाँ भी विलुप्त हो जाती हैं।
उत्तर (Answer): ### संरक्षण रणनीतियों का परिचय\nपृथ्वी पर जीवन-समर्थन प्रणालियों को बनाए रखने के लिए जैव विविधता का संरक्षण महत्वपूर्ण है। संरक्षण के दृष्टिकोण को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: **स्व-स्थान (इन-सीटू)** संरक्षण और **बाह्य-स्थान (एक्स-सीटू)** संरक्षण।
### स्व-स्थान संरक्षण (In-situ Conservation)
- **परिभाषा:** स्व-स्थान संरक्षण में लुप्तप्राय प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में संरक्षित करना शामिल है, जिससे उनके सभी घटकों के साथ पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा होती है।
- **तंत्र:** प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्स्थापित और संरक्षित किया जाता है।
- **भारत में उदाहरण:**
- **बायोस्फीयर रिजर्व:** संरक्षण और सतत उपयोग के लिए संरक्षित भूमि या तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के क्षेत्र।
- **राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य:** वन्य जीवन और प्रकृति के लिए सख्ती से बनाए रखा गया आरक्षित क्षेत्र।
- **पवित्र उपवन (Sacred Groves):** जंगल के ऐसे क्षेत्र जिन्हें अलग रखा जाता है और उनके भीतर के सभी पेड़ों और वन्यजीवों की पूजा की जाती है।
### बाह्य-स्थान संरक्षण (Ex-situ Conservation)
- **परिभाषा:** बाह्य-स्थान संरक्षण में संकटग्रस्त पौधों और जंतुओं को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर निकालकर विशेष स्थानों पर रखना शामिल है जहाँ उनकी रक्षा की जा सके।
- **तंत्र:** नियंत्रित प्रजनन कार्यक्रम, कृत्रिम प्रसार और क्रायोजेनिक संरक्षण।
- **उदाहरण:**
- **प्राकृतिक उद्यान और वनस्पति उद्यान (Zoological Parks and Botanical Gardens):** ऐसे स्थान जहाँ जानवरों और पौधों की एक विस्तृत विविधता को प्रदर्शन, शिक्षा और प्रजनन कार्यक्रमों के लिए रखा जाता है।
- **क्रायोप्रेSERVATION:** तरल नाइट्रोजन (-196°C) का उपयोग करके लंबे समय तक व्यवहार्य और उपजाऊ स्थिति में संकटग्रस्त प्रजातियों के युग्मकों का भंडारण।
### दोनों दृष्टिकोण क्यों आवश्यक हैं
- **पूरक भूमिकाएँ:** जबकि इन-सीटू संरक्षण आदर्श दृष्टिकोण है क्योंकि प्रजातियाँ अपने प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल होती हैं, यह हमेशा संभव नहीं होता है जब स्थानीय आपदाओं या भारी शिकार के कारण कोई प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर हो।
- **तत्काल हस्तक्षेप:** ऐसी गंभीर स्थितियों में, एक्स-सीटू संरक्षण तत्काल जीवन-समर्थन, कैप्टिव ब्रीडिंग प्रदान करता है। इसलिए, दोनों तरीकों का संतुलित अनुप्रयोग अधिकतम जैव विविधता के अस्तित्व को सुनिश्चित करता है।
उत्तर (Answer): ### जैव विविधता के नुकसान का परिचय\nयह अच्छी तरह से स्वीकार किया जाता है कि जैव विविधता का नुकसान एक गंभीर वैश्विक संकट है, वर्तमान प्रजातियों के विलुप्त होने की दर मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों से प्रेरित है। पारिस्थितिकीविदों ने जैव विविधता के नुकसान के प्रमुख कारणों को चार व्यापक खतरों में समूहीकृत किया है, जिन्हें सामूहिक रूप से **'द एविल क्वार्टेट'** कहा जाता है।
### चार कारण (द एविल क्वार्टेट)
1. **आवास क्षति और विखंडन (Habitat Loss and Fragmentation):**
- **स्पष्टीकरण:** यह जानवरों और पौधों को विलुप्त होने की ओर धकेलने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारण है। मानव जनसंख्या में भारी वृद्धि ने संसाधन की मांग को बढ़ा दिया है, जिससे प्राकृतिक आवासों का विनाश और विखंडन हुआ है।
- **उदाहरण:** अमेज़ॅन वर्षावन को सोयाबीन की खेती या गोमांस मवेशियों के लिए घास के मैदानों में बदलने के लिए साफ किया जा रहा है।
2. **अति-दोहन (Over-exploitation):**
- **स्पष्टीकरण:** जब 'आवश्यकता' 'लालच' में बदल जाती है, तो यह प्राकृतिक संसाधनों के अति-दोहन की ओर ले जाती है।
- **उदाहरण:** पिछले कुछ शताब्दियों में मनुष्यों द्वारा अति-दोहन के कारण स्टेलर की समुद्री गाय और पैसेंजर कबूतर विलुप्त हो गए।
3. **विदेशी प्रजातियों का आक्रमण (Alien Species Invasions):**
- **स्पष्टीकरण:** जब विदेशी प्रजातियों को अनजाने में या जानबूझकर पेश किया जाता है, तो उनमें से कुछ आक्रामक हो जाती हैं और स्वदेशी प्रजातियों के पतन या विलुप्त होने का कारण बनती हैं।
- **उदाहरण:** पूर्वी अफ्रीका में विक्टोरिया झील में पेश की गई नाइल पर्च ने झील में सिच्लिड मछली की 200 से अधिक प्रजातियों को विलुप्त कर दिया। जलकुंभी ने भारतीय जल निकायों को बंद कर दिया है।
4. **सह-विलुप्तियां (Co-extinctions):**
- **स्पष्टीकरण:** जब कोई प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो उसके साथ अनिवार्य रूप से जुड़ी पौधे और जंतु प्रजातियां भी विलुप्त हो जाती हैं।
- **उदाहरण:** जब कोई मेजबान मछली प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो परजीवियों का उसका अनूठा समूह भी इसी भाग्य से मिलता है।
उत्तर (Answer): जैव विविधता संरक्षण को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है: स्व-स्थाने संरक्षण (In-situ conservation) और बहिः-स्थाने संरक्षण (Ex-situ conservation)।
### स्व-स्थाने और बहिः-स्थाने संरक्षण के बीच अंतर
| विशेषता | स्व-स्थाने संरक्षण (In-situ) | बहिः-स्थाने संरक्षण (Ex-situ) |
| --- | --- | --- |
| **परिभाषा** | लुप्तप्राय प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास के भीतर संरक्षित करना। | संकटग्रस्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर कृत्रिम रूप से प्रबंधित परिवेश में संरक्षित करना। |
| **दायरा** | लक्ष्य प्रजातियों के साथ पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करता है। | मुख्य रूप से व्यक्तिगत संकटग्रस्त प्रजातियों या विशिष्ट प्रजनन जोड़ों पर ध्यान केंद्रित करता है। |
| **उपयुक्तता** | दीर्घकालिक संरक्षण के लिए सबसे उपयुक्त और किफायती तरीका। | तब उपयोगी होता है जब प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हों और उन्हें तत्काल बचाव की आवश्यकता हो। |
| **उदाहरण** | राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, बायोस्फीयर रिजर्व। | वानस्पतिक उद्यान, प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर), क्रायोप्रिजर्वेशन, बीज बैंक। |
### भारत में स्व-स्थाने संरक्षण की तीन विधियां
#### 1. राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)
* ये वन्यजीवों के लिए आरक्षित क्षेत्र हैं जहाँ वे स्वतंत्र रूप से आवासों और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं।
* निजी स्वामित्व और पालतू जानवरों के चरने पर सख्त प्रतिबंध है।
* उदाहरण: उत्तराखंड में जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान।
#### 2. वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries)
* ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ केवल जानवरों की सुरक्षा की जाती है, और लकड़ी काटना, लघु वन उत्पादों का संग्रहण जैसे कुछ क्रियाकलाप तब तक अनुमति प्राप्त होते हैं जब तक कि वे वन्यजीवों को नुकसान न पहुँचाएँ।
* उदाहरण: राजस्थान में भरतपुर पक्षी अभयारण्य, केरल में पेरियार वन्यजीव अभयारण्य।
#### 3. जैवमंडल रिजर्व (Biosphere Reserves)
* ये वन्यजीवों, निवासियों की पारंपरिक जीवन शैली और आनुवंशिक विविधता के संरक्षण के लिए आरक्षित भूमि के बड़े क्षेत्र हैं।
* एक बायोस्फीयर रिजर्व में आम तौर पर तीन क्षेत्र होते हैं: कोर ज़ोन (सख्ती से सुरक्षित), बफर ज़ोन (सीमित मानवीय गतिविधि), और संक्रमण ज़ोन (सतत विकास के लिए स्थानीय समुदायों के साथ सक्रिय सहयोग)।
* उदाहरण: नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व।
उत्तर (Answer): जैव विविधता वर्तमान में तेजी से विलुप्त होने की दर का सामना कर रही है, जिसका मुख्य कारण मानवीय गतिविधियां हैं। जैव विविधता के नुकसान के चार प्रमुख कारणों को सामूहिक रूप से 'इविल क्वार्टेट' (Evil Quartet) कहा जाता है। इनकी चर्चा नीचे दी गई है:
### 1. आवास क्षति और विखंडन (Habitat Loss and Fragmentation)
* यह पौधों और जानवरों को विलुप्त होने की ओर धकेलने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारण है।
* वनों की कटाई, शहरीकरण, कृषि विस्तार और खनन के कारण प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने से जीव बेघर हो जाते हैं और उनकी संख्या में गिरावट आती है।
* जब मानवीय गतिविधियों (जैसे सड़कें बनाना या बांध बनाना) के कारण बड़े आवासों को छोटे टुकड़ों में तोड़ या विखंडित कर दिया जाता है, तो बड़े क्षेत्रों की आवश्यकता वाले स्तनधारी और पक्षी तथा प्रवासी जानवर बुरी तरह प्रभावित होते हैं, जिससे उनकी आबादी में गिरावट आती है।
* उष्णकटिबंधीय वर्षा वन, जो कभी पृथ्वी की भूमि की सतह का 14 प्रतिशत हिस्सा कवर करते थे, अब 6 प्रतिशत से अधिक कवर नहीं करते हैं।
### 2. अति-दोहन (Over-exploitation)
* जब 'जरूरी आवश्यकता' 'लालच' में बदल जाती है, तो यह प्राकृतिक संसाधनों के अति-दोहन की ओर ले जाती है।
* पिछले 500 वर्षों में कई प्रजातियों के विलुप्त होने (जैसे स्टेलर की समुद्री गाय, यात्री कबूतर) का कारण इंसानों द्वारा अति-दोहन था।
* वर्तमान में, दुनिया भर में कई समुद्री मछली आबादी का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिससे व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
* वर्तमान में, दुनिया भर में कई समुद्री मछलियों का अत्यधिक शिकार किया जा रहा है, जिससे व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
### 3. विदेशी प्रजातियों का आक्रमण (Alien Species Invasions)
* जब विदेशी प्रजातियों (गैर-देशी प्रजातियों) को अनजाने में या जानबूझकर कहीं भी लाया जाता है, तो उनमें से कुछ आक्रामक हो जाती हैं और स्वदेशी प्रजातियों के पतन या विलुप्त होने का कारण बनती हैं।
* उदाहरण के लिए, पूर्वी अफ्रीका में विक्टोरिया झील में पेश की गई नील पर्च (Nile perch) मछली के कारण झील में सिच्लिड मछली (cichlid fish) की 200 से अधिक प्रजातियों का अनूठा समूह विलुप्त हो गया।
* भारत में जलीय कृषि के लिए अफ्रीकी कैटफ़िश *क्लेरियस गैरीपिनस* के अवैध प्रवेश से हमारी नदियों में स्वदेशी कैटफ़िश को खतरा पैदा हो गया है।
* जलकुंभी (Eichhornia crassipes) और लैंटाना जैसे आक्रामक खरपतवारों ने देशी प्रजातियों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
### 4. सह-विलुप्ति (Co-extinctions)
* जब कोई प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो उसके साथ अनिवार्य संबंध में जुड़ी पौधे और जंतु प्रजातियां भी विलुप्त हो जाती हैं।
* उदाहरण के लिए, जब कोई पोषी (host) मछली प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो उसके परजीवियों का अनूठा समूह भी उसी भाग्य को प्राप्त होता है।
* सह-विकसित पौधे-परागकण सहजीवन के मामले में, एक का विलुप्त होना अनिवार्य रूप से दूसरे के विलुप्त होने की ओर ले जाता है।
उत्तर (Answer): जैव विविधता शब्द का प्रतिपादन सामाजिक-जीवविज्ञानी एडवर्ड विल्सन द्वारा जैविक संगठन के सभी स्तरों पर संयुक्त विविधता का वर्णन करने के लिए किया गया था। इसे मुख्य रूप से तीन पदानुक्रमित स्तरों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
### 1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity)
* आनुवंशिक विविधता किसी विशेष प्रजाति के भीतर मौजूद जीन की विविधता को संदर्भित करती है।
* एक ही प्रजाति अपने वितरण क्षेत्र में आनुवंशिक स्तर पर उच्च विविधता प्रदर्शित कर सकती है।
* उदाहरण के लिए, विभिन्न हिमालयी श्रेणियों में उगने वाला औषधीय पौधा *राउवोलिया वोमिटोरिया* अपने द्वारा उत्पादित सक्रिय रासायनिक रेसरपाइन की क्षमता और सांद्रता में भिन्नता दिखा सकता है।
* भारत में चावल की 50,000 से अधिक आनुवंशिक रूप से भिन्न किस्में और आम की 1,000 किस्में हैं।
### 2. प्रजाति विविधता (Species Diversity)
* प्रजाति विविधता किसी विशेष क्षेत्र के भीतर प्रजातियों की विविधता और समृद्धि को संदर्भित करती है।
* प्रति इकाई क्षेत्र प्रजातियों की संख्या को प्रजाति समृद्धि कहा जाता है।
* उदाहरण के लिए, पश्चिमी घाट में पूर्वी घाट की तुलना में उभयचर प्रजातियों की विविधता अधिक है।
### 3. पारिस्थितिक विविधता (Ecological Diversity)
* पारिस्थितिक विविधता किसी भौगोलिक स्थान के भीतर मौजूद पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता को संदर्भित करती है।
* पारिस्थितिकी तंत्र विविधता में विभिन्न जैविक समुदाय, आवास और पारिस्थितिक प्रक्रियाएं शामिल हैं।
* उदाहरण के लिए, भारत में रेगिस्तान, वर्षा वन, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियां, आर्द्रभूमि, मुहाना और अल्पाइन घास के मैदान हैं, जिससे नॉर्वे जैसे स्कैंडिनेवियाई देश की तुलना में इसकी पारिस्थितिक तंत्र विविधता बहुत अधिक है।
### जैव विविधता का महत्व
* **पारिस्थितिकी तंत्र स्थिरता:** अधिक प्रजातियों वाले समुदाय कम प्रजातियों वाले समुदायों की तुलना में अधिक स्थिर होते हैं। समृद्ध जैव विविधता प्राकृतिक या मानव निर्मित गड़बड़ी के खिलाफ लचीलापन सुनिश्चित करती है।
* **उत्पादकता:** बढ़ी हुई जैव विविधता उच्च बायोमास उत्पादन और कुशल पोषक तत्व चक्र में योगदान करती है।
* **आर्थिक लाभ:** जैव विविधता भोजन, रेशे, दवाएं, रबड़, लकड़ी और मनोरंजक मूल्य प्रदान करती है।
* **पारिस्थितिक सेवाएं:** पारिस्थितिक तंत्र स्वच्छ हवा, पानी, फसलों का परागण और जलवायु विनियमन प्रदान करते हैं, जो मानव अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर (Answer): ### जैव विविधता संरक्षण का परिचय\nमानव जाति के अस्तित्व और बायोस्फीयर के संतुलन को बनाए रखने के लिए जैव विविधता का संरक्षण महत्वपूर्ण है। संरक्षण रणनीतियों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: स्व-स्थाने (In-situ) संरक्षण और बहि-स्थाने (Ex-situ) संरक्षण।
### 1. स्व-स्थाने संरक्षण (In-situ Conservation)
* **परिभाषा:** स्व-स्थाने संरक्षण में संकटग्रस्त पौधों और जंतुओं का उनके प्राकृतिक आवासों में संरक्षण शामिल है। यह दृष्टिकोण पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करता है।
* **भारत में प्रमुख तरीके:**
* **राष्ट्रीय उद्यान:** वन्य जीवों के लिए आरक्षित क्षेत्र जहां वे स्वतंत्र रूप से आवासों का उपयोग कर सकते हैं (उदा. जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय पार्क)।
* **वन्यजीव अभ्यारण्य:** ऐसे क्षेत्र जहां केवल जंतुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है (उदा. भरतपुर पक्षी अभ्यारण्य)।
* **जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves):** वन्यजीवों, आदिम जनजातियों की पारंपरिक जीवन शैली और आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के लिए बड़े संरक्षित क्षेत्र (उदा. नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व)।
* **पवित्र उपवन (Sacred Groves):** जंगलों के वे टुकड़े जिन्हें अलग रखा जाता है और जिनमें सभी पेड़ों और वन्यजीवों की पूजा की जाती है (उदा. मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियां)।
### 2. बहि-स्थाने संरक्षण (Ex-situ Conservation)
* **परिभाषा:** बहि-स्थाने संरक्षण में संकटग्रस्त जंतुओं और पौधों को उनके प्राकृतिक आवासों के बाहर विशेष रूप से प्रबंधित सुविधाओं में मानव देखभाल के तहत संरक्षित करना शामिल है।
* **प्रमुख तरीके:**
* **वनस्पति उद्यान और प्राणि उद्यान (Botanical Gardens and Zoological Parks):** वैज्ञानिक अध्ययन, शिक्षा और प्रजनन कार्यक्रमों के लिए बनाए गए पौधों और जंतुओं के जीवित संग्रह।
* **क्रायोप्रिजर्वेशन (Cryopreservation):** -196°C पर तरल नाइट्रोजन का उपयोग करके लंबी अवधि के लिए व्यवहार्य और उपजाऊ स्थिति में संकटग्रस्त प्रजातियों के युग्मकों, अंडों, भ्रूणों और बीजों का संरक्षण।
* **बीज बैंक:** कम तापमान और नमी के तहत वाणिज्यिक और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों के विविध आनुवंशिक उपभेदों के बीजों का भंडारण।
### निष्कर्ष: दोनों क्यों आवश्यक हैं\nयद्यपि स्व-स्थाने संरक्षण आदर्श दृष्टिकोण है क्योंकि यह प्रजातियों की प्राकृतिक विकास प्रक्रियाओं को संरक्षित करता है, वहीं बहि-स्थाने संरक्षण एक बीमा पॉलिसी के रूप में कार्य करता है। जब प्रजातियां अत्यधिक आवास विनाश या शिकार के कारण विलुप्ति के कगार पर होती हैं, तो बहि-स्थाने उपाय उन्हें बचाते हैं।
उत्तर (Answer): ### जैव विविधता के नुकसान का परिचय\nवर्तमान में जैव विविधता तेजी से विलुप्ति की दरों का सामना कर रही है, जो मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों के कारण है। पारिस्थितिकीविदों ने जैव विविधता के नुकसान के इन प्राथमिक चालकों को चार प्रमुख कारणों में वर्गीकृत किया है, जिन्हें उपयुक्त रूप से 'इविल क्वार्टेट' कहा जाता है।
### 1. आवास क्षति और विखंडन (Habitat Loss and Fragmentation)
* **विवरण:** यह जीवों और पौधों को विलुप्त होने की ओर धकेलने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारण है। शहरीकरण, वनों की कटाई, कृषि विस्तार और खनन के कारण प्राकृतिक आवासों का विनाश जीवों को बेघर कर देता है।
* **प्रभाव:** जब बड़े आवासों को राजमार्गों के निर्माण या भवनों के निर्माण जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है, तो बड़े क्षेत्रों की आवश्यकता वाले स्तनधारी और पक्षी बुरी तरह प्रभावित होते हैं।
### 2. अति-दोहन (Over-exploitation)
* **विवरण:** जब मानवीय आवश्यकता लालच में बदल जाती है, तो यह प्राकृतिक संसाधनों के अति-दोहन की ओर ले जाती है।
* **प्रभाव:** पिछले 500 वर्षों में कई प्रजातियों का विलुप्त होना मनुष्यों द्वारा अति-दोहन के कारण हुआ है, जिसमें स्टेलर की सी काऊ और पैसेंजर पिजन शामिल हैं।
### 3. विदेशी प्रजातियों का आक्रमण (Alien Species Invasions)
* **विवरण:** जब विदेशी या आक्रामक प्रजातियों को जानबूझकर या अनजाने में एक नए भौगोलिक क्षेत्र में पेश किया जाता है, तो वे आक्रामक हो जाती हैं।
* **उदाहरण:** पूर्वी अफ्रीका की विक्टोरिया झील में नाइल पर्च के प्रवेश से झील में सिच्लिड मछली की 200 से अधिक प्रजातियों का सफाया हो गया।
### 4. सह-विलुप्ति (Co-extinctions)
* **विवरण:** जब कोई प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो उससे अनिवार्य संबंध में जुड़ी पौधे और जंतु प्रजातियां भी विलुप्त हो जाती हैं।
* **उदाहरण:** जब कोई पोषी मछली प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो उसके परजीवियों का विशिष्ट समूह भी उसी भाग्य को प्राप्त होता है।
उत्तर (Answer): ### जैव विविधता का परिचय\nजैव विविधता से तात्पर्य जैविक संगठन کے تمام स्तरों पर संयुक्त विविधता से है, जो कोशिकाओं के भीतर के वृहद अणुओं से लेकर बायोम तक फैली हुई है। एडवर्ड विल्सन ने इस शब्द को लोकप्रिय बनाया। जैव विविधता को मुख्य रूप से तीन पदानुक्रमित स्तरों में वर्गीकृत किया गया है:
### 1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity)
* **परिभाषा:** आनुवंशिक विविधता का तात्पर्य किसी विशेष प्रजाति के भीतर मौजूद जीन की विविधता से है। एक ही प्रजाति अपने वितरण क्षेत्र में आनुवंशिक स्तर पर उच्च विविधता प्रदर्शित कर सकती है।
* **उदाहरण:** भारत में चावल की 50,000 से अधिक आनुवंशिक रूप से भिन्न किस्में और आम की 1,000 किस्में हैं। हिमालयी क्षेत्रों में उगने वाला औषधीय पौधा *राउविया वोमिटोरिया* अपने द्वारा उत्पादित सक्रिय रासायनिक रेसपाइन की क्षमता और सांद्रता में भिन्नता दिखाता है।
* **महत्व:** बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में किसी प्रजाति की अनुकूलन क्षमता और विकास के लिए उच्च आनुवंशिक विविधता आवश्यक है। यह किसी प्रजाति को एक ही बीमारी के प्रकोप से पूरी तरह नष्ट होने से बचाती है।
### 2. प्रजाति विविधता (Species Diversity)
* **परिभाषा:** यह किसी विशेष क्षेत्र के भीतर प्रजातियों की विविधता और प्रचुरता को संदर्भित करता है। प्रजाति समृद्धि प्रति इकाई क्षेत्र प्रजातियों की संख्या को संदर्भित करती है, जबकि प्रजाति समरूपता विभिन्न प्रजातियों की सापेक्ष प्रचुरता को दर्शाती है।
* **महत्व:** विभिन्न प्रजातियां विशिष्ट पारिस्थितिक भूमिका निभाती हैं। प्रजातियों की अधिक संख्या यह सुनिश्चित करती है कि पारिस्थितिकी तंत्र के कार्य जैसे पोषक तत्वों का चक्रण, परागण और प्राथमिक उत्पादकता सुचारू रूप से चलते रहें।
### 3. पारिस्थितिक तंत्र विविधता (Ecological Diversity)
* **परिभाषा:** विविधता का यह स्तर किसी भौगोलिक क्षेत्र के भीतर पारिस्थितिकी तंत्र की विविधता से संबंधित है। इसमें विभिन्न जैविक समुदाय, आवास और पारिस्थितिक प्रक्रियाएं शामिल हैं।
* **महत्व:** पारिस्थितिकी तंत्र विविधता विविध वनस्पतियों और जीवों के लिए आवासों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करती है, जो जटिल खाद्य जालों और वैश्विक जैव-भू-रासायनिक चक्रों का समर्थन करती है।
उत्तर (Answer): पवित्र उपवन (Sacred Groves) जंगल के ऐसे हिस्से या पेड़ों के टुकड़े हैं जिनकी स्वदेशी स्थानीय समुदायों द्वारा सांस्कृतिक, पारंपरिक और धार्मिक रूप से रक्षा की जाती है। ये टुकड़े स्थानीय देवताओं या पूर्वजों की आत्माओं को समर्पित होते हैं, और प्रथागत वर्जनाओं और सांस्कृतिक मान्यताओं द्वारा उनके भीतर कटाई, शिकार और पौधों के संग्रह के सभी रूपों को सख्ती से प्रतिबंधित किया जाता है।
\nजैव विविधता संरक्षण में पारिस्थितिक महत्व:
1. दुर्लभ प्रजातियों के आश्रय स्थल: पवित्र उपवन पौधों और जानवरों की कई दुर्लभ, संकटग्रस्त और स्थानिक प्रजातियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में कार्य करते हैं जो आसपास के क्षीण परिदृश्यों से गायब हो चुके हैं।
2. कुंवारी वनों का संरक्षण: वे किसी क्षेत्र की अबाधित चरमोत्कर्ष वनस्पति का प्रतिनिधित्व करते हैं, मूल जैव विविधता और समृद्ध आनुवंशिक पूल को संरक्षित करते हैं।
3. वाटरशेड संरक्षण: ये वन क्षेत्र अक्सर बारहमासी जल स्रोतों की रक्षा करते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, और स्थानीय जलविद्युत चक्रों को बनाए रखने में मदद करते हैं।
4. सांस्कृतिक संरक्षण: वे सामंजस्यपूर्ण मानव-प्रकृति अंतःक्रियाओं को दर्शाते हैं और प्रदर्शित करते हैं कि कैसे स्वदेशी संरक्षण नैतिकता पारिस्थितिकी तंत्र की सफलतापूर्वक रक्षा कर सकती है।
उत्तर (Answer): मानवता के अस्तित्व और भलाई के लिए जैव विविधता का संरक्षण आवश्यक है। जैव विविधता के संरक्षण के कारणों को तीन मुख्य श्रेणियों में समूहीकृत किया जा सकता है:
1. व्यापक रूप से उपयोगितावादी तर्क (Broadly Utilitarian Argument): प्रकृति द्वारा प्रदान की जाने वाली कई पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में जैव विविधता एक प्रमुख भूमिका निभाती है। ऐसा अनुमान है कि तेजी से गायब हो रहा अमेज़ॅन जंगल पृथ्वी के वायुमंडल में कुल ऑक्सीजन का 20 प्रतिशत प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से उत्पन्न करता है। अन्य पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में परागण ( जिसके बिना पौधे फल या बीज नहीं दे सकते), सौंदर्य आनंद, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु विनियमन शामिल हैं।
2. संकीर्ण रूप से उपयोगितावादी तर्क (Narrowly Utilitarian Argument): मनुष्य प्रकृति से अनगिनत प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त करता है। इनमें भोजन (अनाज, दालें, फल), जलाऊ लकड़ी, रेशा, निर्माण सामग्री और औषधीय महत्व के उत्पाद शामिल हैं। दुनिया भर में वर्तमान में बेची जाने वाली 25 प्रतिशत से अधिक दवाएं पौधों से प्राप्त होती हैं, और 25,000 पौधों की प्रजातियों में औषधीय मूल्य है जिनका उपयोग मूल निवासी करते हैं।
3. नैतिक तर्क (Ethical Argument): प्रत्येक प्रजाति का एक आंतरिक मूल्य होता है, भले ही इसका हमारे लिए कोई प्रत्यक्ष आर्थिक मूल्य न हो। भलाई की देखभाल करने और अपनी जैविक विरासत को अच्छी स्थिति में भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने का हमारा नैतिक कर्तव्य है, यह सम्मान करते हुए कि जीवन के सभी रूपों को पृथ्वी पर जीने का अधिकार है।
उत्तर (Answer): जैव विविधता हॉटस्पॉट ऐसे क्षेत्र हैं जो प्रजातियों की उच्च समृद्धि और स्थानिकमारी (endemism - ऐसी प्रजातियाँ जो दुनिया में कहीं और नहीं पाई जाती हैं) की उच्च डिग्री प्रदर्शित करते हैं, लेकिन साथ ही अपने आवास और प्रजातियों के लिए गंभीर खतरों का सामना कर रहे हैं।
\nजैव विविधता हॉटस्पॉट की पहचान करने के मानदंड:
1. उच्च स्थानिकमारी: क्षेत्र में कम से कम 15,000 स्थानिक संवहनी पौधों की प्रजातियाँ होनी चाहिए (यानी, पृथ्वी पर कहीं और नहीं पाई जाती हैं)।
2. खतरे की डिग्री: आवास विनाश और मानवीय दबावों के कारण क्षेत्र ने अपनी प्राथमिक/मूल प्राकृतिक वनस्पतियों का कम से कम 70% हिस्सा खो दिया होगा।
\nवैश्विक स्तर पर, पारिस्थितिक विशेषज्ञों ने दुनिया भर में 34 जैव विविधता हॉटस्पॉट की पहचान की है। हालांकि ये हॉटस्पॉट पृथ्वी के भूमि क्षेत्र के 2 प्रतिशत से भी कम हिस्से को कवर करते हैं, लेकिन इनमें मौजूद प्रजातियों की कुल संख्या अत्यधिक है, और इन क्षेत्रों की कड़ी सुरक्षा से वैश्विक विलुप्त होने की दर काफी कम हो सकती है। इनमें से तीन हॉटस्पॉट—पश्चिमी घाट और श्रीलंका, इंडो-बर्मा क्षेत्र, और हिमालय—भारत के समृद्ध जैव विविधता क्षेत्रों को कवर करते हैं।
उत्तर (Answer): जैव विविधता के संरक्षण को दो तरीकों से संपर्क किया जा सकता है: स्वस्थाने (In situ) और बाह्यस्थाने (Ex situ)।
\nस्वस्थाने संरक्षण (In situ Conservation):
- परिभाषा: इसमें संकटग्रस्त पौधों और जानवरों की उनके प्राकृतिक आवासों में सुरक्षा शामिल है। यह दृष्टिकोण उन परिवेशों में आबादी को पुनर्प्राप्त करने में मदद करता है जहाँ उन्होंने अपनी विशिष्ट विशेषताओं को विकसित किया है।
- दृष्टिकोण: प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा और रखरखाव किया जाता है।
- उदाहरण: राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, बायोस्फीयर रिजर्व, पवित्र उपवन (Sacred Groves) और जैव विविधता हॉटस्पॉट। उदाहरण के लिए, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क बाघों की उनके प्राकृतिक आवास में रक्षा करता है।
\nबाह्यस्थाने संरक्षण (Ex situ Conservation):
- परिभाषा: इसमें पौधों और जानवरों की संकटग्रस्त प्रजातियों की उनके प्राकृतिक आवासों के बाहर, मानवीय देखरेख और देखभाल के तहत सुरक्षा शामिल है।
- दृष्टिकोण: जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर ले जाया जाता है और संरक्षित सुविधाओं में रखा जाता है।
- उदाहरण: प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर), वानस्पतिक उद्यान, वन्यजीव सफारी पार्क, युग्मकों का क्रायोप्रेस्टेशन, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन और ऊतक संवर्धन तकनीक। उदाहरण के लिए, प्राणी उद्यानों में संकटग्रस्त प्रजातियों का प्रजनन करना या बीज बैंकों में बीजों का भंडारण करना अचानक प्राकृतिक आपदाओं से उनके विलुप्त होने को रोकने में मदद करता है।
उत्तर (Answer): दुनिया वर्तमान में जैव विविधता की जो तीव्र हानि देख रही है, वह मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों का परिणाम है। 'एविल क्वार्टेट' (दुष्ट चतुष्टय) जैव विविधता के नुकसान के चार प्रमुख कारणों का प्रतिनिधित्व करता है:
1. आवास क्षति और विखंडन: यह पौधों और जानवरों को विलुप्त होने की ओर ले जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारण है। वनों की कटाई, जंगलों को कृषि भूमि में बदलना, शहरीकरण और मानवीय गतिविधियों के कारण बड़े आवासों का छोटे टुकड़ों में विखंडन उन आबादी को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाता है जिनके लिए बड़े क्षेत्रों की आवश्यकता होती है।
2. अति-दोहन (Over-exploitation): जब 'आवश्यकता' 'लालच' में बदल जाती है, तो यह प्राकृतिक संसाधनों के अति-दोहन की ओर ले जाती है। पिछले 500 वर्षों में कई प्रजातियों का विलुप्त होना (जैसे स्टेलर की समुद्री गाय, पैसेंजर पिजन) इंसानों द्वारा अति-दोहन के कारण हुआ था। वर्तमान में, कई समुद्री मछली आबादी का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है।
3. विदेशी प्रजातियों का आक्रमण: जब विदेशी प्रजातियों को अनजाने में या जानबूझकर पेश किया जाता है, तो उनमें से कुछ आक्रामक हो जाती हैं और मूल प्रजातियों को भगा देती हैं। उदाहरण के लिए, पूर्वी अफ्रीका में विक्टोरिया झील में नील पर्च के प्रवेश से झील में सिच्लिड मछली की 200 से अधिक प्रजातियों का पारिस्थितिक रूप से अनूठा समूह विलुप्त हो गया।
4. सह-विलुप्ति (Co-extinctions): जब कोई प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो इसके साथ अनिवार्य रूप से जुड़ी पौधे और जंतु प्रजातियाँ भी विलुप्त हो जाती हैं। उदाहरण के लिए, जब कोई मेजबान मछली प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो परजीवियों का उसका अनूठा समूह भी इसी तरह की स्थिति का सामना करता है।