मुख्य सूत्र (Key Formulas)
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Here's a thinking process:
1. Analyze User Input:
- Role: Expert teacher for MP Board (Madhya Pradesh) education board in India.
- Task: Generate a comprehensive, highly accurate, beautifully formatted formula sheet/quick revision notes.
- Class: 10
- Subject: Science
- Chapter: Metals and Non-metals (धातु और अधातु)
- Language: Hindi (MANDATORY: ENTIRE response in Hindi Devanagari script, except for universal mathematical/scientific symbols)
- Rules: Standard Markdown, clear headings, concise but comprehensive, no preamble/JSON, only Markdown.
- Content Requirements: Important definitions, laws, formulas, reactions, properties, extraction methods, etc. relevant to Class 10 Science Chapter "Metals and Non-metals".
2. Identify Key Topics in Class 10 Science - Metals and Non-metals (MP Board/CBSE aligned):
- Physical properties of metals & non-metals
- Chemical properties of metals (reaction with oxygen, water, acids, salt solutions)
- Chemical properties of non-metals (reaction with oxygen, acids)
- Reactivity series of metals
- Occurrence of metals in nature (minerals, ores)
- Extraction of metals (concentration, conversion to oxide, reduction, refining)
- Corrosion and prevention
- Alloys
- Important reactions/equations
3. Structure the Notes (in Hindi):
- ### प्रस्तावना / परिचय (Brief intro if needed, but keep it concise)
- ### धातुओं की भौतिक गुणधर्म
- ### अधातुओं की भौतिक गुणधर्म
- ### धातुओं के रासायनिक गुणधर्म
- ### अधातुओं के रासायनिक गुणधर्म
- ### धातुओं की क्रियाशीलता श्रेणी
- ### धातुओं का प्राकृतिक रूप (अर्थात शिखर, अर्थात अयस्क)
- ### धातुओं का निष्कर्षण (Extraction)
- ### धातुओं का शुद्धिकरण (Refining)
- ### धातुओं का संक्षारण (Corrosion)
- ### मिश्र धातु (Alloys)
- ### महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण
- ### याद रखने योग्य तथ्य / नोट्स
4. Draft Content in Hindi (Mental Translation & Verification):
(I'll write it directly in Hindi Devanagari, ensuring accuracy for Class 10 MP Board syllabus)
### धातुओं की भौतिक गुणधर्म
- चमकदार (धातु चमक)
- ठोस (एकमात्र अपवाद: पारा - तरल)
- कठोर (एकमात्र अपवाद: सोडियम, पोटैशियम - नरम)
- ऊँचा गलनांक व क्वथनांक
- तापीय व विद्युत का अच्छा वाहक
- प्रत्यास्थ व कठोर
### अधातुओं की भौतिक गुणधर्म
- चमकहीन (आयोडीन व हीरे में अपवाद)
- ठोस, तरल या गैस (एकमात्र तरल: ब्रोमीन)
- नरम या भंगुर
- निम्न गलनांक व क्वथनांक
- ऊष्मा व विद्युत का खराब वाहक (हीरा अपवाद है - ऊष्मा का अच्छा वाहक)
- अप्रत्यास्थ
### धातुओं के रासायनिक गुणधर्म
- ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया: धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड (क्षारीय प्रकृति के)
2Na + O₂ → Na₂O (सोडियम ऑक्साइड)
2Mg + O₂ → 2MgO (магниesium ऑक्साइड)
4Al + 3O₂ → 2Al₂O₃ (एल्युमिनियम ऑक्साइड)
3Fe + 2O₂ → Fe₃O₄ (लोहा ऑक्साइड)
- जल के साथ अभिक्रिया:
- ठंडे जल:
2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑ + ऊष्मा
- गर्म जल:
Mg + H₂O → MgO + H₂↑ (वाष्प में: Mg + H₂O → Mg(OH)₂ + H₂↑)
- भाप के साथ:
Fe + H₂O → Fe₃O₄ + H₂↑
- अम्ल के साथ अभिक्रिया: धातु + अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस
Zn + H₂SO₄ → ZnSO₄ + H₂↑
- लवण विलयन के साथ अभिक्रिया (विस्थापन अभिक्रिया): अधिक क्रियाशील धातु, कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है।
Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
### अधातुओं के रासायनिक गुणधर्म
- ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया: अधातु + ऑक्सीजन → अधातु ऑक्साइड (अम्लीय या उदासीन)
C + O₂ → CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड - अम्लीय)
2S + 3O₂ → 2SO₃ (सल्फर ट्राइऑक्साइड - अम्लीय)
N₂ + O₂ → 2NO (नाइट्रिक ऑक्साइड - उदासीन)
- अम्ल के साथ अभिक्रिया: अधातु सामान्यतः अम्ल के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं। अपवाद: जलनशील अम्ल (जैसे HNO₃) के साथ।
C + 4HNO₃ → CO₂ + 4NO₂ + 2H₂O
### धातुओं की क्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series)
K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au
(पोटैशियम > सोडियम > कैल्शियम > मैग्नीशियम > एल्युमिनियम > जस्ता > लोहा > सीसा > हाइड्रोजन > तांबा > पारा > चांदी > सोना)
- शीर्ष की धातुएं अधिक क्रियाशील होती हैं।
- हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएं अम्ल से H₂ गैस निकालती हैं।
- हाइड्रोजन से नीचे की धातुएं अम्ल से अभिक्रिया नहीं करतीं।
### धातुओं का प्राकृतिक रूप, शिखर व अयस्क
- शिखर (Mineral): प्राकृतिक अवस्था में पाए जाने वाले धातु यौगिक (ऑक्साइड, सल्फाइड, कार्बोनेट आदि)।
- अयस्क (Ore): वह शिखर जिससे धातु के निष्कर्षण करना आर्थिक रूप से लाभकारी हो।
- उदाहरण: बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O) - एल्युमिनियम का अयस्क, हेमेटाइट (Fe₂O₃) - लोहे का अयस्क, कैलिनाइट (Al₂O₃) - एल्युमिनियम, ज़िंक ब्लेंड (ZnS) - ज़िंक, गैलेना (PbS) - सीसा।
### धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals)
1. अयस्क का सांद्रण: अनावश्यक मिट्टी/अशुद्धियों को हटाना।
2. ऑक्साइड में परिवर्तन:
- कार्बोनेट अयस्क → ताप देने पर → ऑक्साइड (विसंघटन)
ZnCO₃ → ZnO + CO₂
- सल्फाइड अयस्क → वायु की उपस्थिति में ताप देने पर → ऑक्साइड (रोस्टिंग)
2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂
3. ऑक्साइड से धातु का निष्कर्षण:
- स्वयं विसंघटन:
2HgO → 2Hg + O₂
- क्रियाशील धातुओं का विद्युत अपघटनी निष्कर्षण: Na, K, Ca, Al (विलीन लवण/हाइड्रेटेड लवण का विद्युत अपघटन)
उदा. 2Al₂O₃ (विलीन) → 4Al + 3O₂ (हॉल-हेरोल्ट प्रक्रिया)
- मध्यम क्रियाशील धातुओं का अपचयन: कोयला/कार्बन द्वारा
ZnO + C → Zn + CO
Fe₂O₃ + 3CO → 2Fe + 3CO₂ (भट्टी में)
- कम क्रियाशील धातु: ताप देने पर स्वयं विसंघटित हो जाती हैं।
### धातुओं का शुद्धिकरण (Refining)
- विद्युत अपघटनी शुद्धिकरण: अशुद्ध धातु को एनोड, शुद्ध धातु की पतली शीट कैथोड, धातु लवण विलयन इलेक्ट्रोलाइट बनाया जाता है।
उदा. तांबे का शुद्धिकरण:
एनोड: Cu → Cu²⁺ + 2e⁻
कैथोड: Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu
### धातुओं का संक्षारण (Corrosion)
- धातु का वायु, जल या नमी के संपर्क में आने पर धीरे-धीरे क्षरण।
- लोहे का संक्षारण = जंग लगना →
4Fe + 3O₂ + xH₂O → 2Fe₂O₃·xH₂O (सूखी जंग)
- रोकथाम: चिकनाई, पेंट, जस्ता लेप (Galvanization), अन्य धातुओं से लेपन।
### मिश्र धातु (Alloys)
- दो या अधिक धातुओं या धातु व अधातु का मिश्रण।
- उद्देश्य: कठोरता बढ़ाना, संक्षारण रोधन, गलनांक बदलना, चमक बढ़ाना।
- उदाहरण:
- पीतल (तांबा + जस्ता)
- ब्रास (तांबा + निकल + टिन)
- स्टेनलेस स्टील (लोहा + कार्बन + क्रोमियम + निकल)
- देसी धातु (तांबा + टिन)
- ब्राइज (तांबा + जस्ता) - Wait, brass is तांबा + जस्ता, bronze is तांबा + टिन. Let's correct: पीतल (तांबा + जस्ता), ब्रांज (तांबा + टिन), स्टेनलेस स्टील, देसी धातु, पारा मिश्रधातु (अमलगम)।
### महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण (Quick Reference)
2K + 2H₂O → 2KOH + H₂↑ + ऊष्मा
2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑ + ऊष्मा
Ca + 2H₂O → Ca(OH)₂ + H₂↑
Mg + 2HCl → MgCl₂ + H₂↑
Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
Cu + 2AgNO₃ → Cu(NO₃)₂ + 2Ag
Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu
Fe₂O₃ + 3CO → 2Fe + 3CO₂
CaO + H₂O → Ca(OH)₂ + ऊष्मा (संक्षारक क्षार बनाना)
### याद रखने योग्य तथ्य (MP Board Focus)
- पारा एकमात्र धातु है जो कक्ष ताप पर तरल अवस्था में रहता है।
- ब्रोमीन एकमात्र अधातु है जो कक्ष ताप पर तरल अवस्था में रहती है।
- हीरा अधातु है लेकिन विद्युत का कुपवाहक है, जबकि ऊष्मा का उत्कृष्ट वाहक है।
- ग्रेफाइट अधातु है लेकिन विद्युत का अच्छा वाहक है।
- सोना व चांदी को नींबू के रस/विनेगर में धोने से चमक आती है (क्योंकि सल्फाइड परत हट जाती है)।
- अमलगम: पारे की मिश्रधातु, दांत भरने में उपयोग।
- हॉल-हेरोल्ट प्रक्रिया: एल्युमिनियम का विद्युत अपघटनी निष्कर्षण।
- अयस्क सांद्रण के तरीके: गुरुत्वाकर्षण विधि, मैग्नेटिक विधि, फ्लोटेशन विधि, रासायनिक विधि।
5. Review & Refine (Self-Correction/Verification against Rules):
- Language: All in Hindi Devanagari. Check.
- Formatting: Markdown headings, lists, clear structure. Check.
- Content: Covers physical/chemical properties, reactivity series, extraction, refinement, corrosion, alloys, key equations, important facts. Matches Class 10 NCERT/MP Board syllabus. Check.
- Formulas: Simple, readable format. Check.
- No preamble/JSON: Will output only markdown. Check.
- Accuracy Check:
2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂ (correct)
Mg + H₂O → MgO + H₂ (for steam, actually Mg + H₂O → MgO + H₂ or Mg + 2H₂O → Mg(OH)₂ + H₂. I'll stick to standard: गर्म जल/भाप के साथ Mg + H₂O → MgO + H₂ or Mg + 2H₂O → Mg(OH)₂ + H₂. I'll write clearly.)
- Reactivity series order is standard.
- Extraction steps match syllabus.
- Corrosion formula:
4Fe + 3O₂ + xH₂O → 2Fe₂O₃·xH₂O (correct)
- Alloys: पीतल (Cu+Zn), ब्रांज (Cu+Sn), स्टेनलेस स्टील (Fe+Cr+Ni+C), देसी धातु (Cu+Zn+Sn? Actually देसी धातु is Cu+Zn, but sometimes mentioned with Sn. I'll stick to standard: पीतल = तांबा + जस्ता, ब्रांज = तांबा + टिन, स्टेनलेस स्टील = लोहा + क्रोमियम + निकल, अमलगम = पारा + अन्य धातु)
- I'll ensure all chemical formulas use standard notation.
- I'll add a section for "अयस्क सांद्रण विधियाँ" as it's important for MP Board.
- I'll verify Hindi terminology: शिखर (Mineral), अयस्क (Ore), निष्कर्षण (Extraction), शुद्धिकरण (Refining), संक्षारण (Corrosion), विद्युत अपघटन (Electrolysis), रोस्टिंग (Roasting), कैल्सिनेशन (Calcination
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 धातुएं और अपधातुएं
धातू के गुण
अत्यधिक पारदर्शिता
सोना, चाँदी
कठोरता
लोहा, ताँबा
अधिक गर्मी से पिघलने की क्षमता
ताँबा, चाँदी
अपधातु के गुण
पारदर्शिता की कमी
कार्बोनिक एसिड, हाइड्रोजन फ्लोराइड
कठोरता की कमी
सिलिकॉन, कार्बोनिक एसिड
गर्मी से पिघलने की क्षमता की कमी
फॉस्फोरस, सिलिकॉन
धातुओं और अपधातुओं के उपयोग
धातुएं
खनिज तेल का उत्पादन
विद्युत के उपकरण
अपधातुएं
फार्मास्युटिकल्स
प्लास्टिक्स
धातुओं और अपधातुओं के प्रकार
धातुएं
अल्कलाइन धातुएं (लिथियम, सोडियम)
प्राकृतिक धातुएं (लोहा, ताँबा)
अपधातुएं
कार्बनिक अपधातुएं (कार्बन, नाइट्रोजन)
एनार्गेनिक अपधातुएं (हाइड्रोजन, हीलियम)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### भाग (a): भर्जन (Roasting) और निस्तापन (Calcination) में अंतर
**1. भर्जन (Roasting):**
* **परिभाषा:** भर्जन वह प्रक्रिया है जिसमें सल्फाइड अयस्क को वायु की अत्यधिक उपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करके धातु ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।
* **उदाहरण (जिंक सल्फाइड / जिंक ब्लेंड):**
$$2ZnS(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2ZnO(s) + 2SO_2(g)$$
* **उप-उत्पाद:** इस प्रक्रिया में सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$) गैस निकलती है।
**2. निस्तापन (Calcination):**
* **परिभाषा:** निस्तापन वह प्रक्रिया है जिसमें कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु या वायु की अनुपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करके धातु ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।
* **उदाहरण (जिंक कार्बोनेट / कैलेमाइन):**
$$ZnCO_3(s) \xrightarrow{\Delta} ZnO(s) + CO_2(g)$$
* **उप-उत्पाद:** इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) गैस निकलती है।
**3. धातु ऑक्साइड का अपचयन (Reduction):**
* प्राप्त जिंक ऑक्साइड ($ZnO$) को तत्पश्चात कोक (कार्बन) जैसे अपचायक का उपयोग करके धातु में अपचयित किया जाता है:
$$ZnO(s) + C(s) \xrightarrow{\Delta} Zn(s) + CO(g)$$
---
### भाग (b): तांबे (कॉपर) का विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining)
\nनिष्कर्षण के पश्चात प्राप्त अशुद्ध धातुओं को शुद्ध करने के लिए विद्युत अपघटनी परिष्करण विधि का प्रयोग किया जाता है।
**1. प्रायोगिक सेटअप:**
* **एनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड):** अशुद्ध तांबे की एक मोटी छड़ या ब्लॉक।
* **कैथोड (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड):** शुद्ध तांबे की एक पतली पट्टी।
* **विद्युत अपघट्य (Electrolyte):** अम्लीकृत कॉपर सल्फेट ($CuSO_4$) का जलीय विलयन।
**2. कार्यप्रणाली:**
* जब विद्युत अपघट्य में से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो एनोड से अशुद्ध तांबा खुलकर विलयन में चला जाता है।
* उसी समय, विलयन से समान मात्रा में शुद्ध तांबा कैथोड पर निक्षेपित (जमा) होने लगता है।
**3. इलेक्ट्रोडों पर होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ:**
* **एनोड पर (ऑक्सीकरण):** अशुद्ध कॉपर इलेक्ट्रॉन त्यागकर $Cu^{2+}$ आयनों के रूप में विलयन में घुलता है।
$$Cu(s) \text{ (अशुद्ध)} \rightarrow Cu^{2+}(aq) + 2e^-$$
* **कैथोड पर (अपचयन):** विलयन से $Cu^{2+}$ आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके शुद्ध कॉपर के रूप में कैथोड पर जमा हो जाते हैं।
$$Cu^{2+}(aq) + 2e^- \rightarrow Cu(s) \text{ (शुद्ध)}$$
**4. एनोड पंक (Anode Mud):**
* अशुद्ध तांबे में उपस्थित घुलनशील अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं।
* अघुलनशील अशुद्धियाँ (जैसे सोना, चांदी आदि) एनोड के नीचे तली में एकत्र हो जाती हैं, जिसे **एनोड पंक** कहा जाता है।
उत्तर (Answer): ### चरणबद्ध हल:
#### भाग (a): भर्जन के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण\nजब जिंक सल्फाइड ($ZnS$) को प्रचुर वायु की उपस्थिति में तीव्रता से गर्म किया जाता है, तो यह जिंक ऑक्साइड ($ZnO$) और सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$) बनाता है:
$$2ZnS(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2ZnO(s) + 2SO_2(g)$$
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#### भाग (b): शुद्ध जिंक धातु के द्रव्यमान की गणना
1. **नमूने में शुद्ध $ZnS$ का द्रव्यमान:**
$$\text{अयस्क का कुल द्रव्यमान} = 500\text{ g}$$
$$ZnS \text{ की शुद्धता} = 80\%$$
$$\text{शुद्ध } ZnS \text{ का द्रव्यमान} = 500 \times \frac{80}{100} = 400\text{ g}$$
2. **मोलर द्रव्यमान की गणना:**
$$ZnS \text{ का मोलर द्रव्यमान} = 65 + 32 = 97\text{ g/mol}$$
$$Zn \text{ का परमाणु द्रव्यमान} = 65\text{ g/mol}$$
3. **उपस्थित $ZnS$ के मोल:**
$$ZnS \text{ के मोल} = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{मोलर द्रव्यमान}} = \frac{400\text{ g}}{97\text{ g/mol}} \approx 4.1237\text{ mol}$$
4. **रससमीकरणमितीय (Stoichiometric) संबंध:**
$$1\text{ मोल } ZnS \rightarrow 1\text{ मोल } ZnO \rightarrow 1\text{ मोल } Zn$$
$$\therefore \text{प्राप्त } Zn \text{ के मोल} = ZnS \text{ के मोल} = 4.1237\text{ mol}$$
5. **प्राप्त $Zn$ का द्रव्यमान:**
$$Zn \text{ का द्रव्यमान} = \text{मोल} \times \text{परमाणु द्रव्यमान} = 4.1237\text{ mol} \times 65\text{ g/mol} = 268.04\text{ g}$$
---
#### भाग (c): STP पर $SO_2$ गैस के आयतन की गणना
1. **$SO_2$ का मोल संबंध:**
संतुलित समीकरण के अनुसार: $2\text{ मोल } ZnS \text{ से } 2\text{ मोल } SO_2 \text{ प्राप्त होता है।}$
$$\text{उत्पन्न } SO_2 \text{ के मोल} = ZnS \text{ के मोल} = 4.1237\text{ mol}$$
2. **STP पर $SO_2$ का आयतन:**
$$\text{आयतन} = \text{मोल} \times \text{STP पर मोलर आयतन}$$
$$SO_2 \text{ का आयतन} = 4.1237\text{ mol} \times 22.4\text{ L/mol} = 92.37\text{ लीटर}$$
**अंतिम उत्तर:**
* **(a)** $2ZnS(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2ZnO(s) + 2SO_2(g)$
* **(b)** निष्कर्षित जिंक धातु का द्रव्यमान = **$268.04\text{ g}$**
* **(c)** STP पर $SO_2$ का आयतन = **$92.37\text{ L}$**
उत्तर (Answer): ### (a) आयनिक यौगिकों की परिभाषा एवं निर्माण
**आयनिक यौगिक:** धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉन के पूर्ण स्थानांतरण द्वारा बनने वाले यौगिकों को आयनिक यौगिक या वैद्युतसंयोजी यौगिक कहते हैं।
#### 1. मैग्नीशियम क्लोराइड ($MgCl_2$) का निर्माण:
* **मैग्नीशियम ($Mg$):** परमाणु क्रमांक = 12, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 2। अष्टक पूरा करने के लिए यह 2 इलेक्ट्रॉन त्यागता है:
$$Mg \rightarrow Mg^{2+} + 2e^-$$
* **क्लोरीन ($Cl$):** परमाणु क्रमांक = 17, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 7। इसे अष्टक के लिए 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। दो क्लोरीन परमाणु 1-1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं:
$$2Cl + 2e^- \rightarrow 2Cl^-$$
* **इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण:**
$$Mg^{2+} + 2[:\ddot{\text{Cl}}:]^- \rightarrow MgCl_2$$
#### 2. सोडियम ऑक्साइड ($Na_2O$) का निर्माण:
* **सोडियम ($Na$):** परमाणु क्रमांक = 11, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 1। दो सोडियम परमाणु 1-1 इलेक्ट्रॉन त्यागते हैं:
$$2Na \rightarrow 2Na^+ + 2e^-$$
* **ऑक्सीजन ($O$):** परमाणु क्रमांक = 8, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 6। इसे 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है:
$$O + 2e^- \rightarrow O^{2-}$$
* **इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण:**
$$2[Na]^+\ [ :\ddot{\text{O}}: ]^{2-} \rightarrow Na_2O$$
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### (b) आयनिक यौगिकों के सामान्य भौतिक गुणधर्म
1. **भौतिक प्रकृति और कठोरता:**
* *गुणधर्म:* आयनिक यौगिक ठोस और कठोर होते हैं।
* *वैज्ञानिक कारण:* धन और ऋण आयनों के बीच मजबूत अंतर-आयनिक आकर्षण बल (वैद्युत स्थैतिक बल) होता है, जो इन्हें मजबूती से बांधे रखता है।
2. **उच्च गलनांक एवं क्वथनांक:**
* *गुणधर्म:* इनके गलनांक और क्वथनांक बहुत उच्च होते हैं।
* *वैज्ञानिक कारण:* मजबूत अंतर-आयनिक आकर्षण बल को तोड़ने के लिए बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
3. **विलेयता (Solubility):**
* *गुणधर्म:* ये जल जैसे ध्रुवीय विलायकों में घुलनशील, लेकिन केरोसिन या पेट्रोल जैसे अध्रुवीय विलायकों में अविलेय होते हैं।
* *वैज्ञानिक कारण:* जल के अणु आयनों के बीच के वैद्युत स्थैतिक आकर्षण को कमजोर कर देते हैं जिससे आयन पृथक होकर घुल जाते हैं।
4. **विद्युत चालकता:**
* *गुणधर्म:* ये ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते, परंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में विद्युत के सुचालक होते हैं।
* *वैज्ञानिक कारण:* ठोस अवस्था में आयन स्थिर होते हैं। गलित या जलीय अवस्था में अंतर-आयनिक आकर्षण टूट जाता है और मुक्त आयन धारा प्रवाह के लिए गति करने लगते हैं।
उत्तर (Answer): ### मध्यम अभिक्रियाशीलता वाले धातुओं का निष्कर्षण\nसक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुएं (जैसे जिंक, आयरन, लेड और कॉपर) मध्यम रूप से अभिक्रियाशील होती हैं। ये प्रकृति में सामान्यतः सल्फाइड या कार्बोनेट के रूप में पाई जाती हैं। सल्फाइड या कार्बोनेट की तुलना में धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करना अधिक आसान होता है। इसलिए, अपचयन से पहले अयस्क को धातु ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।
#### 1. अयस्क का धातु ऑक्साइड में परिवर्तन:
* **भर्जन (Sulphide ओरों के लिए):** सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर तीव्रता से गर्म करके ऑक्साइड में बदला जाता है।
$$\text{समीकरण: } 2ZnS(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2ZnO(s) + 2SO_2(g)$$
* **निस्तापन (Carbonate ओरों के लिए):** कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में उच्च ताप पर गर्म करके ऑक्साइड में बदला जाता है।
$$\text{समीकरण: } ZnCO_3(s) \xrightarrow{\Delta} ZnO(s) + CO_2(g)$$
#### 2. धातु ऑक्साइड का धातु में अपचयन:\nधातु ऑक्साइड को कार्बन (कोक) जैसे अपचायक का उपयोग करके मुक्त धातु में अपचयित किया जाता है।
$$\text{समीकरण: } ZnO(s) + C(s) \rightarrow Zn(s) + CO(g)$$
---
### कॉपर का विद्युतअपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining of Copper)\nअपचयन से प्राप्त धातु अशुद्ध होती है और इसे विद्युतअपघटनी विधि द्वारा शुद्ध किया जाता है।
* **उपकरण का समायोजन:**
* **एनोड (Anode):** अशुद्ध कॉपर धातु की मोटी छड़।
* **कैथोड (Cathode):** शुद्ध कॉपर धातु की पतली पट्टी।
* **विद्युतअपघट्य (Electrolyte):** अम्लीकृत कॉपर सल्फेट ($CuSO_4$) का विलयन।
* **कार्यविधि:**
जब विद्युतअपघट्य से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो एनोड से शुद्ध तांबा विलयन में घुल जाता है, और उतनी ही मात्रा में शुद्ध तांबा विलयन से कैथोड पर निक्षेपित (जमा) हो जाता है।
* **इलेक्ट्रोड अभिक्रियाएं:**
* **एनोड पर (ऑक्सीकरण):** $Cu(s) \text{ (अशुद्ध)} \rightarrow Cu^{2+}(aq) + 2e^-$
* **कैथोड पर (अपचयन):** $Cu^{2+}(aq) + 2e^- \rightarrow Cu(s) \text{ (शुद्ध)}$
* **एनोड पंक (Anode Mud):** घुलनशील अशुद्धियां विलयन में चली जाती हैं, जबकि अविलेय अशुद्धियां एनोड के नीचे तली में बैठ जाती हैं जिन्हें **एनोड पंक** कहा जाता है।
उत्तर (Answer): ### 1. मैग्नीशियम क्लोराइड ($MgCl_2$) का निर्माण
* **मैग्नीशियम ($Mg$):**
* परमाणु क्रमांक = $12$
* इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = $2, 8, 2$
* संयोजी इलेक्ट्रॉन = $2$
* मैग्नीशियम अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए $2$ इलेक्ट्रॉन त्यागता है:
$$Mg \rightarrow Mg^{2+} + 2e^-$$
* **क्लोरीन ($Cl$):**
* परमाणु क्रमांक = $17$
* इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = $2, 8, 7$
* संयोजी इलेक्ट्रॉन = $7$
* प्रत्येक क्लोरीन परमाणु अपना अष्टक पूरा करने के लिए $1$ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है:
$$Cl + e^- \rightarrow Cl^-$$
* **इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना द्वारा निरूपण:**
* एक मैग्नीशियम परमाणु दो अलग-अलग क्लोरीन परमाणुओं को एक-एक इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित करता है।
$$\text{Mg: } + 2[\cdot\ddot{\text{Cl}}:] \longrightarrow Mg^{2+} \left[ :\ddot{\text{Cl}}: \right]^-_2$$
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### 2. आयनिक यौगिकों के सामान्य भौतिक गुणधर्म
1. **भौतिक प्रकृति (ठोस एवं कठोर):**
* **गुणधर्म:** आयनिक यौगिक ठोस और कठोर होते हैं।
* **कारण:** धनायनों और ऋणायनों के बीच मजबूत अंतर-आयनिक आकर्षण बल होता है।
2. **उच्च गलनांक एवं क्वथनांक:**
* **गुणधर्म:** इनके गलनांक और क्वथनांक अत्यधिक उच्च होते हैं (जैसे $NaCl$ का गलनांक $1074\text{ K}$)।
* **कारण:** इनके मजबूत अंतर-आयनिक आकर्षण बल को तोड़ने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
3. **घुलनशीलता (विलेयता):**
* **गुणधर्म:** आयनिक यौगिक सामान्यतः जल (ध्रुवीय विलायक) में घुलनशील होते हैं, किंतु केरोसिन और पेट्रोल जैसे अध्रुवीय विलायकों में अविलेय होते हैं।
* **कारण:** जल के अणु आयनों के बीच के आकर्षण बल को कमजोर कर देते हैं।
4. **विद्युत चालकता:**
* **गुणधर्म:** ये ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते, परंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में विद्युत का चालन करते हैं।
* **कारण:** ठोस अवस्था में आयन अपनी जगह पर स्थिर रहते हैं, जबकि गलित या विलयन अवस्था में आयन गति करने के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं।
उत्तर (Answer): ### भाग (क): संक्षारण तथा बचाव के उपाय
#### **संक्षारण (Corrosion):**\nसंक्षारण वह प्रक्रिया है जिसमें वायु, नमी या रसायनों (जैसे अम्ल) की क्रिया के कारण धातुएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं।
* **उदाहरण:** लोहे पर जंग लगना, चाँदी का काला पड़ना ($Ag_2S$ का बनना), और तांबे पर हरी परत जमना ($CuCO_3\cdot Cu(OH)_2$)।
#### **लोहे में जंग लगने की आवश्यक शर्तें:**
1. **वायु (ऑक्सीजन) की उपस्थिति:** लोहे के ऑक्सीकरण के लिए ऑक्सीजन अनिवार्य है।
2. **जल/नमी की उपस्थिति:** जल वाष्प जलयोजित आयरन ऑक्साइड ($Fe_2O_3\cdot xH_2O$) बनाने के लिए एक माध्यम प्रदान करता है।
#### **संक्षारण से बचाव की विधियाँ:**
1. **यशदलेपन (गैल्वनीकरण):** लोहे की वस्तुओं पर जस्ता (जिंक) की पतली परत चढ़ाई जाती है।
2. **मिश्रात्वन (अलोयिंग):** लोहे में अन्य धातुओं/अधातुओं को मिलाकर उसके गुणों को बदला जाता है (जैसे स्टेनलेस स्टील में जंग नहीं लगता)।
3. **पेंट करना, ग्रीस या तेल लगाना:** धातु की सतह पर लेप लगाने से वायु और नमी से सीधा संपर्क टूट जाता है।
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### भाग (ख): आंकिक प्रश्न का हल
**1. $Fe_2O_3$ का आणविक द्रव्यमान:**
* $Fe$ का परमाणु द्रव्यमान = $56\text{ u}$
* $O$ का परमाणु द्रव्यमान = $16\text{ u}$
$$Fe_2O_3 \text{ का आणविक द्रव्यमान} = (2 \times 56) + (3 \times 16) = 112 + 48 = 160\text{ g/mol}$$
**2. प्राप्त लोहे ($2Fe$) का द्रव्यमान:**
$$2Fe \text{ का द्रव्यमान} = 2 \times 56 = 112\text{ g/mol}$$
**3. स्टाइकोमीट्री (समीकरण) के अनुसार:**\nसमीकरण से स्पष्ट है कि:
$$160\text{ g } Fe_2O_3 \text{ से प्राप्त होता है } = 112\text{ g } Fe$$
**4. $800\text{ g } Fe_2O_3$ से प्राप्त लोहे का द्रव्यमान:**
$$\text{लोहे का द्रव्यमान} = \left( \frac{112\text{ g}}{160\text{ g}} \right) \times 800\text{ g}$$
$$\text{लोहे का द्रव्यमान} = 0.7 \times 800\text{ g} = 560\text{ g}$$
**अंतिम उत्तर:**\nनिष्कर्षित किए जा सकने वाले शुद्ध लोहे का अधिकतम द्रव्यमान **$560\text{ g}$** है।
उत्तर (Answer): ### सक्रियता श्रेणी के आधार पर धातुओं का निष्कर्षण
\nधातुओं को उनकी सक्रियता श्रेणी में स्थान के आधार पर उनके अयस्कों से निष्कर्षित किया जाता है:
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### 1. सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुओं का निष्कर्षण\nसक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुएं बहुत कम अभिक्रियाशील होती हैं। इन धातुओं के ऑक्साइडों को केवल गर्म करके ही धातु में अपचयित किया जा सकता है।
* **उदाहरण: सिनाबार ($HgS$) से मर्करी (पारद) का निष्कर्षण:**
* **चरण 1:** सिनाबार ($HgS$) को वायु में गर्म करने पर यह पहले मर्क्यूरिक ऑक्साइड ($HgO$) में परिवर्तित होता है।
$$2HgS(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2HgO(s) + 2SO_2(g)$$
* **चरण 2:** अधिक गर्म करने पर मर्क्यूरिक ऑक्साइड अपचयित होकर मर्करी (धातु) देता है।
$$2HgO(s) \xrightarrow{\Delta} 2Hg(l) + O_2(g)$$
* **उदाहरण: कॉपर ग्लांस ($Cu_2S$) से तांबे का निष्कर्षण:**
$$2Cu_2S(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2Cu_2O(s) + 2SO_2(g)$$
$$2Cu_2O(s) + Cu_2S(s) \xrightarrow{\Delta} 6Cu(s) + SO_2(g)$$
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### 2. भर्जन (Roasting) और निस्तापन (Calcination) में अंतर
\nसक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुएं (जैसे $Fe, Zn, Pb$) प्रकृति में सामान्यतः सल्फाइड या कार्बोनेट अयस्क के रूप में पाई जाती हैं। निष्कर्षण से पहले इन्हें भर्जन या निस्तापन द्वारा धातु ऑक्साइड में बदला जाता है।
| लक्षण | भर्जन (Roasting) | निस्तापन (Calcination) |
| :--- | :--- | :--- |
| **परिभाषा** | सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करने की प्रक्रिया। | कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु या अनुपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करने की प्रक्रिया। |
| **अयस्क का प्रकार** | यह **सल्फाइड अयस्कों** के लिए प्रयुक्त होता है। | यह **कार्बोनेट अयस्कों** के लिए प्रयुक्त होता है। |
| **उत्सर्जित गैस** | सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$) गैस निकलती है। | कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) गैस निकलती है। |
| **रासायनिक समीकरण** | **जिंक सल्फाइड ($ZnS$):**<br>$2ZnS(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2ZnO(s) + 2SO_2(g)$ | **जिंक कार्बोनेट ($ZnCO_3$):**<br>$ZnCO_3(s) \xrightarrow{\Delta} ZnO(s) + CO_2(g)$ |
\nधातु ऑक्साइड ($ZnO$) प्राप्त करने के बाद, कार्बन (कोक) जैसे अपचायक का उपयोग करके इसे धातु में अपचयित कर लिया जाता है:
$$ZnO(s) + C(s) \rightarrow Zn(s) + CO(g)$$
उत्तर (Answer): ### **(a) उभयधर्मी (ऐम्फोटेरिक) ऑक्साइड**
**परिभाषा:** ऐसे धातु ऑक्साइड जो अम्लीय और क्षारकीय दोनों प्रकार के व्यवहार प्रदर्शित करते हैं, **उभयधर्मी ऑक्साइड** कहलाते हैं। ये अम्ल तथा क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं।
#### **उदाहरण एवं रासायनिक समीकरण:**
1. **एल्युमीनियम ऑक्साइड ($\text{Al}_2\text{O}_3$):**
* **अम्ल (HCl) के साथ अभिक्रिया:** क्षारीय व्यवहार दर्शाता है।
$$\text{Al}_2\text{O}_3\text{ (s)} + 6\text{HCl (aq)} \rightarrow 2\text{AlCl}_3\text{ (aq)} + 3\text{H}_2\text{O (l)}$$
* **क्षार (NaOH) के साथ अभिक्रिया:** अम्लीय व्यवहार दर्शाता है।
$$\text{Al}_2\text{O}_3\text{ (s)} + 2\text{NaOH (aq)} \rightarrow 2\text{NaAlO}_2\text{ (aq) [सोडियम ऐलुमिनेट]} + \text{H}_2\text{O (l)}$$
2. **जिंक ऑक्साइड ($\text{ZnO}$):**
* **अम्ल (HCl) के साथ अभिक्रिया:**
$$\text{ZnO (s)} + 2\text{HCl (aq)} \rightarrow \text{ZnCl}_2\text{ (aq)} + \text{H}_2\text{O (l)}$$
* **क्षार (NaOH) के साथ अभिक्रिया:**
$$\text{ZnO (s)} + 2\text{NaOH (aq)} \rightarrow \text{Na}_2\text{ZnO}_2\text{ (aq) [सोडियम जिंकेट]} + \text{H}_2\text{O (l)}$$
---
### **(b) धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया**
\nधातुएं जल के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड या धातु हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। विभिन्न धातुएं जल के साथ भिन्न-भिन्न क्रियाशीलता दर्शाती हैं:
1. **सोडियम (अत्यधिक क्रियाशील - ठंडे जल के साथ):**
* यह ठंडे जल के साथ अत्यंत तीव्र और ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया करता है, जिससे निकलने वाली हाइड्रोजन गैस तुरंत आग पकड़ लेती है।
* **समीकरण:**
$$2\text{Na (s)} + 2\text{H}_2\text{O (l)} \rightarrow 2\text{NaOH (aq)} + \text{H}_2\text{ (g)} + \text{ऊष्मीय ऊर्जा}$$
2. **कैल्शियम (कम तीव्र - ठंडे जल के साथ):**
* यह ठंडे जल के साथ कम तीव्र अभिक्रिया करता है। उत्सर्जित ऊष्मा इतनी नहीं होती कि हाइड्रोजन आग पकड़ ले। कैल्शियम तैरना शुरू कर देता है क्योंकि हाइड्रोजन के बुलबुले इसकी सतह पर चिपक जाते हैं।
* **समीकरण:**
$$\text{Ca (s)} + 2\text{H}_2\text{O (l)} \rightarrow \text{Ca(OH)}_2\text{ (aq)} + \text{H}_2\text{ (g)}$$
3. **मैग्नीशियम (गर्म जल के साथ):**
* यह ठंडे जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता; यह गर्म जल के साथ अभिक्रिया करके मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाता है। यह भी तैरने लगता है।
* **समीकरण:**
$$\text{Mg (s)} + 2\text{H}_2\text{O (l) [गर्म]} \rightarrow \text{Mg(OH)}_2\text{ (aq)} + \text{H}_2\text{ (g)}$$
4. **आयरन (केवल भाप के साथ):**
* यह ठंडे या गर्म जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता, बल्कि केवल भाप (स्टीम) के साथ अभिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाता है।
* **समीकरण:**
$$3\text{Fe (s)} + 4\text{H}_2\text{O (g) [भाप]} \rightarrow \text{Fe}_3\text{O}_4\text{ (s)} + 4\text{H}_2\text{ (g)}$$
उत्तर (Answer): ### **भाग (a): आंकिक प्रश्न का हल**
**1. थर्माइट अभिक्रिया का संतुलित रासायनिक समीकरण:**
$$\text{Fe}_2\text{O}_3\text{ (s)} + 2\text{Al (s)} \rightarrow \text{Al}_2\text{O}_3\text{ (s)} + 2\text{Fe (l)} + \text{ऊष्मा}$$
**2. मोलर द्रव्यमान की गणना:**
* $\text{Fe}_2\text{O}_3$ का मोलर द्रव्यमान $= (2 \times 56) + (3 \times 16) = 112 + 48 = 160\text{ g/mol}$
* $2\text{ मोल}$ $\text{Al}$ का द्रव्यमान $= 2 \times 27 = 54\text{ g}$
* $2\text{ मोल}$ $\text{Fe}$ का द्रव्यमान $= 2 \times 56 = 112\text{ g}$
**3. पद दर पद हल:**
* संतुलित समीकरण के अनुसार:
* $160\text{ g}$ $\text{Fe}_2\text{O}_3$ के साथ पूर्ण अभिक्रिया के लिए $54\text{ g}$ एल्युमीनियम ($\text{Al}$) की आवश्यकता होती है।
* अतः, आवश्यक एल्युमीनियम का द्रव्यमान = **$54\text{ g}$**।
* उत्पन्न आयरन का द्रव्यमान:
* $160\text{ g}$ $\text{Fe}_2\text{O}_3$ से $112\text{ g}$ आयरन ($\text{Fe}$) प्राप्त होता है।
* अतः, उत्पन्न आयरन का द्रव्यमान = **$112\text{ g}$**।
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### **भाग (b): सैद्धांतिक भाग**
**आयनिक यौगिक:** धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण द्वारा बने यौगिकों को आयनिक यौगिक या वैद्युत संयोजक यौगिक कहा जाता है।
#### **आयनिक यौगिकों के सामान्य गुणधर्म:**
1. **भौतिक प्रकृति:** धनायनों और ऋणायनों के बीच मजबूत अंतर-आयनिक आकर्षण बल के कारण यह ठोस और थोड़े कठोर होते हैं। यह सामान्यतः भंगुर होते हैं तथा दाब डालने पर टुकड़ों में टूट जाते हैं।
2. **उच्च गलनांक एवं क्वथनांक:** आयनिक यौगिकों का गलनांक और क्वथनांक बहुत उच्च होता है क्योंकि मजबूत अंतर-आयनिक आकर्षण बल को तोड़ने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
3. **विलेयता:** वैद्युत संयोजक यौगिक सामान्यतः जल में विलेय (घुलनशील) होते हैं, परंतु केरोसिन, पेट्रोल और बेंजीन जैसे कार्बनिक विलायकों में अविलेय होते हैं।
4. **विद्युत चालकता:** गलित अवस्था में या जलीय विलयन में ये विद्युत का चालन करते हैं क्योंकि आयन गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। हालांकि, ठोस अवस्था में इनकी दृढ़ संरचना के कारण आयनों की गति संभव न होने से ये विद्युत का चालन नहीं करते।
उत्तर (Answer): ### **मध्यवर्ती क्रियाशीलता वाले धातुओं का निष्कर्षण**
\nसक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुएं (जैसे जिंक, आयरन, लेड, कॉपर) प्रकृति में सामान्यतः सल्फाइड या कार्बोनेट के रूप में पाई जाती हैं। सल्फाइड या कार्बोनेट की तुलना में धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करना अधिक आसान होता है। इसलिए, अपचयन से पहले धातु सल्फाइड और कार्बोनेट को धातु ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।
#### **1. भर्जन (Roasting)**
* **परिभाषा:** सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में बदल जाता है। इस प्रक्रिया को भर्जन कहते हैं।
* **रासायनिक समीकरण:**
$$2\text{ZnS (s)} + 3\text{O}_2\text{ (g)} \xrightarrow{\Delta} 2\text{ZnO (s)} + 2\text{SO}_2\text{ (g)}$$
#### **2. निस्तापन (Calcination)**
* **परिभाषा:** कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में उच्च ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रक्रिया को निस्तापन कहते हैं।
* **रासायनिक समीकरण:**
$$\text{ZnCO}_3\text{ (s)} \xrightarrow{\Delta} \text{ZnO (s)} + \text{CO}_2\text{ (g)}$$
#### **3. धातु ऑक्साइड का धातु में अपचयन**
* प्राप्त धातु ऑक्साइड को कार्बन (कोक) जैसे अपचायक का उपयोग करके धातु में अपचयित कर लिया जाता है।
* **रासायनिक समीकरण:**
$$\text{ZnO (s)} + \text{C (s)} \rightarrow \text{Zn (s)} + \text{CO (g)}$$
---
### **कॉपर (तांबे) का विद्युत अपघटनी परिष्करण**
\nविभिन्न अपचयन प्रक्रमों से प्राप्त धातुएं अशुद्ध होती हैं। इन्हें शुद्ध करने के लिए विद्युत अपघटनी परिष्करण का उपयोग किया जाता है।
* **प्रायोगिक व्यवस्था:**
* **एनोड:** अशुद्ध कॉपर की मोटी छड़।
* **कैथोड:** शुद्ध कॉपर की पतली पट्टी।
* **विद्युत अपघट्य:** अम्लीकृत कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) का विलयन।
* **कार्यप्रणाली:**
* जब विद्युत अपघट्य में से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तब एनोड से अशुद्ध धातु विद्युत अपघट्य में घुल जाती है।
* इतनी ही मात्रा में शुद्ध कॉपर विद्युत अपघट्य से कैथोड पर निक्षेपित (जमा) हो जाता है।
* **इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रियाएं:**
* **एनोड पर (ऑक्सीकरण):**
$$\text{Cu (अशुद्ध)} \rightarrow \text{Cu}^{2+} + 2e^-$$
* **कैथोड पर (अपचयन):**
$$\text{Cu}^{2+} + 2e^- \rightarrow \text{Cu (शुद्ध)}$$
* **एनोड पंक (Anode Mud):** घुलनशील अशुद्धियां विलयन में चली जाती हैं, जबकि अविलेय अशुद्धियां एनोड की तली पर निक्षेपित हो जाती हैं, जिन्हें **एनोड पंक** कहते हैं।
उत्तर (Answer): उभयधर्मी ऑक्साइड वे धातु ऑक्साइड होते हैं जो अम्लीय और क्षारीय दोनों प्रकार का व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। इसका अर्थ यह है कि ये लवण और जल बनाने के लिए अम्ल तथा क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करते हैं। सामान्यतः अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं, लेकिन एल्युमिनियम और जिंक जैसी कुछ धातुओं के ऑक्साइड यह दोहरा गुण प्रदर्शित करते हैं।
उभयधर्मी ऑक्साइड के दो प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:
1. एल्युमिनियम ऑक्साइड ($
\text{Al}_2\text{O}_3
$)
2. जिंक ऑक्साइड ($
\text{ZnO}
$)
**एल्युमिनियम ऑक्साइड ($
\text{Al}_2\text{O}_3
$) की रासायनिक अभिक्रियाएं:**
1. **अम्ल (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) के साथ अभिक्रिया:**
$$\text{Al}_2\text{O}_3(s) + 6\text{HCl}(aq) \rightarrow 2\text{AlCl}_3(aq) + 3\text{H}_2\text{O}(l)$$
इस अभिक्रिया में, एल्युमिनियम ऑक्साइड एक क्षारीय ऑक्साइड के रूप में कार्य करता है और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके एल्युमिनियम क्लोराइड तथा जल बनाता है।
2. **क्षार (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) के साथ अभिक्रिया:**
$$\text{Al}_2\text{O}_3(s) + 2\text{NaOH}(aq) \rightarrow 2\text{NaAlO}_2(aq) + \text{H}_2\text{O}(l)$$
इस अभिक्रिया में, एल्युमिनियम ऑक्साइड एक अम्लीय ऑक्साइड के रूप में कार्य करता है और सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया करके सोडियम एल्युमिनेट तथा जल बनाता है।
इस प्रकार, उभयधर्मी ऑक्साइड अम्ल और क्षार दोनों को उदासीन करके विशेष रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं।
उत्तर (Answer): जब धातुएं अपने आसपास के वायुमंडल में मौजूद नमी, अम्ल और गैसों के साथ प्रतिक्रिया करती हैं, तो वे संक्षारित हो जाती हैं।
1. **चांदी का काला पड़ना:** चांदी की वस्तुएं वायुमंडल में मौजूद हाइड्रोजन सल्फाइड ($\text{H}_2\text{S}$) गैस के साथ अभिक्रिया करती हैं। यह रासायनिक अभिक्रिया सतह पर सिल्वर सल्फाइड ($\text{Ag}_2\text{S}$) की एक पतली काली परत बनाती है।
2. **तांबे पर हरी परत:** तांबा वायु में मौजूद नम कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$), ऑक्सीजन और जल के साथ धीरे-धीरे अभिक्रिया करता है। इसके परिणामस्वरूप क्षारीय कॉपर कार्बोनेट $[\text{CuCO}_3\cdot\text{Cu(OH)}_2]$ बनता है, जो सतह पर हरे रंग की परत बनाता है।
**लोहे को जंग से बचाने के दो उपाय:**
- **यशदलेपन (Galvanisation):** लोहे की वस्तुओं पर जस्ते (जिंक) की पतली परत चढ़ाना।
- **पेंट करना या ग्रीस लगाना:** पेंट या ग्रीस लगाने से लोहे की सतह वायु और नमी के सीधे संपर्क में नहीं आती।
उत्तर (Answer): भर्जन और निस्तापन महत्वपूर्ण धातुकर्म प्रक्रियाएं हैं जिनका उपयोग सांद्रित अयस्कों को धातु ऑक्साइडों में बदलने के लिए किया जाता है ताकि उनका आसानी से अपचयन किया जा सके।
**1. भर्जन (Roasting):**
- यह सांद्रित अयस्क को वायु की अत्यधिक उपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करने की प्रक्रिया है।
- यह मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों के लिए उपयोग किया जाता है।
- इसमें सल्फर डाइऑक्साइड ($\text{SO}_2$) गैस निकलती है।
- **समीकरण:** $2\text{ZnS}(\text{s}) + 3\text{O}_2(\text{g}) \xrightarrow{\Delta} 2\text{ZnO}(\text{s}) + 2\text{SO}_2(\text{g})$
**2. निस्तापन (Calcination):**
- यह सांद्रित अयस्क को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में उच्च ताप पर गर्म करने की प्रक्रिया है।
- यह मुख्य रूप से कार्बोनेट अयस्कों के लिए उपयोग किया जाता है।
- इसमें कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस निकलती है।
- **समीकरण:** $\text{ZnCO}_3(\text{s}) \xrightarrow{\Delta} \text{ZnO}(\text{s}) + \text{CO}_2(\text{g})$
दोनों प्रक्रियाएं वाष्पशील अशुद्धियों को दूर करने में मदद करती हैं।
उत्तर (Answer): थर्मिट अभिक्रिया एक अत्यधिक ऊष्माक्षेपी विस्थापन अभिक्रिया है जिसमें धातु ऑक्साइड (सामान्यतः आयरन(III) ऑक्साइड) को एल्युमीनियम धातु द्वारा अपचयित किया जाता है। चूंकि इस रासायनिक प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है, इसलिए उत्पन्न धातु गलित (द्रव) अवस्था में प्राप्त होती है।
**संतुलित रासायनिक समीकरण:**
$$\text{Fe}_2\text{O}_3(\text{s}) + 2\text{Al}( ext{s}) \rightarrow 2\text{Fe}(\text{l}) + \text{Al}_2\text{O}_3(\text{s}) + \text{ऊष्मा}$$
इस रेडॉक्स अभिक्रिया में एल्युमीनियम एक प्रबल अपचायक के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह आयरन से अधिक क्रियाशील होता है।
**अनुप्रयोग:**
1. इसका उपयोग रेलवे पटरियों के जोड़ों को जोड़ने के लिए किया जाता है।
2. इसका उपयोग मशीन के टूटे हुए भारी भागों और दरारों की मरम्मत के लिए किया जाता है।
उत्तर (Answer): **थर्मिट प्रक्रम की परिभाषा:**
थर्मिट प्रक्रम एक रासायनिक विस्थापन अभिक्रिया है जिसमें एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग अपचायक (reducing agent) के रूप में धातु ऑक्साइड (जैसे आयरन ऑक्साइड) को अपचित करने के लिए किया जाता है। यह अभिक्रिया इतनी तीव्र और ऊष्माक्षेपी होती है कि प्राप्त धातु पिघली हुई (द्रव) अवस्था में मिलती है।
**रासायनिक समीकरण:**
$$\text{Fe}_2\text{O}_3\text{ (s)} + 2\text{Al (s)} \rightarrow 2\text{Fe (l)} + \text{Al}_2\text{O}_3\text{ (s)} + \text{ऊष्मा}$$
**व्यावहारिक उपयोग:**
इस अभिक्रिया का उपयोग टूटी हुई रेल की पटरियों, मशीनी पुर्जों तथा भारी धातु संरचनाओं की दरारों को जोड़ने (वेल्डिंग करने) के लिए किया जाता है।
**अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होने का कारण:**
एल्युमिनियम की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता (affinity) आयरन की तुलना में बहुत अधिक होती है। जब एल्युमिनियम ऑक्साइड ($\text{Al}_2\text{O}_3$) बनता है, तो अत्यधिक मात्रा में जालक ऊर्जा और बंध ऊर्जा मुक्त होती है। इससे तापमान $2500^\circ\text{C}$ से अधिक हो जाता है, जिससे लोहे की धातु तुरंत पिघलकर पटरियों की दरारों को भर देती है।