मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय: नियंत्रण एवं समन्वय
#### त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Quick Revision Notes) - कक्षा 10 विज्ञान (MP बोर्ड)
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1. परिचय (Introduction)
सभी जीवों में पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया करने और शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की प्रक्रिया को नियंत्रण एवं समन्वय कहते हैं।
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2. जन्तुओं में तंत्रिका तंत्र (Nervous System in Animals)
- तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन): यह तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है।
- डेंड्राइट (Dendrite): सूचनाओं को प्राप्त करता है।
- साइटाॅन (Cyton/Cell Body): विद्युत आवेग में बदलता है।
- एक्सॉन (Axon): सूचना को दूर ले जाता है।
- सिनैप्स (Synapse): दो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच का खाली स्थान, जहाँ से रासायनिक संकेतों द्वारा आवेग का संचरण होता है।
- प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action): किसी उद्दीपन के प्रति अचानक और अनिच्छुक (automatic) अनुक्रिया, जिसमें मस्तिष्क की सीधी भागीदारी नहीं होती (यह स्पाइनल कॉर्ड द्वारा नियंत्रित होती है)।
- प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc): प्रतिवर्ती क्रिया के दौरान विद्युत impulses जिस मार्ग से गुजरते हैं, उसे प्रतिवर्ती चाप कहते हैं। (मार्ग: ग्राही अंग $\rightarrow$ संवेदी तंत्रिका $\rightarrow$ मेरुरज्जु $\rightarrow$ मोटर तंत्रिका $\rightarrow$ पेशी अंग)।
- मानव तंत्रिका तंत्र के भाग:
1. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS): मस्तिष्क (Brain) और मेरुरज्जु (Spinal Cord)।
2. परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS): कपाल तंत्रिकाएं (Cranial nerves) और मेरु तंत्रिकाएं (Spinal nerves)।
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3. मानव मस्तिष्क (Human Brain)
मस्तिष्क हमारे शरीर का मुख्य समन्वय केंद्र है। इसके तीन मुख्य भाग हैं:
1. अग्र मस्तिष्क (Forebrain):
- यह सोचने, समझने और याद रखने का मुख्य भाग है।
- सभी ऐच्छिक क्रियाओं (Voluntary actions) को नियंत्रित करता है।
- इसमें भूख, प्याس और देखने-सुनने के केंद्र होते हैं।
2. मध्य मस्तिष्क (Midbrain):
- अनैच्छिक क्रियाओं (Involuntary actions) जैसे आँख की पुतली का आकार बदलना आदि को नियंत्रित करता है।
3. पश्च मस्तिष्क (Hindbrain): इसके तीन मुख्य भाग हैं:
- सेरिबेलम (Cerebellum): शरीर की संस्थिति (Posture) और संतुलन को बनाए रखता है (जैसे साइकिल चलाना, सीधी रेखा में चलना)।
- पॉन्स (Pons): श्वसन क्रिया का नियमन करता है।
- मेड्युला ऑब्लोंगाटा (Medulla): अनैच्छिक क्रियाओं (जैसे रक्तचाप, लार आना, उल्टी आना, हृदय की धड़कन) को नियंत्रित करता है।
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4. जन्तुओं में रासायनिक समन्वय (Hormones in Animals)
जन्तुओं में समन्वय अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine Glands) द्वारा स्रावित रासायनिक संदेशवाहकों यानी हॉर्मोन के द्वारा होता है।
| ग्रंथि (Gland) | स्रावित हॉर्मोन (Hormone) | मुख्य कार्य (Main Function) |
| :--- | :--- | :--- |
| पियूष ग्रंथि (Pituitary) | वृद्धि हॉर्मोन (Growth Hormone) | शरीर की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करना। |
| थायरॉइड (Thyroid) | थाइरॉक्सिन (Thyroxine) | कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का चपचय (Metabolism) नियंत्रित करना। (कमी से घेंघा रोग)। |
| अग्न्याशय (Pancreas) | इंसुलिन (Insulin) | रक्त में शर्करा (Glucose) के स्तर को नियंत्रित करना। (कमी से मधुमेह/Diabetes)। |
| एड्रीनल (Adrenal) | एड्रीनलीन (Adrenaline) | आपातकालीन स्थिति (डर या क्रोध) का सामना करने के लिए शरीर को तैयार करना (इसे 'लड़ो या भागो' हॉर्मोन कहते हैं)। |
| वृषण (Testis) [नर] | टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) | नर जनन अंगों का विकास और द्वितीयक लैंगिक लक्षण। |
| अंडाशय (Ovary) [मादा] | एस्ट्रोजन (Oestrogen) | मादा जनन अंगों का विकास और मासिक धर्म का नियंत्रण। |
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5. पादप में समन्वय (Coordination in Plants)
पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, वे रासायनिक पदार्थों (पादप हॉर्मोन या फाइटोहॉर्मोन) और गतियों द्वारा समन्वय करते हैं।
- पादप गतियां (Plant Movements):
1. ानुवर्ती गति (Tropic Movements): उद्दीपन की दिशा में होने वाली गति (दिशात्मक)।
- प्रकाशानुवर्तन (Phototropism): प्रकाश की ओर गति (तना)।
- गुरुत्वाणुवर्तन (Geotropism): गुरुत्वाकर्षण की ओर गति (जड़ें)।
- जलानुवर्तन (Hydrotropism): पानी की ओर गति (जड़ें)।
- रासायनिकानुवर्तन (Chemotropism): रसायनों की ओर गति (परागनलिका की वृद्धि)।
2. नुकांचन गति (Nastic Movements): उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं करती (अदिशात्मक, जैसे छुई-मुई के पौधे का पत्ता छूने पर मुरझाना - सिस्टेमिक गति)।
- प्रमुख पादप हॉर्मोन (Plant Hormones):
1. ऑक्सीन (Auxin): तने के अग्रभाग में बनता है; कोशिका की लंबाई में वृद्धि और प्रकाश की ओर मुड़ने में मदद करता है।
2. जिबरेलिन (Gibberellin): तने के विकास और फलों की वृद्धि में सहायक।
3. साइटोकाइनिन (Cytokinin): कोशिका विभाजन (Cell division) को प्रेरित करता है (फल और बीजों में अधिक मात्रा में होता है)।
4. एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid): वृद्धि को संदमित (रोकना) करता है; पत्तियों के मुरझाने और झड़ने के लिए उत्तरदायी है (इसे तनाव हॉर्मोन भी कहते हैं)।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 नियंत्रण एवं समन्वय
तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम)
न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) की संरचना
साइटोन (कोशिका काय)
डेंड्राइट
एक्सॉन
तंत्रिका अंत
सिनेप्स (तंत्रिका संधि)
आवेगों का रासायनिक संचरण
प्रतिवर्ती चाप (रिफ्लेक्स आर्क)
ग्राही अंग
संवेदी तंत्रिका
मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड)
प्रेरक तंत्रिका
पेशी (प्रतिक्रिया अंग)
मानव तंत्रिका तंत्र के भाग
केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS)
मस्तिष्क
मेरुरज्जु
परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS)
कपाल तंत्रिकाएं
मेरु तंत्रिकाएं
मानव मस्तिष्क
अग्र मस्तिष्क
सोचने का मुख्य भाग
ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण
मध्य मस्तिष्क
अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण
पश्च मस्तिष्क
सेरीबेलम (संतुलन और मुद्रा)
पोंन्स (श्वसन नियंत्रण)
मेडुला ऑब्लॉन्गाटा (रक्तचाप, लार, वमन)
मस्तिष्क की सुरक्षा
क्रेनियम (खोपड़ी)
सेरिब्रोस्पाइनल फ्लूइड (मस्तिष्क आवरण और द्रव)
पौधों में समन्वय
गति के प्रकार
अनुवर्ती गति (ट्रॉपिज़्म) - दिशात्मक
प्रकाशानुवर्तन (फोटोट्रॉपिज़्म)
गुरुत्वानुवर्तन (जिओट्रॉपिज़्म)
जलानुवर्तन (हाइड्रोट्रॉपिज़्म)
रसायननुवर्तन (कीमोट्रॉपिज़्म)
अनुकुंचन गति (नास्टी) - दिशाहीन
छुई-मुई का पौधा (थिक्सोनैस्टी)
पादप हार्मोन (फाइटोహోर्मोन)
ऑक्सिन (कोशिका दीर्घीकरण, प्रकाश की ओर झुकना)
जिबरेलिन (तने की वृद्धि)
साइटोकाइनिन (कोशिका विभाजन)
एब्सिसिक एसिड (वृद्धि संदूक, पत्तियों का मुरझाना/झड़ना)
जंतुओं में हार्मोन (अंतःस्रावी तंत्र)
प्रमुख ग्रंथियां और उनके हार्मोन
हाइपोथैलेमस
विमोचक हार्मोन (रिलीजिंग हार्मोन)
पीयूष ग्रंथि (मास्टर ग्रंथि)
वृद्धि हार्मोन
थायरॉइड ग्रंथि
थायरॉक्सिन (कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन का चयापचय)
आयोडीन की कमी से घेंघा रोग
अग्न्याशय (पैंक्रियास)
इंसुलिन (रक्त में शर्करा का नियंत्रण)
मधुमेह (डायबीटिज़) रोग
एड्रिनल (अधिবৃक्क) ग्रंथि
एड्रिनलीन (लड़ो या भागो हार्मोन)
वृषण (नर)
टेस्टोस्टेरोन (लैंगिक लक्षण)
अंडाशय (मादा)
एस्ट्रोजन (लैंगिक लक्षण)
कार्यप्रणाली
पुनर्भरण तंत्र (फीडबैक मेकैनिज्म)
हार्मोन का स्राव सही समय और मात्रा में नियमन
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### जंतुओं में रासायनिक समन्वय की क्रियाविधि और अंतःस्रावी तंत्र
\nजंतुओं में नियंत्रण और समन्वय केवल तंत्रिका तंत्र के माध्यम से ही नहीं बल्कि हार्मोनों द्वारा मध्यस्थ रासायनिक समन्वय प्रणाली के माध्यम से भी प्राप्त होता है। हार्मोन विशेष ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जिन्हें अंतःस्रावी ग्रंथियां (नलिकारहित ग्रंथियां) कहा जाता है। ये रसायन सीधे रक्तधारा में छोड़े जाते हैं और विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं, विकास और चयापचय को विनियमित करने के लिए लक्षित अंगों तक पहुँचाए जाते हैं।
\nमानव शरीर में चार प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियों और उनके संबंधित हार्मोनों की विस्तृत भूमिका निम्नलिखित है:
* **1. थायरॉयड ग्रंथि और थायरॉक्सिन:**
- गर्दन के क्षेत्र में स्थित, थायरॉयड ग्रंथि **थायरॉक्सिन** हार्मोन का उत्पादन करती है।
- थायरॉक्सिन शरीर में कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन चयापचय को नियंत्रित करता है ताकि विकास के लिए सर्वोत्तम संतुलन प्रदान किया जा सके।
- थायरॉक्सिन के संश्लेषण के लिए आयोडीन आवश्यक है। आहार में आयोडीन की कमी से घेंघा (गोइटर) नामक बीमारी होती है, जिसकी विशेषता सूजी हुई गर्दन है।
* **2. अग्न्याशय और इंसुलिन:**
- अग्न्याशय एक बहिःस्रावी और अंतःस्रावी दोनों ग्रंथियों के रूप में कार्य करता है। इसका अंतःस्रावी भाग (लैंगरहैंस की द्वीपिकाएँ) **इंसुलिन** स्रावित करता है।
- इंसुलिन शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज के अवशोषण को बढ़ावा देकर और यकृत में इसे ग्लाइकोजन में परिवर्तित करके रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- इंसुलिन की कमी से डायबिटीज मेलिटस (मधुमेह) होता है, जिसके परिणामस्वरूप रक्त में उच्च शर्करा का स्तर और बार-बार पेशाब आना होता है।
* **3. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) और एड्रिनलिन:**
- गुर्दों के ऊपर स्थित, अधिवृक्क ग्रंथियां **एड्रिनलिन** (आपातकालीन हार्मोन) स्रावित करती हैं।
- तनाव, डर या क्रोध के दौरान, एड्रिनलिन तेजी से रक्त में छोड़ा जाता है। यह हृदय गति, श्वसन दर और मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति बढ़ाता है जबकि पाचन तंत्र से रक्त को हटाता है, शरीर को 'लड़ो या भागो' (fight or flight) के लिए तैयार करता है।
* **4. पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) और वृद्धि हार्मोन:**
- अक्सर 'मास्टर ग्रंथि' कहा जाने वाला, पीयूष ग्रंथि मस्तिष्क के आधार पर स्थित होती है और वृद्धि हार्मोन (GH) सहित कई हार्मोन स्रावित करती है।
- वृद्धि हार्मोन शरीर के सामान्य विकास और वृद्धि को नियंत्रित करता है। अति-स्रावण से अतिरुपता (gigantism - असामान्य लंबाई) होती है, जबकि अल्प-स्रावण से बौनापन (dwarfism) होता है।
\nइन हार्मोनों के माध्यम से, अंतःस्रावी तंत्र पूरे शरीर पर धीमा, लंबे समय तक चलने वाला और समन्वित नियंत्रण सुनिश्चित करता है।
उत्तर (Answer): ### मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्यात्मक क्षेत्र
\nमानव मस्तिष्क हमारे शरीर का केंद्रीय सूचना प्रसंस्करण अंग है और यह 'कमांड और नियंत्रण प्रणाली' के रूप में कार्य करता है। यह खोपड़ी (क्रेनियम) के अंदर सुरक्षित रहता है और मेनिन्जेस नामक झिल्लियों से घिरा होता है, जो मस्तिष्क को यांत्रिक झटकों से बचाती हैं। मस्तिष्क को मुख्य रूप से तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है:
* **1. अग्रस्तिष्क (Forebrain):**
- अग्रस्तिष्क मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग है और यह बुद्धिमत्ता, स्मृति तथा ऐच्छिक क्रियाओं का केंद्र है।
- इसमें मुख्य रूप से **प्रमस्तिष्क (Cerebrum)** शामिल है, जो मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है और दाएं तथा बाएं प्रमस्तिष्क गोलार्द्धों में विभाजित होता है।
- प्रमस्तिष्क में संवेदी क्षेत्र होते हैं जो आँख, कान और नाक जैसे ज्ञानेंद्रियों से सूचना प्राप्त करते हैं, और मोटर क्षेत्र होते हैं जो ऐच्छिक पेशी गतियों को नियंत्रित करते हैं।
- इसमें सहयोजन क्षेत्र भी होते हैं जहाँ पहले से संग्रहीत डेटा के साथ सूचना की व्याख्या की जाती है, साथ ही सीखना, तर्क करना और भाषण देना शामिल है।
- हाइपोथैलेमस, जो प्रमस्तिष्क के आधार पर स्थित होता है, शरीर के तापमान, भूख, प्यास और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
* **2. मध्यस्तिष्क (Midbrain):**
- मध्यस्तिष्क एक अपेक्षाकृत छोटा क्षेत्र है जो अग्रस्तिष्क को पश्चस्तिष्क से जोड़ता है.
- यह दृश्य और श्रवण उद्दीपनों के जवाब में सिर, गर्दन और धड़ की कुछ प्रतिवर्ती गतियों को नियंत्रित करता है।
- यह आँख की मांसपेशियों की प्रतिवर्ती गतियों, पुतली के आकार को बदलने और नींद-जागने के चक्र को विनियमित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
* **3. पश्चस्तिष्क (Hindbrain):**
- पश्चस्तिष्क में तीन प्रमुख संरचनाएं शामिल हैं: **अनुमस्तिष्क (Cerebellum)**, **पॉन्स (Pons)** और **मेडुआ ऑबलांगाटा (Medulla Oblongata)**।
- **अनुमस्तिष्क:** यह ऐच्छिक क्रियाओं की सटीकता और शरीर की मुद्रा तथा संतुलन को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। जब हम सीधी रेखा में चलते हैं, साइकिल चलाते हैं, या पेंसिल उठाते हैं, तो यह अनुमस्तिष्क द्वारा समन्वित किया जाता है।
- **पॉन्स:** यह मस्तिष्क के विभिन्न भागों को जोड़ने वाले पुल के रूप में कार्य करता है और श्वसन को विनियमित करने में मदद करता है।
- **मेडुआ ऑबलांगाटा:** यह मस्तिष्क का पिछला हिस्सा है जो रीढ़ की हड्डी से जुड़ा हुआ है। यह रक्तचाप, लार आना, उल्टी, हृदय गति और श्वास जैसी सभी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जिससे यह जीवन के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
\nनिष्कर्ष रूप में, मानव मस्तिष्क पर्यावरणीय उद्दीपनों को संसाधित करने, पेशीय गतियों को समन्वित करने, आंतरिक संतुलन बनाए रखने और जटिल संज्ञानात्मक कार्यों को निष्पादित करने के लिए इन विशिष्ट क्षेत्रों के माध्यम से अत्यधिक एकीकृत तरीके से कार्य करता है।
उत्तर (Answer): ### पादप हार्मोन का परिचय\nपादप हार्मोन, जिन्हें फाइटोहोर्मोन भी कहा जाता है, प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले कार्बनिक रासायनिक पदार्थ हैं जो पौधों में बहुत कम सांद्रता में उत्पन्न होते हैं। वे सेलुलर गतिविधियों, वृद्धि, विकास और पर्यावरणीय उत्तेजनाओं के प्रति प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। जानवरों के विपरीत, पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता है; इसलिए, समन्वय केवल रासायनिक संदेशवाहकों के माध्यम से प्राप्त किया जाता है।
- **ऑक्सिन (Auxins):**
- तनों और प्ररोहों में कोशिकाओं के दीर्घीकरण को बढ़ावा देता है।
- छायांकित पक्ष पर जमा होकर प्रकाशानुवर्तन (प्रकाश की ओर झुकना) के लिए जिम्मेदार है।
- **जिबरेलिन (Gibberellins):**
- तने के दीर्घीकरण और पर्णसंधियों की वृद्धि को उत्तेजित करता है (अंगूर जैसे फलों का आकार बढ़ाने में उपयोगी)।
- बीज की प्रसुप्ति (dormancy) को तोड़ता है और अंकुरण शुरू करता है।
- **साइटोकाइनिन (Cytokinins):**
- विशेष रूप से जड़ की युक्तियों, फलों और प्ररोह कलियों में तेजी से कोशिका विभाजन (साइटोकिसिस) को बढ़ावा देता है।
- पत्तियों में उम्र बढ़ने (जीर्णता) में देरी करता है और पोषक तत्वों के संचलन में मदद करता है।
2. **वृद्धि अवरोधक (Growth Inhibitors - प्रसुप्ति, विलगन और तनाव प्रतिक्रिया में शामिल):**
- **एब्सिसिक एसिड (ABA):**
- एक सामान्य पादप वृद्धि अवरोधक के रूप में कार्य करता है।
- जल तनाव (सूखे की स्थिति) के दौरान रंध्रों के मुरझाने और बंद होने को बढ़ावा देता है और बीज प्रसुप्ति को प्रेरित करता है।
- **एथिलीन (Ethylene):**
- एक गैसीय हार्मोन जो फलों के पकने को उत्तेजित करता है।
- पत्तियों, फूलों और फलों के जीर्णता और विलगन (झड़ने) को बढ़ावा देता है।
### निष्कर्ष\nइस प्रकार, पादप हार्मोन संतुलित पौधों की वृद्धि को बनाए रखने और बाहरी पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति प्रतिक्रियाओं का समन्वय करने के लिए या तो सहक्रियात्मक रूप से या विरोधी रूप से काम करते हैं।
उत्तर (Answer): ### प्रतिवर्ती क्रिया की परिभाषा\nप्रतिवर्ती क्रिया किसी उद्दीपन के प्रति शरीर की अचानक, तीव्र, अनैच्छिक और स्वचालित प्रतिक्रिया है। इसमें मस्तिष्क की सचेत विचार प्रक्रिया शामिल नहीं होती है। इसके बजाय, संभावित चोट को कम करने के लिए तीव्र सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया शुरू करने के लिए संकेत अस्थायी रूप से मस्तिष्क को छोड़ देते हैं (उदाहरण के लिए, गर्म वस्तु को छूने पर तुरंत हाथ पीछे खींचना)।
### प्रतिवर्ती चाप का मार्ग\nप्रतिवर्ती क्रिया में तंत्रिका आवेगों द्वारा तय किए जाने वाले मार्ग को **प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc)** कहा जाता है। इसमें निम्नलिखित क्रमिक घटक शामिल होते हैं:
1. **ग्राही अंग (Receptor Organ):** विशिष्ट तंत्रिका अंत (जैसे त्वचा, आँखें, या जीभ में) जो पर्यावरणीय उद्दीपन (गर्मी, दर्द, दबाव) का पता लगाते हैं।
2. **संवेदी तंत्रिका (Sensory Neuron):** ग्राही से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मेरुरज्जु या मस्तिष्क) तक तंत्रिका आवेग ले जाती है।
3. **समन्वय केंद्र / रिले न्यूरॉन:** मेरुरज्जु के भीतर स्थित। यह आने वाले संकेत को संसाधित करता है और इसे सीधे मोटर न्यूरॉन तक पहुँचाता है।
4. **मोटर न्यूरॉन (Motor Neuron):** मेरुरज्जु से प्रतिक्रिया संकेत को लक्ष्य प्रभावक अंग तक ले जाता है।
5. **प्रभावक अंग (Effector Organ):** मांसपेशियां या ग्रंथियां जो अंतिम क्रिया को निष्पादित करती हैं (जैसे मांसपेशियों के संकुचन के माध्यम से हाथ पीछे खींचना)।
### प्रतिवर्ती चापों का विकास क्यों हुआ?
- **प्रतिक्रिया की गति:** सोचने में समय लगता है क्योंकि मस्तिष्क प्रसंस्करण में जटिल तंत्रिका नेटवर्क शामिल होते हैं। खतरनाक स्थितियों में, मस्तिष्क प्रसंस्करण की प्रतीक्षा करने से गंभीर ऊतक क्षति हो सकती है। प्रतिवर्ती चाप बिजली की तेजी से प्रतिक्रिया के लिए मेरुरज्जु का उपयोग करके मस्तिष्क को दरकिनार कर देते हैं।
- **जीवित रहने का लाभ:** जानवर लगातार जानलेवा पर्यावरणीय खतरों का सामना करते हैं। प्रतिवर्ती चापों द्वारा प्रबंधित त्वरित बचाव प्रतिक्रियाएं जीवित रहने की संभावना को काफी बढ़ा देती हैं。
- **मस्तिष्क के कार्यभार में कमी:** यह मामूली संवेदी इनपुट के लिए निरंतर, नियमित और तत्काल प्रतिक्रियाओं के साथ मस्तिष्क को अधिभारित होने से रोकता है।
उत्तर (Answer): ### प्रतिवर्त क्रिया और प्रतिवर्त चाप की क्रियाविधि
\nएक **प्रतिवर्त क्रिया (Reflex Action)** किसी विशिष्ट उद्दीपन (stimulus) के प्रति शरीर की एक तीव्र, स्वचालित और अनैच्छिक प्रतिक्रिया है, जिसमें मस्तिष्क के सचेत विचार की आवश्यकता नहीं होती है। उदाहरण के लिए, जब आप गलती से किसी गर्म वस्तु को छू लेते हैं, तो दर्द महसूस होने से पहले ही आपका हाथ तुरंत पीछे हट जाता है। यह तीव्र प्रतिक्रिया **प्रतिवर्त चाप (Reflex Arc)** नामक तंत्रिका मार्ग द्वारा मध्यस्थ होती है।
#### प्रतिवर्त चाप के घटक:
1. **ग्रही (Receptor):** विशेष तंत्रिका अंत या संवेदी अंग (जैसे त्वचा में रिसेप्टर्स) जो बाहरी उद्दीपन का पता लगाते हैं (जैसे अत्यधिक गर्मी)।
2. **संवेदी न्यूरॉन (Sensory Neuron):** यह न्यूरॉन संवेदी अंग से उत्पन्न विद्युत आवेग को केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मेरुरज्जु) की ओर ले जाता है।
3. **समाकलन केंद्र / रिले न्यूरॉन (Relay Neuron):** केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मेरुरज्जु) के भीतर स्थित, रिले न्यूरॉन आने वाले संकेत को संसाधित करता है और इसे संवेदी न्यूरॉन से मोटर न्यूरॉन में स्थानांतरित करता है।
4. **मोटर न्यूरॉन (Motor Neuron):** यह न्यूरॉन संसाधित निर्देश या मोटर आवेग को मेरुरज्जु से दूर संबंधित प्रभावक अंग तक ले जाता है।
5. **प्रभावक (Effector):** मांसपेशी या ग्रंथि जो मोटर आवेग प्राप्त करती है और अंतिम भौतिक प्रतिक्रिया निष्पादित करती है (जैसे हाथ की मांसपेशियां)।
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### स्वैच्छिक, अनैच्छिक और प्रतिवर्त क्रियाओं के बीच अंतर
| विशेषता | स्वैच्छिक क्रियाएँ (Voluntary Actions) | अनैच्छिक क्रियाएँ (Involuntary Actions) | प्रतिवर्त क्रियाएँ (Reflex Actions) |
| :--- | :--- | :--- | :--- |
| **परिभाषा** | ऐसी क्रियाएँ जो हमारी इच्छा और चुनाव द्वारा सचेत रूप से नियंत्रित होती हैं। | ऐसी क्रियाएँ जो सचेत नियंत्रण के बिना स्वचालित रूप से होती हैं। | बाहरी उद्दीपनों के प्रति अत्यधिक तीव्र, स्वचालित, अनैच्छिक प्रतिक्रियाएँ। |
| **नियंत्रण केंद्र** | प्रमस्तिष्क (अग्र मस्तिष्क) द्वारा नियंत्रित। | मेडुला ऑब्लोंगाटा और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रित। | मुख्य रूप से मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित। |
| **गति** | अपेक्षाकृत धीमी क्योंकि इसमें सचेत विचार शामिल होता है। | निरंतर और मध्यम गति से संचालित होती है। | तत्काल खतरे से बचाने के लिए अत्यधिक तीव्र और त्वरित। |
| **उदाहरण** | लिखना, बोलना, चलना, नृत्य करना। | दिल की धड़कन, आंतों की गति, सांस लेना। | गर्म वस्तु से हाथ हटाना, पलक झपकना, नी-जर्क प्रतिवर्त। |
उत्तर (Answer): ### पौधों में रासायनिक समन्वय (फाइटोहोर्मोन)
\nजंतुओं के विपरीत, पौधों में विद्युत आवेगों के तीव्र संचरण के लिए तंत्रिका तंत्र नहीं होता है। इसके बजाय, पौधों में वृद्धि, विकास और पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रियाओं का समन्वय और विनियमन पूरी तरह से रासायनिक पदार्थों द्वारा किया जाता है जिन्हें पादप हार्मोन या **फाइटोहोर्मोन** कहा जाता है। इन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है: पादप वृद्धि प्रमोटर और पादप वृद्धि अवरोधक।
#### 1. ऑक्सिन (Auxins)
* **संश्लेषण:** जड़ों और तनों के बढ़ते सिरों पर संश्लेषित होते हैं।
* **कार्य:**
* तनों में कोशिका दीर्घाकीकरण (cell elongation) को बढ़ावा देते हैं।
* प्र प्रकाशानुवर्तन (phototropism) और गुरुत्वानुवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रकाश की दिशा में तने को मोड़ने में मदद करते हैं।
* शीर्ष प्रमुखता (apical dominance) को प्रेरित करते हैं।
#### 2. जिबरेलिन (Gibberellins)
* **संश्लेषण:** युवा पत्तियों, जड़ों और विकसित होने वाले बीजों में।
* **कार्य:**
* तने की लंबाई और पर्वो (internodes) की वृद्धि को उत्तेजित करते हैं।
* बीज प्रसुप्तता (dormancy) को तोड़ते हैं और अंकुरण को बढ़ावा देते हैं।
* पुष्पन और फल विकास में सहायता करते हैं।
#### 3. साइटोकाइनिन (Cytokinins)
* **संश्लेषण:** मुख्य रूप से जड़ों और विकासशील बीजों में।
* **कार्य:**
* ऑक्सिन के साथ मिलकर तीव्र कोशिका विभाजन को बढ़ावा देते हैं।
* पत्तियों की वृद्धावस्था (senescence) में देरी करते हैं।
* पार्श्व कलियों के विकास को बढ़ावा देते हैं।
#### 4. एब्सिसिक एसिड (Abscisic Acid - ABA)
* **संश्लेषण:** पत्तियों, जड़ों और हरे फलों में (यह मुख्य रूप से वृद्धि अवरोधक के रूप में कार्य करता है)।
* **कार्य:**
* पौधे की वृद्धि को रोकता है।
* बीज प्रसुप्तता को प्रेरित करता है।
* जल तनाव की स्थिति में रंध्रों (stomata) को बंद करने को बढ़ावा देता है ताकि वाष्पोसर्जन से पानी की हानि रुके।
* पत्तियों और फलों के झड़ने (abscission) को ट्रिगर करता है।
#### 5. एथिलीन (Ethylene)
* **संश्लेषण:** पकने वाले फलों और पुरानी पत्तियों में।
* **कार्य:**
* यह एक गैसीय हार्मोन है जो फलों को पकाने को बढ़ावा देता है।
* पत्तियों और फूलों के झड़ने को उत्तेजित करता है।
\nनिष्कर्षतः, इन पांच प्रमुख फाइटोहोर्मोन की परस्पर क्रिया पौधों को आंतरिक और बाहरी उत्तेजनाओं के प्रति सामंजस्यपूर्ण रूप से प्रतिक्रिया करने की अनुमति देती है।
उत्तर (Answer): ### मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्यात्मक भूमिका
\nमानव मस्तिष्क हमारे शरीर का केंद्रीय प्रसंस्करण केंद्र है, जो मुख्य समन्वय केंद्र के रूप में कार्य करता है जो सभी स्वैच्छिक और अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित और विनियमित करता है। यह खोपड़ी के भीतर सुरक्षित एक अत्यधिक जटिल अंग है और सेरेब्रोस्पाइनल द्रव से घिरा रहता है जो झटकों को अवशोषित करता है। शारीरिक और कार्यात्मक रूप से, मानव मस्तिष्क को तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: अग्र मस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क।
#### 1. अग्र मस्तिष्क (Forebrain)
* **प्रमस्तिष्क (Cerebrum):** यह मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा और प्रमुख भाग है। यह दो गोलार्द्धों में विभाजित है। प्रमस्तिष्क उच्च-स्तरीय मानसिक गतिविधियों जैसे सोच, तर्क, सीखने, बुद्धि, स्मृति और चेतना का केंद्र है। यह संवेदी अंगों से प्राप्त जानकारी को संसाधित करता है।
* **हाइपोथैलेमस (Hypothalamus):** यह प्रमस्तिष्क के आधार पर स्थित है और स्वायत्त कार्यों के लिए मुख्य नियंत्रण केंद्र के रूप में कार्य करता है। यह शरीर के तापमान, भूख, प्यास, नींद के चक्र और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है। यह पीयूष ग्रंथि को भी नियंत्रित करता है।
#### 2. मध्य मस्तिष्क (Midbrain)
* मध्य मस्तिष्क अग्र मस्तिष्क को पश्च मस्तिष्क से जोड़ता है। यह दृश्य और श्रवण जानकारी के लिए एक रिले स्टेशन के रूप में कार्य करता है। यह मुख्य रूप से दृश्य और श्रवण संबंधी अनैच्छिक प्रतिवर्त क्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है।
#### 3. पश्च मस्तिष्क (Hindbrain)\nपश्च मस्तिष्क में तीन मुख्य घटक होते हैं:
* **अनुमस्तिष्क (Cerebellum):** यह स्वैच्छिक आंदोलनों की सटीकता, समन्वय और संतुलन के लिए जिम्मेदार है। यह सुनिश्चित करता है कि हमारे मूवमेंट सुचारू और संतुलित हों।
* **मेडला ऑब्लोंगाटा (Medulla Oblongata):** यह हृदय की धड़कन, रक्तचाप, श्वसन दर और निगलने, खांसने जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
* **पोंस (Pons):** यह प्रमस्तिष्क और अनुमस्तिष्क के बीच संकेत प्रसारित करता है।
\nनिष्कर्षतः, मानव मस्तिष्क न्यूरॉन्स के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से कार्य करता है, जो जीवन को बनाए रखने और पर्यावरण के अनुकूल ढलने के लिए संवेदी उत्तेजनाओं को एकीकृत करता है और प्रतिक्रियाओं को निष्पादित करता है।
उत्तर (Answer): ### पादप अनुवर्तन (ट्रॉपिज़्म) का परिचय\nपौधों में तंत्रिका तंत्र या मांसपेशियां नहीं होती हैं, फिर भी वे प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण, पानी और रासायनिक पदार्थों जैसे पर्यावरणीय उद्दीपनों पर प्रतिक्रिया करते हैं। बाहरी उद्दीपनों के जवाब में पौधों में होने वाली इन दिशात्मक वृद्धि गतियों को अनुवर्ती गतियाँ (या ट्रॉपिज़्म) कहा जाता है। अनुवर्ती गतियाँ या तो धनात्मक (उद्दीप की ओर) या ऋणात्मक (उद्दीप से दूर) हो सकती हैं।
### अनुवर्ती गतियों के चार प्रमुख प्रकार
1. **प्रकाशानुवर्तन (Phototropism - प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया):**
- **विवरण:** प्रकाश के जवाब में पादप अंगों की दिशात्मक वृद्धि गति।
- **उदाहरण:** पौधों के तने प्रकाश के स्रोत की ओर बढ़ते हैं (धनात्मक प्रकाशानुवर्तन), जबकि जड़ें आम तौर पर प्रकाश से दूर बढ़ती हैं (ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन)।
2. **गुरुत्वाकर्षणानुवर्तन (Geotropism - गुरुत्वाकर्षण के प्रति प्रतिक्रिया):**
- **विवरण:** गुरुत्वाकर्षण बल के जवाब में पादप अंगों की गति।
- **उदाहरण:** जड़ें गुरुत्वाकर्षण के अनुसार मिट्टी में नीचे की ओर बढ़ती हैं (धनात्मक गुरुत्वाकर्षणानुवर्तन), जबकि मुख्य तने गुरुत्वाकर्षण के विपरीत ऊपर की ओर बढ़ते हैं (ऋणात्मक गुरुत्वाकर्षणानुवर्तन)।
3. **जलानुवर्तन (Hydrotropism - जल के प्रति प्रतिक्रिया):**
- **विवरण:** नमी या पानी के स्रोत की ओर पादप जड़ों की दिशात्मक वृद्धि।
- **उदाहरण:** पौधों की जड़ें नम मिट्टी या पानी के चैनलों वाले क्षेत्रों की ओर मुड़कर बढ़ती हैं (धनात्मक जलानुवर्तन)।
4. **स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism - स्पर्श के प्रति प्रतिक्रिया):**
- **उदाहरण:** मटर या अंगूर जैसी पर्वतारोही पौधों के प्रतान (tendrils) किसी ठोस वस्तु के संपर्क में आने पर उसके चारों ओर लिपट जाते हैं, जिससे पौधे को ऊपर चढ़ने में मदद मिलती है।
### फाइटोहॉर्मोन्स (ऑक्सिन) की भूमिका\nपौधों में दिशात्मक गतियाँ पादप हॉर्मोन्स (जिन्हें फाइटोहॉर्मोन्स कहा जाता है) द्वारा विनियमित होती हैं। **ऑक्सिन** प्रकाशानुवर्तन और गुरुत्वाकर्षणानुवर्तन के लिए जिम्मेदार प्राथमिक हॉर्मोन है। जब किसी पौधे के तने के एक तरफ सूर्य का प्रकाश पड़ता है, तो ऑक्सिन छायादार तरफ विसरित हो जाता है। छायादार पक्ष पर ऑक्सिन की उच्च सांद्रता कोशिकाओं को प्रदीप्त पक्ष की तुलना में अधिक लंबा होने के लिए प्रेरित करती है, जिससे तना प्रकाश स्रोत की ओर झुक जाता है।
### निष्कर्ष\nअनुवर्ती गतियाँ पौधों को इष्टतम धूप, पानी और संरचनात्मक समर्थन प्राप्त करने में सक्षम बनाती हैं, जिससे बदलते परिवेश में उनका जीवित रहना और विकास सुनिश्चित होता है।
उत्तर (Answer): ### अंतःस्रावी तंत्र का परिचय\nतंत्रिका तंत्र के अलावा, मानव शरीर में रासायनिक समन्वय हॉर्मोन्स द्वारा होता है, जो अंतःस्रावी तंत्र (या नलिकाविहीन ग्रंथि तंत्र) का निर्माण करते हैं। अंतःस्रावी ग्रंथियां रासायनिक संदेशवाहकों (हॉर्मोन्स) को सीधे रक्तधारा में स्रावित करती हैं, जो विशिष्ट शारीरिक प्रक्रियाओं और चयापचय गतिविधियों को विनियमित करने के लिए उन्हें लक्षित अंगों तक पहुँचाती हैं।
### चार प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियां, उनकी स्थिति, हॉर्मोन और कार्य
1. **थायरॉइड ग्रंथि**
- **स्थिति:** यह गर्दन में, श्वासनली (लार्यनक्स) के सामने स्थित होती है।
- **स्रावित हॉर्मोन:** थायरॉक्सिन।
- **प्राथमिक कार्य:** थायरॉक्सिन शरीर में कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के चयापचय को नियंत्रित करता है ताकि इष्टतम ऊर्जा उत्पादन और वृद्धि सुनिश्चित हो सके। थायरॉक्सिन के संश्लेषण के लिए आयोडीन आवश्यक है।
2. **अग्नाशय (मिश्रित ग्रंथि)**
- **स्थिति:** यह उदर गुहा में आमाशय के ठीक नीचे स्थित होता है।
- **स्रावित हॉर्मोन:** इंसुलिन (और ग्लूकागोन)।
- **प्राथमिक कार्य:** इंसुलिन शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज के अवशोषण को बढ़ावा देकर और यकृत में अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में परिवर्तित करके रक्त शर्करा के स्तर को कम करता है।
3. **अधिब्रक्क (एड्रिनल) ग्रंथि**
- **स्थिति:** यह प्रत्येक किडनी के ऊपर स्थित होती है।
- **स्रावित हॉर्मोन:** एड्रिनालिन (एपिनेफ्रीन)।
- **प्राथमिक कार्य:** एड्रिनालिन हृदय गति, श्वसन दर और मांसपेशियों में रक्त की आपूर्ति बढ़ाकर शरीर को आपातकालीन स्थितियों (लड़ो या भागो प्रतिक्रिया) के लिए तैयार करता है।
4. **पीयूष (पिट्यूटरी) ग्रंथि**
- **स्थिति:** यह मस्तिष्क के आधार से जुड़ी होती है (इसे अक्सर मास्टर ग्रंथि कहा जाता है)।
- **स्रावित हॉर्मोन:** वृद्धि हॉर्मोन (Growth Hormone - GH)।
- **प्राथमिक कार्य:** यह समग्र शारीरिक वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है, विशेष रूप से बाल्यावस्था और किशोरावस्था के दौरान हड्डियों और मांसपेशियों के elongation को।
### निष्कर्ष\nअंतःस्रावी तंत्र एक स्थिर आंतरिक वातावरण (होमियोस्टैसिस) बनाए रखने और दीर्घकालिक विकासात्मक प्रक्रियाओं को विनियमित करने के लिए तंत्रिका तंत्र के साथ घनिष्ठ समन्वय में कार्य करता है।
उत्तर (Answer): ### मानव मस्तिष्क का परिचय\nमानव मस्तिष्क हमारे शरीर का केंद्रीय सूचना-प्रसंस्करण अंग है और यह 'कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम' के रूप में कार्य करता है। यह हमारी सभी स्वैच्छिक और अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है, याददाश्त को संचित करता है, और शरीर के विभिन्न अंगों से प्राप्त संवेदी सूचनाओं का प्रसंस्करण करता है। मस्तिष्क क्रेनियम नामक एक हड्डी के बक्से के अंदर अच्छी तरह सुरक्षित रहता है और मेनिन्जेस नामक द्रव से घिरी झिल्लियों से ढका होता है, जो इसे झटकों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
### मस्तिष्क के मुख्य भाग\nमानव मस्तिष्क को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है:
1. **अग्रमस्तिष्क (प्रमस्तिष्क या सेरेब्रम):**
- यह मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला और सबसे जटिल हिस्सा है।
- इसमें सेरेब्रम शामिल होता है, जो दो गोलार्द्धों (सेरेब्रल गोलार्द्ध) में बंटा होता है।
- **कार्य:** यह स्वैच्छिक क्रियाओं, तर्क, सीखने, बुद्धिमत्ता, याददाश्त और वाणी को नियंत्रित करता है। यह आँख, कान और नाक जैसे विभिन्न रिसेप्टर्स से संवेदी आवेगों को भी प्राप्त करता है।
2. **मध्यमस्तिष्क:**
- यह अग्रिम मस्तिष्क को पश्चमस्तिष्क से जोड़ता है और दृश्य व श्रवण उद्दीपनों के जवाब में सिर, गर्दन और धड़ की पलक झपकाने या मुड़ने जैसी अनैच्छिक प्रतिवर्ती गतिविधियों का समन्वय करता है।
3. **पश्चमस्तिष्क:**
- इसमें तीन महत्वपूर्ण घटक होते हैं:
- **सेरेबेलम (अनुमस्तिष्क):** यह शरीर की मुद्रा, संतुलन और स्वैच्छिक गतियों की सटीकता को नियंत्रित करता है (जैसे साइकिल चलाना, सीधी रेखा में चलना)।
- **मेडुलरी ऑब्लोंगाटा:** यह रक्तचाप, लार आना, उल्टी, दिल की धड़कन और श्वसन जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
- **पोंस:** यह श्वसन को नियंत्रित करता है और सेरेब्रम से सेरेबेलम तक संकेतों को ले जाने वाले पुल के रूप में कार्य करता है।
### निष्कर्ष\nइस प्रकार, मानव मस्तिष्क होमियोस्टैसिस बनाए रखने, पर्यावरणीय उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रियाओं का समन्वय करने और जीवन-सहायक शारीरिक कार्यों को सुचारू रूप से विनियमित करने के लिए अपने विभिन्न भागों के माध्यम से अत्यधिक एकीकृत तरीके से कार्य करता है।
उत्तर (Answer): मानव मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र की केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई है, जो खोपड़ी के अंदर सेरेब्रोस्पाइनल द्रव नामक एक तरल से भरे सुरक्षात्मक आवरण के भीतर सुरक्षित होती है जो झटकों को अवशोषित करता है। इसे मोटे तौर पर तीन मुख्य क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: अग्र मस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क। अग्र मस्तिष्क में मुख्य रूप से प्रमस्तिष्क होता है, जो मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा और सबसे प्रमुख हिस्सा है। प्रमस्तिष्क उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक कार्यों के लिए जिम्मेदार है जिसमें सोचना, तर्क करना, स्मृति, बुद्धिमत्ता, स्वैच्छिक मांसपेशी नियंत्रण और विभिन्न ज्ञानेंद्रियों से प्राप्त संवेदी आवेगों की व्याख्या करना शामिल है। पश्च मस्तिष्क में अनुमस्तिष्क, मेडल्ला ऑब्लांगेटा और पोंस जैसी संरचनाएं शामिल हैं। अनुमस्तिष्क मस्तिष्क के पिछले हिस्से में स्थित होता है और मुद्रा, संतुलन और स्वैच्छिक पेशीय गतिविधियों की सटीकता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जैसे चलना, साइकिल चलाना या वस्तुओं को आसानी से उठाना।
उत्तर (Answer): पादप हॉर्मोन, जिन्हें फाइटोहॉर्मोन भी कहा जाता है, पौधों में उत्पादित स्वाभाविक रूप से होने वाले कार्बनिक रासायनिक पदार्थ हैं जो वृद्धि, विकास और पर्यावरणीय उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रियाओं का समन्वय करते हैं। जंतुओं के विपरीत, पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता है, इसलिए वे आंतरिक समन्वय के लिए पूरी तरह से इन रासायनिक संदेशवाहकों पर निर्भर करते हैं। पादप हॉर्मोन के चार प्रमुख प्रकार और उनके मुख्य कार्य हैं: 1. ऑक्सिन: यह कोशिका के दीर्गीकरण, तने की वृद्धि को बढ़ावा देता है, और तने की छाया वाली तरफ जमा होकर प्रकाशानुवर्ती प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 2. जिबरेलिन: यह तने के दीर्गीकरण, बीज अंकुरण और पौधों में समग्र वानस्पतिक वृद्धि को उत्तेजित करता है। 3. साइटोकाइनिन: यह तेजी से कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है, विशेष रूप से फलों और बीजों जैसी तीव्र वृद्धि के क्षेत्रों में, और पत्तियों की बुढ़ापे की प्रक्रिया में देरी करता है। 4. एब्सिसिक एसिड: यह एक वृद्धि अवरोधक के रूप में कार्य करता है, पत्तियों के मुरझाने और गिरने (विच्छेदन) जैसी प्रक्रियाओं को बढ़ावा देता है और प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों के दौरान बीज की प्रसुप्तता को प्रेरित करता है.
उत्तर (Answer): एड्रिनलीन एक हॉर्मोन है जिसे आपातकालीन स्थितियों के दौरान अधिवृक्क ग्रंथियों द्वारा सीधे रक्तप्रवाह में स्रावित किया जाता है, यही कारण है कि इसे अक्सर 'आपातकालीन हॉर्मोन' या 'लड़ो या भागो' का हॉर्मोन कहा जाता है। जब कोई व्यक्ति किसी तनावपूर्ण, खतरनाक या डरावनी स्थिति का सामना करता है, तो तंत्रिका तंत्र अधिवृक्क ग्रंथियों को तेजी से एड्रिनलीन छोड़ने का संकेत देता है। यह हॉर्मोन शरीर को शारीरिक कार्रवाई के लिए तैयार करने के लिए कई तत्काल शारीरिक परिवर्तन शुरू करता है: 1. यह हृदय गति और सांस लेने की दर को बढ़ाता है, जिससे कंकाल की मांसपेशियों में अधिक ऑक्सीजन तेजी से पंप होती है। 2. यह उन क्षेत्रों में रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण करके पाचन तंत्र और त्वचा से रक्त को दूर ले जाता है, जिससे हृदय और कंकाल की मांसपेशियों में अधिकतम रक्त प्रवाह डायवर्ट होता है। 3. यह यकृत को संग्रहित ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में तोड़ने का कारण बनता है, जिससे रक्तप्रवाह में तुरंत ऊर्जा निकलती है। ये सभी संयुक्त क्रियाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि शरीर के पास खतरे से लड़ने या उससे सुरक्षित रूप से दूर भागنے के लिए इष्टतम ताकत, सतर्कता और ऊर्जा हो।
उत्तर (Answer): प्रकाशानुचलन प्रकाश के प्रति पौधों के अंगों की दिशात्मक वृद्धि गति है। आमतौर पर, पौधे के प्ररोह धनात्मक प्रकाशानुचलन प्रदर्शित करते हैं क्योंकि वे प्रकाश स्रोत की ओर बढ़ते हैं, जबकि जड़ें इससे दूर बढ़कर ऋणात्मक प्रकाशानुचलन दिखाती हैं। यह प्रदर्शित करने के लिए कि पौधे के प्ररोह प्रकाश की ओर बढ़ते हैं, निम्नलिखित सरल प्रयोग किया जा सकता है: 1. एक गमले में लगा पौधा लें, जैसे कि सेम का एक स्वस्थ अंकुरित पौधा, जिसे कुछ दिनों के लिए एक अंधेरे कमरे में रखा गया हो ताकि उसका प्ररोह सीधा और संवेदनशील हो जाए। 2. इस गमले वाले पौधे को एक खिड़की या एक खुले बक्से के पास रखें जहाँ सूर्य का प्रकाश केवल एक दिशा से प्रवेश करता हो (जैसे इसे ढकने वाले कार्डबोर्ड बॉक्स में एक छोटे छेद के माध्यम से)। 3. सेटअप को कुछ दिनों के लिए बिना छेड़े छोड़ दें, पौधे को मध्यम रूप से पानी दें। 4. अवलोकन: कुछ दिनों के बाद, यह स्पष्ट रूप से देखा जाएगा कि प्ररोह का शीर्ष उस दिशा की ओर मुड़ता और बढ़ता है जिधर से सूर्य का प्रकाश आ रहा है। निष्कर्ष: यह साबित करता है कि पौधे के प्ररोह धनात्मक रूप से प्रकाशानुवर्ती होते हैं और विभेदक कोशिकीय दीर्गीकरण द्वारा एकतरफा प्रकाश का उत्तर देते हैं।
उत्तर (Answer): पीयूष ग्रंथि को आम तौर पर मानव शरीर की मुख्य ग्रंथि के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह कई हॉर्मोन स्रावित करती है जो अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों की गतिविधियों को विनियमित और नियंत्रित करते हैं। पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित दो प्रमुख हॉर्मोन और उनके कार्य हैं: 1. वृद्धि हॉर्मोन (GH): यह हॉर्मोन शरीर के समग्र विकास और वृद्धि को नियंत्रित करता है, विशेष रूप से बचपन और किशोरावस्था के दौरान हड्डियों के लंबे होने और ऊतकों के प्रचुर विकास को उत्तेजित करता है। वृद्धि हॉर्मोन के कम स्राव से बौनापन होता है, जबकि इसके अत्यधिक स्राव से व्यक्तियों में विशालकायता होती है। 2. थायराइड-उत्तेजक हॉर्मोन (TSH): यह हॉर्मोन थायराइड ग्रंथि को थायराइड हॉर्मोन को संश्लेषित करने और छोड़ने के लिए उत्तेजित करता है, जिससे मानव शरीर के ऊतकों के भीतर चयापचय दर, ऊर्जा उत्पादन और समग्र चयापचय संतुलन नियंत्रित होता है।