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जीव जनन कैसे करते हैं?

Subject: विज्ञान | Class: Class 10 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)

कक्षा 10 विज्ञान - जीव जनਨ कैसे करते हैं? (How do Organisms Reproduce?) - त्वरित संशोधन नोट्स


1. जनन (Reproduction) की मूल अवधारणाएँ

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2. जनन के प्रकार (Types of Reproduction)

जीवों में जनन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:


#### (क) अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)


अलैंगिक जनन की प्रमुख विधियाँ:

1. विखंडन (Fission): एक एकल जीव दो या दो से अधिक संतति कोशिकाओं में विभाजित हो जाता है।

2. खंडन (Fragmentation): परिपक्व होने पर सरल बहुकोशिकीय जीव छोटे-छोटे टुकड़ों में खंडित हो जाते हैं और प्रत्येक टुकड़ा नए जीव में विकसित हो जाता है। उदाहरण: स्पाइरोगाइरा (Spirogyra)

3. पुनरुद्भवन (Regeneration): यदि कोई जीव किसी कारणवश कट जाता है या क्षत-विक्षत हो जाता है, तो इसके कटे हुए भाग से नए जीव का विकास हो जाता है। उदाहरण: प्लेनेरिया, हाइड्रा

4. मुकुलन (Budding): शरीर पर एक उभार (Bud) विकसित होता है जो बाद में अलग होकर नया जीव बनता है। उदाहरण: हाइड्रा, यीस्ट

5. कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): पौधों के कायिक भागों (जड़, तना, पत्ती) द्वारा नए पौधों का उत्पन्न होना।

6. बीजाणु जनन (Spore Formation): बीजाणु (Spores) नामक संरचनाएं बनती हैं जो अनुकूल परिस्थितियों में नए जीव को जन्म देती हैं। उदाहरण: राइजोपस (कवक)


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#### (ख) लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)


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3. पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Flowering Plants)

1. बाह्य दलपुंज (Sepals): कली की अवस्था में रक्षा करते हैं।

2. दलपुंज (Petals): कीटों को आकर्षित करते हैं।

3. पुंकेसर (Stamen): नर जनन अंग। इसमें परागकोष (Anther) और तंतु (Filament) होते हैं। परागकोष में परागकण बनते हैं।

4. स्त्रीकेसर / कार्पेल (Pistil/Carpel): मादा जनन अंग। इसके तीन भाग होते हैं:




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4. मानव में जनन (Human Reproduction)

#### (क) नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)

1. वृषण (Testes): उदर गुहा के बाहर वृषणकोश (Scrotum) में स्थित होते हैं। इनका मुख्य कार्य शुक्राणु (Sperm) और टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) हार्मोन का उत्पादन करना है। (वृषण का तापमान शरीर के तापमान से 2-3°C कम होता है जो शुक्राणु निर्माण के लिए आवश्यक है)।

2. शुक्र वाहिका (Vas Deferens): शुक्राणुओं को वृषण से मूत्राशय से आने वाली नली तक पहुँचाती है।

3. सहायक ग्रंथियाँ: प्रोस्टेट ग्रंथि और शुक्राशय (Seminal Vesicle) अपने स्राव से शुक्राणुओं को गतिशीलता प्रदान करते हैं और उन्हें तरल माध्यम देते हैं (इसे वीर्य कहते हैं)।

4. शिश्न (Penis): यह एक मैथुन अंग है जो शुक्राणुओं को मादा शरीर में स्थानांतरित करता है।


#### (ख) मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)

1. अंडाशय (Ovaries): मादा युग्मक यानी अंडाणु (Ovum/Egg) का निर्माण करते हैं। साथ ही इस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन उत्पन्न करते हैं।

2. अंडवाहिनी / फैलोपियन ट्यूब (Fallopian Tube): अंडाणु को अंडाशय से गर्भाशय तक ले जाती है। यहीं पर निषेचन होता है।

3. गर्भाशय (Uterus): एक थैलीनुमा संरचना जहाँ भ्रूण का विकास होता है।

4. योनि (Vagina): वह मार्ग जिसके माध्यम से शुक्राणु प्रवेश करते हैं।



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5. जनन स्वास्थ्य (Reproductive Health)

1. यांत्रिक अवरोध (Barrier Methods): कंडोम (Condoms), कॉपर-T (Copper-T), सर्वाइकल कैप।

2. रासायनिक विधियाँ: गर्भनिरोधक गोलियाँ (Oral Pills) जो हार्मोन संतुलन बदलकर अंडाणु का मोचन रोकती हैं।

3. शारीरिक विधियाँ (Surgical Methods):

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 जीव जनन कैसे करते हैं?
Overview
मुख्य अवधारणाएँ और महत्व प्रजनन का अर्थ और परिभाषा जीवों में स्थिरता बनाए रखना डीएनए की प्रतिकृति (DNA Copying) और विभिन्नता अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) विशेषता: एकल जीव द्वारा नया जीव प्रकार विखंडन (Fission) द्विखंडन (Binary Fission - जैसे अमीबा) बहुखंडन (Multiple Fission - जैसे प्लाज्मोडियम) खंडन (Fragmentation - जैसे स्पाइरोगायरा) पुनרוद्भव (Regeneration - जैसे हाइड्रा, प्लेनेरिया) मुकुलन (Budding - जैसे हाइड्रा, यीस्ट) बीजाणु जनन (Spore Formation - जैसे राइजोपस) कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) प्राकृतिक विधि (जड़, तना, पत्ती द्वारा) कृत्रिम विधि (कलम लगाना, रोपण, ऊतक संवर्धन) लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) विशेषता: नर और मादा युग्मकों का संलयन महत्व: अधिक विविधता और विकास पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन फूल के भाग (पुंकेसर, स्त्रीकेशर, दल, बाह्यदल) परागण (Pollination) - स्व-परागण और पर-परागण निषेचन (Fertilization) - युग्मनज का निर्माण फल और बीज का विकास मानव में लैंगिक जनन नर जनन तंत्र (वृषण, शुक्रवाहिका, शिश्न, शुक्राणु) मादा जनन तंत्र (अंडाशय, अंडवाहिनी, गर्भाशय, अंडाणु) निषेचन प्रक्रिया (युग्मक का मिलना) गर्भधारण और भ्रूण का विकास मासिक धर्म (Menstruation) या ऋतुस्राव जनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) आवश्यकता और महत्व यौन संचारित रोग (STDs - जैसे एचआईवी, एड्स, सिफलिस, गोनोरिया) गर्भनिरोधक विधियाँ (Contraception) यांत्रिक अवरोध (कंडोम) रासायनिक विधियाँ (गोली, हॉर्मोनल संतुलन) शल्य क्रिया विधियाँ (नसबंदी - वैसेक्टॉमी और ट्यूबेक्टॉमी) कन्या भ्रूण हत्या और लिंगानुपात संतुलन
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. प्रत्येक के लिए उपयुक्त उदाहरणों के साथ बहुकोशकीय जीवों में अलैंगिक जनन की विभिन्न विधियों की चर्चा कीजिए। समझाइए कि अलैंगिक जनन लैंगिक जनन से किस प्रकार भिन्न है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### अलैंगिक जनन का परिचय\nअलैंगिक जनन जनन की वह विधि है जिसमें युग्मक निर्माण या संलयन की भागीदारी के बिना एकल जनक नए जीवों को जन्म देता है। उत्पन्न संतति आनुवंशिक रूप से जनक और एक-दूसरे के समान होती है, जो एक क्लोन बनाती है। ### बहुकोशकीय जीवों में अलैंगिक जनन की विधियाँ 1. **खंडन (Fragmentation):** * अपेक्षाकृत सरल शारीरिक संगठन वाले बहुकोशकीय जीवों में, परिपक्व होने पर शरीर का छोटे-छोटे टुकड़ों या खंडों में टूट जाना प्रत्येक खंड को एक नए जीव के रूप में विकसित होने की अनुमति देता है। * *उदाहरण:* **स्पाइरोगायरा** (एक शैवाल)। 2. **पुनरुद्भवन (Regeneration):** * कई पूरी तरह से विभेदित जीवों में अपने शरीर के अंगों से नए व्यक्तिगत जीवों को जन्म देने की क्षमता होती है। यदि जीव किसी प्रकार कट जाता है या कई टुकड़ों में टूट जाता है, तो इनमें से कई टुकड़े अलग-अलग जीवों के रूप में विकसित हो जाते हैं। * *उदाहरण:* **प्लैनेरिया** और **हाइड्रा**। 3. **मुकुलन (Budding):** * इस विधि में, जनक जीव के शरीर पर एक स्थान पर बार-बार कोशिका विभाजन के कारण एक छोटी सी बहिर्वृद्धि विकसित होती है जिसे मुकुल कहते हैं। यह मुकुल बढ़ता है, जनक शरीर से अलग हो जाता है और एक नए स्वतंत्र जीव के रूप में विकसित होता है। * *उदाहरण:* **हाइड्रा** और **यीस्ट**। 4. **बीजाणु निर्माण (Spore Formation):** * बीजाणुधानी नामक विशिष्ट संरचनाएं बीजाणु नामक सूक्ष्म जनन इकाइयां उत्पन्न करती हैं। जब अनुकूल परिस्थितियां होती हैं, तो ये बीजाणु अंकुरित होकर नए जीवों में विकसित होते हैं। * *उदाहरण:* **राइजोपस** (ब्रेड मोल्ड)। 5. **कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation):** * एक ऐसी विधि जिसमें किसी भी जनन अंग की सहायता के बिना पौधों के कायिक भागों जैसे जड़ों, तनों और पत्तियों से नए पौधे प्राप्त किए जाते हैं। * *उदाहरण:* आलू के कंद, ब्रायोफिलम की पत्तियां, और गुलाब में कलम लगाना। ### अलैंगिक और लैंगिक जनन के बीच अंतर * **जनक की भागीदारी:** अलैंगिक जनन में केवल एक ही जनक शामिल होता है, जबकि लैंगिक जनन में आमतौर पर दो जनक (नर और मादा) शामिल होते हैं। * **युग्मक निर्माण:** अलैंगिक जनन में युग्मकों का कोई निर्माण या संलयन नहीं होता है; युग्मक निर्माण और निषेचन लैंगिक जनन की आवश्यक विशेषताएं हैं। * **आनुवंशिक भिन्नता:** अलैंगिक जनन की संतति आनुवंशिक रूप से समान क्लोन होती है, जबकि लैंगिक जनन दो जनकों के डीएनए के संयोजन के कारण आनुवंशिक भिन्नताएं प्रस्तुत करता है, जो विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
Q2. फूल वाले पौधों में लैंगिक जनन की प्रक्रिया को एक अच्छी तरह से labeled आरेख अवधारणा की सहायता से समझाइए। फूल के विभिन्न भागों और फूल में होने वाले निषेचन के बाद के परिवर्तनों का वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### पुष्पीय पौधों में लैंगिक जनन का परिचय\nपुष्पीय पौधों में लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मकों का उत्पादन, नर युग्मकों का मादा बीजांड तक स्थानांतरण, निषेचन और बीज तथा फलों का विकास शामिल होता है। फूल आवृतबीजी पौधों के जनन अंग होते हैं। ### फूल के भाग\nएक आदर्श फूल में पुष्पासन से जुड़े चार मुख्य चक्र होते हैं: * **बाह्य दल (कैलिक्स):** सबसे बाहरी हरा, पत्ती जैसा चक्र जो कली की अवस्था में फूल की रक्षा करता है। * **दल (कोरोला):** परागण के लिए कीटों और पक्षियों को आकर्षित करने के लिए आमतौर पर चमकीले रंग के और सुगंधित होते हैं। * **पुंकेसर (पुमंग):** नर जनन अंग जिसमें एक पतला तंतुक और परागकण वहन करने वाला परागकोश होता है। परागकणों में नर युग्मक होते हैं। * **स्त्रीकेशर या जायांग (जायांग):** मादा जनन अंग जिसके तीन भाग होते हैं: वर्तिकाग्र (पराग प्राप्त करने के लिए चिपचिपी सतह), वर्तिका (वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ने वाली नली), और अंडाशय (जिसमें मादा युग्मक/अंड कोशिका वाले बीजांड होते हैं)। ### निषेचन की प्रक्रिया 1. **परागण:** हवा, पानी या कीटों जैसे कारकों द्वारा परागकणों का परागकोश से उसी फूल के वर्तिकाग्र (स्व-परागण) या उसी प्रजाति के दूसरे फूल (पर-परागण) तक स्थानांतरण। 2. **परागकण का अंकुरण:** एक बार जब परागकण एक उपयुक्त वर्तिकाग्र पर गिरता है, तो यह अंकुरित होकर एक पराग नली बनाता है जो वर्तिका से नीचे अंडाशय में बढ़ती है। 3. **संयुग्मन:** नर युग्मक पराग नली से नीचे जाता है और युग्ममनुज बनाने के लिए बीजांड के अंदर मादा अंड कोशिका के साथ संलयन करता है। ### निषेचन के बाद के परिवर्तन\nनिषेचन के बाद, फूल में कई संरचनात्मक परिवर्तन होते हैं: * युग्ममनुज बीजांड के अंदर एक भ्रूण बनाने के लिए कई बार विभाजित होता है। * बीजांड एक मजबूत आवरण विकसित करता है और एक **बीज** में बदल जाता है। * अंडाशय बड़ा हो जाता है, पक जाता है और एक **फल** में विकसित हो जाता है। * अन्य भाग जैसे बाह्य दल, दल, पुंकेसर, वर्तिका और वर्तिकाग्र आमतौर पर सूख जाते हैं और झड़ जाते हैं।
Q3. मनुष्यों द्वारा उपयोग की जाने वाली गर्भनिरोधक की विभिन्न विधियाँ क्या हैं? समझाइए कि ये विधियाँ जनसंख्या नियंत्रण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य बनाए रखने में कैसे मदद करती हैं. 4 Marks
उत्तर (Answer): ### गर्भनिरोधक का परिचय\nगर्भनिरोधक से तात्पर्य संभोग के परिणामस्वरूप होने वाली गर्भावस्था को रोकने के लिए उपयोग की जाने वाली कृೃತिम या जानबूझकर अपनाई जाने वाली विधियों से है। यह परिवार नियोजन, जनसंख्या नियंत्रण और व्यक्तियों के जनन स्वास्थ्य की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ### गर्भनिरोधक की विधियाँ\nगर्भनिरोधक विधियों को व्यापक रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: * **यांत्रिक विधियाँ (बैरियर विधियाँ):** ये विधियाँ शुक्राणु और अंडे के भौतिक मिलन को रोकती हैं। उदाहरणों में कंडोम (पुरुषों और महिलाओं द्वारा प्रयुक्त), डायफ्राम और सर्वाइकल कैप शामिल हैं। ये यौन संचारित रोगों (STDs) से भी सुरक्षा प्रदान करती हैं। * **रासायनिक विधियाँ:** महिलाओं द्वारा शुक्राणुनाशक क्रीम, जैल या गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग किया जाता है। मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां हार्मोनल संतुलन को बदल देती हैं ताकि अंडे जारी न हों, हालांकि इनके कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। * **अंतर्गर्भाशयी युक्ति (IUDs):** कॉपर-टी या एलएनजी-आईयूएस जैसे उपकरणों को डॉक्टरों द्वारा गर्भाशय में रखा जाता है। वे निषेचित अंडे के रोपण को रोकते हैं। * **शल्य चिकित्सा विधियाँ (सर्जिकल विधियाँ):** युग्मक परिवहन को अवरुद्ध करने के लिए उपयोग की जाने वाली स्थायी विधियाँ। वासेक्टमी में पुरुषों में शुक्र वाहिकाओं को अवरुद्ध किया जाता है, जबकि ट्यूबेक्टमी में महिलाओं में फैलोपियन नलियों को अवरुद्ध किया जाता है। ### जनसंख्या नियंत्रण और स्वास्थ्य में भूमिका * **जनसंख्या नियंत्रण:** अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि प्राकृतिक संसाधनों, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर दबाव डालती है। गर्भनिरोधक जोड़ों को परिवार का आकार चुनने की अनुमति देता है। * **मातृ और शिशु स्वास्थ्य:** गर्भधारण के बीच अंतराल देने से माँ के शरीर को शारीरिक और मानसिक रूप से ठीक होने का समय मिलता है, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु दर कम होती है। * **यौन संचारित रोगों की रोकथाम:** कंडोम जैसी बैरियर विधियाँ एचआईवी-एड्स, सिफलिस और गोनोरिया जैसे घातक यौन संचारित संक्रमणों से बचाती हैं, इस प्रकार समग्र सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं।
Q4. मानव में नर और मादा जनन तंत्र का वर्णन कीजिए। दोनों प्रणालियों में विभिन्न अंगों के कार्यों तथा निषेचन और रोपण (इम्प्लांटेशन) की प्रक्रिया को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव जनन तंत्र\nमानव लैंगिक जनन द्वारा प्रजनन करता है जिसमें युग्मकों का निर्माण और संलयन शामिल है। यह प्रक्रिया विशेष नर और मादा जनन तंत्र द्वारा समर्थित होती है। ### नर जनन तंत्र\nमानव नर जनन तंत्र में निम्नलिखित मुख्य अंग होते हैं: * **वृषण (Testes):** पेट की गुहा के बाहर वृषण कोष (स्क्रीटम) में स्थित अंडाकार अंगों की एक जोड़ी। वे शुक्राणु नामक नर युग्मक और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन करते हैं। * **वृषण कोष (Scrotum):** शरीर की गुहा की तुलना में कम तापमान प्रदान करता है, जो शुक्राणु उत्पादन के लिए आवश्यक है। * **शुक्र वाहिका (Vas Deferens):** एक नली जो वृषण से शुक्राणु को मूत्राशय तक ले जाती है, और शुक्राशय की नली से जुड़ती है। * **ग्रंथियां:** शुक्राशय और प्रोस्टेट ग्रंथि शुक्राणु में अपने स्राव को जोड़ती हैं, जिससे पोषण मिलता है और तरल माध्यम (वीर्य) में उनका परिवहन आसान हो जाता है। * **मूत्रमार्ग और लिंग:** मूत्रमार्ग शुक्राणु और मूत्र दोनों के लिए एक सामान्य मार्ग के रूप में कार्य करता है। लिंग मादा जनन मार्ग में शुक्राणु पहुंचाता है। ### मादा जनन तंत्र\nमानव मादा जनन तंत्र में निम्नलिखित अंग होते हैं: * **अंडाशय (Ovaries):** पेट की गुहा में स्थित बादाम के आकार के अंगों की एक जोड़ी। वे मादा युग्मक (अंडाणु) और एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का उत्पादन करते हैं। * **फैलोपियन नली (अंडवाहिनी):** नली जो अंडाशय से जारी अंडे को प्राप्त करती है और वह स्थान है जहाँ निषेचन होता है। * **गर्भाशय (Uterus):** एक पेशीय, नाशपाती के आकार की थैली जहाँ बच्चे का विकास होता है। * **गर्भाशय ग्रीवा और योनि:** गर्भाशय ग्रीवा योनि में गर्भाशय का द्वार है, जो संभोग के दौरान शुक्राणु प्राप्त करती है। ### निषेचन और रोपण\nसंभोग के दौरान, शुक्राणु योनि में छोड़े जाते हैं। वे फैलोपियन नलियों में ऊपर की ओर यात्रा करते हैं, जहाँ एक शुक्राणु परिपक्व अंडे के साथ संलयन करता है। इस प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप युग्मनज का निर्माण होता है। युग्मनज बार-बार विभाजित होकर भ्रूण बनाता है, जो गर्भाशय में नीचे जाता है और इसकी मोटी परत में धंस जाता है। इस प्रक्रिया को रोपण (इम्प्लांटेशन) कहा जाता है, जिससे गर्भावस्था और भ्रूण का विकास होता है।
Q5. गर्भनिरोधक के विभिन्न तरीके क्या हैं? समझाइए कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य और समाज के लिए गर्भनिरोधक विधियों को अपनाना क्यों आवश्यक है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### गर्भनिरोधक का परिचय\nगर्भनिरोधक उन कृत्रिम या प्राकृतिक तरीकों को संदर्भित करता है जिनका उपयोग यौन संबंध के परिणामस्वरूप होने वाली गर्भावस्था को रोकने के लिए किया जाता है। यह परिवार नियोजन और प्रजनन स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ### गर्भनिरोधक के तरीके\nगर्भनिरोधक विधियों को मोटे तौर पर चार मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: 1. **यांत्रिक/बैरियर विधियाँ:** * ये विधियाँ शुक्राणु और अंडे के भौतिक मिलन को रोकती हैं। * उदाहरणों में कंडोम (नर और मादा द्वारा उपयोग किए जाने वाले), डायफ्राम और सर्वाइकल कैप शामिल हैं। वे यौन संचारित रोगों (एसटीडी) से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं। 2. **रासायनिक विधियाँ:** * महिलाओं द्वारा विशिष्ट दवाओं या शुक्राणुनाशकों का उपयोग। * मौखिक गर्भनिरोधक गोलियाँ (ओसीपी) हार्मोनल संतुलन को बदल देती हैं ताकि अंडे रिलीज न हों। आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां भी उपलब्ध हैं। 3. **गर्भाशय के भीतर गर्भनिरोधक उपकरण (आईयूसीडी):** * कॉपर-टी (सीयू-टी) या हार्मोनल कॉइल जैसे उपकरणों को डॉक्टर द्वारा गर्भाशय में डाला जाता है। वे निषेचित अंडे के प्रत्यारोपण को रोकते हैं। 4. **शल्य चिकित्सा विधियाँ:** * जन्म नियंत्रण के स्थायी तरीके। * *वैसरेक्टॉमी (पुरुष नसबंदी):* पुरुषों में, शुक्राणु के स्थानांतरण को रोकने के लिए वास डिफरेंस के एक छोटे हिस्से को काटा और बांधा जाता है। * *ट्यूबेक्टॉमी (महिला नसबंदी):* महिलाओं में, अंडों को गर्भाशय तक पहुँचने से रोकने के लिए फैलोपियन ट्यूब के एक छोटे हिस्से को काटा और बांधा जाता है। ### गर्भनिरोधक की आवश्यकता और महत्व * **जनसंख्या नियंत्रण:** मानव जनसंख्या की तीव्र वृद्धि को प्रबंधित करने में मदद करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि संसाधन समान रूप से वितरित हों। * **माँ और बच्चे का स्वास्थ्य:** बार-बार और अनचाहे गर्भधारण को रोकता है, जिससे माँ के शरीर को शारीरिक और मानसिक रूप से ठीक होने का समय मिलता है। * **एसटीडी की रोकथाम:** कंडोम जैसी बैरियर विधियाँ व्यक्तियों को एचआईवी-एड्स, सिफलिस और गोनोरिया जैसे घातक यौन संचारित संक्रमणों से बचाती हैं। * **आर्थिक स्थिरता:** परिवारों को कम बच्चों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और जीवन स्तर को बेहतर ढंग से वहन करने की अनुमति देता है।
Q6. मनुष्यों में नर और मादा प्रजनन तंत्र का वर्णन करें। उनके विभिन्न घटकों के कार्यों का विस्तार से वर्णन करें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव प्रजनन तंत्र\nमानव प्रजनन लैंगिक है, जिसके लिए नर और मादा युग्मकों के संलयन की आवश्यकता होती है। नर और मादा दोनों के पास युग्मक उत्पन्न करने और विकास का समर्थन करने के लिए विशिष्ट अंग प्रणालियाँ होती हैं। ### नर प्रजनन तंत्र\nमानव नर प्रजनन तंत्र में निम्नलिखित मुख्य अंग होते हैं: * **वृषण:** पेट की गुहा के बाहर अंडकोष में स्थित अंडाकार आकार के अंगों की एक जोड़ी। वे शुक्राणु नामक नर युग्मक और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन करते हैं। शुक्राणु उत्पादन के लिए अंडकोष का निचला तापमान आवश्यक है। * **शुक्र वाहिका (वास डिफरेंस):** एक नली जो वृषण से शुक्राणु को मूत्रमार्ग तक ले जाती है। * **अंडकोष:** त्वचा की एक थैली जो वृषण को रखती है और शुक्राणुजनन के लिए शरीर के तापमान से कम इष्टतम तापमान बनाए रखती है। * **मूत्रमार्ग:** मूत्र और शुक्राणु दोनों के लिए एक सामान्य मार्ग। * **सहायक ग्रंथियाँ:** शुक्राशय और प्रोस्टेट ग्रंथि शुक्राणु में स्राव जोड़ते हैं, पोषण प्रदान करते हैं और एक तरल माध्यम (वीर्य) के माध्यम से उनके परिवहन को आसान बनाते हैं। ### मादा प्रजनन तंत्र\nमानव मादा प्रजनन तंत्र में निम्नलिखित मुख्य अंग होते हैं: * **अंडाशय:** पेट की गुहा में स्थित बादाम के आकार के अंगों की एक जोड़ी। वे मादा युग्मक (अंडाणु या अंडे) और एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे मादा हार्मोन का उत्पादन करते हैं। हर महीने प्रत्येक अंडाशय द्वारा बारी-बारी से एक अंडा उत्पन्न होता है। * **फैलोपियन ट्यूब (डिंबवाहिनी):** नलियाँ जो अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती हैं। शुक्राणु द्वारा अंडे का निषेचन यहीं होता है। * **गर्भाशय (बच्चदानी):** एक पेशीय, नाशपाती के आकार का खोखला अंग जहाँ निषेचित अंडे (भ्रूण) का विकास होता है। * **य योनि:** एक पेशीय नली जो संभोग के दौरान शुक्राणु प्राप्त करती है और प्रसव के दौरान जन्म नहर के रूप में कार्य करती है। ### निष्कर्ष\nदोनों प्रणालियाँ युग्मक उत्पादन, निषेचन और संतान के सफल विकास को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करती हैं, जिससे मानव प्रजाति की निरंतरता बनी रहती है।
Q7. पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन की प्रक्रिया का स्वच्छ एवं नामांकित आरेख विवरण की सहायता से वर्णन कीजिए। इस प्रक्रिया में एक फूल के विभिन्न भागों की भूमिका का वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन का परिचय\nपुष्पी पादपों में लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मकों का संलयन शामिल है जिससे एक युग्मज बनता है, जो अंततः बीज में विकसित होता है। फूल आवृतबीजी पौधों के प्रजनन अंग हैं। एक विशिष्ट फूल में चार मुख्य चक्र होते हैं: बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर। ### फूल के विभिन्न भागों की भूमिका * **बाह्यदल (कैलिक्स):** ये सबसे बाहरी हरी, पत्ती जैसी संरचनाएं हैं जो कली अवस्था में फूल की रक्षा करती हैं। * **दल (कोरोला):** परागण के लिए कीड़ों और पक्षियों को आकर्षित करने के लिए आमतौर पर चमकीले रंग के और सुगंधित होते हैं। * **पुंकेसर (पुमंग):** नर जनन अंग। इसमें दो भाग होते हैं: * *पराकोश:* पीले रंग के परागकण उत्पन्न करता है जिसमें नर युग्मक होते हैं। * *तंतु:* एक डंठल जो पराकोश को सहारा देता है। * **स्त्रीकेसर या जायांग:** फूल के केंद्र में स्थित मादा जनन अंग। इसमें तीन भाग होते हैं: * *वर्तिकाग्र:* शीर्ष पर चिपचिपी सतह जो परागकणों को प्राप्त करती है। * *वर्तिका:* वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ने वाली नली जैसी संरचना। * *अंडाशय:* बीजांड युक्त सूजा हुआ आधार भाग, जो निषेचन के बाद बीज में विकसित होता है। ### लैंगिक जनन की प्रक्रिया 1. **परागण:** हवा, पानी या कीड़ों जैसे एजेंटों द्वारा परागकणों का पराकोश से उसी फूल (स्व-परागण) या दूसरे फूल (पर-परागण) के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण। 2. **पराग अंकुरण:** एक बार जब परागकण एक संगत वर्तिकाग्र पर उतरता है, तो यह एक पराग नली बनाने के लिए अंकुरित होता है जो वर्तिका के माध्यम से अंडाशय में नीचे की ओर बढ़ती है। 3. **निषेचन:** पराग नली बीजांड में प्रवेश करती है और नर युग्मकों को छोड़ती है। एक नर युग्मक बीजांड के अंदर मादा युग्मक (अंड कोशिका) के साथ संलयन करता है। इस प्रक्रिया को निषेचन कहा जाता है और इसके परिणामस्वरूप युग्मज का निर्माण होता है। 4. **निषेचन पश्चात परिवर्तन:** युग्मज भ्रूण बनाने के लिए कई बार विभाजित होता है। बीजांड एक मजबूत आवरण विकसित करता है और बीज में बदल जाता है। अंडाशय पक जाता है और फल में विकसित हो जाता है, जबकि पंखुड़ियाँ, बाह्यदल और पुंकेसर जैसे अन्य फूल भाग आमतौर पर सूख जाते हैं और गिर जाते हैं।
Q8. लैंगिक संचारित रोग (STD) क्या हैं? जीवाणु और विषाणु जनित किन्हीं चार STD के नाम लिखिए तथा इनसे बचने और जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित کرنے के लिए उपयोग की जाने वाली विभिन्न गर्भनिरोधक विधियों को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### लैंगिक संचारित रोगों (STD) का परिचय\nलैंगिक संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाले संक्रमणों को लैंगिक संचारित रोग या एसटीडी (STDs) कहा जाता है। ये बैक्टीरिया, वायरस या परजीवियों के कारण हो सकते हैं। असुरक्षित यौन संबंध संक्रमण का प्राथमिक माध्यम हैं। ### एसटीडी के उदाहरण * **जीवाणु जनित एसटीडी:** * सूजाक (गोनोरिया) * उपदंश (सिफलिस) * **विषाणु जनित एसटीडी:** * एचआईवी (HIV) के कारण होने वाला एक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (AIDS) * ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के कारण होने वाले जननांग मस्से ### गर्भनिरोधक और रोकथाम की विधियाँ\nगर्भनिरोध का तात्पर्य संभोग के दौरान गर्भधारण की जानबूझकर रोकथाम से है। ये विधियाँ एसटीडी के संचरण को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं (विशेष रूप से अवरोधक विधियाँ)। * **अवरोधक विधियाँ:** * कंडोम का उपयोग (पुरुषों और महिलाओं के लिए) जो शरीर के तरल पदार्थों और शुक्राणु के भौतिक संपर्क को रोकता है। ये एकमात्र गर्भनिरोधक विधियाँ हैं जो एसटीडी से भी बचाती हैं। * **रासायनिक विधियाँ:** * मौखिक गोलियों (हार्मोनल तैयारियों) का उपयोग जो शरीर के हार्मोनल संतुलन को बदल देती हैं ताकि अंडे न निकलें और निषेचन न हो सके। * शुक्राणुनाशकों का उपयोग जो शुक्राणु को मार देते हैं। * **आईयूडी (इंट्रासाइनर डिवाइस):** * कॉपर-टी जैसे उपकरण डॉक्टरों द्वारा गर्भाशय में लगाए जाते हैं ताकि आरोपण को रोका जा सके, हालांकि वे एसटीडी से सुरक्षा नहीं करते हैं। * **सर्जिकल विधियाँ:** * **नसबंदी (वैसोक्टोमी):** शुक्राणु स्थानांतरण को रोकने के लिए पुरुषों में शुक्र वाहिका को अवरुद्ध करना। * **ट्यूबेक्टोमी:** अंडे को शुक्राणु से मिलने से रोकने के लिए महिलाओं में फैलोपियन ट्यूब को अवरुद्ध करना। ### निष्कर्ष\nजनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने और प्रजनन स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जागरूकता, सुरक्षित यौन संबंध प्रथाएं और अवरोधक गर्भनिरोधकों का सही उपयोग आवश्यक है।
Q9. मानव में नर और मादा जनन तंत्र का वर्णन कीजिए। युग्मक निर्माण और परिवहन में विभिन्न अंगों की भूमिका को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव जनन का परिचय\nमानव लैंगिक जनन के माध्यम से प्रजनन करते हैं, जिसमें विशिष्ट नर और मादा युग्मकों का निर्माण और संलयन शामिल है। मानव जनन तंत्र में अच्छी तरह से विकसित अंग शामिल होते हैं जिन्हें नर और मादा जनन तंत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ### नर जनन तंत्र\nनर जनन तंत्र नर युग्मक (शुक्राणु) के उत्पादन और उन्हें मादा मार्ग तक पहुँचाने के लिए उत्तरदायी है। मुख्य अंगों में शामिल हैं: * **वृषण:** उदर गुहा के बाहर वृषण कोष में स्थित अंडाकार अंगों की एक जोड़ी। वे शुक्राणु और पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन करते हैं। शुक्राणु उत्पादन के लिए वृषण कोष का कम तापमान आवश्यक होता है। * **शुक्र वाहिका:** एक नली जो वृषण से शुक्राणु को मूत्राशय तक ले जाती है, जहाँ यह मूत्रमार्ग से जुड़ जाती है। * **सहायक ग्रंथियां:** शुक्राशय और प्रोस्टेट ग्रंथि शुक्राणु में स्राव मिलाती हैं, पोषण प्रदान करती हैं और एक तरल माध्यम (वीर्य) में उनके परिवहन को आसान बनाती हैं। * **मूत्रमार्ग:** मूत्र और शुक्राणु दोनों के लिए एक सामान्य मार्ग। * **शिश्न:** एक पेशीय अंग जो संभोग के दौरान मादा जनन मार्ग में शुक्राणु पहुँचाता है। ### मादा जनन तंत्र\nमादा जनन तंत्र मादा युग्मक (अंडाणु) का उत्पादन करता है, निषेचन के लिए स्थल प्रदान करता है, और विकसित हो रहे भ्रूण का पोषण करता है। मुख्य अंगों में शामिल हैं: * **अंडाशय:** उदर गुहा में स्थित बादाम के आकार के अंगों की एक जोड़ी। वे मादा युग्मक (अंडाणु) और एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे मादा हार्मोन का उत्पादन करते हैं। आमतौर पर हर महीने दोनों अंडाशयों में से किसी एक द्वारा बारी-बारी से एक अंडा उत्पन्न किया जाता है। * **अंडवाहिनी (फैलोपियन ट्यूब):** नलियाँ जो अंडाशय से निकलने वाले अंडे को प्राप्त करती हैं और वह स्थल प्रदान करती हैं जहाँ निषेचन होता है। * **गर्भाशय (बच्चदानी):** एक पेशीय, थैली जैसी थैली जहाँ निषेचित अंडा आरोपित होता है और भ्रूण में विकसित होता है। * **ग्रीवा और योनि:** गर्भाशय का निचला भाग योनि में खुलता है, जो जन्म नहर और शुक्राणु प्रवेश के मार्ग के रूप में कार्य करता है। ### निष्कर्ष\nदोनों प्रणालियाँ युग्मक उत्पादन, निषेचन, गर्भधारण और प्रसव के माध्यम से मानव प्रजाति की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण समन्वय में काम करती हैं।
Q10. पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन कीजिए। एक फूल के विभिन्न भागों तथा निषेचन और फल निर्माण तक की घटनाओं का वर्णन करें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन का परिचय\nपुष्पी पादपों में लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मकों का उत्पादन, नर युग्मकों का मादा बीजांड तक स्थानांतरण, निषेचन और उसके बाद बीज और फल का विकास शामिल है। आवृतबीजी (एंग्कोस्पर्म) वे पौधे हैं जिनमें जनन अंग फूल के भीतर स्थित होते हैं। ### फूल के भाग * **बाह्य दल (कैलिक्स):** हरी पत्ती जैसी संरचनाओं का सबसे बाहरी चक्र जो कली की अवस्था में फूल की रक्षा करता है। * **दलपुंज (कोरोला):** आमतौर पर चमकीले रंग के भाग जो कीटों और पक्षियों जैसे परागणकों को आकर्षित करने के लिए होते हैं। * **पुंकेसर (नर जनन अंग):** इसमें एक परागकोष (जो नर युग्मक युक्त परागकण उत्पन्न करता है) और एक पूततंतु (परागकोष को सहारा देने वाला डंठल) होता है। * **स्त्रीकेसर (मादा जनन अंग):** इसके तीन भाग होते हैं: * **वर्तिकाग्र:** परागकणों को प्राप्त करने वाली चिपचिपी ऊपरी सतह। * **वर्तिका:** वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ने वाली नली जैसी संरचना। * **अंडाशय:** बीजांड युक्त फूला हुआ निचला भाग, जो निषेचन के बाद बीज में विकसित होता है। ### निषेचन की प्रक्रिया * **परागण:** वायु, जल या कीटों जैसे कारकों द्वारा परागकोष से उसी फूल (स्व-परागण) या दूसरे फूल (पर-परागण) के वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण। * **परागकण का अंकुरण:** एक बार जब परागकण अनुकूल वर्तिकाग्र पर गिरता है, तो यह एक पराग नली बनाने के लिए अंकुरित होता है जो वर्तिका के माध्यम से नीचे अंडाशय में बढ़ती है। * **संलयन (सिन्गामी):** पराग नली बीजांड में नर युग्मकों को छोड़ती है, जहाँ एक नर युग्मक युग्मनज बनाने के लिए अंड कोशिका के साथ संलयन करता है। ### निषेचन के बाद के परिवर्तन * युग्मनज बीजांड के अंदर भ्रूण बनाने के लिए कई बार विभाजित होता है। * बीजांड एक सख्त आवरण विकसित करता है और बीज में बदल जाता है। * अंडाशय तेजी से बढ़ता है और फल बनाने के लिए पकता है, जबकि पंखुड़ियाँ, बाह्य दल और पुंकेसर जैसे अन्य पुष्प भाग आमतौर पर सूख कर गिर जाते हैं।
Q11. गर्भनिरोधन की विभिन्न विधियाँ क्या हैं? समाज के लिए गर्भनिरोधक का उपयोग क्यों महत्वपूर्ण है? 3 Marks
उत्तर (Answer): गर्भनिरोधन से तात्पर्य अंडोत्सर्ग, निषेचन या रोपण की सामान्य प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करके गर्भावस्था को रोकने के लिए उपयोग की जाने वाली विधियों से है। विभिन्न विधियों को मोटे तौर पर वर्गीकृत किया गया है: 1) अवरोधक विधियाँ, जैसे कंडोम और सर्वाइकल कैप, जो शुक्राणु को अंडे तक पहुँचने से रोकती हैं। 2) रासायनिक विधियाँ, जैसे मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां, जो हार्मोनल संतुलन को बदल देती हैं ताकि अंडे जारी न हों। 3) अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक उपकरण (IUCDs) जैसे कॉपर-टी, रोपण को रोकने के लिए गर्भाशय में रखे जाते हैं। 4) शल्य चिकित्सा विधियाँ, जैसे पुरुषों में वैसरेक्टोमी और महिलाओं में ट्यूबेक्टोमी, जो युग्मकों के परिवहन को अवरुद्ध करती हैं। जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने, माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य को बनाए रखने, परिवारों के लिए बेहतर आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने और यौन संचारित संक्रमणों (STIs) के प्रसार को रोकने के लिए समाज के लिए गर्भनिरोधक का उपयोग महत्वपूर्ण है।
Q12. मानव महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा (अपरा) के कार्यों को समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): प्लेसेंटा (अपरा) गर्भाशय की दीवार में अंतर्निहित एक विशेष डिस्क जैसा ऊतक है जो विकासशील मानव भ्रूण/भ्रूण को माँ की रक्त आपूर्ति से जोड़ता है। यह भ्रूण के विकास और संवर्धन का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके प्राथमिक कार्यों में शामिल हैं: 1) पोषण का प्रावधान: यह माँ के रक्त से भ्रूण तक ग्लूकोज और ऑक्सीजन के पारित होने के लिए एक बड़ा सतह क्षेत्र प्रदान करता है। 2) अपशिष्ट निष्कासन: यह उत्सर्जन के लिए माँ के रक्त में स्थानांतरित होने के लिए भ्रूण द्वारा उत्पन्न चयापचय अपशिष्ट उत्पादों, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड और यूरिया की अनुमति देता है। 3) अंतःस्रावी कार्य: यह ऐसे हार्मोन स्रावित करता है जो गर्भावस्था को बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा, यह एक चयनात्मक बाधा के रूप में कार्य करता है, आवश्यक पोषक तत्वों की अनुमति देते हुए भ्रूण को कुछ हानिकारक पदार्थों से बचाता है।
Q13. यौवनारंभ (प्यूबर्टी) के समय लड़कियों में क्या परिवर्तन दिखाई देते हैं? किन्हीं तीन द्वितीयक लैंगिक लक्षणों की सूची बनाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): यौवनारंभ किशोरावस्था के दौरान वह अवधि है जब सामान्य शरीर के विकास की दर धीमी होने लगती है और प्रजनन ऊतक परिपक्व होने लगते हैं। लड़कियों में, शरीर संभावित प्रजनन के लिए तैयार होने के साथ कई विशिष्ट द्वितीयक लैंगिक लक्षण दिखाई देते हैं। तीन प्रमुख परिवर्तनों में शामिल हैं: 1) स्तनों का आकार बढ़ने लगता है, और निप्पल की त्वचा का रंग गहरा हो जाता है। 2) बगल और प्यूबिक क्षेत्र जैसे नए स्थानों पर बाल उगते हैं। 3) मासिक धर्म (पीरियड्स) शुरू होता है, जो प्रजनन क्षमता की शुरुआत को चिह्नित करता है, साथ ही विशेष रूप से कूल्हों और जांघों के आसपास कुल वसा सामग्री में वृद्धि होती है, जिससे सामान्य शरीर का आकार बदल जाता है।
Q14. लैंगिक और अलैंगिक जनन के बीच कम से कम तीन बिंदुओं का अंतर स्पष्ट कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): लैंगिक और अलैंगिक जनन कई बुनियादी पहलुओं में भिन्न होते हैं। पहला, अलैंगिक जनन में केवल एक ही जनक शामिल होता है, जबकि लैंगिक जनन में आम तौर पर दो जनक (नर और मादा) शामिल होते हैं। दूसरा, अलैंगिक जनन में, युग्मक (सेक्स सेल) नहीं बनते हैं और कोई निषेचन नहीं होता है, जबकि लैंगिक जनन में कड़ाई से युग्मज बनाने के लिए नर और मादा युग्मकों का निर्माण और संलयन शामिल होता है। तीसरा, अलैंगिक जनन के माध्यम से उत्पन्न संतति आनुवंशिक रूप से जनक (क्लोन) के समान होती है, जो बहुत कम भिन्नता प्रदर्शित करती है जब तक कि कोई उत्परिवर्तन न हो। इसके विपरीत, लैंगिक जनन दो अलग-अलग जनकों से डीएनए के संयोजन के कारण संतति के बीच महत्वपूर्ण आनुवंशिक भिन्नता पेश करता है, जो प्रजातियों के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।
Q15. प्रजनन प्रक्रिया में डीएनए प्रतिकृति (कॉपीइंग) एक आवश्यक हिस्सा क्यों है? संक्षेप में समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): डीएनए कॉपी करना प्रजनन प्रक्रिया का एक आवश्यक और मूलभूत हिस्सा है क्योंकि कोशिका के केंद्रक में गुणसूत्रों में डीएनए (डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड) अणुओं के रूप में माता-पिता से अगली पीढ़ी तक विशेषताओं की विरासत के लिए जानकारी होती है। कोशिका केंद्रक में डीएनए प्रोटीन बनाने के लिए सूचना का स्रोत है। यदि जानकारी बदलती है, तो अलग-अलग प्रोटीन बनेंगे और इससे शरीर के डिजाइन में बदलाव आएगा। इसलिए, प्रजनन में एक मूल घटना डीएनए की एक प्रति का निर्माण है। डीएनए प्रति बनाने के साथ-साथ, कोशिका को अन्य सेलुलर उपकरणों को बनाने की आवश्यकता होती है, और फिर डीएनए प्रति अलग हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप दो कोशिकाएं बनती हैं। हालांकि, डीएनए कॉपी करना अचूक नहीं है, जिससे पीढ़ियों में विविधताएं आती हैं, जो प्रजातियों के विकास और अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं।