मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय: प्रकाश - परावर्तन तथा अपवर्तन
कक्षा: 10 (विज्ञान - MP Board)
त्वरित पुनरीक्षण नोट्स / फॉर्मूला शीट
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1. प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)
जब प्रकाश की किरण किसी चमकदार या पॉलिश किए गए पृष्ठ पर पड़ती है, तो वह उसी माध्यम में वापस लौट जाती है। इसे प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
परावर्तन के नियम:
1. आपतन कोण ($\angle i$) सदैव परावर्तन कोण ($\angle r$) के बराबर होता है।
$$\angle i = \angle r$$
2. आपतित किरण, दर्पण के आपतन बिंदु पर अभिलंब और परावर्तित किरण — सभी एक ही तल में होते हैं।
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2. गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)
वे दर्पण जिनका परावर्तक पृष्ठ गोलीय होता है, गोलीय दर्पण कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:
- अवतल दर्पण (Concave Mirror): जिसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर वक्रित हो।
- उत्तल दर्पण (Convex Mirror): जिसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर वक्रित हो।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ:
- ध्रुव (P): गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के केंद्र को ध्रुव कहते हैं।
- वक्रता केंद्र (C): गोलीय दर्पण का परावर्तक पृष्ठ जिस गोले का भाग है, उसकी केंद्र को वक्रता केंद्र कहते हैं।
- वक्रता त्रिज्या (R): गोले की त्रिज्या को वक्रता त्रिज्या कहते हैं।
- मुख्य फोकस (F): मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरणें परावर्तन के पश्चात जिस बिंदु पर मिलती हैं या मिलती हुई प्रतीत होती हैं।
- फोकस दूरी (f): ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच की दूरी।
वक्रता त्रिज्या और फोकस दूरी में संबंध:
$$f = \frac{R}{2}$$ या $$R = 2f$$
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3. गोलीय दर्पणों द्वारा परावर्तन के लिए सूत्र
दर्पण सूत्र (Mirror Formula):
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$$
जहाँ:
- $f$ = फोकस दूरी
- $v$ = बिंब (वस्तु) से दर्पण की दूरी
- $u$ = प्रतिबिंब से दर्पण की दूरी
आवर्धन (Magnification - m):
$$m = \frac{h'}{h} = -\frac{v}{u}$$
जहाँ:
- $h'$ = प्रतिबिंब की ऊँचाई
- $h$ = बिंब की ऊँचाई
- यदि $m$ ऋणात्मक (-) है, तो प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा है।
- यदि $m$ धनात्मक (+) है, तो प्रतिबिंब आभासी और सीधा है।
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4. प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)
जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह दोनों माध्यमों को अलग करने वाले पृष्ठ पर अपने मार्ग से मुड़ जाती है। इसे प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
अपवर्तन के नियम (स्नेल का नियम):
1. आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा दोनों माध्यमों को पृथक करने वाले पृष्ठ के आपतन बिंदु पर अभिलंब — सभी एक ही तल में होते हैं।
2. आपतन कोण की ज्या ($\sin i$) तथा अपवर्तन कोण की ज्या ($\sin r$) का अनुपात एक स्थिरांक होता है।
$$\frac{\sin i}{\sin r} = \text{स्थिरांक } (n)$$
अपवर्तनांक (Refractive Index - n):
- माध्यम 2 का माध्यम 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक ($n_{21}$):
$$n{21} = \frac{\text{माध्यम 1 में प्रकाश की चाल } (v1)}{\text{माध्यम 2 में प्रकाश की चाल } (v_2)}$$
- निर्वात या वायु के सापेक्ष अपवर्तनांक (निरपेक्ष अपवर्तनांक):
$$n = \frac{c}{v}$$
(जहाँ $c$ = निर्वात में प्रकाश की चाल $= 3 \times 10^8 \text{ m/s}$)
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5. गोलीय लेंस (Spherical Lenses)
पारदर्शी पदार्थों का दो पृष्ठों से घिरा हुआ टुकड़ा जिसका एक या दोनों पृष्ठ गोलीय हों, लेंस कहलाता है।
- उत्तल लेंस (Convex Lens): किनारों पर पतला और बीच में मोटा होता है। (अभिसारी लेंस)
- अवतल लेंस (Concave Lens): किनारों पर मोटा और बीच में पतला होता है। (अपसारी लेंस)
लेंस सूत्र (Lens Formula):
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$$
लेंस का आववर्धन (Magnification - m):
$$m = \frac{h'}{h} = \frac{v}{u}$$
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6. लेंस की क्षमता (Power of a Lens)
किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसरित करने की क्षमता को उसकी 'क्षमता' कहते हैं। यह फोकस दूरी का व्युत्क्रम होती है।
सूत्र:
$$P = \frac{1}{f \text{ (मीटर में)}}$$
या
$$P = \frac{100}{f \text{ (सेंटीमीटर में)}}$$
- मात्रक: डायोप्टर (Diopter - D)
- नोट:
- उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक (+) होती है।
- अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक (-) होती है।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 प्रकाश - परावर्तन तथा अपवर्तन
प्रकाश का परिचय
परिभाषा (ऊर्जा का रूप जो दृष्टि संवेदना देता है)
गुण (सीधी रेखा में गमन, परावर्तन, अपवर्तन)
प्रकाश का परावर्तन
परिभाषा (प्रकाश की किरण का सतह से टकराकर वापस लौटना)
परावर्तन के नियम
आपतन कोण = परावर्तन कोण ($\angle i = \angle r$)
आपतन कोण, अभिलंब और परावर्तित किरण एक ही तल में
गोलीय दर्पण
अवतल दर्पण (अभिसारी दर्पण)
उत्तल दर्पण (अपसारी दर्पण)
मुख्य शब्दावली
ध्रुव (P)
वक्रता केंद्र (C)
वक्रता त्रिज्या (R)
मुख्य फोकस (F)
फोकस दूरी (f)
गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब निर्माण
अवतल दर्पण द्वारा (अलग-अलग स्थितियों में वास्तविक और आभासी)
उत्तल दर्पण द्वारा (सदैव आभासी, सीधा और छोटा)
दर्पण सूत्र ($\frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f}$)
आवर्धन ($m = \frac{h'}{h} = -\frac{v}{u}$)
प्रकाश का अपवर्तन
परिभाषा (एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर मार्ग से मुड़ना)
अपवर्तन के नियम (स्नेल का नियम: $\frac{\sin i}{\sin r} = \text{स्थिर}$)
अपवर्तनांक ($n = \frac{c}{v}$)
विरल से सघन माध्यम (अभिलंब की ओर झुकना)
सघन से विरल माध्यम (अभिलंब से दूर हटना)
लेंस
उत्तल लेंस (अभिसारी लेंस)
अवतल लेंस (अपसारी लेंस)
लेंस सूत्र ($\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}$)
लेंस की क्षमता ($P = \frac{1}{f}$, मात्रक: डायोप्टर)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
* अवतल लेंस की फोकस दूरी ($f$) = $-15\text{ cm}$ (अवतल लेंस की फोकस दूरी हमेशा ऋणात्मक होती है)
* प्रतिबिंब दूरी ($v$) = $-10\text{ cm}$ (अवतल लेंस हमेशा वस्तु की ही ओर एक आभासी, सीधा प्रतिबिंब बनाता है)
* वस्तु दूरी ($u$) = ?
* आवर्धन ($m$) = ?
### चरण 1: वस्तु दूरी ($u$) ज्ञात करना\nहम लेंस सूत्र का उपयोग करते हैं:
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$|
\nवस्तु दूरी ($u$) ज्ञात करने के लिए सूत्र को व्यवस्थित करने पर:
$$\frac{1}{u} = \frac{1}{v} - \frac{1}{f}$|
\nउचित चिह्न परिपाटी के साथ दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$\frac{1}{u} = \frac{1}{-10} - \frac{1}{-15}$|
$$\frac{1}{u} = -\frac{1}{10} + \frac{1}{15}$|
$10$ और $15$ का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) $30$ है:
$$\frac{1}{u} = \frac{-3 + 2}{30}$|
$$\frac{1}{u} = \frac{-1}{30}$|
$$u = -30\text{ cm}$|
**वस्तु दूरी का निष्कर्ष:** वस्तु को अवतल लेंस के सामने $30\text{ cm}$ की दूरी पर रखा गया है।
### चरण 2: आवर्धन ($m$) ज्ञात करना\nलेस के लिए आवर्धन का सूत्र होता है:
$$m = \frac{v}{u}$|
$v$ और $u$ के मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$m = \frac{-10\text{ cm}}{-30\text{ cm}}$$
$$m = +\frac{1}{3} = +0.33$$
**आवर्धन का निष्कर्ष:**
* धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि बना हुआ प्रतिबिंब आभासी और सीधा है।
* $0.33$ का परिमाण यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब वस्तु के आकार का एक-तिहाई छोटा हो गया है।
उत्तर (Answer): ### अपवर्तन की परिभाषा\nप्रकाश का अपवर्तन वह परिघटना है जिसमें प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछे प्रवेश करने पर अपने पथ से विचलित हो जाती है। दिशा में यह परिवर्तन इसलिए होता है क्योंकि एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करने पर प्रकाश की गति बदल जाती है। जिस माध्यम में प्रकाश की गति अधिक होती है, उसे विरल माध्यम (rarer medium) कहते हैं, और जिस माध्यम में प्रकाश की गति कम होती है, उसे सघन माध्यम (denser medium) कहते हैं। जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाती है, तो यह अभिलंब की ओर झुक जाती है। इसके विपरीत, जब यह सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती है, तो यह अभिलंब से दूर हट जाती है।
### अपवर्तन के नियम\nप्रकाश का अपवर्तन दो मूल नियमों का पालन करता है, जिन्हें स्नेल के अपवर्तन के नियम कहा जाता है:
* **पहला नियम:** आपतित किरण, अपवर्तित किरण और दोनों माध्यमों को अलग करने वाले पृष्ठ के आपतन बिंदु पर अभिलंब, सभी एक ही तल में होते हैं।
* **दूसरा नियम:** आपतन कोण की ज्या (sine, $i$) और अपवर्तन कोण की ज्या (sine, $r$) का अनुपात दिए गए रंग के प्रकाश के लिए और माध्यमों के दिए गए युग्म के लिए एक स्थिरांक होता है। गणितीय रूप से:
$$\frac{\sin i}{\sin r} = \text{स्थिरांक} = n_{21}$$\nइस स्थिरांक मान को पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं।
### अपवर्तनांक
* **निरपेक्ष अपवर्तनांक ($n$):** जब प्रकाश निर्वात या वायु से किसी दिए गए माध्यम में यात्रा करता है, तो निर्वात के सापेक्ष उस माध्यम के अपवर्तनांक को निरपेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं। यह निर्वात में प्रकाश की चाल ($c$) और माध्यम में प्रकाश की चाल ($v$) के अनुपात द्वारा दिया जाता है:
$$n = \frac{c}{v}$$
* **सापेक्ष अपवर्तनांक ($n_{21}$):** जब प्रकाश माध्यम 1 से माध्यम 2 में यात्रा करता है, तो सापेक्ष अपवर्तनांक माध्यम 1 में प्रकाश की चाल ($v_1$) और माध्यम 2 में प्रकाश की चाल ($v_2$) का अनुपात होता है:
$$n_{21} = \frac{v_1}{v_2} = \frac{n_2}{n_1}$$
### पेंसिल के मुड़े हुए दिखने का कारण\nजब एक पेंसिल को पानी में आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो पेंसिल के डूबे हुए भाग से आने वाली प्रकाश किरणें पानी (सघन माध्यम) से वायु (विरल माध्यम) में यात्रा करती हैं। अपवर्तन के नियमों के अनुसार, वायु में प्रवेश करते समय ये किरणें अभिलंब से दूर हट जाती हैं। जब ये अपवर्तित किरणें प्रेक्षक की आँखों तक पहुँचती हैं, तो वे अपनी वास्तविक स्थिति से ऊपर किसी बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं। परिणामस्वरूप, पेंसिल का डूबा हुआ हिस्सा उठा हुआ दिखाई देता है, जिससे पेंसिल वायु-जल अंतरापृष्ठ पर मुड़ी हुई प्रतीत होती है।
उत्तर (Answer): ### वस्तु की स्थिति\nवस्तु को उत्तल लेंस के सामने मुख्य फोकस ($F_1$) और फोकस दूरी के दोगुने ($2F_1$) [जिसे $C_1$ भी कहते हैं] के बीच रखा गया है।
### किरण आरेख का वर्णन (सैद्धांतिक प्रस्तुति)\nइस विशिष्ट स्थिति के लिए किरण आरेख बनाने के लिए:
1. **पहली किरण:** मुख्य अक्ष के समानांतर चलने वाली प्रकाश की किरण अपवर्तन के बाद लेंस के दूसरी ओर मुख्य फोकस ($F_2$) से होकर गुजरती है।
2. **दूसरी किरण:** उत्तल लेंस के प्रकाशिक केंद्र ($O$) से गुजरने वाली प्रकाश की किरण बिना किसी विचलन के सीधे निकल जाती है।
3. **प्रतिच्छेदन बिंदु:** दोनों अपवर्तित किरणें लेंस के दाईं ओर $2F_2$ के परे एक बिंदु पर मिलती हैं, जिससे एक वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनता है।
### प्रतिबिंब की विशेषताएँ और स्थिति
* **प्रतिबिंब की स्थिति:** लेंस के दूसरी ओर $2F_2$ के परे।
* **प्रतिबिंब की प्रकृति:** वास्तविक और उल्टा।
* **प्रतिबिंब का आकार:** वस्तु से बड़ा (आवर्धित)।
### इस स्थिति के उपयोग\nइस विशिष्ट प्रकाशीय व्यवस्था का उपयोग उन उपकरणों में बड़े पैमाने पर किया जाता है जहाँ एक आवर्धित वास्तविक बड़े प्रतिबिंब की आवश्यकता होती है, जैसे कि स्लाइड प्रोजेक्टर, सिनेमा प्रोजेक्टर और फोटोग्राफिक इनलार्जिंग कैमरे। यह एक छोटी पारदर्शी स्लाइड को उच्च स्पष्टता और विवरण के साथ एक बड़े पर्दे पर प्रोजेक्ट करने में मदद करता है।
उत्तर (Answer): ### अपवर्तन की परिभाषा\nजब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछी प्रवेश करती है, तो दोनों माध्यमों के अंतरापृष्ठ पर उसके संचरण की दिशा बदल जाती है। इस परिघटना को **प्रकाश का अपवर्तन** कहते हैं। अपवर्तन इसलिए होता है क्योंकि एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करने पर प्रकाश की चाल बदल जाती है।
### अपवर्तन के नियम\nस्नेल और प्रायोगिक प्रेक्षणों के अनुसार, प्रकाश का अपवर्तन दो मूल नियमों का पालन करता है:
* **प्रथम नियम:** आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा दोनों माध्यमों के अंतरापृष्ठ के आपतन बिंदु पर अभिलंब, सभी एक ही तल में होते हैं।
* **द्वितीय नियम (स्नेल का नियम):** आपतन कोण की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण की ज्या (sine) का अनुपात एक निश्चित रंग के प्रकाश और माध्यमों के दिए गए युग्म के लिए नियत होता है। गणितीय रूप से, $\frac{\sin i}{\sin r} = \text{नियत} = n_{21}$, जहाँ $n_{21}$ पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक है।
### अपवर्तनांक\nअपवर्तनांक एक विमाहीन राशि है जो यह दर्शाती है कि निर्वात की तुलना में किसी माध्यम के भीतर प्रकाश की चाल कितनी कम हो जाती है।
* **सूत्र:** किसी माध्यम का अपवर्तनांक ($n$), निर्वात में प्रकाश की चाल ($c$) और उस माध्यम में प्रकाश की चाल ($v$) के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।
* **समीकरण:** $n = \frac{c}{v}$
* **स्पष्टीकरण:** चूकि निर्वात में प्रकाश की चाल अधिकतम संभव चाल है ($c \approx 3 \times 10^8 \text{ m/s}$), इसलिए किसी भी ऑप्टिकल माध्यम के लिए अपवर्तनांक का मान हमेशा 1 से अधिक होता है। उच्च अपवर्तनांक यह दर्शाता है कि प्रकाश उस माध्यम में धीमी गति से चलता है और अधिक मुड़ता है।
उत्तर (Answer): ### आंकिक प्रश्न का हल
**दिया गया डेटा:**
- अवतल लेंस की फोकस दूरी ($f$) = $-15 \text{ cm}$ (अवतल लेंस की फोकस दूरी हमेशा ऋणात्मक होती है)
- प्रतिबिंब दूरी ($v$) = $-10 \text{ cm}$ (अवतल लेंस हमेशा वस्तु की ओर ही एक आभासी, सीधा प्रतिबिंब बनाता है)
- वस्तु दूरी ($u$) = ?
- आवर्धन ($m$) = ?
**सूत्र 1: लेंस सूत्र**
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$|
**वस्तु दूरी ($u$) के लिए चरण-दर-चरण गणना:**
1. $\frac{1}{u}$ ज्ञात करने के लिए लेंस सूत्र को व्यवस्थित करें:
$$\frac{1}{u} = \frac{1}{v} - \frac{1}{f}$|
2. समीकरण में उचित चिन्ह परिपाटी के साथ दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करें:
$$\frac{1}{u} = \frac{1}{-10} - \frac{1}{-15}$|
$$\frac{1}{u} = -\frac{1}{10} + \frac{1}{15}$|
3. $10$ और $15$ का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) लें, जो $30$ है:
$$\frac{1}{u} = \frac{-3 + 2}{30}$|
$$\frac{1}{u} = \frac{-1}{30}$|
4. $u$ ज्ञात करने के लिए दोनों पक्षों को उल्टा करें:
$$u = -30 \text{ cm}$|
**सूत्र 2: लेंस के लिए आवर्धन**
$$m = \frac{v}{u}$|
**आवर्धन ($m$) के लिए चरण-दर-चरण गणना:**
1. आवर्धन सूत्र में $v$ और $u$ के मानों को प्रतिस्थापित करें:
$$m = \frac{-10 \text{ cm}}{-30 \text{ cm}}$|
2. भिन्न को सरल करें:
$$m = \frac{1}{3} \approx +0.33$$
**उत्तर:**
1. वस्तु को अवतल लेंस के सामने $30 \text{ cm}$ की दूरी पर रखा जाना चाहिए (ऋणात्मक चिन्ह द्वारा दर्शाया गया है)।
2. लेंस द्वारा उत्पन्न आवर्धन $+0.33$ है, जो यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब आभासी, सीधा और वस्तु के आकार का एक तिहाई है।
उत्तर (Answer): ### अवतल दर्पण की परिभाषा
\nवह गोलीय दर्पण जिसकी परावर्तक सतह अंदर की ओर वक्रित होती है (गोले के केंद्र की ओर मुख किए हुए), अवतल दर्पण कहलाती है। अवतल दर्पण को अभिसारी दर्पण कहा जाता है क्योंकि यह उन पर पड़ने वाली प्रकाश की समांतर किरणों को मुख्य फोकस नामक एक बिंदु पर अभिसरित करते हैं।
### अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
\nजब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के मुख्य फोकस ($F$) और वक्रता केंद्र ($C$) के बीच रखा जाता है, तो बनने वाले प्रतिबिंब की विशेषताएं निम्नलिखित होती हैं:
- **वस्तु की स्थिति:** फोकस ($F$) और वक्रता केंद्र ($C$) के बीच।
- **प्रतिबिंब की स्थिति:** वक्रता केंद्र ($C$) से परे।
- **प्रतिबिंब की प्रकृति:** वास्तविक और उल्टी।
- **प्रतिबिंब का आकार:** आवर्धित (वस्तु से बड़ा)।
### किरण आरेख का विवरण
\nकिरण आरेख बनाने के लिए:
1. ध्रुव ($P$), फोकस ($F$) और वक्रता केंद्र ($C$) को चिह्नित करते हुए एक अवतल दर्पण के साथ मुख्य अक्ष खींचें।
2. $F$ और $C$ के बीच एक वस्तु $AB$ रखें।
3. बिंदु $B$ से मुख्य अक्ष के समांतर एक किरण लें; परावर्तन के बाद यह मुख्य फोकस $F$ से होकर गुजरती है।
4. मुख्य फोकस $F$ से गुजरने वाली दूसरी किरण लें; परावर्तन के बाद यह मुख्य अक्ष के समांतर चलती है।
5. दोनों परावर्तित किरणें $C$ से परे बिंदु $B'$ पर प्रतिच्छेद करती हैं, जिससे एक वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब $A'B'$ बनता है।
### दर्पण सूत्र
\nदर्पण सूत्र गोलीय दर्पण की वस्तु दूरी ($u$), प्रतिबिंब दूरी ($v$) और फोकस दूरी ($f$) के बीच संबंध बताता है। इसका गणितीय व्यंजक है:
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$|
**पदों की व्याख्या:**
- **$f$ (फोकस दूरी):** दर्पण के ध्रुव ($P$) और मुख्य फोकस ($F$) के बीच की दूरी।
- **$v$ (प्रतिबिंब दूरी):** दर्पण के ध्रुव ($P$) से प्रतिबिंब की दूरी।
- **$u$ (वस्तु दूरी):** दर्पण के ध्रुव ($P$) से वस्तु की दूरी।
\nयह सूत्र सभी गोलीय दर्पणों के लिए सभी स्थितियों में मान्य है, बशर्ते नई कार्तीय चिन्ह परिपाटी का कड़ाई से पालन किया जाए।
उत्तर (Answer): ### प्रकाश के अपवर्तन के नियम
\nअपवर्तन वह परिघटना है जिसमें प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछे प्रवेश करने पर मुड़ जाता है। प्रकाश के अपवर्तन के नियम निम्नलिखित हैं:
1. **प्रथम नियम:** आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा दोनों माध्यमों को पृथक् करने والے पृष्ठ के आपतन बिंदु पर अभिलंब, सभी एक ही तल में होते हैं।
2. **द्वितीय नियम (स्नेल का नियम):** प्रकाश के किसी निश्चित रंग तथा निश्चित माध्यमों के युग्म के लिए आपतन कोण की ज्या (sine) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sine) का अनुपात स्थिर होता है।
$$\frac{\sin i}{\sin r} = \text{स्थिरांक} (n_{21})$$\nइस स्थिरांक मान को पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं।
### अपवर्तनांक
\nकिसी माध्यम का अपवर्तनांक यह मापता है कि जब प्रकाश किसी संदर्भ माध्यम (सामान्यतः निर्वात या वायु) से उस माध्यम में प्रवेश करता है, तो प्रकाश की चाल कितनी धीमी होती है और वह कितना मुड़ता है। इसे निर्वात में प्रकाश की चाल ($c$) और उस माध्यम में प्रकाश की चाल ($v$) के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है:
$$n = \frac{c}{v}$|
### आंकिक प्रश्न का हल
**दिया गया डेटा:**
- कांच का अपवर्तनांक ($n$) = $1.5$
- निर्वात में प्रकाश की चाल ($c$) = $3 \times 10^8 \text{ m/s}$
- कांच में प्रकाश की चाल ($v$) = ?
**सूत्र:**
$$n = \frac{c}{v}$|
**चरण-दर-चरण गणना:**
1. सूत्र को $v$ के लिए व्यवस्थित करें:
$$v = \frac{c}{n}$|
2. समीकरण में दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करें:
$$v = \frac{3 \times 10^8 \text{ m/s}}{1.5}$|
3. भाग दें:
$$v = 2 \times 10^8 \text{ m/s}$|
**उत्तर:**\nकांच की प्लेट में प्रकाश की चाल $2 \times 10^8 \text{ m/s}$ है।
उत्तर (Answer): ### अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण का परिचय\nअवतल दर्पण एक ऐसा गोलीय दर्पण है जिसकी परावर्तक सतह अंदर की ओर वक्रित होती है। जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के सामने विभिन्न स्थितियों में रखा जाता है, तो यह विभिन्न प्रकार के प्रतिबिंब बनाता है। जब वस्तु को विशेष रूप से फोकस ($F$) और वक्रता केंद्र ($C$) के बीच रखा जाता है, तो वक्रता केंद्र से परे एक स्पष्ट वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनता है।
### किरण आरेख विवरण
- **वस्तु की स्थिति:** फोकस ($F$) और वक्रता केंद्र ($C$) के बीच।
- **किरण 1:** मुख्य अक्ष के समांतर चलने वाली प्रकाश किरण परावर्तन के बाद मुख्य फोकस ($F$) से होकर गुजरती है।
- **किरण 2:** मुख्य फोकस ($F$) से गुजरने वाली प्रकाश किरण परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है।
- **प्रतिच्छेद बिंदु:** दोनों परावर्तित किरणें वक्रता केंद्र ($C$) से परे मिलती हैं और प्रतिबिंब का निर्माण करती हैं।
### बने प्रतिबिंब की विशेषताएं
1. **प्रतिबिंब की प्रकृति:** वास्तविक और उल्टा।
2. **प्रतिबिंब की स्थिति:** वक्रता केंद्र ($C$) से परे।
3. **प्रतिबिंब का आकार:** वस्तु से बड़ा (विवर्धित)।
### दर्पण सूत्र\nदर्पण सूत्र किसी गोलीय दर्पण की वस्तु दूरी ($u$), प्रतिबिंब दूरी ($v$), और फोकस दूरी ($f$) के बीच संबंध स्थापित करता है। इसे निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है:
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$$\nजहाँ:
- $f$ = दर्पण की फोकस दूरी
- $v$ = ध्रुव से प्रतिबिंब की दूरी
- $u$ = ध्रुव से वस्तु की दूरी\nयह सूत्र मानक चिह्न परिपाटी के तहत अवतल और उत्तल दोनों दर्पणों के लिए सार्वभौमिक रूप से लागू होता है।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
- अवतल लेंस की फोकस दूरी ($f$) = $-15\text{ cm}$ (अवतल लेंस की फोकस दूरी हमेशा ऋणात्मक होती है)
- प्रतिबिंब दूरी ($v$) = $-10\text{ cm}$ (अवतल लेंस हमेशा वस्तु की ओर ही आभासी प्रतिबिंब बनाता है)
### ज्ञात करना है:
- वस्तु दूरी ($u$) = ?
- आवर्धन ($m$) = ?
### सूत्र:\nलेस सूत्र का उपयोग करने पर:
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$$
### चरण-दर-चरण गणना:
1. $u$ ज्ञात करने के लिए लेंस सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करना:
$$\frac{1}{u} = \frac{1}{v} - \frac{1}{f}$$
2. दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$\frac{1}{u} = \frac{1}{-10} - \frac{1}{-15}$$
$$\frac{1}{u} = -\frac{1}{10} + \frac{1}{15}$$
3. 10 और 15 का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) लेने पर, जो कि 30 है:
$$\frac{1}{u} = \frac{-3 + 2}{30}$$
$$\frac{1}{u} = \frac{-1}{30}$$
$$u = -30\text{ cm}$|
\nअतः, वस्तु को अवतल लेंस के सामने $30\text{ cm}$ की दूरी पर रखा गया है।
### आवर्धन ($m$) की गणना:\nलेंस के लिए आवर्धन का सूत्र है:
$$m = \frac{v}{u}$$
$v$ और $u$ के मानों को रखने पर:
$$m = \frac{-10}{-30}$$
$$m = +\frac{1}{3} = +0.33$$
### निष्कर्ष:\nवस्तु को लेंस से $30\text{ cm}$ की दूरी पर रखा गया है। आवर्धन का धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि बना हुआ प्रतिबिंब आभासी और सीधा है, और इसका आकार वस्तु के आकार का एक तिहाई है।
उत्तर (Answer): ### अपवर्तन का परिचय\nप्रकाश का अपवर्तन वह परिघटना है जिसमें प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछे प्रवेश करने पर अपने पथ की दिशा बदल लेती है। प्रकाश का यह मुड़ना इसलिए होता है क्योंकि विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल भिन्न-भिन्न होती है। जब प्रकाश किसी विरल माध्यम (जैसे वायु) से सघन माध्यम (जैसे जल या कांच) में प्रवेश करता है, तो इसकी चाल घट जाती है और यह अभिलंब की ओर झुक जाता है। इसके विपरीत, जब यह सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है, तो इसकी चाल बढ़ जाती है और यह अभिलंब से दूर हट जाता है।
### अपवर्तन के नियम\nप्रकाश के अपवर्तन के दो मूलभूत नियम हैं, जिन्हें स्नेल के नियम भी कहा जाता है:
1. **प्रथम नियम:** आपतित किरण, अपवर्तित किरण और दोनों माध्यमों को अलग करने वाले पृष्ठ के आपतन बिंदु पर अभिलंब, सभी एक ही तल में होते हैं।
2. **द्वितीय नियम (स्नेल का नियम):** आपतन कोण की ज्या ($\sin i$) और अपवर्तन कोण की ज्या ($\sin r$) का अनुपात एक निश्चित वर्ण के प्रकाश के लिए और माध्यमों के दिए गए युग्म के लिए एक स्थिरांक होता है। गणितीय रूप में:
$$\frac{\sin i}{\sin r} = \text{स्थिरांक} = n_{21}$$
यहाँ $n_{21}$ को पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक कहा जाता है।
### अपवर्तनांक
1. **चाल के पदों में परिभाषा:** किसी माध्यम का अपवर्तनांक विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल के पदों में व्यक्त किया जा सकता है। यदि निर्वात (या वायु) में प्रकाश की चाल $c$ है और किसी दिए गए माध्यम में प्रकाश की चाल $v$ है, तो उस माध्यम का अपवर्तनांक $n$ इस प्रकार दिया जाता है:
$$n = \frac{c}{v}$$
2. **महत्व:** अपवर्तनांक एक अदिश राशि है जो यह दर्शाती है कि किसी माध्यम का प्रकाशीय घनत्व कितना है। उच्च अपवर्तनांक का अर्थ है कि प्रकाश उस माध्यम में अधिक धीमी गति से चलता है, और अपवर्तन (झुकना) अधिक स्पष्ट होगा। उदाहरण के लिए, कांच का अपवर्तनांक लगभग 1.5 है और जल का 1.33 है। यह इंगित करता है कि कांच में प्रकाश जल की तुलना में धीमा चलता है, और कांच जल की तुलना में अधिक प्रकाशीय सघन है। अपवर्तनांक दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाले लेंसों, प्रिज्मों और विभिन्न प्रकाशीय उपकरणों को डिजाइन करने में मदद करता है।
उत्तर (Answer): दिया गया है:\nअवतल दर्पण की फोकस दूरी ($f$) = -15 सेमी\nप्रतिबिंब की दूरी ($v$) = -25 सेमी (चूंकि वास्तविक प्रतिबिंब दर्पण के सामने उसी ओर बनता है)\nवस्तु की ऊँचाई ($h$) = 4 सेमी
\nदर्पण सूत्र का उपयोग करने पर:
$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$
\nमान रखने पर:
$\frac{1}{-15} = \frac{1}{-25} + \frac{1}{u}$
$\frac{1}{u} = -\frac{1}{15} + \frac{1}{25}$
$\frac{1}{u} = \frac{-5 + 3}{75} = \frac{-2}{75}$
$u = -\frac{75}{2} = -37.5$ सेमी
\nअतः वस्तु को अवतल दर्पण के सामने 37.5 सेमी की दूरी पर रखा जाना चाहिए।
\nअब, प्रतिबिंब की ऊँचाई ($h'$) ज्ञात करने के लिए आवर्धन सूत्र का उपयोग करते हैं:
$m = \frac{h'}{h} = -\frac{v}{u}$
\nमान रखने पर:
$\frac{h'}{4} = -\frac{-25}{-37.5}$
$\frac{h'}{4} = -\frac{25}{37.5} = -\frac{2}{3}$
$h' = -\frac{2}{3} \times 4 = -\frac{8}{3} = -2.67$ सेमी
\nप्रतिबिंब की ऊँचाई -2.67 सेमी है। ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि मुख्य अक्ष के नीचे 2.67 सेमी ऊँचाई का एक वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनता है।
उत्तर (Answer): दिया गया है:\nवस्तु की ऊंचाई ($h$) = $+2.0$ सेमी\nउत्तल लेंस की फोकस दूरी ($f$) = $+10$ सेमी\nवस्तु दूरी ($u$) = $-15$ सेमी\nप्रतिबिंब दूरी ($v$) = ?\nप्रतिबिंब की ऊंचाई ($h'$) = ?
\nलेन्स सूत्र का उपयोग करने पर:
$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$
\nमान रखने पर:
$\frac{1}{10} = \frac{1}{v} - \frac{1}{-15}$
$\frac{1}{10} = \frac{1}{v} + \frac{1}{15}$
$\frac{1}{v}$ ज्ञात करने के लिए व्यवस्थित करने पर:
$\frac{1}{v} = \frac{1}{10} - \frac{1}{15}$
10 और 15 का लघुत्तम समापवर्त्य 30 है:
$\frac{1}{v} = \frac{3 - 2}{30} = \frac{1}{30}$
$v = +30$ सेमी
\nप्रतिबिंब दूरी का धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर (वास्तविक और उल्टा) बनता है।
\nअब, आवर्धन ($m$) और प्रतिबिंब का आकार ($h'$) ज्ञात करते हैं:
$m = \frac{h'}{h} = \frac{v}{u}$
$\frac{h'}{2.0} = \frac{30}{-15}$
$\frac{h'}{2.0} = -2$
$h' = -2 \times 2.0 = -4.0$ सेमी
\nअतः, प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा, लेंस के दूसरी ओर 30 सेमी की दूरी पर बनता है, और इसका आकार 4.0 सेमी है।
उत्तर (Answer): प्रकाश अभिसरण और अपसरण के संबंध में उनके अद्वितीय परावर्तक गुणों के कारण टॉर्च, सर्चलाइट और मोटर वाहनों की हेडलाइट्स में अवतल दर्पणों का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। जब एक इलेक्ट्रिक बल्ब या प्रकाश स्रोत को अवतल दर्पण के मुख्य फोकस पर ठीक से रखा जाता है, तो इस स्रोत से निकलने वाली प्रकाश किरणें वक्र परावर्तक सतह से टकराती हैं। परावर्तन के ऑप्टिकल सिद्धांतों के अनुसार, अवतल दर्पण के मुख्य फोकस से उत्पन्न होने वाली या गुजरने वाली प्रकाश की कोई भी किरण मुख्य अक्ष के समांतर परावर्तित हो जाती है। परिणामस्वरूप, सभी दिशाओं में बिखरने या बेतरतीब ढंग से फैलने के बजाय, परावर्तित किरणें लंबी दूरी तय करने के लिए एक दूसरे के समांतर प्रकाश के एक शक्तिशाली, तीव्र और केंद्रित पुंज के रूप में यात्रा करती हैं। यह समांतर पुंज रात में गाड़ी चलाते समय सड़कों को प्रभावी ढंग से रोशन करता है और सर्चलाइट्स को अंधेरे में गहराई तक जाने की अनुमति देता है। इसके अलावा, घुमावदार आकार बल्ब द्वारा उत्سृजित प्रकाश के अधिकतम संग्रह को सुनिश्चित करता है, जिससे बर्बादी कम होती है और प्रतिकूल मौसम या अंधेरे वातावरण में दृश्यता बढ़ती है। यह कुशल दिशात्मक नियंत्रण अवतल दर्पण को ऑटोमोटिव और सर्च लाइटिंग अनुप्रयोगों के लिए अनिवार्य बनाता है।
उत्तर (Answer): दिया गया है:\nलेन्स की क्षमता ($P$) = $-2.0$ D\nफोकस दूरी ($f$) = ?
\nलेन्स की क्षमता उसकी फोकस दूरी से इस सूत्र द्वारा संबंधित होती है:
$P = \frac{1}{f \text{ (मीटर में)}}$
\nफोकस दूरी ज्ञात करने के लिए सूत्र को व्यवस्थित करने पर:
$f = \frac{1}{P}$
\nमान रखने पर:
$f = \frac{1}{-2.0 \text{ D}}$
$f = -0.5 \text{ मीटर}$
\nमीटर को सेंटीमीटर में बदलने पर:
$f = -0.5 \times 100 \text{ सेमी} = -50 \text{ सेमी}$
\nसुधार और पहचान नोट: यद्यपि प्रश्न में 'उत्तल लेंस' कहा गया है, ऋणात्मक क्षमता ($P = -2.0$ D) और ऋणात्मक फोकस दूरी ($-50$ सेमी) वाला लेंस वास्तव में एक **अवतल लेंस** (अपसारी लेंस) होता है, क्योंकि उत्तल लेंसों की फोकस दूरी और क्षमता हमेशा धनात्मक होती है।
\nउपयोग: इस प्रकार के अवतल लेंस का उपयोग आमतौर पर निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) के सुधार के लिए किया जाता है, जो एक सामान्य दृष्टि दोष है जिसमें दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं क्योंकि प्रकाश किरणें रेटिना के सामने केंद्रित होती हैं।
उत्तर (Answer): प्रकाश का अपवर्तन दो मूलभूत नियमों का पालन करता है जो यह नियंत्रित करते हैं कि जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछे रूप से प्रवेश करता है, तो वह कैसे यात्रा करता है। ये नियम सभी ऑप्टिकल अंतरापृष्ठों पर सार्वभौमिक रूप से लागू होते हैं। अपवर्तन का पहला नियम कहता है कि आपतित किरण, अपवर्तित किरण और दो पारदर्शी माध्यमों के अंतरापृष्ठ पर आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब, तीनों एक ही तल में होते हैं। इसका अर्थ यह है कि प्रकाश आने वाली किरण और लंबवत सतह सामान्य द्वारा परिभाषित तल से बाहर नहीं मुड़ता है। अपवर्तन का दूसरा नियम, जिसे स्नेल के नियम के रूप में जाना जाता है, यह बताता है कि आपतन कोण की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण की ज्या (sine) का अनुपात किसी दिए गए रंग के प्रकाश के लिए और माध्यमों के दिए गए जोड़े के लिए एक स्थिरांक होता है। गणितीय रूप से, स्नेल के नियम को $\frac{\sin i}{\sin r} = \text{constant}$ के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ 'i' आपतन कोण को और 'r' अपवर्तन कोण को दर्शाता है। इस स्थिर मान को पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक ($n_{21}$) कहा जाता है। इन नियमों को समझने से वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को लेंस, सूक्ष्मदर्शी और कैमरे जैसे सटीक ऑप्टिकल उपकरणों को डिजाइन करने में मदद मिलती है, जिससे प्रकाश किरणों का अनुमानित फोकस और पथ ट्रेसिंग सुनिश्चित होती है।