मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय: प्रायिकता (Probability) - त्वरित पुनرीक्षण नोट्स (Quick Revision Notes)
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मुख्य अवधारणाएँ और परिभाषाएँ (Key Concepts and Definitions)
1. प्रायिकता (Probability):
प्रायिकता किसी घटना के घटित होने की संभावना का संख्यात्मक माप है। इसका मान हमेशा $0$ से $1$ के बीच होता है (दोनों सम्मिलित हैं)।
2. यादृच्छिक प्रयोग (Random Experiment):
वह प्रयोग जिसके सभी संभावित परिणामों की जानकारी पहले से होती है, परंतु यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि कौन सा परिणाम आएगा (जैसे: पासा फेंकना, सिक्का उछालना)।
3. अभिप्रेयोग (Trial):
किसी प्रयोग को एक बार करना एक अभिप्रेयोग कहलाता है।
4. प्रारंभिक घटना (Elementary Event):
जिस घटना का केवल एक ही परिणाम होता है, उसे प्रारंभिक घटना कहते हैं।
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महत्वपूर्ण सूत्र (Important Formulas)
1. किसी घटना $E$ की प्रायिकता $P(E)$ का सूत्र:
$$P(E) = \frac{\text{अनुकूल परिणामों की संख्या}}{\text{प्रयोग के सभी संभव परिणामों की कुल संख्या}}$$
2. पूरक घटना (Complementary Event):
घटना $E$ के नहीं होने को घटना $E'$ या $\bar{E}$ (E नहीं) से दर्शाया जाता है।
$$P(\text{E नहीं}) + P(E) = 1$$
या
$$P(E') = 1 - P(E)$$
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प्रायिकता के विशेष मान (Special Values of Probability)
1. असंभव घटना (Impossible Event):
जो घटना कभी घटित नहीं हो सकती, उसकी प्रायिकता $0$ होती है।
2. निश्चित घटना (Sure / Certain Event):
जो घटना निश्चित रूप से घटित होगी, उसकी प्रायिकता $1$ होती है।
3. प्रायिकता की सीमा:
किसी भी घटना $E$ के लिए प्रायिकता हमेशा इस प्रतिबंध को संतुष्ट करती है:
$$0 \le P(E) \le 1$$
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महत्वपूर्ण उदाहरण (Important Examples for Board Exam)
1. सिक्का उछालने पर (Coin):
- कुल संभव परिणाम = $2$ (चित् / Head [H], पट् / Tail [T])
- एक चित् आने की प्रायिकता = $\frac{1}{2}$
2. पासा फेंकने पर (Dice):
- कुल संभव परिणाम = $6$ ({1, 2, 3, 4, 5, 6})
- एक सम संख्या आने की प्रायिकता = $\frac{3}{6} = \frac{1}{2}$ (सम संख्याएँ: 2, 4, 6)
3. ताश की गड्डी (Playing Cards):
- कुल पत्ते = $52$
- लाल रंग के पत्ते = $26$ (13 पान + 13 ईंट)
- काले रंग के पत्ते = $26$ (13 हुकुम + 13 चिड़ी)
- Face Cards (तस्वीर वाले पत्ते) = $12$ (प्रत्येक प्रकार के 3: गुलाम, बेगम, बादशाह)
- Ace (इकक्का) के कुल पत्ते = $4$
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 प्रायिकता (Probability)
प्रस्तावना और मूल अवधारणा
दैनिक जीवन में अनिश्चितता
अनिश्चितता का संख्यात्मक माप
प्रायिकता का प्रारंभिक परिचय
महत्वपूर्ण शब्दावली
यादृच्छिक प्रयोग (Random Experiment)
परिणाम (Outcome)
प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space)
घटना (Event)
प्रारंभिक घटना (Elementary Event)
मिश्र घटना (Compound Event)
प्रायिकता की सैद्धांतिक परिभाषा
सूत्र: P(E) = अनुकूल परिणामों की संख्या / कुल संभव परिणामों की संख्या
पियरे-साइमन लाप्लास का योगदान
प्रायिकता के गुणधर्म
प्रायिकता का परिसर: $0 \le P(E) \le 1$
निश्चित घटना की प्रायिकता = 1
असंभव घटना की प्रायिकता = 0
पूरक घटना: $P(\bar{E}) = 1 - P(E)$
प्रमुख प्रकार के प्रश्न और उदाहरण
सिक्के उछालना (Coin Tossing)
एक सिक्का
दो सिक्के
तीन सिक्के
पासे फेंकना (Rolling Dice)
एक पासा
दो पासे
ता ̄श की गड्डी (Playing Cards)
कुल पत्ते = 52
लाल रंग के पत्ते (26)
काले रंग के पत्ते (26)
चार सूट (हुकुम, पान, ईंट, चिड़ी)
फेस कार्ड या तस्वीर वाले पत्ते (12)
कंचे या गेंद वाले प्रश्न (Marbles/Balls)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### संख्यात्मक हल:
**संभावित परिणामों की कुल संख्या:**\nचूँकि 1 से 90 तक अंकित 90 डिस्क हैं, इसलिए प्रतिदर्श समष्टि (sample space) में प्रारंभिक घटनाओं की कुल संख्या $n(S) = 90$ है।
**(i) दो अंकों की संख्या प्राप्त करने की प्रायिकता:**
* 1 से 90 तक की दो अंकों की संख्याएँ 10, 11, 12, ..., 90 हैं।
* दो अंकों की कुल संख्याएँ = $90 - 9 = 81$ हैं।
* मान लीजिए $E_1$ दो अंकों की संख्या प्राप्त होने की घटना है। अतः $n(E_1) = 81$ है।
* $\text{प्रायिकता } P(E_1) = \frac{\text{अनुकूल परिणामों की संख्या}}{\text{कुल परिणामों की संख्या}} = \frac{n(E_1)}{n(S)} = \frac{81}{90} = \frac{9}{10}$ है।
**(ii) एक पूर्ण वर्ग संख्या प्राप्त करने की प्रायिकता:**
* 1 से 90 के बीच की पूर्ण वर्ग संख्याएँ 1, 4, 9, 16, 25, 36, 49, 64 और 81 हैं।
* पूर्ण वर्ग संख्याओं की कुल संख्या = 9 है।
* मान लीजिए $E_2$ एक पूर्ण वर्ग संख्या प्राप्त होने की घटना है। अतः $n(E_2) = 9$ है।
* $\text{प्रायिकता } P(E_2) = \frac{n(E_2)}{n(S)} = \frac{9}{90} = \frac{1}{10}$ है।
**(iii) 5 से विभाज्य संख्या प्राप्त करने की प्रायिकता:**
* 1 से 90 के बीच 5 से विभाज्य संख्याएँ 5, 10, 15, 20, 25, 30, 35, 40, 45, 50, 55, 60, 65, 70, 75, 80, 85 और 90 हैं।
* ऐसी कुल संख्याओं की संख्या = 18 है।
* मान लीजिए $E_3$ 5 से विभाज्य संख्या प्राप्त होने की घटना है। अतः $n(E_3) = 18$ है।
* $\text{प्रायिकता } P(E_3) = \frac{n(E_3)}{n(S)} = \frac{18}{90} = \frac{1}{5}$ है।
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### प्रायिकता की सैद्धांतिक अवधारणा:
* **प्रायिकता की परिभाषा:** प्रायिकता किसी विशिष्ट घटना के घटित होने की संभावना का मात्रात्मक माप है। इसे 0 और 1 के बीच की संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है।
* **समसंभाव्य परिणाम:** एक प्रतिदर्श समष्टि के परिणामों को समसंभाव्य कहा जाता है यदि प्रत्येक परिणाम के घटित होने की समान संभावना हो। उदाहरण के लिए, डिब्बे से किसी भी डिस्क को निकालना समान रूप से संभव है।
* **सैद्धांतिक प्रायिकता का सूत्र:** किसी घटना $E$ की सैद्धांतिक प्रायिकता (जिसे शास्त्रीय प्रायिकता भी कहा जाता है), जिसे $P(E)$ द्वारा दर्शाया जाता है, इस प्रकार परिभाषित की जाती है:
$$P(E) = \frac{E \text{ के अनुकूल परिणामों की संख्या}}{\text{प्रयोग के सभी संभव परिणामों की कुल संख्या}}$$
* **पूरक घटनाएँ:** किसी घटना $E$ का पूरक, जिसे $\bar{E}$ या $E'$ द्वारा दर्शाया जाता है, 'घटना $E$ के नहीं होने' को दर्शाता है। किसी घटना और उसकी पूरक घटना की प्रायिकता का योग हमेशा 1 के बराबर होता है, अर्थात् $P(E) + P(\bar{E}) = 1$ होता है।
* **प्रायिकता की सीमा:** किसी भी घटना $E$ की प्रायिकता हमेशा असमिका $0 \le P(E) \le 1$ को संतुष्ट करती है। एक निश्चित घटना की प्रायिकता 1 होती है और एक असंभव घटना की प्रायिकता 0 होती है।
उत्तर (Answer): ### प्रायिकता का परिचय\nप्रायिकता गणित की वह शाखा है जो किसी घटना के घटने की संभावना का संख्यात्मक मूल्यांकन करती है। कक्षा 10 के गणित में, हम मुख्य रूप से **सैद्धांतिक प्रायिकता** (जिसे क्लासिकल प्रायिकता भी कहा जाता है) का अध्ययन करते हैं, जो एक यादृच्छिक प्रयोग के समसंभावी (equally likely) परिणामों पर आधारित होती है।
### 1. यादृच्छिक प्रयोग और प्रतिदर्श समष्टि (सैंपल स्पेस)
- **यादृच्छिक प्रयोग:** वह प्रयोग जिसके परिणाम की भविष्यवाणी पहले से निश्चित रूप से नहीं की जा सकती, भले ही सभी संभावित परिणाम ज्ञात हों, यादृच्छिक प्रयोग कहलाता है। उदाहरण के लिए, सिक्का उछालना या पासा फेंकना।
- **प्रतिदर्श समष्टि ($S$):** किसी यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभावित परिणामों के समुच्चय को प्रतिदर्श समष्टि कहते हैं। उदाहरण के लिए, एक पासा फेंकने पर प्रतिदर्श समष्टि $S = \{1, 2, 3, 4, 5, 6\}$ होती है।
### 2. प्रारंभिक घटनाएँ और घटनाएँ
- **प्रारंभिक घटना:** किसी यादृच्छिक प्रयोग का प्रत्येक परिणाम एक प्रारंभिक घटना कहलाता है। किसी प्रयोग के सभी प्रारंभिक प्रायिकताओं का योग सदैव 1 होता है।
- **घटना ($E$):** प्रतिदर्श समष्टि के एक उपसमुच्चय को घटना कहते हैं। एक घटना में एक या एक से अधिक परिणाम हो सकते हैं।
### 3. सैद्धांतिक प्रायिकता की परिभाषा\nकिसी यादृच्छिक प्रयोग में, यदि परिणाम समसंभावी माने जाते हैं, तो किसी घटना $E$ की सैद्धांतिक प्रायिकता $P(E)$ इस प्रकार परिभाषित की जाती है:
$$P(E) = \frac{E \text{ के अनुकूल परिणामों की संख्या}}{\text{प्रयोग के सभी संभावित परिणामों की कुल संख्या}} = \frac{n(E)}{n(S)}$$\nजहाँ $n(E)$ घटना $E$ के अनुकूल परिणामों की संख्या है और $n(S)$ प्रतिदर्श समष्टि के कुल अवयवों की संख्या है।
### 4. प्रायिकता के मुख्य गुण
- **प्रायिकता की सीमा:** किसी भी घटना $E$ की प्रायिकता हमेशा 0 और 1 के बीच (सहित) होती है। गणितीय रूप से, $0 \le P(E) \le 1$ होता है।
- **निश्चित घटना:** जिस घटना का घटना निश्चित हो, उसकी प्रायिकता 1 होती है। इसे $P(S) = 1$ से दर्शाया जाता है।
- **असंभव घटना:** जिस घटना का घटना असंभव हो, उसकी प्रायिकता 0 होती है। इसे $P(\phi) = 0$ से दर्शाया जाता है।
### 5. पूरक घटनाएँ
- किसी घटना $E$ के लिए, घटना "$E$ नहीं" को $E$ की पूरक घटना कहा जाता है, जिसे $\bar{E}$ या $E'$ द्वारा दर्शाया जाता है।
- किसी घटना और उसकी पूरक घटना की प्रायिकताओं का योग हमेशा 1 होता है:
$$P(E) + P(\bar{E}) = 1$$
यह संबंध हमें किसी घटना के घटित न होने की प्रायिकता ज्ञात करने में मदद करता है, जिसे $P(\bar{E}) = 1 - P(E)$ लिखा जाता है।
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण हल:
**चरण 1: कुल संभावित परिणामों (प्रतिदर्श समष्टि) की संख्या निर्धारित कीजिए।**\nजब दो पासे एक साथ फेंके जाते हैं, तो प्रत्येक पासे पर 1 से 6 तक की संख्याएं होती हैं।
$$\text{परिणामों की कुल संख्या} = 6 \times 6 = 36$$\nमान लीजिए प्रतिदर्श समष्टि $S$ है, अतः $n(S) = 36$ है।
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**चरण 2: योग 8 होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।**
- मान लीजिए $A$ वह घटना है जिसमें संख्याओं का योग 8 है।
- योग 8 वाले अनुकूल परिणामों की सूची इस प्रकार है:
$$A = \{(2, 6), (3, 5), (4, 4), (5, 3), (6, 2)\}$$
- अनुकूल परिणामों की संख्या: $n(A) = 5$ है।
\nप्रायिकता सूत्र का उपयोग करते हुए:
$$P(A) = \frac{n(A)}{n(S)} = \frac{5}{36}$$
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**चरण 3: योग 13 होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।**
- मान लीजिए $B$ वह घटना है जिसमें संख्याओं का योग 13 है।
- दो पासों पर अधिकतम संभव योग $6 + 6 = 12$ है।
- इसलिए, 13 योग प्राप्त करना असंभव है।
- अनुकूल परिणामों का समुच्चय एक रिक्त समुच्चय है: $B = \emptyset$ है।
- अनुकूल परिणामों की संख्या: $n(B) = 0$ है।
\nप्रायिकता सूत्र का उपयोग करते हुए:
$$P(B) = \frac{n(B)}{n(S)} = \frac{0}{36} = 0$$
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**चरण 4: योग 12 या उससे कम होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।**
- मान लीजिए $C$ वह घटना है जिसमें संख्याओं का योग 12 या उससे कम है।
- चूंकि दो पासों पर न्यूनतम योग $1 + 1 = 2$ और अधिकतम योग $6 + 6 = 12$ है, इसलिए किसी भी परिणाम का योग हमेशा 2 से 12 के बीच होगा।
- अतः, प्रतिदर्श समष्टि का प्रत्येक परिणाम इस शर्त को संतुष्ट करता है।
- अनुकूल परिणामों की संख्या: $n(C) = 36$ है।
\nप्रायिकता सूत्र का उपयोग करते हुए:
$$P(C) = \frac{n(C)}{n(S)} = \frac{36}{36} = 1$$
### अंतिम उत्तर:
(i) योग 8 होने की प्रायिकता = $\frac{5}{36}$
(ii) योग 13 होने की प्रायिकता = $0$
(iii) योग 12 या उससे कम होने की प्रायिकता = $1$
उत्तर (Answer): ### प्रायिकता के स्वयंसिद्ध दृष्टिकोण का परिचय\nप्रायिकता को परिभाषित करने की स्वयंसिद्ध दृष्टिकोण (Axiomatic approach) एक आधुनिक गणितीय पद्धति है, जिसे 1933 में रूसी गणितज्ञ आंद्रेई कोल्mogorov द्वारा प्रस्तुत किया गया था। यह दृष्टिकोण कुछ बुनियादी मान्यताओं, जिन्हें स्वयंसिद्ध (axioms) कहा जाता है, को निर्धारित करके प्रायिकता की अवधारणा को सामान्यीकृत करता है, जो किसी भी प्रायिकता फलन के लिए सत्य होनी चाहिए।
### प्रतिदर्श समष्टि और घटनाएं
- **प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space - $S$):** एक यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभावित परिणामों के समुच्चय को प्रतिदर्श समष्टि कहा जाता है। उदाहरण के लिए, एक मानक पासा फेंकने पर, $S = \{1, 2, 3, 4, 5, 6\}$।
- **प्रारंभिक घटनाएं:** प्रतिदर्श समष्टि में प्रत्येक व्यक्तिगत परिणाम को प्रारंभिक घटना या प्रतिदर्श बिंदु कहा जाता है।
- **घटना (Event - $E$):** प्रतिदर्श समष्टि $S$ के किसी भी उपसमुच्चय को घटना कहा जाता है।
### कोल्mogorov के प्रायिकता के स्वयंसिद्ध\nमान लीजिए $S$ किसी यादृच्छिक प्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि है और $P$ घटनाओं पर परिभाषित एक वास्तविक मूल्यवान फलन है। फलन $P$ को प्रायिकता फलन कहा जाता है यदि यह निम्नलिखित तीन स्वयंसिद्धों को संतुष्ट करता है:
1. **स्वयंसिद्ध 1 (ऋणेत्तरता):** किसी भी घटना $E$ के लिए, $E$ की प्रायिकता शून्य से अधिक या उसके बराबर होती है।
$$P(E) \geq 0$$
2. **स्वयंसिद्ध 2 (निश्चितता):** संपूर्ण प्रतिदर्श समष्टि $S$ की प्रायिकता 1 के बराबर होती है।
$$P(S) = 1$$
3. **स्वयंसिद्ध 3 (योज्यता):** यदि $E_1$ और $E_2$ परस्पर अपवर्जी घटनाएं हैं (अर्थात $E_1 \cap E_2 = \emptyset$), तो इन दोनों घटनाओं के संघ की प्रायिकता उनकी व्यक्तिगत प्रायिकताओं के योग के बराबर होती है।
$$P(E_1 \cup E_2) = P(E_1) + P(E_2)$$
### स्वयंसिद्धों से प्राप्त महत्वपूर्ण गुण
- **पूरक घटना का गुण:** किसी भी घटना $E$ के लिए, पूरक घटना $E'$ की प्रायिकता इस प्रकार दी जाती है:
$$P(E') = 1 - P(E)$$
- **असंभव घटना का गुण:** असंभव घटना ($\emptyset$) की प्रायिकता शून्य होती है।
$$P(\emptyset) = 0$$
- **प्रायिकता सीमा:** किसी भी घटना $E$ के लिए, प्रायिकता 0 और 1 के बीच होती है।
$$0 \leq P(E) \leq 1$$
उत्तर (Answer): चरण 1: डिब्बे में कंचों की कुल संख्या ज्ञात कीजिए।\nलाल कंचों की संख्या = 5\nसफेद कंचों की संख्या = 8\nहरे कंचों की संख्या = 4\nकंचों की कुल संख्या = 5 + 8 + 4 = 17
\nचरण 2: सूत्र का उपयोग करके प्रत्येक स्थिति के लिए प्रायिकता की गणना करें:\nप्रायिकता P(E) = (अनुकूल परिणामों की संख्या) / (संभव परिणामों की कुल संख्या)
(i) कंचा लाल होने की प्रायिकता:\nअनुकूल परिणामों की संख्या (लाल कंचे) = 5\nP(लाल) = 5 / 17
(ii) कंचा सफेद होने की प्रायिकता:\nअनुकूल परिणामों की संख्या (सफेद कंचे) = 8\nP(सफेद) = 8 / 17
(iii) कंचा हरा नहीं होने की प्रायिकता:\nहरे कंचों की संख्या = 4\nहरे नहीं होने वाले कंचों की संख्या = कुल कंचे - हरे कंचे = 17 - 4 = 13\nवैकल्पिक रूप से, P(हरा नहीं) = 1 - P(हरा) = 1 - (4 / 17) = 13 / 17\nP(हरा नहीं) = 13 / 17
उत्तर (Answer): दी गई जानकारी:
- बक्से में डिस्क की कुल संख्या = 90 (1 से 90 तक अंकित)
- कुल संभव परिणामों की संख्या = 90
(i) डिस्क पर दो अंकों की संख्या होने की प्रायिकता:
- दो अंकों की संख्याएँ 10 से 90 तक होती हैं।
- अनुकूल परिणामों की संख्या = 90 - 9 (चूंकि 1 से 9 तक एक अंक की संख्याएँ हैं) = 81
- P(दो अंकों की संख्या) = 81 / 90
- अंश और हर को 9 से विभाजित करने पर:
- P(दो अंकों की संख्या) = 9 / 10
(ii) डिस्क पर पूर्ण वर्ग संख्या होने की प्रायिकता:
- 1 और 90 के बीच पूर्ण वर्ग संख्याएँ हैं: 1, 4, 9, 16, 25, 36, 49, 64, 81
- अनुकूल परिणामों की संख्या = 9
- P(पूर्ण वर्ग) = 9 / 90 = 1 / 10
(iii) डिस्क पर 5 से विभाज्य संख्या होने की प्रायिकता:
- 1 और 90 के बीच 5 से विभाज्य संख्याएँ हैं: 5, 10, 15, 20, 25, 30, 35, 40, 45, 50, 55, 60, 65, 70, 75, 80, 85, 90
- अनुकूल परिणामों की संख्या = 18
- P(5 से विभाज्य) = 18 / 90
- अंश और हर को 18 से विभाजित करने पर:
- P(5 से विभाज्य) = 1 / 5
\nअंतिम उत्तर:
(i) 9/10, (ii) 1/10, (iii) 1/5
उत्तर (Answer): प्रायिकता के अध्ययन में, प्रतिदर्श समष्टि को किसी यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभावित, भिन्न परिणामों के पूर्ण समुच्चय के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसे आमतौर पर बड़े अक्षर 'S' द्वारा दर्शाया जाता है। किसी प्रयोग के प्रत्येक एकल प्रदर्शन से एक ऐसा परिणाम प्राप्त होगा जो इस प्रतिदर्श समष्टि के भीतर समाहित होता है।
\nप्रारंभिक घटना (या सरल घटना) एक ऐसी घटना है जिसमें प्रतिदर्श समष्टि से केवल एक ही परिणाम होता है। दूसरे शब्दों में, जब किसी घटना को प्रयोग के संदर्भ में सरल घटकों में आगे विभाजित नहीं किया जा सकता है, तो उसे प्रारंभिक घटना माना जाता है। प्रतिदर्श समष्टि की सभी प्रारंभिक घटनाओं की प्रायिकताओं का योग हमेशा 1 के बराबर होता है।
\nआइए दो सिक्कों को एक साथ उछालने (या एक ही सिक्के को दो बार उछालने) के यादृच्छिक प्रयोग का उपयोग करके इन अवधारणाओं को स्पष्ट करें।
\nजब दो सिक्के उछाले जाते हैं, तो प्रत्येक सिक्के के लिए संभावित परिणाम चित (H) और पट (T) होते हैं। इन संभावनाओं को मिलाकर, प्रयोग की पूरी प्रतिदर्श समष्टि 'S' में चार अलग-अलग परिणाम शामिल होते हैं:\nS = {(H, H), (H, T), (T, H), (T, T)}\nयहाँ, प्रतिदर्श समष्टि में तत्वों की कुल संख्या 4 है।
\nअब, इस प्रतिदर्श समष्टि का प्रत्येक व्यक्तिगत परिणाम एक प्रारंभिक घटना का प्रतिनिधित्व करता है:
1. E1 = {(H, H)} - दोनों सिक्कों पर चित आता है
2. E2 = {(H, T)} - पहले सिक्के पर चित, दूसरे पर पट आता है
3. E3 = {(T, H)} - पहले सिक्के पर पट, दूसरे पर चित आता है
4. E4 = {(T, T)} - दोनों सिक्कों पर पट आता है
\nइन चारों प्रारंभिक घटनाओं में से प्रत्येक की सैद्धांतिक प्रायिकता 1/4 है (निष्पक्ष सिक्के मानकर)। यदि हम उनकी प्रायिकताओं को एक साथ जोड़ते हैं: P(E1) + P(E2) + P(E3) + P(E4) = 1/4 + 1/4 + 1/4 + 1/4 = 4/4 = 1, जो इस मूल नियम को मान्य करता है कि प्रतिदर्श समष्टि में सभी प्रारंभिक घटनाओं की प्रायिकताओं का योग 1 होता है।
उत्तर (Answer): दी गई जानकारी:
- टंकी में नर मछलियों की संख्या = 5
- टंकी में मादा मछलियों की संख्या = 8
\nटंकी में मछलियों की कुल संख्या = नर मछलियों की संख्या + मादा मछलियों की संख्या\nकुल मछलियाँ = 5 + 8 = 13
\nहमें यह प्रायिकता ज्ञात करनी है कि निकाली गई मछली एक नर मछली है।
- अनुकूल परिणामों की संख्या (नर मछलियाँ) = 5
- कुल संभव परिणामों की संख्या (कुल मछलियाँ) = 13
\nप्रायिकता सूत्र का उपयोग करने पर:\nP(नर मछली) = (अनुकूल परिणामों की संख्या) / (कुल संभव परिणामों की संख्या)\nP(नर मछली) = 5 / 13
\nअंतिम उत्तर:\nन निकाली गई मछली के नर होने की प्रायिकता 5/13 है।
उत्तर (Answer): प्रायिकता सिद्धांत में, किसी यादृच्छिक प्रयोग के परिणामों को समसंभावी तब कहा जाता है जब प्रत्येक व्यक्तिगत परिणाम के घटित होने की संभावना या प्रायिकता किसी अन्य परिणाम के बिल्कुल समान होती है। इसका मतलब यह है कि प्रयोग के संचालन के दौरान किसी भी विशिष्ट परिणाम को दूसरों की तुलना में कोई पूर्वाग्रह, प्राथमिकता या असमान भार नहीं दिया जाता है।
\nव्यावहारिक दृष्टिकोण से, परिणामों के समसंभावी होने के लिए, वे भौतिक परिस्थितियाँ जिनके तहत प्रयोग किया जाता है, पूरी तरह से निष्पक्ष और सममित होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, एक मानक, निष्पक्ष सिक्के को उछालते समय, सिक्के के भौतिक गुण (द्रव्यमान वितरण, आकार) यह सुनिश्चित करते हैं कि चित आने की प्रायिकता पट आने की प्रायिकता के समान है। इसी तरह, एक निष्पक्ष, सममित छह तरफ़ा पासा फेंकने से छह समसंभावी परिणाम (1, 2, 3, 4, 5 और 6) मिलते हैं क्योंकि प्रत्येक फलक का क्षेत्रफल और वजन वितरण समान होता है।
\nगणितीय रूप से, यदि किसी यादृच्छिक प्रयोग में 'n' परस्पर अनन्य और संपूर्ण परिणाम हैं, जिन्हें O1, O2, O3, ..., On के रूप में दर्शाया गया है, तो परिणाम समसंभावी होते हैं यदि और केवल यदि प्रत्येक व्यक्तिगत परिणाम के घटित होने की प्रायिकता ठीक 1/n हो। अर्थात्, P(O1) = P(O2) = ... = P(On) = 1/n।
\nइस अवधारणा को समझना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रायिकता की शास्त्रीय परिभाषा, P(E) = (अनुकूल परिणामों की संख्या) / (कुल संभव परिणामों की संख्या), तभी वैध और लागू होती है जब प्रतिदर्श समष्टि में सभी व्यक्तिगत परिणाम समसंभावी हों। यदि परिणाम समसंभावी नहीं हैं - जैसे कि एक भारित या पक्षपाती पासा फेंकना जहाँ एक फलक भारी होता है - तो उपयुक्त गणितीय समायोजन किए बिना इस मानक अनुपात सूत्र को सीधे लागू नहीं किया जा सकता है।
उत्तर (Answer): दी गई जानकारी:
- 50 पैसे के सिक्कों की संख्या = 100
- ₹1 के सिक्कों की संख्या = 50
- ₹2 के सिक्कों की संख्या = 20
- ₹5 के सिक्कों की संख्या = 10
\nगुल्लक में सिक्कों की कुल संख्या = 100 + 50 + 20 + 10 = 180
(i) सिक्का 50 पैसे का होने की प्रायिकता:
- अनुकूल परिणामों की संख्या (50 पैसे के सिक्के) = 100
- कुल संभव परिणामों की संख्या = 180
- P(50p सिक्का) = 100 / 180
- अंश और हर को 20 से विभाजित करके भिन्न को सरल बनाने पर:
- P(50p सिक्का) = 5 / 9
(ii) सिक्का ₹5 का नहीं होने की प्रायिकता:
- विधि 1 (पूरक घटना दृष्टिकोण):
- पहले, सिक्के के ₹5 होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए: P(₹5 सिक्का) = 10 / 180 = 1 / 18
- P(₹5 का सिक्का नहीं है) = 1 - P(₹5 सिक्का)
- P(₹5 का सिक्का नहीं है) = 1 - (1 / 18) = (18 - 1) / 18 = 17 / 18
- विधि 2 (प्रत्यक्ष दृष्टिकोण):
- वे सिक्के जो ₹5 के नहीं हैं उनकी संख्या = कुल सिक्के - ₹5 के सिक्कों की संख्या = 180 - 10 = 170
- P(₹5 का सिक्का नहीं है) = 170 / 180 = 17 / 18
\nअंतिम उत्तर:
(i) 5/9, (ii) 17/18
उत्तर (Answer): प्रायिकता सिद्धांत में, किसी घटना के पूरक (complement) से तात्पर्य प्रतिदर्श समष्टि (sample space) के उन सभी परिणामों से है जो उस घटना के स्वयं हिस्से नहीं हैं। यदि हम किसी घटना को 'E' अक्षर से दर्शाते हैं, तो उसकी पूरक घटना को 'Ē' (जिसे 'E नहीं' पढ़ा जाता है) या 'E'' द्वारा दर्शाया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि घटना E 'पासा फेंकने पर एक सम संख्या प्राप्त करना' है, तो पूरक घटना Ē 'सम संख्या प्राप्त न करना' है, जिसका मुख्य अर्थ एक विषम संख्या (1, 3, या 5) प्राप्त करना है।
\nएक घटना और उसकी पूरक घटना मिलकर एक यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभावित परिणामों को शामिल करती हैं, और वे परस्पर अनन्य (परस्पर अपवर्जित - एक ही समय में नहीं हो सकती हैं) और संपूर्ण होती हैं। इसलिए, किसी घटना E की प्रायिकता और उसकी पूरक घटना Ē की प्रायिकता का योग हमेशा 1 के बराबर होता है।
\nगणितीय रूप से, इस संबंध को इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:\nP(E) + P(Ē) = 1
\nइस मूलभूत नियम से, यदि घटना की अपनी प्रायिकता ज्ञात हो तो हम किसी घटना के पूरक की प्रायिकता आसानी से ज्ञात कर सकते हैं, या इसके विपरीत:\nP(Ē) = 1 - P(E)\nया\nP(E) = 1 - P(Ē)
\nउदाहरण के लिए, यदि कल बारिश होने की प्रायिकता 0.3 है, तो कल बारिश न होने की प्रायिकता 1 - 0.3 = 0.7 होगी। यह सिद्धांत जटिल प्रायिकता गणनाओं को सरल बनाने में बेहद उपयोगी है जहाँ विपरीत परिणाम की प्रायिकता ज्ञात करना प्रत्यक्ष गणना की तुलना में बहुत आसान होता है।
उत्तर (Answer): दी गई जानकारी:
- नीले कंचों की संख्या = 3
- सफेद कंचों की संख्या = 2
- लाल कंचों की संख्या = 4
\nडिब्बे में कुल कंचों की संख्या = 3 + 2 + 4 = 9
\nप्रायिकता का सूत्र: P(E) = (अनुकूल परिणामों की संख्या) / (कुल संभव परिणामों की संख्या)
(i) सफेद कंचा प्राप्त करने की प्रायिकता P(White):
- अनुकूल परिणामों की संख्या (सफेद कंचे) = 2
- कुल परिणाम = 9
- P(White) = 2 / 9
(ii) नीला कंचा प्राप्त करने की प्रायिकता P(Blue):
- अनुकूल परिणामों की संख्या (नीले कंचे) = 3
- कुल परिणाम = 9
- P(Blue) = 3 / 9 = 1 / 3
(iii) लाल कंचा प्राप्त करने की प्रायिकता P(Red):
- अनुकूल परिणामों की संख्या (लाल कंचे) = 4
- कुल परिणाम = 9
- P(Red) = 4 / 9
\nअंतिम उत्तर:
(i) 2/9, (ii) 1/3, (iii) 4/9
उत्तर (Answer): प्रायिकता गणित की एक ऐसी शाखा है जो किसी घटना के घटित होने की संभावना के माप से संबंधित है। मोटे तौर पर, प्रायिकता का अध्ययन दो मुख्य श्रेणियों के अंतर्गत किया जाता है: प्रायोगिक (या thực nghiệm) प्रायिकता और सैद्धांतिक प्रायिकता।
\nप्रायोगिक प्रायिकता पूरी तरह से वास्तविक दुनिया में किसी प्रयोग या बार-बार किए गए प्रेक्षणों के वास्तविक परिणामों पर आधारित होती है। इसकी गणना किसी विशेष घटना के घटित होने की संख्या को कुल किए गए परीक्षणों की संख्या से विभाजित करके की जाती है। उदाहरण के लिए, यदि एक सिक्के को 100 बार उछाला जाता है और उस पर 52 बार चित (heads) आता है, तो चित आने की प्रायोगिक प्रायिकता 52/100 या 0.52 होगी। यह मान पूरी तरह से पिछले परिणामों पर निर्भर करता है और यदि प्रयोग को समान परिस्थितियों में दोहराया जाए तो थोड़ा भिन्न हो सकता है।
\nदूसरी ओर, सैद्धांतिक प्रायिकता किसी प्रयोग को वास्तव में करने से पहले उसके संभावित परिणामों पर आधारित होती है। इसकी गणना इस सूत्र का उपयोग करके की जाती है: किसी घटना P(E) की प्रायिकता = (अनुकूल परिणामों की संख्या) / (कुल संभव परिणामों की संख्या)। उदाहरण के लिए, एक निष्पक्ष सिक्के को उछालते समय, हमें यह जानने के लिए उसे उछालने की आवश्यकता नहीं है कि चित आने की सैद्धांतिक प्रायिकता 1/2 है क्योंकि दो समान रूप से संभावित परिणाम (चित और पट) हैं और केवल एक अनुकूल है।
\nमौलिक अंतर इस तथ्य में निहित है कि प्रायोगिक प्रायिकता वास्तविक भौतिक परीक्षणों और देखे गए डेटा पर निर्भर करती है, जो परीक्षणों के विभिन्न सेटों के साथ बदल सकती है। इसके विपरीत, सैद्धांतिक प्रायिकता आदर्श स्थितियों के बारे में तार्किक तर्क और गणितीय मान्यताओं पर निर्भर करती है, जिससे एक निश्चित मूल्य प्राप्त होता है। हालांकि, बड़ी संख्या के नियम के अनुसार, जैसे-जैसे किसी प्रयोग में परीक्षणों की संख्या काफी बढ़ जाती है, प्रायोगिक प्रायिकता सैद्धांतिक प्रायिकता के बहुत करीब आ जाती है।
उत्तर (Answer): 'E नहीं' की प्रायिकता, जिसे P(not E) या P(E') द्वारा दर्शाया जाता है, प्रायिकता के मौलिक पूरक नियम का उपयोग करके गणना की जाती है, जो यह बताता है कि किसी घटना और उसकी पूरक घटना की प्रायिकता का योग हमेशा 1 के बराबर होता है। इसलिए, P(not E) = 1 - P(E)। दिए गए मान को प्रतिस्थापित करने पर, हमें 1 - 0.05 प्राप्त होता है, जो 0.95 के बराबर है। इसका मतलब है कि घटना के घटित न होने की 95 प्रतिशत संभावना है।
उत्तर (Answer): असंभव घटना की प्रायिकता हमेशा 0 के बराबर होती है। प्रायिकता सिद्धांत में, वे घटनाएं जो किसी भी परिस्थिति में कभी घटित नहीं हो सकतीं, उन्हें असंभव घटनाएं कहा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि हम 1 से 6 तक की संख्याओं वाला एक मानक छह फलकों वाला पासा फेंकते हैं, तो संख्या 7 प्राप्त करना एक असंभव घटना है क्योंकि पासे में केवल 1, 2, 3, 4, 5 और 6 अंक ही होते हैं। इसलिए, 7 प्राप्त करने के अनुकूल परिणामों की संख्या शून्य है, जिससे प्रायिकता शून्य हो जाती है।