अध्याय: सूक्ष्मजीव - मित्र एवं शत्रु (Microorganisms: Friend and Foe)
कक्षा: 8 (विज्ञान - MP Board)
त्वरित पुनरीक्षण नोट्स (Quick Revision Notes)
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1. सूक्ष्मजीव (Microorganisms) की परिभाषा
वे जीव जिन्हें हम बिना किसी यंत्र (सूक्ष्मदर्शी) की सहायता से केवल आँखों से नहीं देख सकते, उन्हें सूक्ष्मजीव कहते हैं।
- उदाहरण: बैक्टीरिया (जीवाणु), कवक (फंगस), प्रोटोजोआ, और कुछ शैवाल।
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2. सूक्ष्मजीवों के मुख्य वर्ग
सूक्ष्मजीवों को मुख्य रूप से चार प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है:
1. जीवाणु (Bacteria): ये एककोशिकीय या बहुकोशिकीय हो सकते हैं। (जैसे- लैक्टोबैसिलस, राइजोबियम)।
2. कवक (Fungi): ये पौधे जैसे होते हैं जिनमें पर्णहरित नहीं होता। (जैसे- यीस्ट, मशरूम, ब्रेड मोल्ड)।
3. प्रोटोजोआ (Protozoa): ये एककोशिकीय जंतु होते हैं। (जैसे- अमीबा, पैरामीशियम, प्लाज्मोडियम)।
4. शैवाल (Algae): ये क्लोरोफिल युक्त स्वपोषी जीव होते हैं। (जैसे- स्पाइरोगाइरा, क्लैमाइडोमोनास)।
- विशेष नोट: विषाणु (Viruses) भी सूक्ष्मजीव होते हैं, लेकिन वे अन्य सूक्ष्मजीवों से भिन्न होते हैं। वे केवल मेजबान (Host) शरीर के अंदर ही गुणन (reproduction) करते हैं।
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3. सूक्ष्मजीवों का हमारे जीवन में महत्व (मित्रवत सूक्ष्मजीव)
- दही और ब्रेड का बनना:
- लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) नामक जीवाणु दूध को दही में बदल देता है।
- यीस्ट (Yeast) तीव्र गति से जनन करता है और श्वसन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस छोड़ता है, जिससे ब्रेड और इडली फूल जाती है।
- व्यापारीक उपयोग (किण्वन/Fermentation):
- चीनी के अल्कोहल में परिवर्तन की प्रक्रिया को किण्वन (Fermentation) कहते हैं। इसकी खोज लुई पाश्चर ने 1857 में की थी।
- औषधीय उपयोग (प्रतिजैविक/Antibiotics):
- बीमार-रोगाणुओं को मारने वाले स्रोतों को प्रतिजैविक कहते हैं।
- उदाहरण: पेनिसिलिन (पहला प्रतिजैविक, खोजकर्ता- अलेक्जेंडर फ्लेमिंग), स्ट्रेप्टोमाइसिन, एरिथ्रोमाइसिन।
- टीका (Vaccine):
- जब मृत या कमजोर रोगाणु हमारे शरीर में प्रवेश कराए जाते हैं, तो शरीर उनसे लड़ने के लिए एंटीबॉडी (Antibodies) उत्पन्न करता है। इसे टीकाकरण कहते हैं। (जैसे- चेचक, पोलियो, हेपेटाइटिस के टीके)।
- मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि:
- कुछ बैक्टीरिया और नीले-हरे शैवाल (जैसे- राइजोबियम) वायुमंडल से नाइट्रोजन का स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) करके मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं।
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4. हानिकारक सूक्ष्मजीव (शत्रु सूक्ष्मजीव)
- रोगजनक (Pathogens): बीमारियाँ पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों को रोगजनक कहते हैं।
- संचरणीय रोग (Communicable Diseases): जो रोग संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में वायु, जल, भोजन या संपर्क द्वारा फैलते हैं (जैसे- हैजा, सर्दी-जुकाम, चिकन पॉक्स, क्षय रोग/Tuberculosis)।
#### कुछ सामान्य मानव रोग (सारणी):
1. क्षय रोग (Tuberculosis): जीवाणु द्वारा (वायु द्वारा)
2. खसरा (Measles): विषाणु द्वारा (वायु द्वारा)
3. चिकन पॉक्स: विषाणु द्वारा (वायु/संपर्क द्वारा)
4. पोलियो: विषाणु द्वारा (जल/वायु द्वारा)
5. हैजा (Cholera): जीवाणु द्वारा (जल/भोजन द्वारा)
6. टाइफाइड: जीवाणु द्वारा (जल द्वारा)
7. मलेरिया: प्रोटोजोआ द्वारा (वाहक- मादा एनाफिलिस मच्छर)
8. डेंगी (Dengue): विषाणु द्वारा (वाहक- मादा एडीज मच्छर)
#### पौधों में होने वाले कुछ रोग:
1. नींबू कैंकर: जीवाणु द्वारा (वायु द्वारा फैलता है)
2. गेहूं की रस्ट (Rust): कवक द्वारा (वायु/बीज द्वारा फैलता है)
3. भिंडी की पीत (Yellow vein mosaic): विषाणु द्वारा (कीट द्वारा फैलता है)
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5. खाद्य विषक्तिकरण (Food Poisoning)
- सूक्ष्मजीवों द्वारा दूषित किया गया भोजन खाने से खाद्य विषक्तिकरण हो सकता है। इससे उल्टी, दस्त या गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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6. खाद्य परीक्षण के उपाय (Food Preservation Methods)
भोजन को लंबे समय तक खराब होने से बचाने के निम्नलिखित तरीके हैं:
1. रासायनिक उपाय: नमक और खाद्य तेल (परिरक्षक/Preservatives) का उपयोग करना। (जैसे- सोडियम बेंजोएट, सोडियम मेटाबिसल्फाइट)।
2. नमक द्वारा परीक्षण: मांस, मछली, आम, आंवला आदि को सुरक्षित रखने के लिए।
3. चीनी द्वारा परीक्षण: जैम, जैली और मुरब्बा में चीनी का उपयोग नमी कम करता है।
4. तेल एवं सिरके द्वारा परीक्षण: अचार को खराब होने से बचाने के लिए।
5. गर्मी व शीतलन (Pasteurization):
- दूध को सुरक्षित रखने के लिए उसे 70°C तापमान पर 15 से 30 सेकंड के लिए गर्म करते हैं और फिर अचानक ठंडा कर देते हैं। इसे पाश्चुरीकरण कहते हैं।
6. भंडारण एवं पैकिंग: सूखी मेवों और सब्जियों को वायु-रोधी डिब्बों में बंद रखना।
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7. नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)
- हमारे वायुमंडल में 78% नाइट्रोजन गैस पाई जाती है।
- राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को नाइट्रेट्स में बदलकर मिट्टी में स्थिर करते हैं।
- पौधे इसे मिट्टी से अवशोषित करते हैं और जंतु पौधों को खाकर नाइट्रोजन प्राप्त करते हैं।
- अंत में, कुछ विशेष बैक्टीरिया (जैसे नाइट्रोसोमोनास/नाइट्रोबैक्टर) नाइट्रोजन यौगिकों को पुनः नाइट्रोजन गैस में बदलकर वायुमंडल में वापस भेज देते हैं। इसे नाइट्रोजन चक्र कहते हैं।