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कक्षा: 8वीं
विषय: विज्ञान
अध्याय: कोयلا और पेट्रोलियम (Coal and Petroleum)
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### परिचय (Introduction)
वे संसाधन जो प्रकृति में असीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और मानवीय क्रियाकलापों से समाप्त होने वाले नहीं हैं, उन्हें प्राकृतिक संसाधन कहते हैं (जैसे- वायु, सूर्य का प्रकाश)। इसके विपरीत, जो संसाधन मानवीय गतिविधियों से समाप्त हो सकते हैं, उन्हें समाप्य प्राकृतिक संसाधन कहते हैं (जैसे- कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस)।
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### 1. जीवाश्म ईंधनों (Fossil Fuels)
- परिभाषा: मृत जीवों के अवशेषों (जीवाश्मों) से लाखों वर्षों में बनने वाले ईंधनों को जीवाश्म ईंधनों कहा जाता है।
- मुख्य उदाहरण: कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस।
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### 2. कोयला (Coal)
- स्वरूप: यह पत्थर जैसा कठोर और काले रंग का होता है।
- उपयोग:
- खाना पकाने में उपयोग होने वाले ईंधन के रूप में।
- रेलवे इंजनों को चलाने के लिए भाप बनाने में।
- तापीय विद्युत संयंत्रों में विद्युत उत्पन्न करने में।
- उद्योगों में ईंधन के रूप में।
- कोयले के प्रक्रमण से प्राप्त उत्पाद: जब कोयले को उद्योग में प्रक्रमित किया जाता है, तब कुछ उपयोगी उत्पाद प्राप्त होते हैं:
1. कोक (Coke): यह एक कठोर, ष्संरंध्र और काला पदार्थ है। यह कार्बन का लगभग शुद्ध रूप है। इसका उपयोग इस्पात के औद्योगिक निर्माण और धातुओं के निष्कर्षण में होता है।
2. कोयला तार (Coal Tar): यह एक गाढ़ा, अप्रिय गंध वाला काला द्रव होता है। इसका उपयोग संश्लेषित रंगों, औषधियों, विस्फोटकों, सुगंधों, प्लास्टिक, पेंट्स और फोटोग्राफिक सामग्री के निर्माण में होता है। (नोट: पक्के सड़कों के निर्माण में कोलतार के स्थान पर आजकल पेट्रोलियम उत्पाद 'बिटुमेन' का प्रयोग किया जाता है)।
3. कोयला गैस (Coal Gas): कोयले के प्रकमीकरण से कोक बनाते समय कोयला गैस प्राप्त होती है। इसका उपयोग उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जाता है।
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### 3. पेट्रोलियम (Petroleum)
- नाम की उत्पत्ति: 'पेट्रेल' (Petra - चट्टान) और 'ोलियम' (Oleum - तेल) यानी चट्टानों के नीचे से निकलने वाला तेल।
- निर्माण: समुद्र में रहने वाले जीवों के अवशेषों से लाखों वर्षों में उच्च दाब और ताप के कारण पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का निर्माण हुआ।
- परिष्करण (Refining): पेट्रोलियम विभिन्न घटकों जैसे पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल (केरोसिन), पैराफिन मोम, स्नेहक तेल आदि का मिश्रण है। पेट्रोलियम के इन विभिन्न घटकों को पृथक् करने का प्रक्रम परिष्करण कहलाता है। यह कार्य पेट्रोलियम परिष्करण शाला (रिफाइनरी) में होता है।
- पेट्रोलियम के प्रमुख घटक और उनके उपयोग:
- एल.पी.जी. (LPG): घरों और उद्योगों में ईंधन के रूप में।
- पेट्रोल: मोटर वाहनों और विमानों के ईंधन के रूप में, शुष्क धुलाई के लिए विलायक के रूप में।
- केरोसिन (मिट्टी का तेल): स्टोव, लैंप और जेट विमानों के ईंधन में।
- डीजल: भारी मोटर वाहनों और विद्युत जनरेटरों के ईंधन के रूप में।
- स्नेहक तेल: स्नेहक (Lubrication) के लिए।
- पैराफिन मोम: मरहम, मोमबत्ती, वैसलीन आदि के निर्माण में।
- बिटुमेन: पेंट्स और सड़क निर्माण में।
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### 4. प्राकृतिक गैस (Natural Gas)
- महत्व: प्राकृतिक गैस एक बहुत महत्वपूर्ण जीवाश्म ईंधन है क्योंकि इसका परिवहन पाइपलाइनों द्वारा आसानी से हो जाता है।
- संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG): प्राकृतिक गैस को उच्च दाब पर संपीड़ित करके सी.एन.जी. (Compressed Natural Gas) के रूप में संग्रहित किया जाता है।
- उपयोग:
- ऊर्जा और परिवहन के लिए (वाहन में ईंधन के रूप में क्योंकि यह कम प्रदूषण फैलाती है)।
- रसायनिक और उर्वरकों के निर्माण में प्रारंभिक पदार्थ के रूप में।
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### 5. संरक्षण और ईंधन की बचत (Conservation of Fossil Fuels)
- जीवाश्म ईंधन सीमित मात्रा में हैं और इनका जलना वायु प्रदूषण (ग्लोबल वार्मिंग) का कारण बनता है। इसलिए इनका विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।
- PCRA (पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ) द्वारा ईंधन बचाने के लिए निम्नलिखित सलाह दी जाती है:
1. गाड़ी चलाते समय गति को सामान्य और एकसमान रखें।
2. ट्रैफिक लाइटों पर या जहाँ प्रतीक्षा करनी हो, गाड़ी का इंजन बंद कर दें।
3. टायरों में हवा का दाब सही रखें।
4. गाड़ी का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करें।