कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान: गरीबी - एक चुनौती (Poverty as a Challenge) - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स
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1. गरीबी का अर्थ और परिभाषा (Meaning and Definition of Poverty)
- गरीबी: यह वह स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को अपने जीवन की बुनियादी आवश्यकताएं (रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य) भी पूरी करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं मिल पाते हैं।
- गरीबी के सामान्य संकेतक: भूख, आश्रय का अभाव, कुपोषण, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच न होना, स्वच्छ पानी और बिजली की कमी, तथा अवसरों की कमी।
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2. सामाजिक वैज्ञानिक की नजर में गरीबी (Poverty from the Eyes of Social Scientists)
- सामाजिक वैज्ञानिकों के अनुसार गरीबी का अर्थ केवल आय और उपभोग के स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निम्नलिखित आयाम भी शामिल हैं:
- निरक्षरता स्तर
- कुपोषण के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
- रोजगार के अवसरों की कमी
- सुरक्षा और आत्म-सम्मान की कमी
- सामाजिक बहिष्करण (Social Exclusion): इसके तहत गरीबों को समाज के अन्य लोगों की तरह बेहतर माहौल और सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है।
- असुरक्षा (Vulnerability): यह वह माप है जो कुछ समुदायों (जैसे पिछड़ी जातियां, विधवाएं, या शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति) को प्राकृतिक आपदाओं या आर्थिक संकट के समय अधिक प्रभावित होने की संभावना को बताती है।
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3. गरीबी रेखा (Poverty Line)
- यह एक ऐसा मानक है जिसका उपयोग किसी देश में यह तय करने के लिए किया जाता है कि कौन गरीब है और कौन नहीं।
- भारत में गरीबी रेखा का निर्धारण:
- भारत में गरीबी रेखा तय करते समय न्यूनतम कैलोरी आवश्यकता और उपभोग व्यय (मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग - MPCE) को ध्यान में रखा जाता है।
- ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2400 कैलोरी निर्धारित की गई है (क्योंकि ग्रामीण लोग शारीरिक श्रम अधिक करते हैं)।
- शहरी क्षेत्र: शहरी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2100 कैलोरी निर्धारित की गई है।
- मौद्रिक मूल्य (नया डेटा): योजना आयोग (अब नीति आयोग) द्वारा समय-समय पर मूल्य सूचकांक के आधार पर इसे बदला जाता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग लगभग 816 रुपये और शहरी क्षेत्रों के लिए लगभग 1000 रुपये तय किया गया है (विभिन्न समितियों के अनुसार यह बदलता रहता है)।
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4. भारत में निर्धनता के रुझान (Trends of Poverty in India)
- भारत में 1973 में गरीबी का अनुपात लगभग 45% था, जो घटकर 2011-12 में लगभग 22% (लगभग 27 करोड़ लोग) पर आ गया।
- यदि यही प्रवृत्ति रही, तो आने वाले वर्षों में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में और अधिक गिरावट आएगी।
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5. गरीबी के प्रमुख कारण (Main Causes of Poverty in India)
1. औपनिवेशिक शासन: ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन के दौरान आर्थिक नीतियों ने पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योगों को नष्ट कर दिया और विकास को धीमा कर दिया।
2. जनसंख्या वृद्धि: तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या के कारण प्रति व्यक्ति आय और संसाधनों की उपलब्धता कम हो गई है।
3. कृषि पर निर्भरता: कृषि का मानसून पर निर्भर होना और आधुनिक तकनीकों का आभाव।
4. आय में असमानता: धन और आय का असमान वितरण।
5. बेरोजगारी और अल्प-रोजगार: रोजगार के अवसरों की कमी के कारण लोगों के पास आय का साधन नहीं होना।
6. सामाजिक और सांस्कृतिक कारक: रूढ़िवादी परंपराएं, शिक्षा की कमी और सामाजिक कुप्रथाएं (जैसे अत्यधिक खर्च)।
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6. सरकार द्वारा गरीबी निवारण के उपाय / कार्यक्रम (Poverty Alleviation Programmes)
भारतीय अर्थव्यवस्था में गरीबी हटाने और रोजगार सृजन के लिए सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं:
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA - मनरेगा, 2005):
- देश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को वर्ष में कम से कम 100 दिन के सुनिश्चित रोजगार की गारंटी देता है।
- इसमें एक तिहाई (33%) पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
- प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY, 1993):
- इसका उद्देश्य ग्रामीण और छोटे शहरों के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है।
- ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (REGP, 1995):
- इसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है।
- स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY, 1999):
- गरीबों को स्व-सहायता समूह (SHGs) में संगठित कर बैंक ऋण और सब्सिडी के माध्यम से गरीबी रेखा से ऊपर लाना।
- प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना (PMGY, 2000):
- प्राथमिक स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, ग्रामीण shelter (आवास), ग्रामीण पेयजल और विद्युतीकरण जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए राज्यों को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता देना।
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY):
- यह योजना समाज के सबसे गरीब से गरीब लोगों के लिए चलाई गई है, जिसमें अत्यधिक रियायी दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है।
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7. भविष्य की चुनौतियाँ (Challenges Ahead)
भले ही भारत में गरीबी कम हुई है, लेकिन लक्ष्य अभी दूर हैं। मुख्य चुनौतियाँ हैं:
- सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना।
- लिंग समानता (Gender Equality) और महिलाओं का सशक्तिकरण।
- रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना।
- बढ़ती हुई आर्थिक असमानता को पाटना।
- 'सबका साथ, सबका विकास' के माध्यम से समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना।
उत्तर (Answer): उच्च आर्थिक विकास के साथ-साथ, गरीबी उन्मूलन का उद्देश्य मानव विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और संवेदनशील समूहों को सुरक्षा प्रदान करना है।
उत्तर (Answer): PMGY राज्यों को प्राथमिक स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, ग्रामीण आशय, ग्रामीण पेयजल और ग्रामीण विद्युतीकरण जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता प्रदान करती है।