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यह कहानी मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित है। इसमें दो बैलों, हीरा और मोती, के माध्यम से सच्चे मित्र, स्वतंत्रता के मूल्य और पशु-प्रेम को दर्शाया गया है। यह कहानी हमें सिखाती है कि स्वतंत्रता सहजता से नहीं मिलती, उसके लिए संघर्ष करना पड़ता है।
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1. झूरी का प्रेम: झूरी अपने दोनों बैलों (हीरा और मोती) को बहुत प्यार करता था। वे दोनों भी झूरी से अगाध प्रेम करते थे।
2. गया के घर जाना: झूरी की पत्नी के भाई गया को झूरी ने बैल कुछ दिनों के लिए दिए। गया ने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया और सूखा भूसा खाने को दिया।
3. पहली बार भागना: हीरा और मोती गया के घर से रस्सी तुड़ाकर रात को ही झूरी के पास वापस आ गए।
4. दूसरी बार गया के घर जाना और प्रताड़ना: गया दोबारा उन्हें ले गया। इस बार उसने उनके साथ बहुत मारपीट की और नाक पर डंडे बरसाए।
5. सांड का सामना: गया के घर से छूटने के बाद दोनों बैलों ने एक रास्ते में आए भयानक सांड का मिलकर सामना किया और उसे परास्त किया।
6. नीलाम होना और कांजीहौस: एक मटर के खेत में पकड़े जाने पर उन्हें कांजीहौस (कैदखाने) में बंद कर दिया गया। वहाँ कई अन्य जानवर भी भूखे-प्यासे बंद थे।
7. दीवार तोड़ना: मोती ने अपनी जिद और ताकत से कांजीहौस की कच्ची दीवार गिरा दी, जिससे सभी कमजोर जानवर भाग निकले, लेकिन हीरा और मोती पकड़े गए।
8. कसाई के हाथ बिकना: कांजीहौस के मालिक ने एक दड़ियल कसाई को दोनों बैल बेच दिए।
9. अंतिम संघर्ष और विजय: कसाई उन्हें लेकर जा रहा था, तब वे रास्ते में बागी होकर भागे और सीधे अपने मालिक झूरी के घर पहुँचे। झूरी ने उन्हें गले लगा लिया।
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