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ब्रह्मांड में किन्हीं दो पिंडों के बीच लगने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
F = G (m1 m2) / r^2G = 6.67 * 10^-11 N m^2 kg^-2G का विमीय सूत्र: [M^-1 L^3 T^-2]---
पृथ्वी के आकर्षण बल के कारण वस्तु में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं।
g = (G * M) / R^2M = पृथ्वी का द्रव्यमान, R = पृथ्वी की त्रिज्या।g ≈ 9.8 m/s^2 (या 9.8 N/kg)ρ = (3 g) / (4 π G R)---
#### (i) पृथ्वी की सतह से ऊंचाई (h) पर:
g' = g * [R / (R + h)]^2h << R (बहुत कम ऊंचाई): g' = g * (1 - (2h / R))g का मान घटता है।#### (ii) पृथ्वी की सतह से गहराई (d) पर:
g' = g * (1 - (d / R))d = R): g = 0 (केंद्र पर वस्तु भारहीन होती है)।#### (iii) पृथ्वी के घूर्णन तथा अक्षांश (λ) के कारण:
g' = g - ω^2 R cos^2(λ)ω = पृथ्वी का कोणीय वेग।g' का मान न्यूनतम होता है (g' = g - ω^2 * R)g' का मान अधिकतम होता है (g' = g)---
I = F / m = (G * M) / r^2N/kg या m/s^2V = - (G * M) / rJ/kg (यह एक अदिश राशि है)U = - (G M m) / rh ऊंचाई तक उठाने में स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि:ΔU = (m g h) / (1 + h / R)h << R हो, तो ΔU ≈ m g h---
वह न्यूनतम वेग जिससे किसी पिंड को फेंकने पर वह पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाता है और वापस नहीं लौटता।
v_e = √(2 G M / R) = √(2 g R)v_e ≈ 11.2 km/s---
#### (i) कक्षीय चाल (Orbital Velocity - v_o):
v_o = √(G * M / (R + h))h ≈ 0): v_o = √(g * R) ≈ 7.92 km/sve = √2 * vo#### (ii) परिक्रमण काल (Time Period - T):
T = 2π √((R + h)^3 / (G M))T = 2π * √(R / g) ≈ 84.6 मिनट#### (iii) उपग्रह की ऊर्जा:
K = (G M m) / (2 * r)U = - (G M m) / rE = K + U = - (G M m) / (2 * r)E_b = - E = (G M m) / (2 * r)E = - K = U / 2---
1. प्रथम नियम (कक्षाओं का नियम): सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं तथा सूर्य कक्षा के किसी एक फोकस पर स्थित होता है।
2. द्वितीय नियम (क्षेत्रफल का नियम): ग्रह को सूर्य से मिलाने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल तय करती है (क्षेत्रीय चाल नियत रहती है)।
dA / dt = L / (2 * m) = नियतांक (यह नियम कोणीय संवेग संरक्षण पर आधारित है)।3. तृतीय नियम (परिक्रमण काल का नियम): ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग (T^2), उसकी दीर्घवृत्ताकार कक्षा के अर्ध-दीर्घ अक्ष (a) के घन के समानुपाती होता है।
T^2 ∝ a^3 या T^2 / a^3 = नियतांक---
36,000 km (या 6.6 * R)