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वस्तु के एकांक क्षेत्रफल पर कार्य करने वाले आंतरिक पुनर्नयन बल (Restoring Force) को प्रतिबल कहते हैं।
$$\text{प्रतिबल} = \frac{\text{बल (F)}}{\text{क्षेत्रफल (A)}}$$
#### प्रतिबल के प्रकार:
1. अनुदैर्ध्य प्रतिबल (Longitudinal Stress): जब बल लंबाई के अनुदिश कार्य करता है।
2. आयतन / अभिलम्ब प्रतिबल (Volumetric / Normal Stress): जब बल सतह के लंबवत समान रूप से लगता है (आयतन में परिवर्तन)।
3. अपरूपण / कर्तन प्रतिबल (Shearing Stress): जब बल सतह के स्पर्शरेखीय (Tangential) लगता है (आकृति में परिवर्तन)।
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विमानों में होने वाले आपेक्षिक परिवर्तन को विकृति कहते हैं। यह एक विमाहीन और मात्रकहीन राशि है।
$$\text{विकृति} = \frac{\text{बीमा में परिवर्तन}}{\text{प्रारंभिक बीमा}}$$
#### विकृति के प्रकार:
1. अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal Strain):
$$\text{विकृति} = \frac{\Delta L}{L}$$
2. आयतन विकृति (Volumetric Strain):
$$\text{विकृति} = \frac{\Delta V}{V}$$
3. अपरूपण विकृति (Shear Strain):
$$\theta = \frac{\Delta x}{L}$$
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प्रत्यास्थता की सीमा के अंदर, प्रतिबल उसमें उत्पन्न विकृति के समानुपाती होता है।
$$\text{प्रतिबल} \propto \text{विकृति}$$
$$\frac{\text{प्रतिबल}}{\text{विकृति}} = E \quad (\text{प्रत्यास्थता गुणांक / Modulus of Elasticity})$$
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#### A. यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young's Modulus - $Y$)
केवल ठोसों के लिए लागू (लंबाई में परिवर्तन)।
$$Y = \frac{\text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} = \frac{F / A}{\Delta L / L} = \frac{F \cdot L}{A \cdot \Delta L}$$
यदि तार की त्रिज्या $r$ हो और $M$ द्रव्यमान लटकाया जाए:
$$Y = \frac{M \cdot g \cdot L}{\pi r^2 \cdot \Delta L}$$
#### B. आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus - $B$ या $K$)
ठोस, द्रव और गैस तीनों के लिए लागू।
$$B = -\frac{\text{आयतन प्रतिबल}}{\text{आयतन विकृति}} = -\frac{\Delta P}{\Delta V / V} = -\frac{V \cdot \Delta P}{\Delta V}$$
(ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि दाब बढ़ाने पर आयतन घटता है।)
$$k = \frac{1}{B} = -\frac{\Delta V}{V \cdot \Delta P}$$
#### C. दृढ़ता गुणांक / अपरूपण गुणांक (Shear Modulus - $\eta$)
केवल ठोसों के लिए लागू (आकृति में परिवर्तन)।
$$\eta = \frac{\text{अपरूपण प्रतिबल}}{\text{अपरूपण विकृति}} = \frac{F / A}{\theta} = \frac{F}{A \cdot \theta}$$
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जब किसी तार को खींचा जाता है, तो उसकी लंबाई बढ़ती है लेकिन व्यास घटता है।
$$\text{पाश्विक विकृति (Lateral Strain)} = -\frac{\Delta d}{d}$$
$$\text{अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal Strain)} = \frac{\Delta L}{L}$$
$$\sigma = \frac{\text{पाश्विक विकृति}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} = -\frac{\Delta d / d}{\Delta L / L}$$
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> विशेष नोट:
> * यदि D और E पास-पास हों $\rightarrow$ भंगुर पदार्थ (Brittle) (जैसे: कांच)।
> * यदि D और E दूर-दूर हों $\rightarrow$ तन्य/तपनीय पदार्थ (Ductile) (जैसे: तांबा, लोहा)।
> * रबर और धमनी के ऊतक $\rightarrow$ प्रत्यास्थ बहुलक (Elastomers) (इनके लिए हुक का नियम लागू नहीं होता)।
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किसी तार को खींचने में किया गया कार्य उसमें स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है।
$$U = \frac{1}{2} \times \text{बल} \times \text{लंबाई में वृद्धि} = \frac{1}{2} F \cdot \Delta L$$
$$u = \frac{U}{\text{आयतन}} = \frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल} \times \text{विकृति}$$
$$u = \frac{1}{2} \cdot Y \cdot (\text{विकृति})^2$$
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यदि किसी छड़ के दोनों सिरों को दृढ़ आधारों से बाँधकर उसका ताप बढ़ाया जाए:
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1. इस्पात (Steel) रबर की तुलना में अधिक प्रत्यास्थ होता है: क्योंकि समान विकृति उत्पन्न करने के लिए इस्पात में रबर की तुलना में अधिक बल लगाना पड़ता है ($Y{\text{steel}} > Y{\text{rubber}}$)।
2. पुलों का निर्माण: पुलों के गर्डर 'I' आकार के बनाए जाते हैं ताकि कम भार में अधिक सामर्थ्य (नमन प्रतिबल से सुरक्षा) मिले।
3. पृथ्वी पर किसी पर्वत की अधिकतम ऊंचाई: लगभग $10 \text{ km}$ हो सकती है ($h \approx \frac{S}{\rho g}$, जहाँ $S$ चट्टान का भंजन प्रतिबल है)।
4. खोखला बेलन (Hollow Cylinder): समान द्रव्यमान और लंबाई के ठोस बेलन की तुलना में ऐंठन के लिए अधिक मजबूत होता है।