#### अध्याय: कार्बनिक रसायन - कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें (Organic Chemistry - Some Basic Principles and Techniques)
#### त्वरित पुनरीक्षण नोट्स (Quick Revision Notes)
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1. अचक्रीय या विवृत श्रृंखला यौगिक (Acyclic or Open Chain Compounds): इन्हें ऐलिफैटिक यौगिक भी कहते हैं। जैसे: ब्यूटेन (CH3-CH2-CH2-CH3)।
2. चक्रीय या संवृत श्रृंखला यौगिक (Cyclic or Closed Chain Compounds):
4n + 2 पाई इलेक्ट्रॉन) का पालन करते हैं। जैसे: बेंजीन (C6H6)।---
किसी भी कार्बनिक यौਗिक के IUPAC नाम में निम्नलिखित भाग होते हैं:
$$\text{पूर्णांग (Prefix)} + \text{मूल शब्द (Word Root)} + \text{प्राथमिक लग्न (Primary Suffix)} + \text{द्वित्तीयक लग्न (Secondary Suffix)}$$
ane, द्विबंध = ene, त्रिबंध = yne).-OH के लिए ol, -COOH के लिए oic acid).---
1. समांश विदलन (Homolytic Cleavage): जब सहसंयोजक बंध इस प्रकार टूटे कि प्रत्येक परमाणु को एक-एक इलेक्ट्रॉन मिले। इससे मुक्त मूलक (Free Radicals) बनते हैं।
$$\text{A-B} \rightarrow \text{A} \cdot + \text{B} \cdot$$
2. विषमांश विदलन (Heterolytic Cleavage): जब बंध इस प्रकार टूटे कि दोनों इलेक्ट्रॉन एक ही परमाणु पर चले जाएं। इससे आयन बनते हैं:
+). (स्थायित्व: $3^\circ > 2^\circ > 1^\circ$)-). (स्थायित्व: $1^\circ > 2^\circ > 3^\circ$)---
E^+ से दर्शाते हैं। (उदा: H^+, NO2^+, BF3)Nu^- से दर्शाते हैं। (उदा: OH^-, Cl^-, NH_3)---
1. प्रेरणिक प्रभाव (Inductive Effect - I Effect):
\sigma) इलेक्ट्रॉनों का अधिक विद्युत् ऋणात्मक परमाणु की ओर विस्थापन।-I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन खींचने वाले): -NO_2 > -CN > -F > -Cl > -Br > -I > -OH+I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन देने वाले): -C(CH3)3 > -CH(CH3)2 > -CH2-CH3 > -CH_32. अनुनाद प्रभाव या मेसोमेरिक प्रभाव (Resonance or Mesomeric Effect - R/M Effect):
\pi) इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन।+R प्रभाव: इलेक्ट्रॉन दाता समूह (उदा: -OH, -OR, -NH_2)-R प्रभाव: इलेक्ट्रॉन ग्राही समूह (उदा: -CHO, -COOH, -NO_2)3. अतिसंयुग्मन (Hyperconjugation):
C-H बंध के \sigma इलेक्ट्रॉनों और असंतृप्त प्रणाली के \pi इलेक्ट्रॉनों (या p-कक्षक) के बीच का अंतःक्रिया है।\alpha-H की संख्या जितनी अधिक होगी, स्थायित्व उतना ही अधिक होगा)।4. इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव (Electromeric Effect - E Effect):
\pi बंध) वाले यौगिकों में होता है।---
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CuO के साथ गर्म करने पर CO2 (लाइम वाटर को दूधिया करती है) और H2O (निर्जल CuSO_4 को नीला करती है) बनाते हैं।---
1. ड्यूमा विधि (Dumas Method):
$$\% \text{ N} = \frac{28 \times V \times P \times 100}{22400 \times T \times \text{यौगिक का द्रव्यमान}}$$
2. जेडाल विधि (Kjeldahl's Method):
$$\% \text{ N} = \frac{1.4 \times M \times V}{\text{यौगिक का द्रव्यमान}}$$
(नोट: यह विधि पिरीडिन, नाइट्रो और एजो यौगिकों के लिए उपयुक्त नहीं है)
$$\% \text{ Halogen} = \frac{\text{Atomic wt. of Halogen } \times \text{wt. of AgX } \times 100}{\text{Mol. wt. of AgX } \times \text{wt. of compound}}$$
$$\% \text{ S} = \frac{32 \times \text{wt. of BaSO}_4 \times 100}{233 \times \text{wt. of compound}}$$
$$\% \text{ P} = \frac{31 \times \text{wt. of Mg}2\text{P}2\text{O}_7 \times 100}{222 \times \text{wt. of compound}}$$