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कक्षा: 11वीं जीव विज्ञान (Biology)
अध्याय: पुष्पी पादपों की आकारिकी (Morphology of Flowering Plants)
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1. परिचय (Introduction)
- पुष्पीय पौधों (Angiosperms) में पौधों के आकार और रूप की विविधता दिखाई देती है। इसमें मुख्य रूप से दो भाग होते हैं:
1. मूल तंत्र (Root System): भूमिगत भाग।
2. प्ररोह तंत्र (Shoot System): वायवीय (जमीन के ऊपर का) भाग।
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2. जड़ या मूल (The Root)
- प्रमुख कार्य: पानी और खनिजों का अवशोषण, संचलन, पौधे को स्थिरता प्रदान करना और पादप हार्मोन्स का संश्लेषण।
- मूल के प्रकार:
1. मुلاंकुर तंत्र (Tap Root System): द्विबीजपत्री पौधों में पाया जाता है। इसमें एक प्राथमिक जड़ होती है जिससे पार्श्व जड़ें (द्वितीयक और तृतीयक) निकलती हैं (उदाहरण: सरसों)।
2. अपस्थानिक मूल तंत्र (Adventitious Root System): इसमें मूलांकुर के अलावा पौधे के अन्य किसी भाग से जड़ें निकलती हैं (उदाहरण: घास, बरगद)।
3. झकड़ा मूल तंत्र (Fibrous Root System): एकबीजपत्री पौधों में प्राथमिक जड़ अल्पकालिक होती है और तने के आधार से बहुत सी जड़ें निकलती हैं (उदाहरण: गेहूं)।
- मूल के क्षेत्र (Regions of Root):
1. मूल गोप (Root Cap): जड़ के शीर्ष पर सुरक्षात्मक टोपी।
2. विभज्योतक क्षेत्र (Region of Meristematic Activity): कोशिका विभाजन का क्षेत्र।
3. दीर्घीकरण क्षेत्र (Region of Elongation): कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि।
4. परिपक्वन क्षेत्र (Region of Maturation): मूल रोम (Root Hairs) पाए जाते हैं जो जल अवशोषण करते हैं।
- मूल के रूपांतरण (Modifications of Root):
- भोजन संचयन के लिए: फुंसीनुमा (Fusiform - मूली), नेपाविम (Napiform - शलजम), कंदमूल (Tuberous - शकरकंद)।
- सहारे के लिए: स्तंभ मूल (Prop roots - बरगद), अवस्तंभ मूल (Stilt roots - मक्का, गन्ना)।
- श्वसन के लिए: न्युमेटोफोर्स (Pneumatophores - राइजोफोरा/मैंग्रोव पौधे)।
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3. तना (The Stem)
- विशेषताएं: यह प्ररोह तंत्र का आरोही भाग है जिस पर पत्तियां, फूल और फल होते हैं। यह प्ररोह पर पर्व (Nodes) और पर्वसंधियों (Internodes) में बंटा होता है।
- तने के रूपांतरण (Modifications of Stem):
- भोजन संचयन के लिए: कंद (Tuber - आलू), प्रकंद (Rhizome - अदरक), घनकंद (Corm - अरबी), शल्ककंद (Bulb - प्याज)।
- सुरक्षा के लिए: कांटे (Thorns - नींबू, बोगनवेलिया)।
- कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): उपरिभूस्तारी (Runner - घास), भूस्तारिका (Offset - जलकुंभी), अंतःभूस्तारी (Sucker - पुदीना)।
- प्रकाशसंश्लेषण के लिए: पर्णस्तंभ (Phylloclade - नागफनी/Opuntia)।
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4. पत्ती (The Leaf)
- विशेषताएं: यह पार्श्व चपटा अंग है जो तने पर उत्पन्न होता है। इसमें पर्णधार (Leaf base), पर्णवृंत (Petiole) और पत्रफलक (Lamina) होते हैं।
- शिराविन्यास (Venation):
1. जालिका रूपी (Reticulate): द्विबीजपत्री पौधों में (शिराएं एक जाल बनाती हैं)।
2. समांतर (Parallel): एकबीजपत्री पौधों में (शिराएं एक-दूसरे के समानांतर होती हैं)।
- पत्तियों के प्रकार (Types of Leaves):
1. सरल पत्ती (Simple Leaf): जब पत्रफलक अखंडित होता है या कटाव मुख्य शिरा तक नहीं पहुँचता।
2. संयुक्त पत्ती (Compound Leaf): जब पत्रफलक के कटाव मुख्य शिरा (रेचिस) तक पहुँच जाते हैं और कई पत्रक (Leaflets) बनाते हैं। (यह पिच्छाकार या पल्लाकार हो सकती है)।
- पर्णविन्यास (Phyllotaxy): तने पर पत्तियों के लगने का क्रम:
1. एकान्तर (Alternate): प्रत्येक पर्व पर एक पत्ती (उदाहरण: गुड़हल)।
2. सम्मुख (Opposite): प्रत्येक पर्व पर दो पत्तियां आमने-सामने (उदाहरण: कैलोट्रोपिस)।
3. चक्रित (Whorled): दो से अधिक पत्तियां एक चक्र में (उदाहरण: एलस्टोनिया)।
- पत्ती के रूपांतरण: प्रतान (Tendrils - मटर), कांटे (Spines - कैक्टस), मांसल पत्तियां (घृतकुमारी)।
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5. पुष्पक्रम (Inflorescence)
- पुष्प अक्ष पर फूलों के लगने के क्रम को पुष्पक्रम कहते हैं।
1. असीमाक्षी (Racemose): मुख्य अक्ष अनिश्चित रूप से बढ़ता रहता है और फूल 'अग्न्याभिसारी' (Acropetal) क्रम में लगे होते हैं (पुराने नीचे, नए ऊपर)।
2. ससीमाक्षी (Cymose): मुख्य अक्ष का अंत फूल में हो जाता है और फूल 'तलाभिसारी' (Basipetal) क्रम में लगे होते हैं (पुराने ऊपर, नए नीचे)।
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6. पुष्प (The Flower)
- यह एक रूपांतरित प्ररोह है जो लैंगिक जनन के लिए होता है।
- पुष्प के चार चक्र (Whorls):
1. बाह्यदलपुंज (Calyx): सबसे बाहरी चक्र, इकाई को 'बाह्यदल' (Sepal) कहते हैं। (सुरक्षा करना)।
2. दलपुंज (Corolla): रंगों से भरपूर, इकाई को 'दल' (Petal) कहते हैं। (परागण के लिए आकर्षित करना)।
3. पुमंग (Androecium): नर जनन अंग, इकाई को 'पुंकेसर' (Stamen) कहते हैं। इसमें परागकोष और तंतु होते हैं।
4. जायांग (Gynoecium): मादा जनन अंग, इकाई को 'अंडप' (Carpel) कहते हैं। इसमें वर्तिकाग्र (Stigma), वर्तिका (Style) और अंडाशय (Ovary) होते हैं।
- सममिति (Symmetry):
- त्रिज्या सममित (Actinomorphic): नियमित, किसी भी केंद्रीय अक्ष से दो बराबर भागों में काटा जा सके (उदाहरण: सरसों, धतूरा)।
- एकव्यासममित (Zygomorphic): द्विपार्श्व सममित, केवल एक ही ऊर्ध्वाधर तल से दो बराबर भागों में कटे (उदाहरण: मटर, गुलमोहर)।
- अंडाशय की स्थिति (Position of Ovary):
- हाइपोगाइनस (Hypogynous - अधोयायी): अंडाशय सबसे ऊपर (उत्कृष्ट अंडाशय) (उदाहरण: गुड़हल, सरसों)।
- पेरीगाइनस (Perigynous - परिजायांग): अंडाशय आधा अधोवर्ती (उदाहरण: आड़ू, गुलाब)।
- एपाइगाइनस (Epigynous - अधिजायांग): अंडाशय नीचे और अन्य भाग ऊपर (अधोवर्ती अंडाशय) (उदाहरण: अमरूद, खीरा)।
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7. दलविन्यास (Aestivation)
पुष्प कलिका में बाह्यदल या दलों के एक-दूसरे के सापेक्ष व्यवस्थित होने का क्रम:
1. कोरस्पर्शी (Valvate): किनारे केवल एक-दूसरे को छूते हैं (उदाहरण: आक)।
2. व्यावृत्त (Twisted): एक दल का किनारा अगले दल के किनारे को ढकता है (उदाहरण: गुड़हल, कपास)।
3. कोराच्छादी (Imbricate): किनारे एक-दूसरे को अनियमित रूप से ओवरलैप करते हैं (उदाहरण: गुलमोहर, कैसिया)।
4. वैक्सिलरी (Vexillary / Papilionaceous): पाँच दल होते हैं - एक बड़ा मानक (Standard), दो पार्श्व पंख (Wings) और दो जुड़े हुए कील (Keel) (उदाहरण: मटर, सेम)।
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8. फल (The Fruit)
- निषेचन के बाद विकसित होने वाली परिपक्व अंडाशय को फल कहते हैं।
- यदि फल बिना निषेचन के बने, तो इसे अनिषेकफलित (Parthenocarpic) फल कहते हैं।
- फल के भाग: फलभित्ति (Pericarp) और बीज (Seed)। फलभित्ति तीन परतों में हो सकती है: बाह्य फलभित्ति (Epicarp), मध्य फलभित्ति (Mesocarp), और अंतः फलभित्ति (Endocarp)।
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9. बीज (The Seed)
- निषेचन के बाद बीजांड (Ovule) बीज में बदल जाता है।
- बीज के भाग: बीज चोल (Seed coat) और भ्रूण (Embryo)। भ्रूण में मूलांकुर, प्रांकुर और बीजपत्र होते हैं।
- द्विबीजपत्री बीज (Dicotyledonous Seed): दो बीजपत्र होते हैं (जैसे चना, मटर)। इसमें ऐल्ब्यूमिन रहित (Non-endospermic) या ऐल्ब्यूमिनयुक्त बीज हो सकते हैं।
- एकबीजपत्री बीज (Monocotyledonous Seed): एक बीजपत्र होता है (जैसे मक्का, गेहूं)। इसमें बीजपत्र को 'स्कुटेलम' (Scutellum) कहते हैं। भ्रूणपोष (Endosperm) भोजन का भंडारण करता है, जो ऐल्यूरोन परत (Aleurone layer) से घिरा होता है।
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10. कुछ महत्वपूर्ण पादप कुल (Important Plant Families)
#### (अ) फेबेसी कुल (Fabaceae - मटर कुल)
- शाकीय लक्षण: द्विबीजपत्री, वृक्ष, झाड़ी या शाक; जड़ में मूलग्रंथियां (नाइट्रोजन स्थिरीकरण)।
- पत्तियां: पिच्छाकार संयुक्त, पर्णवृंत आधारी (Pulvinate)।
- पुष्पक्रम: असीमाक्षी।
- पुष्प: द्विलिंगी, एकव्यासममित (Zygomorphic)।
- दलविन्यास: वैक्सिलरी (Vexillary)।
- पुमंग: 10 पुंकेसर, द्विसंघी (9+1)।
- जायांग: एकंडपी, ऊर्ध्ववर्ती, एककोष्ठीय।
- फल: लेग्यू्म (Legume)।
- आर्थिक महत्व: दालें (चना, अरहर, मूंग), सोयाबीन (तेल), मुलेठी (औषधि), सन (रेसा)।
#### (ब) सोलेनेसी कुल (Solanaceae - आलू कुल)
- शाकीय लक्षण: द्विबीजपत्री, शाक, झाड़ी या छोटे पेड़।
- पत्तियां: एकांतर, सरल (कभी-कभी पिच्छाकार संयुक्त), अनुपर्णी।
- पुष्पक्रम: ससीमाक्षी ( solitarily axillary)।
- पुष्प: द्विलिंगी, त्रिज्या सममित (Actinomorphic)।
- दलपुंज: 5 दल, संयुक्त (Gamopetalous)।
- पुमंग: 5 पुंकेसर, दललग्न (Epipetalous)।
- जायांग: द्व्यंडपी, संयुक्त, तिरछा अंडाशय, द्विकोष्ठीय, बीजांडन्यास स्तंभाकार (Axile)।
- फल: बेरी (Berry) या कैप्सूल।
- आर्थिक महत्व: आलू, टमाटर, बैंगन, मिर्च (सब्जी); तंबाकू (नशीला पदार्थ); अश्वगंधा (औषधि); पेटुनिया (सजावटी पौधा)।
#### (स) लिलीएसी कुल (Liliaceae - प्याज कुल)
- शाकीय लक्षण: एकबीजपत्री, बहुवर्षीय शाक (भूमिगतल्ककंद/प्रकंद)।
- पत्तियां: अधिकांश आधारी, समांतर शिराविन्यास।
- पुष्पक्रम: एकल / ससीमाक्षी छत्रक (Umbels)।
- पुष्प: द्विलिंगी, त्रिज्या सममित।
- परिदलपुंज (Perianth): 6 परिदल (3+3), अक्सर आपस में जुड़े हुए (Valvate)।
- पुमंग: 6 पुंकेसर (3+3), परिदललग्न।
- जायांग: त्र्यंडपी, संयुक्त, त्रिकोष्ठीय, ऊर्ध्ववर्ती अंडाशय।
- फल: कैप्सूल, कभी-कभी बेरी।
- आर्थिक महत्व: प्याज, लहसुन (भोजन); एलोवेरा (औषधि); शतावर; ट्यूलिप, ग्लोरियोसा (सजावटी पौधे)।