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कक्षा: 11वीं जीव विज्ञान (Biology)
अध्याय: पुष्पी पादपों की आन्तरिकी (Anatomy of Flowering Plants)
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1. ऊतक और ऊतक तंत्र (Tissues and Tissue Systems)
पादपों में ऊतकों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:
- विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissues): ये वे ऊतक हैं जिनमें लगातार विभाजन की क्षमता होती है।
- शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem): जड़ और तने के सिरों पर पाया जाता है, लंबाई में वृद्धि करता है।
- अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem): पर्व (Nodes) के बीच पाया जाता है, पत्तियों और शाखाओं की वृद्धि में सहायक है।
- पार्श्वीय विभज्योतक (Lateral Meristem / Cambium): द्वितीयक वृद्धि (मोटाई) के लिए उत्तरदायी है।
- स्थायी ऊतक (Permanent Tissues): विभाजन की क्षमता खो चुके कोशिकाएं।
- सरल स्थायी ऊतक (Simple Tissues):
- पैरेन्काइमा (Parenchyma): जीवित कोशिकाएं, भोजन संग्रह करती हैं।
- कॉलेन्काइमा (Collenchyma): कोमल अंगों को यांत्रिक सहारा (लचीलापन) देता है।
- स्कलेरेन्काइमा (Sclerenchyma): मृत कोशिकाएं, लिग्निन युक्त, अत्यधिक कठोरता प्रदान करती हैं।
- जटिल स्थायी ऊतक (Complex Tissues): एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनते हैं।
- जाइलम (Xylem): जल और खनिजों का संवहन। (घटक: वाहिनिकाएं, वाहिकाएं, जाइलम तंतु, जाइलम पैरेन्काइमा)।
- फ्लोएम (Phloem): भोजन (शर्करा) का संवहन। (घटक: चालनी नलिकाएं, सह कोशिकाएं, फ्लोएम पैरेन्काइमा, फ्लोएम तंतु)।
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2. ऊतक तंत्र (Tissue Systems)
पादप शरीर में तीन प्रमुख ऊतक तंत्र होते हैं:
1. बाह्यत्वचीय ऊतक तंत्र (Epidermal Tissue System):
- यह पौधे की सबसे बाहरी परत है।
- इस पर रंध्र (Stomata) पाए जाते हैं जो वाष्पोसर्जन और गैस विनिमय में मदद करते हैं।
- रंध्रों को घेरने वाली कोशिकाओं को द्वार कोशिकाएं (Guard Cells) कहते हैं।
2. भरण या मूल ऊतक तंत्र (Ground Tissue System):
- बाह्यत्वचा और संवहन बंडल को छोड़कर शेष सभी ऊतक इसके अंतर्गत आते हैं।
- इसमें कॉर्टेक्स, एंडोडर्मिस, परिरंभ (Pericycle) और मज्जा (Pith) शामिल हैं।
3. संवहन ऊतक तंत्र (Vascular Tissue System):
- इसमें जाइलम और फ्लोएम शामिल हैं।
- संयुक्त बंडल (Conjoint): जब जाइलम और फ्लोएम एक ही त्रिज्या पर होते हैं (द्विबीजपत्री तना)।
- अरीय बंडल (Radial): जब जाइलम और फ्लोएम अलग-अलग त्रिज्याओं पर एकांतर क्रम में होते हैं (जड़ें)।
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3. द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री अंगों की आंतरिक संरचना (Anatomy of Dicot and Monocot Organs)
#### क. द्विबीजपत्री जड़ (Dicot Root)
- बाह्यत्वचा पर मूलरोम (Root hairs) होते हैं।
- वल्कुट (Cortex) चौड़ा पैरेन्काइमा का बना होता है।
- अंतोडर्मिस में कैस्परियन पट्टी (Casparian strips) पाई जाती हैं।
- संवहन बंडल अरीय (Radial) और बहिरादुक (Exarch) होते हैं (संख्या 2 से 6 तक)।
#### ख. एकबीजपत्री जड़ (Monocot Root)
- संरचना लगभग द्विबीजपत्री जड़ जैसी होती है।
- संवहन बंडलों की संख्या 6 से अधिक (Polyarch) होती है।
- मज्जा (Pith) बड़ी और विकसित होती है।
#### ग. द्विबीजपत्री तना (Dicot Stem)
- बाह्यत्वचा पर उपचर्म (Cuticle) और त्रिम रोम (Trichomes) होते हैं।
- संवहन बंडल वलयाकार (Ring) रूप में व्यवस्थित होते हैं।
- संवहन बंडल संयुक्त, बहिःफ्लोएमी तथा संवर्धी (Conjoint, Collateral and Open) होते हैं (कैम्बियम उपस्थित)।
#### घ. एकबीजपत्री तना (Monocot Stem)
- अधिचर्म पर रोम नहीं होते।
- संवहन बंडल प्रकीर्ण (Scattered) होते हैं और उनके चारों ओर स्क्लेरेन्काइमा बंडल आच्छद होता है।
- संवहन बंडल अवरुद्ध (Closed) होते हैं (कैम्बियम अनुपस्थित)।
#### ङ. पत्ती (Leaf Anatomy)
- पृष्ठाधार पत्ती (Dicot Leaf - Dorsiventral): मेसोफिल ऊतक दो भागों में बंटा होता है - खम्भी पैरेन्काइमा (Palisade) और स्पंजी पैरेन्काइमा (Spongy)। रंध्र निचली सतह पर अधिक होते हैं।
- समद्विपाशर्वीय पत्ती (Monocot Leaf - Isobilateral): मेसोफिल विभाजित नहीं होता। दोनों सतहों पर रंध्रों की संख्या लगभग समान होती है।
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4. द्वितीयक वृद्धि (Secondary Growth)
द्विबीजपत्री तनों और जड़ों की मोटाई में वृद्धि को द्वितीयक वृद्धि कहते हैं। यह पार्श्वीय विभज्योतक (कैम्बियम) के कारण होती है।
- संवहन एधा की सक्रियता (Activity of Vascular Cambium):
- कैम्बियम वलय अंदर की ओर द्वितीयक जाइलम (Secondary Xylem) और बाहर की ओर द्वितीयक फ्लोएम (Secondary Phloem) बनाता है।
- द्वितीयक जाइलम की मात्रा अधिक बनती है जिससे तने की मोटाई बढ़ती है।
- वार्षिक वलय (Annual Rings):
- वसंत ऋतु में बनने वाली लकड़ी वसंत काष्ठ (Spring wood / Early wood) कहलाती है (चमकदार और हल्की)।
- सर्दी/शरद ऋतु में बनने वाली लकड़ी शरद काष्ठ (Autumn wood / Late wood) कहलाती है (गहरी और सघन)।
- एक वर्ष में एक वसंत काष्ठ और एक शरद काष्ठ मिलकर एक वार्षिक वलय बनाते हैं, जिससे वृक्ष की आयु (Dendrochronology) ज्ञात की जाती है।
- काष्ठ (Wood):
- अंतःकाष्ठ (Heartwood): पुराना, गहरा भूरा, मृत और केंद्र में स्थित भाग; यह जल संवहन नहीं करता बल्कि यांत्रिक शक्ति देता है (टैनिन, रेज़िन आदि से भरा होता है)।
- रसकाष्ठ (Sapwood): नया, हल्का रंग, जीवित भाग; यह जल और खनिजों का संवहन करता है।
- कॉर्क एधा (Cork Cambium / Phellogen):
- यह बाहरी वल्कुट में बनता है और बाहर की ओर कॉर्क (Phellem) तथा अंदर की ओर द्वितीयक वल्कुट (Phelloderm) बनाता है।
- इन तीनों (पेलोजन, पेलम, पेलoderm) को संयुक्त रूप से परिडर्म (Periderm) कहते हैं।
- वातांध्र (Lenticels): छाल पर बने छोटे छिद्र जो गैसों के आदान-प्रदान में मदद करते हैं।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 पुष्पी पादपों की शारीरिक रचना
ऊतक और ऊतक तंत्र
विभाज्योतक ऊतक (मेरिस्टेमैटिक)
शीर्षस्थ मेरिस्टेम
अंतर्विशिष्ट मेरिस्टेम
पार्श्व मेरिस्टेम
स्थायी ऊतक
सरल स्थायी ऊतक
पैरेन्काइमा (मृदूतक)
कोलेन्काइमा (स्थूलकोण ऊतक)
स्कलेरेन्काइमा (दृढ ऊतक)
जटिल स्थायी ऊतक
जाइलेम (वाहिनी, वाहिका, तंतु, पैरेन्काइमा)
फ्लोएम (चालनी नलिका, सह कोशिका, पैरेन्काइमा, तंतु)
ऊतक तंत्र
बाह्यत्वचीय ऊतक तंत्र
रंध्र
बाह्यत्वचीय रोम (ट्राइकोम)
भरण ऊतक तंत्र
वल्कल
अंतस्त्वचा
परिरंभ
मज्जा
संवहन ऊतक तंत्र
संयुक्त बंडल
अरीय बंडल
खुला और बंद संवहन बंडल
द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री पादपों की शारीरिक रचना
मूल (जड़) की आंतरिक संरचना
द्विबीजपत्री मूल
बाह्यत्वचा (एपिब्लेमा)
वल्कल
अंतस्त्वचा (कैस्पेरी पट्टिका)
संवहन बंडल (अरीय और द्वि-आदिदारुक)
एकबीजपत्री मूल
वल्कल और अंतस्त्वचा
बहु-आदिदारुक संवहन बंडल (चौथे से अधिक)
तने की आंतरिक संरचना
द्विबीजपत्री तना
बाह्यत्वचा पर उपचर्म और रोम
भरण ऊतक (वल्कल, भरणच्छद)
संवहन बंडल (वलयाकार, खुले)
एकबीजपत्री तना
स्क्लेरेन्काइमी अधस्त्वचा
बिखरे हुए संवहन बंडल (बंद)
संवहन बंडल आच्छद
पर्ण (पत्ती) की आंतरिक संरचना
पृष्ठाधर (द्विबीजपत्री) पर्ण
उपरि और अधो बाह्यत्वचा
पर्णमध्योतक (खंभ और स्पंजी पैरेन्काइमा)
जालेदार शिराविन्यास
समद्विपाश्विक (एकबीजपत्री) पर्ण
दोनों सतहों पर समान रंध्र
बुलिफॉर्म (आवर्धक) कोशिकाएँ
द्वितीयक वृद्धि
पादप की मोटाई में वृद्धि
संवहन एधा (कैम्बियम) की सक्रियता
एधा वलय का निर्माण
द्वितीयक जाइलेम (अंदर की ओर)
द्वितीयक फ्लोएम (बाहर की ओर)
वार्षिक वलय (स्प्रिंग और ऑटम वुड)
कॉर्क एधा (फेलोजन) की सक्रियता
कॉर्क (फेलम) - बाहर की ओर
द्वितीयक वल्कल (फेलoderm) - अंदर की ओर
परिट्वचा (पेरीडर्म)
वातंध्र (लेंटिसेल)
मूल में द्वितीयक वृद्धि
संवहन एधा का लहराता वलय बनना
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): बुलिफ़ॉर्म कोशिकाएँ घास की पत्तियों की ऊपरी सतह पर शिराओं के साथ मौजूद बड़ी, खाली, रंगहीन एपिडर्मल कोशिकाएँ हैं। जल के तनाव के कारण वे ढीली हो जाती हैं, जिससे पत्तियाँ अंदर की ओर मुड़ जाती हैं।
उत्तर (Answer): मूल में वल्कुट की सबसे आंतरिक परत को अंतस्त्वचा (endodermis) कहा जाता है, जिसकी विशेषता सुबेरिन से बनी कैस्पेरियन पट्टी की उपस्थिति है।
उत्तर (Answer): खुले संवहन बंडलों में, ज़ाइलम और फ़्लोएम के बीच कैम्बियम मौजूद होता है, जिससे वे द्वितीयक ऊतकों का निर्माण कर सकते हैं। ऐसे बंडल द्विबीजपत्री तनों की विशेषता हैं।
उत्तर (Answer): जब ज़ाइलम और फ़्लोएम संवहन बंडलों की एक ही त्रिज्या के साथ स्थित होते हैं, तो इसे संयुक्त (conjoint) संवहन बंडल कहा जाता है, जो तनों और पत्तियों में आम है।
उत्तर (Answer): भरण ऊतक प्रणाली में एपिडर्मिस और संवहन बंडलों को छोड़कर सभी ऊतक शामिल हैं। इसमें वल्कुट (cortex), परिरंभ (pericycle), मज्जा (pith) और मज्जा किरणें शामिल हैं।
उत्तर (Answer): द्विबीजपत्री पौधों के विपरीत जहाँ रक्षक कोशिकाएँ सेम या वृक्क के आकार की होती हैं, घास में रक्षक कोशिकाएँ डमरू के आकार (dumbbell-shaped) की होती हैं।
उत्तर (Answer): रंध्र वाष्पसर्जन और गैसीय विनिमय को नियंत्रित करते हैं। वे दो वृक्क-आकार की (या घास में डमरू-आकार की) रक्षक कोशिकाओं से घिरे होते हैं।
उत्तर (Answer): एपिडर्मल ऊतक प्रणाली प्राथमिक पादप शरीर का सबसे बाहरी आवरण बनाती है, जिसमें एपिडर्मिस, रंध्र (stomata) और एपिडर्मल उपांग जैसे ट्राइकोम और बाल शामिल हैं।
उत्तर (Answer): सह कोशिकाएँ विशिष्ट पैरेन्काइमैटस कोशिकाएँ होती हैं जो फ़्लोएम में चालनी नलिका घटकों के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी होती हैं, जो चालनी नलिकाओं में दाब प्रवणता को बनाए रखने में मदद करती हैं।
उत्तर (Answer): अनावृतबीजियों के ज़ाइलम में वाहिकाओं (vessels) का अभाव होता है; उनके जल-संवहन तत्व मुख्य रूप से वाहिनीकाओं से बने होते हैं। आवृतबीजियों में वाहिकाएँ पाई जाती हैं।
उत्तर (Answer): ज़ाइलम पैरेन्काइमा को छोड़कर, अन्य सभी ज़ाइलम घटक (वाहिनीकाएँ, वाहिकाएँ और ज़ाइलम फाइबर) परिपक्वता पर मृत और जीवद्रव्य रहित होते हैं, जो मुख्य रूप से जल संवहन और यांत्रिक सहायता का कार्य करते हैं।
उत्तर (Answer): ज़ाइलम और फ़्लोएम पौधों में जटिल ऊतक बनाते हैं। ज़ाइलम जल और खनिजों के संवहन ऊतक के रूप में कार्य करता है, जबकि फ़्लोएम खाद्य पदार्थों का परिवहन करता है।
उत्तर (Answer): स्क्लेरेन्काइमा कोशिकाएँ जीवद्रव्य के बिना मृत होती हैं। रूप, संरचना, उत्पत्ति और विकास में भिन्नता के आधार पर वे दो प्रकार की होती हैं: फाइबर (तंतु) और स्क्लेरीड्स (पत्थर की कोशिकाएँ)।
उत्तर (Answer): कोलेनकाइमा ऊतक की विशेषता कोशिकाओं के कोनों पर सेल्युलोज, हेमीसेल्युलोज और पेक्टिन का जमाव है, जो पौधे के बढ़ते भागों जैसे युवा तने और पर्णवृंत को यांत्रिक सहायता प्रदान करता है।
उत्तर (Answer): पैरेन्काइमा कोशिकाएँ सामान्यतः समव्यासी (isodiametric) होती हैं। उनकी कोशिका भित्ति मुख्य रूप से सेल्युलोज से बनी होती है। वे प्रकाश संश्लेषण, भंडारण और स्राव जैसे कार्य करती हैं।