कक्षा 11 जीव विज्ञान
#### अध्याय: कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन (Cell Cycle and Cell Division) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स
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### मुख्य अवधारणा 1: कोशिका चक्र (Cell Cycle)
कोशिका चक्र वह क्रमबद्ध प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक कोशिका अपने जीनोम को प्रतिकृत करती है, अन्य सेलुलर घटकों को संश्लेषित करती है, और फिर दो नई संतति कोशिकाओं को बनाने के लिए विभाजित होती है।
- कोशिका चक्र की दो मुख्य अवस्थाएँ:
1. अंतरावस्था (Interphase): यह दो क्रमिक विभाजनों के बीच की अवधि है। इसमें कोशिका विभाजन के लिए तैयार होती है।
2. M-अवस्था (M-Phase / Mitosis Phase): यह वास्तविक विभाजन की अवस्था है।
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### मुख्य अवधारणा 2: अंतरावस्था की उप-अवस्थाएँ (Phases of Interphase)
अंतरावस्था को तीन भागों में बांटा गया है:
1. G₁ अवस्था (Gap 1 / पूर्व डीऑक्सीराइबोक्लिक अम्ल संश्लेषण अवस्था):
- यह कोशिका की वृद्धि का काल है।
- इसमें कोशिका सक्रिय रूप से उपापचय करती है और निरंतर बढ़ती है, लेकिन डीएनए प्रतिकृति (DNA replication) नहीं होती है।
2. S अवस्था (Synthesis Phase / संश्लेषण अवस्था):
- इस दौरान डीएनए का संश्लेषण या प्रतिकृति (Replication) होती है।
- यदि डीएनए की प्रारंभिक मात्रा
2C है, तो यह बढ़कर 4C हो जाती है, लेकिन गुणसूत्रों की संख्या (n) समान रहती है।
3. G₂ अवस्था (Gap 2 / उत्तर डीऑक्सीराइबोक्लिक अम्ल संश्लेषण अवस्था):
- प्रोटीन का संश्लेषण होता है जो समसूत्री विभाजन के लिए आवश्यक हैं।
- कोशिका विभाजन की तैयारी जारी रहती है।
- शांत अवस्था (G₀ Phase / Quiescent Stage):
- कुछ कोशिकाएं वयस्क होने पर विभाजन नहीं दर्शाती हैं (जैसे हृदय की कोशिकाएं)। ये कोशिकाएं G₁ अवस्था से निकलकर एक निष्क्रिय अवस्था में प्रवेश करती हैं जिसे G₀ अवस्था कहते हैं। ये कोशिकाएं उपापचय रूप से सक्रिय रहती हैं लेकिन विभाजित नहीं होतीं जब तक कि आवश्यकता न हो।
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### मुख्य अवधारणा 3: समसूत्री विभाजन (Mitosis)
इसे 'समदैशिक विभाजन' भी कहते हैं क्योंकि इसमें संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका के समान (द्विगुणित 2n) रहती है। यह कायिक कोशिकाओं (Somatic cells) में होता है।
- M-अवस्था (Mitosis) की 4 मुख्य अवस्थाएँ:
1. पूर्वावस्था (Prophase):
- क्रोमैटिन जाल संघनित होकर स्पष्ट गुणसूत्रों में बदल जाता है।
- केंद्रक झिल्ली और केंद्रिका लुप्त होने लगते हैं।
- तारкаकाय (Centrosome) विपरीत ध्रुवों की ओर जाने लगते हैं और तर्कु तंतु (Spindle fibers) बनाते हैं।
2. मध्यावस्था (Metaphase):
- केंद्रक आवरण पूरी तरह नष्ट हो जाता है।
- सभी गुणसूत्र कोशिका के मध्य भाग में संरेखित हो जाते हैं, जिसे मध्यावस्था प्लेट (Metaphase plate) कहते हैं।
- तर्कु तंतु गुणसूत्र के काइनेटोकोर (Kinetochore) से जुड़ते हैं। (नोट: गुणसूत्रों के अध्ययन के लिए यह सबसे अच्छी अवस्था है)।
3. पशुआवस्था (Anaphase):
- गुणसूत्र बिंदु (Centromere) टूट जाता है और दो संतति गुणसूत्र (क्रोमैटिड) अलग हो जाते हैं।
- क्रोमैटिड विपरीत ध्रुवों की ओर खींच लिए जाते हैं।
4. अंत्यावस्था (Telophase):
- गुणसूत्र विपरीत ध्रुवों पर पहुँचकर पुनः क्रोमैटिन जाल में बदल जाते हैं।
- केंद्रक झिल्ली और केंद्रिका पुनः प्रकट हो जाते हैं।
- तर्कु तंतु गायब हो जाते हैं।
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### मुख्य अवधारणा 4: कोशिकाद्रव्य विभाजन (Cytokinesis)
केंद्रक विभाजन के बाद कोशिका के cytoplasm (कोशिकाद्रव्य) के विभाजन को साइटोकाइनेसिस कहते हैं।
- जंतु कोशिकाओं में: कोशिकाद्रव्य के बीच में एक खाँच (Furrow) बनती है जो अंदर की ओर गहरी होती जाती है और अंततः कोशिका को दो भागों में बांट देती है।
- पादप कोशिकाओं में: पादप कोशिकाओं में दृढ़ कोशिका भित्ति होने के कारण खाँच नहीं बन सकती। इसमें सेल प्लेट (Cell plate) का निर्माण होता है जो केंद्र से परिधि की ओर बढ़ती है।
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### मुख्य अवधारणा 5: अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis)
यह लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों की जनन कोशिकाओं (Germ cells) में होता है। इसके परिणामस्वरूप अगुणित (n) युग्मक बनते हैं।
- महत्वपूर्ण विशेषताएँ:
- इसमें दो क्रमिक विभाजन होते हैं: अर्धसूत्री I (Meiosis I) और अर्धसूत्री II (Meiosis II)।
- डीएनए का प्रतिकृति एक बार होता है, लेकिन केंद्रक का विभाजन दो बार होता है।
- संतति कोशिकाएं आनुवंशिक रूप से भिन्न होती हैं (क्रॉसिंग ओवर के कारण)।
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### मुख्य अवधारणा 6: अर्धसूत्री विभाजन I की उप-अवस्थाएँ (Meiosis I Phases)
यह एक न्यूनकारी विभाजन (Reductional division) है जिसमें गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है।
1. पूर्वावस्था I (Prophase I): यह बहुत लंबी और जटिल होती है। इसे 5 उप-अवस्थाओं में बांटा गया है:
- लेप्टोटिन (Leptotene): गुणसूत्र धीरे-धीरे दृश्यमान और संघनित होने लगते हैं।
- जाइगोटिन (Zygotene): समजात गुणसूत्र (Homologous chromosomes) जोड़े बनाने लगते हैं। इसे युग्मलन (Synapsis) कहते हैं। बने हुए जोड़े को बाइवलेंट (Bivalent) कहते हैं।
- पैकीटिन (Pachytene): इस अवस्था में क्रॉसिंग ओवर (Crossing over) होता है, जिसमें गैर-सहज क्रोमैटिड्स (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक सामग्री का आदान-प्रदान होता है। इससे आनुवंशिक विविधता आती है।
- डिपलोटिन (Diplotene): युग्मित गुणसूत्र अलग होने लगते हैं, लेकिन 'X' जैसी संरचनाएं बनी रहती हैं जिन्हें काइऐस्मेटा (Chiasmata) कहते हैं।
- डाइकाइनेसिस (Diakinesis): काइऐस्मेटा का सीमांतकरण (Terminalisation) होता है और केंद्रिका लुप्त हो जाती है।
2. मध्यावस्था I (Metaphase I):
- समजात गुणसूत्रों के जोड़े मध्यावस्था प्लेट पर व्यवस्थित होते हैं।
3. पशुआवस्था I (Anaphase I):
- समजात गुणसूत्र विपरीत ध्रुवों की ओर चले जाते हैं, लेकिन संतति क्रोमैटिड अलग नहीं होते (गुणसूत्र बिंदु बरकरार रहता है)।
4. अंत्यावस्था I (Telophase I):
- केंद्रक झिल्ली और केंद्रिका पुन: प्रकट होते हैं, और कोशिकाद्रव्य विभाजन हो सकता है।
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### मुख्य अवधारणा 7: अर्धसूत्री विभाजन II (Meiosis II)
यह समसूत्री विभाजन के समान होता है (Equational division)।
- पूर्वावस्था II: गुणसूत्र पुनः संघनित होते हैं।
- मध्यावस्था II: गुणसूत्र मध्यावस्था प्लेट पर व्यवस्थित होते हैं और काइनेटोकोर से तर्कु तंतु जुड़ते हैं।
- पशुआवस्था II: गुणसूत्र बिंदु का विभाजन होता है और संतति क्रोमैटिड (अब नए गुणसूत्र) विपरीत ध्रुवों की ओर जाते हैं।
- अंत्यावस्था II: केंद्रक आवरण फिर से बनता है और अंततः कोशिकाद्रव्य विभाजन के बाद चार अगुणित (
n) संतति कोशिकाएं बनती हैं।
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### मुख्य अवधारणा 8: कोशिका विभाजन का महत्व
1. समसूत्री विभाजन (Mitosis):
- शरीर की वृद्धि और विकास के लिए।
- ऊतकों की मरम्मत और पुरानी कोशिकाओं के प्रतिस्थापन के लिए।
- अलैंगिक प्रजनन में सहायक।
2. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis):
- लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों में गुणसूत्रों की संख्या की पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिरता बनाए रखना।
- क्रॉसिंग ओवर के कारण नई विविधताओं (Variations) को उत्पन्न करना जो विकास (Evolution) के लिए आवश्यक हैं।