अध्याय: वित्तीय विवरण - I (Financial Statements - I) - त्वरित पुनرीक्षण नोट्स
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मुख्य अवधारणाएँ (Key Concepts)
- वित्तीय विवरण (Financial Statements): ये ऐसे प्रलेख (Statements) हैं जो किसी व्यवसाय की एक निश्चित अवधि के अंत में वित्तीय स्थिति और लाभप्रदता (Profitability) को दर्शाते हैं। इसमें मुख्य रूप से व्यापार एवं लाभ-हानि खाता (Trading and Profit & Loss Account) और स्थिति विवरण (Balance Sheet) शामिल होते हैं।
- पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): वे व्यय जो संपत्ति के अर्जन (Acquisition), क्षमता में वृद्धि या उसके जीवनकाल को बढ़ाने के लिए किए जाते हैं। ये दीर्घकालिक प्रकृति के होते हैं।
- आagmi/राजस्व व्यय (Revenue Expenditure): वे व्यय जो व्यवसाय के दिन-प्रतिदिन के संचालन और संपत्तियों की सामान्य मरम्मत/रखरखाव के लिए किए जाते हैं। ये अल्पकालिक होते हैं।
- प्रत्यक्ष व्यय (Direct Expenses): वे सभी व्यय जो माल के क्रय से लेकर उसे कारखाने या गोदाम तक लाने और उसे विक्रय योग्य बनाने तक किए जाते हैं (जैसे- मजदूरी, माल भाड़ा)।
- अप्रत्यक्ष व्यय (Indirect Expenses): वे सभी व्यय जो कार्यालय, प्रशासन, विक्रय और वित्तीय कार्यों से संबंधित होते हैं (जैसे- वेतन, किराया, विज्ञापन, ब्याज)।
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व्यापार खाता (Trading Account) के सूत्र एवं प्रारूप
व्यापार खाता एक निश्चित अवधि के सकल लाभ (Gross Profit) या सकल हानि (Gross Loss) को ज्ञात करने के लिए बनाया जाता है।
मुख्य सूत्र:
1. सकल लाभ (Gross Profit):
सकल लाभ = शुद्ध विक्रय - बेचे गए माल की लागत
(Gross Profit = Net Sales - Cost of Goods Sold)
2. सकल हानि (Gross Loss):
सकल हानि = बेचे गए माल की लागत - शुद्ध विक्रय
3. शुद्ध विक्रय (Net Sales):
शुद्ध विक्रय = कुल विक्रय - विक्रय वापसी (Sales Return)
4. बेचे गए माल की लागत (Cost of Goods Sold - COGS):
COGS =प्रारंभिक स्टॉक + शुद्ध क्रय + प्रत्यक्ष व्यय - अंतिम स्टॉक
(Cost of Goods Sold = Opening Stock + Net Purchases + Direct Expenses - Closing Stock)
5. शुद्ध क्रय (Net Purchases):
शुद्ध क्रय = कुल क्रय - क्रय वापसी (Purchase Return)
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लाभ-हानि खाता (Profit & Loss Account) के सूत्र
लाभ-हानि खाता शुद्ध लाभ (Net Profit) या शुद्ध हानि (Net Loss) ज्ञात करने के लिए बनाया जाता है।
1. शुद्ध लाभ (Net Profit):
शुद्ध लाभ = सकल लाभ + अन्य अप्राप्त आय - सभी अप्रत्यक्ष व्यय
2. शुद्ध हानि (Net Loss):
शुद्ध हानि = (सकल हानि + सभी अप्रत्यक्ष व्यय) - अन्य आय
3. संचालन लाभ (Operating Profit):
संचालन लाभ = सकल लाभ + अन्य परिचालन आय - परिचालन व्यय
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स्थिति विवरण / चिट्ठा (Balance Sheet)
चिट्ठा किसी व्यापार की एक निश्चित तिथि पर वित्तीय स्थिति (संपत्तियां, दायित्व और पूंजी) को दर्शाता है। यह लेखांकन समीकरण पर आधारित है:
पूंजी (Capital) + दायित्व (Liabilities) = संपत्तियां (Assets)
मुख्य घटक:
1. दायित्व (Liabilities):
- चालू दायित्व (Current Liabilities): जो एक वर्ष के भीतर चुकाने होते हैं (जैसे- लेनदार, देय विपत्र, बैंक अधिविकर्ष)।
- स्थाई/दीर्घकालिक दायित्व (Long-term Liabilities): जो लंबे समय बाद चुकाने होते हैं (जैसे- दीर्घकालिक ऋण, डिबेंचर)।
2. संपत्तियां (Assets):
- चालू संपत्तियां (Current Assets): जिन्हें एक वर्ष के भीतर नकदी में बदला जा सकता है (जैसे- रोकड़, प्राप्य विपत्र, देनदार, क्लोजिंग स्टॉक, पूर्वदत्त व्यय)।
- स्थाई संपत्तियां (Fixed Assets): जो दीर्घकाल तक व्यवसाय में उपयोग होती हैं (जैसे- भूमि, भवन, मशीनरी, फर्नीचर)।
- अदृश्य संपत्तियां (Intangible Assets): जिन्हें देखा या छुआ नहीं जा सकता (जैसे- ख्याति, पेटेंट, ट्रेडमार्क)।
3. पूंजी में समायोजन (Adjustments in Capital):
अंतिम पूंजी = प्रारंभिक पूंजी + अतिरिक्त पूंजी + शुद्ध लाभ - आहरण (Drawings)
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महत्वपूर्ण समायोजन (Important Adjustments) और उनके लेखे
अंतिम खाते बनाते समय कुछ मदों के समायोजन आवश्यक होते हैं, जिनका लेखा दो स्थानों पर किया जाता है:
1. अंतिम स्टॉक (Closing Stock):
- लेखा: व्यापार खाते के क्रेडिट पक्ष में तथा चिट्ठे की संपत्ति पक्ष (चालू संपत्ति) में।
2. अदत्त व्यय (Outstanding Expenses):
- अर्थ: चालू वर्ष से संबंधित व्यय जो अभी चुकाए नहीं गए हैं।
- लेखा: संबंधित व्यय में जोड़े जाते हैं (लाभ-हानि/व्यापार खाते में) तथा चिट्ठे के दायित्व पक्ष में दिखाए जाते हैं।
3. पूर्वदत्त व्यय (Prepaid Expenses):
- अर्थ: वे व्यय जो आगामी वर्ष के लिए अग्रिम चुका दिए गए हैं।
- लेखा: संबंधित व्यय में से घटाए जाते हैं तथा चिट्ठे की संपत्ति पक्ष में दिखाए जाते हैं।
4. उपार्जित आय (Accrued Income):
- अर्थ: आय जो कमाई जा चुकी है लेकिन अभी प्राप्त नहीं हुई है।
- लेखा: लाभ-हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में संबंधित आय में जोड़ी जाती है तथा चिट्ठे की संपत्ति पक्ष में दिखाई जाती है।
5. अनुपार्जित आय (Unearned / Received in Advance Income):
- अर्थ: वह आय जो आगामी वर्ष से संबंधित है और अग्रिम प्राप्त हो गई है।
- लेखा: संबंधित आय में से घटाई जाती है तथा चिट्ठे के दायित्व पक्ष में दिखाई जाती है।
6. मूल्यह्रास (Depreciation):
- अर्थ: स्थाई संपत्तियों के मूल्य में निरंतर कमी।
- लेखा: लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में तथा संबंधित संपत्ति में से चिट्ठे में घटाया जाता है।
7. अंतिम ऋण/संदिग्धा ऋण के लिए प्रावधान (Provision for Bad and Doubtful Debts):
- लेखा: लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में तथा देनदारों (Debtors) में से चिट्ठे की संपत्ति पक्ष में घटाया जाता है।