#### अध्याय: वित्तीय विवरण - II (Financial Statements - II) - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स
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वित्तीय विवरण - II का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि किसी संस्था के अंतिम खाते (Final Accounts) तैयार करते समय समायोजनों (Adjustments) का लेखा किस प्रकार किया जाता है। व्यवसाय के वास्तविक लाभ-हानि और वित्तीय स्थिति को ज्ञात करने के लिए कई मदों (Items) को समायोजित करना आवश्यक होता है।
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प्रत्येक समायोजन का दोहरा लेखा (Double Entry) प्रभाव होता है, अर्थात् इसे दो स्थानों पर दिखाया जाता है:
1. व्यापार एवं लाभ-हानि खाता (Trading and Profit & Loss A/c)
2. चिट्ठा / संतुलन शीट (Balance Sheet)
#### (क) क्लोजिंग स्टॉक (Closing Stock - अंतिम रहतिया)
1. व्यापार खाते (Trading A/c) के क्रेडिट पक्ष में दर्शाया जाता है।
2. चिट्ठे (Balance Sheet) की संपत्ति पक्ष (Assets) में दिखाया जाता है।
#### (ख) आउटस्टैंडिंग एक्सपेंसेस (Outstanding Expenses - अदत्त / बकाया व्यय)
1. संबंधित व्यय में जोड़ा (Add) जाता है (लाभ-हानि/व्यापार खाते में)।
2. चिट्ठे के दायित्व पक्ष (Liabilities) में दिखाया जाता है।
#### (ग) प्रीपेड एक्सपेंसेस (Prepaid Expenses - पूर्वदत्त व्यय)
1. संबंधित व्यय में से घटाया (Less) जाता है (लाभ-हानि/व्यापार खाते में)।
2. चिट्ठे के संपत्ति पक्ष (Assets) में दिखाया जाता है।
#### (घ) एक्रूड इनकम (Accrued Income - उपार्जित / अर्जित आय)
1. संबंधित आय में जोड़ा (Add) जाता है (लाभ-हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में)।
2. चिट्ठे के संपत्ति पक्ष (Assets) में दिखाया जाता है।
#### (ङ) अनएक्रूड इनकम / इनकम रिसीव्ड इन एडवांस (Unaccrued Income - अग्रिम प्राप्त आय)
1. संबंधित आय में से घटाई (Less) जाती है (लाभ-हानि खाते में)।
2. चिट्ठे के दायित्व पक्ष (Liabilities) में दिखाया जाता है।
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स्थाई संपत्तियों के प्रयोग, समय बीतने या अप्रचलन के कारण उनके मूल्य में होने वाली निरंतर कमी को मूल्यह्रास कहते हैं।
1. लाभ-हानि खाते (Profit & Loss A/c) के डेबिट पक्ष में।
2. चिट्ठे में संबंधित संपत्ति (Asset) के मूल्य में से घटाया (Less) जाता है।
वार्षिक मूल्यह्रास = (संपत्ति की लागत - अवशेष मूल्य) / संपत्ति का अनुमानित जीवन काल
इस विधि में ह्रास प्रत्येक वर्ष संपत्ति के पुस्तक मूल्य (Book Value) पर लगाया जाता है।
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#### (क) संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान (Provision for Doubtful Debts)
1. लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में।
2. चिट्ठे में देनदारों (Sundry Debtors) में से घटाया जाता है।
प्रावधान = (कुल देनदार - बद्म ऋण/Further Bad Debts) × निर्धारित प्रतिशत
#### (ग) देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान (Provision for Discount on Debtors)
1. लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में।
2. चिट्ठे में देनदारों में से (Bad Debts और Doubtful Debts घटाने के बाद बची हुई राशि पर) घटाया जाता है।
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प्रबंधक को शुद्ध लाभ पर कमीशन दिया जाता है, जिसकी गणना दो प्रकार से होती है:
1. कमीशन घटाने से पहले के लाभ पर (Before charging such commission):
कमीशन = शुद्ध लाभ (कमीशन से पूर्व) × (दर / 100)
2. कमीशन घटाने के बाद के लाभ पर (After charging such commission):
कमीशन = शुद्ध लाभ (कमीशन से पूर्व) × [दर / (100 + दर)]
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सकल लाभ = शुद्ध विक्रय (Net Sales) - बेचे गए माल की लागत (Cost of Goods Sold)
COGS = प्रारंभिक रहतिया (Opening Stock) + क्रय (Purchases) + प्रत्यक्ष व्यय (Direct Expenses) - अंतिम रहतिया (Closing Stock)
शुद्ध लाभ = सकल लाभ + अप्रत्यक्ष आय - अप्रत्यक्ष व्यय (मूल्यह्रास, प्रावधान सहित)
कुल पूँजी + कुल दायित्व = कुल संपत्तियाँ