अध्याय: उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण: एक मूल्यांकन
(कक्षा 11 - अर्थशास्त्र: भारतीय आर्थिक विकास)
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मुख्य परिचय (Introduction)
- वर्ष 1991 का आर्थिक संकट: भारत को विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी और भुगतान संतुलन (Balance of Payments) के संकट का सामना करना पड़ा।
- नई आर्थिक नीति (New Economic Policy - NEP): इस संकट से उबरने के लिए भारत सरकार ने जुलाई 1991 में एक नई आर्थिक नीति की शुरुआत की, जिसके मुख्य तीन स्तंभ थे - उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation), और वैश्वीकरण (Globalisation), जिन्हें सामान्यतः LPG नीति कहा जाता है।
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1. उदारीकरण (Liberalisation)
#### परिभाषा:
उदारीकरण का अर्थ आर्थिक गतिविधियों पर लगे अनावश्यक सरकारी नियंत्रणों, नियमों, लाइसेंसों और प्रतिबंधों को हटाना या कम करना है ताकि निजी क्षेत्र स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके।
#### प्रमुख उपाय (Key Measures):
- औद्योगिक क्षेत्र में सुधार:
- अधिकांश उद्योगों के लिए औद्योगिक लाइसेंस की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया (केवल कुछ को छोड़कर जैसे शराब, सिगरेट, खतरनाक रसायन आदि)।
- आरक्षित उद्योगों के दायरे को कम किया गया।
- वित्तीय क्षेत्र में सुधार:
- इसमें बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान शामिल हैं।
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की भूमिका को 'नियंत्रक' (Regulator) से बदलकर 'सुविधाप्रदाता' (Facilitator) कर दिया गया।
- कर सुधार (Tax Reforms):
- व्यक्तिगत आय कर और निगम कर (Corporate Tax) की दरों में कमी की गई ताकि कर अनुपालन (Tax Compliance) को बढ़ावा मिले।
- विदेशी मुद्रा बाजार में सुधार:
- रुपये का अवमूल्यन किया गया ताकि निर्यात को बढ़ावा मिले और आयात महंगा हो।
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2. निजीकरण (Privatisation)
#### परिभाषा:
निजीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (Public Sector Undertakings - PSUs) का स्वामित्व या प्रबंधन निजी क्षेत्र के हाथों में सौंपा जाता है।
#### प्रमुख तरीके (Ways of Privatisation):
- सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के स्वामित्व या प्रबंधन का निजी क्षेत्र को हस्तांतरण।
- विनिवेश (Disinvestment): जब सरकार सार्वजनिक उद्यमों के अपने शेयरों का एक हिस्सा जनता या निजी कंपनियों को बेचती है, तो इसे विनिवेश कहते हैं।
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3. वैश्वीकरण (Globalisation)
#### परिभाषा:
वैश्वीकरण का अर्थ देश की अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना है। इसके अंतर्गत वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, प्रौद्योगिकी और श्रम का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र प्रवाह होता है।
#### प्रमुख नीतियां (Key Policies):
- व्यापार और विनिमय दर सुधार:
- आयात और निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाना।
- मात्रात्मक प्रतिबंधों (Quantitative Restrictions) को समाप्त करना।
- प्रशुल्क (Tariffs) में कमी:
- आयात शुल्क (Import Duties) की दरों को कम करना ताकि भारतीय वस्तुएं वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI - Foreign Direct Investment):
- विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना और नियमों को सरल बनाना।
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वैश्वीकरण के प्रभाव: आउटसोर्सिंग (Outsourcing)
- अर्थ: किसी कंपनी द्वारा अपने नियमित कार्यों या सेवाओं (जैसे- कॉल सेंटर, कानूनी सलाह, डेटा प्रविष्टि, लेखांकन) को बाहरी या तीसरे पक्ष की एजेंसी (अक्सर विकासशील देशों से) से करवाना आउटसोर्सिंग कहलाता है।
- भारत की स्थिति: भारत वैश्वीकरण और आउटसोर्सिंग का एक प्रमुख केंद्र (Hub) बनकर उभरा है, क्योंकि यहाँ अंग्रेजी जानने वाले कुशल श्रमिक अपेक्षाकृत कम मजदूरी पर उपलब्ध हैं।
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विश्व व्यापार संगठन (WTO - World Trade Organisation)
- स्थापना: 1995 (गैट - GATT का उत्तराधिकारी)।
- मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड।
- मुख्य उद्देश्य:
- वैश्विक व्यापार के नियमों को निर्धारित करना।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुगम, स्वतंत्र और अनुमानित बनाना।
- सभी सदस्य देशों के बीच टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करना।
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LPG नीति का मूल्यांकन (Evaluation of LPG Policy)
#### सकारात्मक प्रभाव (Merits):
1. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर में वृद्धि: 1991 के बाद देश की आर्थिक विकास दर में तेजी आई।
2. विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि: विदेशी निवेश और निर्यात बढ़ने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ।
3. मुद्रास्फीति (Inflation) पर नियंत्रण: बाजार में वस्तुओं की बहुलता के कारण कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिली।
4. उपभोक्ताओं को लाभ: उपभोक्ताओं के पास वस्तुओं और सेवाओं के बेहतर और अनेक विकल्प उपलब्ध हुए।
#### नकारात्मक प्रभाव (Demerits):
1. कृषि की उपेक्षा: सुधारों का लाभ मुख्य रूप से औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों को मिला, जबकि कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर धीमी रही।
2. औद्योगिक विकास में उतार-चढ़ाव: सस्ते विदेशी आयातों के कारण घरेलू लघु उद्योगों और मध्यम उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।
3. क्षेत्रीय असमानता: वैश्वीकरण का लाभ मुख्य रूप से विकसित राज्यों या शहरी क्षेत्रों तक सीमित रहा, पिछड़े राज्य पीछे छूट गए।
4. रोजगारहीन वृद्धि (Jobless Growth): उत्पादन और जीडीपी तो बढ़ी, लेकिन उस अनुपात में रोजगार के नए अवसर सृजित नहीं हुए।