कक्षा 11 अर्थशास्त्र - पर्यावरण और सतत विकास (Environment and Sustainable Development)
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1. पर्यावरण का अर्थ (Meaning of Environment)
- पर्यावरण का अर्थ उन सभी भौतिक, जैविक और सांस्कृतिक तत्वों के कुल योग से है जो हमारे चारों ओर मौजूद हैं और जीव-जंतुओं के जीवन को प्रभावित करते हैं।
- इसमें सभी जैविक (जीवित चीज़ें जैसे पेड़-पौधे, जानवर) और अजैविक (निर्जीव चीज़ें जैसे हवा, पानी, मिट्टी, चट्टानें) घटक शामिल हैं।
2. पर्यावरण के कार्य (Functions of the Environment)
पर्यावरण हमारे जीवन और अर्थव्यवस्था के लिए चार महत्वपूर्ण कार्य करता है:
1. संसाधन उपलब्ध कराना: यह उत्पादन के लिए नवीकरणीय (Renewable) और अनवीकरणीय (Non-renewable) संसाधन प्रदान करता है।
2. अपशिष्ट को अवशोषित करना: यह उत्पादन और उपभोग की प्रक्रिया से निकलने वाले कचरे (अपशिष्ट) को सोख लेता है।
3. जीवन को बनाए रखना: यह सूर्य का प्रकाश, पानी, हवा और मिट्टी प्रदान करके जीवन को संभव बनाता है।
4. सुंदरता प्रदान करना: यह जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है (जैसे नदियाँ, पहाड़, जंगल)।
3. वहन क्षमता (Carrying Capacity)
- वहन क्षमता का अर्थ पर्यावरण की उस क्षमता से है जिससे वह बिना किसी क्षति के संसाधनों के उपयोग और अपशिष्ट उत्पादन को सहन कर सके।
- जब संसाधनों का उपयोग पर्यावरण की वहन क्षमता से अधिक हो जाता है, तो पर्यावरण का क्षय (Environmental Degradation) शुरू हो जाता है।
4. अवसर लागत और पर्यावरण संकट (Opportunity Cost and Environmental Crisis)
- अत्यधिक औद्योगिकीकरण और विकास के कारण आज हमारे सामने गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो गए हैं जैसे:
- ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming)
- ओजोन परत का क्षय (Ozone Depletion)
- मृदा अपरदन (Soil Erosion)
- वनों की कटाई (Deforestation)
5. ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming)
- ग्रीनहाउस गैसों (विशेषकर कार्बन डाइऑक्साइड
CO_2) के वायुमंडल में बढ़ने के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में लगातार वृद्धि को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।
- इसके मुख्य परिणाम हैं: समुद्र के जलस्तर में वृद्धि, ग्लेशियरों का पिघलना और जलवायु परिवर्तन।
6. ओजोन परत का क्षय (Ozone Depletion)
- समताप मंडल में ओजोन (
O_3) की परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV Rays) को पृथ्वी पर आने से रोकती है।
- क्लोरोफ्लुरोकार्बन (CFCs) जैसी गैसों के अत्यधिक उपयोग से ओजोन परत में छेद हो रहा है, जिससे त्वचा कैंसर जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं।
7. सतत विकास (Sustainable Development)
- परिभाषा: सतत विकास वह विकास है जो भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करता है।
- मुख्य विशेषताएँ:
1. आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन।
2. प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग।
3. भविष्य की पीढ़ियों के हितों का ध्यान रखना।
8. सतत विकास प्राप्त करने की रणनीतियाँ (Strategies for Sustainable Development)
1. पारंपरिक ज्ञान और पद्धतियों का उपयोग: पर्यावरण-अनुकूल पारंपरिक तकनीकों को अपनाना।
2. जैविक कृषि (Organic Farming): रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के स्थान पर जैविक खादों का उपयोग करना।
3. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का प्रयोग: कोयला और पेट्रोलियम के स्थान पर सौर ऊर्जा (Solar Energy), पवन ऊर्जा (Wind Energy) आदि का उपयोग करना।
4. सार्वजनिक परिवहन का उपयोग: प्रदूषण कम करने के लिए निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन या साइकिल का उपयोग करना।
5. पुनर्चक्रण (Recycling): कचरे को फेंकने के बजाय उसे दोबारा इस्तेमाल करने योग्य बनाना।