यह त्वरित संशोधन नोट्स मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board) के पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किए गए हैं।
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केंद्रीय प्रवृत्ति की माप वह सांख्यिकीय उपकरण है जो किसी प्रदत्त (data) के एक ऐसे केंद्रीय या प्रतिनिधि मान को ज्ञात करने में मदद करता है जो पूरे समूह का प्रतिनिधित्व करता है। इसे औसत (Average) भी कहा जाता है।
एक अच्छे औसत के आवश्यक गुण:
1. यह स्पष्ट रूप से परिभाषित होना चाहिए।
2. यह सभी प्रेक्षणों (observations) पर आधारित होना चाहिए।
3. यह समझने और गणना करने में सरल होना चाहिए।
4. इस पर नमूनाकरण (sampling) के उतार-चढ़ाव का न्यूनतम प्रभाव पड़ना चाहिए।
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समांतर माध्य सभी प्रेक्षणों के योग को प्रेक्षणों की कुल संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है। इसे X̄ से प्रदर्शित किया जाता है।
#### (क) व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series)
X̄ = ΣX / N
(जहाँ ΣX = मूल्यों का योग, N = पदों की संख्या)
X̄ = A + (Σd / N)
(जहाँ A = कल्पित माध्य, d = विचलन (X - A))
#### (ख) खंडित श्रेणी (Discrete Series)
X̄ = Σ(fX) / Σf
(जहाँ f = आवृत्ति या बारंबारता, X = चर मूल्य)
X̄ = A + (Σfd / Σf)
(जहाँ d = X - A)
#### (ग) सतत श्रेणी (Continuous Series)
X̄ = Σ(fm) / Σf
(जहाँ m = वर्ग अंतराल का मध्य मूल्य (Mid-value), f = आवृत्ति)
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माध्यिका किसी श्रेणी का वह स्थिति संबंधी माध्य है जो आंकड़ों को दो बराबर भागों में बांटता है (ठीक बीच का मान)।
#### (क) व्यक्तिगत और खंडित श्रेणी
1. सबसे पहले आंकड़ों को आरोही (ascending) या अवरोही (descending) क्रम में व्यवस्थित करें।
2. स्थिति ज्ञात करें:
पद का मान = Size of [(N + 1) / 2]-th item
#### (ख) सतत श्रेणी
1. स्थिति ज्ञात करें:
M = Size of (N / 2)-th item
2. माध्यिका वर्ग ज्ञात करने के बाद, सूत्र का प्रयोग करें:
Median = L + [(N/2 - cf) / f] * h
(जहाँ L = माध्यिका वर्ग की निचली सीमा, cf = माध्यिका वर्ग से ठीक पहले वाले वर्ग की संचयी आवृत्ति, f = माध्यिका वर्ग की आवृत्ति, h = वर्ग अंतराल की चौड़ाई)
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बहुलक वह मूल्य है जो किसी श्रेणी में सबसे अधिक बार (अधिकतम आवृत्ति) आता है।
#### (क) व्यक्तिगत श्रेणी
निरीक्षण विधि (Inspection Method) द्वारा सबसे अधिक बार आने वाले पद को बहुलक कहते हैं।
#### (ख) सतत श्रेणी
1. सबसे पहले अधिकतम आवृत्ति (f1) वाला वर्ग (बहुलक वर्ग) पहचानें।
2. सूत्र का प्रयोग करें:
Mode = L + [(f1 - f0) / (2f1 - f0 - f2)] * h
(जहाँ L = बहुलक वर्ग की निचली सीमा, f1 = बहुलक वर्ग की आवृत्ति, f0 = बहुलक वर्ग से ठीक पहले वाले वर्ग की आवृत्ति, f2 = बहुलक वर्ग के ठीक बाद वाले वर्ग की आवृत्ति, h = वर्ग अंतराल)
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एक असममित (Asymmetrical) वितरण में माध्य, माध्यिका और बहुलक के बीच निम्नलिखित संबंध होता है:
बहुलक (Mode) = 3 (माध्यिका) - 2 (समांतर माध्य)
या
Mode = 3 Median - 2 Mean