अध्याय: विधायिका (Legislature) - त्वरित संशोधन नोट्स
#### 1. विधायिका का अर्थ और महत्व
- परिचय: विधायिका सरकार का वह अंग है जो कानून बनाती है। इसे जनता का प्रतिनिधि निकाय भी कहा जाता है।
- महत्व: यह लोकतंत्र का केंद्र है। इसके माध्यम से जनता के प्रतिनिधि नीतियों और कानूनों पर बहस करते हैं और सरकार पर नियंत्रण रखते हैं।
- संसद (Parliament): भारत की केंद्रीय विधायिका को संसद कहा जाता है।
#### 2. भारतीय संसद की संरचना
भारतीय संसद के दो सदन हैं, इसलिए इसे द्विसदनीय विधायिका (Bicameral Legislature) कहा जाता है।
- लोकसभा (निचला सदन / House of the People):
- यह जनता का प्रतिनिधित्व करती है।
- इसके सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा किया जाता है।
- अधिकतम सदस्य संख्या: 550 (वर्तमान में प्रभावी संख्या अलग हो सकती है)।
- राज्यसभा (ऊपरी सदन / Council of States):
- यह राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है।
- इसके सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा होता है।
- अधिकतम सदस्य संख्या: 250 (जिसमें 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा से मनोनीत किए जाते हैं)।
#### 3. लोकसभा और राज्यसभा की शक्तियाँ और कार्य
- कानून निर्माण: देश के लिए सामान्य और धन विधेयक पारित करना।
- कार्यपालिका पर नियंत्रण: मंत्री परिषद की जवाबदेही तय करना, प्रश्नकाल, शून्यकाल, और अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सरकार पर नियंत्रण रखना।
- वित्तीय शक्तियाँ: बजट पारित करना (धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश होता है)।
- संविधान संशोधन: संविधान में संशोधन करने की शक्ति संसद के पास है।
- न्यायिक शक्तियाँ: राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) चलाना और न्यायधीशों को हटाना।
#### 4. लोकसभा और राज्यसभा में अंतर (मुख्य बिंदु)
- लोकसभा: अधिक शक्तिशाली, धन विधेयक केवल यहाँ पेश होते हैं, कार्यकाल 5 वर्ष (भंग हो सकती है)।
- राज्यसभा: तुलनात्मक रूप से कम शक्तिशाली, राज्यों के हितों की रक्षा करती है, यह एक स्थायी सदन है जो कभी पूरी तरह भंग नहीं होता (इसके 1/3 सदस्य हर दो साल बाद सेवानिवृत्त होते हैं)।
#### 5. संसद कानून कैसे बनाती है? (कानून निर्माण की प्रक्रिया)
कोई भी साधारण विधेयक (Ordinary Bill) कानून बनने से पहले निम्नलिखित चरणों से गुजरता है:
1. विधेयक का प्रस्ताव (Introduction/First Reading): सदन में विधेयक पेश करना।
2. समिति चरण (Committee Stage): विधेयक पर गहराई से विचार-विमर्श के लिए समिति को भेजना।
3. दूसरा चरण (Second Reading): खंड-दर-खंड चर्चा और संशोधन।
4. तीसरा चरण (Third Reading): विधेयक पर अंतिम मतदान।
5. दूसरे सदन में भेजा जाना: पहले सदन से पास होने के बाद इसे दूसरे सदन में भेजा जाता है (वहाँ भी यही प्रक्रिया होती है)।
6. राष्ट्रपति की स्वीकृति (Assent of President): दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाता है। हस्ताक्षर के बाद वह कानून (Act) बन जाता है।
#### 6. संसद कार्यपालिका (सरकार) को कैसे नियंत्रित करती है?
- प्रश्नकाल (Question Hour): संसद की बैठक का पहला घंटा, जिसमें सदस्य मंत्रियों से तीखे सवाल पूछते हैं।
- शून्यकाल (Zero Hour): प्रश्नकाल के तुरंत बाद का समय, जिसमें सदस्य बिना पूर्व सूचना के अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे उठाते हैं।
- अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion): यदि लोकसभा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास कर दे, तो प्रधानमंत्री सहित पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।
- निर्णय और बहस: बजट चर्चा और विभिन्न नीतियों पर बहस के माध्यम से।
#### 7. संसद स्वयं को कैसे नियंत्रित करती है?
- अध्यक्ष (Speaker / Chairman): लोकसभा के अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं और अनुशासन बनाए रखते हैं।
- दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law):
- यदि कोई विधायक या सांसद अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाता है, तो उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है।
- यह कानून 1985 में 52वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था।
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यह त्वरित नोट्स कक्षा 11 राजनीति विज्ञान (एमपी बोर्ड) के छात्रों के लिए परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।