कक्षा 11 राजनीति विज्ञान
#### अध्याय: न्यायपालिका (Judiciary) - त्वरितRevision नोट्स
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### परिचय (Introduction)
- न्यायपालिका सरकार का वह अंग है जो कानून की व्याख्या करता है, विवादों को हल करता है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है।
- यह लोकतंत्र का एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्तंभ है जो देश में कानून के शासन (Rule of Law) को बनाए रखता है।
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### मुख्य अवधारणाएँ (Key Concepts)
1. न्यायपालिका की स्वतंत्रता (Independence of Judiciary):
- इसका अर्थ है कि सरकार के अन्य दो अंग (विधायिका और कार्यपालिका) न्यायपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप न करें।
- न्यायधीश बिना किसी भय या पक्षपात के अपना निर्णय दे सकें।
2. न्यायिक समीक्षा (Judicial Review):
- न्यायपालिका की यह शक्ति जिसके तहत वह विधायिका द्वारा बनाए गए किसी भी कानून या कार्यपालिका के आदेश को असंवैधानिक घोषित कर सकती है यदि वह संविधान के खिलाफ हो।
3. जनहित याचिका (Public Interest Litigation - PIL):
- इसके तहत कोई भी व्यक्ति या संस्था अदालत में उन लोगों की तरफ से मामला ला सकती है जिनके अधिकारों का हनन हुआ है और वे खुद अदालत जाने में असमर्थ हैं।
4. न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism):
- जब न्यायपालिका उन मामलों में भी सक्रिय भूमिका निभाती है जहाँ विधायिका या कार्यपालिका विफल हो जाती है या समाज के कल्याण के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता होती है।
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### भारतीय न्यायपालिका की संरचना (Structure of Indian Judiciary)
भारत में न्यायपालिका एक एकहरी (Integrated) न्यायपालिका है, जिसमें सबसे ऊपर सर्वोच्च न्यायालय है:
1. सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court):
- यह देश का शीर्ष न्यायालय है (नई दिल्ली में स्थित)।
- इसके निर्णय देश के सभी अन्य न्यायालयों पर बाध्यकारी होते हैं।
2. उच्च न्यायालय (High Courts):
- यह राज्य स्तर पर सर्वोच्च न्यायिक निकाय है।
3. अधीनस्थ न्यायालय (Subordinate / District Courts):
- यह जिला और स्थानीय स्तर पर काम करते हैं।
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### सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction of Supreme Court)
1. मौलिक क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction):
- वे मामले जो सीधे सबसे पहले सर्वोच्च न्यायालय में ही लाए जा सकते हैं (जैसे- केंद्र और राज्यों के बीच या राज्यों के आपसी विवाद)।
2. रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction):
- मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32 के तहत) और उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226 के तहत) बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, अधिकार पृच्छा आदि रिट जारी करते हैं।
3. अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction):
- उच्च न्यायालयों के फैसलों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार।
4. सलाहकार क्षेत्राधिकार (Advisory Jurisdiction):
- राष्ट्रपति द्वारा कानूनी मामलों या संविधान के किसी प्रावधान पर सलाह मांगने पर सर्वोच्च न्यायालय सलाह दे सकता है (अनुच्छेद 143)।
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### महत्वपूर्ण अनुच्छेद (Important Articles)
- अनुच्छेद 124: भारत के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और गठन से संबंधित।
- अनुच्छेद 32: संवैधानिक उपचारों का अधिकार (इसके तहत सर्वोच्च न्यायालय रिट जारी करता है)।
- अनुच्छेद 141: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून का भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होना।
- अनुच्छेद 226: उच्च न्यायालयों द्वारा रिट जारी करने की शक्ति।
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### परीक्षा की दृष्टि से मुख्य बिंदु (Important Points for Exam)
- न्यायाधीशों की नियुक्ति: भारत में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली (Collegium System) के माध्यम से राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- हटाने की प्रक्रिया (Impeachment / महाभियोग): न्यायाधीशों को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया बेहद कठिन है, जिसे संसद द्वारा 'महाभियोग' के समान प्रक्रिया से हटाया जा सकता है (साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर)।
- न्यायपालिका लोकतंत्र का संरक्षक और संविधान का अंतिम व्याख्याकार है।