अध्याय: पृथ्वी की आंतरिक संरचना - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Formula/Revision Sheet)
कक्षा: 11वीं
विषय: भूगोल (Geography)
बोर्ड: मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board)
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परिचय (Introduction)
पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझना कठिन है क्योंकि पृथ्वी की त्रिज्या लगभग 6400 किमी है। इसलिए, पृथ्वी के आंतरिक भाग की जानकारी मुख्य रूप से अप्रत्यक्ष स्रोतों पर आधारित है।
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1. पृथ्वी के आंतरिक भाग को जानने के साधन (Sources of Information)
पृथ्वी के आंतरिक भाग के अध्ययन के स्रोतों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:
#### क) प्रत्यक्ष स्रोत (Direct Sources):
- चट्टानें और खनन (Rocks and Mining): खानों से प्राप्त चट्टानें। सबसे गहरी खान 'मोटा गोल्डा' (दक्षिण अफ्रीका) लगभग 3-4 किमी गहरी है।
- प्रायोगिक परियोजनाएं (Deep Ocean Drilling Projects): महासागरीय पर्पटी में 'कोला प्रायद्वीप' (Kola Peninsula) पर 12 किमी गहराई तक ड्रिल किया गया है।
- ज्वालामुखी उद्गार (Volcanic Eruptions): पिघला हुआ लावा अचानक धरातल पर आता है, जो आंतरिक भाग के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी देता है।
#### ख) अप्रत्यक्ष स्रोत (Indirect Sources):
- तापमान, दबाव और घनत्व (Temperature, Pressure and Density):
- गहराई के साथ तापमान और दबाव में वृद्धि होती है।
- पृथ्वी के विभिन्न परतों का घनत्व अलग-अलग है, जो केंद्र की ओर बढ़ता जाता है।
- उल्काएं (Meteors): उल्काएं वे ठोस पिंड हैं जो अंतरिक्ष से पृथ्वी पर गिरते हैं। इनकी संरचना भी पृथ्वी जैसी ही होती है, जिससे हमें पृथ्वी के आंतरिक भाग का अनुमान मिलता है।
- गुरुत्वाकर्षण बल (Gravity Anomaly): ध्रुवों पर गुरुत्वाकर्षण अधिक और भूमध्य रेखा पर कम होता है। यह द्रव्यमान के असमान वितरण को दर्शाता है।
- चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field): डायनेमो प्रभाव के कारण पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
- भूकंपीय तरंगें (Seismic Waves): यह पृथ्वी के आंतरिक भाग को जानने का सबसे महत्वपूर्ण और विश्वसनीय स्रोत है।
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2. भूकंपीय तरंगें (Seismic Waves)
भूकंप आने पर ऊर्जा निकलती है जो तरंगों के रूप में चारों दिशाओं में फैलती है। इन्हें भूकंपीय तरंगें कहते हैं। ये दो प्रकार की होती हैं:
#### क) भूगर्भिक तरंगें (Body Waves):
ये उद्गम केंद्र (Focus) से निकलकर पृथ्वी के अंदर सभी दिशाओं में यात्रा करती हैं। ये दो प्रकार की होती हैं:
1. प्राथमिक तरंगें (P-Waves / Primary Waves):
- ये ध्वनि तरंगों जैसी होती हैं।
- ये ठोस, तरल और गैस - तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं।
- इनकी गति सबसे तेज होती है।
2. द्वितीयक तरंगें (S-Waves / Secondary Waves):
- ये प्रकाश तरंगों (अनुप्रस्थ) जैसी होती हैं।
- ये केवल ठोस माध्यम से गुजर सकती हैं, तरल में लुप्त हो जाती हैं।
- इनकी गति P-तरंगों से कम होती है।
#### ख) धरातलीय तरंगें (Surface Waves):
- भूगर्भिक तरंगें जब धरातल से टकराती हैं, तब इनका निर्माण होता है।
- ये सबसे अंतिम में धरातल पर पहुँचती हैं।
- ये सबसे अधिक विनाशकारी होती हैं। (उदाहरण: रेले तरंगें और लव तरंगें)।
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3. पृथ्वी की परते (Layers of the Earth)
भूकंपीय तरंगों के वेग और घनत्व के आधार पर पृथ्वी को मुख्य रूप से तीन परतों में विभाजित किया गया है:
#### 1. भूपर्पटी (Crust):
- यह पृथ्वी की सबसे बाहरी ठोस परत है।
- इसकी मोटाई महाद्वीपों पर अधिक (लगभग 30 किमी) और महासागरों के नीचे कम (लगभग 5 किमी) होती है।
- मुख्य तत्व: सिलिका (Si) और एल्युमिनियम (Al), इसलिए इसे Sial भी कहते हैं।
- महासागरीय पर्पटी में सिलिका और मैग्नीशियम (Mg) अधिक होता है, जिसे Sima कहते हैं।
- औसत घनत्व: 2.7 से 3.0 g/cm³।
#### 2. मैंटल (Mantle):
- भूपर्पटी के नीचे का भाग 'मैंटल' कहलाता है।
- यह मोहरोविक असंबद्धता (Moho Discontinuity) से लेकर 2900 किमी की गहराई तक फैला है।
- इसका अधिकांश भाग 'एस्थेनोस्फेयर' (Asthenosphere) कहलाता है, जो अर्ध-तरल अवस्था में होता है और मैग्मा का मुख्य स्रोत है।
- औसत घनत्व: 3.5 से 5.5 g/cm³।
#### 3. क्रोड या कोर (Core/Barysphere):
- यह पृथ्वी का सबसे आंतरिक भाग है जो 2900 किमी से 6400 किमी की गहराई तक है।
- यह दो भागों में बंटा है: बाहरी क्रोड (तरल अवस्था) और आंतरिक क्रोड (ठोस अवस्था)।
- मुख्य तत्व: निकिल (Ni) और लोहा (Fe), इसलिए इसे Nife भी कहा जाता है।
- पृथ्वी का घनत्व केंद्र की ओर जाने पर सबसे अधिक (लगभग 13 g/cm³) हो जाता है।
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4. असंबद्धता क्षेत्र (Discontinuity Zones)
पृथ्वी के भीतर वे क्षेत्र जहाँ भूकंपीय तरंगों की गति या घनत्व में अचानक परिवर्तन होता है, असंबद्धता कहलाते हैं:
1. कॉनरैड असंबद्धता (Conrad Discontinuity): ऊपरी और निचली भूपर्पटी के बीच।
2. मोहरोविक असंबद्धता / मोहो (Mohorovicic Discontinuity): भूपर्पटी और मैंटल के बीच।
3. रेपेटी असंबद्धता (Repetti Discontinuity): ऊपरी और निचले मैंटल के बीच।
4. गुटेनबर्ग असंबद्धता (Gutenberg Discontinuity): मैंटल और बाहरी क्रोड के बीच। (यहाँ S-तरंगें लुप्त हो जाती हैं)।
5. लेहमैन असंबद्धता (Lehmann Discontinuity): बाहरी क्रोड और आंतरिक क्रोड के बीच।
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5. ज्वालामुखी और उससे संबंधित आकृतियाँ (Volcanoes and Landforms)
- मैग्मा (Magma): पृथ्वी के भीतर पिघला हुआ शैल पदार्थ।
- लावा (Lava): जब मैग्मा धरातल पर आ जाता है।
आंतरिक आकृतियाँ (Intrusive Landforms):
- बैथोलिथ (Batholiths): बड़े आकार का मैग्मा पिंड (ग्रेनाइट का जमाव)।
- लैकोलिथ (Laccoliths): गुंबद के आकार के बड़े अंतर्वेधी पिंड।
- लोपोलिथ (Lopoliths): तश्तरी (Saucer) के आकार का जमाव।
- फैकोलिथ (Phacoliths): लहरदार रूप में तरंगित पिंड।
- सिल (Sill): क्षैतिज रूप में मैग्मा का जमना।
- डाइक (Dyke): दीवार की तरह खड़े रूप में मैग्मा का जमना।