कक्षा 11 भूगोल - त्वरित पुनرीक्षण नोट्स
#### अध्याय: भूआकृतियाँ तथा उनका विकास (Landforms and their Evolution)
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परिचय (Introduction)
- भूआकृति विज्ञान (Geomorphology): पृथ्वी की सतह पर पाए जाने वाले विभिन्न भू-रूपों (Landforms) के अध्ययन को भूआकृति विज्ञान कहते हैं।
- बहिर्जात कारक (Exogenic Forces): ये कारक पृथ्वी की सतह पर कार्य करते हैं (जैसे- नदी, पवन, हिमानी, भूमिगत जल और लहरें) और इन्हें 'आच्छादक बल' (Denudational agents) भी कहते हैं।
- प्रक्रम (Processes): अपक्षय (Weathering), अपरदन (Erosion), परिवहन (Transportation) और निक्षेपण (Deposition) मुख्य बहिर्जात प्रक्रम हैं।
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1. नदी और उसके कार्य (Running Water / Rivers)
नदी के अपरदन और निक्षेपण से विभिन्न भूआकृतियों का निर्माण होता है:
- युवावस्था की भूआकृतियाँ (Youth Stage):
- गॉर्ज (Gorge) और कैनान (Canyon): नदी द्वारा लंबवत अपरदन (Vertical erosion) से गहरी और संकरी घाटियाँ बनती हैं। कैनान सीढ़ीनुमा होता है (जैसे- कोलोराडो नदी का ग्रैंड कैनान)।
- जलप्रपात (Waterfalls): कठोर और कोमल चट्टानों के क्रमिक अंतर के कारण नदी का जल ऊँचाई से नीचे गिरता है।
- प्रौढ़ावस्था की भूआकृतियाँ (Mature Stage):
- विसर्प (Meanders): मैदानी भागों में नदी के मार्ग में मोड़ या घुमाव को विसर्प कहते हैं।
- गोखुर झील (Oxbow Lake): विसर्प के अत्यधिक तीखे होने पर नदी सीधा मार्ग अपना लेती है और कटा हुआ लूप एक झील का रूप ले लेता है।
- जीर्णावस्था / वृद्धावस्था की भूआकृतियाँ (Old Stage):
- डेल्टा (Deltas): नदी के मुने पर अवसादों के निक्षेपण से त्रिभुजाकार मैदान बनता है (जैसे- सुंदरबन डेल्टा)।
- बाढ़ के मैदान (Floodplains) और प्राकृतिक तटबंध (Natural Levees): नदी द्वारा लाई गई मिट्टी के जमाव से बनते हैं।
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2. भौम जल या भूमिगत जल (Groundwater)
चूना पत्थर (Limestone) वाले क्षेत्रों में भूमिगत जल के रासायनिक घोल (Solution) और निक्षेपण क्रिया से 'कार्स्ट स्थलाकृति' (Karst Topography) बनती है।
- अपरदनात्मक भूआकृतियाँ (Erosional Landforms):
- घोलरंध्र (Sinkholes): चूना पत्थर के घुलने से बने छोटे-छोटे छिद्र या गड्ढे।
- लैपिजेज (Lapies): जब घोलरंध्र और विलयन रंध्र आपस में मिल जाते हैं तो उबड़-खाबड़ धरातल बनता है।
- कंदराएँ (Caves): भूमिगत जल द्वारा चट्टानों के घुलने से बनी लंबी गुफाएँ।
- निक्षेपात्मक भूआकृतियाँ (Depositional Landforms):
- स्टैलेक्टाइट (Stalactites): कंदरा की छत से नीचे की ओर लटकते हुए चूने के स्तंभ।
- स्टैलगमाइट्स (Stalagmites): कंदरा के फर्श से ऊपर की ओर उठते हुए चूने के स्तंभ।
- स्तंभ (Pillars): जब स्टैलेक्टाइट और स्टैलगमाइट आपस में मिल जाते हैं।
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3. हिमानी या ग्लेशियर (Glaciers)
उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ के खिसकने से हिमानी भूआकृतियाँ बनती हैं।
- अपरदनात्मक भूआकृतियाँ (Erosional Landforms):
- यू-आकार की घाटी (U-shaped Valley): हिमानी के पार्श्व और तलीय अपरदन से घाटी 'U' आकार की हो जाती है।
- Cirque (सर्क / कोर्री): आरामकुर्सी जैसी गहरी घाटी जो हिमानी के उद्गम स्थल पर बनती है।
- हॉर्न (Horns): पिरामिडनुमा चोटी जो चारों तरफ से सर्क के पीछे हटने से बनती है (जैसे- मैटरहॉर्न)।
- नूनाटक (Nunataks): हिमानियों के बीच उभरे हुए चट्टानी द्वीप।
- निक्षेपात्मक भूआकृतियाँ (Depositional Landforms):
- मोरेन या हिमोध्र (Moraines): हिमानी द्वारा लाए गए मलबे का निक्षेप (पार्श्व, तलस्थ, और अंत्य मोरेन)।
- ड्रमलिन (Drumlins): अंडे की टोकरी जैसी स्थलाकृति जो हिमानी निक्षेप से बनती है।
- एस्कर (Eskers): हिमानी के पिघलने से जल के साथ बहने वाले रेत और बजरी के लंबे सीधे कटक।
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4. पवन और मरुस्थलीय कार्य (Wind and Aeolian Landforms)
शुष्क और मरुस्थलीय क्षेत्रों में पवन मुख्य अपरदन और निक्षेपण का कारक होती है।
- अपरदनात्मक भूआकृतियाँ (Erosional Landforms):
- वातगर्त (Blowouts): पवन द्वारा धूल-मिट्टी उड़ा ले जाने से बने गड्ढे।
- इंसबर्ग (Inselbergs): मरुस्थल में खड़े कठोर चट्टानी द्वीप या अवशेष पहाड़।
- छत्रक शिला (Yardangs / Mushroom Rocks): पवन के अपघर्षी कार्य से मशरूम जैसी आकृति वाली चट्टानें।
- निक्षेपात्मक भूआकृतियाँ (Depositional Landforms):
- बालू टिब्बा या रेत के टीबे (Sand Dunes): पवन द्वारा उड़ाई गई रेत के जमाव से बने टीबे।
- बरखान (Barchans): अर्धचंद्रकार बालू के टीबे।
- लोएस (Loess): मरुस्थल से दूर जाकर उपजाऊ सूक्ष्म धूलकणों का वृहद निक्षेप (जैसे- चीन का लोएस मैदान)।
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5. लहरें और तटीय कार्य (Waves and Shorelines)
समुद्र तटों पर लहरों और धाराओं के कारण तटीय भूआकृतियाँ बनती हैं।
- अपरदनात्मक भूआकृतियाँ (Erosional Landforms):
- भ्रगु (Cliffs): लहरों की लगातार टक्कर से कटी-फटी खड़ी चट्टानें।
- समुद्री गुफा (Sea Caves): लहरों के कटाव से चट्टानों में बनी गुफाएँ।
- समुद्री आर्च (Sea Arches): जब समुद्री गुफा दोनों तरफ से कट जाती है।
- स्टैक (Stacks): आर्च की छत गिरने के बाद बचा हुआ अकेला खंभा।
- निक्षेपात्मक भूआकृतियाँ (Depositional Landforms):
- पलीन या बीच (Beaches): तटीय क्षेत्रों में रेत और बजरी का निक्षेप।
- स्पिट (Spit): समुद्र की तरफ आगे बढ़ा हुआ रेत का कटक जिसका एक सिरा तट से जुड़ा हो।
- लैगून (Lagoons): स्पिट और बार द्वारा समुद्र के पानी का कुछ हिस्सा अलग होने से बनी खारे पानी की झील (जैसे- चिल्का झील)।
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मुख्य शब्दावली (Key Terms - त्वरित रिवीजन)
1. आच्छादन (Denudation): अपक्षय और अपरदन की संयुक्त प्रक्रिया।
2. अपघर्षण (Abrasion): बहते हुए पदार्थों द्वारा चट्टानों पर रगड़ खाकर काटना।
3. कार्स्ट प्रदेश (Karst Region): चूना पत्थर युक्त क्षेत्र जहाँ भूमिगत जल प्रमुख कार्य करता है।
4. बालुका स्तूप (Sand Dunes): मरुस्थल में रेत का ढेर।