मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 11वीं हिंदी (वितान भाग 1)
पाठ: अपू के साथ ढाई साल
त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Quick Revision Notes)
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परिचय
- पाठ के लेखक: सत्यजित राय
- पाठ की विधा: संस्मरण / आत्मकथात्मक अंश
- मूल प्रसंग: यह पाठ सत्यजित राय की प्रसिद्ध बंगाली फिल्म 'पथेर पांचाली' के निर्माण के दौरान आने वाले अनुभवों, कठिनाइयों और रोचक घटनाओं पर आधारित है।
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मुख्य बिंदु एवं सारांश
1. फिल्म का निर्माण और समय:
- 'पथेर पांचाली' फिल्म का काम ढाई साल से भी अधिक समय तक चला।
- यह फिल्म निर्देशकों के लिए किसी तपस्या से कम नहीं थी, क्योंकि इसकी शूटिंग केवल छुट्टियों के दिनों में और पैसों की कमी के कारण रुक-रुक कर होती थी।
2. अपू की तलाश:
- फिल्म के मुख्य पात्र 'अपू' की भूमिका के लिए कई बच्चों का साक्षात्कार (इंटरव्यू) लिया गया, लेकिन उपयुक्त बच्चा नहीं मिल रहा था।
- अंत में, कोलकाता के एक मकान में एक लड़के 'सुबीर बनर्जी' को अपू के रूप में चुना गया, जो इस फिल्म का मुख्य बाल कलाकार बना।
3. दुर्गा की तलाश:
- अपू की बड़ी बहन 'दुर्गा' के किरदार के लिए भी बहुत खोजबीन की गई।
- अंत में 'उमा दासगुप्ता' को दुर्गा के रूप में चुना गया, जो अपनी भूमिका में पूरी तरह फिट बैठीं।
4. कासफूलो का मैदान (अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग):
- फिल्म में एक दृश्य था जहाँ अपू और दुर्गा शरद ऋतु में खिले सफेद 'कासफूलो' के मैदान में ट्रेन देखने जाते हैं।
- समस्या: आधे दृश्य की शूटिंग अक्टूबर में हुई थी, जिसमें कासफूलो के फूल खिले थे। बाकी आधे दृश्य की शूटिंग अगले साल अक्टूबर में होनी थी।
- कठिनाई: इस बीच गायों ने मैदान के सारे फूल खा लिए थे।
- समाधान: जब अगले साल दोबारा शूटिंग हुई, तो कासफूलो के फूल दोबारा उगे और फिल्म का वह प्रसिद्ध दृश्य पूरा किया गया।
5. भूलने की बीमारी (घटनाएँ):
- पॉलदा की भूमिका: फिल्म में एक ग्रामीण चरित्र 'पॉलदा' का था, जिनकी भूमिका निभाने वाले अभिनेता का देहांत हो गया था। लेखक ने दर्शकों को उनका चेहरा नहीं दिखाया, बल्कि एक अन्य व्यक्ति को वैसे ही बालों और शारीरिक बनावट में पीछे से शूट करके काम चलाया।
- कुत्तों का दृश्य: फिल्म में एक सीन था जहाँ अपू के पिता उसे मिठाई खरीदने के लिए पैसे देते हैं और अपू मिठाई की दुकान की तरफ भागता है। इस सीन में एक पालतू कुत्ता भी अपू के साथ दौड़ता है। निर्देशक को ऐसा कुत्ता चाहिए था जो दिखने में आवारा लगे, और इसके लिए उन्होंने एक स्थानीय कुत्ते का इस्तेमाल किया जो कैमरे के सामने वैसे ही दौड़ा जैसा निर्देशक चाहते थे।
6. भूलने की बीमारी (शूटिंग से जुड़ी एक और घटना):
- एक दृश्य में अपू और दुर्गा रेलगाड़ी देखने जाते हैं। बारिश के मौसम में ट्रेन का शॉट लेना था। अपू की भूमिका निभाने वाला सुबीर बनर्जी कैमरे की तरफ पीठ करके खड़ा होता है और ट्रेन देखता है।
- लेकिन बारिश न होने के कारण शॉट पूरा नहीं हो पाया और अगले साल जब बारिश हुई, तो सुबीर बनर्जी की उम्र थोड़ी बढ़ चुकी थी और उसके बाल छोटे हो गए थे। निर्देशक ने continuity (निरंतरता) बनाए रखने के लिए इन छोटी-छोटी बातों का बहुत बारीकी से ध्यान रखा।
7. आर्थिक तंगी और शूटिंग का रुकना:
- फिल्म निर्माण के दौरान कई बार पैसे खत्म हो जाते थे।
- जब पैसे मिलते थे, तब शूटिंग फिर से शुरू होती थी। यही कारण है कि यह फिल्म 'ढाई साल' तक चली।
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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रश्न (Quick Tips for Exam)
- प्रश्न: 'पथेर पांचाली' फिल्म की शूटिंग ढाई साल तक क्यों चली?
- उत्तर: पैसों की कमी और निर्देशक व कलाकारों के व्यस्त होने के कारण शूटिंग केवल छुट्टियों में और रुक-रुक कर होती थी।
- प्रश्न: कासफूलो के मैदान वाला दृश्य क्यों यादगार है?
- उत्तर: क्योंकि यह दृश्य दो अलग-अलग वर्षों (अक्टूबर) में शूट किया गया था, जब बीच में गायों ने फूल खा लिए थे और अगले साल दोबारा फूल आने पर शूटिंग पूरी हुई थी।
- प्रश्न: सत्यजित राय ने फिल्म निर्माण के दौरान किन कठिनाइयों का सामना किया?
- उत्तर: आर्थिक तंगी, मौसम की अनिश्चितता, बाल कलाकारों का बड़ा होना और शूटिंग के समय अभिनेताओं या जानवरों की व्यवस्था करना।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 अपू के साथ ढाई साल
पाठ परिचय
लेखक: सत्यजित राय
विधा: संस्मरण
मूल विषय: 'पथेर पांचाली' फिल्म के निर्माण का संघर्ष और अनुभव
फिल्म निर्माण की शुरुआत और समस्याएँ
पैसे की कमी
शूटिंग रुक-रुक कर होना
कलाकारों का बदलना (जैसे अपू की उम्र बढ़ना)
आर्थिक तंगी के कारण
विज्ञापनों से पैसे मिलना
उधार मांगकर काम चलाना
मुख्य पात्र और चयन
अपू (असुब बनर्जी)
उम्र: लगभग साढ़े छह वर्ष
सहज अभिनय
दुर्गा (रुमा बनर्जी)
अपू की बड़ी बहन
इंदिर ठाकुराँ (चूनाबाला देवी)
अस्सी साल की वृद्ध अभिनेत्री
दाँत न होने के बावजूद शानदार अभिनय
रोचक शूटिंग प्रसंग और घटनाएँ
काशस के फूल का दृश्य
ट्रेन का शॉट
अपू और दुर्गा का दौड़ना
आधा दृश्य बारिश के अभाव में एक साल बाद शूट हुआ
भूखंड (लोकेशन) की समस्या
बंगाल के पालक्षित गाँव में शूटिंग
काशफुल के मैदान की खोज
गाय वाला प्रसंग
काली गाय का अचानक गायब होना
निरंतरता (कन्टिन्यूटी) की समस्या
मिठाई वाला दृश्य
भूखा बच्चा और रसगुल्ला
बच्चे का कैमरे की तरफ देखकर मुस्कुराना
सत्यजित राय की कलात्मक दृष्टि
धैर्य और समर्पण
परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाना
प्राकृतिक दृश्यों का सुंदर प्रयोग
निष्कर्ष
फिल्म निर्माण का अनमोल अनुभव
भारतीय सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): यह सिखाता है कि सच्ची कलात्मक रचना के लिए अपार धैर्य, समर्पण, दृढ़ता और जुनून की आवश्यकता होती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद हर बाधा को पार कर लेती है।
उत्तर (Answer): फिल्म को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा क्योंकि यह बहुत कम व्यक्तिगत बचतों से बनाई जा रही थी, और अधिक धन जुटाने तक शूटिंग बार-बार रोकनी पड़ती थी।
उत्तर (Answer): फिल्म में अप्पू और दुर्गा की माँ सर्वजया की भूमिका करुणा बनर्जी ने निभाई थी।
उत्तर (Answer): फिल्म में अप्पू और दुर्गा के पिता हरिहर की भूमिका कानू बनर्जी ने निभाई थी।
उत्तर (Answer): ठंडी सर्दियों की बारिश में लंबी शूटिंग के कारण एक बाल कलाकार को सर्दी लग गई और वह कांपने लगा, जिससे शूटिंग रोककर गर्म दूध देना पड़ा।
उत्तर (Answer): बहुत इंतजार के बाद जब आखिरकार सर्दियों में अचानक बारिश हुई, तो राय ने प्रसिद्ध बारिश के दृश्य को शूट करने के लिए तुरंत अपने क्रू और बाल कलाकारों को इकट्ठा किया।
उत्तर (Answer): समस्या यह थी कि जब उनके पास खाली समय और पैसा था तब सर्दियों में बारिश नहीं हुई, और जब मानसून आया तो पैसों की कमी के कारण शूटिंग में देरी हुई।
उत्तर (Answer): शूटिंग की जगह इसलिए बदलनी पड़ी क्योंकि तालाब वाले घर के मालिक ने अनुमति देने से मना कर दिया था और बाँस के कुछ झुंड काट दिए गए थे।
उत्तर (Answer): फिल्म का अधिकांश हिस्सा कलकत्ता से लगभग दस मील दूर स्थित बोरल गाँव में फिल्माया गया था।
उत्तर (Answer): वह एक वृद्ध अभिनेत्री थीं जिन्होंने बहुत पहले अभिनय छोड़ दिया था और अत्यधिक गरीबी में जी रही थीं, फिर भी लगभग अस्सी वर्ष की आयु में उन्होंने बेहतरीन अभिनय किया।
उत्तर (Answer): 80 वर्षीय इंदिरा ठाकुराइन की भूमिका चुनीबाला देवी ने अद्भुत समर्पण के साथ निभाई थी।
उत्तर (Answer): उन्होंने अगले साल शरद ऋतु में दोबारा काश फूल खिलने पर पहले के फुटेज से मिलान करके उस दृश्य को पूरा किया।
उत्तर (Answer): शूटिंग बाधित हुई क्योंकि आधे दृश्य एक शरद ऋतु में शूट किए गए थे, और अगली शरद ऋतु में जब वे बाकी की शूटिंग करने लौटे, तो गायों ने सारे काश फूल खा लिए थे।
उत्तर (Answer): दूसरा लड़का सुबीर बनर्जी, निर्देशक की पत्नी द्वारा की गई कड़ी खोज के बाद गोलबाड़ी के एक मोहल्ले के घर में मिला था।
उत्तर (Answer): जैसे-जैसे शूटिंग लंबी खिंची, पहला लड़का काफी बड़ा हो गया और उसके बाल भी बढ़ गए, जिससे वह छोटे अप्पू की भूमिका निभाने के लिए अनुपयुक्त हो गया।