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विद्युत धारा

Subject: भौतिकी | Class: Class 12 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 12 भौतिकी - अध्याय: विधुत धारा (Current Electricity) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स

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### 1. विधुत धारा (Electric Current)

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### 2. अपवाह वेग और विधुत धारा में संबंध (Drift Velocity and Current)

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### 3. ओम का नियम (Ohm's Law)

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### 4. प्रतिरोधकता और चालकता (Resistivity and Conductivity)

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### 5. तापमान पर प्रतिरोध की निर्भरता (Temperature Dependence of Resistance)

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### 6. प्रतिरोधों का संयोजन (Combination of Resistors)

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### 7. विधुत सेल, विभव और आंतरिक प्रतिरोध (Electric Cell, EMF and Internal Resistance)

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### 8. सेलों का समूहन (Grouping of Cells)

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### 9. किरचॉफ के नियम (Kirchhoff's Laws)

1. किरचॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम / Current Law - KCL):

2. किरचॉफ का द्वितीय नियम (लूप नियम / Voltage Law - KVL):


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### 10. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge)

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### 11. मीटर सेतु (Meter Bridge)

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### 12. विभवमापी (Potentiometer)

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### 13. विधुत ऊर्जा और शक्ति (Electric Energy and Power)
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 वैधुत धारा
Overview
विद्युत धारा और आवेश विद्युत धारा की परिभाषा धारा घनत्व अपवाह वेग (ड्रिफ्ट वेलोसिटी) गतिशीलता (मोबिलिटी) ओम का नियम नियम और कथन प्रतिरोध ($R$) और प्रतिरोधकता ($\rho$) ओम के नियम की सीमाएं प्रतिरोध पर तापमान का प्रभाव प्रतिरोधों का संयोजन श्रेणी क्रम संयोजन समांतर क्रम संयोजन समतुल्य प्रतिरोध की गणना विद्युत सेल, ई.एम.एफ. और विभवांतर विद्युत वाहक बल (EMF) टर्मिनल विभवांतर सेल का आंतरिक प्रतिरोध सेलों का संयोजन (श्रेणी और समांतर) किरचॉफ के नियम संधि नियम (पहला नियम / आवेश संरक्षण) लूप नियम (दूसरा नियम / ऊर्जा संरक्षण) वीटस्टोन सेतु का सिद्धांत विद्युत उपकरण मीटर ब्रिज विभवमापी (पोटेंशियोमीटर) आंतरिक प्रतिरोध ज्ञात करना दो सेलों के EMF की तुलना विद्युत ऊर्जा और शक्ति विद्युत ऊर्जा विद्युत शक्ति सूत्र ($P = VI$) जूल का तापीय प्रभाव
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. विद्युत परिपथों के लिए किरचॉफ के नियमों को लिखिए। इन नियमों का उपयोग करके व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन अवस्था प्राप्त कीजिए। साथ ही, एक संख्यात्मक समस्या को हल कीजिए जिसमें एक व्हीटस्टोन सेतु की भुजाओं के प्रतिरोध $P = 100\,\Omega$, $Q = 10\,\Omega$, $R = 50\,\Omega$, और $S = 5\,\Omega$ हैं। $20\,\Omega$ प्रतिरोध वाले गैल्वेनोमीटर से प्रवाहित होने वाली धारा का मान ज्ञात कीजिए जब सेतु के सिरों पर $2\,\text{V}$ विद्युत वाहक बल और नगण्य आंतरिक प्रतिरोध का एक सेल जुड़ा हुआ है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### किरचॉफ के नियम 1. **किरचॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम):** किसी भी बंद विद्युत परिपथ में किसी भी संधि पर मिलने वाली धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। $$\sum I = 0$$ यह नियम आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। 2. **किरचॉफ का द्वितीय नियम (पाश नियम / वोल्टता नियम):** किसी बंद परिपथ या पाश (loop) में प्रतिरोधकों और सेलों के सिरों के विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है। $$\sum \Delta V = 0$$ या $\sum E = \sum IR$ यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। ### व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन अवस्था \nएक व्हीटस्टोन सेतु में चार प्रतिरोध $P, Q, R,$ और $S$ एक चतुर्भुज के रूप में जुड़े होते हैं। एक गैल्वेनोमीटर (प्रतिरोध $G$) को एक विकर्ण पर जोड़ा जाता है तथा दूसरे विकर्ण पर सेल जोड़ा जाता है। - किरचॉफ के नियमों को लागू करने पर: - संधि $B$ पर KCL से: $I_1 = I_3 + I_g$ - संधि $D$ पर KCL से: $I_4 = I_2 + I_g$ - बंद पाश $ABDA$ के लिए KVL: $-I_1 P - I_g G + I_2 R = 0$ - बंद पाश $BCDB$ के लिए KVL: $-I_3 Q + I_4 S + I_g G = 0$ \nसंतुलन अवस्था में गैल्वेनोमीटर में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती, अर्थात $I_g = 0$ होता है।\nमान रखने पर: $$\frac{P}{Q} = \frac{R}{S}$$\nयह व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन की आवश्यक शर्त है। ### संख्यात्मक समस्या का हल **दिया गया डेटा:** - $P = 100\,\Omega$ - $Q = 10\,\Omega$ - $R = 50\,\Omega$ - $S = 5\,\Omega$ - $G = 20\,\Omega$ - सेल का विद्युत वाहक बल $E = 2\,\text{V}$ \nसंतुलन जाँचने पर: $\frac{P}{Q} = \frac{100}{10} = 10$ और $\frac{R}{S} = \frac{50}{5} = 10$ है।\nचूँकि अनुपात समान हैं, **सेतु संतुलित अवस्था में है**। अतः गैल्वेनोमीटर से प्रवाहित होने वाली धारा **$I_g = 0$** होगी।
Q2. एक सुचालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की ड्रिफ्ट वेलोसिटी की परिभाषा दीजिये। विद्युत धारा और ड्रिफ्ट वेलोसिटी के बीच संबंध स्थापित कीजिये और इस प्रकार सूक्ष्म स्तर पर ओह्म का नियम निकालिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### अपवाह वेग की परिभाषा - **अपवाह वेग ($v_d$):** इसे उस औसत वेग के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके द्वारा मुक्त इलेक्ट्रॉन बाहरी विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में चालक के धनात्मक टर्मिनल की ओर प्रवाहित होते हैं। - अपवाह वेग का परिमाण आमतौर पर $10^{-4}\text{ m/s}$ की कोटि का होता है। - सूत्र: $v_d = \frac{eE}{m} \tau$, जहाँ $e$ इलेक्ट्रॉनिक आवेश है, $E$ विद्युत क्षेत्र है, $m$ इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है, और $\tau$ विश्रांति काल है। ### विद्युत धारा और अपवाह वेग के बीच संबंध\nलंबाई $L$ और अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल $A$ के एक एकसमान चालक पर विचार करें। मान लीजिए: - $n$ = मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व (प्रति इकाई आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या) - $e$ = एक इलेक्ट्रॉन का आवेश - $v_d$ = इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग \nलंबाई $v_d$ और क्षेत्रफल $A$ के चालक का कुल आयतन $A v_d$ है। समय $t=1\text{ सेकंड}$ में चालक के किसी भी अनुप्रस्थ काट को पार करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या इस प्रकार दी जाती है: $$\text{इलेक्ट्रॉनों की संख्या} = n A v_d$$ \nसमय $t$ में अनुप्रस्थ काट से बहने वाला कुल आवेश $q$ है: $$q = (n A v_d t) e$$ \nचूँकि विद्युत धारा $I$ आवेश के प्रवाह की दर है ($I = \frac{q}{t}$), हम प्राप्त करते हैं: $$I = \frac{n A v_d t e}{t}$| $$I = n e A v_d$$ ### ओम के नियम की व्युत्पत्ति\nहम जानते हैं कि अपवाह वेग इस प्रकार दिया जाता है: $$v_d = \frac{e E \tau}{m}$| \nधारा समीकरण में $v_d$ के व्यंजक को प्रतिस्थापित करने पर: $$I = n e A \left( \frac{e E \tau}{m} \right)$| $$I = \frac{n e^2 A \tau E}{m}$| \nचूँकि लंबाई $L$ पर विभवांतर $V$ के पदों में विद्युत क्षेत्र $E = \frac{V}{L}$ है, इसे प्रतिस्थापित करें: $$I = \frac{n e^2 A \tau}{m} \left( \frac{V}{L} \right)$| $V$ को अलग करने के लिए पदों को पुनर्व्यवस्थित करना: $$V = \left( \frac{m L}{n e^2 A \tau} \right) I$$ \nकोष्ठक के अंदर का पद $\left( \frac{m L}{n e^2 A \tau} \right)$ केवल चालक के पदार्थ के गुणों, आयामों और तापमान पर निर्भर करता है, जो स्थिर रहता है। इस पद को चालक के विद्युत प्रतिरोध ($R$) के रूप में परिभाषित किया जाता है: $$R = \frac{m L}{n e^2 A \tau}$| \nइस प्रकार, हम प्राप्त करते हैं: $$V = I R$$ या $\frac{V}{I} = R$ \nयह ओम का सूक्ष्म व्युत्पत्ति है।
Q3. पोटेंशियोमीटर की डोरी की लंबाई $10 ext{ m}$ है और इसका प्रतिरोध $20, Omega$ है। यह एक $15 ext{ V}$ बैटरी और एक बाहरी प्रतिरोध $40, Omega$ के साथ श्रृंखला में जुड़ा हुआ है। निम्नलिखित की गणना करें: 1. डोरी पर संभावित ग्रेडिएंट। 2. एक सेल के लिए संतुलन की लंबाई जिसका ईएमएफ $1.2 ext{ V}$ है, द्वितीयक सर्किट में जुड़ा हुआ है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा: - विभवमापी तार की लंबाई, $L = 10\text{ m}$ - विभवमापी तार का प्रतिरोध, $R_w = 20\, \Omega$ - प्राथमिक परिपथ में बैटरी का विद्युत वाहक बल, $E = 15\text{ V}$ - श्रेणी क्रम में बाहरी प्रतिरोध, $R = 40\, \Omega$ - द्वितीयक परिपथ में सेल का विद्युत वाहक बल, $E' = 1.2\text{ V}$ --- ### चरण 1: प्राथमिक परिपथ का कुल प्रतिरोध ($R_{\text{total}}$) ज्ञात करना\nप्राथमिक परिपथ का कुल प्रतिरोध बाहरी प्रतिरोध और विभवमापी तार के प्रतिरोध का योग है: $$R_{\text{total}} = R + R_w$$ $$R_{\text{total}} = 40\, \Omega + 20\, \Omega = 60\, \Omega$$ --- ### चरण 2: प्राथमिक परिपथ में धारा ($I$) ज्ञात करना\nओम के नियम का उपयोग करते हुए, प्राथमिक परिपथ में प्रवाहित धारा है: $$I = \frac{E}{R_{\text{total}}}$$ $$I = \frac{15\text{ V}}{60\, \Omega} = 0.25\text{ A}$$ --- ### चरण 3: विभवमापी तार के सिरों पर विभवांतर ($V_w$) ज्ञात करना\nविभवमापी तार के सिरों पर विभवांतर इस प्रकार है: $$V_w = I \times R_w$$ $$V_w = 0.25\text{ A} \times 20\, \Omega = 5\text{ V}$$ --- ### चरण 4: तार के अनुदिश विभव प्रवणता ($k$) ज्ञात करना\nविभव प्रवणता ($k$) को तार की प्रति इकाई लंबाई पर विभव पतन के रूप में परिभाषित किया जाता है: $$k = \frac{V_w}{L}$$ $$k = \frac{5\text{ V}}{10\text{ m}} = 0.5\text{ V/m}$$ --- ### चरण 5: द्वितीयक सेल के लिए संतुलन लंबाई ($l$) ज्ञात करना\nद्वितीयक सेल का विद्युत वाहक बल तार की लंबाई $l$ पर विभव पतन द्वारा संतुलित होता है: $$E' = k \times l$$ $$l = \frac{E'}{k}$$ $$l = \frac{1.2\text{ V}}{0.5\text{ V/m}} = 2.4\text{ m}$$ --- ### अंतिम उत्तर: 1. तार के अनुदिश विभव प्रवणता **$0.5\text{ V/m}$** है। 2. सेल के लिए संतुलन लंबाई **$2.4\text{ m}$** है।
Q4. किसी संचालक में नि:शुल्क इलेक्ट्रॉनों की द्रवण वेग क्या है? द्रवण वेग और विद्युत धारा के बीच संबंध स्थापित करें। इसके बाद, ओह्म का नियम निकालें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### अपवाह वेग (ड्रिफ्ट वेलोसिटी) की परिभाषा \nविद्युत क्षेत्र की अनुपस्थिति में, धात्विक चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन तापीय हलचल के कारण सभी संभव दिशाओं में यादृच्छिक रूप से गति करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कुल धारा शून्य होती है। जब चालक के सिरों पर एक बाहरी विद्युत क्षेत्र $E$ लगाया जाता है, तो मुक्त इलेक्ट्रॉन एक इलेक्ट्रोस्टैटिक बल का अनुभव करते हैं और धनात्मक टर्मिनल की ओर त्वरित होते हैं। हालांकि, धनात्मक धातु आयनों के साथ लगातार होने वाली टक्करों के कारण, उनका त्वरण नियंत्रित रहता है और वे विद्युत क्षेत्र की दिशा के विपरीत एक नियत औसत वेग प्राप्त कर लेते हैं। जिस नियत औसत वेग से मुक्त इलेक्ट्रॉन चालक के धनात्मक टर्मिनल की ओर प्रवाहित होते हैं, उसे **अपवाह वेग** ($v_d$) कहते हैं। इसका परिमाण आमतौर पर $10^{-4}\text{ m/s}$ की कोटि का होता है। --- ### अपवाह वेग और विद्युत धारा के बीच संबंध \nलंबाई $L$ और अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल $A$ का एक एक समान धात्विक चालक मान लीजिए। माना: - $n = $ मुक्त इलेक्ट्रॉनों का घनत्व (प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या) - $e = $ एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश का परिमाण - $v_d = $ इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग - $I = $ चालक से बहने वाली विद्युत धारा \nचालक का कुल आयतन $V = A \times L$ है। \nचालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या है: $$N = n \times A \times L$$ \nचालक में मौजूद कुल आवेश $Q$ है: $$Q = N \times e = nALe$$ \nयदि किसी इलेक्ट्रॉन को अपवाह वेग $v_d$ से चालक की पूरी लंबाई $L$ को तय करने में लगा समय $t$ है, तो: $$t = \frac{L}{v_d}$| \nविद्युत धारा $I$ को चालक के किसी भी अनुप्रस्थ काट से आवेश के प्रवाह की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है: $$I = \frac{Q}{t}$| \nसमीकरण में $Q$ और $t$ के मान रखने पर: $$I = \frac{nALe}{L / v_d}$| $$I = nAeAv_d$$ (या सीधे $I = neAv_d$) \nयह विद्युत धारा और अपवाह वेग के बीच का मूलभूत संबंध है। --- ### ओम के नियम की व्युत्पत्ति \nजब लंबाई $L$ के एक चालक पर विभवांतर $V$ लगाया जाता है, तो चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र $E$ का परिमाण होता है: $$E = \frac{V}{L}$| \nद्रव्यमान $m$ के प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर कार्य करने वाला बल $F = eE$ है। इसलिए, इलेक्ट्रॉन द्वारा अनुभव किया जाने वाला त्वरण $a$ है: $$a = \frac{F}{m} = \frac{eE}{m}$| \nगतिकी के समीकरण ($v = u + at$, जहाँ प्रारंभिक तापीय वेग शून्य है) द्वारा अपवाह वेग, त्वरण और विश्रांति काल $\tau$ (दो क्रमिक टक्करों के बीच का औसत समय अंतराल) से संबंधित होता है: $$v_d = a \tau = \frac{eE \tau}{m}$| $v_d$ के व्यंजक में $E = \frac{V}{L}$ रखने पर: $$v_d = \frac{e \left(\frac{V}{L}\right) \tau}{m} = \frac{e V \tau}{m L}$| \nअब, $v_d$ के इस मान को हमारे पिछले धारा समीकरण ($I = neAv_d$) में रखें: $$I = neA \left( \frac{e V \tau}{m L} \right)$| $$I = \frac{n e^2 A \tau}{m L} V$$ \nअनुपात $\frac{V}{I}$ ज्ञात करने के लिए पदों को व्यवस्थित करने पर: $$\frac{V}{I} = \frac{m L}{n e^2 A \tau}$| \nनियत तापमान पर दिए गए चालक के लिए, द्रव्यमान $m$, लंबाई $L$, अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल $A$, इलेक्ट्रॉन घनत्व $n$, और विश्रांति काल $\tau$ सभी नियत हैं। इसलिए, पद $\frac{m L}{n e^2 A \tau}$ एक नियतांक है, जिसे चालक का विद्युत प्रतिरोध ($R$) परिभाषित किया जाता है: $$R = \frac{m L}{n e^2 A \tau}$| \nइस प्रकार, हमें प्राप्त होता है: $$\frac{V}{I} = R \implies V = IR$$ \nयह सूक्ष्म प्राचलों से **ओम के नियम** की व्युत्पत्ति को पूरा करता है।
Q5. एक स्टोरेज बैटरी का एम्फी $8.0 ext{ V}$ और आंतरिक प्रतिरोध $0.5 ext{ }Omega$ है, जिसे $120 ext{ V}$ डीसी सप्लाई का उपयोग करके एक श्रृंखला प्रतिरोधक के साथ चार्ज किया जा रहा है $15.5 ext{ }Omega$। (a) चार्जिंग के दौरान बैटरी का टर्मिनल वोल्टेज क्या है? (b) यदि श्रृंखला प्रतिरोधक का उपयोग नहीं किया जाता है, तो नुकसान का प्राथमिक कारण क्या है? पूर्ण संख्यात्मक चरण दिखाएं। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा: - संचायक बैटरी का विद्युत वाहक बल ($E$) = $8.0\text{ V}$ - बैटरी का आंतरिक प्रतिरोध ($r$) = $0.5\text{ }\Omega$ - आपूर्ति वोल्टेज ($V_s$) = $120\text{ V}$ - श्रेणी प्रतिरोध ($R$) = $15.5\text{ }\Omega$ --- ### भाग (a): चार्जिंग के दौरान बैटरी का टर्मिनल वोल्टेज \nजब किसी बैटरी को चार्ज किया जाता है, तो धारा उसके धनात्मक टर्मिनल में प्रवेश करती है। बैटरी के टर्मिनलों के पार विभवांतर (टर्मिनल वोल्टेज $V$) सूत्र द्वारा दिया जाता है: $$V = E + Ir$$ \nसबसे पहले, हमें परिपथ से बहने वाली चार्जिंग धारा ($I$) की गणना करनी होगी। परिपथ का कुल प्रतिरोध श्रेणी प्रतिरोध और बैटरी के आंतरिक प्रतिरोध का योग है, और आपूर्ति वोल्टेज का विरोध करने वाला शुद्ध विद्युत वाहक बल $(V_s - E)$ है क्योंकि बैटरी चार्ज हो रही है। \nपरिपथ के लिए ओम के नियम का उपयोग करते हुए: $$I = \frac{V_s - E}{R + r}$$ \nदिए गए मानों को सूत्र में रखने पर: $$I = \frac{120\text{ V} - 8.0\text{ V}}{15.5\text{ }\Omega + 0.5\text{ }\Omega}$$ $$I = \frac{112\text{ V}}{16.0\text{ }\Omega}$$ $$I = 7.0\text{ A}$$ \nअब, $V = E + Ir$ का उपयोग करके बैटरी के टर्मिनल वोल्टेज ($V$) की गणना करें: $$V = 8.0\text{ V} + (7.0\text{ A} \times 0.5\text{ }\Omega)$$ $$V = 8.0\text{ V} + 3.5\text{ V}$$ $$V = 11.5\text{ V}$$ **उत्तर (a):** चार्जिंग के दौरान बैटरी का टर्मिनल वोल्टेज $11.5\text{ V}$ है। --- ### भाग (b): यदि श्रेणी प्रतिरोध का उपयोग न किया जाए तो क्षति का कारण \nयदि श्रेणी प्रतिरोध $R$ का उपयोग नहीं किया जाता है ($R = 0$), तो चार्जिंग धारा अत्यधिक रूप से अधिक हो जाएगी। आइए इस धारा की गणना करें: $$I_{\text{without } R} = \frac{V_s - E}{r} = \frac{120 - 8}{0.5} = \frac{112}{0.5} = 224\text{ A}$$ \nबैटरी से गुजरने वाली इतनी भारी धारा ($224\text{ A}$) के कारण निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न होंगी: 1. **अत्यधिक ऊष्मीय प्रभाव ($I^2Rt$):** बैटरी के अंदर तेजी से और अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होगी, जिससे इलेक्ट्रोलाइट उबलने लगेगा। 2. **आंतरिक क्षति और विस्फोट:** बैटरी की प्लेटें मुड़ और विकृत हो जाएंगी, और पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के कारण हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों के तेजी से निकलने से बैटरी का आवरण फट सकता है या उसमें विस्फोट हो सकता है।
Q6. पोटेंशियोमीटर के सिद्धांत, निर्माण, कार्य और उपयोग की व्याख्या करें। दो प्राथमिक सेलों के emfs की तुलना पोटेंशियोमीटर का उपयोग करके प्राप्त सूत्र का व्युत्पन्न करें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### पोटेंशियोमीटर का सिद्धांत पोटेंशियोमीटर यह सिद्धांत पर कार्य करता है कि समान अनुप्रस्थ खंड और स्थिर संरचना वाले तार के किसी भी भाग में विद्युत विभव की गिरावट सीधे उस भाग की लंबाई के अनुपात में होती है, बशर्ते एक स्थिर धारा उसमें बहती हो। $$V propto l implies V = k cdot l$$ जहाँ $k$ विद्युत विभव ग्रेडियंट है ($k = rac{V}{L}$)।
Q7. प्रतिरोधों का एक नेटवर्क 12 V की बैटरी से जुड़ा है जिसका आंतरिक प्रतिरोध 1 Ω है। परिपथ में तीन प्रतिरोध हैं: $2\,\Omega$, $3\,\Omega$, और $6\,\Omega$ समानांतर क्रम में जुड़े हैं, और यह समानांतर संयोजन एक $4\,\Omega$ प्रतिरोध के साथ श्रेणी क्रम में जुड़ा है। (a) नेटवर्क का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (b) परिपथ में प्रवाहित कुल धारा की गणना कीजिए। (c) $4\,\Omega$ प्रतिरोध और समानांतर संयोजन के सिरों पर विभवांतर ज्ञात कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा: - बैटरी का विद्युत वाहक बल ($E$) = $12\text{ V}$ - आंतरिक प्रतिरोध ($r$) = $1\,\Omega$ - समानांतर में प्रतिरोध: $R_1 = 2\,\Omega$, $R_2 = 3\,\Omega$, $R_3 = 6\,\Omega$ - श्रेणी में प्रतिरोध: $R_4 = 4\,\Omega$ --- ### चरण (a): नेटवर्क का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए\nसबसे पहले, समानांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध ($R_p$) ज्ञात करते हैं: $$\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}$$ $$\frac{1}{R_p} = \frac{1}{2} + \frac{1}{3} + \frac{1}{6}$$ \nलघुत्तम समापवर्त्य (LCM = 6) लेने पर: $$\frac{1}{R_p} = \frac{3 + 2 + 1}{6} = \frac{6}{6} = 1\,\Omega^{-1}$$ $$R_p = 1\,\Omega$$ \nअब, यह समानांतर संयोजन $R_4 = 4\,\Omega$ के साथ श्रेणी क्रम में है। अतः परिपथ का कुल बाहरी प्रतिरोध ($R$) है: $$R = R_p + R_4 = 1\,\Omega + 4\,\Omega = 5\,\Omega$$ --- ### चरण (b): परिपथ में प्रवाहित कुल धारा की गणना कीजिए\nआंतरिक प्रतिरोध को मिलाकर परिपथ का कुल प्रतिरोध है: $$R_{\text{total}} = R + r = 5\,\Omega + 1\,\Omega = 6\,\Omega$$ \nओम के नियम का उपयोग करके, बैटरी द्वारा दी जाने वाली कुल धारा ($I$) है: $$I = \frac{E}{R_{\text{total}}} = \frac{12\text{ V}}{6\,\Omega} = 2\text{ A}$$ --- ### चरण (c): $4\,\Omega$ प्रतिरोध और समानांतर संयोजन के सिरों पर विभवांतर ज्ञात कीजिए 1. **$4\,\Omega$ प्रतिरोध के सिरों पर विभवांतर ($V_4$):** $$V_4 = I \times R_4 = 2\text{ A} \times 4\,\Omega = 8\text{ V}$$ 2. **समानांतर संयोजन के सिरों पर विभवांतर ($V_p$):** $$V_p = I \times R_p = 2\text{ A} \times 1\,\Omega = 2\text{ V}$$ *(वैकल्पिक रूप से, किरचॉफ के वोल्टता नियम से: $12\text{ V} - 8\text{ V} - (2\text{ A} \times 1\,\Omega) = 2\text{ V}$)*
Q8. पोटेंशियोमीटर के कार्य सिद्धांत की व्याख्या करें। दो प्राथमिक सेलों के ईएमएफ की तुलना कैसे की जाती है? आवश्यक सर्किट आरेख बनाएं और कार्य सूत्र का व्युत्पन्न करें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### विभवमापी का कार्य सिद्धांत \nविभवमापी एक बहुमुखी उपकरण है जिसका उपयोग विभवांतर, सेल के ईएमएफ और आंतरिक प्रतिरोध को सटीकता से मापने के लिए किया जाता है। संतुलन की स्थिति में यह मापे जा रहे सर्किट से कोई धारा नहीं खींचता है, जिससे यह अनंत प्रतिरोध वाले एक आदर्श वोल्टमीटर की तरह कार्य करता है। - **सिद्धांत:** विभवमापी का मूल सिद्धांत यह है कि विभवमापी तार के किसी भी भाग के सिरों पर विभवांतर उस भाग की लंबाई के सीधे समानुपाती होता है, बशर्ते तार का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल एक समान हो और उससे एक स्थिर धारा प्रवाहित हो रही हो। - **गणितीय व्यंजक:** यदि तार की लंबाई $l$ के पार विभवांतर $V$ है, तो: $$V \propto l \implies V = Kl$$ जहाँ $K$ विभव प्रवणता है (तार की प्रति इकाई लंबाई पर विभव पतन, $K = \frac{V_{\text{total}}}{L}$)। जब संतुलन बिंदु पर सेल से कोई धारा नहीं खींची जाती है, तो सेल का ईएमएफ संतुलन लंबाई के पार विभव पतन के बराबर होता है। --- ### दो प्राथमिक सेलों के विद्युत वाहक बलों की तुलना #### परिपथ विवरण और कनेक्शन: 1. लंबाई $L$ का एक समान तार $AB$ एक प्लग कुंजी ($K$) के माध्यम से स्थिर ईएमएफ $E$ वाले एक चालक सेल (संचायक) और रियोस्टेट ($Rh$) के साथ श्रेणी क्रम में जुड़ा होता है। यह प्राथमिक परिपथ बनाता है। 2. जिन दोनों प्राथमिक सेलों के ईएमएफ ($E_1$ और $E_2$) की तुलना करनी है, उनके धनात्मक टर्मिनलों को विभवमापी तार के उच्च-विभव टर्मिनल $A$ से जोड़ा जाता है। 3. सेलों $E_1$ और $E_2$ के ऋणात्मक टर्मिनलों को द्वि-मार्ग कुंजी से जोड़ा जाता है। द्वि-मार्ग कुंजी का उभयनिष्ठ टर्मिनल गैल्वेनोमीटर ($G$) और जॉकी ($J$) के माध्यम से तार $AB$ पर सरकने के लिए जुड़ा होता है। यह द्वितीयक परिपथ बनाता है। #### चरण-दर-चरण व्युत्पत्ति: 1. प्राथमिक परिपथ में कुंजी $K$ को बंद करें ताकि तार $AB$ से एक स्थिर धारा प्रवाहित हो सके। 2. द्वि-मार्ग कुंजी में $E_1$ से जुड़े टर्मिनलों के बीच प्लग लगाकर सेल $E_1$ को परिपथ में जोड़ें। 3. जॉकी को तार $AB$ पर तब तक सरकाएँ जब तक कि गैल्वेनोमीटर शून्य विक्षेप (शून्य रीडिंग) न दिखाए। मान लीजिए यह संतुलन लंबाई $l_1$ है। 4. विभवमापी के सिद्धांत के अनुसार, पहले सेल का ईएमएफ $E_1$ उसकी संतुलन लंबाई $l_1$ के समानुपाती होता है: $$E_1 = Kl_1 \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$ 5. अब सेल $E_1$ को डिस्कनेक्ट करें और द्वि-मार्ग कुंजी को संचालित करके सेल $E_2$ को परिपथ में जोड़ें। 6. सेल $E_2$ के लिए नई संतुलन लंबाई $l_2$ ज्ञात करें जहाँ गैल्वेनोमीटर फिर से शून्य विक्षेप दिखाता है। 7. दूसरे सेल का ईएमएफ $E_2$ उसकी संतुलन लंबाई $l_2$ के समानुपाती होता है: $$E_2 = Kl_2 \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$ 8. समीकरण 1 को समीकरण 2 से भाग देने पर: $$\frac{E_1}{E_2} = \frac{Kl_1}{Kl_2}$$ $$\frac{E_1}{E_2} = \frac{l_1}{l_2}$$ \nइस प्रकार, संतुलन लंबाई $l_1$ और $l_2$ को मापकर, दोनों सेलों से कोई धारा खींचे बिना उनके विद्युत वाहक बलों के अनुपात की सटीक तुलना की जा सकती है।
Q9. एक संग्रहण बैटरी जिसका धारा मान $8 ext{ V}$ और आंतरिक प्रतिरोध $0.5 ext{ }Omega$ है, को $120 ext{ V}$ डीसी सप्लाई का उपयोग करके एक श्रृंखला प्रतिरोधक $15.5 ext{ }Omega$ के साथ चार्ज किया जा रहा है। (a) चार्जिंग के दौरान बैटरी का टर्मिनल वोल्टेज क्या है? (b) चार्जिंग सर्किट में एक श्रृंखला प्रतिरोधक होने का क्या उद्देश्य है? 5 Marks
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा: - स्टोरेज बैटरी का विद्युत वाहक बल, $E = 8\text{ V}$ - बैटरी का आंतरिक प्रतिरोध, $r = 0.5\text{ }\Omega$ - डीसी आपूर्ति का वोल्टेज, $V_{\text{supply}} = 120\text{ V}$ - श्रेणी प्रतिरोध, $R = 15.5\text{ }\Omega$ --- ### (a) चार्जिंग के दौरान टर्मिनल वोल्टेज की गणना: \nजब बैटरी चार्ज हो रही होती है, तो धारा उसके धनात्मक टर्मिनल में प्रवेश करती है। चार्जिंग सर्किट का कुल प्रतिरोध श्रेणी प्रतिरोध और बैटरी के आंतरिक प्रतिरोध का योग होता है: $$R_{\text{total}} = R + r$$ $$R_{\text{total}} = 15.5\text{ }\Omega + 0.5\text{ }\Omega = 16.0\text{ }\Omega$$ \nसर्किट में धारा प्रवाहित करने वाला कुल शुद्ध वोल्टेज आपूर्ति वोल्टेज और बैटरी के ईएमएफ का अंतर होता है (चूंकि बैटरी चार्जिंग धारा का विरोध करती है): $$V_{\text{net}} = V_{\text{supply}} - E$$ $$V_{\text{net}} = 120\text{ V} - 8\text{ V} = 112\text{ V}$$ \nओम के नियम का उपयोग करते हुए, सर्किट में बहने वाली चार्जिंग धारा $I$ है: $$I = \frac{V_{\text{net}}}{R_{\text{total}}} = \frac{112\text{ V}}{16.0\text{ }\Omega} = 7\text{ A}$$ \nचार्जिंग के दौरान, बैटरी का टर्मिनल वोल्टेज $V$ निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है: $$V = E + Ir$$\nसमीकरण में मान रखने पर: $$V = 8\text{ V} + (7\text{ A} \times 0.5\text{ }\Omega)$$ $$V = 8\text{ V} + 3.5\text{ V} = 11.5\text{ V}$$ **उत्तर (a):** चार्जिंग के दौरान बैटरी का टर्मिनल वोल्टेज $11.5\text{ V}$ है। --- ### (b) श्रेणी प्रतिरोध का उद्देश्य: \nश्रेणी प्रतिरोध चार्जिंग धारा के परिमाण को सीमित करता है। इस बाहरी प्रतिरोध के बिना, बड़े आपूर्ति वोल्टेज ($120\text{ V}$) से जुड़ी बैटरी का कम आंतरिक प्रतिरोध ($0.5\text{ }\Omega$) अत्यधिक उच्च धारा ($I = \frac{120 - 8}{0.5} = 224\text{ A}$) का कारण बनता। धारा में ऐसी भारी वृद्धि से गंभीर ओवरहीटिंग होती, बैटरी की प्लेटें नष्ट हो जातीं, इलेक्ट्रोलाइट उबल जाता, और गंभीर सुरक्षा व विस्फोट का खतरा पैदा हो जाता। श्रेणी प्रतिरोध एक सुरक्षित और नियंत्रित चार्जिंग दर सुनिश्चित करता है।
Q10. विद्युत नेटवर्क के लिए किरचॉफ के नियमों को राज्य। इन नियमों का उपयोग करके, व्हीटस्टोन पुल के लिए संतुलन स्थिति प्राप्त करें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### किरचॉफ के नियम \nकिरचॉफ के नियम जटिल विद्युत परिपथों का विश्लेषण करने के लिए आवश्यक हैं जहाँ ओम का नियम अकेले पर्याप्त नहीं होता। इन्हें दो मुख्य नियमों में विभाजित किया गया है: 1. **किरचॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL):** यह नियम बताता है कि किसी बंद विद्युत परिपथ में किसी भी संधि पर मिलने वाली धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। गणितीय रूप से, $\sum I = 0$। यह नियम विद्युत आवेश के संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। संधि की ओर आने वाली धाराओं को धनात्मक और संधि से दूर जाने वाली धाराओं को ऋणात्मक लिया जाता है। 2. **किरचॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL):** यह नियम बताता है कि किसी परिपथ के किसी भी बंद पाश (लूप) में विभिन्न शाखाओं में धाराओं और प्रतिरोधों के गुणनफल का बीजगणितीय योग उस पाश में उपस्थित विद्युत वाहक बलों (EMF) के बीजगणितीय योग के बराबर होता है। गणितीय रूप से, $\sum IR = \sum E$। यह नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है। ### व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धांत और व्युत्पत्ति \nव्हीटस्टोन सेतु चार प्रतिरोधों की एक व्यवस्था है जिसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को सटीकता से मापने के लिए किया जाता है। इसमें चार प्रतिरोध $P$, $Q$, $R$ और $S$ होते हैं जो एक चतुर्भुज बनाते हैं। विपरीत कोनों के एक युग्म ($A$ और $C$) के बीच एक बैटरी जुड़ी होती है, और दूसरे युग्म ($B$ और $D$) के बीच एक संवेदनशील गैल्वेनोमीटर जुड़ा होता है। \nमान लीजिए बैटरी से कुल धारा $I$ निकलती है। संधि $A$ पर यह धारा $I_1$ ($P$ से) और $I_2$ ($R$ से) में विभाजित हो जाती है। जब सेतु संतुलित होता है, तो गैल्वेनोमीटर से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है, अर्थात $I_g = 0$, और बिंदुओं $B$ और $D$ पर विभव समान होते हैं ($V_B = V_D$)। \nबंद लूप $ABDA$ पर किरचॉफ का वोल्टेज नियम लागू करने पर: - पथ $A \to B \to D \to A$ के अनुदिश: - $I_1 P + I_g G - I_2 R = 0$ - चूंकि सेतु संतुलित है, $I_g = 0$: - $I_1 P - I_2 R = 0$ - $I_1 P = I_2 R$ \quad (समीकरण 1) \nबंद लूप $BCDB$ पर किरचॉफ का वोल्टेज नियम लागू करने पर: - पथ $B \to C \to D \to B$ के अनुदिश: - $(I_1 - I_g)Q - (I_2 + I_g)S - I_g G = 0$ - चूकि $I_g = 0$: - $I_1 Q - I_2 S = 0$ - $I_1 Q = I_2 S$ \quad (समीकरण 2) \nसमीकरण 1 को समीकरण 2 से भाग देने पर: $$\frac{I_1 P}{I_1 Q} = \frac{I_2 R}{I_2 S}$$ $$\frac{P}{Q} = \frac{R}{S}$$ \nयह व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन की आवश्यक शर्त है। यदि तीन प्रतिरोध ज्ञात हों, तो चौथे अज्ञात प्रतिरोध की आसानी से गणना की जा सकती है।
Q11. 5 ओम प्रतिरोध के एक प्रतिरोधक को 1 ओम आंतरिक प्रतिरोध और 12 वोल्ट विद्युत वाहक बल (emf) वाली बैटरी से जोड़ा गया है। प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली धारा की गणना कीजिए। बैटरी के सिरों पर विभवांतर भी ज्ञात कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): परिपथ में प्रवाहित होने वाली धारा और टर्मिनल विभवांतर ज्ञात करने के लिए, हम ओम के नियम और विद्युत वाहक बल, टर्मिनल वोल्टेज तथा आंतरिक प्रतिरोध के बीच के संबंध का उपयोग करते हैं। **दिया गया डेटा:** - विद्युत वाहक बल ($E$) = 12 V - आंतरिक प्रतिरोध ($r$) = 1 $\Omega$ - बाहरी प्रतिरोध ($R$) = 5 $\Omega$ **चरण 1: परिपथ का कुल प्रतिरोध ज्ञात कीजिए**\nचूँकि आंतरिक प्रतिरोध और बाहरी प्रतिरोध श्रेणी क्रम में हैं, कुल प्रतिरोध ($R_{total}$) होगा: $$R_{total} = R + r$$ $$R_{total} = 5 \, \Omega + 1 \, \Omega = 6 \, \Omega$$ **चरण 2: परिपथ में प्रवाहित धारा ($I$) की गणना कीजिए**\nपूर्ण परिपथ के लिए ओम के नियम के अनुसार: $$I = \frac{E}{R + r}$$\nमान रखने पर: $$I = \frac{12 \text{ V}}{6 \, \Omega} = 2 \text{ A}$$\nअतः, परिपथ से प्रवाहित होने वाली धारा 2 एम्पीयर है। **चरण 3: बैटरी के सिरों पर टर्मिनल विभवांतर ($V$) ज्ञात कीजिए**\nटर्मिनल विभवांतर का सूत्र है: $$V = E - Ir$$ $E$, $I$, और $r$ के मान रखने पर: $$V = 12 \text{ V} - (2 \text{ A} \times 1 \, \Omega)$$ $$V = 12 \text{ V} - 2 \text{ V} = 10 \text{ V}$$ **अंतिम उत्तर:** - परिपथ में प्रवाहित धारा **2 A** है। - बैटरी के सिरों पर टर्मिनल विभवांतर **10 V** है।
Q12. $8\,\text{V}$ विद्युत वाहक बल और $0.5\,\Omega$ आंतरिक प्रतिरोध वाली एक संचायक बैटरी को $15.5\,\Omega$ के श्रेणी प्रतिरोध का उपयोग करके $120\,\text{V}$ डीसी आपूर्ति द्वारा चार्ज किया जा रहा है। चार्जिंग के दौरान बैटरी के टर्मिनल वोल्टेज की गणना कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): समस्या में दिए गए पैरामीटर: - चार्ज की जा रही बैटरी का विद्युत वाहक बल, $E = 8\,\text{V}$ - बैटरी का आंतरिक प्रतिरोध, $r = 0.5\,\Omega$ - डीसी आपूर्ति वोल्टेज, $V_{\text{supply}} = 120\,\text{V}$ - श्रेणी प्रतिरोध, $R = 15.5\,\Omega$ \nजब किसी बैटरी को चार्ज किया जाता है, तो चार्जिंग धारा ($I$) उसके धनात्मक टर्मिनल में प्रवाहित होती है। परिपथ का कुल प्रतिरोध श्रेणी प्रतिरोधक और बैटरी के आंतरिक प्रतिरोध का योग होता है: $R_{\text{total}} = R + r$ $R_{\text{total}} = 15.5\,\Omega + 0.5\,\Omega = 16.0\,\Omega$ \nपरिपथ में कुल प्रभावी वोल्टेज आपूर्ति वोल्टेज और बैटरी के विद्युत वाहक बल का अंतर होता है: $V_{\text{net}} = V_{\text{supply}} - E$ $V_{\text{net}} = 120\,\text{V} - 8\,\text{V} = 112\,\text{V}$ \nअब, चार्जिंग धारा ($I$) ज्ञात करने के लिए ओम के नियम का उपयोग करते हैं: $I = \frac{V_{\text{net}}}{R_{\text{total}}} = \frac{112\,\text{V}}{16.0\,\Omega} = 7\,\text{A}$ \nचार्जिंग प्रक्रिया के दौरान, बैटरी का टर्मिनल वोल्टेज ($V$) निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है: $V = E + Ir$ \nसमीकरण में ज्ञात मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $V = 8\,\text{V} + (7\,\text{A} \times 0.5\,\Omega)$ $V = 8\,\text{V} + 3.5\,\text{V} = 11.5\,\text{V}$ \nअतः, चार्जिंग के दौरान बैटरी का टर्मिनल वोल्टेज $11.5\,\text{V}$ है।
Q13. यदि $2\,\Omega$, $3\,\Omega$ और $6\,\Omega$ मान के तीन प्रतिरोधकों को समांतर क्रम में जोड़ा जाए, और इस समांतर संयोजन को एक $1\,\Omega$ प्रतिरोधक के साथ श्रेणी क्रम में जोड़ा जाए, तो टर्मिनल A और B के बीच नेटवर्क के तुल्य प्रतिरोध की गणना कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): सबसे पहले, तीन प्रतिरोधकों $R_1 = 2\,\Omega$, $R_2 = 3\,\Omega$ और $R_3 = 6\,\Omega$ के समांतर संयोजन के तुल्य प्रतिरोध की गणना करते हैं।\nसमांतर प्रतिरोध का सूत्र है: $\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}$ \nदिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $\frac{1}{R_p} = \frac{1}{2} + \frac{1}{3} + \frac{1}{6}$ \nसामान्य हर (जो कि 6 है) ज्ञात करने पर: $\frac{1}{R_p} = \frac{3}{6} + \frac{2}{6} + \frac{1}{6} = \frac{3 + 2 + 1}{6} = \frac{6}{6} = 1\,\Omega^{-1}$ \nअतः, समांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध है: $R_p = 1\,\Omega$ \nअब, यह समांतर संयोजन एक अन्य प्रतिरोधक $R_s = 1\,\Omega$ के साथ श्रेणी क्रम में जुड़ा हुआ है।\nटर्मिनल A और B के बीच कुल तुल्य प्रतिरोध $R_{\text{total}}$ श्रेणी प्रतिरोध और समांतर तुल्य प्रतिरोध का योग होता है: $R_{\text{total}} = R_s + R_p$ $R_{\text{total}} = 1\,\Omega + 1\,\Omega = 2\,\Omega$ \nअतः, टर्मिनल A और B के बीच नेटवर्क का तुल्य प्रतिरोध $2\,\Omega$ है।
Q14. विद्युत नेटवर्क के लिए किरचॉफ के नियमों को लिखिए। उन मूल संरक्षण नियमों को लिखिए जिन पर इनमें से प्रत्येक नियम आधारित है। 3 Marks
उत्तर (Answer): जटिल विद्युत परिपथों का विश्लेषण करने के लिए किरचॉफ के नियम आवश्यक हैं जहाँ अकेला ओम का नियम अपर्याप्त होता है। इसके दो मुख्य नियम हैं: 1. **किरचॉफ का धारा नियम (KCL या संधि नियम):** यह नियम बताता है कि किसी बंद विद्युत परिपथ में किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग हमेशा शून्य होता है। इसे गणितीय रूप में $\sum I = 0$ लिखा जाता है। संधि की ओर आने वाली धाराओं को पारंपरिक रूप से धनात्मक और संधि से दूर जाने वाली धाराओं को ऋणात्मक माना जाता है। यह नियम मौलिक रूप से **आवेश संरक्षण के नियम** पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि संधि पर आवेश जमा नहीं हो सकता। 2. **किरचॉफ का वोल्टता नियम (KVL या पाश नियम):** यह नियम बताता है कि किसी नेटवर्क के किसी भी बंद पाश में, पाश की विभिन्न शाखाओं में धाराओं और प्रतिरोधों के गुणनफल का बीजगणितीय योग उस पाश में विद्युत वाहक बलों (EMF) के बीजगणितीय योग के बराबर होता है। इसे गणितीय रूप में $\sum IR = \sum E$ लिखा जाता है। वैकल्पिक रूप से, किसी भी बंद पाश के चारों ओर विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है ($\sum \Delta V = 0$)। यह नियम मौलिक रूप से **ऊर्जा संरक्षण के नियम** पर आधारित है, जो यह दर्शाता है कि स्रोतों द्वारा प्रति एकांक आवेश को दी गई कुल ऊर्जा परिपथ घटकों में क्षय होने वाली कुल ऊर्जा के बराबर होती है।
Q15. एक बेलनाकार तार को खींचकर उसकी मूल लंबाई से दोगुना कर दिया जाता है। खींचने की प्रक्रिया के दौरान इसके घनत्व और आयतन को अपरिवर्तित मानते हुए इसके विद्युत प्रतिरोध में प्रतिशत परिवर्तन की गणना कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): माना तार की मूल लंबाई $l_1 = l$ और मूल अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A_1 = A$ है।\nतार का प्रारंभिक प्रतिरोध इस प्रकार दिया जाता है: $R_1 = \rho \frac{l_1}{A_1} = \rho \frac{l}{A}$ \nजब तार को खींचा जाता है, तो इसकी लंबाई हो जाती है: $l_2 = 2l$ \nचूंकि खींचने के दौरान तार का आयतन स्थिर रहता है: $V_1 = V_2$ $A_1 l_1 = A_2 l_2$ $A \cdot l = A_2 \cdot (2l)$ $A_2 = \frac{A}{2}$ \nअब, नया प्रतिरोध $R_2$ है: $R_2 = \rho \frac{l_2}{A_2} = \rho \frac{2l}{A/2} = 4 \left(\rho \frac{l}{A}\right) = 4R_1$ \nप्रतिरोध में प्रतिशत परिवर्तन इस प्रकार गणना किया जाता है: $\text{प्रतिशत परिवर्तन} = \frac{R_2 - R_1}{R_1} \times 100\%$ $\text{प्रतिशत परिवर्तन} = \frac{4R_1 - R_1}{R_1} \times 100\%$ $\text{प्रतिशत परिवर्तन} = 3 \times 100\% = 300\%$ \nअतः, तार का विद्युत प्रतिरोध $300\%$ बढ़ जाता है।