मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 12 भौतिकी - किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र (Ray Optics and Optical Instruments) - त्वरित संशोधन नोट्स
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1. प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)
1. आपतन कोण ($i$), परावर्तन कोण ($r$) के बराबर होता है। अर्थात्: $\angle i = \angle r$
2. आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।
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2. गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$$
जहाँ:
- $f$ = फोकस दूरी (Focal length)
- $v$ = प्रतिबिम्ब की दूरी (Image distance)
- $u$ = वस्तु की दूरी (Object distance)
- वक्रता त्रिज्या और फोकस दूरी में संबंध:
$$R = 2f \quad \text{या} \quad f = \frac{R}{2}$$
- रैखिक आवर्धन (Linear Magnification - $m$):
$$m = \frac{hi}{ho} = -\frac{v}{u}$$
जहाँ $hi$ प्रतिबिम्ब की ऊँचाई और $ho$ वस्तु की ऊँचाई है।
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3. प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)
- स्नेल का नियम (Snell's Law):
$$\frac{\sin i}{\sin r} = \text{नियतांक} = {^1}\mu2 = \frac{\mu2}{\mu_1}$$
जहाँ $\mu2$ और $\mu1$ माध्यमों के अपवर्तनांक हैं।
$$\mu = \frac{c}{v}$$
($c$ = निर्वात में प्रकाश की चाल, $v$ = माध्यम में प्रकाश की चाल)
- वास्तविक तथा आभासी गहराई:
$$\mu = \frac{\text{वास्तविक गहराई}}{\text{आभासी गहराई}}$$
आभासी विस्थापन ($\Delta t$) = $t \left(1 - \frac{1}{\mu}\right)$ (जहाँ $t$ माध्यम की मोटाई है)
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4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection - TIR)
- क्रांतिक कोण ($C$): जब सघन माध्यम में आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण के बराबर होता है, तो अपवर्तन कोण $90^\circ$ हो जाता है।
$$\sin C = \frac{1}{\mu}$$
(जहाँ $\mu$ विरल माध्यम के सापेक्ष सघन माध्यम का अपवर्तनांक है)
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5. गोलीय पृष्ठों पर अपवर्तन (Refraction at Spherical Surfaces)
$$\frac{\mu2}{v} - \frac{\mu1}{u} = \frac{\mu2 - \mu1}{R}$$
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6. लेंस निर्माता सूत्र एवं लेंस सूत्र (Lens Maker's Formula & Lens Formula)
$$\frac{1}{f} = (\mu - 1) \left(\frac{1}{R1} - \frac{1}{R2}\right)$$
(जहाँ $\mu$ लेंस के पदार्थ का अपवर्तनांक है)
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$$
- लेंस की क्षमता (Power of Lens):
$$P = \frac{1}{f \text{ (मीटर में)}} \quad \text{या} \quad P = \frac{100}{f \text{ (सेमी में)}}$$
- मात्रक: डायोप्टर (Diopter - D)
- संपर्क में रखे लेंसों की संयुक्त फोकस दूरी व क्षमता:
$$\frac{1}{F} = \frac{1}{f1} + \frac{1}{f2} + \dots$$
$$P = P1 + P2 + \dots$$
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7. प्रिज्म द्वारा अपवर्तन (Refraction through a Prism)
$$\mu = \frac{\sin\left(\frac{A + \delta_m}{2}\right)}{\sin\left(\frac{A}{2}\right)}$$
जहाँ:
- $A$ = प्रिज्म का कोण (Angle of Prism)
- $\delta_m$ = अल्पतम विचलन कोण (Angle of Minimum Deviation)
$$i + e = A + \delta$$
($i$ = आपतन कोण, $e$ = निर्गत कोण, $\delta$ = विचलन कोण)
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8. प्रकाश का प्रकीर्णन और वायुमंडलीय घटनाएँ
- रैले का प्रकीर्णन नियम: प्रकीर्णित प्रकाश की तीव्रता ($\mathbf{I}$), प्रकाश की तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) के चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
$$I \propto \frac{1}{\lambda^4}$$
(यही कारण है कि आकाश का रंग नीला दिखाई देता है और खतरे का संकेत लाल होता है)
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9. प्रकाशिक यंत्र (Optical Instruments)
#### (क) सरल सूक्ष्मदर्शी (Simple Microscope)
- जब अंतिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी ($D$) पर बने:
$$m = 1 + \frac{D}{f}$$
- जब अंतिम प्रतिबिम्ब अनंत पर बने:
$$m = \frac{D}{f}$$
#### (ख) संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope)
$$m = mo \times me$$
- जब अंतिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी ($D$) पर बने:
$$m = -\frac{vo}{uo} \left(1 + \frac{D}{f_e}\right)$$
- सूक्ष्मदर्शी की लंबाई ($L$):
$$L = |vo| + |ue|$$
#### (ग) खगोलीय दूरदराज / दूरबीन (Astronomical Telescope)
$$m = -\frac{fo}{fe}$$
- जब अंतिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी ($D$) पर बने:
$$m = -\frac{fo}{fe} \left(1 + \frac{f_e}{D}\right)$$
तथा दूरबीन की लंबाई: $L = fo + |ue|$
- सामान्य समायोजन में दूरबीन की लंबाई ($L$):
$$L = fo + fe$$
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
प्रकाश का परावर्तन
गोलीय दर्पण
अवतल दर्पण
उत्तल दर्पण
दर्पण सूत्र ($1/f = 1/v + 1/u$)
रेखीय आवर्धन ($m$)
प्रकाश का अपवर्तन
अपवर्तन के नियम (स्नेल का नियम)
पूर्ण आंतरिक परावर्तन
क्रांतिक कोण
अनुप्रयोग (ऑप्टिकल फाइबर, म्रग मरीचिका)
गोलीय पृष्ठों पर अपवर्तन
लेंस निर्माता सूत्र
पतले लेंसों का संयोजन
प्रिज्म द्वारा अपवर्तन
विचलन कोण
प्रिज्म का अपवर्तनांक सूत्र
वर्ण विक्षेपण
कोणीय विक्षेपण
विक्षेपण क्षमता
प्राकृतिक प्रकाशिक घटनाएँ
इंद्रधनुष
आकाश का नीला रंग
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल दिखना
प्रकाशिक यंत्र
मानव नेत्र (समंजन क्षमता)
सूक्ष्मदर्शी
सरल सूक्ष्मदर्शी (आवर्तक लेंस)
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी
दूरदर्शक (टेलीस्कोप)
खगोलीय दूरदर्शक (अपवर्तक)
परावर्ती दूरदर्शक
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### लेंस निर्माता सूत्र का व्युत्पत्ति:
**मान्यताएँ:**
1. लेंस बहुत पतला है ताकि इसके ध्रुव से मापी गई दूरियाँ इसके प्रकाशीय केंद्र से दूरियों के बराबर मानी जा सकें।
2. लेंस का द्वारक (aperture) छोटा है।
3. वस्तु मुख्य अक्ष पर रखा गया एक बिंदु बिंब है और किरणें परैक्सियल (paraxial) हैं।
**चिन्ह परिपाटी:**
1. सभी दूरियाँ लेंस के प्रकाशीय केंद्र से मापी जाती हैं।
2. आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरियाँ धनात्मक और विपरीत दिशा में मापी गई दूरियाँ ऋणात्मक होती हैं।
**व्युत्पत्ति:**\nमान लीजिए $n_2$ अपवर्तनांक वाले कांच से बना एक पतला उत्तल लेंस $n_1$ अपवर्तनांक वाले माध्यम में रखा गया है। मान लीजिए पहले और दूसरे अपवर्तक पृष्ठ की वक्रता त्रिज्याएँ क्रमशः $R_1$ और $R_2$ हैं।
\nउत्तल पृष्ठ पर पहले अपवर्तन के लिए ($n_1$ से $n_2$ माध्यम में):
$$\frac{n_2}{v_1} - \frac{n_1}{u} = \frac{n_2 - n_1}{R_1}$__ (1)
\nअवतल पृष्ठ पर दूसरे अपवर्तन के लिए ($n_2$ से पुनः $n_1$ माध्यम में), पहले पृष्ठ द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी वस्तु का कार्य करता है:
$$\frac{n_1}{v} - \frac{n_2}{v_1} = \frac{n_1 - n_2}{R_2} = -\frac{n_2 - n_1}{R_2}$__ (2)
\nसमीकरण (1) और (2) को जोड़ने पर:
$$\frac{n_1}{v} - \frac{n_1}{u} = (n_2 - n_1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
\nदोनों पक्षों को $n_1$ से भाग देने पर और $n_{21} = \frac{n_2}{n_1}$ रखने पर:
$$\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \left( \frac{n_2}{n_1} - 1 \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
\nपरिभाषा के अनुसार, जब $u = \infty$, तब $v = f$:
$$\frac{1}{f} = (n - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$\nयह आवश्यक लेंस निर्माता सूत्र है।
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### आंकिक प्रश्न:
**दिए गए आंकड़े:**
- लेंस के पदार्थ का अपवर्तनांक ($n_g$) = 1.5
- हवा का अपवर्तनांक ($n_a$) = 1.0
- पानी का अपवर्तनांक ($n_w$) = 4/3 = 1.33
- पहले पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या ($R_1$) = +20 सेमी
- दूसरे पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या ($R_2$) = -20 सेमी
**भाग 1: हवा में फोकस दूरी ($f_a$)**
$$\frac{1}{f_a} = \left( \frac{n_g}{n_a} - 1 \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
$$\frac{1}{f_a} = (1.5 - 1) \left( \frac{1}{20} - \frac{1}{-20} \right)$$
$$\frac{1}{f_a} = 0.5 \left( \frac{1}{20} + \frac{1}{20} \right) = 0.5 \left( \frac{2}{20} \right) = 0.5 \times \frac{1}{10} = \frac{1}{20}$$
$$f_a = +20\text{ सेमी}$$
**भाग 2: पानी में फोकस दूरी ($f_w$)**
$$\frac{1}{f_w} = \left( \frac{n_g}{n_w} - 1 \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
$$\frac{1}{f_w} = \left( \frac{1.5}{4/3} - 1 \right) \left( \frac{1}{20} - \frac{1}{-20} \right)$$
$$\frac{1}{f_w} = \left( \frac{4.5}{4} - 1 \right) \left( \frac{2}{20} \right) = \left( \frac{1.125 - 1}{1} \right) \times \frac{1}{10} = 0.125 \times \frac{1}{10} = \frac{1}{80}$$
$$f_w = +80\text{ सेमी}$$
**उत्तर:**\nहवा में लेंस की फोकस दूरी 20 सेमी है और पानी में डुबोए जाने पर यह 80 सेमी हो जाती है।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
- हवा में लेंस की फोकस दूरी, $f_a = 20\text{ cm}$
- हवा के सापेक्ष लेंस के पदार्थ का अपवर्तनांक, $n_g = 1.5$
- हवा के सापेक्ष पानी का अपवर्तनांक, $n_w = 1.33 = \frac{4}{3}$
- हवा का अपवर्तनांक, $n_a = 1.0$
### प्रयुक्त सूत्र:\nलेस निर्माता सूत्र के अनुसार:
$$\frac{1}{f} = \left( \frac{n_2}{n_1} - 1 \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
**स्थिति 1: जब लेंस हवा में हो**
$$\frac{1}{f_a} = \left( \frac{n_g}{n_a} - 1 \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
$$\frac{1}{20} = (1.5 - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
$$\frac{1}{20} = 0.5 \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right) \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
**स्थिति 2: जब लेंस पानी में डुबोया जाता है**
$$\frac{1}{f_w} = \left( \frac{n_g}{n_w} - 1 \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
$$\frac{1}{f_w} = \left( \frac{1.5}{4/3} - 1 \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
$$\frac{1}{f_w} = \left( \frac{4.5}{4} - 1 \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
$$\frac{1}{f_w} = \left( \frac{4.5 - 4}{4} \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
$$\frac{1}{f_w} = \left( \frac{0.5}{4} \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right) \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$
### गणना:\nसमीकरण 1 को समीकरण 2 से भाग देने पर:
$$\frac{1/20}{1/f_w} = \frac{0.5 \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)}{\left( \frac{0.5}{4} \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)}$$
$$\frac{f_w}{20} = \frac{0.5}{0.5 / 4} = 4$$
$$f_w = 4 \times 20 = 80\text{ cm}$$
### लेंस की प्रकृति:\nपानी में लेंस की नई फोकस दूरी $+80\text{ cm}$ है। चूँकि फोकस दूरी का चिन्ह धनात्मक रहता है, लेंस अभिसारी (उत्तल) लेंस के रूप में व्यवहार करना जारी रखता है। इसकी मूल प्रकृति नहीं बदलती है, हालांकि इसकी अभिसारी शक्ति कम हो जाती है क्योंकि लेंस और आसपास के माध्यम के बीच सापेक्ष अपवर्तनांक कम हो गया है।
उत्तर (Answer): ### संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का परिचय\nसंयुक्त सूक्ष्मदर्शी एक ऐसा प्रकाशीय यंत्र है जिसका उपयोग सूक्ष्म वस्तुओं के अत्यधिक आवर्धित प्रतिबिंबों को देखने के लिए किया जाता है। इसमें दो उत्तल लेंस होते हैं: वस्तु के सामने एक छोटा उद्देश्य लेंस (objective lens) और आंख के सामने बड़े फोकस वाला नेत्रिका लेंस (eye-piece)।
### कार्य सिद्धांत और किरण आरेख विवरण
- **अभिदृश्य लेंस ($L_o$):** इसकी फोकस दूरी ($f_o$) बहुत कम और द्वारक छोटा होता है। यह वस्तु ($AB$) का एक वास्तविक, उल्टा और आवर्धित प्रतिबिंब ($A'B'$) नेत्रिका लेंस की फोकस दूरी के भीतर बनाता है।
- **नेत्रिका लेंस ($L_e$):** यह एक सरल आवर्धक कांच के रूप में कार्य करता है। यह स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी ($D$) पर एक आभासी, अत्यधिक आवर्धित और उल्टा अंतिम प्रतिबिंब ($A''B''$) बनाता है।
### आवर्धन क्षमता की व्युत्पत्ति\nआवर्धन क्षमता ($m$) को अंतिम द्वारा आंख पर अंतरित कोण और स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर रखे जाने पर बिना सहायता प्राप्त आंख द्वारा वस्तु पर अंतरित कोण के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है:
$$m = \frac{\beta}{\alpha}$|
\nचूंकि कोण छोटे हैं, हम $\alpha \approx \tan \alpha$ और $\beta \approx \tan \beta$ मान सकते हैं:
$$\tan \alpha \approx \frac{AB}{D}$|
$$\tan \beta \approx \frac{A'B'}{u_e}$|
\nइसलिए, आवर्धन क्षमता बन जाती है:
$$m = \frac{A'B' / u_e}{AB / D} = \left(\frac{A'B'}{AB}\right) \left(\frac{D}{u_e}\right)$|
\nयहाँ, $\frac{A'B'}{AB} = m_o$ उद्देश्य लेंस द्वारा निर्मित रैखिक आवर्धन है, जो इस प्रकार है:
$$m_o = \frac{v_o}{u_o}$|
\nअतः:
$$m = \frac{v_o}{u_o} \left(\frac{D}{u_e}\right)$|
\nनेत्रिका के लिए लेंस सूत्र का उपयोग करने पर:
$$\frac{1}{v_e} - \frac{1}{u_e} = \frac{1}{f_e}$|
$v_e = -D$ रखने पर:
$$-\frac{1}{D} - \frac{1}{u_e} = \frac{1}{f_e}$|\nपूरे समीकरण को $D$ से गुणा करने पर:
$$-1 - \frac{D}{u_e} = \frac{D}{f_e} \implies \frac{D}{u_e} = 1 + \frac{D}{f_e}$|
\nइसे आवर्धन समीकरण में प्रतिस्थापित करने पर:
$$m = \frac{v_o}{u_o} \left(1 + \frac{D}{f_e}\right)$|
\nचूंकि वस्तु उद्देश्य के फोकस के बहुत करीब रखी जाती है ($u_o \approx f_o$) और प्रतिबिंब नेत्रिका के करीब बनता है ($v_o \approx L$, जहाँ $L$ नली की लंबाई है):
$$m \approx -\frac{L}{f_o} \left(1 + \frac{D}{f_e}\right)$|\nयह एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता के लिए आवश्यक व्यंजक है।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
- टैंक में पानी की गहराई ($h$) = $80\text{ सेमी} = 0.8\text{ मीटर}$
- पानी का अपवर्तनांक ($n$) = $\frac{4}{3}$
### सूत्र और अवधारणा:\nजब प्रकाश का एक बिंदु स्त्रोत पानी के टैंक के तल पर रखा जाता है, तो प्रकाश किरणें विभिन्न आपतन कोणों पर पानी-वायु अंतरापृष्ठ से टकराती हैं। क्रांतिक कोण ($C$) से अधिक कोण पर आपतन करने वाली किरणें पूर्ण आंतरिक परावर्तन से गुजरती हैं और पानी के अंदर ही रहती हैं। क्रांतिक कोण से कम या उसके बराबर कोण पर आपतन करने वाली किरणें हवा में बाहर निकल जाती हैं।
\nइस प्रकार, पानी की सतह का वह क्षेत्रफल जिससे प्रकाश निकलता है, $r$ त्रिज्या का एक वृत्त होता है (जिसे अक्सर प्रदीप्ति वृत्त की त्रिज्या कहा जाता है)।
\nक्रांतिक कोण $C$ के लिए संबंध दिया गया है:
$$\sin C = \frac{1}{n}$|
\nप्रकाश के शंकु की ज्यामिति से, वृत्ताकार पैच की त्रिज्या $r$, गहराई $h$ और क्रांतिक कोण $C$ से इस प्रकार संबंधित है:
$$r = h \tan C$$
### चरण-दर-चरण गणना:
1. **$\sin C$ ज्ञात कीजिए:**
$$\sin C = \frac{1}{4/3} = \frac{3}{4} = 0.75$$
2. **त्रिकोणमितीय सर्वसमिका का उपयोग करके $\cos C$ ज्ञात कीजिए:**
$$\cos C = \sqrt{1 - \sin^2 C} = \sqrt{1 - \left(\frac{3}{4}\right)^2} = \sqrt{1 - \frac{9}{16}} = \sqrt{\frac{7}{16}} = \frac{\sqrt{7}}{4}$$
3. **$\tan C$ ज्ञात कीजिए:**
$$\tan C = \frac{\sin C}{\cos C} = \frac{3/4}{\sqrt{7}/4} = \frac{3}{\sqrt{7}}$$
4. **त्रिज्या $r$ की गणना कीजिए:**
$$r = h \tan C = 80 \times \frac{3}{\sqrt{7}} = \frac{240}{\sqrt{7}}\text{ सेमी}$$
दिया गया है $\sqrt{7} \approx 2.6457$:
$$r = \frac{240}{2.6457} \approx 90.71\text{ सेमी} = 0.907\text{ मीटर}$$
5. **सतह के क्षेत्रफल ($A$) की गणना कीजिए:**
$$A = \pi r^2 = \pi \left(\frac{240}{\sqrt{7}}\right)^2 = \pi \times \frac{57600}{7}$|
$\pi \approx 3.1416$ का उपयोग करने पर:
$$A = 3.1416 \times \frac{57600}{7} = \frac{180956.16}{7} \approx 25850.88\text{ सेमी}^2 = 2.585\text{ मीटर}^2$$
### उत्तर:\nपानी की सतह का वह क्षेत्रफल जिसके माध्यम से बल्ब का प्रकाश बाहर निकल सकता है, लगभग $25850.88\text{ सेमी}^2$ (या $2.585\text{ मीटर}^2$) है।
उत्तर (Answer): ### लेंस निर्माता सूत्र का परिचय\nलेन्स मेकर सूत्र किसी लेंस की फोकस दूरी को लेंस सामग्री के अपवर्तनांक और उसकी दो सतहों की वक्रता त्रिज्याओं से संबंधित करता है। इसका उपयोग निर्माताओं द्वारा वांछित फोकस दूरी के लेंस डिजाइन करने के लिए किया जाता है।
### मानी गई मान्यताएँ
- लेंस पतला है, इसलिए ध्रुव से मापी गई दूरी को ऑप्टिकल केंद्र से लिया जा सकता है।
- लेंस का द्वारक छोटा है।
- वस्तु मुख्य अक्ष पर रखी एक बिंदु वस्तु है।
- किरणों द्वारा मुख्य अक्ष के साथ बनाए गए सभी कोण छोटे होते हैं।
### गणितीय व्युत्पत्ति
1. मान लीजिए $n_2$ अपवर्तनांक का एक पतला उत्तल लेंस $n_1$ अपवर्तनांक के विरल माध्यम में रखा गया है। मान लीजिए सतह 1 और सतह 2 की वक्रता त्रिज्याएँ क्रमशः $R_1$ और $R_2$ हैं।
2. जब पहली गोलाकार सतह पर अपवर्तन होता है, तो प्रकाश माध्यम $n_1$ से $n_2$ में जाता है। पहली सतह द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब दूसरी सतह के लिए आभासी वस्तु के रूप में कार्य करता है।
3. एकल गोलाकार सतह के लिए अपवर्तन सूत्र का उपयोग करने पर:
$$\frac{n_2}{v_1} - \frac{n_1}{u} = \frac{n_2 - n_1}{R_1}$$
4. दूसरी सतह के लिए, अपवर्तन माध्यम $n_2$ से $n_1$ में होता है। प्रकाश माध्यम $n_1$ में निकलता है, जिससे दूरी $v$ पर अंतिम वास्तविक प्रतिबिंब बनता है:
$$\frac{n_1}{v} - \frac{n_2}{v_1} = \frac{n_1 - n_2}{R_2}$$
5. दोनों समीकरणों को जोड़ने पर:
$$\frac{n_1}{v} - \frac{n_1}{u} = (n_2 - n_1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
6. संपूर्ण समीकरण को $n_1$ से विभाजित करने पर और $n_{21} = \frac{n_2}{n_1}$ रखने पर:
$$\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = (n_{21} - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
7. जब वस्तु अनंत पर हो ($u = \infty$), तो प्रतिबिंब फोकस पर बनता है ($v = f$):
$$\frac{1}{f} = (n - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$\nयह आवश्यक लेंस निर्माता सूत्र है।
### लेंस की क्षमता (Power of a Lens)
- **परिभाषा:** लेंस की क्षमता को उस कोण की स्पर्शज्या (tangent) के रूप में परिभाषित किया जाता है जिससे यह मुख्य अक्ष के समानांतर प्रकाश पुंज को इकाई दूरी पर अभिसरित या अपसरित करता है। सरल शब्दों में, यह मीटर में फोकस दूरी का व्युत्क्रम है।
- **सूत्र:** $P = \frac{1}{f \text{ (मीटर में)}}$
- **SI मात्रक:** डायोप्टर (D)। एक डायोप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी एक मीटर है।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nसंयुक्त सूक्ष्मदर्शी एक ऐसा प्रकाशीय उपकरण है जिसका उपयोग अति सूक्ष्म वस्तुओं के अत्यधिक आवर्धित प्रतिबिंब देखने के लिए किया जाता है। इसमें दो उत्तल लेंस होते हैं: कम फोकस दूरी और द्वारक वाला अभिदृश्यक लेंस (objective lens), तथा अपेक्षाकृत बड़ी फोकस दूरी और द्वारक वाला नेत्रिका लेंस (eyepiece)।
### किरण आरेख विवरण और कार्यप्रणाली
- अभिदृश्यक लेंस वस्तु $A B$ का वास्तविक, उलटा और आवर्धित प्रतिबिंब $A'B'$ बनाता है। यह प्रतिबिंब नेत्रिका के फोकस के पास स्थित होता है।
- नेत्रिका लेंस एक साधारण आवर्धक कांच की तरह कार्य करता है, जो $A'B'$ को अपनी वस्तु के रूप में लेता है और स्पष्ट दर्शन की न्यूनतम दूरी ($D$) पर एक आभासी, आवर्धित और उलटा अंतिम प्रतिबिंब $A''B''$ बनाता है।
### आवर्धन क्षमता की व्युत्पत्ति\nआवर्धन क्षमता ($m$) को अंतिम द्वारा आँख पर बनाए गए कोण $\beta$ और स्पष्ट दर्शन की न्यूनतम दूरी पर रखी वस्तु द्वारा बनाए गए कोण $\alpha$ के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है:
$$m = \frac{\beta}{\alpha} \approx \frac{\tan \beta}{\tan \alpha}$$
1. **नेत्रिका त्रिभुज से:**
$$\tan \beta = \frac{h'}{u_e}$$
2. **वस्तु की मानक स्थिति से:**
$$\tan \alpha = \frac{h}{D}$$
3. **आवर्धन क्षमता सूत्र में प्रतिस्थापित करना:**
$$m = \frac{v_o}{u_o} \cdot \frac{D}{u_e}$$
4. **अभिदृश्यक का रैखिक आवर्धन ($m_o$):**
$$\frac{h'}{h} = \frac{v_o}{u_o}$$
5. **विशेष स्थिति (प्रतिबिंब स्पष्ट दर्शन की न्यूनतम दूरी $D$ पर हो):**
नेत्रिका के लेंस सूत्र का उपयोग करने पर:
$$m = \frac{v_o}{u_o}\left(1 + \frac{D}{f_e}\right)$$
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
- पहली सतह की वक्रता त्रिज्या ($R_1$) = $+20\text{ cm}$
- दूसरी सतह की वक्रता त्रिज्या ($R_2$) = $-30\text{ cm}$
- लेंस का अपवर्तनांक ($n_g$) = $1.5$
- पानी का अपवर्तनांक ($n_w$) = $1.33$ या $\frac{4}{3}$
### भाग 1: हवा में फोकस दूरी ($f_a$)\nलेस निर्माता सूत्र का उपयोग करने पर:
$$\frac{1}{f_a} = (n_g - 1)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$$\nमान रखने पर:
$$\frac{1}{f_a} = (1.5 - 1)\left(\frac{1}{20} - \frac{1}{-30}\right)$$
$$\frac{1}{f_a} = 0.5 \left(\frac{3 + 2}{60}\right) = \frac{1}{24}$$
$$f_a = +24\text{ cm}$$
### भाग 2: पानी में फोकस दूरी ($f_w$)\nसापेक्ष अपवर्तनांक $n_{gw} = \frac{1.5}{4/3} = 1.125$
$$\frac{1}{f_w} = (1.125 - 1)\left(\frac{1}{20} - \frac{1}{-30}\right)$$
$$\frac{1}{f_w} = 0.125 \left(\frac{5}{60}\right) = \frac{1}{96}$$
$$f_w = +96\text{ cm}$$
### निष्कर्ष:\nहवा में लेंस की फोकस दूरी $24\text{ cm}$ है और पानी में डुबोने पर यह बढ़कर $96\text{ cm}$ हो जाती है।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nसंयुक्त सूक्ष्मदर्शी एक ऐसा प्रकाशीय यंत्र है जिसका उपयोग अत्यंत छोटी वस्तुओं के अत्यधिक आवर्धित प्रतिबिंब देखने के लिए किया जाता है। इसमें कम फोकस दूरी के दो उत्तल लेंस होते हैं: अभिदृश्यक लेंस (objective) और नेत्रिका (eyepiece)।
### बनावट
1. **अभिदृश्यक लेंस:** बहुत कम फोकस दूरी और छोटे द्वारक वाला उत्तल लेंस, जो वस्तु की ओर होता है।
2. **नेत्रिका लेंस:** थोड़ी अधिक फोकस दूरी और बड़े द्वारक वाला उत्तल लेंस, जिससे अंतिम प्रतिबिंब देखा जाता है।
### कार्यप्रणाली
- अभिदृश्यक लेंस वस्तु का वास्तविक, उल्टा और आवर्धित प्रतिबिंब बनाता है।
- यह प्रतिबिंब नेत्रिका के लिए आभासी वस्तु का कार्य करता है, जो अंतिम आभासी और अत्यधिक आवर्धित प्रतिबिंब बनाता है।
### आवर्धन क्षमता की व्युत्पत्ति\nआवर्धन क्षमता ($m$) अंतिम द्वारा आंख पर बनाए गए कोण $\beta$ और स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी ($D$) पर रखी वस्तु द्वारा बनाए गए कोण $\alpha$ का अनुपात है।
$$m = \frac{\beta}{\alpha} \approx \frac{\tan \beta}{\tan \alpha}$$
\nनेत्रिका के लिए:
$$\tan \beta = \frac{h'}{u_e}$$\nयदि अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बने:
$$\frac{D}{u_e} = 1 + \frac{D}{f_e}$$
\nकुल आवर्धन क्षमता अभिदृश्यक और नेत्रिका के आवर्धन का गुणनफल होती है:
$$m = -\frac{L}{f_o} \left(1 + \frac{D}{f_e}\right)$$\nयह आवर्धन क्षमता के लिए आवश्यक व्यंजक है।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
- पहली सतह की वक्रता त्रिज्या ($R_1$) = $+20\text{ cm}$
- दूसरी सतह की वक्रता त्रिज्या ($R_2$) = $-30\text{ cm}$
- कांच का अपवर्तनांक ($n_g$) = $1.5$
- जल का अपवर्तनांक ($n_w$) = $1.33$ या $\frac{4}{3}$
---
### भाग (a): वायु में फोकस दूरी ($f_a$)
$$\frac{1}{f_a} = \left(\frac{n_g}{n_a} - 1\right) \left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$$\nमान रखने पर:
$$\frac{1}{f_a} = (1.5 - 1) \left(\frac{1}{20} - \frac{1}{-30}\right) = 0.5 \left(\frac{1}{20} + \frac{1}{30}\right)$$
$$\frac{1}{f_a} = 0.5 \left(\frac{5}{60}\right) = \frac{1}{24}$$
$$f_a = +24\text{ cm}$$
---
### भाग (b): जल में फोकस दूरी ($f_w$)
$$\frac{1}{f_w} = \left(\frac{n_g}{n_w} - 1\right) \left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$$\nयहाँ $\frac{n_g}{n_w} = \frac{1.5}{4/3} = \frac{9}{8}$$
$$\frac{1}{f_w} = \left(\frac{9}{8} - 1\right) \left(\frac{5}{60}\right) = \left(\frac{1}{8}\right)\left(\frac{1}{12}\right) = \frac{1}{96}$$
$$f_w = +96\text{ cm}$$
### निष्कर्ष:
- वायु में लेंस की फोकस दूरी $24\text{ cm}$ है।
- जल में लेंस की फोकस दूरी $96\text{ cm}$ है।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nलेंस निर्माता सूत्र किसी लेंस की फोकस दूरी को लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक और उसकी दोनों सतहों की वक्रता त्रिज्याओं से जोड़ता है। इसका उपयोग वांछित फोकस दूरी के लेंसों को डिजाइन करने के लिए किया जाता है।
### मान्यताएँ
1. लेंस को बहुत पतला माना जाता है, अर्थात लेंस की मोटाई उसकी वक्रता त्रिज्याओं की तुलना में नगण्य है।
2. लेंस का द्वारक छोटा होता है, जिससे परिक्षेपी किरणें (paraxial rays) उपयोग की जा सकें।
3. वस्तु एक बिंदु वस्तु है जो मुख्य अक्ष पर रखी गई है।
### चरण-दर-चरण व्युत्पत्ति
1. **पहली सतह पर अपवर्तन:** मान लीजिए कि $n_1$ अपवर्तनांक वाले विरल माध्यम में $R_1$ वक्रता त्रिज्या वाले उत्तल गोलीय पृष्ठ के सामने एक बिंदु वस्तु $O$ रखी है। लेंस के सघन माध्यम का अपवर्तनांक $n_2$ है।
गोलीय पृष्ठ के लिए अपवर्तन सूत्र:
$$\frac{n_2}{v_1} - \frac{n_1}{u} = \frac{n_2 - n_1}{R_1}$$
यहाँ $v_1$ पहली सतह द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब है।
2. **दूसरी सतह पर अपवर्तन:** पहली सतह द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब $I_1$ दूसरी सतह ($R_2$) के लिए आभासी वस्तु का कार्य करता है। प्रकाश सघन माध्यम ($n_2$) से विरल माध्यम ($n_1$) में जाता है।
दूसरी सतह के लिए सूत्र:
$$\frac{n_1}{v} - \frac{n_2}{v_1} = -\frac{n_2 - n_1}{R_2}$$
3. **समीकरणों को जोड़ना:** दोनों समीकरणों को जोड़ने पर:
$$\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \left(\frac{n_2}{n_1} - 1\right)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$$
$$\frac{1}{f} = (n_{21} - 1)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$$
जहाँ $n_{21} = \frac{n_2}{n_1}$ माध्यम के सापेक्ष लेंस का अपवर्तनांक है।
उत्तर (Answer): दी गई जानकारी:
1. अभिदृश्यक लेंस की फोकस दूरी, $f_o = +2.0\text{ cm}$
2. नेत्रिका लेंस की फोकस दूरी, $f_e = +6.25\text{ cm}$
3. लेंसों के बीच की ट्यूब की लंबाई / दूरी, $L = 15\text{ cm}$
4. नेत्रिका के लिए अंतिम प्रतिबिंब दूरी, $v_e = -25\text{ cm}$ (स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी)
\nसबसे पहले, हम नेत्रिका के लिए लेंस सूत्र का उपयोग करके नेत्रिका की वस्तु दूरी ($u_e$) ज्ञात करते हैं:
$$\frac{1}{v_e} - \frac{1}{u_e} = \frac{1}{f_e}$$
$$\frac{1}{-25} - \frac{1}{u_e} = \frac{1}{6.25}$$
$$-\frac{1}{25} - \frac{1}{u_e} = \frac{4}{25}$$
$$-\frac{1}{u_e} = \frac{4}{25} + \frac{1}{25} = \frac{5}{25} = \frac{1}{5}$$
$$u_e = -5\text{ cm}$$
\nअब, अभिदृश्यक लेंस के लिए प्रतिबिंब दूरी ($v_o$) ट्यूब की लंबाई $L$ से संबंधित है:
$$v_o = L - |u_e| = 15 - 5 = 10\text{ cm}$$
\nअब, वस्तु दूरी ($u_o$) ज्ञात करने के लिए हम अभिदृश्यक लेंस के लिए लेंस सूत्र का उपयोग करते हैं:
$$\frac{1}{v_o} - \frac{1}{u_o} = \frac{1}{f_o}$$
$$\frac{1}{10} - \frac{1}{u_o} = \frac{1}{2.0}$$
$$-\frac{1}{u_o} = \frac{1}{2} - \frac{1}{10} = \frac{5 - 1}{10} = \frac{4}{10} = \frac{2}{5}$$
$$u_o = -\frac{5}{2} = -2.5\text{ cm}$$
\nअतः वस्तु को अभिदृश्यक लेंस के सामने $2.5\text{ cm}$ की दूरी पर रखा जाना चाहिए।
उत्तर (Answer): लेंस की क्षमता को उस कोण की स्पर्शज्या (tangent) के रूप में परिभाषित किया जाता है जिससे वह प्रकाशिक केंद्र से इकाई दूरी पर मुख्य अक्ष के समानांतर प्रकाश पुंज को अभिसरित या अपसरित करता है। सरल शब्दों में, यह लेंस द्वारा प्राप्त प्रकाश किरणों के अभिसरण या अपसरण की मात्रा का माप है। इसे गणितीय रूप से मीटर में व्यक्त लेंस की फोकस दूरी के व्युत्क्रम के रूप में मापा जाता है, और इसका SI मात्रक डायोप्टर (D) है। $P = 1/f$।
\nआइए हवा में समाक्षीय रूप से संपर्क में रखे $f_1$ और $f_2$ फोकस दूरी वाले दो पतले लेंसों $L_1$ और $L_2$ पर विचार करें। मान लीजिए मुख्य अक्ष पर लेंसों से $u$ दूरी पर एक बिंदु वस्तु $O$ रखी है। पहला लेंस $L_1$ संयोजन से $v_1$ दूरी पर $I_1$ पर एक आभासी प्रतिबिंब बनाता है:
$$\frac{1}{v_1} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f_1}$$
\nयह प्रतिबिंब $I_1$ दूसरे लेंस $L_2$ के लिए एक आभासी वस्तु के रूप में कार्य करता है, जो $v$ दूरी पर अंतिम वास्तविक प्रतिबिंब $I$ बनाता है:
$$\frac{1}{v} - \frac{1}{v_1} = \frac{1}{f_2}$$
\nदोनों समीकरणों को जोड़ने पर:
$$\left( \frac{1}{v_1} - \frac{1}{u} \right) + \left( \frac{1}{v} - \frac{1}{v_1} \right) = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2}$$
$$\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2}$$
\nयदि संयोजन को $F$ फोकस दूरी वाले एक एकल तुल्य लेंस से बदल दिया जाए, तो:
$$\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{F}$$
\nसमीकरणों की तुलना करने पर, तुल्य फोकस दूरी $F$ निम्नलिखित होगी:
$$\frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2}$$
\nचूंकि क्षमता $P = 1/f$ है, संयोजन की कुल क्षमता होगी:
$$P = P_1 + P_2$$
उत्तर (Answer): दी गई जानकारी:
1. कांच के लेंस का अपवर्तनांक, $n = 1.5$
2. उत्तल लेंस की फोकस दूरी, $f = +20\text{ cm}$
3. मान लीजिए दोनों सतहों की वक्रता त्रिज्या का परिमाण $R$ है।
एक मानक उभयोत्तल लेंस के लिए, चिन्ह परिपाटी के अनुसार:
पहली सतह की वक्रता त्रिज्या, $R_1 = +R$
दूसरी सतह की वक्रता त्रिज्या, $R_2 = -R$
\nहम लेंस निर्माता सूत्र का उपयोग करते हैं:
$$\frac{1}{f} = (n - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$$
\nसूत्र में मान रखने पर:
$$\frac{1}{20} = (1.5 - 1) \left( \frac{1}{R} - \frac{1}{-R} \right)$$
$$\frac{1}{20} = (0.5) \left( \frac{1}{R} + \frac{1}{R} \right)$$
$$\frac{1}{20} = (0.5) \left( \frac{2}{R} \right)$$
$$\frac{1}{20} = \frac{1}{R}$$
$R$ के लिए हल करने पर:
$$R = 20\text{ cm}$$
\nअतः उत्तल लेंस की प्रत्येक सतह की वक्रता त्रिज्या $20\text{ cm}$ है।
उत्तर (Answer): गोलीय सतह पर अपवर्तन तब होता है जब प्रकाश किसी वक्र सीमा के माध्यम से एक अपवर्तनांक वाले माध्यम से दूसरे माध्यम में यात्रा करता है। मान लीजिए $n_1$ (विरल) और $n_2$ (सघन) अपवर्तनांक वाले दो माध्यमों को अलग करने वाली एक उत्तल गोलीय अपवर्तक सतह के मुख्य अक्ष पर एक बिंदु वस्तु $O$ रखी है, जहाँ $n_2 > n_1$ है।
$O$ से शुरू होने वाली किरण बिंदु $N$ पर सतह से टकराती है और अभिलंब $NC$ की ओर अपवर्तित होती है, जिससे मुख्य अक्ष पर एक वास्तविक प्रतिबिंब $I$ बनता है। मान लीजिए $\alpha$, $\beta$, और $\gamma$ क्रमशः आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब द्वारा मुख्य अक्ष के साथ बनाए गए कोण हैं। मान लीजिए $i$ आपतन कोण है और $r$ अपवर्तन कोण है।
\nत्रिभुज $ONC$ से, बहिष्कोण $i = \alpha + \gamma$ है।\nत्रिभुज $INC$ से, बहिष्कोण $\gamma = r + \beta \implies r = \gamma - \beta$ है।
\nस्नेल के नियम को लागू करने पर: $n_1 \sin i = n_2 \sin r$। छोटे कोणों के लिए, $\sin i \approx i$ और $\sin r \approx r$:
$n_1 i = n_2 r$
$i$ और $r$ के मान रखने पर:
$n_1 (\alpha + \gamma) = n_2 (\gamma - \beta)$
$n_1 \alpha + n_1 \gamma = n_2 \gamma - n_2 \beta$
$n_1 \alpha + n_2 \beta = (n_2 - n_1) \gamma$
\nछोटे द्वारक के लिए, चाप की लंबाई और दूरियों के पदों में कोणों को व्यक्त करने पर (चिन्ह परिपाटी का उपयोग करते हुए: $PO = -u, PI = +v, PC = +R$):
$\alpha \approx \frac{AN}{-u}$, $\beta \approx \frac{AN}{v}$, $\gamma \approx \frac{AN}{R}$
\nइन्हें समीकरण में रखने पर:
$n_1 \left(-\frac{1}{u}\right) + n_2 \left(\frac{1}{v}\right) = (n_2 - n_1) \left(\frac{1}{R}\right)$
\nसरल करने पर, हमें मानक अपवर्तन सूत्र प्राप्त होता है:
$$\frac{n_2}{v} - \frac{n_1}{u} = \frac{n_2 - n_1}{R}$$
उत्तर (Answer): दी गई जानकारी:
1. प्रिज्म एक समबाहु कांच का प्रिज्म है, इसलिए प्रिज्म का कोण, $A = 60^\circ$ है।
2. आपतन कोण ($i$) निर्गत कोण ($e$) के बराबर है, अर्थात $i = e$ है।
3. निर्गत कोण, प्रिज्म के कोण का $3/4$ गुना दिया गया है:
$e = \frac{3}{4} \times A = \frac{3}{4} \times 60^\circ = 45^\circ$ है।
अतः, $i = 45^\circ$ है।
\nहम जानते हैं कि विचलन कोण ($\delta$), आपतन कोण ($i$), निर्गत कोण ($e$) और प्रिज्म के कोण ($A$) के बीच संबंध होता है:
$\delta = i + e - A$
\nसूत्र में मान रखने पर:
$\delta = 45^\circ + 45^\circ - 60^\circ$
$\delta = 90^\circ - 60^\circ$
$\delta = 30^\circ$
\nअतः विचलन कोण $30^\circ$ है।