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विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

Subject: भौतिकी | Class: Class 12 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय: विक्रिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति (Dual Nature of Radiation and Matter) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स

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1. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Important Definitions)


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2. मुख्य सूत्र एवं समीकरण (Key Formulas)

#### (क) फोटॉन की ऊर्जा और संवेग (Energy and Momentum of Photon)

E = h\nu = \frac{hc}{\lambda}

(जहाँ $h$ = प्लांक नियतांक = $6.63 \times 10^{-34} \text{ J s}$, $\nu$ = आवृत्ति, $\lambda$ = तरंगदैर्ध्य, $c$ = प्रकाश का वेग)


p = \frac{h}{\lambda} = \frac{E}{c}


m = \frac{h}{\lambda c} = \frac{h\nu}{c^2}


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#### (ख) आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण (Einstein's Photoelectric Equation)

उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा ($K_{max}$):

K{max} = h\nu - \phi0


या आवृत्ति के पदों में:

K{max} = h\nu - h\nu0 = h(\nu - \nu_0)


निरोधी विभव ($V_0$) के पदों में अधिकतम गतिज ऊर्जा:

K{max} = e V0


अतः समीकरण बनता है:

e V0 = h\nu - \phi0

या

e V0 = h\nu - h\nu0


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#### (ग) डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य (de Broglie Wavelength)

किसी $m$ द्रव्यमान के कण जो $v$ वेग से गतिमान है, उसकी डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ($\lambda$):

\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{mv}


\lambda = \frac{h}{\sqrt{2mK}}


\lambda = \frac{h}{\sqrt{2mqV}}

(जहाँ $q$ कण का आवेश है और $V$ विभवांतर है।)


\lambda = \frac{12.27}{\sqrt{V}} \text{ Å}


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3. महत्वपूर्ण ग्राफ और निष्कर्ष (Important Graphs & Conclusions)

1. तीव्रता का प्रभाव: प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने पर प्रति सेकंड उत्सर्जित होने वाले फोटो-इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है, जिससे प्रकाश-विद्युत धारा बढ़ती है, लेकिन निरोधी विभव ($V_0$) अपरिवर्तित रहता है।

2. आवृत्ति का प्रभाव: आपतित प्रकाश की आवृत्ति बढ़ाने पर उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा और निरोधी विभव दोनों बढ़ते हैं, लेकिन संतृप्त धारा अपरिवर्तित रहती है।

3. देहली आवृत्ति की शर्त: प्रकाश-विद्युत प्रभाव तभी संभव है जब आपतित प्रकाश की आवृत्ति देहली आवृत्ति से अधिक या उसके बराबर हो ($\nu \ge \nu_0$)।


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मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय से एक आंकिक प्रश्न (Numerical) और एक परिभाषा या आरेखीय प्रश्न प्रायः पूछा जाता है।

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति
Overview
इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन तापायनिक उत्सर्जन क्षेत्र उत्सर्जन द्वितीयक उत्सर्जन प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन प्रकाश-विद्युत प्रभाव घटना का परिचय हर्ट्ज तथा लेनार्ड के प्रेक्षण प्रायोगिक अध्ययन तीव्रता का प्रभाव विभव का प्रभाव आवृत्ति का प्रभाव आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण फोटॉन की अवधारणा समीकरण: $K{max} = h\nu - \phi0$ ऊर्जा संरक्षण की व्याख्या दहली आवृत्ति तथा कार्यफलन प्रकाश की कण प्रकृति (फोटॉन) फोटॉन के गुण ऊर्जा ($E = h\nu$) संवेग ($p = h/\lambda$) उदासीन प्रकृति द्रव्य तरंगे (डी-ब्रॉग्ली तरंगें) डी-ब्रॉग्ली परिकल्पना डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ($\lambda = h/p$) इलेक्ट्रॉन के लिए तरंगदैर्ध्य सूत्र ($\lambda = 1.22/\sqrt{V}$ nm) प्रायोगिक सत्यापन डेविसन तथा जर्मर प्रयोग इलेक्ट्रॉन पुंज का विवर्तन तरंग प्रकृति की पुष्टि
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. आइंस्टीन का प्रकाशवैद्युत समीकरण लिखिए और समझाइए कि यह प्रकाशवैद्युत उत्सर्जन के नियमों की सफलतापूर्वक व्याख्या कैसे करता है। साथ ही, निम्नलिखित संख्यात्मक समस्या को हल कीजिए: 2271 Å तरंगदैर्ध्य का पराबैंगनी प्रकाश एक फोटोकैथोड पर डाला जाता है। यदि निरोध विभव 1.3 V है, तो धातु का कार्य फलन इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) में ज्ञात कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### आइंस्टीन का प्रकाशवैद्युत समीकरण और व्याख्या \nअल्बर्ट आइंस्टीन ने 1905 में मैक्स प्लैंक के क्वांटम सिद्धांत का उपयोग करके प्रकाशवैद्युत प्रभाव की व्याख्या की। आइंस्टीन के अनुसार, प्रकाश ऊर्जा के छोटे पैकेटों से मिलकर बना होता है जिन्हें फोटॉन कहते हैं, जिनमें से प्रत्येक की ऊर्जा $E = h\nu$ होती है, जहाँ $h$ प्लैंक स्थिरांक है और $\nu$ प्रकाश की आवृत्ति है। #### मुख्य सिद्धांत: - **ऊर्जा स्थानांतरण:** जब ऊर्जा $h\nu$ का एक फोटॉन धातु की सतह पर मौजूद किसी इलेक्ट्रॉन से टकराता है, तो वह अपनी संपूर्ण ऊर्जा को एक ही तात्कालिक प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉन को स्थानांतरित कर देता है। - **कार्य फलन:** इलेक्ट्रॉन को धातु की सतह से बाहर निकलने के लिए न्यूनतम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसे कार्य फलन ($\phi_0$ या $W_0$) कहते हैं। - **अधिकतम गतिज ऊर्जा:** फोटॉन की शेष ऊर्जा उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा ($K_{max}$) के रूप में प्रकट होती है। \nअतः आइंस्टीन का प्रकाशवैद्युत समीकरण है: $$K_{max} = h\nu - \phi_0$$\nया निरोध विभव ($V_0$) के पदों में: $$e V_0 = h\nu - \phi_0$$ #### प्रकाशवैद्युत उत्सर्जन के नियमों की व्याख्या: 1. **आवृत्ति का प्रभाव:** यदि फोटॉन की ऊर्जा $h\nu$ कार्य फलन $\phi_0$ से कम है, तो उत्सर्जन असंभव है। आवश्यक न्यूनतम आवृत्ति को देहली आवृत्ति ($\nu_0$) कहते हैं। उच्च आवृत्ति $K_{max}$ को बढ़ाती है। 2. **तीव्रता का प्रभाव:** प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने से आपतित फोटॉनों की संख्या बढ़ती है, जिससे उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों (धारा) की संख्या बढ़ती है, लेकिन उनकी गतिज ऊर्जा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। 3. **तात्कालिक प्रक्रिया:** फोटॉन और इलेक्ट्रॉन के बीच की टक्कर तात्कालिक होती है, यानी प्रकाश के आपतित होने और फोटोइलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन के बीच कोई समयान्तर नहीं होता है। --- ### संख्यात्मक हल #### दिए गए आंकड़े: - आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य, $\lambda = 2271 \text{ Å} = 2271 \times 10^{-10} \text{ m}$ - निरोध विभव, $V_0 = 1.3 \text{ V}$ - प्लैंक स्थिरांक, $h \approx 6.63 \times 10^{-34} \text{ J s}$ - प्रकाश की चाल, $c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$ - इलेक्ट्रॉन का आवेश, $e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$ #### चरण 1: आपतित फोटॉन की ऊर्जा ($E$) की गणना करें $$E = \frac{hc}{\lambda}$$ $$E = \frac{6.63 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{2271 \times 10^{-10}}$$ $$E = \frac{1.989 \times 10^{-25}}{2271 \times 10^{-10}} \approx 8.7586 \times 10^{-19} \text{ जूल}$$ \nऊर्जा को इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) में बदलना: $$E_{\text{eV}} = \frac{8.7586 \times 10^{-19}}{1.6 \times 10^{-19}} \approx 5.474 \text{ eV}$$ #### चरण 2: अधिकतम गतिज ऊर्जा ($K_{max}$) की गणना करें $$K_{max} = e V_0$$ $$K_{max} = 1.3 \text{ eV} \quad (\text{चूँकि } 1 \text{ V} \times e = 1 \text{ eV})$$ #### चरण 3: कार्य फलन ($\phi_0$) की गणना करें\nआइंस्टीन के समीकरण का उपयोग करने पर: $$K_{max} = E - \phi_0$$ $$\phi_0 = E - K_{max}$$ $$\phi_0 = 5.474 \text{ eV} - 1.3 \text{ eV}$$ $$\phi_0 = 4.174 \text{ eV}$$ **उत्तर:**\nधातु का कार्य फलन लगभग **4.17 eV** है।
Q2. $6400 \text{ \u00c5}$ तरंगदैर्ध्य का एक वर्णनीय विकिरण एक प्रकाश-संवेदनशील सतह पर आपतित होता है। यदि धातु का कार्य फलन $2.0 \text{ eV}$ है, तो गणना कीजिए: (i) eV में आपतित फोटॉन की ऊर्जा। (ii) उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा। (iii) निरोधी विभव। (दिया गया है: $h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ J s}$, $c = 3 \times 10^8 \text{ m s}^{-1}$, $1 \text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19} \text{ J}$) 5 Marks
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा: - आपतित विकिरण की तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) = $6400 \text{ \u00c5} = 6400 \times 10^{-10} \text{ m} = 6.4 \times 10^{-7} \text{ m}$ - धातु का कार्य फलन ($\phi_0$) = $2.0 \text{ eV}$ - प्लांक स्थिरांक ($h$) = $6.63 \times 10^{-34} \text{ J s}$ - प्रकाश की चाल ($c$) = $3 \times 10^8 \text{ m s}^{-1}$ - इलेक्ट्रॉन का आवेश ($e$) = $1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$ --- ### (i) आपतित फोटॉन की ऊर्जा ($E$) की गणना\nफोटॉन की ऊर्जा का सूत्र है: $$E = \frac{hc}{\lambda}$| \nमान रखने पर: $$E = \frac{(6.63 \times 10^{-34} \text{ J s}) \times (3 \times 10^8 \text{ m s}^{-1})}{6.4 \times 10^{-7} \text{ m}}$$ $$E = \frac{19.89 \times 10^{-26}}{6.4 \times 10^{-7}}$$ $$E = 3.1078 \times 10^{-19} \text{ J}$| \nऊर्जा को इलेक्ट्रॉन-वॉल्ट (eV) में बदलना: $$E = \frac{3.1078 \times 10^{-19}}{1.6 \times 10^{-19}} \text{ eV} \approx 1.94 \text{ eV}$| --- ### (ii) उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा ($K_{max}$) की गणना\nआइंस्टीन के प्रकाश-वैद्युत समीकरण का उपयोग करने पर: $$K_{max} = E - \phi_0$$ \nचूंकि आपतित फोटॉन की ऊर्जा ($1.94 \text{ eV}$) कार्य फलन ($2.0 \text{ eV}$) से कम है, इसलिए प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन नहीं होगा।\nअतः, $K_{max} = 0 \text{ eV}$। --- ### (iii) निरोधी विभव ($V_0$) की गणना\nचूंकि $K_{max} = 0$ है, इसलिए निरोधी विभव भी होगा: $$V_0 = 0 \text{ V}$| ### अंतिम उत्तर: (i) आपतित फोटॉन की ऊर्जा = $1.94 \text{ eV}$ (ii) प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा = $0 \text{ eV}$ (चूंकि $E < \phi_0$ है, कोई उत्सर्जन नहीं होता) (iii) निरोधी विभव = $0 \text{ V}$
Q3. एक इलेक्ट्रॉन को 100 V के विभवांतर से त्वरित किया जाता है। गणना कीजिए: (i) इलेक्ट्रॉन का संवेग। (ii) इलेक्ट्रॉन से संबद्ध डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य। (दिया गया है: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान $m = 9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}$, प्लांक स्थिरांक $h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ J s}$, इलेक्ट्रॉन का आवेश $e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$) 5 Marks
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा: - विभवांतर ($V$) = $100 \text{ V}$ - इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान ($m$) = $9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}$ - प्लांक स्थिरांक ($h$) = $6.63 \times 10^{-34} \text{ J s}$ - इलेक्ट्रॉन का आवेश ($e$) = $1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$ --- ### (i) संवेग ($p$) की गणना\nजब किसी इलेक्ट्रॉन को विभवांतर $V$ से त्वरित किया जाता है, तो उसके द्वारा प्राप्त गतिज ऊर्जा होती है: $$K = eV$$ \nसंवेग ($p$) और गतिज ऊर्जा ($K$) के बीच का संबंध है: $$p = \sqrt{2mK} = \sqrt{2meV}$| \nसूत्र में दिए गए मानों को रखने पर: $$p = \sqrt{2 \times (9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}) \times (1.6 \times 10^{-19} \text{ C}) \times (100 \text{ V})}$$ $$p = \sqrt{291.2 \times 10^{-50}}$$ $$p = \sqrt{29.12 \times 10^{-49}}$$ $$p = \sqrt{291.2} \times 10^{-25}$| $$p \approx 5.4 \times 10^{-24} \text{ kg m s}^{-1}$| --- ### (ii) डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) की गणना\nइलेक्ट्रॉन से संबद्ध डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का सूत्र है: $$\lambda = \frac{h}{p}$| $h$ और $p$ के मान रखने पर: $$\lambda = \frac{6.63 \times 10^{-34} \text{ J s}}{5.4 \times 10^{-24} \text{ kg m s}^{-1}}$$ $$\lambda = 1.228 \times 10^{-10} \text{ m}$| $$\lambda \approx 0.123 \text{ nm} \text{ (या } 1.23 \text{ \u00c5)}$$ ### अंतिम उत्तर: (i) इलेक्ट्रॉन का संवेग = $5.4 \times 10^{-24} \text{ kg m s}^{-1}$ (ii) डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य = $0.123 \text{ nm}$
Q4. डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य क्या है? $V$ वोल्ट के विभवांतर से त्वरित इलेक्ट्रॉन की डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। इलेक्ट्रॉनों की तरंग प्रकृति को सत्यापित करने के लिए डेविसन और जर्मर प्रयोग का वर्णन एक स्पष्ट नामांकित चित्र के साथ कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य की अवधारणा 1924 में, फ्रांसीसी भौतिकবিদ लुई डी ब्रोग्ली ने प्रस्ताव दिया कि पदार्थ के गतिमान कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन आदि) को कुछ निश्चित परिस्थितियों में तरंग जैसी विशेषताओं को प्रदर्शित करना चाहिए। इन पदार्थ तरंगों को डी ब्रोग्ली तरंगें कहा जाता है। $m$ द्रव्यमान के और $v$ वेग से गतिमान कण से जुड़ी तरंगदैर्ध्य निम्नलिखित है: $$\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{mv}$$\nजहाँ $h$ प्लांक नियतांक है और $p$ कण का रैखिक संवेग है। ### त्वरित इलेक्ट्रॉन की डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य के लिए व्युत्पत्ति\nमाना $m$ द्रव्यमान और $e$ आवेश का एक इलेक्ट्रॉन विरामावस्था से $V$ वोल्ट के विभवांतर द्वारा त्वरित होता है।\nविद्युत क्षेत्र द्वारा इलेक्ट्रॉन पर किया गया कार्य उसकी गतिज ऊर्जा ($K$) के रूप में प्रकट होता है: $$K = eV$$\nहम जानते हैं कि गतिज ऊर्जा और रैखिक संवेग ($p$) इस प्रकार संबंधित हैं: $$K = \frac{p^2}{2m} \implies p^2 = 2mK = 2meV$$ $$p = \sqrt{2meV}$|\nडी ब्रोग्ली के सूत्र में संवेग का मान रखने पर, तरंगदैर्ध्य $\lambda$ हो जाती है: $$\lambda = \frac{h}{\sqrt{2meV}}$$\nप्लांक नियतांक ($h = 6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}$), इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान ($m = 9.1 \times 10^{-31}\text{ kg}$), और इलेक्ट्रॉन के आवेश ($e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$) के मानक मान रखने पर: $$\lambda = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{\sqrt{2 \times 9.1 \times 10^{-31} \times 1.6 \times 10^{-19} \times V}}$$ $$\lambda = \frac{1.227}{\sqrt{V}}\text{ nm} = \frac{12.27}{\sqrt{V}}\,\mathring{\text{A}}$$ ### डेविसन और जर्मर प्रयोग * **उद्देश्य:** इलेक्ट्रॉन विवर्तन के माध्यम से इलेक्ट्रॉनों की तरंग प्रकृति (डी ब्रोग्ली परिकल्पना) को प्रायोगिक रूप से सत्यापित करना। * **प्रायोगिक व्यवस्था:** * **इलेक्ट्रॉन गन:** इसमें टंगस्टन फिलामेंट $F$ होता है जिसे तापायनिक उत्सर्जन द्वारा इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करने के लिए कम तनाव वाली बैटरी द्वारा गर्म किया जाता है। उच्च तनाव वाली बैटरी का उपयोग करके उच्च धनात्मक विभव $V$ लागू करके इलेक्ट्रॉनों को वांछित वेग तक त्वरित किया जाता है। * **कोलाइमेटर:** एक बारीक बेलनाकार एनोड सिलेंडर उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को एक बारीक समानांतर पुंज में केंद्रित करता है। * **लक्ष्य (निकल क्रिस्टल):** बारीक इलेक्ट्रॉन पुंज को निकल के एकल क्रिस्टल की सतह पर सामान्य रूप से गिरने दिया जाता है। क्रिस्टल त्रि-आयामी विवर्तन ग्रेटिंग के रूप में कार्य करता है। * **फैराडे सिलेंडर (डिटెక్టర్):** क्रिस्टल से प्रकीर्णित इलेक्ट्रॉनों को एक संवेदनशील गैल्वेनोमीटर से जुड़े एक चल फैराडे सिलेंडर द्वारा एकत्र किया जाता है। विभिन्न कोणों $\theta$ पर प्रकीर्णन तीव्रता को मापने के लिए डिटेक्टर को एक गोलाकार पैमाने पर घुमाया जा सकता है। * **प्रेक्षण और निष्कर्ष:** * यह देखा गया कि प्रकीर्णित इलेक्ट्रॉन पुंज की तीव्रता प्रकीर्णन कोण $\theta$ और त्वरित विभव $V$ के साथ बदलती है। * $V = 54\text{ V}$ के त्वरित विभव पर, $\theta = 50^\circ$ के प्रकीर्णन कोण पर प्रकीर्णन तीव्रता में एक तीखा शिखर देखा गया। * विवर्तन के लिए ब्रैग के नियम ($2d \sin \theta = n\lambda$) का उपयोग करते हुए, क्रिस्टल तल रिक्ति से गणना की गई इलेक्ट्रॉनों की तरंगदैर्ध्य सैद्धांतिक डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य ($\lambda = \frac{12.27}{\sqrt{54}} \approx 1.66\,\mathring{\text{A}}$) से सटीक रूप से मेल खाती है। * इसने निर्णायक रूप से साबित कर दिया कि इलेक्ट्रॉनों में तरंग प्रकृति होती है और वे विवर्तन से गुजरते हैं, जिससे डी ब्रोग्ली की परिकल्पना की पुष्टि होती है।
Q5. $500\text{ nm}$ तरंगदैर्ध्य का एक वर्णप्रकाश (monochromatic light) एक प्रकाश-वैद्युत सतह पर आपतित होता है। धातु का कार्य फलन $2.14\text{ eV}$ है। (a) इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ($\text{eV}$) में आपतित फोटोन की ऊर्जा की गणना कीजिए। (b) उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा निर्धारित कीजिए। (c) इस सतह के लिए नि:रोधी विभव (stopping potential) की गणना कीजिए। (d) धातु के लिए देहली आवृत्ति ज्ञात कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### दिए गए आंकड़े: * आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य, $\lambda = 500\text{ nm} = 500 \times 10^{-9}\text{ m}$ * धातु का कार्य फलन, $\phi_0 = 2.14\text{ eV}$ * प्लांक का नियतांक, $h = 6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}$ * निर्वात में प्रकाश की चाल, $c = 3 \times 10^8\text{ m/s}$ * इलेक्ट्रॉन का आवेश, $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$ --- ### (a) आपतित फोटोन की ऊर्जा ($E$) की गणना:\nफोटोन की ऊर्जा सूत्र द्वारा दी जाती है: $$E = \frac{hc}{\lambda}$$\nदिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $$E = \frac{(6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}) \times (3 \times 10^8\text{ m/s})}{500 \times 10^{-9}\text{ m}}$$ $$E = \frac{1.989 \times 10^{-25}}{500 \times 10^{-9}} = 3.978 \times 10^{-19}\text{ J}$$ $1.6 \times 10^{-19}\text{ J/eV}$ से विभाजित करके जूल को इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ($\text{eV}$) में बदलना: $$E = \frac{3.978 \times 10^{-19}}{1.6 \times 10^{-19}} = 2.486\text{ eV} \approx 2.49\text{ eV}$$ --- ### (b) अधिकतम गतिज ऊर्जा ($K_{max}$) का निर्धारण:\nआइंस्टीन के प्रकाश-वैद्युत समीकरण के अनुसार: $$K_{max} = E - \phi_0$$\nप्राप्त मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $$K_{max} = 2.49\text{ eV} - 2.14\text{ eV} = 0.35\text{ eV}$$\nजूल में बदलने पर: $$K_{max} = 0.35 \times 1.6 \times 10^{-19}\text{ J} = 5.6 \times 10^{-20}\text{ J}$$ --- ### (c) नि:रोधी विभव ($V_0$) की गणना:\nनि:रोधी विभव अधिकतम गतिज ऊर्जा से इस प्रकार संबंधित है: $$eV_0 = K_{max}$$ $$V_0 = \frac{K_{max}}{e}$$ $\text{eV}$ और $e$ में मान रखने पर: $$V_0 = \frac{0.35\text{ eV}}{1\text{ e}} = 0.35\text{ V}$$ --- ### (d) देहली आवृत्ति ($\nu_0$) की गणना:\nकार्य फलन देहली आवृत्ति से इस प्रकार संबंधित है: $$\phi_0 = h\nu_0$$ $$\nu_0 = \frac{\phi_0}{h}$$\nपहले, कार्य फलन $\phi_0$ को जूल में बदलें: $$\phi_0 = 2.14 \times 1.6 \times 10^{-19}\text{ J} = 3.424 \times 10^{-19}\text{ J}$$\nअब, $\nu_0$ की गणना करें: $$\nu_0 = \frac{3.424 \times 10^{-19}\text{ J}}{6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}}$$ $$\nu_0 \approx 5.16 \times 10^{14}\text{ Hz}$$ ### अंतिम उत्तर: (a) आपतित फोटोन की ऊर्जा = $2.49\text{ eV}$ (b) अधिकतम गतिज ऊर्जा = $0.35\text{ eV} = 5.6 \times 10^{-20}\text{ J}$ (c) नि:रोधी विभव = $0.35\text{ V}$ (d) देहली आवृत्ति = $5.16 \times 10^{14}\text{ Hz}$
Q6. द्रव्य तरंगों पर दे ब्रॉग्ली की परिकल्पना की विवेचना कीजिए। $V$ वोल्ट के विभवांतर से त्वरित एक इलेक्ट्रॉन की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए, और $V = 100\text{ V}$ के लिए इसका संख्यात्मक मान ज्ञात कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### द्रव्य तरंगों पर दे ब्रॉग्ली की परिकल्पना 1924 में, फ्रांसीसी भौतिकবিদ लुई डी ब्रॉग्ली ने एक साहसिक परिकल्पना प्रस्तुत की कि प्रकृति समरूपता पसंद करती है। चूँकि विकिरण (जैसे प्रकाश) दोहरी प्रकृति प्रदर्शित करता है—कभी तरंगों की तरह और कभी कणों की तरह—इसलिए द्रव्य (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और परमाणु) को भी दोहरा व्यवहार प्रदर्शित करना चाहिए। \nदे ब्रॉग्ली के अनुसार, प्रत्येक गतिमान कण के साथ एक तरंग जुड़ी होती है। इन तरंगों को **द्रव्य तरंगें** या **दे ब्रॉग्ली तरंगें** कहा जाता है। संवेग $p$ वाले कण से जुड़ी तरंगदैर्ध्य दे ब्रॉग्ली संबंध द्वारा दी जाती है: $$\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{mv}$$\nजहाँ: - $\lambda$ दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य है, - $h$ प्लांक स्थिरांक है, - $p$ कण का रैखिक संवेग है, - $m$ कण का द्रव्यमान है, और - $v$ कण का वेग है। --- ### त्वरित इलेक्ट्रॉन के लिए दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य की व्युत्पत्ति\nद्रव्यमान $m$ और आवेश $e$ के एक इलेक्ट्रॉन पर विचार करें जो प्रारंभ में स्थिर है, और इसे $V$ वोल्ट के विभवांतर से त्वरित किया जाता है।\nविद्युत क्षेत्र द्वारा इलेक्ट्रॉन पर किया गया कार्य उसकी गतिज ऊर्जा ($K$) के रूप में प्रकट होता है: $$K = eV$$\nहम जानते हैं कि गतिज ऊर्जा और रैखिक संवेग $p$ इस व्यंजक से संबंधित हैं: $$K = \frac{p^2}{2m} \implies p^2 = 2mK = 2meV$$\nअतः, संवेग $p$ है: $$p = \sqrt{2meV}$|\nसंवेग के इस मान को दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य सूत्र $\lambda = \frac{h}{p}$ में रखने पर, हमें प्राप्त होता है: $$\lambda = \frac{h}{\sqrt{2meV}}$$ \nस्थिरांकों के मानक मानों को प्रतिस्थापित करने पर: - प्लांक स्थिरांक, $h = 6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}$ - इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, $m = 9.1 \times 10^{-31}\text{ kg}$ - इलेक्ट्रॉन का आवेश, $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$ $$\lambda = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{\sqrt{2 \times 9.1 \times 10^{-31} \times 1.6 \times 10^{-19} \times V}}$$ $$\lambda = \frac{1.227}{\sqrt{V}}\text{ nm} = \frac{12.27}{\sqrt{V}}\,\text{\AA}$$ --- ### $V = 100\text{ V}$ के लिए संख्यात्मक गणना $V = 100\text{ V}$ से त्वरित इलेक्ट्रॉन के लिए व्युत्पन्न सूत्र का उपयोग करने पर: $$\lambda = \frac{12.27}{\sqrt{100}}\,\text{\AA}$$ $$\lambda = \frac{12.27}{10}\,\text{\AA} = 1.227\,\text{\AA} = 0.1227\text{ nm}$$ ### निष्कर्ष: $100\text{ V}$ से त्वरित इलेक्ट्रॉन की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य $1.227\,\text{\AA}$ है।
Q7. $500\text{ nm}$ तरंगाग्र के एकवर्णीय प्रकाश को एक निश्चित धातु की सतह पर आपतित किया जाता है। यदि धातु का कार्यफलन $2.1\text{ eV}$ है, तो गणना कीजिए: (a) इलेक्ट्रॉन-वोल्ट में आपतित फोटॉन की ऊर्जा, (b) उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा, और (c) निरोधी विभव। दिया गया है: $h = 6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}$, $c = 3 \times 10^8\text{ m/s}$, और $1\text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19}\text{ J}$। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण हल: **दिया गया डेटा:** - आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य, $\lambda = 500\text{ nm} = 500 \times 10^{-9}\text{ m} = 5 \times 10^{-7}\text{ m}$ - धातु का कार्यफलन, $\phi_0 = 2.1\text{ eV}$ - प्लांक स्थिरांक, $h = 6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}$ - प्रकाश की चाल, $c = 3 \times 10^8\text{ m/s}$ - रूपांतरण कारक: $1\text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19}\text{ J}$ --- #### (a) आपतित फोटॉन की ऊर्जा ($E$)\nफोटॉन की ऊर्जा का सूत्र है: $$E = \frac{hc}{\lambda}$$\nदिए गए मानों को रखने पर: $$E = \frac{6.63 \times 10^{-34}\text{ J s} \times 3 \times 10^8\text{ m/s}}{5 \times 10^{-7}\text{ m}}$$ $$E = \frac{1.989 \times 10^{-25}}{5 \times 10^{-7}} = 3.978 \times 10^{-19}\text{ J}$$ \nऊर्जा को इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) में बदलना: $$E = \frac{3.978 \times 10^{-19}\text{ J}}{1.6 \times 10^{-19}\text{ J/eV}} = 2.486\text{ eV}$$ --- #### (b) उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा ($K_{max}$)\nआइंस्टीन के प्रकाश-वैद्युत समीकरण का उपयोग करने पर: $$K_{max} = E - \phi_0$$ eV में मान रखने पर: $$K_{max} = 2.486\text{ eV} - 2.1\text{ eV} = 0.386\text{ eV}$$ \nअधिकतम गतिज ऊर्जा को जूल में बदलना: $$K_{max} = 0.386 \times 1.6 \times 10^{-19}\text{ J} = 6.176 \times 10^{-20}\text{ J}$$ --- #### (c) निरोधी विभव ($V_0$)\nअधिकतम गतिज ऊर्जा और निरोधी विभव के बीच का संबंध है: $$K_{max} = e V_0$$\nअतः, निरोधी विभव $V_0$ होगा: $$V_0 = \frac{K_{max}}{e}$| eV में $K_{max}$ का मान और इलेक्ट्रॉन आवेश $e$ रखने पर: $$V_0 = \frac{0.386\text{ eV}}{e} = 0.386\text{ V}$$ ### अंतिम उत्तर: (a) आपतित फोटॉन की ऊर्जा = $2.49\text{ eV}$ (b) अधिकतम गतिज ऊर्जा = $0.386\text{ eV}$ (या $6.18 \times 10^{-20}\text{ J}$) (c) निरोधी विभव = $0.386\text{ V}$
Q8. द्रव्य तरंगों के लिए डी ब्रॉग्ली की परिकल्पना को लिखिए। $V$ वोल्ट के विभवांतर से त्वरित एक इलेक्ट्रॉन की डी ब्रॉग्ली तरंग दैर्ध्य के लिए व्यंजक की व्युत्पत्ति कीजिए। $100\text{ V}$ के विभवांतर से त्वरित एक इलेक्ट्रॉन से जुड़ी डी ब्रॉग्ली तरंग दैर्ध्य की गणना कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### डी ब्रॉग्ली की परिकल्पना 1924 में, फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लुई डी ब्रॉग्ली ने एक क्रांतिकारी परिकल्पना प्रस्तुत की कि प्रकृति समरूपता को पसंद करती है। चूंकि विकिरण (जैसे प्रकाश) एक द्वैत प्रकृति (तरंग जैसी और कण जैसी विशेषताएं) प्रदर्शित करता है, इसलिए पदार्थ (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और परमाणु) को भी उपयुक्त परिस्थितियों में तरंग जैसी विशेषताएं प्रदर्शित करनी चाहिए। \nडी ब्रॉग्ली के अनुसार, पदार्थ के प्रत्येक गतिमान कण से एक तरंग जुड़ी होती है। इस तरंग को द्रव्य तरंग या डी ब्रॉग्ली तरंग के रूप में जाना जाता है। द्रव्यमान $m$ के एक कण और वेग $v$ से गतिमान कण से जुड़ी तरंग दैर्ध्य ($\lambda$) इस सूत्र द्वारा दी जाती है: $$\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{mv}$|\nजहाँ $h$ प्लांक स्थिरांक है और $p$ कण का रैखिक संवेग है। --- ### त्वरित इलेक्ट्रॉन के लिए डी ब्रॉग्ली तरंग दैर्ध्य की व्युत्पत्ति\nमान लीजिए कि विश्राम द्रव्यमान $m$ और आवेश $e$ का एक इलेक्ट्रॉन $V$ वोल्ट के विभवांतर से विराम से त्वरित होता है।\nइलेक्ट्रॉन द्वारा प्राप्त गतिज ऊर्जा ($K$) है: $$K = eV$$\nहम यह भी जानते हैं कि गतिज ऊर्जा और रैखिक संवेग ($p$) समीकरण द्वारा संबंधित हैं: $$K = \frac{p^2}{2m} \implies p^2 = 2mK = 2meV$$ $$p = \sqrt{2meV}$$\nसंवेग $p$ के मान को डी ब्रॉग्ली समीकरण ($\lambda = \frac{h}{p}$) में प्रतिस्थापित करने पर, हम प्राप्त करते हैं: $$\lambda = \frac{h}{\sqrt{2meV}}$$\nयह त्वरित आवेशित कण की डी ब्रॉग्ली तरंग दैर्ध्य के लिए सामान्य व्यंजक है। --- ### $V = 100\text{ V}$ के लिए डी ब्रॉग्ली तरंग दैर्ध्य की गणना\nज्ञात स्थिरांकों को व्युत्पन्न सूत्र में प्रतिस्थापित करें: - $h = 6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}$ - $m = 9.1 \times 10^{-31}\text{ kg}$ - $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$ - $V = 100\text{ V}$ $$\lambda = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{\sqrt{2 \times (9.1 \times 10^{-31}) \times (1.6 \times 10^{-19}) \times 100}}$$ $$\lambda = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{\sqrt{291.2 \times 10^{-50}}} = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{17.065 \times 10^{-25}}$$ $$\lambda = 0.3885 \times 10^{-9}\text{ m} = 0.388\text{ nm} = 1.227\text{ \u00c5}$$ --- ### अंतिम उत्तर: - डी ब्रॉग्ली तरंग दैर्ध्य व्यंजक: $\lambda = \frac{h}{\sqrt{2meV}}$ - $100\text{ V}$ के लिए परिकलित तरंग दैर्ध्य: $1.227\text{ \u00c5}$ (या $0.1227\text{ nm}$)
Q9. $500\text{ nm}$ तरंग दैर्ध्य का एक वर्णप्रकाश (monochromatic light) एक प्रकाश-वैद्युत सतह पर आपतित होता है। धातु का कार्य फलन $2.13\text{ eV}$ है। गणना कीजिए: (i) उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा जूल और eV में, (ii) निरोधी विभव, और (iii) धातु की सतह के लिए देहली आवृत्ति। ($h = 6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}$, $c = 3 \times 10^8\text{ m/s}$ लीजिए।) 5 Marks
उत्तर (Answer): ### दिए गए आंकड़े: - आपतित प्रकाश की तरंग दैर्ध्य, $\lambda = 500\text{ nm} = 500 \times 10^{-9}\text{ m}$ - धातु का कार्य फलन, $\phi_0 = 2.13\text{ eV} = 2.13 \times 1.6 \times 10^{-19}\text{ J} = 3.408 \times 10^{-19}\text{ J}$ - प्लांक स्थिरांक, $h = 6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}$ - प्रकाश की गति, $c = 3 \times 10^8\text{ m/s}$ - इलेक्ट्रॉन का आवेश, $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$ --- ### चरण (i): उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा ($K_{max}$) की गणना करें\nसबसे पहले, आपतित फोटॉन की ऊर्जा ($E$) की गणना करें: $$E = \frac{hc}{\lambda}$$\nमान रखने पर: $$E = \frac{(6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}) \times (3 \times 10^8\text{ m/s})}{500 \times 10^{-9}\text{ m}}$$ $$E = \frac{1.989 \times 10^{-25}}{500 \times 10^{-9}} = 3.978 \times 10^{-19}\text{ J}$$ \nफोटॉन ऊर्जा को इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) में बदलें: $$E = \frac{3.978 \times 10^{-19}}{1.6 \times 10^{-19}} = 2.486\text{ eV}$$ \nअब, $K_{max}$ ज्ञात करने के लिए आइंस्टीन के प्रकाश-वैद्युत समीकरण का उपयोग करें: $$K_{max} = E - \phi_0$$ $$K_{max} = 2.486\text{ eV} - 2.13\text{ eV} = 0.356\text{ eV}$$ \nजूल में: $$K_{max} = 0.356 \times 1.6 \times 10^{-19}\text{ J} = 5.696 \times 10^{-20}\text{ J}$$ --- ### चरण (ii): निरोधी विभव ($V_0$) की गणना करें\nअधिकतम गतिज ऊर्जा और निरोधी विभव के बीच का संबंध है: $$K_{max} = eV_0$$ $$V_0 = \frac{K_{max}}{e}$$ $$V_0 = \frac{0.356 \times 1.6 \times 10^{-19}\text{ J}}{1.6 \times 10^{-19}\text{ C}} = 0.356\text{ V}$$ --- ### चरण (iii): देहली आवृत्ति ($\nu_0$) की गणना करें\nकार्य फलन और देहली आवृत्ति के बीच का संबंध है: $$\phi_0 = h\nu_0$$ $$\nu_0 = \frac{\phi_0}{h}$$\nमान रखने पर: $$\nu_0 = \frac{3.408 \times 10^{-19}\text{ J}}{6.63 \times 10^{-34}\text{ J s}}$$ $$\nu_0 = 0.514 \times 10^{15}\text{ Hz} = 5.14 \times 10^{14}\text{ Hz}$$ --- ### अंतिम उत्तर: - (i) अधिकतम गतिज ऊर्जा: $5.696 \times 10^{-20}\text{ J}$ (या $0.356\text{ eV}$) - (ii) निरोधी विभव: $0.356\text{ V}$ - (iii) देहली आवृत्ति: $5.14 \times 10^{14}\text{ Hz}$
Q10. आइंस्टीन के प्रकाश-वैद्युत समीकरण को समझाइए और चर्चा कीजिए कि यह प्रकाश-वैद्युत प्रभाव के प्रायोगिक प्रेक्षणों को किस प्रकार सफलतापूर्वक स्पष्ट करता है। प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन के नियम लिखिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### आइंस्टीन के प्रकाश-वैद्युत समीकरण का परिचय\nअल्बर्ट आइंस्टीन ने 1905 में मैक्स प्लांक के विकिरण के क्वांटम सिद्धांत का उपयोग करके प्रकाश-वैद्युत प्रभाव को सफलतापूर्वक समझाया। आइंस्टीन के अनुसार, प्रकाश विकिरण ऊर्जा के विविक्त पैकेटों के रूप में चलता है जिन्हें फोटॉन कहा जाता है। प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा $E = h\nu$ द्वारा दी जाती है, जहाँ $h$ प्लांक स्थिरांक है और $\nu$ आपतित विकिरण की आवृत्ति है। ### प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन की क्रियाविधि\nजब पर्याप्त ऊर्जा का एक फोटॉन किसी धातु की सतह पर आपतित होता है, तो यह धातु के अंदर एक इलेक्ट्रॉन से टकराता है और एक ही तात्कालिक अन्योन्यक्रिया में अपनी संपूर्ण ऊर्जा इलेक्ट्रॉन को स्थानांतरित कर देता है। इस ऊर्जा का एक हिस्सा इलेक्ट्रॉन को धातु की सतह के आकर्षण बलों से मुक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है, जिसे कार्य फलन ($\phi_0$ या $h\nu_0$) कहा जाता है। शेष ऊर्जा उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा ($K_{max}$) के रूप में प्रकट होती है। ### गणितीय सूत्रीकरण\nऊर्जा संरक्षण के अनुसार, आपतित फोटॉन की ऊर्जा को इस प्रकार व्यक्त किया जाता है: $$h\nu = \phi_0 + K_{max}$$\nविकल्पीय रूप से, निरोधी विभव ($V_0$) के संदर्भ में: $$h\nu = h\nu_0 + eV_0$$\nजहाँ $e$ एक इलेक्ट्रॉन का आवेश है, $\nu_0$ देहली आवृत्ति है, और $K_{max} = eV_0$ है। ### प्रायोगिक प्रेक्षणों की व्याख्या 1. **आवृत्ति का प्रभाव:** जैसे-जैसे आपतित प्रकाश की आवृत्ति बढ़ती है, उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा रैखिक रूप से बढ़ती है, बशर्ते आवृत्ति देहली आवृत्ति से अधिक हो। देहली आवृत्ति से नीचे, उत्सर्जन असंभव है। 2. **गतिज ऊर्जा की तीव्रता से स्वतंत्रता:** आपतित प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने से प्रति सेकंड सतह पर टकराने वाले फोटॉनों की संख्या बढ़ती है, जिससे प्रकाश-वैद्युत धारा (उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या) बढ़ती है, लेकिन इसका उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। 3. **तात्कालिक उत्सर्जन:** फोटॉन और इलेक्ट्रॉन के बीच की टक्कर तात्कालिक होती है। प्रकाश के आपतन और फोटोइलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन के बीच कोई समय अंतराल नहीं होता है। ### प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन के नियम - किसी दी गई प्रकाश-संवेदी सामग्री के लिए, एक न्यूनतम आवृत्ति होती है जिसे देहली आवृत्ति कहा जाता है, जिसके नीचे कोई फोटोइलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होते हैं, भले ही आपतित प्रकाश कितना भी तीव्र क्यों न हो। - प्रकाश-वैद्युत धारा आपतित विकिरण की तीव्रता के सीधे समानुपाती होती है, बशर्ते आवृत्ति देहली मान से अधिक हो। - उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित विकिरण की तीव्रता से स्वतंत्र होती है और केवल आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करती है। - प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन एक तात्कालिक प्रक्रिया है।
Q11. 100 वोल्ट के विभवांतर से त्वरित एक इलेक्ट्रॉन की डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए। दिया गया है कि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान $m = 9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}$, प्लांक नियतांक $h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ J s}$ और इलेक्ट्रॉन का आवेश $e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$ है। 3 Marks
उत्तर (Answer): **दिया गया डेटा:** - त्वरित विभवांतर ($V$) = $100 \text{ V}$ - इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान ($m$) = $9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}$ - प्लांक नियतांक ($h$) = $6.63 \times 10^{-34} \text{ J s}$ - इलेक्ट्रॉन का आवेश ($e$) = $1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$ **सूत्र:**\nविभवांतर $V$ द्वारा त्वरित आवेशित कण से जुड़ी डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) इस प्रकार दी जाती है: $$\lambda = \frac{h}{\sqrt{2meV}}$$ \nइलेक्ट्रॉन के लिए सरलीकृत सूत्र का उपयोग करने पर: $$\lambda = \frac{12.27}{\sqrt{V}} \text{ \AA} = \frac{12.27}{\sqrt{100}} \text{ \AA}$$ **चरण-दर-चरण गणना:** 1. सामान्य सूत्र में मानों को प्रतिस्थापित करें: $$\lambda = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{\sqrt{2 \times 9.1 \times 10^{-31} \times 1.6 \times 10^{-19} \times 100}}$$ 2. वर्गमूल के अंदर के पदों को गुणा करें: $$2 \times 9.1 \times 1.6 = 29.12$$ $$10^{-31} \times 10^{-19} \times 10^2 = 10^{-48}$$ $$\text{रूट के अंदर हर} = 29.12 \times 10^{-48} = 2.912 \times 10^{-47} = 291.2 \times 10^{-48}$$ 3. वर्गमूल लें: $$\sqrt{291.2 \times 10^{-48}} \approx 17.06 \times 10^{-24} \text{ kg m s}^{-1}$$ 4. भाग दें: $$\lambda = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{1.706 \times 10^{-23}} \approx 3.886 \times 10^{-10} \text{ m}$$ \nप्रत्यक्ष सूत्र का उपयोग करके: $$\lambda = \frac{12.27}{10} \text{ \AA} = 1.227 \text{ \AA} = 1.23 \times 10^{-10} \text{ m}$$ **अंतिम उत्तर:**\nइलेक्ट्रॉन की डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य $1.23 \times 10^{-10} \text{ m}$ (या $1.227 \text{ \AA}$) है।
Q12. प्रकाश विद्युत प्रभाव की अपनी व्याख्या में अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा प्रस्तावित फोटॉनों की मुख्य विशेषताओं को लिखिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1905 में प्रकाश को निरंतर तरंगों के रूप में नहीं, बल्कि फोटॉन नामक असतत ऊर्जा पैकेटों या क्वांटा के प्रवाह के रूप में मानकर प्रकाश विद्युत प्रभाव को सफलतापूर्वक समझाया। क्वांटम सिद्धांत में तैयार किए गए फोटॉनों की मुख्य विशेषताएं हैं: 1. **ऊर्जा और आवृत्ति:** प्रत्येक फोटॉन की एक निश्चित ऊर्जा $E$ और संवेग $p$ होता है, जो विकिरण की आवृत्ति $\nu$ के सीधे आनुपातिक होते हैं। ऊर्जा संबंध $E = h\nu$ द्वारा दी जाती है, जहाँ $h$ प्लांक नियतांक है। उच्च आवृत्ति के फोटॉन अधिक ऊर्जा ले जाते हैं। 2. **निर्वात में गति:** सभी फोटॉन निर्वात में समान स्थिर गति से यात्रा करते हैं, जो प्रकाश की गति ($c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$) के बराबर होती है, उनकी आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य या स्रोत तीव्रता की परवाह किए बिना। 3. **विराम द्रव्यमान और संवेग:** एक फोटॉन का विराम द्रव्यमान शून्य ($m_0 = 0$) होता है, जिसका अर्थ है कि यह निर्वात में आराम की स्थिति में मौजूद नहीं हो सकता है। हालांकि, इसके पास एक प्रभावी सापेक्षवादी द्रव्यमान और संवेग होता है जो $p = \frac{h}{\lambda} = \frac{h\nu}{c}$ द्वारा दिया जाता है। 4. **विद्युत तटस्थता और टक्कर:** फोटॉन विद्युत रूप से तटस्थ कण हैं; वे विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों से प्रभावित नहीं होते हैं। इलेक्ट्रॉनों जैसे कणों के साथ बातचीत में, ऊर्जा और कुल संवेग संरक्षित होते हैं, जो लोचदार कण टकराव की तरह काम करते हैं।
Q13. एक अल्फा कण और एक प्रोटॉन को समान विभवांतर $V$ के माध्यम से त्वरित किया जाता है। उनकी डी ब्रोगली तरंगदैर्ध्य का अनुपात ज्ञात कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:\nदोनों कणों के लिए विभवांतर = $V$\nप्रोटॉन का द्रव्यमान = $m_p$\nप्रोटॉन का आवेश = $e_p = e$\nअल्फा कण का द्रव्यमान, $m_\alpha \approx 4m_p$\nअल्फा कण का आवेश, $q_\alpha = 2e$ \nविभवांतर $V$ के माध्यम से त्वरित आवेशित कण की डी ब्रोगली तरंगदैर्ध्य के लिए सामान्य सूत्र है: $$\lambda = \frac{h}{\sqrt{2mqV}}$| \nप्रोटॉन के लिए ($\lambda_p$): $$\lambda_p = \frac{h}{\sqrt{2 m_p e V}}$| \nअल्फा कण के लिए ($\lambda_\alpha$): $$\lambda_\alpha = \frac{h}{\sqrt{2 m_\alpha q_\alpha V}} = \frac{h}{\sqrt{2 (4m_p) (2e) V}} = \frac{h}{\sqrt{16 m_p e V}}$| \nअब, प्रोटॉन की डी ब्रोगली तरंगदैर्ध्य और अल्फा कण की तरंगदैर्ध्य का अनुपात लेते हैं: $$\frac{\lambda_p}{\lambda_\alpha} = \frac{\frac{h}{\sqrt{2 m_p e V}}}{\frac{h}{\sqrt{16 m_p e V}}} = \sqrt{\frac{16 m_p e V}{2 m_p e V}} = \sqrt{8} = 2\sqrt{2} = 2.828$$ \nअतः, प्रोटॉन और अल्फा कण की डी ब्रोगली तरंगदैर्ध्य का अनुपात $\sqrt{8} : 1$ या $2\sqrt{2} : 1$ है।
Q14. प्रकाश विद्युत प्रभाव के तीन मुख्य प्रायोगिक प्रेक्षणों की व्याख्या करें जिनकी व्याख्या प्रकाश के तरंग सिद्धांत द्वारा नहीं की जा सकी थी। 3 Marks
उत्तर (Answer): प्रकाश के तरंग सिद्धांत ने प्रकाश को सतत विद्युत चुम्बकीय तरंगों के रूप में माना, जो प्रकाश विद्युत प्रभाव के निम्नलिखित प्रायोगिक प्रेक्षणों को समझाने में पूरी तरह से विफल रहा: 1. **तत्कालिक उत्सर्जन:** तरंग सिद्धांत के अनुसार, प्रकाश तरंग की ऊर्जा तरंग मोर्चे पर लगातार वितरित होगी। इसलिए, धातु की सतह से बचने के लिए पर्याप्त ऊर्जा जमा करने में एक इलेक्ट्रॉन को काफी समय लगना चाहिए। हालाँकि, प्रयोगों से पता चला कि प्रकाश विद्युत उत्सर्जन एक तात्कालिक प्रक्रिया है; प्रकाश सतह से टकराते ही इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित हो जाते हैं, जिसमें $10^{-9}$ सेकंड से कम का समय अंतराल होता है। 2. **आवृत्ति निर्भरता (देहली आवृत्ति):** तरंग सिद्धांत से पता चलता है कि प्रकाश तरंग द्वारा स्थानांतरित ऊर्जा उसकी तीव्रता पर निर्भर करती है, उसकी आवृत्ति पर नहीं। इस प्रकार, प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने से आवृत्ति की परवाह किए बिना उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा बढ़ जानी चाहिए। हालाँकि, प्रायोगिक तौर पर, यह देखा गया कि एक विशिष्ट देहली आवृत्ति ($\nu_0$) के नीचे कोई उत्सर्जन नहीं होता है, चाहे आपतित प्रकाश की तीव्रता कितनी भी अधिक क्यों न हो। 3. **अधिकतम गतिज ऊर्जा तीव्रता से स्वतंत्र:** तरंग सिद्धांत के अनुसार, एक चमकीला (अधिक तीव्र) प्रकाश तरंग इलेक्ट्रॉनों को अधिक ऊर्जा प्रदान करता है, जिसके परिणामस्वरूप उच्च गतिज ऊर्जा होती है। वास्तव में, फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा पूरी तरह से आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करती है और इसकी तीव्रता से पूरी तरह स्वतंत्र होती है। तीव्रता केवल प्रति सेकंड उत्सर्जित होने वाले फोटोइलेक्ट्रॉनों की संख्या को प्रभावित करती है, उनकी गति को नहीं।
Q15. $100 \text{ V}$ के विभवांतर से त्वरित एक इलेक्ट्रॉन की डी ब्रोगली तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। (दिया गया है $h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ Js}$, इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान $m = 9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}$, इलेक्ट्रॉन का आवेश $e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$) 3 Marks
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:\nविभवांतर, $V = 100 \text{ V}$\nप्लांक का नियतांक, $h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ Js}$\nइलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, $m = 9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}$\nइलेक्ट्रॉन का आवेश, $e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$ \nइलेक्ट्रॉन द्वारा प्राप्त गतिज ऊर्जा $E = eV$ है। इस प्रकार, त्वरित इलेक्ट्रॉन की डी ब्रोगली तरंगदैर्ध्य के लिए सामान्य सूत्र है: $$\lambda = \frac{h}{\sqrt{2mE}} = \frac{h}{\sqrt{2meV}}$| \nइलेक्ट्रॉनों के लिए सरलीकृत मानक सूत्र का उपयोग करना: $$\lambda = \frac{12.27}{\sqrt{V}} \text{ Å}$| \nसूत्र में $V = 100 \text{ V}$ प्रतिस्थापित करें: $$\lambda = \frac{12.27}{\sqrt{100}}$| $$\lambda = \frac{12.27}{10} = 1.227 \text{ Å}$| $$\lambda = 1.227 \times 10^{-10} \text{ m}$| \nअतः, $100 \text{ V}$ से त्वरित इलेक्ट्रॉन से जुड़ी डी ब्रोगली तरंगदैर्ध्य $1.227 \times 10^{-10} \text{ मीटर}$ या $1.227 \text{ Å}$ है।