मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 12 भौतिकी - अध्याय: नाभिक (Nuclei) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स
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1. नाभिक का परिचय और संघटन (Introduction and Composition of Nuclei)
- प्रत्येक परमाणु का समस्त धन आवेश और लगभग संपूर्ण द्रव्यमान उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म भाग में केंद्रित होता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहते हैं।
- नाभिक प्रोटॉन और न्यूट्रॉन से मिलकर बना होता है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को सामूहिक रूप से नुक्य्लिऑन (Nucleons) कहा जाता है।
- परमाणु क्रमांक (Z): नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या।
- द्रव्यमान संख्या (A): नाभिक में उपस्थित कुल न्यूक्लिऑन (प्रोटॉनों + न्यूट्रॉनों) की संख्या।
- सूत्र:
A = Z + N (जहाँ N न्यूट्रॉनों की संख्या है)।
- किसी तत्व
X के नाभिक को इस प्रकार दर्शाया जाता है: ^A_Z X
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2. नाभिक का आकार और त्रिज्या (Size and Radius of Nucleus)
- प्रायोगिक परिणामों के अनुसार, नाभिक की त्रिज्या
R उसकी द्रव्यमान संख्या A के घनमूल के समानुपाती होती है।
R = R_0 A^(1/3)
- जहाँ
R_0 एक नियतांक है, जिसका मान लगभग 1.2 \times 10^(-15) \text{ m} या 1.2 \text{ fm} होता है।
- नाभिक का आयतन (
V):
V = (4/3) \pi R^3 = (4/3) \pi R_0^3 A
- स्पष्ट है कि नाभिक का आयतन
V द्रव्यमान संख्या A के अनुक्रमानुपाती होता है।
- नाभिक का घनत्व (
\rho):
- नाभिक का घनत्व लगभग
2.3 \times 10^(17) \text{ kg/m}^3 होता है। यह घनत्व A पर निर्भर नहीं करता है, अर्थात सभी नाभिकों का घनत्व लगभग समान होता है।
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3. समस्थानिक, समभारिक और समन्यूट्रॉनिक (Isotopes, Isobars, and Isotones)
- समस्थानिक (Isotopes): वे नाभिक जिनमें प्रोटॉनों की संख्या (
Z) समान होती है परंतु द्रव्यमान संख्या (A) भिन्न होती है।
- उदाहरण:
^1 H^1, ^1 H^2, ^_1 H^3
- समभारिक (Isobars): वे नाभिक जिनमें द्रव्यमान संख्या (
A) समान होती है परंतु प्रोटॉनों की संख्या (Z) भिन्न होती है।
- उदाहरण:
1 H^3 और 2 He^3
- समन्यूट्रॉनिक (Isotones): वे नाभिक जिनमें न्यूट्रॉनों की संख्या (
N) समान होती है।
- उदाहरण:
1 H^3 और 2 He^4 (दोनों में न्यूट्रॉन N = 2 हैं)।
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4. द्रव्यमान क्षति और बंधन ऊर्जा (Mass Defect and Binding Energy)
- द्रव्यमान क्षति (
\Delta m): नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान, उसमें उपस्थित व्यक्तिगत प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के कुल द्रव्यमान से हमेशा कुछ कम होता है। इस अंतर को द्रव्यमान क्षति कहते हैं।
\Delta m = [Z mp + (A - Z) mn] - M
- जहाँ
mp = प्रोटॉन का द्रव्यमान, mn = न्यूट्रॉन का द्रव्यमान, और M = नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान।
- बंधन ऊर्जा (Binding Energy - BE): किसी नाभिक को उसके न्यूक्लिऑन में अलग-अलग करने के लिए जितनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है, या नाभिक के निर्माण में जितनी ऊर्जा मुक्त होती है, उसे बंधन ऊर्जा कहते हैं।
\text{BE} = \Delta m \times c^2 (जूल में)
- यदि द्रव्यमान क्षति
\Delta m को एएमयू (amu) में व्यक्त किया जाए:
\text{BE} = \Delta m \times 931.5 \text{ MeV}
- प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा (Binding Energy per Nucleon):
\text{BE}_{\text{avg}} = \frac{\text{BE}}{A}
- यह मान जितना अधिक होता है, नाभिक उतना ही अधिक स्थायी (Stable) होता है।
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5. नाभिकीय बल (Nuclear Forces)
- प्रोटॉनों के बीच प्रतिकर्षित करने वाला स्थिर वैद्युत बल होने के बावजूद नाभिक के भीतर न्यूक्लिऑन एक-दूसरे से दृढ़ता से बंधे रहते हैं, इसका कारण नाभिकीय बल है।
- प्रमुख विशेषताएँ:
1. यह प्रकृति का सबसे प्रबल बल है।
2. यह एक लघु-परासी (Short-range) बल है (लगभग 1 \text{ fm} या 10^(-15) \text{ m} की दूरी तक कार्य करता है)।
3. यह आवेश पर निर्भर नहीं करता (प्रोटॉन-प्रोटॉन, प्रोटॉन-न्यूट्रॉन और न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन के बीच समान होता है)।
4. यह आकर्षण बल होता है और अकेंद्रीय (Non-central) बल है।
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6. रेडियोएक्टिवता (Radioactivity)
- कुछ भारी नाभिक स्वतः ही अदृश्य विकिरण उत्सर्जित करते रहते हैं, इस स्वतः होने वाली घटना को रेडियोएक्टिवता कहते हैं।
- रदरफोर्ड-सोडी का नियम (Radioactive Decay Law):
- किसी क्षण रेडियोएक्टिव पदार्थ के विघटन की दर उस क्षण उपस्थित परमाणुओं की संख्या
N के अनुक्रमानुपाती होती है।
- \frac{dN}{dt} \propto N या - \frac{dN}{dt} = \lambda N
- (जहाँ
\lambda विघटन नियतांक या क्षय नियतांक है)।
- समाकलित समीकरण:
N = N_0 e^(-\lambda t)
- (जहाँ
N_0 समय t = 0 पर परमाणुओं की संख्या है)।
- क्षय नियतांक और अर्द्ध-आयु का संबंध:
- अर्द्ध-आयु (
T_(1/2)): वह समय जिसमें किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ के परमाणुओं की संख्या घटकर अपनी प्रारंभिक संख्या की आधी रह जाती है।
T_(1/2) = \frac{\ln(2)}{\lambda} = \frac{0.693}{\lambda}
- औसत आयु (
\tau):
- सभी परमाणु की आयु के कुल योग और कुल परमाणुओं की संख्या के अनुपात को औसत आयु कहते हैं।
\tau = \frac{1}{\lambda} = 1.44 \times T_(1/2)
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7. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy)
- नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission):
- जब एक भारी नाभिक (
U-235 जैसे) पर मंद गति के न्यूट्रॉन की बमबारी की जाती है, तो वह लगभग समान आकार के दो हल्के नाभिकों में टूट जाता है, तथा अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा और 3 नए न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं।
- उदाहरण:
92 U^235 + 0 n^1 \to 56 Ba^141 + 36 Kr^92 + 3 _0 n^1 + \text{ऊर्जा}
- नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion):
- जब दो या दो से अधिक हल्के नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं, तो इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन कहते हैं। इसमें भी अपार ऊर्जा निकलती है (जैसे सूर्य और तारों की ऊर्जा का स्रोत)।
- उदाहरण:
1 H^2 + 1 H^2 \to _2 He^4 + \text{ऊर्जा}
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 नाभिक (Nuclei)
परमाणु का नाभिक (Atomic Nucleus)
खोज (Discovery)
रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग (Rutherford Scattering)
मूल घटक (Fundamental Constituents)
प्रोटॉन (Proton)
न्यूट्रॉन (Neutron)
सामूहिक रूप से न्यूक्लियन (Nucleons)
मूलभूत पद (Basic Terms)
परमाणु क्रमांक (Atomic Number - Z)
द्रव्यमान संख्या (Mass Number - A)
आइसोटोप या समस्थानिक (Isotopes)
आइसोबार या समभारिक (Isobars)
आइसোটोन या समन्यूट्रॉनिक (Isotones)
नाभिकीय आकार और घनत्व (Size and Density of Nucleus)
त्रिज्या संबंध (Radius Relation)
सूत्र: $R = R_0 A^{1/3}$
नाभिकीय घनत्व (Nuclear Density)
द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता
लगभग स्थिर मान ($10^{17} \text{ kg/m}^3$)
द्रव्यमान क्षति और बंधन ऊर्जा (Mass Defect and Binding Energy)
परमाणु द्रव्यमान मात्रक (Atomic Mass Unit - amu / u)
द्रव्यमान क्षति ($\Delta m$)
सूत्र: $\Delta m = [Zmp + (A-Z)mn] - M$
आइंस्टीन का द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता (Mass-Energy Equivalence)
समीकरण: $E = mc^2$
बंधन ऊर्जा (Binding Energy - BE)
सूत्र: $BE = \Delta m \times c^2$
प्रति न्यूक्लियन बंधन ऊर्जा (Binding Energy per Nucleon)
स्थिरता का माप (Measure of Stability)
बंधन ऊर्जा वक्र (BE Curve and its Features)
नाभिकीय बल (Nuclear Forces)
विशेषताएं (Characteristics)
अत्यधिक प्रबल आकर्षण बल (Strongest Attractive Force)
लघु परास बल (Short Range Force)
आवेश स्वतंत्रता (Charge Independence)
संतृप्ति गुण (Saturation Property)
अ-केंद्रीय बल (Non-central Force)
रेडियोधर्मिता (Radioactivity)
प्राकृतिक रेडियोधर्मिता (Natural Radioactivity)
रेडियोधर्मी क्षय के प्रकार (Types of Radioactive Decay)
अल्फा क्षय ($\alpha$-decay)
बीटा क्षय ($\beta$-decay)
गामा क्षय ($\gamma$-decay)
रेडियोएक्टिव क्षय का नियम (Law of Radioactive Decay)
सूत्र: $N = N_0 e^{-\lambda t}$
अर्ध-आयु (Half-life - $T_{1/2}$)
सूत्र: $T_{1/2} = \frac{0.693}{\lambda}$
माध्य आयु (Mean Life - $\tau$)
सूत्र: $\tau = \frac{1}{\lambda}$
नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy)
नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)
भारी नाभिक का टूटना (Splitting of Heavy Nucleus)
यूरेनियम-235 का विखंडन (Fission of U-235)
श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction)
नाभिकीय रिएक्टर (Nuclear Reactor - Applications)
नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)
हल्के नाभिकों का जुड़ना (Fusion of Light Nuclei)
तारकीय ऊर्जा का स्रोत (Source of Stellar Energy / Sun)
नियंत्रित संलयन की कठिनाई (Controlled Fusion Challenge)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
* अर्ध-आयु ($T_{1/2}$) = $4.5 \times 10^9$ वर्ष
* 1 वर्ष = $3.15 \times 10^7$ सेकंड
* यूरेनियम नमूने का द्रव्यमान ($m$) = 1 g
* $^{238}U$ का मोलर द्रव्यमान ($M$) = 238 g/mol
* आवोगाद्रो संख्या ($N_A$) = $6.023 \times 10^{23}$ परमाणु/मोल
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### चरण 1: क्षय नियतांक ($s^{-1}$ में $\lambda$) की गणना\nअर्ध-आयु ($T_{1/2}$) और क्षय नियतांक ($\lambda$) के बीच का संबंध है:
$$\lambda = \frac{\ln(2)}{T_{1/2}}$$
\nसबसे पहले, अर्ध-आयु को वर्षों से सेकंड में बदलें:
$$T_{1/2} = 4.5 \times 10^9 \text{ वर्ष} \times 3.15 \times 10^7 \text{ s/वर्ष}$$
$$T_{1/2} = 1.4175 \times 10^{17} \text{ सेकंड}$$
$\ln(2) \approx 0.693$ का मान रखें:
$$\lambda = \frac{0.693}{1.4175 \times 10^{17} \text{ s}}$$
$$\lambda \approx 4.889 \times 10^{-18} \text{ s}^{-1}$$
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### चरण 2: $^{238}U$ के 1 ग्राम में नाभिकों की संख्या ($N$) की गणना\nनमूने के 1 ग्राम में परमाणुओं की संख्या सूत्र द्वारा निकाली जाती है:
$$N = \frac{m \times N_A}{M}$$
$$N = \frac{1 \text{ g} \times 6.023 \times 10^{23} \text{ परमाणु/मोल}}{238 \text{ g/mol}}$$
$$N = 2.5307 \times 10^{21} \text{ परमाणु}$$
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### चरण 3: सक्रियता ($R$) की गणना\nसक्रियता क्षय की दर को दर्शाती है, जो रेडियोधर्मी क्षय नियम द्वारा दी जाती है:
$$R = \lambda N$$
\nऊपर गणना किए गए $\lambda$ और $N$ के मानों को रखें:
$$R = (4.889 \times 10^{-18} \text{ s}^{-1}) \times (2.5307 \times 10^{21})$$
$$R = 1.238 \times 10^{4} \text{ विघटन/सेकंड (Bq)}$$
\nइसे क्यूरी (Ci) में व्यक्त करने के लिए जहाँ $1 \text{ Ci} = 3.7 \times 10^{10} \text{ Bq}$:
$$R = \frac{1.238 \times 10^{4}}{3.7 \times 10^{10}} \text{ Ci} \approx 3.35 \times 10^{-7} \text{ Ci}$$
### अंतिम उत्तर:
1. क्षय नियतांक $\lambda = 4.89 \times 10^{-18} \text{ s}^{-1}$
2. $^{238}U$ के 1 ग्राम की सक्रियता $1.24 \times 10^{4} \text{ Bq}$ (या $3.35 \times 10^{-7} \text{ Ci}$) है।
उत्तर (Answer): ### नाभिकीय अभिक्रियाओं का परिचय\nनाभिकीय अभिक्रियाओं में परमाणु के नाभिक में परिवर्तन होता है, जिसके परिणामस्वरूप तत्वों का रूपांतरण और भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। दो मुख्य प्रकार की नाभिकीय अभिक्रियाएं नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन हैं।
### 1. नाभिकीय विखंडन
* **परिभाषा:** नाभिकीय विखंडन वह प्रक्रिया है जिसमें कम ऊर्जा वाले न्यूट्रॉनों की बौछार करने पर एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम-235) दो या दो से अधिक छोटे, मध्यम आकार के नाभिकों में विभाजित हो जाता है।
* **क्रियाविधि:** जब एक $^{235}_{92}U$ नाभिक द्वारा एक धीमा न्यूट्रॉन अवशोषित किया जाता है, तो यह एक अस्थिर यौगिक नाभिक बनाता है जो तुरंत विखंडन टुकड़ों (जैसे बेरियम और क्रिप्टन) में टूट जाता है, साथ ही 2 से 3 न्यूट्रॉन और भारी मात्रा में ऊर्जा (लगभग 200 MeV प्रति विखंडन घटना) उत्सर्जित होती है।
* **शृंखला अभिक्रिया:** उत्सर्जित न्यूट्रॉन आसपास के यूरेनियम नाभिकों में और अधिक विखंडन को ट्रिगर कर सकते हैं, जिससे एक स्व-स्थायी शृंखला अभिक्रिया होती है जो परमाणु रिएक्टरों और परमाणु बमों का सिद्धांत बनाती है।
### 2. नाभिकीय संलयन
* **परिभाषा:** नाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक हल्के नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं, जिसके साथ ऊर्जा मुक्त होती है।
* **क्रियाविधि:** उदाहरण के लिए, अत्यधिक तापमान और दबाव की स्थिति (तारों के भीतर) के तहत एक हीलियम नाभिक बनाने के लिए चार हाइड्रोजन नाभिक (प्रोटॉन) संलयित होते हैं, जिससे विशाल मात्रा में ऊर्जा (लगभग 26.7 MeV) निकलती है।
* **आवश्यकताएं:** धनावेशित नाभिकों के बीच इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रतिकर्षक बल को पार करने के लिए उच्च तापमान ($10^7$ K के क्रम का) और उच्च दबाव की आवश्यकता होती है।
### 3. बंधन ऊर्जा वक्र के आधार पर स्पष्टीकरण
* **प्रति न्यूक्लियन बंधन ऊर्जा ($BE/A$):** किसी नाभिक का स्थायित्व उसकी प्रति न्यूक्लियन बंधन ऊर्जा पर निर्भर करता है। $BE/A$ वक्र हल्के नाभिकों के लिए ऊपर की ओर प्रवृत्ति, $A = 56$ (आयरन क्षेत्र) के आसपास लगभग 8.8 MeV/न्यूक्लियन के मान के साथ एक व्यापक अधिकतम, और यूरेनियम के लिए लगभग 7.6 MeV/न्यूक्लियन तक भारी नाभिकों के लिए क्रमिक कमी दिखाता है।
* **विखंडन में ऊर्जा मुक्ति:** जब एक भारी नाभिक ($A \approx 240$) दो मध्यम आकार के नाभिकों ($A \approx 120$) में विभाजित होता है, तो कुल बंधन ऊर्जा बढ़ जाती है क्योंकि टुकड़े $BE/A$ वक्र पर उच्च स्थिति प्राप्त करते हैं। कुल बंधन ऊर्जा में यह वृद्धि गतिज ऊर्जा और विकिरण के रूप में प्रकट होती है।
* **संलयन में ऊर्जा मुक्ति:** जब दो बहुत हल्के नाभिक ($A \le 10$) मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं, तो उत्पादक नाभिक की प्रति न्यूक्लियन बंधन ऊर्जा अभिकारकों की तुलना में अधिक होती है। आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता संबंध ($E = \Delta mc^2$) के अनुसार इस बढ़े हुए स्थायित्व से उत्पन्न द्रव्यमान क्षति ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
\nइस प्रकार, दोनों प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप कुल बंधन ऊर्जा में वृद्धि होती है, जो विशाल ऊर्जा मुक्ति को स्पष्ट करती है।
उत्तर (Answer): ### चरण 1: नाभिकीय क्षय समीकरण लिखिए\nरेडियम-226 का रेडॉन-222 में अल्फा क्षय निम्नलिखित समीकरण द्वारा दर्शाया जाता है:
$${}_{88}^{226}\text{Ra} \rightarrow {}_{86}^{222}\text{Rn} + {}_{2}^{4}\text{He}$$
### चरण 2: द्रव्यमान क्षति ($\Delta m$) की गणना कीजिए\nद्रव्यमान क्षति अभिकारकों (जनक नाभिक) के कुल द्रव्यमान और उत्पादों (पुत्री नाभिक + अल्फा कण) के कुल द्रव्यमान के बीच का अंतर है।
* जनक नाभिक (${}_{88}^{226}\text{Ra}$) का द्रव्यमान, $m_p = 226.02540\text{ u}$
* पुत्री नाभिक (${}_{86}^{222}\text{Rn}$) का द्रव्यमान, $m_d = 222.01757\text{ u}$
* अल्फा कण (${}_{2}^{4}\text{He}$) का द्रव्यमान, $m_{\alpha} = 4.00260\text{ u}$
\nउत्पादों का कुल द्रव्यमान = $m_d + m_{\alpha}$
$$\text{उत्पादों का कुल द्रव्यमान} = 222.01757\text{ u} + 4.00260\text{ u} = 222.02017\text{ u}$$
\nअब, द्रव्यमान क्षति $\Delta m$ की गणना कीजिए:
$$\Delta m = m_p - (m_d + m_{\alpha})$$
$$\Delta m = 226.02540\text{ u} - 222.02017\text{ u}$$
$$\Delta m = 0.00523\text{ u}$$
### चरण 3: मुक्त ऊर्जा ($Q$) की गणना कीजिए\nअभिक्रिया में मुक्त ऊर्जा किसके द्वारा दी जाती है:
$$Q = \Delta m \times 931.5\text{ MeV}$$
$\Delta m$ का मान रखिए:
$$Q = 0.00523\text{ u} \times 931.5\text{ MeV}/\text{u}$$
$$Q = 4.8717\text{ MeV}$$
### निष्कर्ष
${}_{88}^{226}\text{Ra}$ के अल्फा क्षय के दौरान लगभग $4.87\text{ MeV}$ ऊर्जा मुक्त होती है।
उत्तर (Answer): ### नाभिकीय अभिक्रियाओं का परिचय\nनाभिकीय अभिक्रियाओं में किसी परमाणु के नाभिक में परिवर्तन शामिल होता है, जिसके परिणामस्वरूप आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता संबंध $E = \Delta m c^2$ के अनुसार अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा निकलती है। नाभिकीय अभिक्रियाओं के दो मुख्य प्रकार नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन हैं।
### 1. नाभिकीय विखंडन
* **परिभाषा:** नाभिकीय विखंडन वह प्रक्रिया है जिसमें कम ऊर्जा वाले न्यूट्रॉनों की बमबारी करने पर एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239) दो या दो से अधिक छोटे, मध्यम-द्रव्यमान वाले नाभिकों में विभाजित हो जाता है, जिसके साथ भारी मात्रा में ऊर्जा और कई न्यूट्रॉन निकलते हैं।
* **उदाहरण समीकरण:**
$${}_{92}^{235}\text{U} + {}_{0}^{1}\text{n} \rightarrow {}_{56}^{141}\text{Ba} + {}_{36}^{92}\text{Kr} + 3{}_{0}^{1}\text{n} + \text{ऊर्जा (लगभग } 200\text{ MeV)}$$
* **ऊर्जा मुक्ति का तंत्र:** यूरेनियम जैसे भारी नाभिकों के लिए प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा ($BE/A$) लगभग $7.6\text{ MeV}$ होती है, जबकि बेरियम और क्रिप्टन जैसे मध्यवर्ती टुकड़ों के लिए यह लगभग $8.5\text{ MeV}$ होती है। चूँकि पुत्री नाभिक मूल नाभिक की तुलना में अधिक कसकर बंधे होते हैं, कुल बंधन ऊर्जा में शुद्ध वृद्धि होती है। यह द्रव्यमान क्षति टुकड़ों की गतिज ऊर्जा और न्यूट्रॉन तथा गामा किरणों की ऊर्जा के रूप में प्रकट होती है।
### 2. नाभिकीय संलयन
* **परिभाषा:** नाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक हल्के नाभिक मिलकर एक भारी एकल नाभिक बनाते हैं, जिसके साथ जबरदस्त मात्रा में ऊर्जा निकलती है।
* **उदाहरण समीकरण (तारों में प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला):**
$${}_{1}^{1}\text{H} + {}_{1}^{1}\text{H} \rightarrow {}_{1}^{2}\text{H} + e^+ + v + 0.42\text{ MeV}$$
$${}_{1}^{2}\text{H} + {}_{1}^{1}\text{H} \rightarrow {}_{2}^{3}\text{He} + \gamma + 5.49\text{ MeV}$$
$${}_{2}^{3}\text{He} + {}_{2}^{3}\text{He} \rightarrow {}_{2}^{4}\text{He} + 2{}_{1}^{1}\text{H} + 12.86\text{ MeV}$$
* **ऊर्जा मुक्ति का तंत्र:** अत्यंत हल्के नाभिकों (जैसे हाइड्रोजन समस्थानिकों) के लिए प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा बहुत कम होती है। जब वे एक भारी नाभिक (जैसे हीलियम) बनाने के लिए संलयित होते हैं, तो प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा काफी बढ़ जाती है (हीलियम के लिए लगभग $7.07\text{ MeV}$ तक)। संलयन से पहले और बाद में प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा में बड़ा अंतर एक पर्याप्त द्रव्यमान क्षति ($\Delta m$) में अनुवादित होता है, जिससे भारी ऊर्जा उत्पादन होता है।
### निष्कर्ष\nविखंडन और संलयन दोनों में, ऊर्जा इसलिए निकलती है क्योंकि उत्पाद नाभिकों का कुल द्रव्यमान अभिकारक नाभिकों के कुल द्रव्यमान से थोड़ा कम होता है। प्रकृति उच्च बंधन ऊर्जा की अवस्थाओं का पक्ष लेती है, जो कम स्थितिज ऊर्जा और उच्च स्थिरता से मेल खाती हैं।
उत्तर (Answer): ### नाभिकीय संलयन का परिचय\nनाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक हल्के परमाणु नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं, और भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। यह सूर्य और अन्य तारों का ऊर्जा स्रोत है।
### नाभिकीय संलयन के लिए आवश्यक शर्तें\nचूँकि परमाणु नाभिक धनावेशित होते हैं, इसलिए उनके बीच तीव्र प्रतिकर्षण बल कार्य करता है। इस बाधा को पार करने के लिए चरम स्थितियों की आवश्यकता होती है:
- **उच्च तापमान:** $10^7 \text{ K}$ से $10^8 \text{ K}$ तक के तापमान की आवश्यकता होती है ताकि नाभिकों के पास पर्याप्त गतिज ऊर्जा हो।
- **उच्च दाब/घनत्व:** सीमित स्थान के भीतर कणों की उच्च आवृत्ति सुनिश्चित करने के लिए उच्च घनत्व आवश्यक है।
### पृथ्वी पर नियंत्रित संलयन प्राप्त करने में कठिनाई
- **परिसमापन समस्या:** $10^8 \text{ K}$ पर पदार्थ प्लाज्मा के रूप में रहता है। कोई भी ठोस बर्तन इसे सहन नहीं कर सकता।
- **स्थिरता:** प्लाज्मा की अस्थिरता के कारण इसे नियंत्रित करना कठिन है।
### भविष्य के ऊर्जा स्रोत के रूप में महत्व
- **प्रचुर ईंधन:** ड्यूटेरियम समुद्री जल से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
- **स्वच्छ ऊर्जा:** इसमें कोई खतरनाक रेडियोएक्टिव कचरा नहीं बनता है।
- **सुरक्षा:** यह स्वाभाविक रूप से सुरक्षित है।
उत्तर (Answer): ### चरण 1: दी गई नाभिकीय अभिक्रिया लिखिए
$$_{1}^{2}\text{H} + _{1}^{3}\text{H} \rightarrow _{2}^{4}\text{He} + _{0}^{1}\text{n}$$
### चरण 2: अभिकारकों के कुल द्रव्यमान की गणना कीजिए
$$_{1}^{2}\text{H} \text{ का द्रव्यमान} = 2.014102 \text{ u}$$
$$_{1}^{3}\text{H} \text{ का द्रव्यमान} = 3.016049 \text{ u}$$
$$\text{अभिकारकों का कुल द्रव्यमान } (m_R) = 2.014102 + 3.016049 = 5.030151 \text{ u}$$
### चरण 3: उत्पादों के कुल द्रव्यमान की गणना कीजिए
$$_{2}^{4}\text{He} \text{ का द्रव्यमान} = 4.001506 \text{ u}$$
$$_{0}^{1}\text{n} \text{ का द्रव्यमान} = 1.008665 \text{ u}$$
$$\text{उत्पादों का कुल द्रव्यमान } (m_P) = 4.001506 + 1.008665 = 5.010171 \text{ u}$$
### चरण 4: द्रव्यमान क्षति ($\Delta m$) की गणना कीजिए
$$\Delta m = m_R - m_P$$
$$\Delta m = 5.030151 \text{ u} - 5.010171 \text{ u} = 0.019980 \text{ u}$$
### चरण 5: द्रव्यमान क्षति को ऊर्जा में परिवर्तित कीजिए\nचूँकि $1 \text{ u} \approx 931.5 \text{ MeV}$ है, इसलिए मुक्त ऊर्जा $Q$ होगी:
$$Q = \Delta m \times 931.5 \text{ MeV}$$
$$Q = 0.019980 \times 931.5 = 18.61177 \text{ MeV}$$
### निष्कर्ष\nदी गई संलयन अभिक्रिया में मुक्त ऊर्जा लगभग **18.61 MeV** है।
उत्तर (Answer): ### नाभिकीय विखंडन का परिचय\nनाभिकीय विखंडन वह अभिक्रिया है जिसमें यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239 जैसे भारी नाभिक लगभग समान द्रव्यमान वाले दो या दो से अधिक छोटे नाभिकों में टूट जाते हैं, और कुछ न्यूट्रॉनों के साथ अपार ऊर्जा मुक्त होती है।
### विखंडन की क्रियाविधि और श्रृंखला अभिक्रिया\nजब एक धीमा न्यूट्रॉन यूरेनियम-235 के नाभिक पर टकराता है, तो यह अवशोषित हो जाता है और यूरेनियम-236 का एक अस्थाई यौगिक नाभिक बनाता है। यह तुरंत छोटे टुकड़ों में विभाजित हो जाता है और प्रति विखंडन लगभग 200 MeV ऊर्जा और 2 से 3 न्यूट्रॉन मुक्त करता है।
- **द्वितीयक न्यूट्रॉन:** विखंडन के दौरान निकलने वाले न्यूट्रॉन अन्य यू-235 नाभिकों से टकराते हैं।
- **श्रृंखला अभिक्रिया:** न्यूट्रॉन उत्पादन और अवशोषण की यह सतत प्रक्रिया श्रृंखला अभिक्रिया कहलाती है।
### नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया\nइसमें आगे के विखंडन के लिए उपलब्ध न्यूट्रॉनों की संख्या को सावधानीपूर्वक विनियमित किया जाता है।
- **क्रियाविधि:** कैडमियम या बोरॉन जैसी न्यूट्रॉन-अवशोषित करने वाली छड़ों का उपयोग किया जाता है।
- **उदाहरण:** विद्युत उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले परमाणु रिएक्टर।
### अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया\nइसमें एक सेकंड के अंश में विखंडन की संख्या तेजी से बढ़ती है।
- **क्रियाविधि:** अतिरिक्त न्यूट्रॉन को अवशोषित करने के लिए कोई नियंत्रण नहीं होता है।
- **उदाहरण:** परमाणु बम (विखंडन बम)।
उत्तर (Answer): ### रेडियोधर्मिता की परिभाषा\nरेडियोधर्मिता एक स्वतःस्फूर्त परिघटना है जिसमें अस्थिर परमाणु नाभिक अधिक स्थिर विन्यास प्राप्त करने के लिए विकिरण (जैसे अल्फा कण, बीटा कण और गामा किरणें) उत्सर्जित करके विघटित हो जाते हैं। यह तापमान, दबाव या रासायनिक संयोजनों जैसी बाहरी भौतिक स्थितियों से प्रभावित हुए बिना पूरी तरह से एक यादृच्छिक और नाभिकीय प्रक्रिया है।
### रेडियोएक्टिव क्षय का नियम\nरेडियोएक्टिव क्षय का नियम यह बताता है कि किसी भी दिए गए क्षण में रेडियोएक्टिव नाभिकों के विघटन की दर उस क्षण उपस्थित अविघटित रेडियोएक्टिव नाभिकों की संख्या के सीधे समानुपाती होती है।
### क्षय नियम की गणितीय व्युत्पत्ति\nमान लीजिए किसी भी समय $t$ पर उपस्थित अविघटित रेडियोएक्टिव नाभिकों की संख्या $N$ है, और एक छोटे से समय अंतराल $dt$ में विघटित होने वाले नाभिकों की संख्या $dN$ है।\nरेडियोएक्टिव क्षय के नियम के अनुसार:
$$-\frac{dN}{dt} \propto N$$
$$\frac{dN}{dt} = -\lambda N$$\nजहाँ $\lambda$ एक धनात्मक स्थिरांक है जिसे रेडियोएक्टिव क्षय स्थिरांक या विघटन स्थिरांक कहा जाता है। ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि समय के साथ नाभिकों की संख्या कम होती जाती है।
\nचरों को अलग करने के लिए पदों को व्यवस्थित करने पर:
$$\frac{dN}{N} = -\lambda dt$$
\nसमय $t = 0$ (जहाँ $N = N_0$, नाभिकों की प्रारंभिक संख्या है) से समय $t$ (जहाँ $N = N(t)$ है) तक की सीमाओं पर दोनों पक्षों का समाकलन करने पर:
$$\int_{N_0}^{N(t)} \frac{dN}{N} = -\lambda \int_{0}^{t} dt$$
$$\ln\left(\frac{N(t)}{N_0}\right) = -\lambda t$$
\nदोनों पक्षों पर घातीय (exponential) लेने पर:
$$\frac{N(t)}{N_0} = e^{-\lambda t}$$
$$N(t) = N_0 e^{-\lambda t}$$\nयह रेडियोएक्टिव क्षय का चरघातांकी नियम है।
### अर्ध-आयु ($T_{1/2}$)\nअर्ध-आयु को उस समय अंतराल के रूप में परिभाषित किया जाता है जो किसी नमूने में शुरू में मौजूद आधे रेडियोएक्टिव नाभिकों को विघटित या क्षय होने के लिए आवश्यक होता है।\nसूत्र: $T_{1/2} = \frac{\ln 2}{\lambda} = \frac{0.693}{\lambda}$
### औसत आयु ($\tau$)\nऔसत आयु को सभी रेडियोएक्टिव नाभिकों के कुल जीवनकाल और नमूने में मौजूद नाभिकों की कुल प्रारंभिक संख्या के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह क्षय स्थिरांक के व्युत्क्रम के बराबर भी होती है।\nसूत्र: $\tau = \frac{1}{\lambda}$
### अर्ध-आयु और औसत आयु के बीच का संबंध\nउपर्युक्त परिभाषाओं से, अर्ध-आयु और औसत आयु को जोड़ने वाला संबंध है:
$$T_{1/2} = \tau \ln 2 \approx 0.693 \tau$$
उत्तर (Answer): ### चरण 1: दी गई नाभिकीय संलयन अभिक्रिया लिखिए
$_1^2H + _1^2H \rightarrow _2^3He + _0^1n$
### चरण 2: अभिकारकों और उत्पादों के दिए गए द्रव्यमानों को नोट करें
- ड्यूटेरियम अभिकारक का द्रव्यमान $m(_1^2H) = 2.014102 \text{ u}$
- चूकि अभिकारकों में दो ड्यूटेरियम नाभिक हैं, कुल अभिकारक द्रव्यमान ($m_R$):
$$m_R = 2 \times 2.014102 \text{ u} = 4.028204 \text{ u}$$
- हीलियम-3 उत्पाद का द्रव्यमान $m(_2^3He) = 3.016029 \text{ u}$
- न्यूट्रॉन उत्पाद का द्रव्यमान $m(_0^1n) = 1.008665 \text{ u}$
- कुल उत्पाद द्रव्यमान ($m_P$):
$$m_P = 3.016029 \text{ u} + 1.008665 \text{ u} = 4.024694 \text{ u}$$
### चरण 3: द्रव्यमान क्षति ($\Delta m$) की गणना करें
$$\Delta m = m_R - m_P$$
$$\Delta m = 4.028204 \text{ u} - 4.024694 \text{ u}$$
$$\Delta m = 0.003510 \text{ u}$$
### चरण 4: मुक्त ऊर्जा ($E$) की गणना करें\nरूपांतरण कारक $1 \text{ u} = 931.5 \text{ MeV}$ का उपयोग करने पर, मुक्त ऊर्जा है:
$$E = \Delta m \times 931.5 \text{ MeV}$$
$$E = 0.003510 \times 931.5 \text{ MeV}$$
$$E = 3.269565 \text{ MeV} \approx 3.27 \text{ MeV}$$
### निष्कर्ष\nदी गई नाभिकीय संलयन अभिक्रिया में कुल मुक्त ऊर्जा लगभग $3.27 \text{ MeV}$ है।
उत्तर (Answer): ### नाभिकीय विखंडन की परिभाषा एवं प्रक्रिया\nनाभिकीय विखंडन वह अभिक्रिया है जिसमें एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239) लगभग समान द्रव्यमान वाले दो या दो-अधिक छोटे नाभिकों में टूट जाता है, जिसके साथ अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। जब एक यूरेनियम-235 नाभिक द्वारा एक धीमी गति का तापीय न्यूट्रॉन अवशोषित किया जाता है, तो यह यूरेनियम-236 का एक अस्थिर संयुक्त नाभिक बनाता है, जो तुरंत टूट जाता है।
### ऊर्जा मुक्ति का स्रोत\nविखंडन उत्पादों (हल्के नाभिक और उत्सर्जित न्यूट्रॉन) का कुल द्रव्यमान मूल नाभिक और बमबारी करने वाले न्यूट्रॉन के प्रारंभिक द्रव्यमान से थोड़ा कम होता है। अल्बर्ट आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता संबंध ($E = \Delta m \cdot c^2$) के अनुसार, इस "लुप्त" द्रव्यमान को, जिसे द्रव्यमान क्षति कहा जाता है, सीधे ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। U-235 नाभिक का प्रत्येक विखंडन लगभग 200 MeV ऊर्जा मुक्त करता है, जो मुख्य रूप से विखंडन अंशों की गतिज ऊर्जा के रूप में दिखाई देती है, साथ ही त्वरित न्यूट्रॉन और गामा किरणें भी निकलती हैं।
### नाभिकीय रिएक्टर का सिद्धांत\nएक नाभिकीय रिएक्टर नियंत्रित, स्व-पोषी श्रृंखला अभिक्रिया के सिद्धांत पर काम करता है। जब U-235 विखंडन से गुजरता है, तो यह औसतन 2 से 3 न्यूट्रॉन जारी करता है। ये द्वितीयक न्यूट्रॉन अन्य U-235 नाभिकों में विखंडन को ट्रिगर कर सकते हैं, जिससे अधिक न्यूट्रॉन उत्पन्न होते हैं और एक श्रृंखला अभिक्रिया बनती है।
### नाभिकीय रिएक्टर के आवश्यक भाग
1. **नाभिकीय ईंधन:** आमतौर पर संवर्धित यूरेनियम ($_{92}U^{235}$) जो विखंडन से गुजरता है।
2. **मॉडरेटर (मंदक):** भारी पानी ($D_2O$), ग्रेफाइट, या साधारण पानी जैसी सामग्रियां जिनका उपयोग विखंडन के दौरान उत्पन्न तेज न्यूट्रॉन को धीमा करने के लिए किया जाता है ताकि वे आगे के विखंडन में सक्षम हो सकें।
3. **नियंत्रक छड़ें:** कैडमियम, बोरॉन, या हाफनियम जैसी न्यूट्रॉन-अवशोषित करने वाली सामग्रियों से बनी छड़ें जिन्हें अतिरिक्त न्यूट्रॉन को अवशोषित करके प्रतिक्रिया दर को विनियमित करने के लिए कोर में डाला जाता है।
4. **शीतलक (कूलेंट):** बिजली उत्पादन के लिए रिएक्टर कोर में उत्पन्न गर्मी को भाप जनरेटर में स्थानांतरित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला तरल पदार्थ (जैसे पानी, तरल सोडियम, या गैस)।
5. **परिरक्षण:** ऑपरेटरों और पर्यावरण को हानिकारक विकिरण से बचाने के लिए रिएक्टर के चारों ओर मोटी कंक्रीट और सीसे की दीवारें।
उत्तर (Answer): नाभिकीय विखंडन वह प्रक्रिया है जिसमें एक भारी अस्थिर नाभिक दो या दो से अधिक छोटे, अधिक स्थायी नाभिकों में टूट जाता है, जिसके साथ अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा और कई न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं। इसके विपरीत, नाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक हल्के नाभिक मिलकर एक भारी एकल नाभिक बनाते हैं, जिसमें कुल बंधन ऊर्जा में शुद्ध वृद्धि के कारण ऊर्जा मुक्त होती है।
\nमुख्य अंतर:
1. तंत्र: विखंडन में एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम) को तोड़ना शामिल है, जबकि संलयन में हल्के नाभिकों (जैसे हाइड्रोजन समस्थानिक) को मिलाना शामिल है।
2. तापमान/परिस्थितियाँ: विखंडन को थर्मल न्यूट्रॉन का उपयोग करके कमरे के तापमान पर शुरू किया जा सकता है, जबकि संलयन के लिए धनात्मक आवेशित नाभिकों के बीच इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रतिकर्षक बल को दूर करने के लिए अत्यधिक उच्च तापमान ($10^7 \text{ K}$ की कोटि का) और उच्च दबाव की आवश्यकता होती है।
3. प्रति न्यूक्लिऑन ऊर्जा उत्पादन: विखंडन की तुलना में संलयन प्रति न्यूक्लिऑन अधिक ऊर्जा मुक्त करता है।
\nनाभिकीय विखंडन का उदाहरण:
$_0^1\text{n} + _{92}^{235}\text{U} \rightarrow _{56}^{141}\text{Ba} + _{36}^{92}\text{Kr} + 3_0^1\text{n} + \text{Energy}$
\nनाभिकीय संलयन का उदाहरण:
$_1^2\text{H} + _1^2\text{H} \rightarrow _2^3\text{He} + _0^1\text{n} + 3.27 \text{ MeV}$
उत्तर (Answer): चरण 1: दिए गए मापदंडों को समझें:\nअर्ध-आयु ($T_{1/2}$) = 30 वर्ष।\nमान लीजिए रेडियोएक्टिव पदार्थ की प्रारंभिक मात्रा $N_0$ है।
\nचरण 2: क्षय होने के बाद शेष मात्रा ($N$) निर्धारित करें:\nक्षय हुआ अंश $N_0$ का $\frac{7}{8}$ दिया गया है।\nइसलिए, शेष मात्रा $N$ होगी:
$N = N_0 - \frac{7}{8}N_0 = \frac{1}{8}N_0$
\nचरण 3: रेडियोएक्टिव क्षय सूत्र का उपयोग करके शेष मात्रा को अर्ध-आयु से संबंधित करें:
$N = N_0 \left(\frac{1}{2}\right)^n$\nजहाँ $n$ बीते हुए अर्ध-आयु चक्रों की संख्या है।\nसमीकरण में $N = \frac{1}{8}N_0$ रखने पर:
$\frac{1}{8}N_0 = N_0 \left(\frac{1}{2}\right)^n$
$\left(\frac{1}{2}\right)^3 = \left(\frac{1}{2}\right)^n$\nघातांकों की तुलना करने पर, $n = 3$ प्राप्त होता है।
\nचरण 4: कुल समय ($t$) की गणना करें:
$t = n \times T_{1/2}$
$t = 3 \times 30 \text{ years} = 90 \text{ years}$।\nअतः, पदार्थ के 7/8वें भाग को क्षय होने में 90 वर्ष लगेंगे।
उत्तर (Answer): नाभिकीय बल वे शक्तिशाली बल हैं जो परमाणु नाभिक के भीतर प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों को एकसाथ बांधकर रखते हैं। उनके आवश्यक गुणों में शामिल हैं:
1. लघु-परास प्रकृति: नाभिकीय बल केवल बहुत कम दूरी (कुछ फेम्टोमीटर, यानी 1 fm = 10⁻¹⁵ m की कोटि) पर प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं। इस सीमा से परे, उनका परिमाण बहुत तेजी से शून्य हो जाता है।
2. प्रकृति में सबसे मजबूत बल: कार्य करने की अपनी सीमा के भीतर, नाभिकीय बल प्रोटॉनों के बीच इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रतिकर्षक बलों और न्यूक्लिऑनों के बीच गुरुत्वाकर्षण बलों की तुलना में बहुत अधिक मजबूत होते हैं।
3. आवेश स्वतंत्रता: दो प्रोटॉनों, दो न्यूट्रॉनों, या एक न्यूट्रॉन और एक प्रोटॉन के बीच का नाभिकीय बल लगभग समान होता है, जिसका अर्थ है कि यह न्यूक्लिऑनों के विद्युत आवेश से स्वतंत्र है।
4. संतृप्ति गुण: एक न्यूक्लिऑन केवल अपने निकटतम पड़ोसियों के साथ अंतःक्रिया करता है, जो यह स्पष्ट करता है कि मध्यम और भारी नाभिकों के लिए प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा लगभग स्थिर क्यों रहती है।
5. गैर-केंद्रीय और चक्रण-निर्भर प्रकृति: नाभिकीय बल इस बात पर निर्भर करते हैं कि अंतःक्रिया करने वाले न्यूक्लिऑनों के चक्रण समानांतर हैं या विपरीत।
\nअन्य बलों के साथ तुलना:\nगुरुत्वाकर्षण बलों के विपरीत जो हमेशा आकर्षक और दीर्घ-परास के होते हैं, या इलेक्ट्रोस्टैटिक बलों के विपरीत जो व्युत्क्रम-वर्ग नियम का पालन करते हैं और आवेशों के बीच कार्य करते हैं, नाभिकीय बल कम दूरी पर मुख्य रूप से आकर्षक होते हैं, 0.5 fm से कम दूरी पर प्रतिकर्षक हो जाते हैं, और व्युत्क्रम-वर्ग नियम का पालन नहीं करते हैं।
उत्तर (Answer): चरण 1: $_{8}^{16}\text{O}$ में प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए:\nप्रोटॉनों की संख्या ($Z$) = 8\nन्यूट्रॉनों की संख्या ($N = A - Z$) = $16 - 8 = 8$
\nचरण 2: व्यक्तिगत न्यूक्लिऑनों के कुल द्रव्यमान की गणना कीजिए:
8 प्रोटॉनों का द्रव्यमान = $8 \times 1.007825 \text{ u} = 8.062600 \text{ u}$
8 न्यूट्रॉनों का द्रव्यमान = $8 \times 1.008665 \text{ u} = 8.069320 \text{ u}$\nन्यूक्लिऑनों का कुल द्रव्यमान = $8.062600 + 8.069320 = 16.131920 \text{ u}$
\nचरण 3: द्रव्यमान क्षति ($\Delta m$) की गणना कीजिए:
$\Delta m = [Z m_p + (A-Z) m_n] - \text{नाभिक का द्रव्यमान}$
$\Delta m = 16.131920 \text{ u} - 15.994915 \text{ u} = 0.137005 \text{ u}$
\nचरण 4: कुल बंधन ऊर्जा (BE) की गणना कीजिए:
$BE = \Delta m \times 931.5 \text{ MeV/u}$
$BE = 0.137005 \times 931.5 \text{ MeV} = 127.625 \text{ MeV}$
\nचरण 5: प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा की गणना कीजिए:
$\text{प्रति न्यूक्लिऑन BE} = \frac{BE}{A} = \frac{127.625 \text{ MeV}}{16} = 7.976 \text{ MeV/nucleon}$।\nअतः, ऑक्सीजन-16 के लिए प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा 7.976 MeV है।
उत्तर (Answer): नाभिकीय बंधन ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी नाभिक को उसके घटक प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों में तोड़ने के लिए आवश्यक होती है, या इसके विपरीत, जब ये न्यूक्लिऑन मिलकर एक स्थायी नाभिक बनाते हैं तो ऊर्जा मुक्त होती है। यह ऊर्जा द्रव्यमान क्षति के कारण उत्पन्न होती है, जहाँ व्यक्तिगत न्यूक्लिऑन का कुल द्रव्यमान उनके द्वारा बनाए गए नाभिक के द्रव्यमान से अधिक होता है, जिसे आइंस्टीन के समीकरण $E = \Delta m c^2$ द्वारा समझाया जाता है। प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा ($BE/A$) किसी नाभिक की कुल बंधन ऊर्जा को उसकी द्रव्यमान संख्या $A$ से विभाजित करने पर प्राप्त होती है। यह नाभिक की संरचनात्मक स्थिरता का एक माप है।
\nद्रव्यमान संख्या $A$ के विरुद्ध प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा का ग्राफ कई प्रमुख विशेषताएँ प्रकट करता है:
1. मध्यम द्रव्यमान संख्याओं ($30 < A < 170$) के लिए, वक्र अपेक्षाकृत समतल होता है, जिसमें प्रति न्यूक्लिऑन लगभग 8.5 MeV का स्थिर मान होता है, जो नाभिकीय बलों के संतृप्ति गुण को दर्शाता है।
2. बहुत हल्के नाभिकों ($A < 30$) और बहुत भारी नाभिकों ($A > 170$) के लिए, प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा कम होती है, जो यह बताती है कि हल्के नाभिक अधिक स्थिर होने के लिए नाभिकीय संलयन से क्यों गुजरते हैं, जबकि भारी नाभिक बंधन ऊर्जा वक्र के शिखर की ओर बढ़कर अधिक स्थिरता प्राप्त करने के लिए नाभिकीय विखंडन से गुजरते हैं।