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विलयन

Subject: रसायन विज्ञान | Class: Class 12 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय: विलयन (Solutions) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स (Quick Revision Notes)

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परिचय (Introduction)

विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) होता है।


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1. सांद्रता को व्यक्त करने की विधियाँ (Methods of Expressing Concentration)

द्रव्यमान % = (अवयव का द्रव्यमान / विलयन का कुल द्रव्यमान) × 100


आयतन % = (अवयव का आयतन / विलयन का कुल आयतन) × 100


w/v % = (विलेय का द्रव्यमान ग्राम में / विलयन का कुल आयतन mL में) × 100


ppm = (विलेय के भागों की संख्या / विलयन में उपस्थित सभी अवयवों के कुल भागों की संख्या) × 10^6


एक लीटर विलयन में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या।

M = (विलेय के मोलों की संख्या / विलयन का आयतन लीटर में)

या M = (wB × 1000) / (MB × V_{mL})

(यहाँ wB = विलेय का भार, MB = विलेय का मोलर द्रव्यमान, V = आयतन)


एक किलोग्राम विलायक में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या।

m = (विलेय के मोलों की संख्या / विलायक का द्रव्यमान kg में)

या m = (wB × 1000) / (MB × w_A \text{ ग्राम में})


किसी घटक के मोलों की संख्या और कुल मोलों की संख्या का अनुपात।

यदि अवयव A और B हैं:

xA = nA / (nA + nB)

xB = nB / (nA + nB)

नोट: xA + xB = 1 हमेशा होता है।


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2. विलेयता (Solubility)

स्थिर ताप पर, किसी द्रव में गैस की विलेयता (मोल अंश x) उस गैस के आंशिक दाब (p) के समानुपाती होती है।

p = K_H × x

(यहाँ KH = हेनरी स्थिरांक है। KH का मान जितना अधिक होगा, गैस की जल में विलेयता उतनी ही कम होगी।)


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3. द्रव-विलयन के वाष्प दाब और राउल्ट का नियम (Raoult's Law)

किसी विलयन के लिए प्रत्येक वाष्पशील घटक का आंशिक दाब विलयन में उसके मोल अंश के समानुपाती होता है।

pA = pA^0 × x_A

कुल दाब (Ptotal) = pA + pB = (pA^0 × xA) + (pB^0 × x_B)


जब किसी विलायक में अवाष्पशील ठोस मिलाया जाता है, तो विलयन का वाष्प दाब केवल विलायक के वाष्प दाब के कारण होता है।

(pA^0 - pA) / pA^0 = xB

(जहाँ (pA^0 - pA) / pA^0 वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन है और xB विलेय का मोल अंश है।)


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4. आदर्श और अनादर्श विलयन (Ideal and Non-Ideal Solutions)


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5. अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative Properties)

वे गुण जो विलयन में उपस्थित विलेय कणों (अणुओं या आयनों) की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि उनकी प्रकृति पर।


1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure):

(pA^0 - pA) / pA^0 = (wB × MA) / (MB × w_A)


2. क्थनांक का उन्नयन (Elevation in Boiling Point - ΔT_b):

ΔTb = Tb - Tb^0 = Kb × m

(जहाँ K_b = मोलल उन्नयन स्थिरांक, m = मोललता)


3. हिमांशु का अवनमन (Depression in Freezing Point - ΔT_f):

ΔTf = Tf^0 - Tf = Kf × m

(जहाँ K_f = मोलल अवनमन स्थिरांक, m = मोललता)


4. परासरण दाब (Osmotic Pressure - π):

परासरण को रोकने के लिए विलयन पर लगाया गया आवश्यक न्यूनतम दाब।

π = C R T

या π = (n_B / V) R T

या π = (wB × R × T) / (MB × V)

(जहाँ C = मोलर सांद्रता, R = गैस स्थिरांक, T = तापमान)


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6. वांट-हॉफ गुणांक (Van't Hoff Factor - i)

विद्युत अपघट्यों के वियोजन (Dissociation) या संघनन (Association) के कारण अणुसंख्यक गुणों में होने वाले विचलन को ठीक करने के लिए वांट-हॉफ गुणांक का उपयोग किया जाता है।


i = (\text{प्रेक्षित अणुसंख्यक गुणधर्म} / \text{सामान्य अणुसंख्यक गुणधर्म})

i = (\text{संयोजन या वियोजन के बाद कुल मोलों की संख्या} / \text{संयोजन या वियोजन से पहले के मोलों की संख्या})


वांट-हॉफ गुणांक के साथ संशोधित सूत्र:


माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 विलयन (Solutions)
Overview
विलयन के प्रकार (Types of Solutions) गैसीय विलयन (Gaseous Solutions) द्रव विलयन (Liquid Solutions) ठोस विलयन (Solid Solutions) सांद्रता व्यक्त करने की विधियाँ (Methods of Expressing Concentration) द्रव्यमान प्रतिशत (Mass Percentage) आयतन प्रतिशत (Volume Percentage) पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm) मोलरता (Molarity) मोललता (Molality) मोल अंश (Mole Fraction) विलेयता (Solubility) ठोसों की द्रवों में विलेयता (Solubility of Solids in Liquids) गैसों की द्रवों में विलेयता (Solubility of Gases in Liquids) हेनरी का नियम (Henry's Law) कथन और सूत्र (Statement and Formula) अनुप्रयोग (Applications) द्रव-विलयन का वाष्प दाब (Vapour Pressure of Liquid Solutions) राउल का नियम (Raoult's Law) अवाष्पशील विलेय के लिए (For Non-volatile Solute) वाष्पशील द्रवों के लिए (For Volatile Liquids) आदर्श एवं अनादर्श विलयन (Ideal and Non-ideal Solutions) धनात्मक विचलन (Positive Deviation) ऋणात्मक विचलन (Negative Deviation) स्थिरक्वाथी (Azeotropes) अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative Properties) वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) क्वथनांक का उन्नयन (Elevation of Boiling Point) हिमांक का अवनमन (Depression of Freezing Point) परासरण दाब (Osmotic Pressure) परासरण और प्रतिलोम परासरण (Osmosis and Reverse Osmosis) असामान्य मोलर द्रव्यमान (Abnormal Molar Mass) वांट हॉफ गुणांक ($i$) (Van 't Hoff Factor) संगुणन और वियोजन (Association and Dissociation)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. 5 ग्राम NaOH को 250 ml विलयन में घोला गया है, विलयन की मोलरता की गणना कीजिए। 1 Marks
उत्तर (Answer): M=w*1000/mw*vml
Q2. हेनरी के नियम के अनुसार, किसी द्रव में गैस की विलेयता निम्नलिखित में से किसके सीधे समानुपाती होती है? 1 Marks
उत्तर (Answer): सही विकल्प **द्रव के ऊपर गैस का दाब** है। **स्पष्टीकरण:** - **हेनरी का नियम** यह बताता है कि स्थिर तापमान पर, किसी द्रव में गैस की विलेयता द्रव या विलयन की सतह के ऊपर मौजूद गैस के आंशिक दाब के सीधे समानुपाती होती है। गणितीय रूप से, इसे $p = K_H \cdot x$ के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ $p$ गैस का आंशिक दाब है, $x$ विलयन में गैस का मोल अंश है, और $K_H$ हेनरी नियम स्थिरांक है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सी सांद्रता इकाई तापमान से स्वतंत्र होती है? 1 Marks
उत्तर (Answer): सही विकल्प **मोललता** है। **स्पष्टीकरण:** - **मोललता ($m$)** को विलायक के $1 \text{ kg}$ ($1000 \text{ g}$) में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है। चूँकि इसमें विलेय और विलायक दोनों के द्रव्यमान शामिल हैं, और द्रव्यमान तापमान के साथ नहीं बदलता है, इसलिए मोललता तापमान से स्वतंत्र होती है। - दूसरी ओर, मोलरता, नॉर्मलता और फॉर्मलता में विलयन का आयतन शामिल होता है। चूँकि तापमान में परिवर्तन के साथ आयतन बदलता है (थर्मल एक्सपेंशन या संकुचन के कारण), ये इकाइयाँ तापमान पर निर्भर करती हैं।
Q4. अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative Properties) को परिभाषित कीजिए। किन्हीं दो अणुसंख्यक गुणधर्मों की उनके संबंधित गणितीय व्यंजकों के साथ विस्तार से चर्चा कीजिए। साथ ही निम्नलिखित संख्यात्मक समस्या को हल कीजिए: 200 ग्राम जल में $MgBr_2$ ($मोलर\ द्रव्यमान = 184\ g\ mol^{-1}$) के 10.5 ग्राम वाले जलीय विलयन के हिमांक की गणना कीजिए, यह मानते हुए कि $MgBr_2$ का पूर्ण वियोजन होता है। (जल के लिए $K_f = 1.86\ K\ kg\ mol^{-1}$) 5 Marks
उत्तर (Answer): ### अणुसंख्यक गुणधर्म की परिभाषा\nविलयन के वे गुणधर्म जो विलयन में उपस्थित विलेय के कणों (अणुओं या आयनों) की कुल संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि विलेय की रासायनिक प्रकृति पर, अणुसंख्यक गुणधर्म कहलाते हैं। मुख्य अणुसंख्यक गुणधर्म हैं: वाष्प दाब का अपेक्षित अवनमन, क्वथनांक का उन्नयन, हिमांक का अवनमन और परासरण दाब। ### 1. क्वथनांक का उन्नयन ($\Delta T_b$)\nवह तापमान जिस पर किसी द्रव का वाष्प दाब वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है, उसका क्वथनांक कहलाता है। जब किसी शुद्ध विलायक में कोई अवाष्पशील विलेय मिलाया जाता है, तो विलयन का वाष्प दाब कम हो जाता है, अतः इसके वाष्प दाब को वायुमंडलीय दाब के बराबर करने के लिए इसे उच्च तापमान पर गर्म करना पड़ता है। इस प्रकार, विलयन का क्वथनांक ($T_b$) शुद्ध विलायक के क्वथनांक ($T_b^0$) से अधिक होता है। - **गणितीय व्यंजक:** $\Delta T_b = T_b - T_b^0 = K_b \cdot m$ - जहाँ $K_b$ क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक है और $m$ विलयन की मोललता है। ### 2. हिमांक का अवनमन ($\Delta T_f$)\nकिसी पदार्थ का हिमांक वह तापमान है जिस पर पदार्थ के द्रव रूप का वाष्प दाब उसके ठोस रूप के वाष्प दाब के बराबर होता है। जब किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाया जाता है, तो हिमांक पर विलयन का वाष्प दाब शुद्ध विलायक की तुलना में कम हो जाता है। परिणामस्वरूप, हिमांक कम हो जाता है। - **गणितीय व्यंजक:** $\Delta T_f = T_f^0 - T_f = K_f \cdot m$ - जहाँ $K_f$ हिमांक अवनमन स्थिरांक है और $m$ विलयन की मोललता है। ### संख्यात्मक हल: **दिया गया डेटा:** - विलेय का द्रव्यमान ($MgBr_2$) $W_B = 10.5\ g$ - विलेय का मोलर द्रव्यमान $M_B = 184\ g\ mol^{-1}$ - विलायक (जल) का द्रव्यमान $W_A = 200\ g$ - $K_f = 1.86\ K\ kg\ mol^{-1}$ **चरण 1: $MgBr_2$ का वियोजन और वांट हॉफ गुणांक ($i$):** $MgBr_2 \rightarrow Mg^{2+} + 2Br^{-}$\nकणों की कुल संख्या = $1 + 2 = 3$\nअतः वांट हॉफ गुणांक $i = 3$ (पूर्ण वियोजन मानते हुए)। **चरण 2: मोललता ($m$) की गणना:** $m = \frac{W_B \times 1000}{M_B \times W_A} = \frac{10.5 \times 1000}{184 \times 200} = \frac{10500}{36800} = 0.2853\ mol\ kg^{-1}$ **चरण 3: हिमांक में अवनमन ($\Delta T_f$) की गणना:** $\Delta T_f = i \cdot K_f \cdot m$ $\Delta T_f = 3 \times 1.86 \times 0.2853 = 1.592\ K$ **चरण 4: विलयन के हिमांक ($T_f$) की गणना:**\nशुद्ध जल का हिमांक $T_f^0 = 0^\circ C$ या $273.15\ K$ $\Delta T_f = T_f^0 - T_f$ $1.592 = 273.15 - T_f$ $T_f = 273.15 - 1.592 = 271.558\ K$ (या $-1.59^\circ C$)
Q5. अणुसंख्यक गुणधर्म से क्या तात्पर्य है? चारों अल्पसंख्यक गुणधर्मों के नाम लिखिए और समझाइए कि उनका उपयोग अवाष्पशील विलेय पदार्थों के मोलर द्रव्यमान निर्धारण के लिए कैसे किया जाता है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### अल्पसंख्यक गुणधर्म की परिभाषा\nतनुकृत विलयनों के वे गुण जो विलयन में उपस्थित विलेय कणों (अणुओं या आयनों) की कुल संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि विलेय की रासायनिक प्रकृति या पहचान पर, अल्पसंख्यक गुणधर्म कहलाते हैं (यह लैटिन शब्द *कॉलिगेयर* से लिया गया है जिसका अर्थ है 'एक साथ बांधना')। ### चार प्रमुख अल्पसंख्यक गुणधर्म 1. **वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन:** वाष्प दाब का कम होना अवाष्पशील विलेय कणों के मोल अंश पर निर्भर करता है। 2. **क्वथनांक उन्नयन:** अवाष्पशील विलेय मिलाने के कारण विलायक के क्वथनांक में वृद्धि। 3. **हिमांक अवनमन:** अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलायक के हिमांक में कमी। 4. **परासरण दाब:** वह अतिरिक्त हाइड्रोस्टेटिक दाब जिसे अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलयन में विलायक अणुओं के प्रवेश को रोकने के लिए लागू किया जाना चाहिए। ### अल्पसंख्यक गुणधर्मों का उपयोग करके मोलर द्रव्यमान का निर्धारण\nसभी अल्पसंख्यक गुणधर्म विलेय के मोलों की संख्या के सीधे या व्युत्क्रमानुपाती होते हैं, जो रसायनज्ञों को अज्ञात अवाष्पशील विलेय के मोलर द्रव्यमान की गणना करने की अनुमति देते हैं। - **वाष्प दाब के आपेक्षिक अवनमन से:** $\frac{p_1^0 - p_1}{p_1^0} = \frac{W_2 M_1}{M_2 W_1}$, जहाँ $M_2$ की गणना की जा सकती है। - **क्वथनांक उन्नयन से:** $\Delta T_b = \frac{K_b \times W_2 \times 1000}{M_2 \times W_1} \implies M_2 = \frac{K_b \times W_2 \times 1000}{\Delta T_b \times W_1}$ - **हिमांक अवनमन से:** $\Delta T_f = \frac{K_f \times W_2 \times 1000}{M_2 \times W_1} \implies M_2 = \frac{K_f \times W_2 \times 1000}{\Delta T_f \times W_1}$ - **परासरण दाब से:** $\Pi = \frac{W_2 R T}{M_2 V} \implies M_2 = \frac{W_2 R T}{\Pi V}$ \nइस प्रकार, ज्ञात सांद्रता वाले विलयन के लिए इनमें से किसी भी गुण को मापकर, विलेय के मोलर द्रव्यमान ($M_2$) को सटीक रूप से निर्धारित किया जा सकता है।
Q6. 1 किलोग्राम जल में 18 ग्राम ग्लूकोज ($C_6H_{12}O_6$) घोलकर बनाए गए विलयन के लिए क्वथनांक उन्नयन की गणना कीजिए। (जल के लिए $K_b = 0.52 \text{ K kg mol}^{-1}$)। 4 Marks
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा: - विलेय का द्रव्यमान (ग्लूकोज, $W_2$) = $18 \text{ g}$ - विलायक का द्रव्यमान (जल, $W_1$) = $1 \text{ kg} = 1000 \text{ g}$ - ग्लूकोज का मोलर द्रव्यमान ($C_6H_{12}O_6$, $M_2$) = $(6 \times 12) + (12 \times 1) + (6 \times 16) = 72 + 12 + 96 = 180 \text{ g mol}^{-1}$ - जल के लिए मोलल उन्नयन स्थिरांक ($K_b$) = $0.52 \text{ K kg mol}^{-1}$ ### सूत्र:\nक्वथनांक में उन्नयन ($\Delta T_b$) निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है: $$\Delta T_b = \frac{K_b \times W_2 \times 1000}{M_2 \times W_1}$| ### चरण-दर-चरण गणना: 1. सूत्र में दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करें: $$\Delta T_b = \frac{0.52 \times 18 \times 1000}{180 \times 1000}$| 2. पदों को सरल करें: $$\Delta T_b = \frac{0.52 \times 18}{180}$| 3. समान कारकों को रद्द करें ($18 / 180 = 1 / 10$): $$\Delta T_b = \frac{0.52}{10}$| 4. अंतिम मान की गणना करें: $$\Delta T_b = 0.052 \text{ K}$$ (या °C) ### उत्तर:\nदिए गए विलयन के क्वथनांक में उन्नयन $0.052 \text{ K}$ है।
Q7. हेनरी का नियम लिखिए और इसके महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों की विवेचना कीजिए। साथ ही, द्रवों में गैसों की विलेयता पर तापमान के प्रभाव को कारणों सहित समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### हेनरी का नियम\nहेनरी का नियम यह बताता है कि स्थिर ताप पर किसी द्रव में गैस की विलेयता, द्रव या विलयन की सतह के ऊपर उपस्थित गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होती है। गणितीय रूप से, इसे $p = K_H \cdot x$ के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ $p$ वाष्प अवस्था में गैस का आंशिक दाब है, $x$ विलयन में गैस का मोल अंश है, और $K_H$ हेनरी नियम स्थिरांक है। ### हेनरी के नियम के महत्वपूर्ण अनुप्रयोग 1. **कार्बोनेटेड पेय पदार्थों का निर्माण:** शीतल पेय और सोडा वाटर में कार्बन डाइऑक्साइड की विलेयता को बढ़ाने के लिए बोतलों को उच्च दाब पर सील किया जाता है। 2. **स्कूबा डाइविंग:** गहरे समुद्र के गोताखोर उच्च दाब पर संपीड़ित हवा में सांस लेते हैं। उच्च दाब पर हवा में सांस लेने के कारण अधिक मात्रा में नाइट्रोजन गैस रक्त में घुल जाती है। जब गोताखोर सतह की ओर ऊपर आता है, तो दाब कम हो जाता है, जिससे घुली हुई नाइट्रोजन गैस बाहर निकलती है और रक्त में बुलबुले बन जाते हैं। इस स्थिति को 'बेंड्स' कहा जाता है, जो दर्दनाक और खतरनाक होता है। बेंड्स और नाइट्रोजन की उच्च सांद्रता के विषैले प्रभावों से बचने के लिए, स्कूबा गोताखोरों के टैंकों को हीलियम (11.6%), नाइट्रोजन (56.2%), और ऑक्सीजन (32.2%) से तनुकृत किया जाता है। 3. **ऊंचाई वाले स्थानों पर चढ़ना:** अधिक ऊंचाई पर, ऑक्सीजन का आंशिक दाब जमीन के स्तर की तुलना में कम होता है। इसके परिणामस्वरूप अधिक ऊंचाई पर रहने वाले या चढ़ने वाले लोगों के रक्त और ऊतकों में ऑक्सीजन की सांद्रता कम हो जाती है, जिससे पर्वतारोही कमजोर हो जाते हैं और स्पष्ट रूप से सोचने में असमर्थ हो जाते हैं, इस स्थिति को एनोक्सिया कहा जाता है। ### विलेयता पर तापमान का प्रभाव\nतापमान में वृद्धि के साथ द्रवों में गैसों की विलेयता कम हो जाती है। किसी द्रव में गैस का घुलना एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है (ऊष्मा निकलती है)। ली शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार, जब तापमान बढ़ाया जाता है, तो साम्यावस्था पीछे की दिशा में विस्थापित हो जाती है, जिससे गैस की विलेयता कम हो जाती है।
Q8. अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative Properties) को परिभाषित कीजिए। अपने संबंधित सूत्रों के साथ सभी चार अल्पसंख्यक गुणों को समझाइए और दिखाइए कि उनका उपयोग गैर-वाष्पशील विलेय के मोलर द्रव्यमान को निर्धारित करने के लिए कैसे किया जाता है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### अल्पसंख्यक गुणधर्म की परिभाषा\nघोल के वे गुण जो विलायक की एक निश्चित मात्रा में घुले हुए विलेय कणों (अणुओं या आयनों) की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि उनकी रासायनिक प्रकृति पर, उन्हें अल्पसंख्यक गुणधर्म कहा जाता है। ### चार अल्पसंख्यक गुण 1. **वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन:** राउल्ट के नियम के अनुसार, एक गैर-वाष्पशील विलेय वाले घोल के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन घोल में विलेय के मोल अंश के बराबर होता है। $$\frac{P_1^0 - P_1}{P_1^0} = x_2 = \frac{n_2}{n_1 + n_2}$$ पतले घोलों के लिए ($n_2 \ll n_1$): $$\frac{P_1^0 - P_1}{P_1^0} = \frac{w_2 \cdot M_1}{M_2 \cdot w_1}$$ मोलर द्रव्यमान ($M_2$) की गणना इस संबंध का उपयोग करके आसानी से की जा सकती है। 2. **क्वथनांक में उन्नयन ($\Delta T_b$):** किसी तरल का क्वथनांक वह तापमान है जिस पर उसका वाष्प दाब वायुमंडलीय दबाव के बराबर होता है। एक गैर-वाष्पशील विलेय मिलाने से वाष्प दाब कम हो जाता है, जिससे क्वथनांक बढ़ जाता है। $$\Delta T_b = K_b \cdot m = K_b \cdot \frac{w_2 \times 1000}{M_2 \times w_1}$$ जहाँ $K_b$ क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक है। 3. **हिमांक में अवनमन ($\Delta T_f$):** हिमांक वह तापमान है जिस पर तरल का वाष्प दाब ठोस के वाष्प दाब के बराबर होता है। विलेय मिलाने से हिमांक कम हो जाता है। $$\Delta T_f = K_f \cdot m = K_f \cdot \frac{w_2 \times 1000}{M_2 \times w_1}$$ जहाँ $K_f$ हिमांक अवनमन स्थिरांक है। 4. **ऑस्मोटिक दबाव ($\pi$):** ऑस्मोटिक दबाव अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से ऑस्मोसिस को रोकने के लिए घोल की तरफ लागू किया जाने वाला अतिरिक्त दबाव है। $$\pi = C \cdot R \cdot T = \frac{w_2}{M_2} \cdot \frac{R \cdot T}{V}$$ पॉलिमर और प्रोटीन के बड़े मोलर द्रव्यमान को निर्धारित करने के लिए अन्य अल्पसंख्यक गुणों की तुलना में ऑस्मोटिक दबाव को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि माप कमरे के तापमान पर किए जाते हैं और कम सांद्रता पर भी प्रभाव बड़ा होता है।
Q9. $19.5 \text{ g } CH_3CH_2COOH$ (मोलर द्रव्यमान = $74 \text{ g mol}^{-1}$) को 500 ग्राम पानी में घोला जाता है। 298 K पर हिमांक में अवनमन और घोल के ऑस्मोटिक दबाव की गणना करें। दिया गया है: $K_f = 1.86 \text{ K kg mol}^{-1}$, वेंट हॉफ कारक ($i$) = 1.02, घोल का घनत्व = $1 \text{ g cm}^{-3}$। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### चरण 1: घोल के मोल और मोललता की गणना करें - विलेय का द्रव्यमान ($w_2$) = $19.5 \text{ g}$ - विलेय का मोलर द्रव्यमान ($M_2$) = $74 \text{ g mol}^{-1}$ - विलायक का द्रव्यमान ($w_1$) = $500 \text{ g} = 0.5 \text{ kg}$ \nमोललता ($m$) = $\frac{w_2 \times 1000}{M_2 \times w_1} = \frac{19.5 \times 1000}{74 \times 500} = \frac{19500}{37000} = 0.527 \text{ mol kg}^{-1}$ ### चरण 2: हिमांक में अवनमन ($\Delta T_f$) की गणना करें\nसूत्र का उपयोग करते हुए: $$\Delta T_f = i \cdot K_f \cdot m$$ $$\Delta T_f = 1.02 \times 1.86 \times 0.527$$ $$\Delta T_f = 1.0001 \text{ K} \approx 1.00 \text{ K}$$ ### चरण 3: ऑस्मोटिक दबाव ($\pi$) की गणना करें\nसबसे पहले, घोल की मोलरता ($M$) की गणना करें: - घोल का आयतन $\approx$ पानी का आयतन = $500 \text{ mL} = 0.5 \text{ L}$ - विलेय के मोल ($n_2$) = $\frac{19.5}{74} = 0.2635 \text{ moles}$ \nमोलरता ($M$) = $\frac{0.2635 \text{ moles}}{0.5 \text{ L}} = 0.527 \text{ mol L}^{-1}$ \nऑस्मोटिक दबाव के सूत्र का उपयोग करते हुए: $$\pi = i \cdot M \cdot R \cdot T$$\nजहाँ $R = 0.0821 \text{ L atm K}^{-1} \text{ mol}^{-1}$ और $T = 298 \text{ K}$ $$\pi = 1.02 \times 0.527 \times 0.0821 \times 298$$ $$\pi = 13.13 \text{ atm}$$
Q10. हेनरी का नियम लिखिए और इसके विभिन्न अनुप्रयोगों को समझाइए। हेनरी के नियम की सीमाओं की भी चर्चा कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### हेनरी के नियम का कथन\nहेनरी का नियम बताता है कि स्थिर तापमान पर, किसी तरल में गैस की विलेयता तरल या घोल की सतह पर मौजूद गैस के आंशिक दबाव के सीधे समानुपातिक होती है। गणितीय रूप से, इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है: $$p = K_H \cdot x$$\nजहाँ $p$ गैस का आंशिक दबाव है, $x$ घोल में गैस का मोल अंश है, और $K_H$ हेनरी के नियम का स्थिरांक है। ### हेनरी के नियम के अनुप्रयोग 1. **कार्बोनेटेड पेय पदार्थों का उत्पादन:** सॉफ्ट ड्रिंक और सोडा वाटर में $CO_2$ की विलेयता बढ़ाने के लिए, बोतलों को उच्च दबाव में सील किया जाता है। 2. **गहरे समुद्र में गोताखोरी (स्कूबा डाइविंग):** स्कूबा गोताखोर पानी के नीचे उच्च दबाव में संपीड़ित हवा में सांस लेते हैं। उच्च दबाव के कारण, रक्त में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसी वायुमंडलीय गैसों की विलेयता बढ़ जाती है। जब गोताखोर धीरे-धीरे सतह पर आते हैं, तो दबाव कम हो जाता है, जिससे घुली हुई गैसें निकलती हैं और दर्दनाक नाइट्रोजन के बुलबुले बनते हैं जिन्हें 'बेंड्स' कहा जाता है। इससे बचने के लिए, टैंकों को हीलियम के साथ मिलाया जाता है। 3. **पर्वतारोहण / अधिक ऊंचाई:** अधिक ऊंचाई पर, ऑक्सीजन का आंशिक दबाव कम होता है, जिससे पर्वतारोहियों के रक्त और ऊतकों में ऑक्सीजन की सांद्रता कम हो जाती है, जिससे एनोक्सिया नामक स्थिति पैदा होती है। ### हेनरी के नियम की सीमाएं - गैस का दबाव बहुत अधिक नहीं होना चाहिए। - तापमान बहुत कम नहीं होना चाहिए। - गैस विलायक में किसी भी रासायनिक वियोजन या जुड़ाव से नहीं गुजरनी चाहिए।
Q11. अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative Properties) को परिभाषित कीजिए। विलयनों में अध्ययन किए जाने वाले चार अणुसंख्यक गुणधर्मों के नाम लिखिए और वांट हॉफ गुणांक की व्याख्या कीजिए। किसी विद्युत अपघट्य के वियोजन की मात्रा की गणना करने के लिए वांट हॉफ गुणांक का उपयोग कैसे किया जाता है? 5 Marks
उत्तर (Answer): ### अणुसंख्यक गुणधर्म की परिभाषा\nअणुसंख्यक गुणधर्म तनु विलयनों के वे गुण हैं जो केवल विलयन में मौजूद विलेय कणों (अणुओं या आयनों) की संख्या पर निर्भर करते हैं और विलेय कणों की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर नहीं करते हैं। ### चार प्रमुख अणुसंख्यक गुणधर्म 1. **वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन:** जब किसी शुद्ध विलायक में अवाष्पशील विलेय घोला जाता है तो वाष्प दाब में कमी। 2. **क्वथनांक उन्नयन ($ΔT_b$):** जब किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाया जाता है तो उसके क्वथनांक में वृद्धि। 3. **हिमांशु अवनमन ($ΔT_f$):** अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलायक के हिमांक में कमी। 4. **परासरण दाब ($Π$):** अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलयन में विलायक के प्रवाह को रोकने के लिए विलयन की तरफ लगाया जाने वाला अतिरिक्त हाइड्रोस्टेटिक दबाव। ### वांट हॉफ गुणांक ($i$)\nजब विद्युत अपघट्यों को पानी में घोला जाता है, तो वे वियोजन या संगुणन से गुजरते हैं, जिससे विलयन में कणों की कुल संख्या बदल जाती है। अणुसंख्यक गुणधर्मों में इस विचलन को समझाने के लिए, याकोबुस हेंड्रिकस वांट हॉफ ने **वांट हॉफ गुणांक ($i$)** प्रस्तुत किया। \nइसे इस प्रकार परिभाषित किया गया है: $$i = \frac{\text{प्रेक्षित अणुसंख्यक गुणधर्म}}{\text{परिकलित (सामान्य) अणुसंख्यक गुणधर्म}} = \frac{\text{सामान्य मोलर द्रव्यमान}}{\text{असामान्य मोलर द्रव्यमान}}$$ ### वियोजन की मात्रा ($\alpha$) और वांट हॉफ गुणांक\nमान लीजिए एक विद्युत अपघट्य $n$ आयनों में वियोजित होता है: - $t = 0$ पर प्रारंभिक मोल: $1$ मोल, $0$ आयन - संतुलन पर मोल: $(1 - \alpha)$ मोल, $n\alpha$ मोल \nसंतुलन पर कुल मोल ($N$) = $1 - \alpha + n\alpha = 1 + \alpha(n - 1)$ \nचूँकि वांट हॉफ गुणांक $i$ वियोजन के बाद कुल मोलों और प्रारंभिक मोलों का अनुपात है: $$i = 1 + \alpha(n - 1)$$ \nवियोजन की मात्रा ($\alpha$) की गणना के लिए सूत्र को व्यवस्थित करने पर: $$\alpha = \frac{i - 1}{n - 1}$$\nयह संबंध रसायनविदों को अपने अणुसंख्यक गुणधर्मों को प्रयोगात्मक रूप से मापकर जलीय विलयनों में कमजोर विद्युत अपघट्यों के वियोजन की सीमा निर्धारित करने की अनुमति देता है।
Q12. 90 g जल में 30 g अवाष्पशील अनविद्युत अपघट्य विलेय वाले एक विलयन का 298 K पर वाष्प दाब 2.8 kPa है। इसके पश्चात विलयन में 18 g जल और मिलाया जाता है जिससे 298 K पर नया वाष्प दाब 2.9 kPa हो जाता है। गणना कीजिए: (i) विलेय का मोलर द्रव्यमान, (ii) 298 K पर शुद्ध जल का वाष्प दाब। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा: - विलेय का प्रारंभिक द्रव्यमान ($w_2$) = $30\text{ g}$ - जल का प्रारंभिक द्रव्यमान ($w_1$) = $90\text{ g}$ - जल का मोलर द्रव्यमान ($M_1$) = $18\text{ g mol}^{-1}$ - विलयन का प्रारंभिक वाष्प दाब ($p_1$) = $2.8\text{ kPa}$ ### चरण 1: राउल्ट के नियम का उपयोग करके पहले मामले के लिए समीकरण स्थापित करें\nमान लीजिए विलेय का मोलर द्रव्यमान $M_2$ है और शुद्ध जल का वाष्प दाब $p^0$ है।\nजल के मोलों की संख्या ($n_1$) = $\frac{90}{18} = 5\text{ मोल}$\nविलेय के मोलों की संख्या ($n_2$) = $\frac{30}{M_2}$ \nवाष्प दाब के आपेक्षिक अवनमन के लिए राउल्ट के नियम के अनुसार: $$\frac{p^0 - p_1}{p^0} = \frac{n_2}{n_1 + n_2}$$ $$\frac{p^0 - 2.8}{p^0} = \frac{\frac{30}{M_2}}{5 + \frac{30}{M_2}} \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$ ### चरण 2: दूसरे मामले के लिए समीकरण स्थापित करें\nजब 18 ग्राम जल मिलाया जाता है: - जल का नया द्रव्यमान = $90 + 18 = 108\text{ g}$ - जल के मोलों की नई संख्या ($n_1'$संस्करण) = $\frac{108}{18} = 6\text{ मोल}$ - विलयन का नया वाष्प दाब ($p_2$) = $2.9\text{ kPa}$ \nपुनः राउल्ट का नियम लागू करने पर: $$\frac{p^0 - 2.9}{p^0} = \frac{\frac{30}{M_2}}{6 + \frac{30}{M_2}} \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$ ### चरण 3: समीकरण 1 और समीकरण 2 को हल करें\nमान लीजिए $x = \frac{30}{M_2}$ है। समीकरणों को विभाजित करने पर: $$\frac{2.8}{2.9} = \frac{5 / (5 + x)}{6 / (6 + x)}$$ $$2.8 \times 6(5 + x) = 2.9 \times 5(6 + x)$$ $$16.8(5 + x) = 14.5(6 + x)$$ $$84 + 16.8x = 87 + 14.5x$$ $$2.3x = 3 \implies x = 1.304$$ \nचूँकि $x = \frac{30}{M_2} = 1.304$: $$M_2 = \frac{30}{1.304} = 23.0\text{ g mol}^{-1}\text{ (विलेय का मोलर द्रव्यमान)}$$ ### चरण 4: शुद्ध जल का वाष्प दाब ($p^0$) ज्ञात करें\nसमीकरण 1 में $x$ का मान वापस रखने पर: $$\frac{p^0 - 2.8}{p^0} = \frac{1.304}{5 + 1.304} = 0.2068$$ $$p^0 - 2.8 = 0.2068 p^0 \implies 0.7932 p^0 = 2.8$$ $$p^0 = \frac{2.8}{0.7932} = 3.53\text{ kPa}$$ ### अंतिम उत्तर: (i) विलेय का मोलर द्रव्यमान = $23.0\text{ g mol}^{-1}$ (ii) शुद्ध जल का वाष्प दाब = $3.53\text{ kPa}$
Q13. हेनरी का नियम लिखिए और इसका गणितीय व्यंजक लिखिए। हेनरी के नियम के किन्हीं तीन महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों की चर्चा कीजिए और इसकी सीमाएँ बताइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### हेनरी के नियम का कथन\nहेनरी का नियम बताता है कि स्थिर तापमान पर, किसी तरल में गैस की विलेयता तरल या विलयन की सतह पर मौजूद गैस के आंशिक दाब के सीधे समानुपातिक होती है। ### गणितीय व्यंजक\nयदि विलयन में गैस का मोल अंश $x$ है और विलयन पर गैस का आंशिक दाब $p$ है, तो हेनरी के नियम के अनुसार: $$p = K_H \cdot x$$\nजहाँ $K_H$ हेनरी का नियम स्थिरांक है। समान तापमान पर विभिन्न गैसों के $K_H$ मान अलग-अलग होते हैं, जो यह दर्शाता है कि $K_H$ गैस की प्रकृति का फलन है। ### हेनरी के नियम के महत्वपूर्ण अनुप्रयोग 1. **कार्बोनेटेड पेय पदार्थों का उत्पादन:** शीतल पेय और सोडा वाटर में $CO_2$ की विलेयता बढ़ाने के लिए बोतलों को उच्च दबाव में सील किया जाता है। जब बोतल खोली जाती है, तो आंशिक दबाव कम हो जाता है, जिससे $CO_2$ के बुलबुले बाहर निकलते हैं। 2. **स्कूबा डाइविंग (गहरे समुद्र में गोताखोरी):** गोताखोर समुद्र में गहराई पर संपीड़ित हवा में सांस लेते हैं। पानी के नीचे उच्च दबाव के कारण, रक्त में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसी वायुमंडलीय गैसों की विलेयता काफी बढ़ जाती है। जब गोताखोर सतह पर आता है, तो दबाव तेजी से कम होता है, जिससे घुली हुई नाइट्रोजन गैस रक्त में बुलबुले बनाती है, जिससे 'बेंड्स' नामक दर्दनाक और खतरनाक चिकित्सीय स्थिति पैदा होती है। इससे बचने के लिए, टैंकों को हीलियम, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के मिश्रण से भरा जाता है। 3. **अधिक ऊंचाइयों पर:** अधिक ऊंचाइयों पर, समुद्र तल की तुलना में ऑक्सीजन का आंशिक दबाव कम होता है। इससे वहां रहने वाले लोगों या पर्वतारोहियों के रक्त और ऊतकों में ऑक्सीजन की सांद्रता कम हो जाती है, जिससे एनोक्सिया नामक चिकित्सीय स्थिति पैदा होती है, जहाँ पर्वतारोही कमजोर हो जाते हैं और स्पष्ट रूप से सोचने में असमर्थ हो जाते हैं। ### हेनरी के नियम की सीमाएँ\nहेनरी का नियम केवल कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में ही मान्य है: - गैस का दबाव बहुत अधिक नहीं होना चाहिए। - तापमान बहुत कम नहीं होना चाहिए। - गैस विलायक में किसी भी रासायनिक संयोजन या पृथक्करण से नहीं गुजरती है।
Q14. 100 ग्राम जल में 0.5 ग्राम NaCl घुले हुए विलयन के हिमांक अवनमन की गणना कीजिए। (दिया गया है: जल के लिए मोलल अवनमन स्थिरांक $K_f = 1.86 \text{ K kg mol}^{-1}$, Na का परमाणु द्रव्यमान = 23, Cl = 35.5 u) 3 Marks
उत्तर (Answer): NaCl विलयन के हिमांक अवनमन की गणना के लिए हम वियोजन से संबंधित अणुसंख्यक गुणधर्म के सूत्र का उपयोग करते हैं: $\Delta T_f = i \cdot K_f \cdot m$ **चरण 1: NaCl का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करना** - NaCl का मोलर द्रव्यमान = Na का परमाणु द्रव्यमान + Cl का परमाणु द्रव्यमान - मोलर द्रव्यमान = $23 + 35.5 = 58.5 \text{ g mol}^{-1}$ **चरण 2: विलयन की मोललता ($m$) की गणना करना** - विलेय (NaCl) का दिया गया द्रव्यमान = $0.5 \text{ g}$ - विलायक (जल) का दिया गया द्रव्यमान = $100 \text{ g} = 0.1 \text{ kg}$ - NaCl के मोलों की संख्या = $\frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{मोलर द्रव्यमान}} = \frac{0.5}{58.5} = 0.00855 \text{ mol}$ - मोललता ($m$) = $\frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलायक का द्रव्यमान (kg में)}} = \frac{0.00855 \text{ mol}}{0.1 \text{ kg}} = 0.0855 \text{ mol kg}^{-1}$ **चरण 3: NaCl के लिए वांट हॉफ गुणांक ($i$) निर्धारित करना** - जल में NaCl पूरी तरह से वियोजित होता है: $\text{NaCl} \rightarrow \text{Na}^+ + \text{Cl}^-$ - इसलिए, वियोजन के बाद कणों की संख्या $n = 2$ है। - पूर्ण वियोजन मानते हुए, वांट हॉफ गुणांक $i = 2$ होगा। **चरण 4: हिमांक अवनमन ($\Delta T_f$) की गणना करना** - $\Delta T_f = 2 \times 1.86 \text{ K kg mol}^{-1} \times 0.0855 \text{ mol kg}^{-1}$ - $\Delta T_f = 3.72 \times 0.0855 = 0.318 \text{ K}$ \nअतः, विलयन का हिमांक अवनमन **$0.318 \text{ K}$** (या $^\circ\text{C}$) है।
Q15. एक उपयुक्त उदाहरण के साथ असामान्य मोलर द्रव्यमान की अवधारणा को समझाइए और वांट हॉफ गुणांक को परिभाषित कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): असामान्य मोलर द्रव्यमान उस स्थिति को संदर्भित करता है जहाँ किसी भी अणुसंख्यक गुण (जैसे वाष्प दाब का अवनमन, क्वथनांक का उन्नयन, हिमांक का अवनमन, या परासरण दाब) को मापकर प्राप्त विलेय का प्रयोगात्मक रूप से निर्धारित मोलर द्रव्यमान, सैद्धांतिक रूप से गणना किए गए सामान्य आणविक द्रव्यमान से काफी भिन्न होता है। यह असामान्यता विलयन में विलेय अणुओं के संघनन (संघटन) या वियोजन के कारण उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिए, जब एथेनोइक अम्ल (एसिटिक अम्ल) को बेंजीन में घोला जाता है, तो अणु हाइड्रोजन बंडिंग के माध्यम से एक द्वितक (dimer) बनाने के लिए अंतर-आणविक संघनन से गुजरते हैं, जिससे विलयन में कणों की संख्या प्रभावी रूप से आधी हो जाती है और इस प्रकार देखा गया मोलर द्रव्यमान दोगुना हो जाता है। इसके विपरीत, जब सोडियम क्लोराइड या कोई भी प्रबल वैद्युत अपघट्य जल में घोला जाता है, तो यह घटक आयनों ($Na^+$ और $Cl^-$) में वियोजित हो जाता है, जिससे कणों की संख्या दोगुनी हो जाती है और देखा गया मोलर द्रव्यमान आधा हो जाता है। संघनन या वियोजन की इस सीमा को ध्यान में रखने के लिए, जैकबस हेनरिकस वांट हॉफ ने एक संशोधन कारक पेश किया जिसे वांट हॉफ गुणांक ($i$) कहा जाता है। इसे विलेय के सामान्य मोलर द्रव्यमान और असामान्य मोलर द्रव्यमान के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है, या इसके समतुल्य, संघनन/वियोजन के बाद कणों के मोलों की कुल संख्या और संघनन/वियोजन से पहले कणों के मोलों की कुल संख्या के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।