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कक्षा: 12वीं (Chemistry)
अध्याय: एमीन (Amines)
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### परिचय एवं वर्गीकरण (Introduction and Classification)
- एमीन अमोनिया (
NH_3) के एल्किल या एरिल व्युत्पन्न (Derivatives) माने जाते हैं। हाइड्रोजन परमाणुओं के एल्किल या एरिल समूह द्वारा प्रतिस्थापन के आधार पर इन्हें वर्गीकृत किया जाता है:
1. प्राथमिक एमीन (1^\circ): R-NH_2 (एक एल्किल समूह जुड़ा होता है)
2. द्वितीयक एमीन (2^\circ): R_2NH (दो एल्किल समूह जुड़े होते हैं)
3. तृतीयेक एमीन (3^\circ): R_3N (तीन एल्किल समूह जुड़े होते हैं)
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### नामकरण (Nomenclature)
- सामान्य पद्धति: एल्किल समूह के नाम के अंत में 'एमीन' जोड़ा जाता है (जैसे- ऐथिलएमीन)।
- IUPAC पद्धति:
- प्राथमिक एमीन: एल्केन + एमीन = एल्केनेमीन (जैसे- एथेनेमीन)।
- द्वितीयक/तृतीयेक एमीन (N-प्रतिस्थापित): बड़े एल्किल समूह को मुख्य श्रृंखला मानते हैं और छोटे समूहों के आगे 'N' लगाते हैं (जैसे- N-मेथिलएथेनेमीन)।
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### बनाने की प्रमुख विधियाँ (Methods of Preparation)
1. नाइट्रो यौगिकों का अपचयन (Reduction of Nitro Compounds):
R-NO2 + 6H \xrightarrow{Sn/HCl \text{ या } Ni/H2} R-NH2 + 2H2O
2. अमोनिया अपघटन (Ammonolysis of Alkyl Halides):
R-X + NH3 \rightarrow R-NH2 + HX
- (यह अभिक्रिया प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयेक एमीनों का मिश्रण देती है)।
3. गैब्रियल थैमाइड संश्लेषण (Gabriel Phthalimide Synthesis):
- इसका उपयोग केवल प्राथमिक ऐरिफ़ैटिक एमीन बनाने के लिए किया जाता है। इसमें थैमाइड को एथेनॉल में पोटैशियम हाइड्रोक्साइड के साथ गर्म करके पोटैशियम थैमाइड बनाते हैं, जिसकी क्रिया एल्किल हैलाइड से होती है।
4. हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया (Hofmann Bromamide Degradation):
- जब किसी एमाइड (
R-CONH2) की क्रिया ब्रोमीन (Br2) और कास्टिक सोडा (NaOH) के साथ की जाती है, तो एक कार्बन परमाणु कम वाला प्राथमिक एमीन बनता है।
R-CONH2 + Br2 + 4NaOH \rightarrow R-NH2 + Na2CO3 + 2NaBr + 2H2O
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### भौतिक गुण (Physical Properties)
- विलयशीलता: निम्नतर ऐलिफ़ैटिक एमीन जल के साथ हाइड्रोजन आबंध बनाते हैं अतः जल में घुलनशील होते हैं। मोलर द्रव्यमान बढ़ने पर विलेयता घटती है।
- क्वथनांक (Boiling Point): प्राथमिक और द्वितीयक एमीनों के अणु आपस में अंतःणुक हाइड्रोजन आबंध बनाते हैं, जिससे इनके क्वथनांक समतुल्य द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बन से अधिक लेकिन एल्कोहल से कम होते हैं।
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### रासायनिक गुण (Chemical Properties)
1. क्षारीय प्रकृति (Basic Character):
- एमीन नाइट्रोजन परमाणु पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair) के कारण लुईस क्षार की तरह कार्य करते हैं।
- क्षारकता का क्रम (जलीय विलयन में):
- मेथिल समूह के लिए:
2^\circ > 1^\circ > 3^\circ ((CH3)2NH > CH3NH2 > (CH3)3N)
- एथिल समूह के लिए:
2^\circ > 3^\circ > 1^\circ ((C2H5)2NH > (C2H5)3N > C2H5NH_2)
2. कार्बिलामीन अभिक्रिया (Carbylamine Reaction):
- प्राथमिक एमीन (
1^\circ) को क्लोरोफॉर्म (CHCl_3) और एल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म करने पर दुर्गंधयुक्त आइसोसाइनाइड (कार्बिलामीन) बनते हैं।
R-NH2 + CHCl3 + 3KOH \xrightarrow{\Delta} R-NC + 3KCl + 3H_2O
- (नोट: यह अभिक्रिया केवल प्राथमिक एमीनों की पहचान के लिए उपयोग की जाती है।)
3. नाइट्रस अम्ल के साथ क्रिया (HNO_2):
- प्राथमिक ऐलिफ़ैटिक एमीन
HNO_2 के साथ डाइऐजोनियम लवण बनाते हैं जो तुरंत अपघटित होकर ऐल्कोहॉल देते हैं।
- प्राथमिक ऐरोमैटिक एमीन (
C6H5NH_2) कम तापमान (0-5^\circ C) पर बेंजीन डाइऐजोनियम क्लोराइड बनाते हैं (डाइऐजोटिकरण)।
4. हेंसबर्ग अभिकर्मक के साथ क्रिया (Hinsberg's Test):
- बेंजीन सल्फोनिल क्लोराइड (
C6H5SO_2Cl) को हेंसबर्ग अभिकर्मक कहते हैं। इसका उपयोग प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयेक एमीनों में विभेद करने के लिए किया जाता है।
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### ऐरोमैटिक एमीन: एनिलीन (C6H5NH_2)
- बनाने की विधि: नाइट्रोबेंजीन का टिन (
Sn) और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) द्वारा अपचयन करके।
- ब्रॉमीनीकरण (Bromination):
- एनिलीन की क्रिया जल में घुली ब्रोमीन (
Br2/H2O) से कराने पर तुरंत 2,4,6-ट्राइब्रोमोएनिलीन का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है।
- नाइट्रेशन (Nitration):
- सीधे नाइट्रीकरण में ऑक्सीकरण के कारण उप-उत्पाद बनते हैं, इसलिए ऐमीनो समूह का एसिटिलीकरण करके सुरक्षा की जाती है।
- सल्फोनीकरण (Sulphonation):
- एनिलीन सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ क्रिया करके zwitter ion (उभयविद्युत आयन) के रूप में सैनिक अम्ल (Sulfanilic acid) बनाता है।
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### डाइऐजोनियम लवण (Diazonium Salts)
- सामान्य सूत्र:
Ar-N2^+ X^- (जहाँ X^- = Cl^-, HSO4^-, आदि)
- महत्वपूर्ण अभिक्रियाएँ:
1. सैंडमेयर अभिक्रिया (Sandmeyer Reaction):
Ar-N2^+ X^- \xrightarrow{Cu2Cl2 / HCl} Ar-Cl + N2 (इसी प्रकार Cu2Br2/HBr से ब्रोमोबेंजीन और CuCN/KCN से साइनोबेंजीन बनता है)।
2. गाटरमान अभिक्रिया (Gattermann Reaction):
Ar-N2^+ X^- \xrightarrow{Cu/HCl} Ar-Cl + N2 + HX
3. युग्मन अभिक्रियाएँ (Coupling Reactions):
- फीनॉल या एनिलीन के साथ क्षारीय माध्यम में क्रिया करके रंगीन ऐरोमैटिक एजो यौगिक बनाते हैं (डाई निर्माण)।
C6H5N2^+Cl^- + C6H5OH \xrightarrow{OH^-} C6H5-N=N-C6H_4-OH (पीला-नारंगी रंजक)
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 एमीन (Amines)
परिचय और संरचना
एमीन का अर्थ (अमोनिया के एल्किल या एरिल व्युत्पन्न)
वर्गीकरण
प्राथमिक (1°) एमीन
द्वितीयक (2°) एमीन
तृतीयक (3°) एमीन
संरचना (पाइरमिडल ज्यामिति, नाइट्रोजन पर एकाकी युग्म)
नामकरण (Nomenclature)
सामान्य पद्धति (एल्किल एमीन)
IUPAC पद्धति (एल्केनामाइन)
विरचन की विधियाँ (Preparation Methods)
नाइट्रो यौगिकों का अपचयन
अमोनिया का ऐल्किليकरण (हॉफमैन अमोनिया अपघटन)
ऐल्किल साइनाइडों का अपचयन
एमाइडों का अपचयन
गैब्रियल थैमाइड संश्लेषण
हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया
भौतिक गुण (Physical Properties)
अवस्था और गंध
क्वथनांक (हाइड्रोजन बंध की उपस्थिति)
विलेयता (जल में)
रासायनिक गुण (Chemical Properties)
क्षारीय प्रकृति (Basicity)
एमीन की क्षारीय प्रबलता
ऐलिफैथैटिक और एरोमैटिक एमीनों की तुलना
ऐल्किलीकरण और एसिलीकरण
कार्बिलएमीन अभिक्रिया (प्राइमरी एमीन का परीक्षण)
नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया
एरिल सल्फोनिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया (हिंसबर्ग अभिकर्मक)
बेंजीन वलय पर इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन (एनिलीन के लिए)
ब्रोमीनन
नाइट्रेशन
सल्फोनीकरण
डाइएजोनियम लवण (Diazonium Salts)
विरचन (डाइएजोटीकरण)
भौतिक गुण
रासायनिक अभिक्रियाएँ
प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (सेंडमेयर अभिक्रिया, गाटरमान अभिक्रिया)
युग्मन अभिक्रियाएँ (Coupling Reactions)
संश्लेषणात्मक महत्व (विभिन्न यौगिकों के निर्माण में उपयोग)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### जलीय अवस्था में ऐमीनों की क्षारीय प्रबलता\nऐमीन नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों के एक एकाकी युग्म (lone pair) की उपस्थिति के कारण लेविस क्षारक के रूप में कार्य करते हैं। गैसीय अवस्था में, ऐलिफैटिक ऐमीनों की क्षारीय प्रबलता ऐल्किल समूहों की संख्या में वृद्धि के साथ बढ़ती है, जिसका कारण ऐल्किल समूहों का इलेक्ट्रॉन-दाता प्रेरक प्रभाव (+I प्रभाव) है। हालाँकि, जलीय अवस्था में, क्षारीय प्रबलता मुख्य रूप से तीन कारकों पर निर्भर करती है:
1. **प्रेरक प्रभाव (+I प्रभाव):** ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन दान करते हैं, जिससे नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है और इस प्रकार क्षारकता बढ़ती है।
2. **विहीनीकरण/विलायकीकरण प्रभाव (Solvation Effect):** प्रोटॉनीकृत ऐमीन जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बनाते हैं। जलयोजन (विलायकीकरण) के माध्यम से अधिक स्थिरीकरण क्षारीय प्रबलता को बढ़ाता है। छोटे धनायन अधिक जलयोजित होते हैं।
3. **त्रिविम बाधा (Steric Hindrance):** भारी ऐल्किल समूह प्रोटॉनीकृत ऐमीन के पास पहुँचने और उसके जलयोजन में बाधा डालते हैं, जिससे क्षारकता कम हो जाती है।
\nइन कारकों को मिलाने पर, जलीय विलयन में मेथिल-प्रतिस्थापित ऐमीनों की क्षारकता का क्रम इस प्रकार है:
$(\text{CH}_3)_2\text{NH} > \text{CH}_3\text{NH}_2 > (\text{CH}_3)_3\text{N}$\nएथिल-प्रतिस्थापित ऐमीनों के लिए क्रम है:
$(\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} > (\text{C}_2\text{H}_5)_3\text{N} > \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2$
### ऐरोमैटिक ऐमीनों की क्षारकता\nऐनिलीन जैसे ऐरोमैटिक ऐमीन अमोनिया और ऐलिफैटिक ऐमीनों की तुलना में बहुत दुर्बल क्षारक होते हैं। इसका कारण यह है कि:
- ऐनिलीन में, नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों का एकाकी युग्म अनुनाद (resonance) के माध्यम से बेंजीन वलय पर विस्थानीयकृत (delocalized) हो जाता है।
- परिणामस्वरूप, नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है, जिससे यह प्रोटॉनीकृत होने के लिए कम उपलब्ध होता है।
- इसके अलावा, ऐलिफैटिक प्रणालियों की तुलना में अनुनाद बाधाओं के कारण प्रोटॉन स्वीकार करने के बाद बनने वाला ऐनिलिनियम आयन उदासीन ऐनिलीन की तुलना में कम स्थायी होता है।
### बेन्जीनडाइएजोनियम क्लोराइड की रासायनिक अभिक्रियाएँ
**(i) $\text{H}_3\text{PO}_2$ (हाइपोफॉस्फोरस अम्ल) के साथ अभिक्रिया:**\nबेन्जीनडाइएजोनियम क्लोराइड कॉपर उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइपोफॉस्फोरस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके डाइजोनियम समूह के अपचयन के साथ बेंजीन बनाता है।
$$\text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{Cl}^- + \text{H}_3\text{PO}_2 + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{Cu}^+} \text{C}_6\text{H}_6 + \text{N}_2 + \text{H}_3\text{PO}_3 + \text{HCl}$$
**(ii) $\text{CuCN/KCN}$ के साथ अभिक्रिया (सैंडमेयर अभिक्रिया):**\nबेन्जीनडाइएजोनियम क्लोराइड पोटेशियम साइनाइड की उपस्थिति में क्यूप्रस साइनाइड के साथ अभिक्रिया करके बेंजोनाइट्राइल देता है।
$$\text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{Cl}^- + \text{KCN} \xrightarrow{\text{CuCN}} \text{C}_6\text{H}_5\text{CN} + \text{KCl} + \text{N}_2$$
उत्तर (Answer): ### 1. विरचन (डाइएजोटीकरण)\nबेन्जीनडाइएजोनियम क्लोराइड का निर्माण एनिलीन की नाइट्रस अम्ल (सोडियम नाइट्राइट और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से इन-सिटू निर्मित) के साथ 0-5°C (273-278 K) के कम ताप पर अभिक्रिया द्वारा किया जाता है।
$$C_6H_5NH_2 + NaNO_2 + 2HCl \xrightarrow{273-278 K} C_6H_5N_2^+Cl^- + NaCl + 2H_2O$$
### 2. भौतिक गुण
* यह एक रंगहीन क्रिस्टलीय ठोस है।
* यह जल में आसानी से घुलनशील है और ठंडी स्थिति में स्थिर रहता है।
* यह शुष्क अवस्था में आसानी से विघटित हो जाता है और गर्म करने पर विस्फोट कर सकता है।
### 3. रासायनिक गुण और संश्लेषणात्मक अनुप्रयोग\nडाइएजो समूह ($-N_2^+$) के विस्थापन की सुगमता के कारण यह कार्बनिक संश्लेषण में एक अत्यंत उपयोगी मध्यवर्ती है।
* **सैंडमेयर अभिक्रिया:** क्यूप्रस हलाइड या क्यूप्रस साइनाइड की उपस्थिति में $-Cl$, $-Br$ या $-CN$ समूह द्वारा डाइएजो समूह का प्रतिस्थापन।
* **गाटरमान अभिक्रिया:** सैंडमेयर के समान, लेकिन इसमें संबंधित अम्ल की उपस्थिति में तांबे के चूर्ण ($Cu$) का उपयोग किया जाता है।
* **आयोडीन और फ्लोरीन द्वारा प्रतिस्थापन:** पोटैशियम आयोडाइड के साथ उपचारित करने पर आयोडोबेंजीन प्राप्त होता है।
* **युग्मन अभिक्रियाएँ (Coupling Reactions):** बेन्जीनडाइएजोनियम क्लोराइड फिनॉल और एनिलीन जैसे इलेक्ट्रॉन-समृद्ध एरोमैटिक यौगिकों के साथ अभिक्रिया करके चमकीले रंग के एजो रंजक बनाता है। उदाहरण के लिए, क्षारीय माध्यम में फिनॉल के साथ युग्मन पर p-हाइड्रॉक्सीएजोबेंजीन (संतरी रंजक) प्राप्त होता है।
उत्तर (Answer): ### हिंसबर्ग परीक्षण का परिचय\nबेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड ($C_6H_5SO_2Cl$), जिसे हिंसबर्ग अभिकर्मक भी कहा जाता है, प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक एमीनों के साथ अभिक्रिया करके ऐसे उत्पाद बनाता है जिनकी क्षार में विलेयता भिन्न होती है।
### प्राथमिक एमीन के साथ अभिक्रिया\nप्राथमिक एमीन हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करके N-ऐल्किलबेन्जीन सल्फोनेमाइड बनाते हैं। इस सल्फोनेमाइड में नाइट्रोजन से जुड़ा हाइड्रोजन परमाणु सल्फोनिल समूह के प्रभाव के कारण अत्यधिक अम्लीय होता है, जिसके कारण यह जलीय क्षार ($NaOH$) में विलीन होकर घुलनशील लवण बनाता है।
### द्वितीयक एमीन के साथ अभिक्रिया\nद्वितीयक एमीन बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड के साथ N,N-डाइएल्किलबेन्जीन सल्फोनेमाइड बनाते हैं। इस उत्पाद में नाइट्रोजन पर कोई हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता है, इसलिए यह जलीय क्षार ($NaOH$) में अघुलनशील होता है।
### तृतीयक एमीन के साथ अभिक्रिया\nतृतीयक एमीनों में नाइट्रोजन परमाणु पर कोई प्रतिस्थाप्य हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता है, इसलिए वे हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।
### निष्कर्ष
* **प्राथमिक एमीन:** ऐसा सल्फोनेमाइड बनाता है जो क्षार में घुलनशील होता है।
* **द्वितीयक एमीन:** ऐसा सल्फोनेमाइड बनाता है जो क्षार में अघुलनशील होता है।
* **तृतीयक एमीन:** हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया नहीं करता है।
उत्तर (Answer): ### 1. नाइट्रो यौगिकों का अपचयन\nनिकल, पैलेडियम या प्लेटिनम की उपस्थिति में हाइड्रोजन प्रवाहित करके या अम्लीय माध्यम में धातुओं द्वारा नाइट्रो यौगिकों का अपचयन करके एमीन बनाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, नाइट्रोबेन्जीन को लोहे की छीलन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अपचयित करने पर एनिलीन प्राप्त होता है।
$$C_6H_5NO_2 + 3H_2 \xrightarrow{Ni/Pt} C_6H_5NH_2 + 2H_2O$$
### 2. नाइट्राइल और एमाइड का अपचयन\nनाइट्राइल उत्प्रेरकी हाइड्रोजननीकरण द्वारा या सोडियम अमलगम और अल्कोहल अथवा लिथियम एल्युमिनियम हाइड्राइड ($LiAlH_4$) द्वारा अपचयन पर प्राथमिक एमीन बनाते हैं।
### 3. गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण\nइस विधि का उपयोग प्राथमिक ऐलिफैटिक एमीनों के निर्माण के लिए किया जाता है। थैलिमाइड को एथेनॉलियक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ उपचारित करने पर पोटैशियम थैलिमाइड बनता है, जिसे ऐल्किल हैलाइड के साथ गर्म करने और तत्पश्चात क्षारीय जलअपघटन करने पर प्राथमिक एमीन प्राप्त होता है।
### 4. जलीय माध्यम में एमीनों का क्षारीय गुण\nनाइट्रोजन परमाणु पर एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण एमीन क्षारीय होते हैं। गैसीय अवस्था में क्षारीय सामर्थ्य $+I$ प्रभाव पर निर्भर करती है। जलीय माध्यम में यह तीन कारकों द्वारा निर्धारित होती है:
* **प्रेरणिक प्रभाव ($+I$ प्रभाव):** इलेक्ट्रॉन दाता ऐल्किल समूह नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं।
* **विलायक योजन प्रभाव:** जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध द्वारा अमोनियम धनायन का स्थिरीकरण।
* **त्रिविम बाधा:** भारी ऐल्किल समूह विलायक योजन में बाधा डालते हैं।
\nइन प्रभावों के संयुक्त परिणाम के अनुसार जलीय विलयन में मेथिल और एथिल एमीनों की क्षारीयता का क्रम इस प्रकार है:\nमेथिल एमीन: $(CH_3)_2NH > CH_3NH_2 > (CH_3)_3N$\nएथिल एमीन: $(C_2H_5)_2NH > (C_2H_5)_3N > C_2H_5NH_2$
उत्तर (Answer): ### एमीनों में महत्वपूर्ण नाम अभिक्रियाएँ
#### 1. गेब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण\nगेब्रियल संश्लेषण का उपयोग **शुद्ध प्राथमिक एलिफैटिक एमीन** के निर्माण के लिए किया जाता है। थैलिमाइड एथेनॉलियक पोटेशियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रिया करके पोटेशियम थैलिमाइड बनाता है। यह उपयुक्त ऐल्किल हैलाइड के साथ गर्म करने पर $N$-ऐल्किलथैलिमाइड देता है, जिसका सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ जलअपघटन करने पर संगत प्राथमिक एमीन प्राप्त होता है।
* *सीमा:* इस विधि द्वारा एरोमैटिक प्राथमिक एमीन नहीं बनाए जा सकते हैं क्योंकि एरिल हैलाइड न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन से नहीं गुजरते हैं।
#### 2. हॉफमैन ब्रोमामाइड डिग्रेडेशन अभिक्रिया\nयह एमाइड से **एक कार्बन परमाणु कम वाले प्राथमिक एमीन** को तैयार करने की विधि है। जब एक एमाइड को ब्रोमीन और सोडियम हाइड्रोक्साइड के जलीय विलयन के साथ उपचारित किया जाता है, तो यह प्राथमिक एमीन बनाने के लिए निम्नीकृत होता है।
* *समीकरण:*
$$\text{R-CONH}_2 + \text{Br}_2 + 4\text{NaOH} \rightarrow \text{R-NH}_2 + \text{Na}_2\text{CO}_3 + 2\text{NaBr} + 2\text{H}_2\text{O}$$
#### 3. कार्बिलएमीन परीक्षण (आइसोसाइनाइड परीक्षण)\nप्राथमिक एमीन (एलिफैटिक और एरोमैटिक दोनों) जब क्लोरोफॉर्म और एल्कोहॉलिक पोटेशियम हाइड्रोक्साइड के साथ गर्म किए जाते हैं, तो **आइसोसाइनाइड (कार्बिलएमीन)** बनाते हैं, जिनकी अत्यधिक दुर्गंध होती है। द्वितीयक और तृतीयक एमीन यह परीक्षण नहीं देते हैं।
* *समीकरण:*
$$\text{R-NH}_2 + \text{CHCl}_3 + 3\text{KOH} \xrightarrow{\Delta} \text{R-NC} + 3\text{KCl} + 3\text{H}_2\text{O}$$
उत्तर (Answer): ### जलीय विलयन में एमीनों की क्षारीय सामर्थ्य
\nएमीन लुईस क्षारक के रूप में कार्य करते हैं क्योंकि उनके नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों का एक एकांकी युग्म होता है। जलीय विलयन में एमीनों की क्षारीय सामर्थ्य उस आसानी से निर्धारित होती है जिसके साथ वे प्रोटॉन ग्रहण करते हैं।
#### 1. एलिफैटिक एमीन बनाम अमोनिया की क्षारीयता\nएलिफैटिक एमीन अमोनिया की तुलना में अधिक प्रबल क्षारक होते हैं। यह ऐल्किल समूहों के इलेक्ट्रॉन-प्रदाता प्रेरणिक प्रभाव ($+I$ प्रभाव) के कारण होता है, जो नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ाता है।
#### 2. जलीय माध्यम में क्षारीयता को नियंत्रित करने वाले कारक
* **प्रेरणिक प्रभाव ($+I$ प्रभाव):** अधिक ऐल्किल समूह नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं ($3^\circ > 2^\circ > 1^\circ$)।
* **जलयोजन प्रभाव:** प्रोटॉन ग्रहण करने के बाद बने अमोनियम धनायन पानी के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबंध द्वारा स्थिर होते हैं। जलयोजन का क्रम: $1^\circ > 2^\circ > 3^\circ$ होता है।
* **त्रिविम बाधा:** बड़े ऐल्किल समूह प्रोटॉन के अभिगमन में बाधा डालते हैं।
#### 3. क्षारीयता का संयुक्त क्रम\nइन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, जलीय माध्यम में क्षारीयता का प्रायोगिक क्रम निम्नलिखित है:
* **मेथिल-प्रतिस्थापित एमीन:** द्वितीयक ($2^\circ$) > प्राथमिक ($1^\circ$) > तृतीयक ($3^\circ$)
* **एथिल-प्रतिस्थापित एमीन:** द्वितीयक ($2^\circ$) > तृतीयक ($3^\circ$) > प्राथमिक ($1^\circ$)
उत्तर (Answer): ### प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक एमीन में विभेद
\nप्राथमिक ($1^\circ$), द्वितीयक ($2^\circ$) और तृतीयक ($3^\circ$) एमीनों में विभिन्न रासायनिक परीक्षणों द्वारा अंतर किया जा सकता है। सबसे प्रमुख विधियाँ हिंसबर्ग परीक्षण और नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया हैं।
#### 1. हिंसबर्ग परीक्षण (बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड परीक्षण)\nबेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड ($\text{C}_6\text{H}_5\text{SO}_2\text{Cl}$), जिसे हिंसबर्ग अभिकर्मक भी कहा जाता है, $1^\circ$, $2^\circ$ और $3^\circ$ एमीनों के साथ अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया करता है:
* **प्राथमिक एमीन:** प्राथमिक एमीन बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करके $N$-ऐल्किलबेंजीनसल्फोनैमाइड बनाते हैं। इस सल्फोनेमाइड में नाइट्रोजन से जुड़ा हाइड्रोजन परमाणु इलेक्ट्रॉन-आकर्षक सल्फोनिल समूह के कारण प्रबल अम्लीय होता है। इसलिए, यह उत्पाद क्षार (जैसे $\text{NaOH}$) में विलीन होकर एक स्पष्ट विलयन बनाता है।
* **द्वितीयक एमीन:** द्वितीयक एमीन अभिक्रिया करके $N,N$-डाइएल्किलबेंजीनसल्फोनैमाइड बनाते हैं। चूँकि इस उत्पाद में नाइट्रोजन परमाणु से कोई हाइड्रोजन परमाणु जुड़ा नहीं होता है, यह क्षार में अघुलनशील होता है।
* **तृतीयक एमीन:** तृतीयक एमीन बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं, क्योंकि नाइट्रोजन पर कोई प्रतिस्थापनीय हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता है।
#### 2. नाइट्रस अम्ल ($\text{HNO}_2$) के साथ अभिक्रिया\nसोडियम नाइट्रेट और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से $0-5^\circ\text{C}$ पर इन-सिटू तैयार नाइट्रस अम्ल, तीनों प्रकार के एमीनों के साथ अलग-अलग अभिक्रिया करता है:
* **प्राथमिक एलिफैटिक एमीन:** ये डाइएजोनियम लवण बनाते हैं जो तुरंत विघटित होकर नाइट्रोजन गैस मुक्त करते हैं और ऐल्कोहॉल बनाते हैं।
* **द्वितीयक एमीन:** ये पीले रंग के तैलीय नाइट्रोसोमाइन बनाते हैं जो पानी में अघुलनशील होते हैं।
* **तृतीयक एमीन:** ये नाइट्रोजन पर एकांकी युग्म के कारण लवण बनाकर नाइट्रस अम्ल में घुल जाते हैं।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nहिंसबर्ग का अभिकर्मक, जो बेंजीन सल्फोनिल क्लोराइड ($C_6H_5SO_2Cl$) है, का उपयोग प्रयोगशाला रसायन विज्ञान में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक एलिफैटिक या एरोमैटिक ऐमीनों के बीच अंतर करने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। यह परीक्षण अभिकर्मक के साथ इन ऐमीनों की प्रतिक्रिया पर बनने वाले सल्फोनेमाइड्स की अलग-अलग अम्लता पर निर्भर करता है।
### 1. प्राथमिक ऐमीनों के साथ अभिक्रिया ($1^\circ$ ऐमीन)\nजब कोई प्राथमिक ऐमीन बेंजीन सल्फोनिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह एक न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया से गुजरता है जहां ऐमीन नाइट्रोजन क्लोराइड आयन को विस्थापित करता है, जिससे N-एल्काइलबेंजीनसल्फोनेमाइड बनता है।
- **अभिक्रिया समीकरण:**
$C_6H_5SO_2Cl + H_2N-R \rightarrow C_6H_5SO_2-NH-R + HCl$
- **घुलनशीलता विशेषता:** परिणामी N-एल्काइलबेंजीनसल्फोनेमाइड में नाइट्रोजन परमाणु से जुड़ा एक अत्यधिक अम्लीय हाइड्रोजन परमाणु होता है, जो समीपस्थ मजबूत सल्फोनिल समूह के कारण इलेक्ट्रॉन-आकर्षक होता है। परिणामस्वरूप, यह सल्फोनेमाइड जलीय क्षार ($NaOH$) विलयन में आसानी से घुलनशील होता है, जिससे एक स्पष्ट, घुलनशील सोडियम लवण बनता है ($C_6H_5SO_2-N^-Na^+-R$)।
### 2. द्वितीयक ऐमीनों के साथ अभिक्रिया ($2^\circ$ ऐमीन)\nजब कोई द्वितीयक ऐमीन बेंजीन सल्फोनिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह N,N-डाइएल्काइलबेंजीनसल्फोनेमाइड बनाता है।
- **अभिक्रिया समीकरण:**
$C_6H_5SO_2Cl + HN(R)_2 \rightarrow C_6H_5SO_2-N(R)_2 + HCl$
- **घुलनशीलता विशेषता:** परिणामी N,N-डाइएल्काइलबेंजीनसल्फोनेमाइड में नाइट्रोजन परमाणु से जुड़ा कोई हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता है क्योंकि दोनों संयोजकताएँ एल्काइल समूहों द्वारा संतुष्ट होती हैं। इसलिए, यह अम्लीय हाइड्रोजन से रहित है और जलीय क्षार ($NaOH$) विलयन में पूरी तरह से अघुलनशील है, जो एक अघुलनशील अवशेष या दूसरी परत के रूप में रहता है।
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### 3. तृतीयक ऐमीनों के साथ अभिक्रिया ($3^\circ$ ऐमीन)\nतृतीयक ऐमीनों में नाइट्रोजन परमाणु से जुड़े कोई भी प्रतिस्थापन योग्य हाइड्रोजन परमाणु नहीं होते हैं। इसलिए, वे सल्फोनेमाइड बनाने के लिए बेंजीन सल्फोनिल क्लोराइड के साथ प्रतिक्रिया नहीं करते हैं।
- **अभिक्रिया समीकरण:**
$C_6H_5SO_2Cl + N(R)_3 \rightarrow \text{कोई अभिक्रिया नहीं}$
- **घुलनशीलता विशेषता:** चूंकि कोई अभिक्रिया नहीं होती है, इसलिए तृतीयक ऐमीन अभिकर्मक मिश्रण में अघुलनशील रहता है, लेकिन पानी में घुलनशील चतुर्धातुक अमोनियम लवण के निर्माण के कारण तनु हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाने पर यह आसानी से घुल जाता है।
### हिंसबर्ग परीक्षण का सारांश
- **$1^\circ$ ऐमीन:** सल्फोनेमाइड बनाता है $\rightarrow$ $NaOH$ में घुलनशील।
- **$2^\circ$ ऐमीन:** सल्फोनेमाइड बनाता है $\rightarrow$ $NaOH$ में अघुलनशील।
- **$3^\circ$ ऐमीन:** हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ कोई अभिक्रिया नहीं $\rightarrow$ क्षार में अघुलनशील, तनु अम्ल में घुलनशील।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nऐमीन नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन के एक असाझा जोड़े की उपस्थिति के कारण कार्बनिक क्षारों के रूप में व्यवहार करते हैं, जो उन्हें एक प्रोटॉन स्वीकार करने की अनुमति देता है। गैसीय चरण में, एलिफैटिक ऐमीनों की क्षारीय शक्ति प्रेरक प्रभाव क्रम का पालन करती है: तृतीयक ($3^\circ$) > द्वितीयक ($2^\circ$) > प्राथमिक ($1^\circ$) > अमोनिया। हालांकि, जलीय विलयन में, तीन अलग-अलग कारकों के परस्पर क्रिया के कारण स्थिति अधिक जटिल हो जाती है।
### जलीय विलयन में क्षारकता को प्रभावित करने वाले कारक
1. **प्रेरक प्रभाव (+I प्रभाव):** एल्काइल समूह इलेक्ट्रॉन-निःसृजक समूह हैं। नाइट्रोजन से जुड़े एल्काइल समूहों की संख्या जितनी अधिक होगी, नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व उतना ही अधिक होगा, जिससे लोन पेयर दान करना आसान हो जाएगा और इस प्रकार क्षारीय शक्ति बढ़ जाएगी। अकेला यह कारक इस क्रम का पक्ष लेता है: $3^\circ > 2^\circ > 1^\circ > NH_3$।
2. **विलायकीकरण प्रभाव (जलयोजन):** प्रोटॉन स्वीकार करने के बाद बनने वाले प्रतिस्थापित अमोनियम धनायन पानी के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंधन द्वारा स्थिर हो जाते हैं। विलायकीकरण के माध्यम से प्रतिस्थापित अमोनियम धनायन की स्थिरता जितनी अधिक होगी, संबंधित ऐमीन उतना ही मजबूत होगा। एल्काइल समूह के आकार में वृद्धि के साथ स्थिरीकरण की सीमा कम हो जाती है: $1^\circ > 2^\circ > 1^\circ > 3^\circ$।
3. **त्रिविम बाधा (स्टेरिक हिंडरेंस):** भारी एल्काइल समूह नाइट्रोजन परमाणु को त्रिविम रूप से भीड़भाड़ देते हैं, जिससे प्रोटॉन के दृष्टिकोण और हमले में बाधा आती है और परिणामी धनायन के प्रभावी विलायकीकरण को भी रोका जाता है। यह त्रिविम बाधा तृतीयक ऐमीनों में अधिकतम और प्राथमिक ऐमीनों में न्यूनतम होती है।
### मिथाइल प्रतिस्थापित ऐमीनों के लिए क्षारकता क्रम\nपानी में मिथाइलऐमीनों के लिए प्रेरक, विलायकीकरण और स्टेरिक प्रभावों को मिलाकर, द्वितीयक ऐमीन सबसे मजबूत क्षार है क्योंकि यह +I प्रभाव और स्टेरिक/विलायकीकरण बाधाओं के बीच एक इष्टतम संतुलन प्राप्त करता है।
- **क्रम:** द्वितीयक ($2^\circ$) > प्राथमिक ($1^\circ$) > तृतीयक ($3^\circ$) > अमोनिया
- विशेष रूप से: $(CH_3)_2NH > CH_3NH_2 > (CH_3)_3N > NH_3$
### एथिल प्रतिस्थापित ऐमीनों के लिए क्षारकता क्रम\nएथिल प्रतिस्थापित ऐमीनों के मामले में, भारी एथिल समूह तृतीयक ऐमीनों में नाइट्रोजन परमाणु के चारों ओर अधिक त्रिविम बाधा पैदा करता है, जो उनके जलयोजन को काफी हद तक प्रभावित करता है।
- **क्रम:** द्वितीयक ($2^\circ$) > तृतीयक ($3^\circ$) > प्राथमिक ($1^\circ$) > अमोनिया
- विशेष रूप से: $(C_2H_5)_2NH > (C_2H_5)_3N > C_2H_5NH_2 > NH_3$\nयह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है कि इलेक्ट्रॉनिक और स्थानिक दोनों कारक जलीय मीडिया में ऐमीनों के वास्तविक क्षारीय व्यवहार को निर्धारित करते हैं।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nप्राथमिक ऐमीन महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें एल्काइल या एरिल समूह से जुड़ा $-NH_2$ समूह होता है। यह कार्बनिक संश्लेषण और औषधीय निर्माण में आधारभूत निर्माण खंड के रूप में कार्य करते हैं। इनके निर्माण के लिए विभिन्न औद्योगिक और प्रयोगशाला विधियाँ उपलब्ध हैं।
### 1. नाइट्रो यौगिकों का अपचयन\nनिकल, पैलेडियम या प्लेटिनम जैसे बारीक विभाजित उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करके या $Fe/HCl$ या $Sn/HCl$ जैसे अम्लीय माध्यम में धातुओं के साथ अपचयन द्वारा नाइट्रोएल्केन और नाइट्रोएरीन को प्राथमिक ऐमीन में अपचयित किया जा सकता है। हाइड्रोक्लोरिक एसिड की तुलना में आयरन को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि अभिक्रिया के दौरान बनने वाला $FeCl_2$ जल अपघटित होकर हाइड्रोक्लोरिक एसिड मुक्त करता है, जिससे प्रक्रिया शुरू करने के लिए केवल थोड़ी मात्रा में एसिड की आवश्यकता होती है।
- **अभिक्रिया:** $R-NO_2 + 3H_2 \xrightarrow{Pd/C} R-NH_2 + 2H_2O$
- **उदाहरण:** $CH_3CH_2-NO_2 + 6[H] \xrightarrow{Sn/HCl} CH_3CH_2-NH_2 + 2H_2O$
### 2. हॉफमैन ब्रोमाइड निम्नीकरण अभिक्रिया\nऑगस्टस विल्हेम वॉन हॉफमैन ने एक ऐसी विधि की खोज की जिसमें एक एमाइड को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के जलीय या एथेनालिक विलयन में ब्रोमीन के साथ उपचारित करके मूल एमाइड की तुलना में एक कार्बन परमाणु कम वाला प्राथमिक ऐमीन प्राप्त किया जाता है। यह निम्नीकरण अभिक्रिया कार्बन श्रृंखला की लंबाई को एक कदम कम करने के लिए अत्यधिक उपयोगी है।
- **सामान्य अभिक्रिया:** $R-CONH_2 + Br_2 + 4NaOH \rightarrow R-NH_2 + Na_2CO_3 + 2NaBr + 2H_2O$
- **मुख्य विशेषता:** एल्काइल या एरिल समूह सीधे एमाइड के कार्बोनिल कार्बन से नाइट्रोजन परमाणु पर स्थानांतरित होता है।
### 3. गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण\nगैब्रियल संश्लेषण का उपयोग विशेष रूप से शुद्ध एलिफैटिक प्राथमिक ऐमीन तैयार करने के लिए किया जाता है। थैलिमाइड को पोटेशियम थैलिमाइड बनाने के लिए एथेनालिक पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ उपचारित किया जाता है, जिसे बाद में N-एल्काइलथैलिमाइड देने के लिए एल्काइल हैलाइड के साथ गर्म किया जाता है। परिणामी N-एल्काइलथैलिमाइड के क्षारीय जल अपघटन से थैलिक एसिड (या थैलेट लवण) के साथ संबंधित प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है।
- **शामिल चरण:**
1. थैलिमाइड + $KOH \rightarrow$ पोटेशियम थैलिमाइड $+ H_2O$
2. पोटेशियम थैलिमाइड $+ R-X \rightarrow$ N-एल्काइलथैलिमाइड $+ KX$
3. N-एल्काइलथैलिमाइड $+ NaOH (aq) \rightarrow$ प्राथमिक ऐमीन + सोडियम थैलेट
- **सीमा:** इस विधि द्वारा एरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन तैयार नहीं किए जा सकते क्योंकि एरिल हैलाइड साधारण प्रयोगशाला स्थितियों के तहत थैलिमाइड द्वारा निर्मित ऋणायन के साथ न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन से नहीं गुजरते हैं।
उत्तर (Answer): हिंसबर्ग अभिकर्मक (बेंजीन सल्फोनिल क्लोराइड, $C_6H_5SO_2Cl$) का उपयोग प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक एमीनों के बीच निम्नलिखित परीक्षणों के माध्यम से विभेद करने के लिए किया जाता है:
1. **प्राथमिक एमीन:** जब प्राथमिक एमीन हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह N-एल्किलबेंजीनसल्फोनैमाइड बनाता है। इस सल्फोनैमाइड में सल्फोनिल समूह के इलेक्ट्रॉन-आकर्षण प्रभाव के कारण नाइट्रोजन से जुड़ा एक प्रबल अम्लीय हाइड्रोजन परमाणु होता है। इसलिए, यह जलीय क्षार (जैसे $NaOH$) में घुलकर एक स्पष्ट विलयन बनाता है।
2. **द्वितीयक एमीन:** जब द्वितीयक एमीन हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह N,N-डाइएल्किलबेंजीनसल्फोनैमाइड बनाता है। इस उत्पाद में नाइट्रोजन परमाणु से जुड़ा कोई भी हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता है। परिणामस्वरूप, यह जलीय क्षार ($NaOH$) में अघुलनशील होता है।
3. **तृतीयक एमीन:** तृतीयक एमीन हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करते हैं क्योंकि उनमें नाइट्रोजन परमाणु पर कोई प्रतिस्थापन योग्य हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता है। इस प्रकार, तृतीयक एमीन प्रतिक्रिया मिश्रण में अघुलनशील रहता है और क्षार मिलाने पर भी नहीं घुलता है।
उत्तर (Answer): मान लीजिए प्राथमिक एलिफैटिक एमीन $R-NH_2$ है। नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया से सामान्य समीकरण के अनुसार प्रति मोल प्राथमिक एमीन पर एक मोल नाइट्रोजन गैस प्राप्त होती है:
$R-NH_2 + HNO_2 \rightarrow R-OH + N_2 \uparrow + H_2O$
\nचरण 1: मुक्त नाइट्रोजन गैस के मोल ज्ञात करना\nSTP पर $N_2$ गैस का आयतन = 448 mL\nSTP पर मोलर आयतन = 22,400 mL
$$N_2 \text{ के मोल} = \frac{\text{STP पर आयतन}}{\text{मोलर आयतन}} = \frac{448 \text{ mL}}{22400 \text{ mL/mol}} = 0.02 \text{ mol}$$
\nचरण 2: एमीन के मोलों का नाइट्रोजन से संबंध\nचूंकि 1 मोल प्राथमिक एमीन 1 मोल $N_2$ गैस देता है, अभिक्रिया करने वाले एमीन के मोल = 0.02 mol।
\nचरण 3: एमीन का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करना
$$\text{एमीन का मोलर द्रव्यमान} = \frac{\text{एमीन का द्रव्यमान}}{\text{एमीन के मोल}} = \frac{1.85 \text{ g}}{0.02 \text{ mol}} = 92.5 \text{ g/mol}$$
\nचरण 4: आणविक सूत्र का निर्धारण\nएमीन का परिकलित मोलर द्रव्यमान 92.5 g/mol है, जो सूत्र $C_5H_{13}N$ या लगभग समीपवर्ती एलिफैटिक एमीन को दर्शाता है।
उत्तर (Answer): एमीनों के क्वथनांक बड़े पैमाने पर उनमें उपस्थित अंतरणुक हाइड्रोजन आबंध की मात्रा पर निर्भर करते हैं। प्राथमिक एमीनों ($R-NH_2$) में विद्युत ऋणात्मक नाइट्रोजन परमाणु से दो हाइड्रोजन परमाणु जुड़े होते हैं। इस कारण से, प्राथमिक एमीन के अणु आपस में व्यापक अंतरणुक हाइड्रोजन आबंध बनाते हैं, जिससे एक संबद्ध पॉलीमेरिक नेटवर्क बनता है।
\nदूसरी ओर, तृतीयक एमीनों ($R_3N$) में नाइट्रोजन परमाणु से कोई भी हाइड्रोजन परमाणु जुड़ा नहीं होता है क्योंकि अमोनिया के तीनों हाइड्रोजन परमाणु एल्किल समूहों द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं। इसलिए, तृतीयक एमीन के अणु आपस में हाइड्रोजन आबंध नहीं बना सकते हैं; उनमें केवल कमजोर द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण और वाण्डर वाल्स बल कार्य करते हैं।
\nइस अंतरणुक हाइड्रोजन आबंध के परिणामस्वरूप, तृतीयक एमीनों की तुलना में प्राथमिक एमीनों के वाष्पीकरण के दौरान इन हाइड्रोजन आबंधों को तोड़ने के लिए अतिरिक्त ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, समान आणविक द्रव्यमान वाले तृतीयक एमीनों की तुलना में प्राथमिक एमीनों के क्वथनांक काफी अधिक होते हैं।
उत्तर (Answer): एनिलीन एक एरोमैटिक प्राथमिक एमीन है, जो नाइट्रोजन परमाणु पर उपस्थित इलेक्ट्रॉनों के एकांकी युग्म (lone pair) के कारण एक लुईस क्षार के रूप में कार्य करता है। फ्रीडेल-क्राफ्ट्स एल्किलीकरण या एसिलीकरण अभिक्रियाओं में, निर्जल एल्युमिनियम क्लोराइड ($AlCl_3$), जो एक प्रबल लुईस अम्ल है, उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त होता है।
\nजब एनिलीन की क्रिया $AlCl_3$ के साथ कराई जाती है, तो एमीन समूह के नाइट्रोजन पर उपस्थित इलेक्ट्रॉनों का युग्म लुईस अम्ल $AlCl_3$ के साथ समन्वय करके एक स्थायी लवण जैसा संकुल बना लेता है:
$C_6H_5NH_2 + AlCl_3 \rightarrow C_6H_5NH_2^+ - AlCl_3^-$
\nइस समन्वय के कारण संकुल के नाइट्रोजन परमाणु पर धनावेश आ जाता है। यह धनावेशित नाइट्रोजन परमाणु एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक प्रेरक प्रभाव (-I प्रभाव) उत्पन्न करता है। परिणामस्वरूप, बेंजीन रिंग अत्यधिक निष्क्रिय हो जाती है, जो फ्रीडेल-क्राफ्ट्स एल्किलीकरण और एसिलीकरण जैसी इलेक्ट्रॉन्सनेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं को पूरी तरह से रोक देती है। इसके अलावा, उत्प्रेरक स्थायी रूप से बंध जाता है, जिससे वह इलेक्ट्रॉन्सनेही उत्पन्न करने के लिए उपलब्ध नहीं रहता।
उत्तर (Answer): एनिलीन ($C_6H_5NH_2$) में नाइट्रोजन का प्रतिशत संगठन निकालने के लिए, सबसे पहले हमें यौगिक का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करना होगा।
\nचरण 1: एनिलीन ($C_6H_5NH_2$) का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करना
- कार्बन परमाणुओं की संख्या = 6, परमाणु द्रव्यमान = 12 u $\rightarrow 6 \times 12 = 72$ u
- हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या = 7 (रिंग में 5 + $NH_2$ में 2), परमाणु द्रव्यमान = 1 u $\rightarrow 7 \times 1 = 7$ u
- नाइट्रोजन परमाणु की संख्या = 1, परमाणु द्रव्यमान = 14 u $\rightarrow 1 \times 14 = 14$ u
\nकुल मोलर द्रव्यमान = $72 + 7 + 14 = 93$ u
\nचरण 2: नाइट्रोजन का द्रव्यमान प्रतिशत ज्ञात करना
$$\text{नाइट्रोजन का प्रतिशत} = \left( \frac{\text{अणु में नाइट्रोजन का द्रव्यमान}}{\text{एनिलीन का मोलर द्रव्यमान}} \right) \times 100$$
$$\text{नाइट्रोजन का प्रतिशत} = \left( \frac{14}{93} \right) \times 100$$
$$\text{नाइट्रोजन का प्रतिशत} = 15.05\%$$
\nअतः एनिलीन में नाइट्रोजन का प्रतिशत संगठन 15.05% है।