कक्षा 12 जीव विज्ञान: जैव विविधता एवं संरक्षण (Biodiversity and Conservation) - त्वरित संशोधन नोट्स
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अध्यायों की मुख्य परिभाषाएँ
1. जैव विविधता (Biodiversity):
पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीवों, पादपों और जंतुओं की प्रजातियों, उनके आनुवंशिक अंतर और उनके पारिस्थितिक तंत्र की कुल विविधता को जैव विविधता कहते हैं। यह शब्द सबसे पहले 'वाल्टर रोज़न' (Walter Rosen) द्वारा 1985 में लोकप्रिय किया गया था।
2. जैव विविधता के स्तर (Levels of Biodiversity):
- आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति के भीतर आनुवंशिक स्तर पर मिलने वाली विविधता (जैसे: भारत में राउपवन्ता वोमिटोरिया द्वारा उत्पादित 'रेज़रपाइन' की सक्रियता और सांद्रता में भिन्नता)।
- जातीय विविधता (Species Diversity): किसी क्षेत्र में प्रजातियों की संख्या और उनकी प्रचुरता में विविधता (जैसे: पश्चिमी घाट की उभयचर जातियों की विविधता पूर्वी घाट से अधिक है)।
- पारिस्थितिकीय विविधता (Ecological Diversity): पारिस्थितिक स्तर पर पाई जाने वाली विविधता (जैसे: भारत में रेगिस्तान, वर्षा वन, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ, आर्द्रभूमि आदि का होना)।
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महत्वपूर्ण आँकड़े (Important Data for MP Board)
- कुल प्रजातियाँ: आई.यू.सी.एन. (IUCN - 2004) के अनुसार, अब तक ज्ञात पौधों और जंतुओं की कुल प्रजातियाँ 1.5 मिलियन से अधिक हैं।
- भारत की स्थिति: भारत दुनिया के 17 मेगा-डाइवर्सिटी (Mega-diversity) देशों में से एक है। विश्व के क्षेत्रफल का केवल 2.4% भाग भारत के पास है, लेकिन वैश्विक जातियों की विविधता का 8.1% हिस्सा भारत में पाया जाता है (यहाँ लगभग 45,000 पौधों की प्रजातियाँ और दोगुनी से अधिक जंतुओं की प्रजातियाँ हैं)।
- अल्बर्ट वॉन हम्बोल्ट (Alexander von Humboldt) का स्पीच-एरिया संबंध (Species-Area Relationship):
- समीकरण:
log S = log C + Z log A
- यहाँ:
S = प्रजाति समृद्धि (Species richness)
A = क्षेत्रफल (Area)
Z = रेखा का ढलान (Slope of the line / Regression coefficient)
C = Y-अन्तरसेप्त (Y-intercept)
- नोट: संपूर्ण विश्व के बड़े क्षेत्रों (जैसे महाद्वीपों) के लिए 'Z' का मान (ढलान) 0.6 से 1.2 के बीच होता है।
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जैव विविधता की क्षति (Loss of Biodiversity)
जैव विविधता का ह्रास होने के मुख्य चार कारण हैं, जिन्हें 'चोर कातिकारी चौकड़ी' (The Evil Quartet) कहा जाता है:
1. आवास क्षति और विखंडन (Habitat Loss and Fragmentation):
यह जातियों के विलुप्त होने का सबसे महत्वपूर्ण कारण है (जैसे: उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों का काटा जाना)। जब विशाल आवास छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं, तो बड़े आकार वाले जानवरों को बहुत नुकसान होता है।
2. अति-दोहन (Over-exploitation):
जब मानव लालच के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन करता है (जैसे: पिछले 500 वर्षों में स्टेलर सी-काऊ और यात्री कबूतर का विलुप्त होना)।
3. विदेशी जातियों का आक्रमण (Alien Species Invasions):
जब बाहरी प्रजातियाँ किसी नए क्षेत्र में अनजाने में या जानबूझकर लाई जाती हैं और वे स्थानीय प्रजातियों के लिए खतरा बन जाती हैं (जैसे: जलकुंभी/आइकोर्निया, नाइल पर्च, और भारत में पार्थेनियम, लैंटाना, अफ्रीकी कैटफ़िश)।
4. सह-विलुप्तीकरण (Co-extinctions):
जब एक प्रजाति विलुप्त होती है, तो उस पर आश्रित दूसरी प्रजाति भी स्वतः विलुप्त हो जाती है (जैसे: परजीवी-पोषक संबंध)।
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जैव विविधता का संरक्षण (Conservation of Biodiversity)
हम जैव विविधता का संरक्षण दो मुख्य तरीकों से करते हैं:
#### 1. स्व-स्थाने संरक्षण (In-situ Conservation / On-site)
इसमें पौधों और जंतुओं का संरक्षण उनके प्राकृतिक आवास में ही किया जाता है।
- राष्ट्रीय उद्यान (National Parks): यहाँ मानवीय गतिविधियों जैसे चराई, वानिकी आदि की अनुमति नहीं होती है (उदाहरण: कॉर्बेट नेशनल पार्क)।
- अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries): यहाँ कुछ मानवीय गतिविधियों (जैसे लकड़ी का संग्रहण, पालतू जानवरों को चराना) की अनुमति होती है।
- जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves): यह विशेष क्षेत्र हैं जो पारंपरिक जीवन को बनाए रखने और अनुसंधान के लिए होते हैं (इसके तीन क्षेत्र होते हैं: कोर जोन, बफर जोन, और संक्रमण क्षेत्र)।
- पवित्र उपवन (Sacred Groves / Ecosystems): भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के कारण बचाए गए वनों के क्षेत्र (जैसे: मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ, राजस्थान की अरावली पहाड़ियाँ)।
#### 2. बाह्य-स्थाने संरक्षण (Ex-situ Conservation / Off-site)
इसमें संकटग्रस्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास से निकालकर विशेष देखरेख वाली जगहों पर संरक्षित किया जाता है।
- उदाहरण:
- प्राणि उद्यान (Zoological Parks)
- वनस्पति उद्यान (Botanical Gardens)
- वन्यजीव सफारी पार्क
- क्रायोप्रिजर्वेशन (Cryopreservation): युग्मकों, ऊतकों और बीजों को तरल नाइट्रोजन (
-196°C) में लंबे समय तक सुरक्षित रखना।
- ऊतक संवर्द्धन (Tissue Culture) और बीज बैंक (Seed Banks)।
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महत्वपूर्ण संधियाँ एवं सम्मेलन (Important Summits)
- पृथ्वी सम्मेलन (The Earth Summit): 1992 में रियो डी जेनेरियो (ब्राजील) में आयोजित हुआ, जिसमें जैव विविधता के संरक्षण और इसके घटकों के सतत उपयोग पर जोर दिया गया।
- विश्व शिखर सम्मेलन (World Summit on Sustainable Development): 2002 में जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में हुआ, जिसमें 190 देशों ने 2010 तक जैव विविधता की हानि की दर में उल्लेखनीय कमी लाने की प्रतिज्ञा ली।