Chapter Chai • Board Revision Guide
HI • MP Board

आनुवंशिकता

Subject: विज्ञान | Class: Class 10 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)

त्वरित पुनરાवृत्ति नोट्स (Quick Revision Notes)

कक्षा: 10वीं विज्ञान

अध्याय: आनुवंशिकी (Heredity)

---


### 1. मुख्य परिभाषाएँ (Key Definitions)


---


### 2. मेंडेल के नियम (Mendel's Laws of Inheritance)

ग्रेगर जॉन मेंडल को आनुवंशिकी का जनक (Father of Genetics) कहा जाता है। उन्होंने मटर के पौधे (Pisum sativum) पर प्रयोग किए।



---


### 3. महत्वपूर्ण संकरण (Important Crosses)



---


### 4. लिंग निर्धारण (Sex Determination in Humans)


---


### 5. मुख्य बिंदु (Key Points to Remember)

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 आनुवंशिकी (Heredity)
Overview
आनुवंशिकी का परिचय आनुवंशिकी की परिभाषा लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरण भिन्नताएँ (Variations) लैंगिक जनन में उत्पन्न होने वाली विविधताएँ जीव की उत्तरजीविता में विविधता का महत्व मैंडेल के योगदान (Gregor Mendel) मटर के पौधे (Pisum sativum) का चयन करने के कारण मैंडेल के प्रयोग एकसंकर संकरण (Monohybrid Cross) फिनोटाइप अनुपात (3:1) जीनोटाइप अनुपात (1:2:1) द्विसंकर संकरण (Dihybrid Cross) फिनोटाइप अनुपात (9:3:3:1) मैंडेल के नियम प्रभाविता का नियम (Law of Dominance) पृथक्करण का नियम (Law of Segregation) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) लक्षण कैसे प्रकट होते हैं? डीएनए (DNA) की भूमिका जीन (Gene) - प्रोटीन संश्लेषण का माध्यम एंजाइम और लक्षणों का नियंत्रण माता-पिता दोनों का आनुवंशिक योगदान लिंग निर्धारण (Sex Determination) मानव में लिंग गुणसूत्र (X और Y गुणसूत्र) पिता की भूमिका (शुक्राणु का प्रकार तय करता है) पर्यावरण द्वारा लिंग निर्धारण के उदाहरण (कुछ सरीसृप)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. द्विसंकर क्रॉस की सहायता से मेंडल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम को समझाइए। बीज के आकार (गोल/झुर्रीदार) और बीज के रंग (पीला/हरा) को दो लक्षणों के रूप में लेते हुए F2 पीढ़ी के लक्षणप्ररूप (फेनोटाइपिक) और जीनप्ररूप (जीनोटाइपिक) अनुपातों को भी निकालिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### स्वतंत्र अपव्यूहन का परिचय\nमेंडल का स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम यह बताता है कि जब दो जोड़े लक्षणों को किसी संकर में संयोजित किया जाता है, तो युग्मक निर्माण के समय लक्षणों के एक जोड़े का पृथक्करण दूसरे जोड़े के लक्षणों से स्वतंत्र होता है। इस नियम को द्विसंकर क्रॉस की सहायता से सबसे अच्छी तरह समझा जा सकता है। ### प्रयोग और लक्षण\nग्रेगर मेंडल ने मटर के पौधों का संकरण कराया जिसमें लक्षणों के दो विपरीत जोड़े शामिल थे: * **बीज का आकार:** गोल (R) झुर्रीदार (r) पर प्रभावी है। * **बीज का रंग:** पीला (Y) हरे (y) पर प्रभावी है। ### क्रॉस का विवरण 1. **जनक पीढ़ी (P):** शुद्ध गोल पीले बीजों (RRYY) का संकरण शुद्ध झुर्रीदार हरे बीजों (rryy) से कराया गया। 2. **प्रथम संतति पीढ़ी (F1):** F1 पीढ़ी के सभी पौधों में गोल पीले बीज थे जिनका जीनप्ररूप RrYy था, जो गोल और पीले लक्षणों की प्रभाविता को दर्शाता है। 3. **F1 का स्व-परागण:** जब F1 पीढ़ी के पौधों (RrYy) का स्व-परागण कराया गया, तो एलील के संयोजनों (RY, Ry, rY, ry) वाले युग्मक स्वतंत्र रूप से बने। ### पुनेट वर्ग और F2 पीढ़ी\nF2 संतति को निर्धारित करने के लिए 16 खानों वाले पुनेट वर्ग का उपयोग किया जाता है: * नर और मादा से युग्मक: RY, Ry, rY, ry। * **लक्षणप्ररूप संयोजन:** - गोल और पीले = 9 - गोल और हरे = 3 - झुर्रीदार और पीले = 3 - झुर्रीदार और हरे = 1 ### लक्षणप्ररूप और जीनप्ररूप अनुपात * **लक्षणप्ररूप अनुपात (Phenotypic Ratio):** 9 : 3 : 3 : 1 * **जीनप्ररूप अनुपात (Genotypic Ratio):** युग्मक उत्पादन के दौरान एलील के स्वतंत्र अपव्यूहन को दर्शाने वाला अधिक जटिल अनुपात 1:2:1:2:4:2:1:2:1 है।
Q2. लंबी और बौनी मटर के पौधों को उदाहरण के रूप में लेते हुए मेंडल के मोनोहाइब्रिड क्रॉस प्रयोग की व्याख्या कीजिए। F1 और F2 पीढ़ियों में फेनोटाइप और जीनोटाइप अनुपात को स्पष्ट रूप से बताइए, और इसके आधार पर पृथक्करण के नियम की व्याख्या कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मोनोहाइब्रिड क्रॉस का परिचय\nमोनोहाइब्रिड क्रॉस दो व्यक्तियों के बीच एक आनुवंशिक क्रॉस है जिसमें रुचि के केवल एक विशिष्ट लक्षण में भिन्नता शामिल होती है। ग्रेगर मेंडल ने पौधे की लंबाई (लंबी बनाम बौनी) जैसे विपरीत पात्रों की वंशागति का अध्ययन करने के लिए मटर के पौधों का उपयोग किया। ### प्रायोगिक सेटअप और चरण 1. **जनक पीढ़ी (P):** मेंडल ने शुद्ध-प्रजनन (समयुग्मजी) लंबे मटर के पौधों (TT) और शुद्ध-प्रजनन बौने मटर के पौधों (tt) का चयन किया। 2. **F1 पीढ़ी:** जब इन शुद्ध जनकों का क्रॉस-परागण किया गया, तो F1 पीढ़ी की सभी संतानें लंबी (Tt) थीं। बौनेपन का लक्षण F1 पीढ़ी में प्रकट नहीं हुआ। 3. **F2 पीढ़ी का स्व-परागण:** जब F1 लंबे पौधों (Tt) का स्व-परागण किया गया, तो F2 पीढ़ी में लंबे और बौने दोनों पौधे दिखाई दिए। ### F2 पीढ़ी के अनुपात - **फेनोटाइप अनुपात:** **3 : 1** (लंबा : बौना)। - **जीनोटाइप अनुपात:** **1 : 2 : 1** (TT : Tt : tt)। ### पृथक्करण का नियम\nमोनोहाइब्रिड क्रॉस के आधार पर, मेंडल ने पृथक्करण के नियम का प्रस्ताव रखा। यह बताता है कि युग्मक निर्माण के दौरान एक जीन के एलील अलग हो जाते हैं ताकि प्रत्येक युग्मक में प्रत्येक जीन के लिए केवल एक एलील हो। ### निष्कर्ष\nमोनोहाइब्रिड क्रॉस ने वंशागति की प्रकृति को सफलतापूर्वक स्थापित किया, यह साबित करते हुए कि आनुवंशिक इकाइयां मिश्रण नहीं करती हैं बल्कि युग्मक निर्माण के दौरान अलग हो जाती हैं।
Q3. मनुष्यों में लिंग निर्धारण की क्रियाविधि की चर्चा कीजिए। निषेचन के समय बच्चे का लिंग आनुवंशिक रूप से कैसे निर्धारित होता है? अपने उत्तर को एक उपयुक्त क्रॉस आरेख स्पष्टीकरण के साथ समर्थित करें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### लिंग निर्धारण का परिचय\nलिंग निर्धारण वह जैविक प्रणाली है जो किसी जीव में यौन विशेषताओं के विकास को निर्धारित करती है। मनुष्यों में, लिंग निर्धारण पूरी तरह से आनुवंशिक है और माता-पिता से विरासत में मिले लिंग गुणसूत्रों के प्रकार पर निर्भर करता है। ### मनुष्यों में गुणसूत्र संरचना - मानव कोशिकाओं में गुणसूत्रों के 23 जोड़े (कुल 46 गुणसूत्र) होते हैं। - इनमें से 22 जोड़े ऑटोसोम होते हैं। - 23वां जोड़ा सेक्स क्रोमोसोम से बनता है: - **महिलाओं** में दो समान सेक्स क्रोमोसोम **XX** होते हैं। - **पुरुषों** में दो अलग-अलग सेक्स क्रोमोसोम **XY** होते हैं। ### युग्मकों की भूमिका - **महिला युग्मक (अंडाणु):** महिलाओं के सभी अंडे में **X** गुणसूत्र होता है। - **नर युग्मक (शुक्राणु):** आधे शुक्राणुओं में **X** गुणसूत्र और आधे में **Y** गुणसूत्र होता है। ### निषेचन के समय आनुवंशिक क्रॉस 1. **केस 1 (बालिका):** यदि **X** गुणसूत्र वाला शुक्राणु **X** गुणसूत्र वाले अंडे को निषेचित करता है, तो युग्मज XX बनता है, जो एक लड़की के रूप में विकसित होता है। 2. **केस 2 (बालक):** यदि **Y** गुणसूत्र वाला शुक्राणु **X** गुणसूत्र वाले अंडे को निषेचित करता है, तो युग्मज XY बनता है, जो एक लड़के के रूप में विकसित होता है। ### निष्कर्ष\nयह वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट है कि पिता का शुक्राणु बच्चे के लिंग का निर्धारण करता है, और महिलाओं की इसमें कोई भूमिका नहीं होती है।
Q4. द्विहाइब्रिड क्रॉस की सहायता से मेंडल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम को समझाइए। F2 पीढ़ी में प्राप्त फेनोटाइप और जीनोटाइप अनुपात को दर्शाइये। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम का परिचय\nमेंडल का स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम यह बताता है कि जब एक संकर में दो जोड़ी लक्षणों को जोड़ा जाता है, तो लक्षणों की एक जोड़ी का पृथक्करण लक्षणों की दूसरी जोड़ी से स्वतंत्र होता है। दूसरे शब्दों में, दो (या अधिक) अलग-अलग जीनों के एलील एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से युग्मकों में सॉर्ट हो जाते हैं। ### द्विहाइब्रिड क्रॉस के माध्यम से स्पष्टीकरण\nएक द्विहाइब्रिड क्रॉस में दो अलग-अलग जोड़ी विपरीत विशेषताओं की वंशागति शामिल होती है। मेंडल ने गोल पीले बीजों (RRYY) वाले शुद्ध प्रजनन मटर के पौधों को झुरकेदार हरे बीजों (rryy) के साथ क्रॉस कराया। - **जनक पीढ़ी (P):** गोल पीला (RRYY) × झुरकेदार हरा (rryy) - **F1 पीढ़ी:** सभी संतानों का जीनोटाइप RrYy था और फेनोटाइप गोल पीला बीज था। ### F2 पीढ़ी का अनुपात - **फेनोटाइप अनुपात:** 9 : 3 : 3 : 1 (गोल पीला : गोल हरा : झुरकेदार पीला : झुरकेदार हरा) - **जीनोटाइप अनुपात:** 1 : 2 : 1 : 2 : 4 : 2 : 1 : 2 : 1 अनुपात। ### निष्कर्ष\nयह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है कि बीज के आकार और बीज के रंग के जीन एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं।
Q5. उपार्जित (acquired) और वंशागत (inherited) लक्षण क्या हैं? प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए और समझाइए कि उपार्जित लक्षण अगली पीढ़ी में क्यों नहीं जाते हैं। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### परिचय\nजीव विज्ञान में, जीवों में देखे जाने वाले लक्षणों या विशेषताओं को उनकी उत्पत्ति और संचरण के आधार पर मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: वंशागत लक्षण और उपार्जित लक्षण। ### 1. वंशागत लक्षण (Inherited Traits) - **परिभाषा:** ये वे विशेषताएँ हैं जो माता-पिता से उनकी संतान में जीनों के माध्यम से संचारित होती हैं। ये आनुवंशिक रूप से निर्धारित होती हैं और जन्म से ही मौजूद होती हैं। - **संचरण:** इनमें डीएनए और जनन कोशिकाओं (शुक्राणु और अंडे) में परिवर्तन शामिल होता है, जिससे वे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचारित हो सकते हैं। - **उदाहरण:** 1. आँखों का रंग (जैसे, भूरी, नीली या हरी आँखें)। 2. बालों का प्रकार और रंग (घुंघराले या सीधे बाल, प्राकृतिक बालों का रंग)। ### 2. उपार्जित लक्षण (Acquired Traits) - **परिभाषा:** ये वे विशेषताएँ हैं जो कोई जीव अपने जीवनकाल में पर्यावरणीय प्रभावों, सीखने, अभ्यास या जीवन के अनुभवों के कारण विकसित करता है। ये डीएनए में कोडित नहीं होती हैं। - **संचरण:** ये केवल कायिक (body) कोशिकाओं को प्रभावित करती हैं और अगली पीढ़ी में संचारित नहीं होती हैं। - **उदाहरण:** 1. किसी व्यक्ति द्वारा तैरना या साइकिल चलाना सीखना। 2. दुर्घटना या चोट के कारण किसी अंग का नुकसान होना। ### उपार्जित लक्षण अगली पीढ़ी में क्यों नहीं जाते\nउपार्जित लक्षण जनन कोशिकाओं (प्रजनन कोशिकाओं) के डीएनए में कोई परिवर्तन नहीं करते हैं। चूँकि विकास और वंशागति विशेष रूप से जनन कोशिकाओं के डीएनए में होने वाले परिवर्तनों पर निर्भर करती है, इसलिए किसी व्यक्ति द्वारा अपने जीवनकाल के दौरान (कायिक कोशिकाओं में) प्राप्त किए गए अनुभव या कौशल को संतति में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई भारोत्तोलक कठोर प्रशिक्षण के माध्यम से विशाल मांसपेशियाँ बनाता है, तो उसके बच्चे स्वचालित रूप से मांसपेशियों वाले शरीर के साथ पैदा नहीं होंगे क्योंकि प्रशिक्षण शुक्राणु या अंडे की कोशिकाओं में जीनों को नहीं बदलता है।
Q6. लिंग निर्धारण क्या है? फ्लो चार्ट या विवरण की सहायता से मनुष्यों में लिंग निर्धारण की क्रियाविधि को समझाइए। यह कुछ जानवरों में पर्यावरणीय लिंग निर्धारण से किस प्रकार भिन्न है? 5 Marks
उत्तर (Answer): ### लिंग निर्धारण का परिचय\nलिंग निर्धारण वह जैविक प्रणाली है जो किसी जीव में यौन विशेषताओं के विकास को निर्धारित करती है। अधिकांश लैंगिक रूप से प्रजनन करने वाले जीवों में दो लिंग होते हैं। लिंग निर्धारण की आनुवंशिक क्रियाविधि यह तय करती है कि कोई व्यक्ति नर या मादा जनन अंगों को विकसित करेगा या नहीं। ### मनुष्यों में लिंग निर्धारण की क्रियाविधि\nमनुष्यों में लिंग निर्धारण आनुवंशिक रूप से नियंत्रित होता है और माता-पिता से प्राप्त लिंग गुणसूत्रों के प्रकार पर निर्भर करता है। - **कुल गुणसूत्र:** मनुष्यों में गुणसूत्रों के 23 जोड़े (कुल 46) होते हैं, जिनमें से 22 जोड़े ऑटोसोम और 1 जोड़ा (2 गुणसूत्र) लिंग गुणसूत्र होते हैं। - **मादा गुणसूत्र:** महिलाओं में दो समान लिंग गुणसूत्र होते हैं जिन्हें XX के रूप में दर्शाया जाता है। - **नर गुणसूत्र:** पुरुषों में एक X और एक छोटा Y गुणसूत्र होता है, जिसे XY के रूप में दर्शाया जाता है। ### युग्मक निर्माण और निषेचन - **शुक्राणु (नर):** आधे शुक्राणु X गुणसूत्र ले जाते हैं, और दूसरे आधे Y गुणसूत्र ले जाते हैं। - **अंडाणु (मादा):** महिला द्वारा उत्पादित सभी अंडे केवल X गुणसूत्र ले जाते हैं। ### निर्धारण प्रक्रिया - यदि **X गुणसूत्र** वाला शुक्राणु अंडे (X) को निषेचित करता है, तो परिणामी युग्मनज (zygote) में **XX** गुणसूत्र होंगे और वह **मादा** के रूप में विकसित होगा। - यदि **Y गुणसूत्र** वाला शुक्राणु अंडे (X) को निषेचित करता है, तो परिणामी युग्मनज में **XY** गुणसूत्र होंगे और वह **नर** के रूप में विकसित होगा।\nइस प्रकार, बच्चे के लिंग का निर्धारण करने में नर युग्मक (शुक्राणु) की निर्णायक भूमिका होती है। ### पर्यावरणीय लिंग निर्धारण के साथ तुलना\nमनुष्यों के विपरीत जहाँ लिंग गुणसूत्रों द्वारा आनुवंशिक रूप से निर्धारित होता है, कुछ जानवरों में (जैसे कछुए और छिपकली जैसे सरीसृप), वह पर्यावरणीय तापमान जिस पर निषेचित अंडे सेते जाते हैं, संतान के लिंग को निर्धारित करता है। उदाहरण के लिए, कुछ कछुओं में उच्च तापमान के कारण मादाओं का विकास हो सकता है, जबकि कुछ घोंघे में, व्यक्ति सामाजिक संकेतों या पर्यावरण के आधार पर अपने जीवनकाल के दौरान लिंग बदल सकते हैं।
Q7. द्विसंकर क्रॉस की सहायता से मेंडल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम (Law of Independent Assortment) को समझाइए। F2 पीढ़ी के दृश्यप्ररूप (phenotypic) और जीनप्ररूप (genotypic) अनुपात भी लिखिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम का परिचय\nमेंडल का स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम वंशागति का तीसरा प्रमुख नियम है। इसके अनुसार, जब एक संकर में दो जोड़ी लक्षणों को मिलाया जाता है, तो लक्षणों का एक जोड़ा दूसरे जोड़े से स्वतंत्र रूप से अलग होता है। दूसरे शब्दों में, दो (या अधिक) अलग-अलग जीनों के युग्मविकल्पी (alleles) एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से युग्मकों में छाँटे जाते हैं। ### द्विसंकर क्रॉस द्वारा स्पष्टीकरण\nइसका अध्ययन करने के लिए, मेंडल ने दो विपरीत विशेषताओं वाले मटर के पौधों का संकरण कराया: गोल-पीले बीज (RRYY) और झुर्रीदार-हरे बीज (rryy)। - **जनक (Parents):** गोल पीला (RRYY) × झुर्रीदार हरा (rryy) - **जनक द्वारा उत्पादित युग्मक:** RY और ry - **F1 पीढ़ी:** सभी संतति गोल पीली थीं जिनका जीनप्ररूप RrYy था, जो यह प्रदर्शित करता है कि प्रभावी लक्षण अप्रभावी लक्षणों को छिपा देते हैं। \nजब F1 पीढ़ी के पौधों (RrYy) का स्व-परागण कराया गया, तो उन्होंने समान अनुपात में चार प्रकार के युग्मक उत्पन्न किए: RY, Ry, rY और ry। ### पुनेट स्क्वायर और F2 पीढ़ी\nसंयोजन निर्धारित करने के लिए 16-खाने वाले पुनेट स्क्वायर का उपयोग किया जाता है। परिणामी F2 पीढ़ी एक विशिष्ट अनुपात में चार अलग-अलग दृश्यप्ररूप प्रदर्शित करती है: - गोल पीला: 9 - गोल हरा: 3 - झुर्रीदार पीला: 3 - झुर्रीदार हरा: 1 ### अनुपात - **दृश्यप्ररूप अनुपात (Phenotypic Ratio):** 9 : 3 : 3 : 1 - **जीनप्ररूप अनुपात (Genotypic Ratio):** 1:2:1:2:4:2:1:2:1 का एक जटिल अनुपात जो विभिन्न आनुवंशिक संयोजनों का प्रतिनिधित्व करता है। ### निष्कर्ष\nयह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है कि बीज के आकार और बीज के रंग के जीन एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं, जो स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम को सिद्ध करता है।
Q8. विस्तृत क्रॉस आरेख/फ्लोचार्ट की सहायता से मानव में लिंग निर्धारण की क्रियाविधि का वर्णन कीजिए। समझाइए कि बच्चे के लिंग के लिए पिता क्यों उत्तरदायी है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव में लिंग निर्धारण का परिचय\nलिंग निर्धारण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा नवजात शिशु के लिंग का निर्धारण होता है। मनुष्यों में लिंग निर्धारण आनुवंशिक रूप से नियंत्रित होता है और यह माता-पिता से प्राप्त लिंग गुणसूत्रों पर निर्भर करता है। ### मनुष्यों में गुणसूत्र व्यवस्था - मानव कोशिकाओं में 23 जोड़े गुणसूत्र (कुल 46 गुणसूत्र) होते हैं। - इनमें से 22 जोड़े ऑटोसोम (दैहिक गुणसूत्र) होते हैं जो नर और मादा दोनों में समान होते हैं। - 23वां जोड़ा लिंग गुणसूत्रों का होता है। - **स्त्रियों** में दो X गुणसूत्र ($XX$) होते हैं। अतः सभी अंडाणु केवल X गुणसूत्र वाले होते हैं। - **पुरुषों** में एक X और एक Y गुणसूत्र ($XY$) होता है। अतः शुक्राणु दो प्रकार के होते हैं: 50% X गुणसूत्र वाले और 50% Y गुणसूत्र वाले। ### लिंग निर्धारण की क्रियाविधि - **माता-पिता:** पिता ($XY$) $\times$ माता ($XX$) - **युग्मक:** पिता से $X$ और $Y$, माता से $X$ और $X$ - **संषेचन स्थितियां:** 1. यदि $X$ गुणसूत्र वाला शुक्राणु $X$ गुणसूत्र वाले अंडाणु को निषेचित करता है, तो युग्मज $XX$ बनता है, जिससे पुत्री उत्पन्न होती है (संभावना 50%)। 2. यदि $Y$ गुणसूत्र वाला शुक्राणु $X$ गुणसूत्र वाले अंडाणु को निषेचित करता है, तो युग्मज $XY$ बनता है, जिससे पुत्र उत्पन्न होता है (संभावना 50%)। ### निष्कर्ष: पिता की भूमिका\nचूंकि माता केवल X गुणसूत्र ही प्रदान कर सकती है, इसलिए वह बच्चे के लिंग के लिए उत्तरदायी नहीं है। पिता दो प्रकार के शुक्राणु ($X$ और $Y$) उत्पन्न करता है। अतः यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बच्चे के लिंग के लिए पिता उत्तरदायी है।
Q9. एक चेकर बोर्ड की सहायता से मेंडल के द्विसंकर क्रॉस (डाइहाइब्रिड क्रॉस) को समझाइए। इस क्रॉस से प्राप्त नियम को लिखिए और अंतिम फेनोटाइपिक अनुपात बताइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### द्विसंकर क्रॉस का परिचय\nद्विसंकर क्रॉस एक ऐसा प्रयोग है जिसमें विपरीत लक्षणों के दो जोड़ों की वंशागति का एक साथ अध्ययन किया जाता है। मेंडल ने गोल और पीले बीज वाले पौधों ($RRYY$) तथा झुरريदार और हरे बीज वाले पौधों ($rryy$) का क्रॉस कराया। ### प्रयोगात्मक प्रक्रिया 1. **जनक पीढ़ी:** शुद्ध गोल पीला ($RRYY$) $\times$ शुद्ध झुर्रीदार हरा ($rryy$)। 2. **$F_1$ पीढ़ी:** सभी संततियां गोल और पीले बीज वाली थीं जिनका जीनोटाइप $RrYy$ था, जिससे यह साबित हुआ कि गोल और पीले लक्षण प्रभावी हैं। 3. **$F_2$ पीढ़ी:** $F_1$ पौधों का स्वपरागण करने पर चार प्रकार के युग्मवक ($RY, Ry, rY, ry$) बने। ### द्विसंकर क्रॉस का पुनिट स्क्वायर | | **RY** | **Ry** | **rY** | **ry** | |---|---|---|---|---| | **RY** | RRYY | RRYy | RrYY | RrYy | | **Ry** | RRYy | RRyy | RrYy | Rryy | | **rY** | RrYY | RrYy | rrYY | rrYy | | **ry** | RrYy | Rryy | rrYy | rryy | ### $F_2$ में फेनोटाइपिक अनुपात - गोल पीला: 9 - गोल हरा: 3 - झुर्रीदार पीला: 3 - झुर्रीदार हरा: 1 - **अनुपात:** $9:3:3:1$ ### स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)\nइस क्रॉस के आधार पर मेंडल ने स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार जब किसी संकर में लक्षणों के दो जोड़े एक साथ लिए जाते हैं, तो एक जोड़े का पृथक्करण दूसरे जोड़े से स्वतंत्र होता है।
Q10. ग्रेगर जॉन मेंडल के एकसंकर क्रॉस (मोनोहाइब्रिड क्रॉस) प्रयोग को एक उचित चेकर बोर्ड (पुनिट स्क्वायर) की सहायता से समझाइए। इस प्रयोग से क्या निष्कर्ष निकाले गए थे? 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मेंडल के एकसंकर क्रॉस का परिचय\nआनुवंशिकी के जनक ग्रेगर जॉन मेंडल ने मटर के पौधे (*पिसम सेटिवम*) पर संकरण प्रयोग किए। एकसंकर क्रॉस में विपरीत लक्षणों की एक ही जोड़ी (जैसे लंबे और बौने पौधे) की वंशागति का अध्ययन किया जाता है। ### प्रयोगात्मक चरण 1. **जनक पीढ़ी (P):** मेंडल ने एक शुद्ध लंबे मटर के पौधे ($TT$) का संकरण एक शुद्ध बौने मटर के पौधे ($tt$) के साथ कराया। 2. **प्रथम संतति पीढ़ी ($F_1$):** $F_1$ पीढ़ी में प्राप्त सभी पौधे लंबे ($Tt$) थे। इससे यह सिद्ध हुआ कि लंबेपन का लक्षण प्रभावी (dominant) है, जबकि बौनापन अप्रभावी (recessive) है। 3. **$F_1$ का स्वपरागण:** इसके बाद मेंडल ने $F_1$ के लंबे पौधों ($Tt \times Tt$) का स्वपरागण कराकर $F_2$ पीढ़ी प्राप्त की। ### $F_2$ पीढ़ी के लिए पुनिट स्क्वायर (चेकर बोर्ड)\nजीनोटाइप और फेनोटाइप ज्ञात करने के लिए: | | $T$ | $t$ | |---|---|---| | **$T$** | $TT$ (लंबा) | $Tt$ (लंबा) | | **$t$** | $Tt$ (लंबा) | $tt$ (बौना) | ### परिणाम और अनुपात - **दृश्यरूप (फेनोटाइपिक) अनुपात:** 3 लंबा : 1 बौना (75% लंबे, 25% बौने)। - **जीनरूप (जीनोटाइपिक) अनुपात:** 1 $TT$ (शुद्ध लंबा) : 2 $Tt$ (संकर लंबा) : 1 $tt$ (शुद्ध बौना), यानी $1:2:1$. ### निष्कर्ष 1. **प्रभाविता का नियम:** विपरीत लक्षणों के जोड़े में से केवल एक कारक $F_1$ पीढ़ी में स्वयं को व्यक्त कर पाता है (प्रभावी), जबकि दूसरा छिपा रहता है (अप्रभावी)। 2. **पृथक्करण का नियम:** युग्मकों के निर्माण के समय युग्मविकल्पी (Alleles) आपस में मिश्रित नहीं होते बल्कि अलग हो जाते हैं, जिससे प्रत्येक युग्मवक को प्रत्येक लक्षण के लिए केवल एक एलील प्राप्त होता है।
Q11. चर्चा कीजिए कि पीढ़ी की अवधि में विविधताओं का संचय किस प्रकार प्रजाति निर्माण (speciation) और विकास की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। 3 Marks
उत्तर (Answer): विकास को मौलिक रूप से उस क्रमिक, संचयी प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके द्वारा लाखों वर्षों में सरल पूर्वजों के रूपों से जटिल जीवित जीवों का विकास हुआ है। इस विकासात्मक प्रक्रिया के मूल में आनुवंशिक विविधता निहित है। यौन प्रजनन के दौरान, डीएनए की प्रतिलिपि बनाने वाले तंत्र असाधारण रूप से विश्वसनीय होते हैं, लेकिन मामूली, यादृच्छिक त्रुटियां या उत्परिवर्तन अनिवार्य रूप से होते हैं, जो एक आबादी के जीन पूल में नई विविधताओं को पेश करते हैं। इसके अलावा, युग्मक निर्माण के दौरान पैतृक जीनों का यादृच्छिक पुनर्संयोजन संतानों के बीच अपार विविधता उत्पन्न करता है। जब ये विविधताएं एक आबादी के भीतर कई पीढ़ियों में क्रमिक रूप से जमा होती हैं, तो वे समूह के आनुवंशिक मेकअप को बदल देती हैं। यदि कोई आबादी भौगोलिक रूप से अलग हो जाती है - उदाहरण के लिए, पर्वत श्रृंखलाओं, नदियों या गहरी घाटियों जैसी भौतिक बाधाओं द्वारा - तो अलग किए गए उप-आबादी संकरण नहीं कर सकते हैं। परिणामस्वरूप, प्राकृतिक चयन इन अलग-थलग समूहों पर उनकी संबंधित पर्यावरणीय स्थितियों और स्थानीय भोजन की उपलब्धता के आधार पर अलग तरह से काम करता है। लंबी अवधि में, आनुवंशिक बहाव, प्राकृतिक चयन और संचित विविधताएं इन अलग-थलग उप-आबादी को अपने आनुवंशिक लक्षणों में एक-दूसरे से काफी हद तक अलग होने का कारण बनती हैं। अंततः, भले ही भौगोलिक बाधा को हटा दिया जाए, दोनों समूहों के व्यक्ति आनुवंशिक रूप से इतने अलग हो जाते हैं कि वे उपजाऊ संतान पैदा करने के लिए संकरण करने में सक्षम नहीं रह जाते हैं। इस सटीक मोड़ पर, एक नई प्रजाति सफलतापूर्वक बन गई है, जिसे वैज्ञानिक रूप से प्रजाति निर्माण (speciation) के रूप में जाना जाता है। इस प्रकार, पीढ़ियों में मामूली आनुवंशिक विविधताओं का निरंतर संचय जैविक विकास और पृथ्वी पर जीवन की अविश्वसनीय विविधता के पीछे प्राथमिक प्रेरक शक्ति के रूप में कार्य करता है।
Q12. जैविक विकास में उनके बीच स्पष्ट अंतर बताते हुए उपार्जित और वंशागत लक्षणों के महत्व को समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): जीव विज्ञान और विकास के अध्ययन में, जीवों की विशेषताओं को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: उपार्जित लक्षण और वंशागत लक्षण। वंशागत लक्षण आनुवंशिक विशेषताएं हैं जो जीव के डीएनए में एन्कोड होती हैं और पीढ़ियों से माता-पिता से संतान तक पारित होती हैं। ये लक्षण गुणसूत्रों पर स्थित जीनों द्वारा नियंत्रित होते हैं और इसमें आंखों का रंग, बालों का प्रकार, त्वचा का पिगमेंटेशन और संरचनात्मक शरीर डिजाइन जैसी विशेषताएं शामिल हैं। चूँकि इनमें जनन कोशिकाओं (शुक्राणु और अंडे) के डीएनए में परिवर्तन शामिल हैं, इसलिए वंशागत लक्षण जैविक विकास, प्राकृतिक चयन और प्रजाति निर्माण में एक महत्वपूर्ण और मूलभूत भूमिका निभाते हैं। वे आबादी के भीतर आनुवंशिक विविधता में योगदान करते हैं। दूसरी ओर, उपार्जित लक्षण शारीरिक या व्यवहार संबंधी विशेषताएं हैं जो कोई व्यक्ति पर्यावरणीय कारकों, व्यक्तिगत अनुभवों, जीवन शैली विकल्प, या कठोर शारीरिक प्रशिक्षण के कारण अपने जीवनकाल में विकसित करता है। उदाहरणों में व्यायाम के माध्यम से प्राप्त मांसपेशियों का द्रव्यमान, स्कूल में सीखी गई आनुवंशिक जानकारी, चोट से निशान, या अंग का नुकसान शामिल हैं। उपार्जित लक्षण शरीर की दैहिक कोशिकाओं तक ही सीमित होते हैं और प्रजनन जनन कोशिकाओं के डीएनए में कोई परिवर्तन नहीं करते हैं। परिणामस्वरूप, उपार्जित लक्षणों को अगली पीढ़ी तक प्रसारित या पारित नहीं किया जा सकता है। जैसा कि लगातार पीढ़ियों से चूहों की पूंछ काटने जैसे प्रयोगों द्वारा प्रसिद्ध रूप से प्रदर्शित किया गया है, उपार्जित विशेषताएं विरासत में नहीं मिलती हैं, और इसलिए, वे सीधे जैविक विकास या आनुवंशिक परिवर्तन को बढ़ावा नहीं देती हैं।
Q13. मानव में लिंग निर्धारण आनुवंशिक रूप से कैसे नियंत्रित होता है, इसका संक्षिप्त विवरण दीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): मनुष्यों में लिंग निर्धारण एक आकर्षक आनुवंशिक प्रक्रिया है जो माता-पिता से विरासत में मिले विशिष्ट लिंग गुणसूत्रों द्वारा नियंत्रित होती है। प्रत्येक मानव दैहिक कोशिका में आम तौर पर गुणसूत्रों के 23 जोड़े होते हैं, जिससे कुल 46 गुणसूत्र बनते हैं। इन 23 जोड़ों में से, पहले 22 जोड़ों को ऑटोसोम के रूप में जाना जाता है, जो सामान्य शरीर विशेषताओं को निर्धारित करते हैं और पुरुषों और महिलाओं में समान होते हैं। 23 वें जोड़े में लिंग गुणसूत्र होते हैं, जो सीधे व्यक्ति के जैविक लिंग को निर्धारित करते हैं। महिलाओं के पास XX के रूप में नामित दो समान बड़े लिंग गुणसूत्र होते हैं, जिसका अर्थ है कि सभी महिला युग्मक (अंडे) एक ही X गुणसूत्र ले जाते हैं। दूसरी ओर, पुरुषों के पास XY के रूप में नामित लिंग गुणसूत्रों की एक बेमेल जोड़ी होती है, जहां X बड़ा होता है और Y काफी छोटा होता है। इस XY संविधान के कारण, मानव पुरुष समान अनुपात में दो अलग-अलग प्रकार के शुक्राणु कोशिकाओं का उत्पादन करते हैं: 50% शुक्राणु एक X गुणसूत्र ले जाते हैं, जबकि अन्य 50% एक Y गुणसूत्र ले जाते हैं। बच्चे का जैविक लिंग पूरी तरह से निषेचन के दौरान इस बात से तय होता है कि कौन सा शुक्राणु अंडे के साथ सफलतापूर्वक संलयन करता है। यदि एक X गुणसूत्र ले जाने वाला शुक्राणु अंडे (जो हमेशा एक X ले जाता है) को निषेचित करता है, तो परिणामी युग्मनज में XX संयोजन होगा, जो एक मादा बच्चे के रूप में विकसित होगा। इसके विपरीत, यदि एक Y गुणसूत्र ले जाने वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है, तो युग्मनज में XY संयोजन होगा, जो एक पुरुष बच्चे के रूप में विकसित होगा। इस प्रकार, वैज्ञानिक रूप से, पिता का शुक्राणु बच्चे के लिंग को निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
Q14. द्विसंकर संकरण (dihybrid cross) क्या है? गोल-पीले और झुर्रीदार-हरे मटर के बीजों के बीच मेंडल के द्विसंकर संकरण में प्राप्त फेनोटाइपिक अनुपात बताइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): द्विसंकर संकरण एक प्रजनन प्रयोग है जो एक साथ दो अलग-अलग जोड़े विपरीत विशेषताओं, जैसे बीज के आकार और बीज के रंग, के वंशागति पैटर्न की जांच करता है। मेंडल ने गोल, पीले बीजों (जीनोटाइप RRYY) वाले मटर के पौधे को झुर्रीदार, हरे बीजों (जीनोटाइप rryy) वाले मटर के पौधे के साथ पार कराकर एक प्रसिद्ध द्विसंकर संकरण किया। इस क्रॉस में, गोल आकार (R) झुर्रीदार आकार (r) पर प्रभावी है, और पीला रंग (Y) हरे रंग (y) पर प्रभावी है। जब पैतृक पौधों को पार कराया गया, तो F1 पीढ़ी की सभी संतानों ने गोल और पीले बीज (जीनोटाइप RrYy) प्रदर्शित किए, जो गोल और पीले लक्षणों के प्रभुत्व को प्रदर्शित करते हैं। बाद में, मेंडल ने F2 पीढ़ी का उत्पादन करने के लिए इन F1 द्विसंकर पौधों को स्व-परागण करने की अनुमति दी। चूंकि युग्मक निर्माण के दौरान बीज के आकार और बीज के रंग के एलील स्वतंत्र रूप से अलग होते हैं, इसलिए F2 पीढ़ी में कई प्रकार के संयोजन उत्पन्न हुए। जब मेंडल ने F2 संतान की गिनती और विश्लेषण किया, तो उन्होंने एक बहुत विशिष्ट गणितीय अनुपात में चार अलग-अलग फेनोटाइपिक संयोजन पाए। कुल 16 संयोजनों में से, 9 पौधों में गोल और पीले बीज थे, 3 पौधों में गोल और हरे बीज थे, 3 पौधों में झुर्रीदार और पीले बीज थे, और केवल 1 पौधे में झुर्रीदार और हरे बीज थे। इस प्रकार, द्विसंकर संकरण में प्राप्त क्लासिक फेनोटाइपिक अनुपात 9:3:3:1 है। इस प्रयोग ने स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम के सूत्रीकरण का नेतृत्व किया, जिसमें कहा गया है कि विभिन्न जीनों के एलील माता-पिता से संतान तक एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से पारित होते हैं।
Q15. पौधे की ऊंचाई को विशेषता के रूप में लेकर मेंडल द्वारा किए गए एकसंकर संकरण (monohybrid cross) प्रयोग को समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): एकसंकर संकरण (monohybrid cross) एक आनुवंशिक प्रजनन प्रयोग है जो विपरीत लक्षणों के एक ही जोड़े, जैसे पौधे की ऊंचाई, की वंशागति को ट्रैक करता है। मेंडल ने एक शुद्ध-प्रजनन लंबे मटर के पौधे (जीनोटाइप TT) को लेकर और इसे एक शुद्ध-प्रजनन बौने मटर के पौधे (जीनोटाइप tt) के साथ पार कराकर एकसंकर संकरण किया। माता-पिता के रूप में उपयोग किए जाने वाले पौधे पैतृक या P पीढ़ी बनाते हैं। जब इन दोनों पौधों का पर-परागण किया गया, तो परिणामी सभी बीज ऐसे पौधों में विकसित हुए जो लंबे थे। इस पहली संतति पीढ़ी को F1 पीढ़ी के रूप में जाना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि F1 पीढ़ी में कोई भी बौना पौधा नहीं देखा गया, जिससे मेंडल ने निष्कर्ष निकाला कि लंबेपन का लक्षण प्रभावी है जबकि बौनेपन का लक्षण अप्रभावी है। इसके बाद, मेंडल ने F1 पीढ़ी के लंबे पौधों (जीनोटाइप Tt) को स्व-परागण से गुजरने की अनुमति दी। इस स्व-परागण से उत्पन्न संतान ने दूसरी संतति पीढ़ी, या F2 पीढ़ी का गठन किया। F2 पीढ़ी में, लंबे और बौने दोनों पौधे एक अलग गणितीय अनुपात में फिर से प्रकट हुए। सांख्यिकीय रूप से विश्लेषण किए गए चार पौधों में से, लगभग तीन लंबे थे और एक बौना था, जिससे 3:1 का फेनोटाइपिक अनुपात प्राप्त हुआ। हालाँकि, उनके अंतर्निहित आनुवंशिक मेकअप या जीनोटाइप की जांच करने पर, अनुपात 1 TT (शुद्ध लंबा) : 2 Tt (संकर लंबा) : 1 tt (शुद्ध बौना) पाया गया। इस क्लासिक एकसंकर प्रयोग ने एलील पृथक्करण की मौलिक अवधारणा को सफलतापूर्वक स्थापित किया।