मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 10 गणित: वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) - त्वरित रिवीजन नोट्स
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1. यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका (Euclid's Division Lemma)
दो धनात्मक पूर्णांकों $a$ और $b$ के लिए, ऐसी अद्वितीय पूर्ण संख्याएँ $q$ और $r$ विद्यमान होती हैं कि:
a = bq + r
जहाँ 0 <= r < b
- यहाँ:
- $a$ = भाज्य (Dividend)
- $b$ = भाजक (Divisor)
- $q$ = भागफल (Quotient)
- $r$ = शेषफल (Remainder)
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2. यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म (Euclid's Division Algorithm)
यह दो धनात्मक पूर्णांकों का म.स.प. (HCF) परिकलित करने की एक तकनीक है।
- चरण 1: दी गई संख्याओं $c$ और $d$ (जहाँ $c > d$) के लिए यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका का प्रयोग करें।
- चरण 2: यदि $r = 0$, तो $d$ ही $c$ और $d$ का HCF है। यदि $r \neq 0$, तो $d$ और $r$ पर फिर से विभाजन प्रमेयिका लगाएँ।
- चरण 3: इस प्रक्रिया को तब तक जारी रखें जब तक शेषफल शून्य ($r = 0$) न आ जाए। इस स्थिति में भाजक ही HCF होगा।
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3. अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic)
प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में व्यक्त (गुणनखंडित) किया जा सकता है, तथा यह गुणनखंडन अभाज्य गुणनखंडों के आने वाले क्रम के बिना अद्वितीय होता है।
- उदाहरण:
210 = 2 × 3 × 5 × 7
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4. HCF और LCM के बीच संबंध
दो धनात्मक पूर्णांकों $a$ और $b$ के लिए:
HCF(a, b) × LCM(a, b) = a × b
LCM(a, b) = (a × b) / HCF(a, b)
HCF(a, b) = (a × b) / LCM(a, b)
(ध्यान दें: यह सूत्र केवल दो संख्याओं के लिए ही सदैव सत्य होता है, तीन संख्याओं के लिए नहीं।)
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5. अपरिमेय संख्याओं का पुनर्भ्रमण (Revisiting Irrational Numbers)
- यदि कोई अभाज्य संख्या $p$, संख्या $a^2$ को विभाजित करती है, तो $p$, $a$ को भी विभाजित करेगी (जहाँ $a$ एक धनात्मक पूर्णांक है)।
- महत्वपूर्ण परिणाम: $\sqrt{2}$, $\sqrt{3}$, $\sqrt{5}$, $(3 + 2\sqrt{5})$ आदि संख्याएँ अपरिमेय संख्याएँ होती हैं।
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6. परिमेय संख्याओं और उनके दशमलव प्रसारों का पुनर्भ्रमण
मान लीजिए $x = p/q$ एक परिमेय संख्या ऐसी है कि $q$ का अभाज्य गुणनखंडन 2^n × 5^m के रूप का है, जहाँ $n$ और $m$ ऋणोत्तर पूर्णांक हैं:
- सांत दशमलव (Terminating): यदि परिमेय संख्या $p/q$ में $q$ के अभाज्य गुणनखंड केवल 2 और 5 के रूप में हैं, तो $x$ का दशमलव प्रसार सांत (Terminating) होता है।
- असांत आवर्ती दशमलव (Non-terminating Repeating): यदि $q$ के अभाज्य गुणनखंडों में 2 और 5 के अलावा अन्य गुणनखंड भी हैं, तो $x$ का दशमलव प्रसार असांत आवर्ती होता है।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 वास्तविक संख्याएँ
यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका
कथन: $a = bq + r$
शर्त: $0 \le r < b$
एचसीएफ (HCF) ज्ञात करने का तरीका
अंकगणित की आधारभूत प्रमेय
कथन: प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है
अभाज्य गुणनखंडन विधि
एलसीएम (LCM) और एचसीएफ (HCF) में संबंध: $\text{LCM} \times \text{HCF} = \text{दो संख्याओं का गुणनफल}$
अपरिमेय संख्याओं का पुनرभ्रमण
$\sqrt{2}$ का अपरिमेय सिद्ध करना
$\sqrt{3}, \sqrt{5}$ आदि की अपरिमेयता
सिद्ध करने की विधि: विरोधाभास विधि (Method of Contradiction)
परिमेय संख्याएँ और उनके दशमलव प्रसार
शांत दशमलव प्रसार
हर (Denominator) का रूप: $2^n \times 5^m$
असांत आवर्ती दशमलव प्रसार
हर $2^n \times 5^m$ के रूप में नहीं होता
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): **(a) $\sqrt{3}$ की अपरिमेयता की उपपत्ति:**
1. मान लीजिए कि $\sqrt{3}$ एक परिमेय संख्या है।
2. अतः, हम सह-अभाज्य पूर्णांक $a$ और $b$ ($b \neq 0$) प्राप्त कर सकते हैं कि $\sqrt{3} = \frac{a}{b}$ हो।
3. दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $3 = \frac{a^2}{b^2} \implies a^2 = 3b^2$।
4. चूँकि $a^2$, 3 से विभाज्य है, इसलिए प्रमेय के अनुसार $a$ भी 3 से विभाज्य होगा।
5. मान लीजिए $a = 3c$, जहाँ $c$ एक पूर्णांक है। इसे $a^2 = 3b^2$ में रखने पर:
$(3c)^2 = 3b^2 \implies 9c^2 = 3b^2 \implies 3c^2 = b^2$।
6. चूँकि $b^2$, 3 से विभाज्य है, इसलिए $b$ भी 3 से विभाज्य होगा।
7. अतः, $a$ और $b$ में कम से कम एक उभयनिष्ठ गुणनखंड 3 है। यह इस तथ्य का विरोधाभास करता है कि $a$ और $b$ सह-अभाज्य हैं।
8. इसलिए, हमारी कल्पना गलत थी, और $\sqrt{3}$ एक अपरिमेय संख्या है।
**(b) HCF और LCM की गणना:**
1. **अभाज्य गुणनखंडन:**
- $96 = 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 3 = 2^5 \times 3^1$
- $404 = 2 \times 2 \times 101 = 2^2 \times 101^1$
2. **HCF ज्ञात करना:**
- HCF = प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात का गुणनफल।
- $HCF(96, 404) = 2^2 = 4$।
3. **LCM ज्ञात करना:**
- LCM = शामिल प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घात का गुणनफल।
- $LCM(96, 404) = 2^5 \times 3^1 \times 101^1 = 32 \times 3 \times 101 = 9696$।
4. **सत्यापन:**
- $HCF \times LCM = 4 \times 9696 = 38784$।
- संख्याओं का गुणनफल = $96 \times 404 = 38784$।
- चूँकि $38784 = 38784$ है, अतः संबंध सत्यापित होता है।
उत्तर (Answer): ### अंकगणित की आधारभूत प्रमेय
\nअंकगणित की आधारभूत प्रमेय संख्या सिद्धांत का एक आधारभूत सिद्धांत है। यह बताता है कि: **"प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में व्यक्त (गुणनखंडित) किया जा सकता है, और यह गुणनखंडन अभाज्य गुणनखंडों के आने वाले क्रम के बिना अद्वितीय होता है।"**
#### 1. प्रमेय को समझना\nएक भाज्य संख्या 1 से बड़ी वह धनात्मक पूर्णांक है जिसके 1 और स्वयं के अलावा कम से कम एक अन्य विभाजक होता है। प्रमेय यह दावा करता है कि ऐसी किसी भी संख्या को अभाज्य निर्माण खंडों में तोड़ा जा सकता है। उदाहरण के लिए, संख्या 120 को $2 \times 2 \times 2 \times 3 \times 5$ या $2^3 \times 3 \times 5$ के रूप में लिखा जा सकता है। आप गुणनखंडन कैसे भी करें, आपको हमेशा तीन 2, एक 3 और एक 5 ही प्राप्त होंगे।
#### 2. गणित में महत्व
* **अद्वितीयता:** अद्वितीयता का गुण यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक पूर्णांक का एक विशिष्ट 'अभाज्य हस्ताक्षर' होता है। यह गणितज्ञों को उनके अभाज्य गुणनखंडों का विश्लेषण करके संख्याओं के गुणों का अध्ययन करने की अनुमति देता है।
* **संरचनात्मक आधार:** यह पूर्णांकों के विभाज्यता गुणों को समझने का आधार बनता है, जो उच्च-स्तरीय बीजगणित और संख्या सिद्धांत के लिए आवश्यक है।
#### 3. प्रमुख अनुप्रयोग
* **HCF और LCM ज्ञात करना:** यह प्रमेय महत्तम समापवर्तक (HCF) और लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) की गणना करने के लिए एक व्यवस्थित विधि प्रदान करता है। HCF प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात का गुणनफल है, जबकि LCM शामिल प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घात का गुणनफल है।
* **अपरिमेयता सिद्ध करना:** इस प्रमेय का उपयोग यह सिद्ध करने के लिए किया जाता है कि $\sqrt{2}, \sqrt{3},$ और $\sqrt{5}$ जैसी संख्याएँ अपरिमेय हैं। उन्हें परिमेय ($p/q$) मानकर, हम $p$ और $q$ के उभयनिष्ठ गुणनखंडों के संबंध में विरोधाभास दिखाने के लिए अभाज्य गुणनखंडन का उपयोग करते हैं।
* **दशमलव प्रसार:** यह यह निर्धारित करने में मदद करता है कि एक परिमेय संख्या $p/q$ का दशमलव प्रसार शांत है या अशांत आवर्ती। यदि हर $q$ का अभाज्य गुणनखंडन $2^n 5^m$ के रूप में है, तो दशमलव शांत होता है।
#### निष्कर्ष\nनिष्कर्षतः, अंकगणित की आधारभूत प्रमेय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पूर्णांकों की योगात्मक प्रकृति को उनकी गुणात्मक संरचना के साथ जोड़ती है, जो क्रिप्टोग्राफी और जटिल विश्लेषण जैसे उन्नत गणितीय अवधारणाओं के लिए एक सेतु के रूप में कार्य करती है।
उत्तर (Answer): ### सिद्ध करना कि $\sqrt{3}$ अपरिमेय है
**चरण 1: कल्पना**\nमान लीजिए, इसके विपरीत, कि $\sqrt{3}$ एक परिमेय संख्या है।\nइसलिए, हम पूर्णांक $a$ और $b$ ($b \neq 0$) प्राप्त कर सकते हैं जैसे कि:
$$\sqrt{3} = \frac{a}{b}$$\nजहाँ $a$ और $b$ सह-अभाज्य (co-prime) हैं (उनका 1 के अलावा कोई अन्य उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है)।
**चरण 2: दोनों पक्षों का वर्ग करना**\nसमीकरण को पुनर्व्यवस्थित करने पर, हमें $a = \sqrt{3}b$ प्राप्त होता है।\nदोनों पक्षों का वर्ग करने पर, हमें प्राप्त होता है:
$$a^2 = 3b^2 \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
**चरण 3: $a$ का विश्लेषण**\nसमीकरण 1 से, यह पता चलता है कि $a^2$, 3 से विभाज्य है।\nप्रमेय के अनुसार, यदि कोई अभाज्य संख्या किसी धनात्मक पूर्णांक के वर्ग को विभाजित करती है, तो वह उस पूर्णांक को भी विभाजित करती है।\nइसलिए, 3, $a$ को विभाजित करता है।\nअतः, हम किसी पूर्णांक $c$ के लिए $a = 3c$ लिख सकते हैं।
**चरण 4: $b$ का विश्लेषण**\nसमीकरण 1 में $a = 3c$ प्रतिस्थापित करने पर, हमें प्राप्त होता है:
$$(3c)^2 = 3b^2$$
$$9c^2 = 3b^2$$
$$3c^2 = b^2$$\nइसका अर्थ है कि $b^2$, 3 से विभाज्य है, और इसलिए, $b$ भी 3 से विभाज्य है।
**चरण 5: निष्कर्ष**\nउपरोक्त चरणों से, हम देखते हैं कि $a$ और $b$ दोनों में कम से कम 3 एक उभयनिष्ठ गुणनखंड है।\nलेकिन यह हमारी प्रारंभिक कल्पना का खंडन करता है कि $a$ और $b$ सह-अभाज्य हैं।\nयह विरोधाभास हमारी गलत कल्पना के कारण उत्पन्न हुआ है कि $\sqrt{3}$ परिमेय है।
**अतः, हम निष्कर्ष निकालते हैं कि $\sqrt{3}$ एक अपरिमेय संख्या है।**
उत्तर (Answer): ### अंकगणित की आधारभूत प्रमेय
**1. परिभाषा और कथन:**\nअंकगणित की आधारभूत प्रमेय के अनुसार, प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में व्यक्त (गुणनखंडित) किया जा सकता है, और यह गुणनखंडन अभाज्य गुणनखंडों के आने वाले क्रम के बिना अद्वितीय होता है। सरल शब्दों में, 1 से बड़ी कोई भी पूर्णांक संख्या या तो स्वयं एक अभाज्य संख्या होती है या उसे अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में दर्शाया जा सकता है।
**2. अद्वितीयता की अवधारणा:**
'अद्वितीय' शब्द का अर्थ है कि किसी भी दी गई भाज्य संख्या के लिए, अभाज्य गुणनखंडों का केवल एक ही समूह होता है, जिन्हें गुणा करने पर वह संख्या प्राप्त होती है। उदाहरण के लिए, संख्या 30 को $2 \times 3 \times 5$ के रूप में लिखा जा सकता है। हालाँकि क्रम बदल सकता है (जैसे, $5 \times 2 \times 3$), लेकिन अभाज्य संख्याओं का समूह {2, 3, 5} स्थिर रहता है। यह अद्वितीयता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रत्येक भाज्य संख्या के लिए एक 'डीएनए' प्रदान करती है।
**3. गुणनखंडों के क्रम का महत्व:**\nयद्यपि प्रमेय कहता है कि गुणनखंडन अद्वितीय है, यह गुणनखंडों को पुनर्व्यवस्थित करने की अनुमति देता है। गणितीय रूप से, हम आमतौर पर एक मानक रूप बनाए रखने के लिए अभाज्य गुणनखंडन को आरोही क्रम (जैसे, $2^2 \times 3 \times 5^2$) में लिखते हैं, जो विभिन्न संख्याओं की तुलना करने में मदद करता है।
**4. गणित में अनुप्रयोग:**
* **HCF और LCM ज्ञात करना:** यह प्रमेय उनके अभाज्य गुणनखंडों की घातों की तुलना करके दो या दो से अधिक संख्याओं का महत्तम समापवर्तक (HCF) और लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) खोजने का आधार है।
* **अपरिमेयता सिद्ध करना:** इसका उपयोग यह सिद्ध करने के लिए किया जाता है कि $\sqrt{2}$, $\sqrt{3}$, और $\sqrt{5}$ जैसी संख्याएँ अपरिमेय हैं। यह प्रमाण इस तथ्य पर निर्भर करता है कि यदि एक अभाज्य $p$, $a^2$ को विभाजित करता है, तो $p$ को $a$ को भी विभाजित करना चाहिए।
* **दशमलव प्रसार:** यह यह निर्धारित करने में मदद करता है कि किसी परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार शांत है या अशांत आवर्ती। यदि हर के अभाज्य गुणनखंड $2^n 5^m$ के रूप में हैं, तो दशमलव शांत होता है।
* **संख्या गुण:** यह यह जाँचने में मदद करता है कि क्या $4^n$ या $6^n$ जैसी संख्या किसी प्राकृतिक संख्या $n$ के लिए शून्य अंक पर समाप्त हो सकती है।
उत्तर (Answer): 96 और 404 का HCF और LCM ज्ञात करने के लिए, हम अंकगणित की आधारभूत प्रमेय का उपयोग करते हुए निम्नलिखित चरणों का पालन करते हैं:
**चरण 1: 96 का अभाज्य गुणनखंडन**
96 = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 3
96 = $2^5 \times 3^1$
**चरण 2: 404 का अभाज्य गुणनखंडन**
404 = 2 × 2 × 101
404 = $2^2 \times 101^1$
(नोट: 101 एक अभाज्य संख्या है)
**चरण 3: HCF (महत्तम समापवर्तक) ज्ञात करना**\nHCF प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात का गुणनफल होता है।\nउभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड = 2
2 की सबसे छोटी घात = $2^2$\nइसलिए, HCF(96, 404) = $2^2 = 4$
**चरण 4: LCM (लघुत्तम समापवर्त्य) ज्ञात करना**\nLCM संख्याओं में शामिल प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घात का गुणनफल होता है।\nLCM(96, 404) = $2^5 \times 3^1 \times 101^1$\nLCM(96, 404) = 32 × 3 × 101\nLCM(96, 404) = 96 × 101 = 9696
**चरण 5: संबंध का सत्यापन**\nसंबंध: HCF × LCM = दोनों संख्याओं का गुणनफल\nLHS = HCF × LCM = 4 × 9696 = 38784\nRHS = संख्याओं का गुणनफल = 96 × 404 = 38784\nचूँकि LHS = RHS (38784 = 38784), इसलिए संबंध सत्यापित है।
उत्तर (Answer): अभाज्य गुणनखंड विधि का उपयोग करके 336 और 54 का HCF और LCM ज्ञात करने के लिए, हम पहले प्रत्येक संख्या के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करते हैं।
\nचरण 1: 336 का अभाज्य गुणनखंड ज्ञात कीजिए।
$$336 = 2 \times 168 = 2 \times 2 \times 84 = 2 \times 2 \times 2 \times 42 = 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 21 = 2^4 \times 3^1 \times 7^1$$
\nचरण 2: 54 का अभाज्य गुणनखंड ज्ञात कीजिए।
$$54 = 2 \times 27 = 2 \times 3 \times 3 \times 3 = 2^1 \times 3^3$$
\nचरण 3: HCF की गणना कीजिए।\nHCF संख्याओं में प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात का गुणनफल होता है। उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड 2 और 3 हैं।
$$\text{HCF}(336, 54) = 2^1 \times 3^1 = 2 \times 3 = 6$$
\nचरण 4: LCM की गणना कीजिए।\nLCM संख्याओं में शामिल प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घात का गुणनफल होता है।
$$\text{LCM}(336, 54) = 2^4 \times 3^3 \times 7^1 = 16 \times 27 \times 7 = 432 \times 7 = 3024$$
\nचरण 5: संबंध $\text{HCF} \times \text{LCM} = \text{दोनों संख्याओं का गुणनफल}$ की जाँच कीजिए।
$$\text{HCF} \times \text{LCM} = 6 \times 3024 = 18144$$
$$\text{दोनों संख्याओं का गुणनफल} = 336 \times 54 = 18144$$
\nचूंकि $\text{HCF} \times \text{LCM} = \text{दोनों संख्याओं का गुणनफल}$ ($18144 = 18144$), इसलिए दिया गया संबंध सत्यापित होता है।
उत्तर (Answer): ### युग्म (i) के लिए हल: 26 और 91
**चरण 1: दोनों संख्याओं का अभाज्य गुणनखंडन**
* $26$ का अभाज्य गुणनखंडन:
$$26 = 2 \times 13$$
* $91$ का अभाज्य गुणनखंडन:
$$91 = 7 \times 13$$
**चरण 2: HCF और LCM ज्ञात करना**
* $\text{HCF}(26, 91)$, संख्याओं में प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात का गुणनफल है:
$$\text{HCF} = 13$$
* $\text{LCM}(26, 91)$, संख्याओं में संलिप्त प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घात का गुणनफल है:
$$\text{LCM} = 2 \times 7 \times 13 = 182$$
**चरण 3: जाँच**
* दोनों संख्याओं का गुणनफल $= 26 \times 91 = 2366$
* HCF और LCM का गुणनफल $= \text{HCF} \times \text{LCM} = 13 \times 182 = 2366$
* चूकि $\text{संख्याओं का गुणनफल} = \text{HCF} \times \text{LCM}$, अतः संबंध सत्यापित होता है।
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### युग्म (ii) के लिए हल: 510 और 92
**चरण 1: दोनों संख्याओं का अभाज्य गुणनखंडन**
* $510$ का अभाज्य गुणनखंडन:
$$510 = 2 \times 3 \times 5 \times 17$$
* $92$ का अभाज्य गुणनखंडन:
$$92 = 2^2 \times 23 = 2 \times 2 \times 23$$
**चरण 2: HCF और LCM ज्ञात करना**
* $\text{HCF}(510, 92)$, प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात का गुणनफल है:
$$\text{HCF} = 2$$
* $\text{LCM}(510, 92)$, संलिप्त प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घात का गुणनफल है:
$$\text{LCM} = 2^2 \times 3 \times 5 \times 17 \times 23 = 4 \times 3 \times 5 \times 17 \times 23 = 23460$$
**चरण 3: जाँच**
* दोनों संख्याओं का गुणनफल $= 510 \times 92 = 46920$
* HCF और LCM का गुणनफल $= \text{HCF} \times \text{LCM} = 2 \times 23460 = 46920$
* चूकि $\text{संख्याओं का गुणनफल} = \text{HCF} \times \text{LCM}$, अतः संबंध सत्यापित होता है।
उत्तर (Answer): ### सिद्ध कीजिए कि $\sqrt{5}$ एक अपरिमेय संख्या है
\nयह सिद्ध करने के लिए कि $\sqrt{5}$ एक अपरिमेय संख्या है, हम विरोधाभास विधि का उपयोग करते हैं।
* **मान्यता**: आइए इसके विपरीत मान लें कि $\sqrt{5}$ एक परिमेय संख्या है।
* **भिन्न रूप**: इसलिए, हम दो पूर्णांक $r$ और $s$ ($s \neq 0$) ऐसे प्राप्त कर सकते हैं कि $\sqrt{5} = \frac{r}{s}$ है।
* **सह-अभाज्य पूर्णांक**: मान लीजिए $r$ और $s$ में 1 के अलावा कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है। यदि उनमें कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड है, तो हम उसे विभाजित करके सरलतम रूप प्राप्त कर सकते हैं जहाँ $\text{HCF}(r, s) = 1$ है।
* **दोनों पक्षों का वर्ग करने पर**:
$$\left(\sqrt{5}\right)^2 = \left(\frac{r}{s}\right)^2$$
$$5 = \frac{r^2}{s^2}$$
$$r^2 = 5s^2$$
* **विभाज्य्रता**: इस समीकरण से स्पष्ट है कि $5, r^2$ को विभाजित करता है। प्रमेय के अनुसार (यदि कोई अभाज्य संख्या $p, a^2$ को विभाजित करती है, तो $p, a$ को भी विभाजित करती है), $5, r$ को भी विभाजित करेगा।
* **प्रतिस्थापन**: चूंकि $5, r$ को विभाजित करता है, हम किसी पूर्णांक $c$ के लिए $r = 5c$ लिख सकते हैं।
* **वापस प्रतिस्थापित करने पर**:
$$(5c)^2 = 5s^2$$
$$25c^2 = 5s^2$$
$$s^2 = 5c^2$$
* **दूसरी विभाज्य्रता**: यह दर्शाता है कि $5, s^2$ को विभाजित करता है, जिसका अर्थ है कि $5, s$ को भी विभाजित करता है।
* **विरोधाभास**: इस प्रकार, $r$ और $s$ दोनों में कम से कम $5$ एक उभयनिष्ठ गुणनखंड है। यह हमारी प्रारंभिक मान्यता का विरोधाभास करता है कि $r$ और $s$ सह-अभाज्य हैं।
* **निष्कर्ष**: यह विरोधाभास हमारी गलत मान्यता के कारण उत्पन्न हुआ है कि $\sqrt{5}$ परिमेय है। अतः, हम निष्कर्ष निकालते हैं कि $\sqrt{5}$ एक अपरिमेय संख्या है।
### अंकगणित की आधारभूत प्रमेय
* **कथन**: प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में व्यक्त (गुणनखंडित) किया जा सकता है, और यह गुणनखंडन अभाज्य गुणनखंडों के आने वाले क्रम के बिना अद्वितीय होता है।
* **स्पष्टीकरण**: उदाहरण के लिए, भाज्य संख्या $210$ पर विचार करें। इसे $2 \times 3 \times 5 \times 7$ के रूप में गुणनखंडित किया जा सकता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम पेड़ आरेखों या बार-बार विभाजन का उपयोग करके $210$ को तोड़ने का प्रयास कैसे करते हैं, अभाज्य गुणनखंड हमेशा $2, 3, 5,$ और $7$ ही होंगे, केवल उनका क्रम बदल सकता है (जैसे $7 \times 5 \times 3 \times 2$)। यह प्रमेय अभाज्य गुणनखंड विधि का उपयोग करके पूर्णांकों के HCF और LCM ज्ञात करने का आधार बनती है।
उत्तर (Answer): अंकगणित का आधारभूत प्रमेय यह बताता है कि प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में व्यक्त (या गुणनखंडित) किया जा सकता है, और यह गुणनखंडन अभाज्य गुणनखंडों के आने वाले क्रम को छोड़कर अद्वितीय होता है। सरल शब्दों में, इसका मतलब यह है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किसी दी गई भाज्य संख्या को उसके घटक अभाज्य गुणनखंडों में कैसे तोड़ते हैं, आपको हमेशा अभाज्य संख्याओं का बिल्कुल वही सेट मिलेगा, हालांकि उन अभाज्यों को लिखने का क्रम या अनुक्रम भिन्न हो सकता है। उदाहरण के लिए, भाज्य संख्या 30 को $2 \times 3 \times 5$, या $3 \times 5 \times 2$ के रूप में लिखा जा सकता है, लेकिन अभाज्य गुणनखंड स्वयं कड़ाई से 2, 3 और 5 ही रहते हैं। यह प्रमेय गणित में संख्या सिद्धांत की नींव बनाता है।
\nभाज्यों संख्याओं के महत्तम समापवर्तक (HCF) और लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) को ज्ञात करने में इसका महत्व अत्यधिक है। इस प्रमेय का उपयोग करके दी गई भाज्य संख्याओं को उनके अद्वितीय अभाज्य गुणनखंडों में तोड़कर, हम व्यवस्थित नियमों को आसानी से लागू कर सकते हैं। दो या दो से अधिक संख्याओं का HCF ज्ञात करने के लिए, हम उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंडों की पहचान करते हैं और इन उभयनिष्ठ गुणनखंडों की सबसे छोटी घातों का गुणनफल लेते हैं। LCM ज्ञात करने के लिए, हम संख्याओं से जुड़े सभी अभाज्य गुणनखंडों की सबसे बड़ी घातों का गुणनफल लेते हैं। अंकगणित के आधारभूत प्रमेय द्वारा गारंटीकृत अद्वितीयता और विश्वसनीयता के बिना, अभाज्य गुणनखंडों का उपयोग करके बड़ी संख्याओं के HCF और LCM की ऐसी व्यवस्थित गणना गणितीय रूप से संभव या सार्वभौमिक रूप से वैध नहीं होगी।
उत्तर (Answer): चरण 1: समस्या कथन से दिए गए मानों की पहचान करें।\nपहली संख्या ($a$) = 306\nदूसरी संख्या ($b$) = 657\nदिया गया है: $\text{HCF}(a, b) = 9$
\nचरण 2: किन्हीं दो धनात्मक पूर्णांकों $a$ और $b$ के लिए HCF और LCM के बीच मानक संबंध को याद करें।\nसूत्र: $\text{HCF}(a, b) \times \text{LCM}(a, b) = a \times b$
\nचरण 3: सूत्र में ज्ञात मानों को प्रतिस्थापित करें।
$9 \times \text{LCM}(306, 657) = 306 \times 657$
\nचरण 4: $\text{LCM}(306, 657)$ के लिए हल करें।
$\text{LCM}(306, 657) = \frac{306 \times 657}{9}$
\nचरण 5: विभाजन और गुणन करें।
306 को 9 से विभाजित करें: $306 \div 9 = 34$\nअब 34 को 657 से गुणा करें:
$34 \times 657 = 22338$
\nअंतिम उत्तर:
$\text{HCF} = 9$
$\text{LCM} = 22338$
उत्तर (Answer): चरण 1: 26 और 91 का अभाज्य गुणनखंडन ज्ञात कीजिए।
26 का अभाज्य गुणनखंडन $= 2 \times 13^1$
91 का अभाज्य गुणनखंडन $= 7 \times 13^1$
\nचरण 2: HCF ज्ञात कीजिए।\nHCF संख्याओं में प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात का गुणनफल होता है।
$\text{HCF}(26, 91) = 13$
\nचरण 3: LCM ज्ञात कीजिए।\nLCM संख्याओं में शामिल प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घात का गुणनफल होता है।
$\text{LCM}(26, 91) = 2 \times 7 \times 13 = 182$
\nचरण 4: संबंध LCM $\times$ HCF = दोनों संख्याओं का गुणनफल को सत्यापित कीजिए।\nबायां पक्ष (LHS): $\text{LCM} \times \text{HCF} = 182 \times 13 = 2366$\nदायां पक्ष (RHS): दोनों संख्याओं का गुणनफल $= 26 \times 91 = 2366$\nचूंकि LHS = RHS, संबंध सत्यापित होता है।
उत्तर (Answer): ### परिचय और ऐतिहासिक संदर्भ\nअंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic) संख्या सिद्धांत के क्षेत्र में सबसे मौलिक और शक्तिशाली परिणामों में से एक है। ऐतिहासिक रूप से, अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में भाज्य संख्याओं के गुणों को प्राचीन गणितज्ञों जैसे यूनानियों द्वारा वैचारिक रूप से समझा गया था, विशेष रूप से यूक्लिड ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'एलिमेंट्स' (विशेष रूप से पुस्तक VII) में इसके पहलुओं को छुआ था। हालाँकि, अपने पूर्ण, कठोर आधुनिक रूप में यह प्रमेय—कि $1$ से बड़ी प्रत्येक पूर्णांक संख्या या तो एक अभाज्य संख्या है या इसे अभाज्य संख्याओं के एक अद्वितीय गुणनफल के रूप में दर्शाया जा सकता है—को कार्ल फ्रेडरिक गास द्वारा अपनी 1801 की मौलिक कृति *डिस्क्विजिशनिस एरिथमेटिका* में स्पष्ट रूप से कहा गया और सिद्ध किया गया था। यह पूर्णांकों की गुणात्मक संरचना को समझने की आधारशिला के रूप में कार्य करता है।
### प्रमेय का गणितीय कथन\nऔपचारिक रूप से, अंकगणित की आधारभूत प्रमेय को इस प्रकार कहा जा सकता है:
* \textbf{कथन:} $1$ से बड़ी प्रत्येक भाज्य पूर्णांक संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में अद्वितीय रूप से गुणनखंडित किया जा सकता है, सिवाय उस क्रम के जिसमें अभाज्य गुणनखंड आते हैं।
* \textbf{बीजीय निरूपण:} यदि $n$ एक भाज्य पूर्णांक है जहाँ $n > 1$ है, तो $n$ को अद्वितीय कैनोनिकल रूप में व्यक्त किया जा सकता है:
$$n = p_1^{a_1} \cdot p_2^{a_2} \cdot p_3^{a_3} \cdots p_k^{a_k}$$
जहाँ $p_1 < p_2 < p_3 < \cdots < p_k$ भिन्न अभाज्य संख्याएँ हैं, और $a_1, a_2, a_3, \dots, a_k$ धनात्मक पूर्णांक हैं। अद्वितीयता का तात्पर्य है कि आप $n$ का गुणनखंड कैसे भी करें, आप हमेशा गुणन के क्रम की उपेक्षा करते हुए, बिल्कुल समान घातांकों के साथ बिल्कुल समान अभाज्य गुणनखंडों के समुच्चय पर पहुँचेंगे।
### मुख्य निहितार्थ और परिणाम
1. \textbf{अभाज्य गुणनखंडन की अद्वितीयता:} प्रमेय की मुख्य ताकत इसकी अद्वितीयता में है। अभाज्य संख्याओं के कोई भी दो अलग-अलग समुच्चय गुणा करके बिल्कुल समान भाज्य संख्या नहीं दे सकते।
2. \textbf{पूर्णांकों के निर्माण खंड:} अभाज्य संख्याएँ अंकगणितीय ब्रह्मांड के मूलभूत 'परमाणुओं' या निर्माण खंडों के रूप में कार्य करती हैं, जबकि भाज्य संख्याएँ गुणन के माध्यम से इन परमाणुओं को मिलाकर बनाए गए 'अणु' हैं।
3. \textbf{विभाज्यता नियमों का आधार:} यह संख्या प्रणालियों में गुणनखंडों, गुणजों और विभाज्यता नियमों को समझने के लिए एक व्यवस्थित ढांचा प्रदान करता है।
### गणित में व्यावहारिक अनुप्रयोग
* \textbf{HCF और LCM ज्ञात करना:} यह प्रमेय गुणजों या गुणनखंडों की मैन्युअल सूची बनाने के बजाय अभाज्य गुणनखंडन के माध्यम से बड़ी संख्याओं के महत्तम समापवर्तक (HCF) और लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) की गणना को कुशलतापूर्वक सक्षम बनाती है।
* \textbf{भिन्न को सरल बनाना:} परिमेय व्यंजकों और भिन्नों को उनके सरलतम निम्नतम रूपों में कम करना अंश और हर से सामान्य अभाज्य गुणनखंडों को रद्द करने पर बहुत अधिक निर्भर करता है।
* \textbf{अपरिमेयता सिद्ध करना:} यह $\sqrt{2}$, $\sqrt{3}$, या $\sqrt{5}$ जैसी संख्याओं की अपरिमेयता को प्रदर्शित करने वाले प्रमाणों में उपयोग किया जाने वाला प्राथमिक उपकरण है, विशेष रूप से इस प्रमेय के माध्यम से कि यदि कोई अभाज्य संख्या किसी संख्या के वर्ग को विभाजित करती है, तो उसे संख्या को भी विभाजित करना चाहिए।
उत्तर (Answer): ### चरण 1: दी गई संख्याओं का अभाज्य गुणनखंडन
336 और 54 का LCM और HCF ज्ञात करने के लिए, हम पहले प्रत्येक संख्या को उसके अभाज्य गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में व्यक्त करते हैं।
**336 का अभाज्य गुणनखंडन:**
- $336 \div 2 = 168$
- $168 \div 2 = 84$
- $84 \div 2 = 42$
- $42 \div 2 = 21$
- $21 \div 3 = 7$
- $7 \div 7 = 1$
\nअतः, $336$ का अभाज्य गुणनखंडन है:
$$336 = 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 3 \times 7 = 2^4 \times 3^1 \times 7^1$$
**54 का अभाज्य गुणनखंडन:**
- $54 \div 2 = 27$
- $27 \div 3 = 9$
- $9 \div 3 = 3$
- $3 \div 3 = 1$
\nअतः, $54$ का अभाज्य गुणनखंडन है:
$$54 = 2 \times 3 \times 3 \times 3 = 2^1 \times 3^3$$
---
### चरण 2: HCF की गणना\nमहत्तम समापवर्तक (HCF) संख्याओं में शामिल प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात का गुणनफल होता है।
- 336 और 54 के उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड $2$ और $3$ हैं।
- $2$ की सबसे छोटी घात $2^1$ है।
- $3$ की सबसे छोटी घात $3^1$ है।
$$\text{HCF}(336, 54) = 2^1 \times 3^1 = 2 \times 3 = 6$$
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### चरण 3: LCM की गणना\nलगुत्तम समापवर्त्य (LCM) संख्याओं में शामिल प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घात का गुणनफल होता है।
- शामिल अभाज्य गुणनखंड $2$, $3$ और $7$ हैं।
- $2$ की सबसे बड़ी घात $2^4$ है।
- $3$ की सबसे बड़ी घात $3^3$ है।
- $7$ की सबसे बड़ी घात $7^1$ है।
$$\text{LCM}(336, 54) = 2^4 \times 3^3 \times 7^1$$
$$\text{LCM}(336, 54) = 16 \times 27 \times 7$$
$$16 \times 27 = 432$$
$$432 \times 7 = 3024$$
$$\text{LCM}(336, 54) = 3024$$
---
### चरण 4: सूत्र का सत्यापन\nहमें गुणधर्म का सत्यापन करना है: $\text{LCM}(a, b) \times \text{HCF}(a, b) = a \times b$, जहाँ $a = 336$ और $b = 54$ हैं।
**बायां पक्ष (LHS) ज्ञात करना:**
$$\text{LHS} = \text{LCM} \times \text{HCF} = 3024 \times 6 = 18144$$
**दायां पक्ष (RHS) ज्ञात करना:**
$$\text{RHS} = \text{दोनों संख्याओं का गुणनफल} = 336 \times 54$$
$$336 \times 50 = 16800$$
$$336 \times 4 = 1344$$
$$16800 + 1344 = 18144$$
$$\text{RHS} = 18144$$
**अंतिम निष्कर्ष:**\nचूँकि $\text{LHS} = \text{RHS} = 18144$ है, अतः संबंध $\text{LCM} \times \text{HCF} = \text{दोनों संख्याओं का गुणनफल}$ सफलतापूर्वक सत्यापित होता है।
उत्तर (Answer): ### भाग 1: सिद्ध करना कि $\sqrt{5}$ एक अपरिमेय संख्या है
**परिचय और परिकल्पना:**\nयह सिद्ध करने के लिए कि $\sqrt{5}$ एक अपरिमेय संख्या है, हम विरोधाभास विधि (Method of Contradiction) का उपयोग करेंगे। मान लीजिए कि इसके विपरीत $\sqrt{5}$ एक परिमेय संख्या है।
**परिमेय संख्या की परिभाषा:**\nचूँकि $\sqrt{5}$ को परिमेय माना गया है, इसे $\frac{p}{q}$ के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ $p$ और $q$ पूर्णांक हैं, $q \neq 0$ है, और $p$ तथा $q$ सह-अभाज्य (co-prime) हैं (अर्थात उनका महत्तम समापवर्तक, HCF, 1 है)।
**गणितीय हल:**
$$\sqrt{5} = \frac{p}{q}$|\nसमीकरण के दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
$$5 = \frac{p^2}{q^2}$|
$$p^2 = 5q^2$$\nयह समीकरण दर्शाता है कि $5$, $p^2$ को विभाजित करता है। अंकगणित की आधारभूत प्रमेय के अनुसार, यदि कोई अभाज्य संख्या किसी पूर्णांक के वर्ग को विभाजित करती है, तो वह उस पूर्णांक को भी विभाजित करती है। इसलिए, $5$, $p$ को विभाजित करता है।
**प्रतिस्थापन:**\nचूँकि $5$, $p$ को विभाजित करता है, हम किसी पूर्णांक $c$ के लिए $p = 5c$ लिख सकते हैं। $p$ के इस मान को समीकरण में रखने पर:
$$(5c)^2 = 5q^2$$
$$25c^2 = 5q^2$$
$$q^2 = 5c^2$$\nयह समीकरण दर्शाता है कि $5$, $q^2$ को विभाजित करता है, जिसका अर्थ है कि $5$, $q$ को भी विभाजित करता है।
**विरोधाभास का निष्कर्ष:**\nहमारे निष्कर्षों से, $p$ और $q$ दोनों का एक उभयनिष्ठ गुणनखंड $5$ है। यह हमारी प्रारंभिक परिकल्पना का विरोधाभास करता है कि $p$ और $q$ सह-अभाज्य हैं। यह विरोधाभास हमारी गलत मान्यता के कारण उत्पन्न हुआ है कि $\sqrt{5}$ परिमेय है। अतः, हम निष्कर्ष निकालते हैं कि $\sqrt{5}$ एक अपरिमेय संख्या है।
### भाग 2: $\frac{13}{3125}$ का दशमलव प्रसार
**हर का अभाज्य गुणनखंडन:**\nदी गई परिमेय संख्या $r = \frac{p}{q}$ है, जहाँ $q = 3125$ है। हम हर $3125$ के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करते हैं:
$$3125 = 5 \times 5 \times 5 \times 5 \times 5 = 5^5$$
**परिमेय संख्या प्रमेय का अनुप्रयोग:**\nवास्तविक संख्याओं में प्रमेय के अनुसार, मान लीजिए $x = \frac{p}{q}$ एक परिमेय संख्या है, जैसे कि $q$ का अभाज्य गुणनखंडन $2^n 5^m$ के रूप का है, जहाँ $n$ और $m$ ऋणतर पूर्णांक हैं। तब $x$ का दशमलव प्रसार सांत होता है।
**तुलना और परिणाम:**\nयहाँ, हर $3125 = 2^0 \times 5^5$ है, जो स्पष्ट रूप से $2^n 5^m$ के रूप का है (जहाँ $n = 0$ और $m = 5$ हैं)। इसलिए, $\frac{13}{3125}$ का दशमलव प्रसार सांत है।
उत्तर (Answer): अंकगणित की आधारभूत प्रमेय के अनुसार, प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है और यह गुणनखंडन अद्वितीय होता है। यह निर्धारित करने के लिए कि दी गई व्यंजक $7 \times 11 \times 13 + 13$ एक भाज्य संख्या है या नहीं, हम पदों में से 13 को उभयनिष्ठ (common) लेकर इसे सरल कर सकते हैं। ऐसा करने पर हमें $13 \times (7 \times 11 \times 1 + 1)$ प्राप्त होता है, जो आगे सरल होकर $13 \times (77 + 1)$ बनता है, जिसका परिणाम $13 \times 78$ होता है। चूकि 78 को आगे अभाज्य गुणनखंडों $2 \times 3 \times 13$ में तोड़ा जा सकता है, इसलिए दी गई संख्या का पूर्ण अभाज्य गुणनखंडन $2 \times 3 \times 13^2$ है। चूंकि इस संख्या के 1 और स्वयं के अलावा दो से अधिक अभाज्य गुणनखंड हैं, इसलिए यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित होता है कि यह एक भाज्य संख्या है।