कक्षा 10 विज्ञान - वंशागति एवं जैव विकास (Heredity and Evolution)
#### त्वरित रिवीजन नोट्स एवं महत्वपूर्ण सूत्र
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### 1. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Important Definitions)
- वंशागति (Heredity): लक्षणों का माता-पिता से उनकी संतान में स्थानांतरण वंशागति कहलाता है।
- विभिन्नता (Variation): एक ही स्पीशीज (प्रजाति) के व्यक्तियों के बीच पाए जाने वाले अंतरों को विभिन्नता कहते हैं।
- जीन (Gene): यह डीएनए (DNA) का वह खंड है जो किसी प्रोटीन के लिए कोड करता है और आनुवंशिक लक्षणों को नियंत्रित करता है।
- युग्मविकल्पी या एलील (Allele): यह किसी जीन का एक वैकल्पिक रूप है जो किसी लक्षण को नियंत्रित करता है।
- जीनोटाइप (Genotype): किसी जीव का आनुवंशिक संगठन (Genetic constitution) उसके जीनोटाइप को दर्शाता है (जैसे-
TT, Tt, tt)।
- फेनोटाइप (Phenotype): किसी जीव की बाहरी या शारीरिक रूप से दिखाई देने वाली विशेषताएँ उसका फेनोटाइप कहलाती हैं (जैसे- लंबा पौधा या बौना पौधा)।
- समजात अंग (Homologous Organs): वे अंग जिनकी संरचना और उत्पत्ति समान होती है, लेकिन उनके कार्य भिन्न होते हैं (जैसे- मानव का हाथ और पक्षी का पंख)। यह अभिसारी नहीं बल्कि अपसारी विकास को दर्शाते हैं।
- समरूप अंग (Analogous Organs): वे अंग जो दिखने में समान और एक जैसे कार्य करते हैं, लेकिन उनकी आंतरिक संरचना और उत्पत्ति भिन्न होती है (जैसे- चमगादड़ का पंख और पक्षी का पंख)।
- श्वासोन्मुखी जीवाश्म (Fossils): प्राचीन जीवों के परिरक्षित अवशेष या चट्टानों पर छोड़ी गई उनकी छाप को जीवाश्म कहते हैं।
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### 2. मेंडल के आनुवंशिकी के नियम (Mendel's Laws of Inheritance)
ग्रेगर जॉन मेंडल को 'आनुवंशिकी का जनक' कहा जाता है। उन्होंने मटर के पौधे (Pisum sativum) पर प्रयोग किए।
- प्रभाविता का नियम (Law of Dominance): जब शुद्ध लंबे (
TT) और शुद्ध बौने (tt) पौधे के बीच संकरण कराया जाता है, तो प्रथम पीढ़ी (F1) में केवल लंबे पौधे (Tt) ही दिखाई देते हैं। जो लक्षण F1 में प्रकट होता है, उसे प्रभावी (Dominant) और जो छुप जाता है, उसे अप्रभावी (Recessive) कहते हैं।
- पृथक्करण का नियम या युग्मकों की शुद्धता का नियम (Law of Segregation): युग्मक निर्माण के समय, एलील (युग्मविकल्पी) एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक में केवल एक ही एलील जाता है।
- स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment): जब दो या दो से अधिक लक्षणों वाले जोड़ों का एक साथ संकरण कराया जाता है, तो किसी एक लक्षण की वंशागति दूसरे लक्षण से स्वतंत्र होती है।
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### 3. संकरण के अनुपात (Cross Ratios)
- एकसंकर संकरण (Monohybrid Cross):
- फेनोटाइप अनुपात (Phenotypic Ratio):
3 : 1 (तीन लंबे पौधे : एक बौना पौधा)
- जीनोटाइप अनुपात (Genotypic Ratio):
1 : 2 : 1 (शुद्ध लंबा TT : संकर लंबा Tt : शुद्ध बौना tt)
- द्विसंकर संकरण (Dihybrid Cross):
- फेनोटाइप अनुपात (Phenotypic Ratio):
9 : 3 : 3 : 1
(गोल-पीले : झुर्रीदार-पीले : गोल-हरे : झुर्रीदार-हरे)
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### 4. मानव में लिंग निर्धारण (Sex Determination in Humans)
- मनुष्यों में कुल 23 जोड़े (46) गुणसूत्र होते हैं।
- इनमें से 22 जोड़े ऑटोसोम (Autosomes) होते हैं जो नर और मादा दोनों में समान होते हैं।
- 1 जोड़ा (2 गुणसूत्र) लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) होता है:
- स्त्रियों में: दो
X गुणसूत्र होते हैं (XX)।
- पुरुषों में: एक
X और एक Y गुणसूत्र होता है (XY)।
- निष्कर्ष: बच्चे का लिंग इस बात पर निर्भर करता है कि पिता से कौन सा गुणसूत्र प्राप्त हुआ है। यदि पिता से
X गुणसूत्र मिला, तो लड़की होगी (XX) और यदि Y गुणसूत्र मिला, तो लड़का होगा (XY)।
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### 5. जैव विकास (Evolution)
- चार्ल्स डार्विन का सिद्धांत (Natural Selection): "योग्यतम की उत्तरजीविता" (Survival of the Fittest)। इसके अनुसार, प्रकृति उन्हीं जीवों का चयन करती है जो अपने परिवेश में जीने के लिए सबसे अधिक अनुकूलित होते हैं।
- स्पीशीज़ीकरण (Speciation): नई प्रजातियों का बनना। इसके मुख्य कारण हैं:
- भौगोलिक पृथक्करण (Geographical isolation)
- आनुवंशिक अपवाह (Genetic drift)
- प्राकृतिक चयन (Natural selection)
- विकास के चरण और मानव की उत्पत्ति:
- मानव विकास का अध्ययन करने पर पता चलता है कि सभी मानव प्रजातियाँ एक ही स्पीशीज (Homo sapiens) से संबंधित हैं, जो अफ्रीका में उत्पन्न हुई और पूरी दुनिया में फैल गई।