अध्याय: भारत में राष्ट्रवाद - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Revision Notes)
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महत्वपूर्ण तिथियाँ और घटनाएँ (Important Dates and Events)
- १९१४ - १९१८: प्रथम विश्व युद्ध (First World War)।
- जनवरी १९१५: महात्मा गांधी का दक्षिण भारत से भारत आगमन।
- १९१६: चंपारण सत्याग्रह (बिहार) - नील बगान के किसानों के खिलाफ।
- १९१७: खेड़ा सत्याग्रह (गुजरात) - फसल खराब होने पर मालगुजारी छूट के लिए।
- १९१८: अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन।
- मार्च १९१९: रौलट एक्ट पारित (Rowlatt Act)।
- १३ अप्रैल १९१९: जलियांवाला बाग हत्याकांड (Jallianwala Bagh Massacre)।
- १९१९: खिलाफत समिति का गठन (शौकत अली और मोहम्मद अली द्वारा)।
- सितंबर १९२०: कलकत्ता अधिवेशन - असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव।
- दिसंबर १९२०: नागपुर अधिवेशन - असहयोग आंदोलन पर मुहर।
- फरवरी १९२२: चौरी-चौरा कांड (गोरखपुर) - असहयोग आंदोलन की समाप्ति।
- जनवरी १९३०: पूर्ण स्वराज की मांग (लाहौर अधिवेशन, दिसंबर १९२९ के बाद)।
- ३१ जनवरी १९३०: गांधीजी द्वारा वायसराय इरविन को ११ सूत्री मांग पत्र सौंपना।
- १२ मार्च - ६ अप्रैल १९३०: दांडी यात्रा (Dandi March) और सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत (नमक कानून तोड़ना)।
- मार्च १९३१: गांधी-इरविन समझौता और दूसरा गोलमेज सम्मेलन।
- दिसंबर १९३१: दूसरा गोलमेज सम्मेलन (विफल)।
- सितंबर १९३२: पूना पैक्ट (Poona Pact) - महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच।
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महत्वपूर्ण अवधारणाएँ एवं परिभाषाएँ (Key Concepts & Definitions)
#### १. प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव (Impact of First World War):
- युद्ध के कारण रक्षा खर्च में भारी वृद्धि हुई, जिसे करों (Taxes) में वृद्धि और सीमा शुल्क बढ़ाकर पूरा किया गया।
- कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं।
- गाँवों से सिपाहियों को जबरन भर्ती किया गया, जिससे ग्रामीण इलाकों में भारी गुस्सा था।
- १९१८-१९ और १९२१-२२ में फसल खराब होने और इन्फ्लूएंजा महामारी के कारण लाखों लोग मारे गए।
#### २. सत्याग्रह का विचार (Idea of Satyagraha):
- यह जन-संघर्ष की एक नवीन पद्धति थी जो सत्य और अहिंसा पर आधारित थी।
- इसके अनुसार, यदि आपका उद्देश्य सच्चा है, यदि अन्याय के खिलाफ आपकी लड़ाई है, तो उत्पीड़क से मुकाबला करने के लिए किसी शारीरिक बल की आवश्यकता नहीं है।
#### ३. रौलट एक्ट (Rowlatt Act - १९१९):
- इसे इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा जल्दबाजी में पारित किया गया था।
- इसके तहत भारतीयों पर बिना किसी मुकदमे के दो साल तक जेल में बंद रखने का अधिकार सरकार को मिल गया था।
- गांधीजी ने इसके खिलाफ 'रौलट सत्याग्रह' शुरू किया।
#### ४. जलियांवाला बाग हत्याकांड (Jallianwala Bagh Massacre):
- १३ अप्रैल १९१९ को अमृतसर के जलियांवाला बाग में लोग बैसाखी मेले और रौलट एक्ट के विरोध में शांतिपूर्ण सभा के लिए जमा हुए थे।
- जनरल डायर ने बाहर निकलने के रास्ते बंद कर दिए और निहत्थी भीड़ पर गोलियां चलवा दीं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए।
#### ५. खिलाफत आंदोलन (Khilafat Movement):
- प्रथम विश्व युद्ध में ऑटोमन तुर्की की हार हुई थी। ऐसी अफवाह थी कि इस्लामिक दुनिया के आध्यात्मिक नेता (खलीफ) पर बहुत सख्त शांति संधि थोपी जाएगी।
- खलीफा की शक्ति की रक्षा के लिए भारत में शौकत अली और मोहम्मद अली बंधुओं ने खिलाफत समिति का गठन किया। गांधीजी ने इसे असहयोग आंदोलन से जोड़ने का अवसर देखा।
#### ६. असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement):
- कारण: रौलट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड और खिलाफत मुद्दा।
- कार्यक्रम: सरकारी नौकरियों, उपाधियों, विदेशी वस्तुओं, स्कूलों, अदालतों का बहिष्कार करना और स्वदेशी को अपनाना।
- चौरी-चौरा कांड (फरवरी १९२२): गोरखपुर के चौरी-चौरा में एक शांतिपूर्ण जुलूस हिंसक झड़प में बदल गया और थाने में आग लगा दी गई जिसमें २२ पुलिसकर्मी मारे गए। इससे आहत होकर गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
#### ७. साइमन कमीशन (Simon Commission - १९२७):
- जॉन साइमन के नेतृत्व में गठित इस आयोग को भारत में संवैधानिक व्यवस्था की कार्यशैली की जाँच करनी थी और बदलाव सुझाने थे।
- विरोध क्यों: इसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था (सभी गोरे थे)। भारत पहुंचते ही इसका स्वागत "साइमन वापस जाओ" (Simon Go Back) के नारों और काले झंडों से किया गया।
#### ८. पूर्ण स्वराज (Purna Swaraj):
- दिसंबर १९२९ में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज' (पूर्ण स्वतंत्रता) की मांग को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया।
- २६ जनवरी १९३० को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया गया।
#### ९. सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement):
- दांडी यात्रा: गांधीजी ने अपने ७८ भरोसेमंद स्वयंसेवकों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक ३४० किलोमीटर की यात्रा की।
- ६ अप्रैल १९३० को उन्होंने दांडी में नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा और सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की।
- यह असहयोग से अलग था क्योंकि इसमें अंग्रेजों के कानूनों का उल्लंघन करना शामिल था।
#### १०. पूना पैक्ट (Poona Pact - सितंबर १९३२):
- डॉ. बी.आर. अंबेडकर और महात्मा गांधी के बीच हुआ समझौता।
- इसके तहत दलित वर्गों (Depressed Classes) को प्रांतीय और केंद्रीय विधान परिषदों में आरक्षित सीटें मिल गईं, लेकिन उनके लिए मतदान सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों से ही होना तय हुआ।
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राष्ट्रवाद की भावना जगाने वाले प्रतीक (Symbols of Nationalism)
- भारत माता की छवि: पहली बार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 'वंदे मातरम' गीत के साथ इसकी कल्पना की गई। बाद में अभिनेंद्रनाथ टैगोर ने भारत माता को एक शांत, देवी-स्वरूप और आध्यात्मिक छवि में चित्रित किया।
- तिरंगा झंडा: स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल में एक तिरंगा झंडा (हरा, पीला, लाल) डिजाइन किया गया जिस पर कमल के आठ फूल (ब्रिटिश भारत के आठ प्रांतों के प्रतीक) और अर्धचंद्र (हिंदू-मुस्लिम का प्रतीक) थे। बाद में गांधीजी ने १९२१ तक स्वराज का तिरंगा झंडा (सफेद, हरा और लाल, बीच में चरखा) तैयार कर लिया।
- लोक कथाओं का पुनरुद्धार: राष्ट्रवाद की भावना जगाने के लिए लोक कथाओं, गीतों और गाथाओं को सहेजा गया। रवींद्रनाथ टैगोर और नटशास्त्री इन्द्रा ने दक्षिण भारत में लोक कथाओं का संकलन (द Folklore of Southern India) किया।