अध्याय: दिल्ली: 12वीं से 15वीं शताब्दी - त्वरित रिवीजन नोट्स
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मुख्य अवधारणाएँ और राजवंश
इस काल में दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत पाँच प्रमुख वंशों ने शासन किया। इन सभी के शासकों को 'सुल्तान' कहा जाता था।
1. राजपूत वंश (12वीं शताब्दी के मध्य से 1193 तक):
- तोमर राजपूत: इनके काल में दिल्ली सबसे पहले एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्र बनी। अनंगपाल तोमर के काल में दिल्ली का विकास हुआ।
- चौहान (चाहमान): अजमेर के चौहान (जैसे पृथ्वीराज चौहान) ने तोमरों को हराया और दिल्ली पर नियंत्रण किया।
2. प्रारंभिक तुर्क शासक (1206 - 1290):
- इन्हें आमतौर पर 'गुलाम वंश' कहा जाता है।
- प्रमुख शासक: कुतुबुद्दीन ऐबक, शम्सुद्दीन इल्तुतमिश और रजिया सुल्तान।
- विशेषता: रजिया सुल्तान (1236 ई.) दिल्ली की पहली महिला शासिका थीं। मिनहाज-ए-सिराज ने माना कि रजिया अपने भाइयों से अधिक योग्य थीं।
3. खलजी वंश (1290 - 1320):
- प्रमुख शासक: जलालुद्दीन खलजी और अलाउद्दीन खलजी।
- विशेषता: अलाउद्दीन खलजी ने मंगोल आक्रमणकारियों से निपटने के लिए अपनी सेना को मजबूत किया और बाजार नियंत्रण प्रणाली लागू की।
4. तुगलक वंश (1320 - 1414):
- प्रमुख शासक: ग्यासुद्दीन तुगलक, मुहम्मद बिन तुगलक और फीरोज़ शाह तुगलक।
- विशेषता: मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलतबाद (दक्षिण भारत) स्थानांतरित की, जिसे बाद में पुनः दिल्ली लाना पड़ा।
5. सैयद वंश (1414 - 1451):
6. लोदी वंश (1451 - 1526):
- प्रमुख शासक: बहलोल लोदी और इब्राहिम लोदी।
- विशेषता: यह अफगान मूल का राजवंश था। 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया, जिसके साथ दिल्ली सल्तनत का अंत हो गया और मुगल साम्राज्य की नींव पड़ी।
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प्रशासन और नियंत्रण की व्यवस्था
- इक्ता प्रणाली (Iqta System):
- दिल्ली के सुल्तानों द्वारा सैन्य अभियानों के लिए भूमि दी जाती थी, जिसे 'इक्ता' कहा जाता था और इसके भू-स्वामी को 'इक्तेदार' या 'मुक्ती' कहा जाता था।
- मुक्ती का मुख्य कार्य सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना और अपने इक्ता से राजस्व (कर) एकत्र करना था।
- कर के प्रकार:
- खराज (Kharaj): यह किसानों की उपज पर लगने वाला कर था, जो उनकी फसल का लगभग 50% होता था।
- इसके अलावा मवेशियों और घरों पर भी कर लगाए जाते थे।
- आंतरिक और बाह्य सीमा:
- भीतरी क्षेत्र (Hinterland): शहर के आसपास के इलाके जो शहरों के लिए वस्तुएं और भोजन की आपूर्ति करते थे।
- किला बंद शहर: मंगोलों के आक्रमणों से बचने के लिए सुल्तानों ने मजबूत किलेबंद बस्तियां बसाईं।
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महत्वपूर्ण शब्दावली
- तवारीख (Tawarikh): फारसी भाषा में लिखे गए इतिहास, जो सुल्तानों के शासनकाल की जानकारी देते हैं। इन्हें लिखने वाले 'तवारिख के लेखक' (सचिव, प्रशासक, कवि) होते थे जो नगरों में रहते थे।
- बन्दगां (Bandgan): गुलाम जिन्हें विशेष रूप से सैन्य सेवा के लिए खरीदा जाता था। सुल्तान उन पर अत्यधिक विश्वास करते थे।
- उलेमा (Ulema): इस्लाम धर्म के विद्वान और धार्मिक मामलों के सलाहकार।
- मस्जिद (Masjid): अरबी शब्द, जिसका अर्थ है वह स्थान जहाँ मुसलमान अल्लाह के सामने सजदा (प्रणाम) करते हैं। जुमे की नमाज के लिए 'जामिया मस्जिद' का प्रयोग होता था।
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वास्तुकला और निर्माण कार्य
- दिल्ली के सुल्तानों ने कई भव्य इमारतों, मस्जिदों और मीनारों का निर्माण कराया।
- कुतुब मीनार: इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने लगभग 1199 में शुरू करवाया था और बाद में इल्तुतमिश तथा फिरोज शाह तुगलक ने इसका जीर्णोद्धार कराया।
- कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद: यह दिल्ली के सुल्तानों द्वारा बनाई गई पहली जामा मस्जिद थी।
यह त्वरित नोट्स कक्षा 7 के सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम के अनुसार परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
उत्तर (Answer): प्रार्थना के दौरान, मुसलमान मक्का की ओर मुँह करके खड़े होते हैं, और इस दिशा को किबला कहा जाता है।
उत्तर (Answer): चंगेज खान और उसके उत्तराधिकारियों के नेतृत्व में मंगोल आक्रमणों ने दिल्ली सल्तनत के लिए एक बड़ा खतरा पैदा किया, जिससे अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद तुगलक जैसे शासकों को बड़ी स्थायी सेना रखने के लिए मजबूर होना पड़ा।