अध्याय: वायु (Air) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स
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मुख्य परिभाषाएँ (Key Definitions)
- वायुमंडल (Atmosphere): हमारी पृथ्वी चारों ओर से वायु की एक घني चादर से घिरी हुई है, जिसे वायुमंडल कहते हैं। पृथ्वी पर सभी जीव जीवित रहने के लिए वायुमंडल पर निर्भर हैं।
- मौसम (Weather): यह वायुमंडल की प्रत्येक दिन की ‘दिन-प्रतिदिन’ की स्थिति होती है। इसमें तापमान, वर्षा, वायुदाब आदि शामिल हैं।
- जलवायु (Climate): किसी स्थान का औसत मौसम की स्थिति जो लंबी अवधि (लगभग 25 वर्ष या उससे अधिक) में मापी जाती है, उस स्थान की जलवायु कहलाती है।
- तापमान (Temperature): वायु में मौजूद तापमान और शीतलता के परिमाण को तापमान कहते हैं।
- वायुदाब (Air Pressure): पृथ्वी की सतह पर वायु के भार द्वारा लगाया जाने वाला दाब वायुदाब कहलाता है।
- पवन (Wind): उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर वायु की गति को पवन कहते हैं।
- आर्द्रता (Humidity): वायु में किसी भी समय जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं।
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वायुमंडल की परतें (Layers of the Atmosphere)
वायुमंडल को पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर पाँच परतों में विभाजित किया गया है:
1. क्षोभ मंडल (Troposphere):
- यह वायुमंडल की सबसे महत्वपूर्ण परत है।
- इसकी औसत ऊँचाई 13 किमी है।
- हम जो हवा साँस लेते हैं वह यहीं मौजूद है।
- मौसम की सभी घटनाएँ (जैसे वर्षा, कोहरा और ओलावृष्टि) इसी परत में होती हैं।
2. समताप मंडल (Stratosphere):
- क्षोभ मंडल के ऊपर समताप मंडल होता है।
- यह 50 किमी की ऊँचाई तक फैला है।
- यह परत बादलों और मौसम की घटनाओं से मुक्त है, इसलिए हवाई जहाज उड़ाने के लिए आदर्श है।
- इसमें ओजोन गैस की परत होती है जो सूर्य की हानिकारक किरणों से हमारी रक्षा करती है।
3. मध्य मंडल (Mesosphere):
- यह वायुमंडल की तीसरी परत है।
- यह समताप मंडल के ऊपर होती है और 80 किमी की ऊँचाई तक फैली है।
- अंतरिक्ष से प्रवेश करने वाले उल्कापिंड इस परत में आने पर जल जाते हैं।
4. बाह्य वायुमंडल / आयन मंडल (Thermosphere / Ionosphere):
- इस परत में बढ़ती ऊँचाई के साथ तापमान अत्यधिक तीव्रता से बढ़ता है।
- आयनमंडल इसका एक भाग है जो 80 से 400 किमी तक फैला है।
- यह रेडियो संचार में मदद करता है। पृथ्वी से प्रसारित रेडियो तरंगें इस परत द्वारा वापस पृथ्वी पर परावर्तित की जाती हैं।
5. बहिर्मंडल (Exosphere):
- वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत को बहिर्मंडल कहते हैं।
- यहाँ हल्की गैसें (जैसे हीलियम और हाइड्रोजन) अंतरिक्ष में तैरती रहती हैं।
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वायुमंडल की संरचना (Composition of the Atmosphere)
हमारी पृथ्वी का वायुमंडल मुख्य रूप से नाइट्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बना है, जो वायुमंडल का बड़ा भाग बनाते हैं:
- नाइट्रोजन (Nitrogen) - 78%: यह वायुमंडल में सबसे अधिक पाई जाने वाली गैस है। यह पौधों के विकास के लिए आवश्यक है।
- ऑक्सीजन (Oxygen) - 21%: यह साँस लेने के लिए आवश्यक गैस है। मनुष्य और पशु साँस लेने में इसका उपयोग करते हैं।
- आर्गन (Argon) - 0.93%
- कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) - 0.03%: यह पृथ्वी द्वारा विकृत ऊष्मा को रोककर ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा करती है।
- अन्य सभी गैसें - 0.04%
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पवन के प्रकार (Types of Winds)
पवन को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
1. व्यापारिक पवनें (Permanent Winds):
- व्यापारिक पवनें, पश्चिमी पवनें और पूर्वी पवनें स्थायी पवनें हैं।
- ये वर्षभर लगातार एक निश्चित दिशा में बहती रहती हैं।
2. मौसमी पवनें (Seasonal Winds):
- ये पवनें विभिन्न ऋतुओं में अपनी दिशा बदलती रहती हैं।
- उदाहरण: भारत में मानसून पवनें।
3. स्थानीय पवनें (Local Winds):
- ये किसी विशेष क्षेत्र में वर्ष या दिन के किसी विशेष समय में ही चलती हैं।
- उदाहरण: भारत के उत्तर क्षेत्र की गर्म एवं शुष्क स्थानीय पवन, जिसे ‘लू’ कहते हैं।
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वर्षा के प्रकार (Types of Rainfall)
वर्षन के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं:
1. संवहनी वर्षा (Convectional Rainfall): गर्म वायु ऊपर उठती है, ठंडी होती है और वर्षा करती है।
2. पर्वतीय वर्षा (Orographic / Relief Rainfall): जब नम हवा पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती है और ठंडी होकर बारिश करती है।
3. चक्रवातीय वर्षा (Cyclonic Rainfall): गर्म और ठंडी हवाओं के मिलने से चक्रवात के कारण होने वाली वर्षा।