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ग्रामीण क्षेत्र पर शासन चलाना

Subject: सामाजिक विज्ञान | Class: Class 8 | Syllabus Year: 2025-26
मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान: ग्रामीण क्षेत्र पर शासन चलाना (Ruling the Countryside) - त्वरित संशोधन नोट्स

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मुख्य अवधारणाएँ और परिभाषाएँ (Key Concepts & Definitions)

1. दीवानी (Diwani): 12 अगस्त 1765 को मुगल बादशाह ने ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल की 'दीवानी' सौंप दी। इसके तहत कंपनी को बंगाल प्रान्त के आर्थिक मामलों का मुख्य नियंत्रक बना दिया गया और उसे अपने भू-क्षेत्र के कर (लगभग राजस्व) वसूलने का अधिकार मिल गया।


2. खुशखुश (Khushkhush) / नील की खेती की प्रणालियाँ:


3. महाल् (Mahal): ब्रिटिश राजस्व दस्तावेजों में 'महाल्' एक राजस्व इकाई थी। यह एक गाँव या गाँवों का समूह हो सकता था।


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प्रमुख भू-राजस्व व्यवस्थाएँ (Major Land Revenue Systems)

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारत में कृषि से अधिक आय प्राप्त करने के लिए तीन मुख्य राजस्व प्रणालियाँ लागू की गईं:


#### 1. स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) - 1793


#### 2. रयतवाड़ी व्यवस्था (Ryotwari System) - रैयतवार व्यवस्था


#### 3. महालवाड़ी व्यवस्था (Mahalwari System) - 1822


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नील की खेती और समस्याएँ (Indigo Cultivation and Problems)

1. मांग: यूरोप में कपड़ा उद्योग के विस्तार के कारण नील (Indigo) की भारी मांग थी, जिससे कपड़े को चमकीला नीला रंग मिलता था। भारतीय नील की ब्रिटेन में बहुत अधिक मांग थी।


2. खेती की समस्या (निज् खेती की सीमाएँ):


3. रयतों की असंतुष्टि:


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महत्वपूर्ण विद्रोह (Important Rebellion)

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 कक्षा 8: सामाजिक विज्ञान - ग्रामीण क्षेत्र पर शासन चलाना
Overview
कंपनी का दीवान बनना बंगाल की दीवानी मिलना (1765) कंपनी का मुख्य वित्त प्रशासक बनना पारंपरिक व्यवस्था पर नियंत्रण कंपनी के लिए आमदनी बंगाल की अर्थव्यवस्था का संकट किसानों पर भारी कर (लगान) कारीगरों का पलायन 1770 का भयानक अकाल खेती में सुधार और राजस्व नीतियां स्थाई बंदोबस्त (1793) लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा लागू राजाओं और तालुकेदारों को जमींदार बनाना निश्चित राजस्व तय करना जमींदारों की समस्या और किसानों का शोषण महालवाड़ी व्यवस्था होल्ट मैकेंजी द्वारा तैयार (1822) गाँव (महाल) के हिसाब से राजस्व तय करना समय-समय पर राजस्व में संशोधन रयतवाड़ी व्यवस्था (मुनरो व्यवस्था) दक्षिण भारत में लागू थॉमस मुनरो द्वारा विकसित सीधे किसानों (रैयत) के साथ अनुबंध यूरोप के लिए फसलें (व्यापारीक फसलें) अफीम और चाय का उत्पादन जबरन फसलें उगवाना नील की खेती की मांग नील की खेती नील का महत्व और मांग (कैरेबियन और अमेरिका में संकट) भारत में नील उत्पादन के दो मुख्य तरीके निज खेती रयती खेती नील की खेती की समस्याएं उपजाऊ जमीन पर खेती की बाध्यता कम कीमत और किसानों का कर्ज में डूबना नील विद्रोह और उसके बाद बंगाल के किसानों का विद्रोह (मार्च 1859) नील की खेती से इनकार जमींदारों और गोमांसों पर हमले बुद्धिजीवियों और समाचार पत्रों का समर्थन नील आयोग का गठन (जांच और सिफारिशें) बंगाल में नील उत्पादन का अंत और बिहार में आंदोलन (चंपारण)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. महाल्वाड़ी व्यवस्था प्रणाली में 'महल' क्या था? 1 Marks
उत्तर (Answer): महाल्वाड़ी प्रणाली में, 'महल' एक राजस्व संपदा को संदर्भित करता था, जो एक ही गाँव या गाँवों का समूह हो सकता था।
Q2. अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक भारतीय नील के लिए ब्रिटिश मांग में महत्वपूर्ण वृद्धि क्यों हुई? 1 Marks
उत्तर (Answer): ब्रिटेन में औद्योगीकरण ने कपास उत्पादन का विस्तार किया, जिससे वस्त्रों को रंगने के लिए नीले रंग की भारी मांग पैदा हुई।
Q3. 1860 में अपनी जाँच के बाद नील आयोग (Indigo Commission) ने क्या घोषणा की? 1 Marks
उत्तर (Answer): आयोग ने बागान मालिकों की आलोचना की, नील की खेती को अलोकप्रिय घोषित किया और रैयतों से कहा कि वे मौजूदा अनुबंधों को पूरा कर सकते हैं लेकिन भविष्य के अनुबंधों से इनकार कर सकते हैं।
Q4. किसानों के लिए निज खेती प्रणाली की एक प्रमुख कमी क्या थी? 1 Marks
उत्तर (Answer): निज खेती के लिए बड़ी संख्या में हल और बैलों की आवश्यकता होती थी, जिन्हें छोटे किसानों के लिए जुटाना बेहद कठिन था।
Q5. स्थाई बंदोबस्त ने राजाओं और तालुकदारों के लिए समस्याएं क्यों पैदा कीं? 1 Marks
उत्तर (Answer): स्थाई बंदोबस्त के तहत राजस्व की मांग इतनी अधिक तय की गई थी कि राजा और तालुकदार अक्सर भुगतान करने में असफल रहते थे, जिससे उनकी जमींदारियाँ नीलाम हो जाती थीं।
Q6. महात्मा गांधी ने बाद में 1917 में किस भारतीय क्षेत्र में नील किसानों की ओर से हस्तक्षेप किया था? 1 Marks
उत्तर (Answer): महात्मा गांधी ने 1917 में बिहार के चंपारण का दौरा किया, जो नील बागान मालिकों के खिलाफ चंपारण सत्याग्रह की शुरुआत थी।
Q7. ब्रिटिश अधिकारियों ने बंगाल में किसानों को नील के अलावा कौन सी फसल उगाने के लिए मजबूर किया? 1 Marks
उत्तर (Answer): अफीम एक अन्य प्रमुख फसल थी जिसे ब्रिटिश अधिकारियों ने बंगाल में किसानों को नील के साथ-साथ उत्पादित करने के लिए मजबूर किया था।
Q8. दक्षिण भारत में किस ब्रिटिश अधिकारी ने रैयतवाड़ी प्रणाली की शुरुआत की थी? 1 Marks
उत्तर (Answer): थॉमस मुनरो ने दक्षिण भारत में रैयतवाड़ी प्रणाली विकसित और शुरू की थी।
Q9. बागान मालिकों के लिए निज खेती का विस्तार करना क्यों कठिन था? 1 Marks
उत्तर (Answer): बागान मालिकों को उपजाऊ भूमि के बड़े टुकड़े आसानी से नहीं मिलते थे और बड़ी संख्या में मजदूरों की व्यवस्था करने में कठिनाई होती थी।
Q10. 1859 के विद्रोह के बाद सरकार द्वारा नील उत्पादन प्रणाली की जाँच के लिए गठित समिति का क्या नाम था? 1 Marks
उत्तर (Answer): नील उत्पादन प्रणाली की जाँच के लिए सरकार द्वारा नील आयोग (Indigo Commission) का गठन किया गया था।
Q11. बंगाल में नील किसानों ने कब नील की खेती करने से इनकार कर दिया और एक बड़ा विद्रोह शुरू किया? 1 Marks
उत्तर (Answer): मार्च 1859 में, बंगाल में हजारों रैयतों ने नील उगाने से इनकार कर दिया और बागान मालिकों के खिलाफ विद्रोह कर दिया।
Q12. नील की खेती की रैयती व्यवस्था के तहत, अनुबंध (सत्ता) पर हस्ताक्षर कौन करते थे? 1 Marks
उत्तर (Answer): रैयतों (किसानों) को अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जाता था, कभी-कभी बागान मालिकों की ओर से ग्राम प्रधानों द्वारा दबाव डाला जाता था।
Q13. उस भूमि पर नील की खेती के लिए किस शब्द का प्रयोग किया जाता था जिस पर planters (बागान मालिकों) का सीधा नियंत्रण होता था? 1 Marks
उत्तर (Answer): निज खेती वह प्रणाली थी जहाँ बागान मालिक उस भूमि पर नील का उत्पादन करता था जिस पर उसका सीधा नियंत्रण होता था।
Q14. फ्रांसीसियों और पुर्तगालियों ने अमेरिका और कैरिबियन में नील की खेती शुरू करने का मुख्य कारण क्या था? 1 Marks
उत्तर (Answer): सेंट डोमिंग और ब्राजील जैसे उपनिवेशों में उष्णकटिबंधीय जलवायु और मौजूदा बागानों ने नील उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान कीं।
Q15. ब्रिटिश कपड़ा निर्माता कपड़े को रंगने के लिए वोड (woad) के मुकाबले नील (indigo) को क्यों प्राथमिकता देते थे? 1 Marks
उत्तर (Answer): नील से गहरा नीला रंग मिलता था, जबकि वोड आधारित कपड़ा हल्का और फीका होता था।