कक्षा: 9वीं
विषय: गणित (MP Board)
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1. रेखाखंड (Line Segment): एक रेखा का वह भाग जिसके दो अंतःबिंदु (endpoints) होते हैं।
2. किरण (Ray): एक रेखा का वह भाग जिसका एक अंतःबिंदु होता है और वह एक दिशा में अनंत तक बढ़ती है।
3. संरेख बिंदु (Collinear Points): यदि तीन या तीन से अधिक बिंदु एक ही सीधी रेखा पर स्थित हों, तो उन्हें संरेख बिंदु कहते हैं, अन्यथा वे असंरेख बिंदु (Non-collinear points) कहलाते हैं।
4. कोण (Angle): जब दो किरणें एक ही अंतःबिंदु से प्रारंभ होती हैं, तो एक कोण बनता है। इन किरणों को कोण की भुजाएँ (arms) और उभयनिष्ठ अंतःबिंदु को कोण का शीर्ष (vertex) कहते हैं।
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1. न्यून कोण (Acute Angle): वह कोण जो 0° से अधिक और 90° से कम होता है। ($0^\circ < x < 90^\circ$)
2. समकोण (Right Angle): वह कोण जो ठीक 90° का होता है। ($x = 90^\circ$)
3. अधिक कोण (Obtuse Angle): वह कोण जो 90° से अधिक और 180° से कम होता है। ($90^\circ < x < 180^\circ$)
4. ऋजु कोण (Straight Angle): वह कोण जो ठीक 180° का होता है। ($x = 180^\circ$)
5. प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle): वह कोण जो 180° से अधिक और 360° से कम होता है। ($180^\circ < x < 360^\circ$)
6. पूरक कोण (Complementary Angles): यदि दो कोणों के मापों का योग 90° हो, तो वे पूरक कोण कहलाते हैं।
7. संपूरक कोण (Supplementary Angles): यदि दो कोणों के मापों का योग 180° हो, तो वे संपूरक कोण कहलाते हैं।
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1. आसन्न कोण (Adjacent Angles): दो कोण आसन्न कोण कहलाते हैं, यदि:
2. खिक युग्म (Linear Pair): आसन्न कोणों का ऐसा युग्म, जिनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ विपरीत किरणें हों, रैखिक युग्म बनाते हैं।
3. शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles): जब दो रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करती हैं, तो आमने-सामने के कोण शीर्षाभिमुख कोण कहलाते हैं।
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जब एक तिर्यक रेखा (transversal line) दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है, तो निम्नलिखित कोण बनते हैं:
1. संगत कोण (Corresponding Angles): प्रत्येक संगत कोण युग्म आपस में बराबर होता है। ($\angle 1 = \angle 5$, $\angle 2 = \angle 6$, आदि)
2. एकान्तर अंतः कोण (Alternate Interior Angles): प्रत्येक एकान्तर अंतः कोण युग्म बराबर होता है। ($\angle 3 = \angle 6$, $\angle 4 = \angle 5$)
3. एकान्तर बाह्य कोण (Alternate Exterior Angles): प्रत्येक एकान्तर बाह्य कोण युग्म बराबर होता है।
4. तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण (Consecutive Interior Angles / Co-interior Angles): तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° होता है।
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1. त्रिभुज के कोणों का योग: एक त्रिभुज के तीनों आंतरिक कोणों का योग 180° होता है।
2. त्रिभुज का बहिष्कोण गुण (Exterior Angle Property): यदि किसी त्रिभुज की एक भुजा को बढ़ाया जाए, तो इस प्रकार बना बहिष्कोण (exterior angle), दोनों सुदूर (remote) अंतः कोणों के योग के बराबर होता है।