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ध्वनि

Subject: विज्ञान | Class: Class 9 | Syllabus Year: 2025-26
मुख्य सूत्र (Key Formulas)

त्वरित पुनराव रिवीजन नोट्स (Quick Revision Notes)

कक्षा: 9वीं - विज्ञान

अध्याय: ध्वनि (Sound)

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### अवधारणा 1: ध्वनि की उत्पत्ति और प्रकृति (Origin and Nature of Sound)

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### अवधारणा 2: तरंगों के प्रकार (Types of Waves)

माध्यम के कणों के कंपन करने की दिशा के आधार पर तरंगें दो प्रकार की होती हैं:


1. अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves):


2. प्रस्थ तरंगें (Transverse Waves):


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### अवधारणा 3: ध्वनि तरंग के अभिलाक्षणिक गुण (Characteristics of Sound Wave)

एक ध्वनि तरंग को निम्नलिखित चार मुख्य गुणों द्वारा परिभाषित किया जाता है:


1. आवृत्ति (Frequency - $\nu$ या $f$):


2. आवर्तकाल (Time Period - $T$):


3. आयाम (Amplitude - $A$):


4. तरंगदैर्ध्य (Wavelength - $\lambda$):


5. वेग / चाल (Speed - $v$):


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### महत्वपूर्ण सूत्र (Key Formulas)

1. तरंग का वेग, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य में संबंध:

v = \lambda \times f

(यहाँ $v$ = वेग, $\lambda$ = तरंगदैर्ध्य, $f$ = आवृत्ति)


2. आवर्तकाल और आवृत्ति का संबंध:

T = 1 / f

f = 1 / T


3. ध्वनि की चाल (सूत्र):

v = d / t

(यहाँ $d$ = तय की गई दूरी, $t$ = लिया गया समय)


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### अवधारणा 4: ध्वनि के परावर्तन के नियम (Laws of Reflection of Sound)

ध्वनि भी प्रकाश की तरह किसी सतह से टकराकर वापस लौटती है। इसे ध्वनि का परावर्तन कहते हैं।

1. आपतित ध्वनि तरंग, परावर्तित ध्वनि तरंग और अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।

2. आपतन कोण ($\angle i$) हमेशा परावर्तन कोण ($\angle r$) के बराबर होता है:

\angle i = \angle r



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### अवधारणा 5: श्रव्यता का परिसर (Range of Hearing)

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### अवधारणा 6: पराश्रव्य ध्वनि के उपयोग (Applications of Ultrasound)

1. जहाजों द्वारा समुद्र की गहराई मापने में (SONAR तकनीक)।

2. चिकित्सा क्षेत्र में अंगों के चित्र लेने में (जैसे अल्ट्रासाउंड स्कैन)।

3. कारखानों में धातु की चादरों में दोष (Cracks) का पता लगाने में।

4. चमगादड़ों द्वारा अपना शिकार खोजने और अंधेरे में उड़ने में।


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### अवधारणा 7: सोनार (SONAR)

2d = v \times t

(यहाँ $d$ = वस्तु की गहराई/दूरी, $v$ = पानी में ध्वनि की चाल, $t$ = जाने और आने में कुल समय)

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 ध्वनि (Sound)
Overview
ध्वनि का उत्पादन और प्रकृति ऊर्जा का रूप कंपन (Vibration) द्वारा उत्पन्न यांत्रिक तरंग (Mechanical Wave) ध्वनि का संचरण (Propagation of Sound) माध्यम की आवश्यकता (ठोस, द्रव, गैस) निर्वात में गमन असंभव कणों का दोलन (आगे-पीछे गति) तरंग के प्रकार अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal Wave) संपीडन (Compression) विरलन (Rarefaction) अनुप्रस्थ तरंग (Transverse Wave) ध्वनि तरंगों के अभिलाक्षणिक गुण (Characteristics of Sound Wave) आवृत्ति (Frequency - $\nu$) मात्रਕ: हर्ट्ज़ (Hz) आयाम (Amplitude - $A$) प्रबलता (Loudness) से संबंध आवर्तकाल (Time Period - $T$) तरंगदैर्ध्य (Wavelength - $\lambda$) मात्रक: मीटर (m) वेग या चाल (Speed - $v$) सूत्र: $v = \lambda \times \nu$ तारत्व (Pitch) आवृत्ति पर निर्भर ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) परावर्तन के नियम प्रतिध्वनि (Echo) न्यूनतम दूरी: 17.2 मीटर अनुगुंण (Reverberation) बहुपरिवर्तन का प्रभाव अनुप्रयोग मेगाफोन / हॉर्न स्टेथोस्कोप कॉन्सर्ट हॉल की छतें पराश्रव्य ध्वनियाँ (Ultrasound) 20,000 हर्ट्ज़ से अधिक आवृत्ति अनुप्रयोग सोनार (SONAR) - समुद्र की गहराई मापना चिकित्सा में अल्ट्रासाउंड (Echocardiography) चमगादड़ द्वारा शिकार की खोज मानव कान (Human Ear) श्रवण तंत्र बाहरी कान (कर्ण पल्लव) मध्य कान (कर्ण अस्थियाँ) भीतरी कान (कर्णावर्त / Cochlea) मस्तिष्क तक सिग्नल भेजना
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. प्रतिध्वनि (Echo) क्या है? मनुष्य के कान द्वारा एक स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक दो शर्तों का उल्लेख कीजिए। 2 Marks
उत्तर (Answer): किसी दूर स्थित कठोर अवरोधक (जैसे दीवार, भवन या पहाड़) से ध्वनि तरंगों के टकराकर परावर्तित होने के कारण मूल ध्वनि का पुनः सुनाई देना **प्रतिध्वनि (Echo)** कहलाता है। \nएक स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए निम्नलिखित दो आवश्यक शर्तें हैं: 1. **समय अंतराल:** मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के बीच का समय अंतराल कम से कम **0.1 सेकंड** होना चाहिए, क्योंकि मानव मस्तिष्क में ध्वनि का प्रभाव लगभग 0.1 सेकंड (ध्वनि की सुदृढ़ता) तक रहता है। 2. **न्यूनतम दूरी:** ध्वनि के स्रोत और परावर्तक सतह के बीच की न्यूनतम दूरी कम से कम **17.2 मीटर** ( $22^\circ\text{C}$ पर वायु में ध्वनि की चाल $344\text{ m/s}$ मानते हुए) होनी चाहिए ताकि परावर्तित ध्वनि कान तक पहुँचने में कम से कम 0.1 सेकंड का समय ले सके।
Q2. पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasound) क्या है? धातु के ब्लॉकों में दरारों और दोषों का पता लगाने के लिए पराश्रव्य ध्वनि का उपयोग संक्षेप में समझाइए। 2 Marks
उत्तर (Answer): **पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasound)** उन ध्वनि तरंगों को कहा जाता है जिनकी आवृत्ति $20,000 \text{ Hz}$ ($20 \text{ kHz}$) से अधिक होती है, जो मानव कान की श्रव्य सीमा से परे हैं। **धातु के ब्लॉकों में दरारों का पता लगाना:** 1. परीक्षण किए जाने वाले धातु के ब्लॉक के माध्यम से उच्च आवृत्ति वाली पराश्रव्य तरंगें गुजारी जाती हैं। 2. संचारित तरंगों को प्राप्त करने के लिए दूसरी ओर डिटेक्टर्स (संसूचक) लगाए जाते हैं। 3. यदि ब्लॉक के अंदर कोई छोटी सी दरार या आंतरिक दोष होता है, तो पराश्रव्य तरंगें पूरी तरह से पार होने के बजाय उस दोष वाले स्थान से वापस परावर्तित हो जाती हैं। 4. इसके परिणामस्वरूप, तरंगें उस बिंदु पर डिटेक्टर्स तक नहीं पहुँच पाती हैं, जिससे धातु के ब्लॉक को बिना नुकसान पहुँचाए आंतरिक दोष की उपस्थिति का पता चल जाता है।
Q3. मनुष्यों के लिए श्रव्यता के परिसर (Audible range) की व्याख्या कीजिए। अवश्रव्य ध्वनि (Infrasound) और पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasound) को परिभाषित कीजिए तथा इन आवृत्ति परिसरों का उपयोग करने वाले जीवों के उदाहरण दीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): **श्रव्यता का परिसर (Audible Range):**\nध्वनि तरंगों की आवृत्तियों का वह परिसर जिन्हें एक सामान्य मनुष्य का कान आसानी से सुन सकता है, श्रव्यता का परिसर कहलाता है। एक स्वस्थ मनुष्य के लिए यह श्रव्य सीमा लगभग $20\text{ Hz}$ से $20,000\text{ Hz}$ ($20\text{ kHz}$) तक होती है। पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चे तथा कुछ जीव $25\text{ kHz}$ तक की आवृत्ति सुन सकते हैं, जबकि वृद्धावस्था में उच्च आवृत्ति सुनने की क्षमता कम हो जाती है। **अवश्रव्य ध्वनि (Infrasound):**\nमानव कान की निचली श्रव्य सीमा अर्थात $20\text{ Hz}$ से कम आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को अवश्रव्य ध्वनि कहा जाता है। - *उदाहरण:* गेंडे $5\text{ Hz}$ तक की कम आवृत्ति वाली अवश्रव्य ध्वनि का उपयोग करके आपस में संवाद करते हैं। हाथी और व्हेल भी अवश्रव्य तरंगें उत्पन्न करते हैं। भूकंप आने से पहले मुख्य झटका शुरू होने से पूर्व अवश्रव्य ध्वनि तरंगें उत्पन्न होती हैं। **पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasound):**\nमानव कान की ऊपरी श्रव्य सीमा अर्थात $20,000\text{ Hz}$ ($20\text{ kHz}$) से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को पराश्रव्य ध्वनि या पराध्वनि कहा जाता है। - *उदाहरण:* चमगादड़ अंधेरे में शिकार खोजने और उड़ने के लिए पराश्रव्य ध्वनि का उत्सर्जन और संसूचन करते हैं। डॉल्फ़िन और पॉरपॉइज़ भी पराध्वनि का उपयोग करते हैं। कुत्ते लगभग $50\text{ kHz}$ तक की आवृत्ति सुन सकते हैं।
Q4. अनुरणन (Reverberation) को परिभाषित कीजिए। किसी बड़े सभागार (ऑडिटोरियम) में अत्यधिक अनुरणन क्यों अवांछनीय है, और इसे कम करने के लिए कौन-कौन सी विधियाँ अपनाई जाती हैं? 3 Marks
उत्तर (Answer): **अनुरणन (Reverberation):**\nकिसी बड़े बंद स्थान या सभागार की दीवारों, छत और फर्श से ध्वनि के बार-बार होने वाले परावर्तन के कारण मूल ध्वनि के बंद होने के बाद भी ध्वनि का कुछ समय तक बने रहना ही अनुरणन कहलाता है। **अत्यधिक अनुरणन अवांछनीय क्यों है:**\nयदि सभागार में अनुरणन का समय बहुत अधिक होता है, तो लगातार उत्पन्न होने वाली ध्वनियाँ एक-दूसरे से मिल जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप वक्ता द्वारा बोले गए शब्द या संगीत के स्वर आपस में गूँजने लगते हैं और श्रोताओं को स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं देते। **अनुरणन को कम करने के उपाय:**\nसभागारों और सिनेमा हॉलों में अनुरणन को कम करने के लिए ध्वनि-अवशोषक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है: 1. **ध्वनि-अवशोषक दीवार पैनल:** दीवारों और छतों को फाइबर बोर्ड, खुरदरे प्लास्टर या एकॉस्टिक फोम जैसी ध्वनि-अवशोषक सामग्री से ढका जाता है। 2. **भारी पर्दे:** खिड़कियों और दीवारों पर भारी एवं मोटे पर्दे लटकाए जाते हैं जो टकराने वाली ध्वनि ऊर्जा को अवशोषित कर लेते हैं। 3. **गद्देदार सीटों का उपयोग:** सभागार की सीटें कपड़े और फोम की गद्देदार बनाई जाती हैं ताकि सीटें खाली होने पर भी ध्वनि का अवशोषण बना रहे।
Q5. पराध्वनि (अल्ट्रासाउंड) क्या है? उद्योग और चिकित्सा के क्षेत्र में पराध्वनि के किन्हीं तीन प्रमुख अनुप्रयोगों की व्याख्या कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): **पराध्वनि (अल्ट्रासाउंड):**\nपराध्वनि उन उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को कहा जाता है जिनकी आवृत्ति मानव कान की सुनने की ऊपरी सीमा अर्थात $20\text{ kHz}$ ($20,000\text{ Hz}$) से अधिक होती है। ये उच्च आवृत्ति तरंगें बाधाओं की उपस्थिति में भी एक निश्चित सीधे पथ पर गमन कर सकती हैं। **पराध्वनि के तीन प्रमुख अनुप्रयोग:** 1. **कठिन भागों की सफाई:** पराध्वनि का उपयोग विषम आकार के पुर्जों, सर्पिलाकार नलियों तथा इलेक्ट्रॉनिक घटकों जैसे पहुँच से बाहर वाले स्थानों की सफाई में किया जाता है। वस्तुओं को सफाई के घोल में रखकर पराध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं, जिससे उच्च आवृत्ति के कंपनों से धूल और ग्रीस के कण अलग होकर गिर जाते हैं। 2. **धातु के ब्लॉकों में दरारों का पता लगाना:** भवन, पुल और बड़ी मशीनों के निर्माण में प्रयुक्त धातु के बड़े ब्लॉकों में आंतरिक दरारें या छिद्र खोजने के लिए पराध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं। यदि ब्लॉक में कोई दोष होता है, तो तरंगें परावर्तित होकर वापस लौट आती हैं, जिससे आंतरिक दोष का पता चल जाता है। 3. **चिकित्सा निदान (अल्ट्रासोनोग्राफी):** चिकित्सा विज्ञान में शरीर के आंतरिक अंगों जैसे यकृत, गुर्दे, पित्ताशय और गर्भाशय के चित्र प्राप्त करने के लिए पराध्वनि का उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग पथरी, ट्यूमर का पता लगाने और गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास की निगरानी के लिए किया जाता है।
Q6. एक पनडुब्बी पर स्थापित सोनार (SONAR) प्रणाली समुद्र की तलहटी की ओर एक पराश्रव्य संकेत भेजती है और $2.5\text{ s}$ के बाद एक प्रतिध्वनि प्राप्त करती है। यदि समुद्री जल में ध्वनि की चाल $1500\text{ m/s}$ है, तो पनडुब्बी से समुद्र की तलहटी की दूरी ज्ञात कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): **दिया गया है:** - प्रतिध्वनि प्राप्त करने में लगा समय ($t$) = $2.5\text{ s}$ - समुद्री जल में ध्वनि की चाल ($v$) = $1500\text{ m/s}$ \nमाना कि पनडुब्बी से समुद्र की तलहटी की दूरी $d$ है। \nचूँकि पराश्रव्य ध्वनि तरंग पनडुब्बी से समुद्र की तलहटी तक जाती है और वापस पनडुब्बी पर लौटती है, इसलिए संकेत द्वारा तय की गई कुल दूरी = $2d$ होगी। \nसूत्र का उपयोग करने पर: $$\text{कुल दूरी} = \text{चाल} \times \text{समय}$$ $$2d = v \times t$$ $$2d = 1500\text{ m/s} \times 2.5\text{ s}$$ $$2d = 3750\text{ m}$$ $$d = \frac{3750}{2}\text{ m}$$ $$d = 1875\text{ m}$$ **उत्तर:**\nपनडुब्बी से समुद्र की तलहटी की दूरी **$1875\text{ m}$** (या $1.875\text{ किमी}$) है।
Q7. सुनने की प्रक्रिया के दौरान कान के पर्दे (कर्ण पटह) तथा मध्य कर्ण की तीन हड्डियों के कार्य का वर्णन कीजिए। 2 Marks
उत्तर (Answer): श्रवण प्रक्रिया में कान के पर्दे और मध्य कर्ण की तीन हड्डियों का मुख्य योगदान होता है: 1. **कर्ण पटह (कान का पर्दा):** यह श्रवण नलिका के सिरे पर स्थित एक पतली, तानित झिल्ली होती है। जब ध्वनि के संपीडन पर्दे तक पहुंचते हैं, तो बाहर का दाब बढ़ता है और पर्दा अंदर की ओर दबता है। विरलन के समय पर्दा बाहर की ओर आता है, जिससे पर्दा तेजी से कंपित होने लगता है। 2. **तीन हड्डियां (हथौड़ा, निहाई और रकाब / Malleus, Incus, Stapes):** मध्य कर्ण में स्थित ये तीनों हड्डियां पर्दे से प्राप्त कंपनों को कई गुना **प्रवर्धित (amplify)** करती हैं और इन यांत्रिक कंपनों को आंतरिक कर्ण (कर्णावर्त/cochlea) तक पहुंचाती हैं।
Q8. ध्वनि तरंग के तारत्व (Pitch) और प्रबलता (Loudness) के बीच उनके भौतिक लक्षणों के आधार पर अंतर स्पष्ट कीजिए। 2 Marks
उत्तर (Answer): **तारत्व (Pitch)** और **प्रबलता (Loudness)** ध्वनि तरंग के दो अलग-अलग भौतिक गुण हैं: 1. **तारत्व (Pitch):** - यह ध्वनि तरंग की **आवृत्ति (frequency)** पर निर्भर करता है। - उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व अधिक (तीक्ष्ण या पतली ध्वनि) होता है (जैसे- महिला की आवाज या सीटी)। - निम्न आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व कम (भारी ध्वनि) होता है (जैसे- पुरुष की आवाज या ढोल)। 2. **प्रबलता (Loudness):** - यह ध्वनि तरंग के **आयाम (amplitude)** पर निर्भर करती है। - अधिक आयाम वाली ध्वनि अधिक प्रबल (तेज) होती है क्योंकि इसमें ऊर्जा अधिक होती है। - कम आयाम वाली ध्वनि मन्द (धीमी) होती है।
Q9. ध्वनि तरंग की आवृत्ति (Frequency) और तरंगदैर्घ्य (Wavelength) को परिभाषित कीजिए। ध्वनि की चाल, आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य के बीच संबंध दर्शाने वाला सूत्र लिखिए। 2 Marks
उत्तर (Answer): - **आवृत्ति ($\nu$):** प्रति इकाई समय में उत्पन्न होने वाले ध्वनि तरंग के दोलनों या कंपनों की कुल संख्या को ध्वनि तरंग की आवृत्ति कहते हैं। इसका SI मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है। - **तरंगदैर्घ्य ($\lambda$):** किसी अनुदैर्ध्य ध्वनि तरंग में दो क्रमागत संपीडनों (Compressions) या दो क्रमागत विरलनों (Rarefactions) के बीच की दूरी को तरंगदैर्घ्य कहते हैं। इसका SI मात्रक मीटर (m) है। **संबंध सूत्र:** $$\text{ध्वनि की चाल } (v) = \text{आवृत्ति } (\nu) \times \text{तरंगदैर्घ्य } (\lambda)$$ \nयह समीकरण दर्शाता है कि किसी माध्यम में ध्वनि तरंग की चाल उसकी आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य के गुणनफल के बराबर होती है।
Q10. अनुरणन (Reverberation) क्या है? बड़े हालों और सभागारों में अवांछनीय अनुरणन को कैसे कम किया जा सकता है? 2 Marks
उत्तर (Answer): **अनुरणन (Reverberation)** मूल ध्वनि स्रोत के बंद हो जाने के बाद भी दीवारों, छत और फर्श से ध्वनि के बार-बार परावर्तन के कारण हॉल में ध्वनि के बने रहने (गूंजने) की प्रक्रिया है। \nअत्यधिक अनुरणन के कारण ध्वनियां एक-दूसरे पर आच्छादित हो जाती हैं, जिससे भाषण या संगीत अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला हो जाता है। \nसभागारों और सिनेमा हॉलों में अवांछित अनुरणन को कम करने के उपाय: 1. छत तथा दीवारों को ध्वनि-अवशोषक पदार्थों जैसे संपीडित फाइबरबोर्ड, खुरदरे प्लास्टर या भारी पर्दों से ढका जाता है। 2. सीटों के निर्माण में ऐसे पदार्थों का चयन किया जाता है जो ध्वनि को अवशोषित कर सकें।
Q11. अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves) की व्याख्या कीजिए और तरंग संचरण के सापेक्ष कणों की गति के आधार पर अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) से इनकी तुलना कीजिए। 2 Marks
उत्तर (Answer): एक अनुप्रस्थ तरंग वह तरंग है जिसमें माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत (समकोण पर) कंपन करते हैं, जिससे श्रृंग (crests) और गर्त (troughs) बनते हैं (जैसे, प्रकाश तरंगें या तनी हुई डोरी में तरंगें)। इसके विपरीत, एक अनुदैर्ध्य तरंग में, माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के समांतर कंपन करते हैं, जिससे संपीडन और विरलन बनते हैं (जैसे, वायु में ध्वनि तरंगें)।
Q12. एक स्वस्थ मानव कान के लिए श्रव्यता का परिसर (audible range) क्या है? यह परिसर छोटे बच्चों और बुजुर्ग लोगों के लिए किस प्रकार भिन्न होता है? 2 Marks
उत्तर (Answer): एक स्वस्थ मानव कान के लिए श्रव्यता का सामान्य परिसर लगभग $20\text{ Hz}$ से $20,000\text{ Hz}$ ($20\text{ kHz}$) तक होता है। $20\text{ Hz}$ से कम आवृत्ति वाली ध्वनियाँ अवश्रव्य और $20\text{ kHz}$ से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनियाँ पराश्रव्य कहलाती हैं। छोटे बच्चे (पाँच वर्ष से कम आयु के) और कुत्ते जैसे कुछ जीव $25\text{ kHz}$ तक की उच्च आवृत्तियों को सुन सकते हैं। हालाँकि, जैसे-जैसे लोग बूढ़े होते हैं, उनके कान उच्च आवृत्तियों के प्रति कम संवेदनशील हो जाते हैं, जिससे उनकी ऊपरी श्रव्य सीमा घट जाती है।
Q13. व्याख्या कीजिए कि ध्वनि की चाल पर (i) माध्यम की प्रकृति/घनत्व और (ii) माध्यम के तापमान का क्या प्रभाव पड़ता है। 2 Marks
उत्तर (Answer): ध्वनि की चाल उस माध्यम के गुणों पर निर्भर करती है जिसमें से वह गुजरती है: 1. **माध्यम की प्रकृति/घनत्व:** ध्वनि ठोस पदार्थों में सबसे तेज, द्रवों में उससे धीमी और गैसों में सबसे धीमी गति से चलती है क्योंकि ठोस पदार्थों में कण बहुत पास-पास होते हैं, जिससे ऊर्जा का तेजी से स्थानांतरण होता है। 2. **तापमान:** माध्यम का तापमान बढ़ने के साथ ध्वनि की चाल बढ़ती है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, कण गतिज ऊर्जा प्राप्त करते हैं और तेजी से कंपन करते हैं, जिससे ध्वनि तरंगें अधिक तेजी से संचरित होती हैं।
Q14. कंसर्ट हॉल और सिनेमा हॉल की छतें आमतौर पर वक्राकार (curved) क्यों बनाई जाती हैं? 2 Marks
उत्तर (Answer): कंसर्ट हॉल और सिनेमा प्रेक्षागृहों की छतों को विशेष रूप से वक्राकार (curved) बनाया जाता है ताकि छत से परावर्तन के बाद ध्वनि हॉल के सभी हिस्सों में समान रूप से फैल सके। जब ध्वनि तरंगें मंच से उत्पन्न होती हैं और घुमावदार सतह से टकराती हैं, तो वे नीचे बैठे श्रोताओं की ओर हॉल के हर कोने में समान रूप से परावर्तित होती हैं, जिससे बिना किसी मूक क्षेत्र (dead zone) के हॉल में बैठे सभी लोगों को ध्वनि स्पष्ट सुनाई देती है।
Q15. व्याख्या कीजिए कि चंद्रमा पर खड़े दो अंतरिक्ष यात्री बिना इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के एक-दूसरे की आवाज सीधे क्यों नहीं सुन सकते। 2 Marks
उत्तर (Answer): ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है जिसे यात्रा करने के लिए ठोस, द्रव या गैस जैसे भौतिक माध्यम की सख्त आवश्यकता होती है, क्योंकि यह पड़ोसी कणों के टकराव और ऊर्जा हस्तांतरण के माध्यम से संचरित होती है। चंद्रमा पर कोई वायुमंडल नहीं है, जिसका अर्थ है कि इसकी सतह पर पूर्ण निर्वात है। चुकी चंद्रमा पर ध्वनि कंपनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए कोई वायु अणु नहीं हैं, इसलिए ध्वनि तरंगें संचरित नहीं हो सकती हैं। इसलिए, अंतरिक्ष यात्रियों को संचार करने के लिए रेडियो तरंगों (विद्युत चुंबकीय तरंगों) पर निर्भर रहना पड़ता है।