मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 9 विज्ञान - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Revision Notes)
अध्याय: खाद्य संसाधनों में सुधार (Improvement in Food Resources)
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### मुख्य बिंदु और परिभाषाएँ (Key Definitions)
1. खाद्य संसाधनों में सुधार की आवश्यकता:
भारत की जनसंख्या बहुत अधिक है, इसलिए भोजन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए फसल उत्पादन और पशुधन (livestock) दोनों को बढ़ाना आवश्यक है।
2. फसल उत्पादन की किस्में (Crop Variety Improvement):
अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करके फसल की पैदावार बढ़ाना। इसे संकरण (Hybridization) द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
3. फसल उत्पादन प्रबंधन (Crop Production Management):
फसलों की अच्छी वृद्धि और विकास के लिए किसानों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीके। इसमें तीन मुख्य चरण शामिल हैं:
- पोषक तत्व प्रबंधन (Nutrient Management)
- सिंचाई (Irrigation)
- फसल का पैटर्न (Cropping Patterns)
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### फसल पोषण (Crop Nutrition)
पौधों को अपनी वृद्धि के लिए विभिन्न पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। कुल 17 पोषक तत्व पौधों को आवश्यक होते हैं।
1. बृहत् पोषक तत्व (Macronutrients):
इनकी आवश्यकता पौधों को अधिक मात्रा में होती है।
- उदाहरण: नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K), कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), सल्फर (S)।
2. सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients):
इनकी आवश्यकता पौधों को बहुत कम मात्रा में होती है।
- उदाहरण: आयरन (Fe), मैंगनीज (Mn), बोरॉन (B), जस्ता (Zn), तांबा (Cu), क्लोरीन (Cl), मोलिब्डेनम (Mo)।
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### खाद और उर्वरक (Manure and Fertilizers)
| गुण | खाद (Manure) | उर्वरक (Fertilizers) |
| :--- | :--- | :--- |
| स्रोत | यह पौधों और जंतुओं के अपशिष्ट (गोबर, कचरा आदि) के अपघटन से बनती है। | यह रासायनिक कारखानों में तैयार अकार्बनिक यौगिक हैं। |
| पोषक तत्व | इसमें सभी पोषक तत्व कम मात्रा में होते हैं, लेकिन यह मिट्टी की उर्वरता और संरचना सुधारती है। | यह विशिष्ट पोषक तत्वों (जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस) से भरपूर होते हैं। |
| मिट्टी के लिए | यह ह्यूमस प्रदान करती है और जल धारण क्षमता बढ़ाती है। | इसका अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता और सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुँचा सकता है। |
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### सिंचाई और फसल पैटर्न (Irrigation & Cropping Patterns)
1. सिंचाई (Irrigation):
फसलों को समय पर पानी देना सिंचाई कहलाता है। भारत में सिंचाई के मुख्य स्रोत कुएँ, नलकूप, तालाब, नहरे और नदियाँ हैं।
2. फसल उगाने के तरीके (Cropping Patterns):
- मिश्रित फसल (Mixed Cropping): दो या दो से अधिक फसलों को एक साथ एक ही खेत में उगाना (जैसे - गेहूँ + चना)।
- अंतराफसल (Inter-cropping): दो या दो से अधिक फसलों को एक निश्चित पाटन (pattern) में उगाना (जैसे - एक पंक्ति सोयाबीन की, फिर एक पंक्ति मक्के की)।
- फसल चक्र (Crop Rotation): किसी खेत में पूर्व-योजना के अनुसार अलग-अलग फसलों को बारी-बारी से उगाना ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे।
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### फसल सुरक्षा प्रबंधन (Crop Protection Management)
खेतों में फसलों को खरपतवार (weeds), कीटों (insects/pests) और रोगों से बचाना आवश्यक है।
- खरपतवार (Weeds): अवांछित पौधे जो मुख्य फसल के साथ उग जाते हैं और पोषक तत्व लेते हैं (जैसे - गाजर घास)। इन्हें खरपतवारनाशक (Weedicides) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
- कीट और रोग (Pests & Diseases): कीट पौधों के तनों और पत्तियों को खाते हैं। इन्हें कीटनाशक (Pesticides/Insecticides/Fungicides) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
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### पशुपालन (Animal Husbandry)
पशुधन का वैज्ञानिक प्रबंधन पशुपालन कहलाता है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
1. पशुओं की नस्ल सुधार (Cattle Farming):
- दुधारू पशु (Milch animals): दूध देने वाले पशु (गाँय, भैंस)।
- भारवाही पशु (Draught animals): कृषि कार्य (खेती, ढुलाई) करने वाले बैल आदि।
2. कुक्कुट पालन (Poultry Farming):
अंडे और मांस के उत्पादन के लिए मुर्गी पालन।
- लेयर्स (Layers): अंडे देने वाली मुर्गियाँ।
- ब्रॉयलर्स (Broilers): मांस के लिए पाली जाने वाली मुर्गियाँ।
3. मछली उत्पादन (Fish Production / Pisciculture):
- fin-fish (मछलियाँ): कतला, रोहू आदि।
- shell-fish (झींगा, मोलस्क): समुद्री जीव।
- मिश्रित मछली संवर्धन (Composite Fish Culture): एक ही तालाब में 5 या 6 अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों को एक साथ पालना क्योंकि उनके भोजन के स्रोत अलग-अलग होते हैं।
4. मधुमक्खी पालन (Apiculture):
शहद और मोम के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों को पालना। (जैसे - एपिस सेरेना इंडिका)।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 सुधार एवं खाद्य संसाधन
फसल उत्पादन में सुधार
फसल के प्रकार
खरीफ फसल (वर्षा ऋतु)
रबी फसल (शीत ऋतु)
फसल सुधार की किस्में
उच्च उत्पादन
वांछित गुण
जैविक एवं अजैविक प्रतिरोधकता
परिपक्वन काल में परिवर्तन
व्यापक अनुकूलता
ऐच्छिक सस्य गुण
फसल उत्पादन प्रबंधन
पोषक तत्व प्रबंधन
वृहद् पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फास्फोरस)
सूक्ष्म पोषक तत्व (लोहा, जस्ता)
खाद और उर्वरक
सिंचाई प्रणालियाँ
कुएँ और नलकूप
नहरें और तालाब
ड्रिप सिंचाई
फसल की किस्में और पैटर्न
मिश्रित फसल (दो या अधिक फसलें एक साथ)
अंतरा फसलीकरण (निश्चित पैटर्न)
फसल चक्र (फसल बदलने की विधि)
फसल सुरक्षा प्रबंधन
खरपतवार नियंत्रण
अवांछित पौधे (जैसे गाजर घास)
कीट नियंत्रण
जड़, तना और पत्ती खाने वाले कीट
रोग नियंत्रण
कवक, बैक्टीरिया और वायरस जनित रोग
भंडारण की विधियाँ
जैविक कारक (कीड़े, कवक)
अजैविक कारक (नमी, तापमान)
पशुपालन (एनिमल हस्बैंड्री)
मवेशी फार्म (पशुधन)
दुधारू पशु (दूध देने वाले)
भारवाहक पशु (कृषि कार्य)
पशु स्वास्थ्य और स्वच्छता
कुक्कुट पालन (पोल्ट्री)
अंडे और मांस उत्पादन
ब्रॉयलर और लेयर
मछली उत्पादन (मत्स्य पालन)
फिन फिश (वास्तविक मछलियाँ)
शेल फिश (प्रॉन, मोलस्क)
अंतःस्थलीय जल और समुद्री जल
मधुमक्खी पालन (एपिकल्चर)
शहद उत्पादन
मोम का उत्पादन
चारा (मछुआरा पौधे) की गुणवत्ता
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): खरपतवार वे अवांछित पौधे हैं जो कृषि क्षेत्रों में मुख्य फसलों के साथ प्राकृतिक रूप से उग आते हैं। दो सामान्य खरपतवारों के उदाहरण गोखरू (*Xanthium*) तथा गाजर घास (*Parthenium*) हैं।
\nफसल के खेतों से खरपतवारों को निकालना अत्यधिक आवश्यक है क्योंकि ये सूर्य के प्रकाश, जल, स्थान और पोषक तत्वों जैसे अनिवार्य संसाधनों के लिए मुख्य फसल के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसके परिणामस्वरूप मुख्य फसल को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता, जिससे उसकी वृद्धि बाधित होती है और उपज घट जाती है। अतः बेहतर फसल उत्पादकता प्राप्त करने के लिए खरपतवारों को समय पर हटाना जरूरी है।
उत्तर (Answer): व्यावसायिक शहद उत्पादन के लिए इतालवी मधुमक्खी प्रजाति (*एपिस मेलीफेरा*) को कई वांछनीय विशेषताओं के कारण व्यापक रूप से पसंद किया जाता है। सबसे पहले, इसमें स्थानीय नस्लों की तुलना में शहद एकत्र करने की क्षमता बहुत अधिक होती है। दूसरे, यह कम डंक मारती है, जिससे मधुमक्खी पालकों के लिए इसे संभालना सुरक्षित और आसान हो जाता है। तीसरे, ये मधुमक्खियां एक निर्धारित छत्ते में लंबे समय तक रहती हैं और प्रजनन बहुत अच्छा करती हैं। ये लक्षण इसे व्यावसायिक मौनपालन (एपिकल्चर) के लिए अत्यधिक लाभदायक बनाते हैं।
उत्तर (Answer): मिट्टी द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले आवश्यक पादप पोषक तत्वों को उनकी आवश्यकता की मात्रा के आधार पर वृहत-पोषक और सूक्ष्म-पोषक तत्वों में वर्गीकृत किया जाता है। वृहत-पोषक वे खनिज तत्व हैं जिनकी पौधों को उचित वृद्धि, संरचना और चयापचय प्रक्रियाओं के लिए अपेक्षाकृत बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है; जैसे नाइट्रोजन और फास्फोरस। सूक्ष्म-पोषक वे तत्व हैं जिनकी पौधों को एंजाइमी गतिविधियों के लिए बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है; जैसे लोहा (आयरन) और जस्ता (जिंक)।
उत्तर (Answer): मिश्रित मछली संवर्धन (कंपोजिट फिश कल्चर) एक ऐसी तकनीक है जिसमें पांच या छह अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों का एक ही तालाब में एक साथ पालन किया जाता है। चुनी गई प्रजातियों के भोजन की आदतें अलग-अलग होती हैं और वे तालाब के विभिन्न क्षेत्रों में रहती हैं ताकि वे भोजन के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा न करें। उदाहरण के लिए, कतला सतह से भोजन लेती है, रोहू मध्य क्षेत्र से, और मृगल तथा कॉमन कार्प तली से भोजन लेती हैं। इसका मुख्य लाभ तालाब के खाद्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग और उच्च मछली उत्पादन है।
उत्तर (Answer): संकरण (हाइब्रिडाइजेशन) आनुवंशिक रूप से भिन्न पौधों के बीच क्रॉस कराने की एक प्रक्रिया है, ताकि उच्च उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता जैसे वांछित गुणों वाली नई फसल किस्म प्राप्त की जा सके। पौधों के बीच संबंधों के आधार पर, संकरण तीन मुख्य प्रकारों में विभाजित है: अंतराकिस्म संकरण (एक ही प्रजाति की विभिन्न किस्मों के बीच), अंतरविशिष्ट संकरण (एक ही वंश की दो अलग-अलग प्रजातियों के बीच), और अंतरावंशीय संकरण (एक ही कुल के विभिन्न वंशों के बीच)।
उत्तर (Answer): हरी खाद बनाने के लिए पटसन या ग्वार जैसे कुछ शीघ्र उगने वाले पौधों को उगाया जाता है और फिर फसल के बीज बोने से पहले उन पर हल चलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। जब ये पौधे मिट्टी में अपघटित होते हैं, तो वे मिट्टी को नाइट्रोजन और फास्फोरस जैसे आवश्यक पोषक तत्वों से समृद्ध करते हैं। इसके अलावा, हरी खाद मृदा की संरचना में सुधार करती है, जल धारण क्षमता को बढ़ाती है, मृदा अपरदन को रोकती है और लाभदायक सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बढ़ावा देती है, जिससे मिट्टी आगामी फसलों के लिए अधिक उपजाऊ बनती है।
उत्तर (Answer): मिश्रित मछली संवर्धन (Composite fish culture) एक ऐसी सघन मत्स्य पालन तकनीक है जिसमें अलग-अलग आहार आदतों वाली पाँच या छह विभिन्न प्रजातियों की मछलियों को एक ही तालाब में एक साथ पाला जाता है। प्रजातियों का चयन इस प्रकार किया जाता है कि वे भोजन के लिए प्रतिस्पर्धा न करें; उदाहरण के लिए, कटला सतह पर, रोहू मध्य क्षेत्र में, और म्रिगल तालाब के तल पर भोजन करती हैं। यह प्रणाली संसाधनों के उपयोग को अधिकतम करती है और मछलियों की कुल उपज को बढ़ाती है।
उत्तर (Answer): वृहत्-पोषक तत्व (Macro-nutrients) वे आवश्यक तत्व हैं जिनकी पौधों को अपनी समग्र वृद्धि और संरचनात्मक विकास के लिए अपेक्षाकृत बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। उदाहरणों में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फर शामिल हैं। इसके विपरीत, सूक्ष्म-पोषक तत्व (Micro-nutrients) वे आवश्यक तत्व हैं जिनकी पौधों को विशिष्ट एंजाइमी कार्यों के लिए बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है। उदाहरणों में लोहा, मैंगनीज, बोरॉन, जस्ता, तांबा, मोलिब्डेनम और क्लोरीन शामिल हैं।
उत्तर (Answer): अंतराफसलीकरण (Intercropping) एक ही खेत में एक निश्चित पंक्ति व्यवस्था या पैटर्न में एक साथ दो या दो से अधिक फसलें उगाने की प्रथा है, जैसे सोयाबीन और मक्का की एकांतर पंक्तियाँ। अंतराफसलीकरण का मुख्य लाभ यह है कि यह कीटों और रोगों को खेत में एक फसल के सभी पौधों में फैलने से रोकता है, जिससे दिए गए पोषक तत्वों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है और प्रति इकाई क्षेत्र में कुल फसल की उपज बढ़ती है।
उत्तर (Answer): हरी खाद एक प्रकार की जैविक खाद है जो मुख्य रूप से मिट्टी में पोषक तत्व और जैविक पदार्थ जोड़ने के लिए विशिष्ट कवर फसलें उगाकर तैयार की जाती है। मुख्य फसल के बीज बोने से पहले, पटसन (सनहेम्प) या ग्वार जैसे पौधे उगाए जाते हैं और फिर उन्हें हल चलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। ये हरे पौधे अपघटित होकर हरी खाद में बदल जाते हैं, जो मिट्टी को मुख्य रूप से नाइट्रोजन और फास्फोरस से समृद्ध करते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता, संरचना और जल धारण क्षमता में सुधार होता है।
उत्तर (Answer): जैविक नियंत्रण विधियां प्राकृतिक शिकारियों, परजीवियों या रोगजनकों का उपयोग करके फसल के कीटों का प्रबंधन करती हैं जो पर्यावरण में हानिकारक सिंथेटिक रसायनों को पेश किए बिना विशेष रूप से कीट आबादी को लक्षित और दबाते हैं। रासायनिक कीटनाशकों के विपरीत, जो मिट्टी, जल निकायों और खाद्य श्रृंखलाओं में जहरीले अवशेष छोड़ते हैं और साथ ही संभावित रूप से पर्यावरण प्रदूषण और कीट प्रतिरोध का कारण बनते हैं, जैविक नियंत्रण पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल और क्रिया में अत्यधिक विशिष्ट होते हैं। वे परागणकर्ताओं और केंचुओं जैसे लाभकारी जीवों को नुकसान पहुँचाए बिना आर्थिक क्षति के स्तर से नीचे कीटों की संख्या को रखकर कृषि पारिस्थितिकी प्रणालियों के पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावी ढंग से बनाए रखते हैं।
उत्तर (Answer): नियमित फसल चक्र प्रणालियों में मटर, बीन्स और चना जैसी फलीदार फसलों को शामिल करने का प्राथमिक लाभ सिंथेटिक नाइट्रोजन उर्वरकों पर भारी निर्भरता के बिना मिट्टी की उर्वरता को स्वाभाविक रूप से बहाल करने की उनकी उल्लेखनीय जैविक क्षमता है। फलीदार पौधों की जड़ ग्रंथियों में सहजीवी राइजोबियम बैक्टीरिया होते हैं जिनमें वायुमंडलीय नाइट्रोजन गैस को मिट्टी के मैट्रिक्स के भीतर उपयोग योग्य नाइट्रेट्स और अमोनियम यौगिकों में ठीक करने की अनूठी क्षमता होती है। परिणामस्वरुप, फलियों के साथ अनाज की फसलों को घुमाने से मिट्टी के पोषक तत्व प्रोफ़ाइल को स्वाभाविक रूप से समृद्ध किया जाता है, बाद की फसल की पैदावार में वृद्धि होती है, और निरंतर कीट और रोग चक्र टूट जाते हैं।
उत्तर (Answer): काटी गई खाद्यान्न फसलों के लिए उचित भंडारण प्रबंधन महत्वपूर्ण रूप से आवश्यक है क्योंकि हाल ही में काटी गई कृषि उपज में नमी की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है, जिससे यह विभिन्न प्रकार के विनाशकारी जैविक एजेंटों और पर्यावरणीय कारकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती है। यदि पर्याप्त सूखने और सुरक्षा के बिना अनुचित तरीके से संग्रहीत किया जाता है, तो कीटों, कृन्तकों, कवक, बैक्टीरिया और घुन के अनियंत्रित संक्रमण के कारण अनाज को भारी मात्रात्मक और गुणात्मक नुकसान उठाना पड़ता है, साथ ही प्रतिकूल परिवेश के तापमान और आर्द्रता का सामना करना पड़ता है। प्रभावी भंडारण अभ्यास निरंतर राष्ट्रीय खाद्य उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं, बाजार में खराबी को रोकते हैं, और भविष्य की रोपण के लिए अनाज की व्यवहार्यता को बनाए रखते हैं।
उत्तर (Answer): मछली पकड़ने या सुसंस्कृत किए जाने वाले जलीय पर्यावरण के आधार पर मत्स्य पालन को मोटे तौर पर समुद्री मत्स्य पालन और अंतर्देशीय मत्स्य पालन में वर्गीकृत किया जाता है। समुद्री मत्स्य पालन में पामफ्रूट, टूना और झींगा जैसे समृद्ध तटीय और गहरे समुद्र के संसाधनों को लक्षित करने के लिए विशेष मछली पकड़ने वाले जहाजों और इलेक्ट्रॉनिक पहचान उपकरणों का उपयोग करके महासागर और समुद्र के पानी से मछली और अन्य समुद्री जीवों को पकड़ना और काटना शामिल है। इसके विपरीत, अंतर्देशीय मत्स्य पालन नदियों, नहरों, जलाशयों और तालाबों जैसे मीठे पानी के निकायों के साथ-साथ मुहाना और लैगून जैसी खारे पानी की पारिस्थितिकी प्रणालियों में मछली के उत्पादन और कटाई से संबंधित है, जहाँ जलीय कृषि एक प्रमुख भूमिका निभाती है।
उत्तर (Answer): कृषि भूमि में फार्म तालाबों के निर्माण और वर्षा जल संचयन प्रणालियों को लागू करने का प्राथमिक उद्देश्य बाद में कृषि उपयोग के लिए भारी वर्षा की अवधि के दौरान वर्षा के पानी को प्रभावी ढंग से संरक्षित और संग्रहीत करना है। मुख्य रूप से अनिश्चित मानसून पर निर्भर क्षेत्रों में, पानी की कमी अक्सर फसल के अस्तित्व को खतरे में डालती है। फार्म तालाबों में अपवाह जल को पकड़कर, किसान लंबी शुष्क अवधि या शुष्क सर्दियों के मौसम के दौरान सिंचाई के पानी की एक विश्वसनीय और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित कर सकते हैं। यह स्थायी जल प्रबंधन अभ्यास भूजल निष्कर्षण पर पूरी निर्भरता को काफी कम करता है और फसलों को सूखे से प्रेरित विफलता से बचाता है।