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#### (i) ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम (Zeroth Law)
यदि दो निकाय $A$ और $B$, किसी तीसरे निकाय $C$ के साथ अलग-अलग तापीय साम्य में हैं, तो $A$ और $B$ भी आपस में तापीय साम्य में होंगे।
#### (ii) ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम (First Law of Thermodynamics - FLOT)
यह नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है।
ΔQ = ΔU + Wचिह्न परिपाटी (Sign Conventions):
#### (iii) ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम (Second Law of Thermodynamics)
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सामान्य सूत्र: W = ∫ P dV
(P-V आरेख का क्षेत्रफल = किया गया कार्य)
#### 1. समतापीय प्रक्रम (Isothermal Process)
वह प्रक्रम जिसमें पूरे परिवर्तन के दौरान ताप ($T$) स्थिर रहता है ($\Delta T = 0 \implies \Delta U = 0$)।
P V = नियतांक (बॉयल का नियम)ΔQ = WW = 2.303 n R T log10(V2 / V1)
W = 2.303 n R T log10(P1 / P2)
#### 2. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic Process)
वह प्रक्रम जिसमें निकाय और वातावरण के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता ($\Delta Q = 0$)।
P (V^γ) = नियतांकT (V^(γ-1)) = नियतांक एवं (P^(1-γ)) (T^γ) = नियतांकΔU = -WW = n R (T1 - T2) / (γ - 1)
W = (P1 V1 - P2 V2) / (γ - 1)
(यहाँ γ = Cp / Cv = विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात)
#### 3. समआयतनिक प्रक्रम (Isochoric Process)
वह प्रक्रम जिसमें आयतन ($V$) स्थिर रहता है ($\Delta V = 0$)।
W = 0ΔQ = ΔU = n Cv ΔT#### 4. समदाबीय प्रक्रम (Isobaric Process)
वह प्रक्रम जिसमें दाब ($P$) स्थिर रहता है।
W = P (V2 - V1) = n R (T2 - T1)ΔQ = n Cp ΔT#### 5. चक्रीय प्रक्रम (Cyclic Process)
जब कोई निकाय विभिन्न अवस्थाओं से गुजरता हुआ पुनः अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाता है।
ΔU = 0ΔQ = W---
Cv = (dQ / dT)vCp = (dQ / dT)pCp - Cv = Rγ = Cp / Cv = 1 + (2 / f)(जहाँ $f$ = स्वतंत्रता की कोटि / Degrees of Freedom)
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#### (i) ऊष्मा इंजन (Heat Engine)
यह ऊष्मा को यांत्रिक कार्य में बदलता है।
η = (किया गया कार्य W) / (अवशोषित ऊष्मा Q1)
η = (Q1 - Q2) / Q1 = 1 - (Q2 / Q1)
(जहाँ $Q1$ = स्रोत से ली गई ऊष्मा, $Q2$ = सिंक को दी गई ऊष्मा)
#### (ii) कार्नॉट इंजन (Carnot Engine)
यह एक आदर्श उत्क्रमणीय (Reversible) इंजन है।
η = 1 - (T2 / T1)
(जहाँ $T1$ = स्रोत का ताप (Kelvin में), $T2$ = सिंक का ताप (Kelvin में))
#### (iii) रेफ्रिजरेटर / ऊष्मा पंप (Refrigerator / Heat Pump)
यह ऊष्मा इंजन का उत्क्रमणीय रूप है जो निम्न ताप की वस्तु से ऊष्मा निकालकर उच्च ताप की वस्तु को देता है।
β = Q2 / W = Q2 / (Q1 - Q2)
β = T2 / (T1 - T2)
β = (1 - η) / η
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1. रुद्धोष्म वक्र की ढाल = $\gamma \times$ (समतापीय वक्र की ढाल)। अतः P-V आरेख पर रुद्धोष्म रेखा अधिक तीव्र ढलान वाली होती है।
2. किसी भी वास्तविक इंजन की दक्षता $100\%$ ($\eta = 1$) नहीं हो सकती।
3. परम शून्य ताप ($T_2 = 0\text{ K}$) पर ही कार्नॉट इंजन की दक्षता $100\%$ संभव है, जो कि व्यावहारिक रूप से असंभव है।
4. चक्रीय प्रक्रम में प्रारम्भिक व अंतिम अवस्था समान होने के कारण $\Delta U = 0$ होता है।