कक्षा 11 भौतिक विज्ञान - अध्याय: दोलन (Oscillations)
त्वरित रिवीजन नोट्स एवं महत्वपूर्ण सूत्र (MP Board)
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1. मूलभूत परिभाषाएं (Basic Definitions)
- आवर्ती गति (Periodic Motion): ऐसी गति जो एक निश्चित समय अंतराल (आवर्तकाल) के बाद बार-बार दोहराई जाती है।
- उदाहरण: पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर गति, घड़ी की सूइयों की गति।
- दोलनी या कंपनीय गति (Oscillatory Motion): ऐसी आवर्ती गति जिसमें कोई पिंड एक निश्चित बिंदु (माध्य स्थिति) के इधर-इधर (To and Fro) गति करता है।
- उदाहरण: सरल लोलक की गति, स्प्रिंग से लटके द्रव्यमान की गति।
- टिप्पणी: प्रत्येक दोलनी गति आवर्ती गति होती है, लेकिन प्रत्येक आवर्ती गति दोलनी गति नहीं होती।
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2. महत्वपूर्ण पद (Important Terms)
- आवर्तकाल (Time Period - T): एक पूर्ण दोलन को पूरा करने में लगा समय।
- सूत्र:
T = 1 / f (एस.आई. मात्रक: सेकंड, s)
- आवृत्ति (Frequency - f या ν): प्रति सेकंड होने वाले दोलनों की संख्या।
- सूत्र:
f = 1 / T (एस.आई. मात्रक: हर्ट्ज़, Hz या s^-1)
- कोणीय आवृत्ति (Angular Frequency - ω):
- सूत्र:
ω = 2π / T = 2πf (मात्रक: rad/s)
- आयाम (Amplitude - A): माध्य स्थिति से कण का अधिकतम विस्थापन।
- कला (Phase - Φ): वह भौतिक राशि जो किसी क्षण कण की स्थिति और गति की दिशा को व्यक्त करती है।
- समीकरण:
Φ = (ωt + Φ₀) (जहाँ Φ₀ प्रारंभिक कला या एपॉक है)
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3. सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion - SHM)
जब किसी कण पर लगने वाला प्रत्ययन बल (Restoring Force) माध्य स्थिति से कण के विस्थापन के समानुपाती होता है तथा उसकी दिशा सदैव माध्य स्थिति की ओर होती है, तो ऐसी गति को सरल आवर्त गति कहते हैं।
#### मूलभूत समीकरण:
1. प्रत्ययन बल नियम:
F = -k · x (जहाँ k = बल नियतांक है)
2. त्वरण (Acceleration - a):
a = -ω² · x
- माध्य स्थिति पर (
x = 0): a = 0 (न्यूनतम)
- चरम स्थिति पर (
x = ±A): a = ±ω²A (अधिकतम)
3. विस्थापन (Displacement - x):
x(t) = A sin(ωt + Φ₀) या x(t) = A cos(ωt + Φ₀)
4. वेग (Velocity - v):
v = dx / dt = Aω cos(ωt + Φ₀)
- विस्थापन के पद में:
v = ω √(A² - x²)
- माध्य स्थिति पर (
x = 0): v_max = Aω (अधिकतम)
- चरम स्थिति पर (
x = ±A): v = 0 (न्यूनतम)
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4. सरल आवर्त गति में ऊर्जा (Energy in SHM)
सरल आवर्त गति करते कण में गतिज ऊर्जा एवं स्थितिज ऊर्जा दोनों होती हैं तथा कुल यांत्रिक ऊर्जा नियत रहती है।
- गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy - K):
K = (1/2) · m · v² = (1/2) · m · ω² · (A² - x²)
- माध्य स्थिति पर:
K_max = (1/2) · m · ω² · A²
- चरम स्थिति पर:
K = 0
- स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy - U):
U = (1/2) · k · x² = (1/2) · m · ω² · x²
- माध्य स्थिति पर:
U_min = 0
- चरम स्थिति पर:
U_max = (1/2) · m · ω² · A²
- कुल यांत्रिक ऊर्जा (Total Mechanical Energy - E):
E = K + U = (1/2) · m · ω² · A² = (1/2) · k · A²
(कुल ऊर्जा सदैव नियत रहती है और यह विस्थापन x पर निर्भर नहीं करती।)
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5. विभिन्न निकायों के दोलन (Oscillations of Different Systems)
#### 1. सरल लोलक (Simple Pendulum)
- आवर्तकाल का सूत्र:
T = 2π √(L / g)
- आवृत्ति:
f = (1 / 2π) √(g / L)
- नियम:
1. आवर्तकाल लोलक के द्रव्यमान और आकार पर निर्भर नहीं करता।
2. T ∝ √L (लम्बाई के वर्गमूल के समानुपाती)
3. T ∝ 1 / √g (गुरुत्वीय त्वरण के व्युत्क्रमानुपाती)
- सेकंडी लोलक (Second's Pendulum): ऐसा लोलक जिसका आवर्तकाल
T = 2 second होता है। इसकी प्रभावी लंबाई लगभग 99.3 cm या 1 m होती है।
#### 2. स्प्रिंग-द्रव्यमान निकाय (Spring-Mass System)
- आवर्तकाल का सूत्र:
T = 2π √(m / k)
- स्प्रिंगों का संयोजन (Combination of Springs):
- श्रेणीक्रम (Series Combination):
1 / keq = 1 / k₁ + 1 / k₂ => keq = (k₁ · k₂) / (k₁ + k₂)
T = 2π √[m(k₁ + k₂) / (k₁ · k₂)]
- समांतर क्रम (Parallel Combination):
k_eq = k₁ + k₂
T = 2π √[m / (k₁ + k₂)]
#### 3. U-नली में द्रव का दोलन (Liquid in U-tube)
- आवर्तकाल:
T = 2π √(h / g) (जहाँ h = द्रव स्तंभ की साम्यावस्था में ऊँचाई है)
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6. दोलन के प्रकार (Types of Oscillations)
1. मुक्त दोलन (Free Oscillations):
- जब किसी निकाय को उसकी साम्यावस्था से विस्थापित करके छोड़ दिया जाता है, तो वह अपनी स्वाभाविक आवृत्ति (Natural Frequency) से दोलन करता है।
- इसमें आयाम नियत रहता है (आदर्श स्थिति)।
2. अवमंदित दोलन (Damped Oscillations):
- विरोधी बलों (जैसे घर्षण, वायु प्रतिरोध) के कारण समय के साथ दोलन का आयाम घटता जाता है और अंततः दोलन रुक जाता है।
- अवमंदन बल:
F_d = -b · v (जहाँ b = अवमंदन गुणांक है)
3. प्रणोदित दोलन (Forced Oscillations):
- जब किसी निकाय पर बाह्य आवर्ती बल लगाकर दोलन कराया जाता है, तो निकाय बाह्य बल की आवृत्ति से दोलन करने लगता है।
4. अनुनाद (Resonance):
- प्रणोदित दोलन की वह विशेष स्थिति जब बाह्य आवर्ती बल की आवृत्ति, निकाय की स्वाभाविक आवृत्ति के ठीक बराबर हो जाती है (
f = f₀)।
- इस स्थिति में दोलन का आयाम अधिकतम हो जाता है।
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परीक्षा उपयोगी त्वरित टिप्स (Exam Quick Tips)
- माध्य स्थिति (x = 0): विस्थापन = 0, त्वरण = 0, स्थितिज ऊर्जा = 0 | वेग = अधिकतम (
Aω), गतिज ऊर्जा = अधिकतम।
- चरम स्थिति (x = ±A): विस्थापन = अधिकतम (
A), त्वरण = अधिकतम (ω²A), स्थितिज ऊर्जा = अधिकतम | वेग = 0, गतिज ऊर्जा = 0।
- लिफ्ट में सरल लोलक:
- यदि लिफ्ट
a त्वरण से ऊपर जा रही है: T = 2π √[L / (g + a)] (आवर्तकाल घटेगा)
- यदि लिफ्ट
a त्वरण से नीचे आ रही है: T = 2π √[L / (g - a)] (आवर्तकाल बढ़ेगा)
- यदि लिफ्ट की डोरी टूट जाए (मुक्त रूप से गिरना,
a = g): T = ∞ (लोलक दोलन नहीं करेगा)