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किसी बहुपरमाण्विक आयन या अणु में किसी परमाणु पर औपचारिक आवेश की गणना निम्नलिखित सूत्र से की जाती है:
$$\text{Formal Charge (FC)} = V - L - \frac{1}{2}S$$
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1. धनायन का आकार: धनायन जितना छोटा होगा, ध्रुवण क्षमता उतनी ही अधिक होगी (सहसंयोजक गुण अधिक)।
2. ऋणायन का आकार: ऋणायन जितना बड़ा होगा, ध्रुवणता उतनी ही अधिक होगी (सहसंयोजक गुण अधिक)।
3. धनायन पर आवेश: आवेश जितना अधिक होगा, सहसंयोजक गुण उतना ही अधिक होगा।
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किसी ध्रुवीय अणु की ध्रुवीयता की माप को द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं।
$$\mu = q \times d$$
$$\text{प्रतिशत आयनिक गुण} = \left( \frac{\mu{\text{प्रयोगशाला}}}{\mu{\text{सैद्धांतिक}}} \right) \times 100$$
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अणु की आकृति केंद्रीय परमाणु के संयोजकता कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉन युग्मों (आबंधी एवं एकाकी) के बीच प्रतिकर्षण पर निर्भर करती है।
$$\text{Lone Pair - Lone Pair (lp-lp)} > \text{Lone Pair - Bond Pair (lp-bp)} > \text{Bond Pair - Bond Pair (bp-bp)}$$
#### अणुओं की आकृतियाँ:
| आबंधी युग्म (bp) | एकाकी युग्म (lp) | संकरण | ज्यामिति (Geometry) | आकृति (Shape) | उदाहरण |
| :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- |
| 2 | 0 | $sp$ | रेखीय (Linear) | रेखीय | $BeCl2, CO2$ |
| 3 | 0 | $sp^2$ | त्रिकोणीय समतलीय | त्रिकोणीय समतलीय | $BF_3$ |
| 2 | 1 | $sp^2$ | त्रिकोणीय समतलीय | मुड़ी हुई (V-समान/Bent) | $SO2, PbCl2$ |
| 4 | 0 | $sp^3$ | चतुष्फलकीय (Tetrahedral) | चतुष्फलकीय | $CH_4$ |
| 3 | 1 | $sp^3$ | चतुष्फलकीय | पिरामिडी (Pyramidal) | $NH_3$ |
| 2 | 2 | $sp^3$ | चतुष्फलकीय | मुड़ी हुई (V-समान/Bent) | $H_2O$ |
| 5 | 0 | $sp^3d$ | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | $PCl_5$ |
| 4 | 1 | $sp^3d$ | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | सी-सॉ (See-saw) | $SF_4$ |
| 3 | 2 | $sp^3d$ | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | T-आकृति | $ClF_3$ |
| 6 | 0 | $sp^3d^2$ | अष्टफलकीय (Octahedral) | अष्टफलकीय | $SF_6$ |
| 5 | 1 | $sp^3d^2$ | अष्टफलकीय | वर्ग पिरामिडी | $BrF_5$ |
| 4 | 2 | $sp^3d^2$ | अष्टफलकीय | वर्ग समतलीय | $XeF_4$ |
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केंद्रीय परमाणु की संकरण अवस्था (H) ज्ञात करने का सूत्र:
$$H = \frac{1}{2} [V + M - C + A]$$
H का मान और संकरण:
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> महत्वपूर्ण बिंदु:
> * एकल आबंध (Single Bond) = $1\sigma$
> * द्वि-आबंध (Double Bond) = $1\sigma + 1\pi$
> * त्रि-आबंध (Triple Bond) = $1\sigma + 2\pi$
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#### बंध क्रम (Bond Order):
$$\text{Bond Order (BO)} = \frac{1}{2} (Nb - Na)$$
#### महत्वपूर्ण निष्कर्ष:
1. यदि $Nb > Na$, तो $BO > 0$ $\rightarrow$ अणु स्थायी है।
2. यदि $Nb \leq Na$, तो $BO \leq 0$ $\rightarrow$ अणु असंतुलित है और अस्तित्व में नहीं होगा।
3. बंध लंबाई (Bond Length) $\propto \frac{1}{\text{Bond Order}}$
4. बंध ऊर्जा (Bond Energy) $\propto \text{Bond Order}$
#### इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का क्रम:
$$\sigma 1s < \sigma^ 1s < \sigma 2s < \sigma^ 2s < (\pi 2px = \pi 2py) < \sigma 2pz < (\pi^ 2px = \pi^ 2py) < \sigma^* 2pz$$
$$\sigma 1s < \sigma^ 1s < \sigma 2s < \sigma^ 2s < \sigma 2pz < (\pi 2px = \pi 2py) < (\pi^ 2px = \pi^ 2py) < \sigma^* 2pz$$
#### चुंबकीय गुण (Magnetic Property):
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जब हाइड्रोजन परमाणु किसी उच्च ऋणविद्युती परमाणु ($F, O, N$) से जुड़ा होता है, तो आबंध के इलेक्ट्रॉन ऋणविद्युती परमाणु की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जिससे H पर आंशिक धनावेश ($\delta+$) आ जाता है।
#### प्रकार:
1. अंन्तर-आण्विक H-आबंध (Intermolecular H-bond): दो अलग-अलग अणुओं के बीच बनने वाला आबंध।
2. अंतरा-आण्विक H-आबंध (Intramolecular H-bond): एक ही अणु के भीतर विभिन्न समूहों के बीच बनने वाला आबंध।